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मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति

मेरी उम्र ३० साल है और मेरी बीवी जूली २६ साल की है] हमारी शादी को २ साल हो गए हैं] अभी हमारे कोई बेबी नहीं है] मैं औसत कदकाठी का साधारण काम करने वाला इंसान हूँ जो समाज से बहुत डरता है और अपनी कोई बात जगजाहिर करना नहीं चाहता और सेक्स के मामले में भी साधारण ही हूँ]
मगर इसे अपनी किस्मत कहू या बदकिस्मती कि मेरी शादी एक बहुत सुंदर लड़की जूली से हो गई वो एक क़यामत ही है ५ फुट ५ इंच लम्बी, बिलकुल दूध जैसा सफ़ेद रंग जिसमे सिंदूर मिला हो और गजब के उसके अंग, मम्मे ३७ पतली कमर शायद २५ और खूब बहार को उठी हुई उसकी गांड ३८] उसकी गांड इतनी गद्देदार है कि अच्छो अच्छो का लंड पानी छोड़ देता है जिसे मैंने कई बार महसूस किया है, उसकी इसी गांड के कारण सुहागरात को मेरे लंड ने भी जवाब दे दिया था
पहले साल तक तो सब कुछ मुझे नॉर्मल ही लगा था और हमारा जीवन भी आम पति पत्नी जैसा ही बीता था] हाँ हमारा सेक्स सप्ताह मैं एक या दो बार ही होता था मगर उसने कभी शिकायत नहीं की] और न ही कभी वो डिमांड करती थी जब मेरा मन होता है तो वो खुद ही तैयार हो जाती है]
मेरे दोस्तों के साथ उसका हंसी मजाक या मेरे भाइयों के साथ उसकी छेड़छाड़ सब कुछ नॉर्मल ही लगता था मगर पिछले १ साल से सब कुछ बदल गया है जूली को मैं सीदीसादी समझता था मगर वो तो सेक्स की मूरत निकली] अब तो बस मैं उसको छिपकर उसकी हरकतों को देखता रहता हूँ न तो उससे कुछ कहता हूँ और न ही उसकी किसी बात का विरोध करता हूँ]
शायद यही सुंदर पत्नी रखने की सजा है]
दोस्तों शादी के बाद का १ साल तो ऐसे ही गुजर गया, या तो मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया जूली कि हरकतों पर या फिर वो भी सती सावित्री ही बनी रही]

असली कहानी १ साल बाद शुरू हुई जब मैंने उसकी १ हरकत को नोट किया]

अब वहीँ से मै आपको अपनी कहानी से अवगत कराता हूँ]

मेरा छोटा भाई देलही से आया हुआ है वो वहाँ इंजीनियरिंग केर रहा है २२ साल का गठीला जवान है, दोनों देवर भाभी में हंसी मजाक होता रहता है] पर वो जवानी ही लगता था मगर.

उस सुबह मै उठकर newspaper पढ़ते हुए चाय पी रहा था] तभी

जूली : सुनो जी, आप पेड़ों मै पानी डाल दो न मैं तब तक नास्ता तैयार केर लेती हूँ]

जूली ने गुलाबी सिल्की हाफ पजामी पहनी थी जो उसके घुटने तक ही थी वो उसके बदन से पूरी तरह कसी हुई थी] जिससे उसकी गांड बहार निकली हुई साफ़ दिख रही थी और इस पजामी में जब बो अंदर चड्डी नहीं पहनती थी तो उसकी चूत का आकार भी साफ़ दिखता था और पीछे से मुझे आज भी उसकी पजामी में कहीं कोई कच्छी का निशान नहीं दिख रहा था मतलब सामने से उसकी चूत गजब ढहा रही होगी]

मैंने १ दो बार उसको बोला भी है कि जान इस पजामी के अंदर कच्छी जरुर पहन लिया करो जब कोई और घर में आया हो मगर वो ऐसी बातों को नजरअंदाज़ कर देती थी मै भी ज्यादा नहीं टोकता था] ऊपर उसने एक सैंडो टॉप पहना था जो उसके विशाल मम्मो पर कसा था और उसके पेट पर नाभि तक ही आ रहा था उसकी पजामी और टॉप के बीच करीब ४ इंच सफ़ेद कमर दिख रही थी जो उसको बहुत सेक्सी बना रही थी]

फिलहाल में पौधों में पानी डालने बहार चला जाता हूँ] तभी मेरा छोटा भाई भी किचन में आ जाता है उसकी आवाज आती है]

विजय : लाओ भाभी मैं आपकी हेल्प करता हूँ] भैया कहाँ हैं]

पता नहीं क्यों मैं उन दोनों को देकने अंदर ही रुक जाता हूँ ऐसा पहली बार हुआ था, शायद जूली का वो सेक्सी रूप देख मैंने सोचा कि न जाने विजय को कैसा लगा होगा] क्या वो जूली को कुछ कहेगा]

मगर तभी विजय कि आवाज आती है]

विजय: क्या भाभी वहार क्या कर रहे हैं भैया, क्या आज सुबह सुबह उनको वाहर निकाल दिया]

जूली: चल पागल, वो पौधों में पानी डालने गए हैं]

विजय: वाओ मतलब आज सुबह ही मौका मिल गया] चलो तो इस पौधे मै पानी हम डाल देते हैं]

उसका ये वाक्य सुनते ही मेरा माथा ठनक गया ये क्या कह रहा है ये मैंने दरबाजे की आड़ लेते हुए किचन मै झाँका और मेरे सारे सपने धरासाई हो गए

विजय अपनी भाभी से पीछे से चिपका था और उसकी हाथ उसको आगे से बांधे हुए थे

जूली: हाथ हटा न पगले, तेरे भैया अभी आते ही होंगे और ये पौधा तो घर में ही है जब चाहे पानी डाल देना]

मैंने थोड़ा ओर आगे को होकर देखा तो, माय गॉड विजय का सीधा हाथ जूली के पजामी के अंदर था] मतलब वो उसकी चूत सहला रहा था, जो बिना किसी अवरोध के उसकी हथेली के नीचे थी]

विजय: क्या भाभी गजब माल लग रही हो आज, और आपकी चूत पर तो हाथ रखते ही मन करता है कि..

जूली: हाँ हाँ मुझे पता चल रहा है कि तुम्हारा क्या मन कर रहा है वो तो तुम्हारा ये मोटा लण्ड ही बता रहा है जो पजामी के साथ ही मेरी गांड में घुसा जा रहा है]

मै उसकी बातें सुन सॉकड था कि जूली ने कभी मेरे सामने इतना खुलकर ये शब्द नहीं बोले थे कभी कभी मेरे बहुत ज़ोर देने पर बोल देती थी मगर आज तो पराये मर्द के सामने रंडी कि तरह बोल रही थी.

तभी उसने पीछे हाथ कर विजय का लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया] विजय ने न जाने कब उसे अपने पजामे से बाहर निकाल लिया था वो अब जूली के हाथ में था] तभी जूली मेरी ओर घूमी तो मैंने देखा कि उसकी पजामी चूत से नीचे खिसकी हुई है अब उसकी नंगे सुतवाकार पेट के साथ उसकी छोटी सी चूत भी दिख रही है]

वो उसकी लण्ड को अपने हाथ से सहला उसकी पजामे में कर देती है और कहती है

जूली : इसको अभी आराम करने दो इस सबके लिए अभी बहुत समय मिलेगा]

मैं उनकी ये सब हरकतें देख चुपचाप वाहर आ जाता हूँ और सोचने लगता हु कि क्या करूँ]
अब मैं कुछ देर के लिए बाहर आकर अपना सर पकड़कर बैठ गया] कुछ पल तो मुझे लगा कि मेरी दुनिया पूरी लुट गई है मैं लगभग चेतना विहीन हो गया था जब अंदर से कुछ आवाजें आयीं तब मैं उठा और पौधों को सही करके पानी देने लगा]

पानी देते हुए अचानक अपने भाई विजय की बात दिमाग में गूंजने लगी और न जाने कैसे मैं सोचने लगा कि पौधे की जगह मेरी बीवी नंगी अपनी टाँगे फैलाये लेटी है और विजय अपने लण्ड को हिला हिला कर अपना पानी उसकी चूत में डाल रहा है]

और ये सब सोचते ही मेरा अपना लण्ड सर उठाने लगा जाने कैसा भाग है ये कि अभी दिमाग काम नहीं कर रहा था और अब लण्ड भी पुरे जोश में था]

अब मेरे सामने दो ही रास्ते थे कि या तो लड़ झगड़ कर सब कुछ ख़त्म कर लिया जाये या फिर खुद भी एन्जॉय करो और उसको भी करने दो]

मैंने दूसरा रास्ता चुना क्युकि मैं भी पाकसाफ नहीं था और सेक्स को मजे की तरह ही देखता था]

सबसे बड़ी बात तो यही थी कि जूली एक पत्नी के रूप में तो मेरा पूरा ख्याल रखती ही थी बाकि ये शायद उसकी अपनी इच्छाएं थी]

दोस्त मेरे मन में बस यही ख्याल आ रहा था कि ज़िंदगी बहुत छोटी है इसमें जो मिले उससे एन्जॉय केर लेना चाहिए]

कम से कम जूली मेरा ख्याल तो रख ही रही थी मेरी इनसल्ट तो नहीं कर रही थी] अब मेरे पीछे वो कुछ अपनी इच्छाओं को पूरा कर रही थी तो मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगा]

ये सब सोच मेरा मन बहुत हल्का हो गया, और अपना काम ख़त्म कर मैं अंदर आ गया]

अंदर सब कुछ नॉर्मल था] जूली किचन में वैसे ही काम कर रही थी और विजय बाथरूम में था]
करीब १० मिनट के बाद विजय नहाकर बाहर निकला, उसके कसरती वदन पर केवल कमर में एक पतला तौलिया बंधा था] जिसमें उसके लण्ड के आकार का आभास हो रहा था]

मैं अपने कपडे ले बाथरूम में चला जाता हूँ] जूली वैसे ही किचन में काम कर रही थी]

विजय: भैया क्या हुआ आज कुछ जल्दी ही है]

मैं : हाँ आज जरा जल्दी ऑफिस जाना है] जूली जल्दी नास्ता तैयार कर दो मैं बस नहाकर आता हूँ] मैं वहीँ से जूली को बोल देता हूँ]

जूली: ठीक है आप आइये, नास्ता तैयार ही है] विजय तुम भी जल्दी से आ जाओ सब साथ ही कर लेंगे]

विजय: ठीक है भाभी मैं तो तैयार ही हूँ ऐसे ही कर लूंगा]

मैंने बाथरूम में जाकर सॉवॅर ऑन किया और उन दोनों को देखने का सोचा]

बाथरूम की एक साइड की वाल में ऊपर की ओर छोटा रोशनदान है जो हवा के लिए खुला रहता है, वहाँ से किचन का कुछ भाग दिखता है और मैं उनकी बातें भी सुन सकता था]

मैंने पानी का ड्रम खिसकाकर रोशनदान के नीचे किया और उस पर चढ़कर किचन में देखने का प्रयास किया]

वहाँ से कुछ भाग ही दिख रहा था वरस्ते उनकी बातों की आवाज जरूर सुनाई दे रही थी]

विजय: भाभी क्या बनाया नास्ते में आज

जूली: सब कुछ तुम्हारी पसंद का ही है, ब्रेड सैंडविच और चाय या कॉफी जो तुम कहो]

विजय: आपको तो पता है मैं ये सब नहीं पीता मुझे तो दूध ही पसंद है]

जूली: हाँ हाँ मुझे पता है और वो भी तुम डायरेक्ट ही पीते हो

और दोनों के जोर से हसने की आवाज आती है

जूली: अरे क्या करते हो अभी मैंने मन किया था न उफ़ क्या कर रहे हो

मैंने बहुत कोशिश की दोनों को देखने की मगर कभी कभी जरा सा भाग ही दिख रहा था]

मगर ये निश्चित था कि विजय मेरी बीबी के दूध पी रहा था]

अब वो टॉप के ऊपर से पी रहा था या टॉप उठाकर ये मेरे लिए भी सस्पेन्स था]

मैं तो केवल उनकी आवाजें सुनकर ही excited हो रहा था]

जूली: ओह विजय क्या केर रहे हो प्लीज अभी मत करो देखो वो आते होंगे ओह नहीं आह क्या करते हो]
ओह विजय तुमने अंडरवियर भी नहीं पहना]

विजय: पुच puchh puchhhh सुपररररर सपररररर
अहाआआ भाभी कितने मस्त हैं आपके मम्मे
ओह्ह्ह भाभी ऐसे ही सहलाओ आहा कितना मस्त सहलाती हो आप लण्ड को आहाअ ओह्ह्ूओ पुच पुच

मैं रोशनदान से टंगा उनकी आवाजे सुन रहा था और सोच रहा था कि ये मेरे सामने ही कितना आगे बढ़ सकते हैं]

क्या आज ही मुझे इनकी चुदाई देखने को मिल जायेगी]

पता नहीं क्या होगा......
तभी मुझे विजय का अक्स दिखा वो कुछ पीछे को हुआ था]

ओह माय गॉड वो पूरा नंगा था, उसका टॉवेल उसके पैरों में था जिसे उसने अपने पैरों से पीछे को धकेला]

शायद उसी के लिए वो पीछे को हुआ होगा]

मुझे उसका लण्ड तो नहीं दिखा मगर मैं इतना मुर्ख भी नहीं था कि ये न समझ सकूँ कि इस स्थिति में उसका लण्ड ९० डिग्री पर खड़ा ही होगा]

अब सोचने वाली बात ये थी कि मेरे घर में रहते वो क्या करेगा]

वो फिर आगे को हो गया और मेरी नजरों से ओझल हो गया]

तभी फिर से आवाजे आने लगीं

जूली : तुम बिलकुल पागल हो विजय क्या करते हो, तुम्हारा लण्ड कितना tite हो रहा है]

विजय: हाँ भाभी अहा आज तो भैया के सामने ही ये तुम्हारी चूत में जाना चाहता है ओहूओ अहाह ह

जूली: नहीईईईइ विजय प्लीज ऐसा मत करो, मैं उनके सामने ऐसा नहीं कर सकती]

मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ] अहाआआ विजय हा हा ओह मत करो न तुम बहुत बदमाश हो गए हो]

अहा क्या करते हो प्लीज तुम्हारा लण्ड तो आज मेरी पजामी ही फाड़ देगा अहाआआआ नहीईईईई

विजय: पुच पुछ्ह्ह्ह्ह अहहहआआ आज नहीं छोडूंगा] ओहूऊओ लाओ इसको हटा दो]

जूली: नहीईईईइ विजय क्या करते हो, पगला गए हो, देखो वो आते ही होंगे, मान जाओ ना प्लीज

ह्ह्हाआ ओहूऊऊओ

विजय: वॉउ भाभी क्या मस्त चूत है आपकी बिलकुल छोटी बच्ची कि तरह कितनी चिकनी और छोटी सी
दिल करता है खा जाउ इसको

वाकई जूली कि चूत बहुत खूबसूरत थी उसके छोटे छोटे होंट ऐसे आपस में चिपके रहते थे जैसे १०-१२ साल कि बच्ची के...

और चूत का रंग गुलाबी था जो उसकी गदराई सफ़ेद जांघों में जान डाल देता था]

उसकी चूत बहुत गरम थी और उसके होंटों को खोल जब लाली दिखती तो मुझे पक्का यकीन था कि बुड्ढों तक का लण्ड पानी छोड़ दे]

मगर इस समय वो चूत मेरे छोटे भाई विजय के हाथ में थी]

पता नहीं वो नालायक उसको कैसे छेड़ रहा होगा]

अब फिर से भयंकर आवाजे आने लगीं]

जूली: ह्हाआआअ आआआअ ओहूऊऊओ विजय नहीईईईइ प्लीजज्ज्ज्ज्ज्ज़ नहीईईईईईई

विजय : भाभीइइइइइइइ बस जरा सा झुक जाओ]

जूली: वो आते होंगे तुम मानोगे नहीं]

विजय: भाभी, भैया अभी नहा ही रहे हैं सॉवॅर कि आवाज आ रही है उनके आने से पहले हो जायेगा] बस जरा सा आहआआआ

जूली: ओहूऊऊओ क्या करते हो ओहूऊऊ वहाँ नहीं विजय आहआआआआआ आआआआआ सूखा ही आआआ तुम तो मार ही दोगे]

पागल मैंने कितनी बार कहा है गांड में डालने से पहले कुछ चिकना लगा लो]

विजय: मैंने थूक लगाया था न और आपकी चूत का पानी भी लगाया था अहाआआआ क्या छेद है भाभी मजा आ गया]

जूली: चल पहले मलाई लगा,

अरे क्या करता है सब दूध ख़राब कर दिया, हाथ से लेकर लगा न,

लण्ड ही दूध में डाल दिया तू तो वाकई पगला गया है]

विजय: जल्दी करो भाभी जब लण्ड पि सकती हो तो क्या लण्ड से डूबा दूध नहीं अहा जल्दी करो

जूली: अहाआआआआ धीरे पागल ह्हाआआअ
ह्हाआआअ ओहूऊऊऊ
१० मिनट तक उनकी आवाजें आती रहीं, दोस्तों झूट नहीं बोलूंगा मैंने भी नहाने के लिए अपने कपडे निकाल दिए थे]

और इस समय पूरा नंगा ही उन दोनों को सुन रहा था मेरा लण्ड भी पूरा खड़ा था और मैं उसको मुठिया रहा था]

जूली: अहा हाआआआ विजय बहुत जवर्दस्त है तुम्हारा लण्ड अहाआआ क्या मस्त छोड़ते हो अहा बस करो न अब ऐईईईइ

विजय: आआआआआआआ ह्हह्हह्हह्ह
बस हो गया भाभी आआआह्ह्ह्ह्ह्हा

जूली: ओहूऊऊऊ क्या कर रहे हो सब गन्दा कर दिया उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़

तभी विजय पूरा नंगा अपना टॉवेल उठा बाहर को आ गया]

उसका लण्ड अभी भी तना था और पूरा लाल दिख रहा था]

और फिर जूली भी बाहर आई, माय गॉड क्या लग रही थी]

उसका टॉप बिलकुल ऊपर था उसकी दोनों चूची बाहर निकली थी जिन पर लाल निसान दिख रहे थे]

ऊपर तनी हुई सफ़ेद चूची पर गुलाबी निप्पल चूसे और मसले जाने कि कहानी साफ़ कह रहे थे]

उसकी ब्रा एक और को लटकी थी उसकी शायद तक एक फीता टूट गया था]

और नीचे तो पूरा धमाकेदार दृश्य था उसकी पजामी उसके पंजों में थी]

और वो पजामी के साथ ही पैरों को खोलकर चल रही थी]

उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा मन उसमे अपना लण्ड एक झटके में डालने को कर रहा था]

किचन से बाहर आ उसने टॉवेल ले मेरी और पीठ कर साफ करने लगी]

उसकी कमर से लेकर चुतड़ों तक विजय का वीर्य फैला था] वो जल्दी जल्दी साफ़ करते हुए बाथरूम कि ओर भी देख रही थी]

उसकी इस स्थिति को देखते हुए मेरे लण्ड ने भी पानी छोड़ दिया]

अब मैं नीचे उतर बिना नहाये केवल हाथ मुह धोकर ही बाहर आ गया]

हाँ थोड़े से बाल जरूर भिगो लिए जिससे नहाया हुआ लगूं]

बाहर सब कुछ नॉर्मल था जूली फिर से किचन में थी और विजय शायद अपने कमरे में था]

हाँ बाहर एक कुर्सी पर जूली कि ब्रा जरुर पड़ी थी]

जो उनकी कहानी वयां कर रही थी]

वो कितना भी छुपाएँ पर जूली ब्रा को बाहर ही भूल गई थी]

मैंने उससे थोडा मस्ती करने कि सोची और

जूली क्या हुआ तुम्हारी ब्रा कहाँ गई]

मगर बहुत चालाक हो गई थी वो अब

कहते हैं न कि जब ऐसा वैसा कोई काम किया जाता है तो चालाकी अपने आप आ जाती है]

वो तुरंत बोली अरे काम करते हुए तनी टूट गई तो निकाल दी]

मैंने फिर उसको सताया कौन सा काम बेबी

वो अब भी नॉर्मल थी
जूली : अरे ऊपर स्लैप से सामान उतारते हुए जान

मैं अब कुछ नहीं कह सकता था हाँ उसके चूसे हुए होंटो को एक बार चूमा और अपने कमरे में आ गया]

तो ये था मेरा पहला कड़वा या मीठा अनुभव, कि मेरी प्यारी जान कैसे मेरे भाई से चुदवाई]

हाँ एक अफ़सोस जरुर था कि में उसको देख नहीं पाया

मगर फिर भी सब कुछ लाइव ही था]
मैं तैयार होकर बाहर आया, नास्ता लग चुका था]

विजय भी तैयार हो गया था]

मैं : विजय आज कहाँ जाना है मैं छोड़ दूँ]

विजय: नहीं भैया कहीं नहीं आज आराम ही करूँगा, आज रात कि गाड़ी से तो वापसी है]

मैं: हाँ आज तो तुझको जाना ही है कुछ दिन और रुक जाता]

विजय: आउंगा न भैया अगली छुट्टी मिलते ही यहीं आउंगा] अब तो आप लोगो के बिना मन ही नहीं लगेगा]

कह मेरे से रहा था जबकि देख जुली को रहा था]

फिर जूली ने ही कहा सुनो मुझे जरा बाज़ार जाना है कुछ कपडे लेने हैं]

मैं : यार मेरे पास तो टाइम ही नहीं है तुम विजय के साथ चली जाना]

जूली: ठीक है कुछ पैसे दे जाना]

मैं : ठीक है क्या लेना है, कितने दे दूँ]

जूली: अब दो तीन जोड़ी तो अंडरगार्मेन्ट्स ही लाने हैं १ तो अभी ही टूट गई अब कोई बची ही नहीं] थोड़े ज्यादा ही दे देना]

वो मुस्कुराते हुए विजय को ही देख रही थी] पहले तो मैं कोई ध्यान नहीं देता था मगर अब उन दोनों की ये बाते सुन सब समझ रहा था]

जूली: अच्छा ५००० दे देना अब की बार अच्छी और महंगे वाले चड्डी ब्रा लाऊंगी]

वो बिना शरमाये अपने कपड़ो के नाम बोल रही थी]

मैं : ठीक है जान ज़रा अच्छे लाना और पहन भी लिया करना]

विजय: हा हा हा भैया ठीक कहा आपने] हाँ भाभी ऐसे लाना जिनको पहन भी लो आपको तो पता नहीं ऐसे कपड़ो में दूसरों को कितनी परेशानी होती होगी]

जूली: अच्छा बच्चू (उसके कान पकड़ते हुए) बहुत बड़ा हो गया है तू अब] ऐसी नजर रखता है अपनी भाभी पर
बेटा सोच साफ़ होनी चाहिए कपड़ो से कोई फर्क नहीं पड़ता]

विजय: हाँ भाभी आपने ठीक कहा मैंने तो मजाक किया था]

मैं : उन दोनों की नोकझोंक सुनकर मुस्कुरा रहा था कुछ बोला नहीं बस सोच रहा था कि कैसे इन दोनों कि आज कि हरकतें देखि जाएँ]

ये अब घर पर तो सम्भव नहीं था]

तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया मैंने जूली के पर्स में रु० रखते हुए सोचा]

उसका ये पर्स मेरी समस्या कुछ हद तक दूर कर सकता है]

मैंने कुछ समय पहले एक voice recorder लिया था जो एक पेन कि शेप में था]

मैंने उसको ऑन कर जूली के पर्स में नीचे की ओर डाल दिया]

उसकी छमता लगभग ८ घंटे की थी अब जो कुछ भी होगा, कम से कम उनकी आवाजें तो रिकॉर्ड हो ही जाएंगी]

मैंने ये पहले भी चेक किया था जबर्दस्त पॉवर वाला था और १०० मीटर की रेंज की आवाजें रिकॉर्ड कर लेता था]

अब मैं निश्चिंत हो सब को बाय कर ऑफिस के लिए निकल गया]

अब देखते हैं क्या होता है पूरे दिन...
मैं शाम ७ बजे वापस आया घर का माहौल थोडा शांत था] जूली कुछ पैक कर रही थी] विजय अपने कमरे में था]

मैं भी अपने कमरे में जाकर चेंज करता हूँ तभी मुझे जूली का पर्स दिखता है]

मैं तुरंत उसे खोलकर voice recorder निकाल लेता हूँ वो अपने आप ऑफ हो गया था]

मुझे ३-४ बिल दिखते हैं मैं उनको चेक करता हूँ जूली ने काफी शॉपिंग की थी]

उसकी २ लिंगेरी, कुछ कॉस्मेटिक और विजय की
टी-शर्ट, नेकर और अंडरवियर भी था]

जनरली मैं कभी ये सब नहीं देखता था इसलिए जूली की सब हरकतें आसानी से दिख रही थी]

अब मेरा दिल उनकी सभी बातें जान्ने का था आज तो उनके बीच बहुत कुछ हुआ होगा]

मगर ये सब अभी सम्भव नहीं था मैंने पेन से चिप निकाल कर अपने पर्स में रख ली सोचा बाद में सुन लूंगा]

वाहर विजय जूली को मना रहा था मत उदास हो भाभी, फिर जल्दी ही आउंगा]

ओह जूली इसलिए उदास थी मैंने भी उसको हसाने की कोशिश की मगर वो नॉर्मल ही रही]

मैं : विजय कितने बजे की ट्रैन है तेरी

विजय: भैया ८:५० की है मैं ८ बजे ही निकल जाऊँगा

मैं : पागल है क्या मैं छोड़ दूंगा आराम से चलेंगे]
चल खाना खा लेते हैं]

विजय: आप क्यों परेसान होते हो भैया मैं चला जाऊँगा]

मैं : नहीं, तुझसे कहा न] जूली तुम भ आओगी क्या]

जूली: नहीं मुझे अभी बहुत काम है और मैं इसको जाते नहीं देख पाउंगी इसलिए तुम ही जाओ]

मैं मन ही मन मुस्कुरा उठा, ओह इतना प्यार

और तभी मन में एक कोतुहल भी जागा कि विजय को छोड़ने के बाद मेरे पास इन दोनों की बात सुनने का समय होगा]

और हम जल्दी जल्दी खाना खाने लगे]

मैंने बाथरूम में जा चिप अपने फ़ोन में लगा ली और रिकॉर्डिंग चेक की]

थैंक्स गॉड सब कुछ ठीक था और बहुत कुछ उसमे लग रहा था]

फिर सब कुछ जल्दी ही हो गया और हम जाने के लिए तैयार हो हो गए]

मैं बाहर गाड़ी निकालने आ गया विजय अपनी भाभी को अच्छी तरह मिलकर १० मिनट बाद बाहर आया]

मैं : क्या हुआ बड़ी देर लगा दी]

विजय: हाँ भैया, भाभी रोने लगी थीं]

मैं: हाँ वो तो पागल है सभी को दिल से चाहती है]

विजय: हाँ भैया, भाभी बहुत अच्छी हैं उनका बहुत ख्याल रखना]

मैं : अच्छा बच्चू अभी तक कौन रख रहा था]

विजय: नहीं भैया मेरा ये मतलब नहीं था] आप काम में बिजी रहते हो न तभी कह रहा था]

मैं: हाँ वो तो है चल अच्छा अपना ध्यान रखना और किसी चीज की जरुरत हो तो बता देना]

विजय: हाँ भैया आपसे नहीं तो किस्से कहूंगा]

मुझे उसके जाने की ना जाने क्यों बहुत जल्दी थीं मैं आप लोगों की तरह उस टेप को सुन्ना चाह रहा था]

और कुछ ही देर मैं विजय की ट्रैन चली गई मैं जल्दी से गाड़ी में आकर वैठ गया और फ़ोन निकाल कर रिकॉर्डिंग ऑन की ....
विजय: आहा भाभी मजा आ गया, तुम बहुत हॉट हो जानम, तुम्हारी इस चूत को चोदकर मेरे लण्ड को पूरा करार मिल जाता है]

जूली: हाँ लाला तुमने भी मेरी जिंदगी में पूरे रंग भर दिए हैं] तुम्हारे भैया तो बेडरूम और बिस्तर के अलावा मुझे कहीं हाथ भी नहीं लगाते, अहा और तुमने इस घर में हर जगह मुझे चोदा है] मैं निहाल हो गई तुम्हारी चुदाई पर]

विजय: हाँ भाभी चुदाई का मजा तो जगह और तरीके बदल बदल कर करने में ही आता है]

जूली: सही कहा तुमने आज यहाँ बाथरूम में मजा आ गया]

विजय: अच्छा और कल जब बालकोनी मई किया था]

जूली: धत्त पागल वो तो मैं बहुत डर गई थी] लेकिन सच बोलू तो बहुत मजा आया था] सूरज की रोशनी में खुले में, ना जाने किस किसने देखा होगा]

विजय : अरे भाभी वही तो मजा है और आपने देखा नहीं कल आपकी चूत सबसे ज्यादा गरम थी और कितना पानी छोड़ रही थी]

जूली: हाँ हाँ चल अब तेरी सारी इच्छा पूरी हो गई न, बेडरूम से लेकर बाथरूम, बालकोनी, किचन सब जगह तूने अपने मन की कर ली ना, और मुझे ये गन्दी भाषा भी सिखा दी, अब तो तू खुश है ना]

विजय: अभी कहाँ मेरी जान अभी तो दिल में सैकड़ों अरमान हैं आप तो बस देखती जाओ हा हा हा

जूली: तू पूरा पागल है चल अब हट्ट

ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्न

जूली: अरे कौन आया इस वक्त.....

विजय: लगता है कूरियर वाला है]

जूली: जा तू ले ले तोलिया बांध लेना कमर में या होने इसी पेन से साइन करेगा] हा हा हा हा हा

विजय: हे हे हंसों मत भाभी आज आपको एक ओर मजा कराता हूँ] जाओ कूरियर आप लो बहुत मजा आएगा]

जूली: पागल है क्या मुझे कपडे पहनने में आधा घंटा लग जायेगा, जल्दी जा न तू ले ले]

ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्न

विजय: नहीं भाभी देखो न बहुत मजा आएगा तुमको कपडे नहीं पहनने ऐसे ही लेना है कूरियर]

जूली: हट्ट पागल मारूंगी तुझे नंगी जाउंगी मैं उस आदमी के सामने, कभी नहीं करुँगी मैं ऐसा तू तो पूरा पगला गया है] हाए राम क्या हो गया है तुझको, मुझे क्या समझा है तूने]

विजय: पुच पुच, तुम तो मेरी जान हो अगर मुझ पर विस्वास है और मुझसे जरा भी प्यार है तो आज सारी बात आप मानोगी] चलो जल्दी करो]

जूली: अरे बुद्धू कैसे वो पागल हो जायेगा]

ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्न

जूली: कौन, कौन है भाई

....: कूरियर है भाभी

जूली: रुको भैया अभी आती हूँ मैं नहा रहीं हूँ]
हाँ अब बोल कैसे जाऊं....

विजय: लो ये टॉवेल ऐसे बाँध लो जैसे बांधती हो अपनी चूची से और गीली तो हो ही, वो यही समझेगा कि नहाते हुए आई हो]
और घबराती क्यों हो वो कौन का किसी से कहेगा उसकी तो आज किस्मत खुल जायेगी]

जूली: तू वाकई पूरा पागल है मरवाएगा तू आज, मैं पूरा दिन अकेली ही रहती हूँ अगर किसी दिन चढ़ आया न वो तो मैं क्या करुँगी]

विजय: अरे कुछ नहीं होगा तुम देखना कितना मजा आएगा और आपको एक बार उसके सामने ये टॉवेल सरका देना फिर देखना मजा]

जूली: पागल है धत्त मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी] चल हट अब तू]

ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्न

जूली: आई भैया .......

दरवाजा खुलने कि आवाज ...
जूली: ओह आप क्या था भैया? सॉरी देर हो गई वो क्या था की मैं नहा रही थी न.........

अजनवी: कोई बात नहीं मैडम जी, आपका कूरियर है] लीजिये यहाँ साइन कर दीजिये.....

जूली: ओह.. कहाँ ....अच्छा..... क्या है इसमें..

अजनवी: पता नहीं मैडम... मुम्बई से आया है]

जूली: ओह बहुत भारी है आहआआआ आईईईईईईईईईईई उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ पकड़िये प्ल्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श्श प्लीज ये क्या हुआअ

अजनवी: वोव्वव्वव्व मेमश्ाााााबबबबबबब
हाँह्हह्हह्हह्ह लाईईईई ये अहाआआआअ

जूली: सॉरी भाईसाब न जाने कैसे खुल गई] कृपिया आप अंदर रख दीजिये]...

.............खट खट बस कुछ आवाजें

अजनबी: अच्छा मेमसाब चलता हूँ] आपका शुक्रिया एक बात कहूँ मेमसाब आप बहुत सुन्दर हैं अब किसी ओर के सामने ऐसे दरवाजा मत खोलना]

जूली: सॉरी भैया, किसी और से मत कहना]

अजनबी: ठीक है मेमसाब ....

दरवाजा बंद होने आवाज ..
जूली: हा हा हा हा माय गॉड, ये क्या हो गया ....

विजय: हाहाहाहाहाहाहाहा होहोहोहो मजा आ गया भाभी क्या सीन था, गजब, आज तो उसका दिन सफल हो गया ....

जूली: हो हो हो हो हे हे रुक अभी कितना मजा आयायया वाह रुक अभी हा हा हा हा पेट दर्द करने लगा

विजय: हाँ भाभी देखा आपने उसका पेंट कितना फूल गया था .... बेचारा कुछ कर भी नहीं पाया.. कैसे भूखे की तरह घूर रहा था ....

विजय: वाह भाभी आपने तो कमाल कर दिया, मैंने तो केवल ये चूची दिखाने को कहा था] और आपने तो उसको पूरा जलवा दिखा दिया]

माय गॉड देखो यहाँ मेरे लण्ड का क्या हाल हो गया] उस बेचारे का तो क्या हुआ होगा]

जूली: हहहहः

विजय: जैसे ही आपका तोलिया गिरा मैं तो चोंक ही गया था....मैं तो डर गया कि कहीं आप पैकेट ना गिरा दो] पर आपने किस अदा से उसको पैकेट पकड़ाया]
वाह भाभी मान गया आपको...

जूली: हे हे हे हे चल पागल वो तो अपने आप हो गया] मैंने नहीं किया टॉवेल खुद खुल गया...

विजय: जो भी हुआ पर बहुत गरम हुआ] जो मै सोचता था वैसे ही हुआ.........

विजय: कैसे फटी आँखों से वो आपकी चूत घूर रहा था.. और आपने भी उसको सब खुलकर दिखाई...

जूली: धत्त मैंने कुछ नहीं दिखाया... चल हट मुझे शर्म आ रही है...

विजय: हाए हाए मेरी जान अब शर्म आ रही है.. मुझे तो मजा आ गया]

जूली: अच्छा बता न वो क्या क्या देख रहा था]

विजय: हाँ भाभी आपसे पैकेट लेते हुए उसकी नजर आपकी हिमालय कि तरह उठी इन चूची पर थी] आप जब बैठकर टॉवेल उठा रही थीं, तब वो बिना पलक झपकाए आपकी इस चिकनी मुनिया को घूर रहा था जो शायद अपने होंट खोले उसको चिढ़ा रही थी] और तो और फिर आप उसकी तरफ पीठ कर जब टॉवेल बांधने लगीं तो जनाब ने आपके इन सेक्सी चूतड़ को भी ताड़ लिया]

मैं तो सोच सोच कर मरा जा रहा हूँ कि क्या हुआ होगा बेचारे का...

जूली: हा हा एक बात बताऊँ, पैकेट लेते हुए उसके दोनों हाथो की रगड़ मेरे इन पर थी] मैं तो सही में घबरा गई थी]

विजय: वाओ भाभी चुचियों को भी रगड़वा लिया, फिर तो गया वो

जूली: तुम सही कह रहे थे वाकई बहुत मजा आया]

विजय: मैं तो आपसे कहता ही हूँ भाभी जरा सा जीवन है खूब मजा किया करो]

जूली: अच्छा चल अब तैयार हो जा, ओह अब मत छेड़ न इसको] चल बाजार चलते हैं] बाहर में ही कुछ खा लेंगे] मुझे शॉपिंग भी करनी है]

विजय: ठीक है भाभी पर एक शर्त है]

जूली: अब क्या है, बाजार भी नंगी चलूँ क्या...

विजय: नहीं भाभी, ये इंडिया है, काश ऐसा हो सकता] पर आप स्कर्ट पहन कर चलो]

जूली: अरे वो तो मैंने वही निकली है देख ये स्कर्ट पहन कर ही चलूंगी]

विजय: वाओ भाभी बहुत सेक्सी लगोगी] पर प्लीज इसके नीचे कुछ मत पहनना, मतलब कच्छी ब्रा आदि

जूली: अब फिर तू पगला गया है] ब्रा तो पहले भी कई बार नहीं पहनी है मगर कच्छी भी नहीं] बहुत अजीब लगेगा]

विजय: प्लीज भाभी

जूली: ओके बेबी पर ये स्कर्ट कुछ छोटा है ऐसा करती हूँ लॉन्ग स्कर्ट पहन लेती हूँ]

विजय: नहीं भाभी यही प्लीज]

जूली: ओके बेबी अब पीछे से तो हट जब देखो कहीं न कहीं घुसाता रहेगा] अब इसको बाज़ार में जरा संभाल कर रखना ओके

विजय: भाभी यही तो कंट्रोल में नहीं रहता, अब तो खुला रास्ता है बस स्कर्ट उठाई और अंदर हाहाहाहा

जूली: अच्छा जी तो यह तेरा प्लान है, मारूंगी हाँ देख ऐसा कुछ बाज़ार में मत करना] कभी मुझे सबके सामने रुसवा कर दे]

विजय: अरे नहीं भाभी आप तो मेरी सबसे प्यारी भाभी हो ].......

जूली: अच्छा चल अब जल्दी कर.....

ओके .....
दोस्तों में खुश था रिकॉर्डर जूली के साथ था मगर अगले ३ घंटे सही रिकॉर्ड नहीं हुए] यहीं आकर यह आधुनिक यंत्र भी फ़ैल हो जाते हैं]

इतनी मिक्स आवाजें थी कि कुछ सही से समझ नहीं आ रहा था]

मगर उसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि मुझे काफी कुछ पता चल गया]

घर से निकलने के बाद विजय के बाइक स्टार्ट करने की आवाज]

जब वो आता था तो मेरी बाइक वो ही यूज़ करता था...

विजय: आओ बेठो मेरी जान मेरी प्रेमिका की तरह

जूली: अच्छा जी, अपने भैया के सामने बोलना.. हे हे

विजय: ओह क्या भाभी ओल्ड फैशन, दोनों और पैर करके चिपक कर बैठो ना]

जूली: हाँ हाँ मुझे पता है पर पहले कालोनी से बाहर लेकर चल फिर वैसे भी बैठ जाउंगी]
और आज कैसे यार पैर खोलकर बैठूंगी तो स्कर्ट उड़ेगी, फिर तो सब क्या क्या देखेंगे]

विजय: क्या देखेंगे हो हो ...

जूली: मारूंगी कमीने, तेरे कहने से ही मैंने कच्छी नहीं पहनी, और अब सबको दिखाना भी चाहता है]

विजय: वही तो मेरी जान देखना आज बाज़ार में आग लगने वाली है] और आप तो बस मजे लो]

जूली: हाँ हाँ मुझे पता है मजे कौन ले रहा है]

...........

.......

जूली: अच्छा अब रोक वैसे ही बैठती हूँ]

..............

विजय: बिलकुल चिपक जाओ जान,

जूली: और कितना चिपकू, चूत में तेरे जीन्स का कपडा तक चुभ रहा है]

विजय: अह हा हा हाहाहाहा

.................
..........................

विजय: उधर देखो भाभी, वो कैसे देख रहा है]

जूली: हट मै नहीं देखती .....देखने दे उसको जो देख रहा है]

विजय: बहुत देर से पीछे चल रहा है]

जूली: मुझे पता है मेरे चूतड़ देखकर पहले इशारा भी कर रहा था]

विजय: अच्छा कौन सा]

जूली: फ़क का और कौन सा, मै कह ही रही थी तू मुझे रुस्वा करवाएगा]
इतनी तेज चला रहा है स्कर्ट पूरी ऊपर हो जा रही है सोच उसको कितने मजे आ रहे होंगे. थोड़ी धीरे कर न

विजय: लो भाभी....

चटअआआताआआआअक्क्क्क्क्क्क

जूली: आआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआअ

विजय: क्या हुआ भाभी .......

जूली: हरामी, साला तू पकड़ न उसको , मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार कर भाग गया] उनून्न्न्नन्न पुरे लाल हो गए]

विजय: हाहाहाहा ह्हह्हाहह देखा इसलिए मैं तेज चला रहा था ..... हा हाहाहा

जूली: अब तू हंसा तो पिटेगा]

विजय: लाओ दिखाओ भाभी मैं सेहला देता हूँ]

जूली: रहने दे तू बस अब चला....

............

.....................

जूली: चल अब यही रोक दे...

............

..............

विजय: क्या हुआ...

जूली: देख उसको कैसे घूर रहा है इसने मुझे उतरते हुए देख लिया था] जब मेरा पैर ऊपर था तो कमीना चूत में ही घुसा था]

विजय: हा हा क्या बात है भाभी तुम्हारे मुह से ऐसी बातें सुन मजा आ गया]

जूली: हाँ हाँ बहुत सुन ली मैंने तेरी अब सबसे पहले तो कच्छी खरीदकर वही पहनती हूँ] बहुत देख ली सबने अब बस]

विजय: नो भाभी, यह चीटिंग है आज तो आप ऐसे ही रहोगी, और डरती क्यों हो मैं हु न]

जूली: हाँ हाँ मुझे पता है तू कितना है आज मेरा रेप करा कर रहेगा] अगर इनके किसी दोस्त ने देख लिया न तो सब हो जाएगा]

विजय: अरे कुछ नहीं होगा भाभी देखना वो भी आपका दीवाना हो जायेगा....

जूली: हाँ हाँ तू तो बहुत कुछ जानता है चल अब
जूली : विजय आ उस दुकान पे चल]

विजय: नहीं भाभी ये वाली ज्यादा सही है मैंने जो आपको गिफ्ट दी थीं वो यहीं से ली थीं]

जूली: अरे इसमें तो केवल लड़के ही लड़के हैं, क्या इन सबके सामने मैं ब्रा, चड्डी लूंगी]

विजय: क्या भाभी, इतनी बोल्ड तो हो आप] और अब ये दकियानूसी बातें] अरे खुद ही तो ज़िंदगी का मजा लेने की बात करती हो]

अब देखो इनके पास से लेने में आपको बेस्ट चीज़ मिलेगी, और बहुत सही रेट में, आपको मजा अलग आएगा, आज देख लेना आप

जूली: ओह, अच्छा मेरे राजा, ठीक है चल फिर मगर मेरी स्कर्ट के साथ कुछ शरारत मत करना]

विजय: अरे स्कर्ट के साथ कौन कमवख्त कुछ करना चाहता है वही सुसरी मेरे काम की चीज पर पर्दा डाले है] हा हा हा हा ....

जूली: हे हे हे हे ...ओह यहाँ तो और भी लड़कियां हैं मैं तो समझ रही थी कि यहाँ कौन आता होगा]

विजय: और वो देखो भाभी कैसे चेक भी कर रही है]

जूली: हाँ हाँ मगर जीन्स के ऊपर ना] मुझसे मत कहना चेक करने को हा हा ...

विजय: वाओ भाभी मजा आ जायेगा जब तुम चेक करोगी तो....
तुम्हारी नंगी चूत और चूतड़ देख ये सब तो..... हाए मैं मर गया...

जूली: छि .... चल अब .....

१ लड़का : क्या दिखाऊं मेडमजी

जूली: कुछ मॉडर्न अंडरगार्मेन्ट्स

.............

जूली: हाँ वो वाला....

लड़का: मैडमजी साइज़ क्या है आपका

विजय: कैसे सेलसमैन हो यार तुम, तुम लोगों को तो देखते ही पता चल जाना चाहिए]

लड़का: वूऊऊ हाँ सहाब, ऊपर का तो देख दिया है ना ३६ c है, हैं ना मेमसाब, मगर चड्डी का तो स्कर्ट से पता नहीं चलता, हाँ मैडम स्लैक्स या जीन्स में होतीं तो मैं बता देता] वैसे भी आजकल चड्डी का तो कुछ पता ही नहीं, कई तरह की हैं, सब जगह का नाप पता हो तो बेस्ट मिल पाती है]

विजय: सब जगह मतलब...

लड़का: मतलब साहब पहले केवल हिप और कमर के नाप से ही ली जाती थी] मगर अब तो जांघो की गोलाई, कमर से नीचे तक की लम्बाई और अगर आगे वाली की सही माप पता हो तो आप अपने लिए सबसे बेस्ट चड्डी ले सकते हैं]

विजय: आगे वाली से क्या मतलब है तुम्हारा... क्या चूत का भी नाप होता है]

लड़का: क्या सहाब आप भी... दीदी के सामने कैसा नाम बोलते हो]

विजय: अरे इसमें शर्मा क्यों रहा है तू कुछ और वोलता है क्या अब चूत को चूत ही तो कहेंगे, उसका क्या नाप होता है...

लड़का: अरे सहाब अब तो कई तरह को टोंग और स्टेप चड्डी आ गईं हैं ना... उसके लिए वोव् वोव्व् व् वो चूत का सही नाप पता हो तो ही बस्ट मिलती है...

विजय: हा हा हा हा कितना शरमा रहा है चूत कहने में, तेरा मतलब है उसकी भी लम्बाई, चौड़ाई] यार हमारी बीवी कि तो बॉट छोटी सी है... हा हा हा हा

धपपपपपपपपपप

विजय: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ क्या करती हो जान सबके सामने मारती क्यों हो .....

लड़का: हा हा हा ह सहाब आप बहुत मजाकिया हो ...मजा आ गया आपसे मिलकर....

लड़का:वैसे मेमसाब नाप सही हो तो ब्रा, चड्डी ऐसी मिलेंगी कि उनको पहनकर ऐसा लगेगा कि वो आपके शारीर का ही एक भाग हो]

जूली: क्या बात है भैया, आपने तो बहुत अच्छी बातें बताईं] हम तो बिना कुछ सोचे जल्दी से ही ये कपडे ले लेते थे]

लड़का: यही तो मैडम जी, जो कपडा आपके अंगों से सबसे ज्यादा पास और सबसे ज्यादा समय के लिए रहता है] उसी को लेने में लापरवाही कभी नहीं करना चाहिए] वो तो बेस्ट होना चाहिए]

विजय: तुम ठीक कहते हो भाई, अब तुम अच्छे से नाप लेकर, मेरी बीवी के लिए बेस्ट ही १०-१२ सेट दो]
मैं चाहता हु मेरी बीवी बेस्ट दिखे]

जूली: भैया अभी तो माप है नहीं, हम ऐसा करते हैं कल आपके पास सही नाप लेकर आ जायेंगे]

विजय: क्या करती हो जान, अभी तो तुम्हारे पास कुछ नहीं है] कुछ सेट तो ले लो न.... और जितना अच्छा नाप ये ले सकते हैं वो तुम कैसे लोगी....

जूली: अरे समझ ना, अभी कैसे....

विजय: अरे इनके पास चेंजिंग रूम तो होगा ना.... फिर नाप ही तो लेना है और तुम हो ही, चलो अभी निपटा दो काम जल्दी, फिर पता नहीं मुझे समय मिले या नहीं....

जूली: पर ..................र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र

विजय: कुछ नहीईइ, भैया आप नाप लेकर हमको बेस्ट ब्रा, चड्डी दे दो....

लड़का: ठीक है साहब, पर हमारे यहाँ चेंजिंग रूम तो नहीं है, हाँ इस परदे के पीछे हम लोग खाना आदि खाते हैं यहीं आ जाईये, वैसे भी हमारी शॉप पर लेडीज ही आती हैं, इसलिए कोई डर नहीं है...

विजय: ओके भाई......

लड़का: आप चलिए अन्दर मैं फीता लेकर आता हूँ...

.........

......................

जूली: तू क्या कर रहा है पगले....अब क्या इसके सामने मुझे नंगी दिखायेगा....

विजय: कुछ नहीं होगा भाभी, जरा सोचो, आपकी नंगी चूत देख उसका क्या हाल होगा] और जब उसकी उँगलियाँ आपकी चूत पर चलेंगी तो मजा आ जायगा...

जूली: तू तो पाएगा है मैं नहीं कराउंगी ये सब.... मैं जा रही हूँ ....

विजय: ओह रुको तो भाभी.... अच्छा मैं ले लूंगा नाप अब तो सही है .....

जूली: .......... हाँ वो हो सकता है ..
ब्रा चड्डी की दूकान में विजय और जूली .....

लड़का: मेमसाब आइये आप यहाँ नाप दे दीजिये]

विजय: नॉट बेड, लाओ बेटा मुझे फीता दे दो, हमारी जान कहती है कि आप लो, तुम मुझे बता देना मैं नापकर तुमको बता दूंगा]

लड़का: जैसा आप कहें साहब]

विजय: गुड यार, तुम्हारा फीता तो बहुत सॉफ्ट है]

लड़का: हाँ साहब ये इतनी चिकनी बॉडी से लगता है ना, तो चुभना नहीं चाहिए] इसलिए रेशमी फीता ही रखते हैं]
इसके आलावा प्लास्टिक वाला बॉडी पर खरोच के निसान बना देता है, फिर आपको तो पता है साहब, लड़कियों की बॉडी में कितने छोटे-छोटे मोड़ होते हैं, वहाँ कोई और फीता तो सही से माप दे ही नहीं पाता] इसलिए ये वाला बिलकुल सही नाप बताता है]

विजय: वो तो सही है, पर इसको कैसे नापना है]

लड़का: बताता हूँ साहब]
इसको ऐसे पकड़कर यहाँ से नापना.... और ये वाले नंबर मुझे बताना .... ये cm में हैं]

विजय: ओके अब बताओ चड्डी का नाप कैसे लूँ]

जूली: नईईईईई मुझे मत छूऊऊऊऊऊ, तुम बस वहाँ से बताओ और उस तरफ मुँह करके खड़े रहो] मैं तुम्हारे सामने नाप नहीं दे सकती]

लड़का: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह वूऊऊओ ठीक है मेमसाब पररररररररररर मैं तूऊऊऊऊ सो र्र्र्र्र इइइइइइइ

विजय: यार मेरी बीवी बहुत शर्मीली है हा हा हाहा चल तू मुझे बता मैं तुझे सही नाप बता देता हूँ.......

लड़का: साहब पहले कमर का सही नाप बताओ, वहाँ से जहाँ चड्डी पहनते हैं]

विजय: यार वो कहाँ से........

लड़का: साहब पहले आप मैडम के टुंडी से सुसु वाली जगह पर जो दाना होता है ना वहाँ तक का नाप बताओ]

विजय: यार ये टुंडी क्या .......

लड़का: वो पेट पर जो छेद होता है ना साहब

जूली: नाभि कहते है उसको...

लड़का: मैडम जी हम तो टुंडी ही कहते हैं]

विजय : हा हा हाहाहाहा मजा आ गया यार टुंडी... और ये क्या सुसु सुसु लगा रखी है] यहाँ कोई टॉयलेट
कर रहा है क्या, दोस्त बिना शरमाये चूत बोलो] हमारी जान चूत ही समझती है ........

जूली: विज्जजजजजजजाआआअययययययय कम बोलो ...........

विजय: ओके मेरी प्यारी जानेमन, अच्छा अब जरा स्कर्ट को उठाकर ठीक से पकड़ो, पेट से भी ऊपर तक, हाहा तुम्हारी टुंडी दिखनी चाहिए]

हाँ अब ठीक है .........

.................

विजय: मास्टरजी ये रही टुंडी, यहाँ से पकड़ा और ये रहा चूत का दाना, तम्हारा मतलब भग्नासा से ही है न

लड़का: हाँ साहब आप जो कहते हों....वही जो मक्के की दाने की तरह ऊपर को उठा होता है....

विजय: यार ये तो नंबर १७ और १८ के बीच आ रहा है

लड़का: ठीक है साहब साढ़े १७ CM है, साहब अब आप टुंडी से ३ इंच, ४ इंच और ५ इंच पर कमर का नाप ले लीजिये......

विजय: क्या बकवास है यार इतने सारे क्यूँ.....

लड़का: साहब अलग अलग हाइट की चड्डी आती हैं] मैडम जी टुंडी से जितना नीचे पहनना चाहेंगी,मैं वैसी ही सेट करा दूंगा....

विजय: ओह ये तो बहुत टफ है यार... ये टुंडी से ३ इंच, और अब इसके चारों और घूमकर कमर का नाप...

लड़का: साहब पीछे का ध्यान रखना, फीता चूतड़ पर ऊपर नीचे न हो, फीता सीधा करके कसकर पकडना]
कमर के चारों ओर कहीं से भी इधर उधर ना हो वरना सही नाप नहीं आएगा.....

विजय: ओह ....ये तो बहुत मुस्किल है, मैं सब ओर कैसे देखूं] यार तुम खुद ही देखकर बताओ....

जूली: नहीं ये नहीं होगा, मैं नहीं देती नाप... तुम पागल हो क्या.... मैंने कुछ पहना भी नहीं है]

विजय: अरे यार स्कर्ट तो पकड़ो.... फीता हिल जायेगा ... यार क्या फर्क पड़ता है ... ये तो रोज सभी लड़कियों का ऐसे ही नाप लेते होंगे ना....

लड़का: हाँ साहब, पाता नहीं मैडम जी क्यूँ शरमा रहीं हैं]

विजय: जानू प्लीज स्कर्ट ऊपर उठाओ] नाप तो मैं ही लूंगा] पर ये सिर्फ बतायेगा...
अच्छा ऐसा करो तुम अपनी आँखे बंद कर लो ये सिर्फ बतायेगा]

जूली: नहीईईईइ बिलकुल नहीं मैं इसके सामने नंगी नहीं होउंगी]

विजय: अरे मेरी जान, नंगी कौन कर रहा है ये सब तो तुम्हारे अच्छे फिटिंग वाले कपड़ो के लिए ही है, मेरी अच्छी जानेमन बस २ मिनट की बात है और मैं खुद ले रहा हूँ ना.........

जूली: नैइइइइइइइइइइइइइइइइ

विजय: प्लीज जान बस ऐसे ही, मेरी प्यारी जानेमन हाँ बस कुछ ही देर.........हाँ ऐसे पकड़ो बस स्स्स्स्स
हाँ भैया ....... देखना नहीं इधर बस बताओ अब कैसे लेना है नाप .......देखो और बाताओ ठीक है ना फीता .......

लड़का: हाँ साहब बस यहाँ से कसकर ये हो गया, अब देखिये कितना आया.....ये इंच में देखना ,.....

विजय: हाँ ये यहाँ तो पूरा २६ आ रहा है.......

लड़का: हाँ साहब बहुत अच्छा नाप है मैडम जी का...

विजय: अब अगला ४ इंच पर ना .......

लड़का: हाँ साहब.....

विजय: देखो ठीक है........

लड़का: हाँ साहब, और कसकर.....

विजय: कोई ज्यादा अंतर नहीं साढ़े २६ होगा]

लड़का: नहीं साहब ये २७ ही आएगा] फीता कुछ ज्यादा कस गया है....

विजय: ओके

लड़का: अब ५ इंच का और ले लीजिये साहब.....

विजय: अरे हाँ ये साढ़े 30 या 31 आएगा, है ना] ये तो बहुत अंतर आ गया]

लड़का: हाँ साहब आजकल लड़कियां कमर से नीचे वाली जीन्स पहनती हैं, तो उनको चड्डी भी इतनी नीचे वाली चाहिए होती है] इसमें चूतड़ के उठान आ जाते हैं जिससे नाप में अंतर आ जाता है]

विजय: पर इसमें तो पीछे से चूतड़ की दरार भी दिखती होगी यार...

लड़का: क्या साहब आप भी, यही तो फैसन है आजकल....

विजय ओके

..........

..............

अब क्या.......

लड़का: साहब मैडम जी को टोंग भी अच्छा लगेगा...

जूली: हाँ जानू, टोंग तो मुझे चाहिए....

लड़का: साहब मैडमजी के चूत का नाप बता दीजिये...
हम बिलकुल उसी नाप के कपडे का टोंग बनवा देंगे...

जूली: क्याआआआआ

विजय: वो कैसे यार, यहाँ आ बता.....

लड़का: साहब ये यहाँ से यहाँ तक.......

जूली: स्स्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

लड़का: सो र्र्र्र्र्र ईईईईईईईई मेमसाहब, हाँ बस यही

विजय: वाह यार तुम्हारा काम तो बहुत मजेदार है]

लड़का: क्या साहब .... बहुत महनत का काम है ...

विजय: वो तो है यार देख मेरे कैसे पसीने छूट गए...
और तेरे भी जाने कहाँ कहाँ से, सब जगह से गीला हो गया तू तो ......

जूली: बस अब तो हो गया ना

विजय: हाँ जानेमन हो गया,, अब स्कर्ट तो नीचे कर लो, क्या ऐसे ही ऊपर पकडे खड़े रहोगी... हा हा

लड़का: हा हा क्या साहब

जूली: उउउउउऊऊऊनन्न्नन मारूंगी मैं अब तुमको ..

चलें अब ....
विजय: अभी कहाँ जान, क्या ब्रा नहीं लेनी]

लड़का: हाँ मैडमजी, मम्मो का तो सही नाप आपको बहुत सेक्सी दिखाता है]

जूली: अब क्या यहाँ इसके सामने खुले में पूरी नंगी हूँ मैं]

विजय: अरे क्या जान बस ऊपर से स्कर्ट नीचे कर लो, ऐसे, ठीक है मास्टरजी इतने मम्मो से काम चल जायेगा ना]

लड़का: हाँ साहब, पहले मम्मो के ऊपर और नीचे वाले हिस्से से कमर का नाप लीजिये]

विजय: ओह जान, कितना हिल रहे हैं तुम्हारे मम्मे]

लड़का: नहीं साहब ये तो पूरा फीता हिल गया]

विजय: यार तू ले ये नाप, मैं इन मम्मो को पकड़ कर रखता हूँ]

जूली: ओह नहीं विजय, ये तुम क्या कह रहे हो]

विजय: कुछ नहीं जान मैं हूँ न, मैं अपना हाथ रखे रहूँगा, वो केवल फीता पकड़ेगा]

लड़का: हाँ साहब, बस ये ऐसे इतना ही ,,,,

,,,ये यहाँ ३२ और

................

.....यहाँ ३० ...........वाओ बहुत सेक्सी नाप है मैडमजी आपका....

साहब जरा हाथ हटाइये ....अब ये ऊपर से बस यहाँ से .............

विजय: यहाँ से

जूली: ऊऊऊऊउईईईईईईईई क्या करते हो .....

विजय: ओह सॉरी डिअर

लड़का: वाओ साहब ऊंचाई ३७ .... बहुत मस्त है ...
मैडम जी आप देखना अब ये वाली ब्रा पहनकर आपकी सभी कपडे कितने मस्त दिखेंगे.....आप पूरी हिरोइन दिखोगी.....

विजय: चल वे चल मेरी जान तो हमेसा से ही हिरोइन को भी मात देती है .....

जूली:अच्छा ठीक है अब हो गया....

लड़का: बस मैडमजी इन दोनों कि गोलाई का नाप और ले लूँ]

जूली: वो क्यों]

लड़का: अरे मैडम जी दोनों का नाप अलग-अलग होता है फिर देखना आपको कितना आराम मिलेगा]

विजय: अरे यार ये सही ही तो कह रहा होगा, कौन सा तुम्हारे मम्मो को खा जायेगा]

जूली: धत्त्त्त जल्दी करो अच्छा....

लड़का: साहब जरा यहाँ से पकड़ लीजिये... बस देखा आपने साहब पुरे १ इंच का अंतर है] किसी किसी का तो ३-४ इंच तक का होता है

जूली: अब तो ऊपर कर लूँ कपडे,,,हो गया ना

विजय: तुम्हारी मर्जी जान, वैसे ऐसे ही बहुत गजब ढा रही हो] चाहो तो ऐसे ही चलें घर....

जूली: हो हो .... बड़े आये.... तुम तो घर चलो फिर बताती हूँ....

लड़का: हाहाहा क्या साहब आप भी बहुत मजाकिया हो....

मेमसाब आपकी निप्पल बहुत सेक्सी हैं...मैं आपको नोक वाले ब्रा दिखाऊंगा....आप वही पहनना...देखा कितनी मस्त दिखोगी...

जूली: हाँ, मैंने देखी थीं वो एक अपनी दोस्त के पास... मैं तो उस जैसी ही चाहती थी, अच्छा हुआ तुमने याद दिल दिया.... चलो अब जल्दी से दो .....

लड़का: मैडम जी ये वाली तो मैं तैयार करवा दूंगा... २-३ दिन लगेंगे...

जूली: तो अभी मैं क्या लुंगी....

विजय: तब तक जान ऐसे ही घूमो, किसे पता चलता है कि तुमने चड्डी नहीं पहनी]

जूली: मारूंगी अब मैं तुमको.....

लड़का: हाहा साहब मुझे पता है.....साहब एक बात बताऊँ....हमारे पहनने या न पहनने से किसी को फर्क नहीं पड़ता, पर लड़की का सबको पता चल जाता है, क्युकि सब घूर घूर कर वहीँ देखते हैं...

जूली: हाँ तो अब मैं क्या लूँ,

लड़का: मैडमजी जो पहले आपने देखे थे उसी में से पसंद कर लीजिये]

जूली: ठीक है...

विजय: ये और ये ले लो.....

जूली: ओके भैया ये वाले दे दो .....

..........
..........

ओके फिर चलते हैं......

मैं ३-४ दिन बाद आउंगी..विजय: ओह भाभी फिर भूल गई वैसे ही बैठो न...

जूली:हाँ हाँ, मगर सब इधर ही देख रहे हैं, कितनी भीड़ है यहाँ....

........

विजय: तो क्या हुआ?

............

.....

कोई दूर से आवाज आ रही थी .....जैसे कोई पीछे से बोल रहा हो ....

अननोन:..... ओययययीईईए बो देख उसने कच्छी नहीं पहनी....

कोई दूसरा:......क्याआआआ

अननोन:... हाँ यार मैंने उसकी फ़ुद्दी देखी पूरी नंगी थी यार.........

चल पीछा करते हैं.........

जूली:.......देखा मना कर रही थी ना.... क्या कह रहा वो..........

विजय: हा हा हाहाहाहा मजा आया या नहीं... आपने सुना नहीं..... कह रहा था कि "मैंने उसकी फ़ुद्दी देखी" हा हा हाहाहा

जूली: तू आज सबको मेरी चूत दिखा दिखा कर ही खुश होते रहना.... पागल... सरफिरा....

विजय: भाभी वो पीछे आ रहे हैं.... जरा कास कर पकड़ लो, मैं बाइक तेज भागने वाला हूँ....

जूली: माए गॉड, तू मरवा देगा आज.... जल्दी चला...

विजय: अरे कुछ नहीं होगा भाभी... बस कसकर चिपक जाओ...

जूली: देख कितना चिल्ला रहे हैं वो....

विजय: भाभी अपनी स्कर्ट पकड़ो... वो गांड...गांड..क्या मस्त गांड है करके चिल्ला रहे हैं...

जूली: अब तुझे पकड़ू या स्कर्ट, तू तो भगा जल्दी और इन सबसे पीछा छुड़वा....

विजय: ओके भाभी ......ये लोऊऊऊओ

आआआआआआआआ

.............

.........

विजय: अब तो ठीक है ना भाभी, जरा देखो पीछे, अब तो नहीं आ रहे...........

जूली: हाँ अब तो कोई नहीं दिख रहा...... थैंक्स गॉड..
आज तो बच गई...

विजय: हा हा क्या भाभी, आप या गांड....

जूली: हाँ हाँ तुझे तो बहुत मस्ती सूझ रही है ना... ही ही वैसे दोनों ही बच गई... कितना चिल्ला रहे थे वो, ना जाने क्या हाल करते....

विजय: यहाँ पर आप गलत हो भाभी, आप तो बच गई परन्तु गांड नहीं बचेगी...देखो मेरे लण्ड का क्या हांल है....

जूली: माई गॉड, ये तो जनाब पुरे तनतना रहे हैं...

विजय: हाँ भाभी प्लीज, जरा चैन खोलकर सहला दो न... अंदर दम घुट रहा है वेचारे का....

जूली: इस चलती रोड पर....

विजय: तो क्या हुआ भाभी... टी-शर्ट तो है न ऊपर...

जूली: वाओ... ये तो कुछ ज्यादा ही बड़े और गर्म हो गए हैं.....

विजय: आःआआ हा ह्ह्ह्हह्ह कितना नरम हाथ है आपका..... मजा आ गया.....भाभी इसे अपनी गांड माई ले लो न....

जूली: तो घर तो चल पागल... क्या यही डालेगा...

विजय: काश भाभी आप आगे आकर दोनों पैर इधर-उधर कर मेरी गोदी में बैठ जाओ और मैं तुमको चोदता हुआ बाइक चलाऊं.... आःआआ ह्ह्हह्ह्ह्ह

जूली: अच्छा अच्छा अब न तो सपना देख और ना दिखा... जल्दी से घर चल मुझे बहुत तेज सुसु आ रही है....

विजय: वाओ भाभी ... क्या कह रही ही... आज तो आपको खुले में मुत्ती करवाएंगे...

जूली: फिर सनक गया तू... मैं यहाँ कहीं नहीं करने वाली....

विजय: अरे रुको तो भाभी, मुझे एक जगह पता है... वहाँ कोई नहीं होता ... आप चिंता मत करो...

जूली: तू तो मुझे आज मरवा कर रहेगा.. सुवह से न जाने कितनो के सामने मुझे नंगा दिखा दिया... और तीन अनजाने मर्दो ने मेरे अंगो को भी छू लिया...

विजय: क्या ...किस किस ने क्या क्या छुआ...झूट मत वोलो भाभी...

जूली: अच्छा बच्चू ..... मैं कभी झूट नहीं वोलती...
सुवह उस कूरियर वाले ने मेरी चूची को नहीं सहलाया.. और फिर रास्ते में उस कमीने ने कितनी कसकर मेरे चूतड़ों पर मारा..अभी तक लाल है...फिर तूने उस दुकानदार लड़के से .... सैतान कितनी देर तक मेरे सभी अंगों को छूता रहा... उसने तो मेरी चूत को सहलाया था ...देख़ा था ना तूने...

विजय:.... हाँ भाभी सच बताओ मजा आया था ना...

जूली: अगर अच्छा नहीं लगता..तो हाथ भी नहीं लगाने देती उसको ... हाआीाा उस सबको सोचकर अभी भी रोमांच आ रहा है ....

विजय: ओके भाभी ठीक है ....चलो उतरो.. वो जो पार्क है ना वहाँ इस दोपहर में कोई अहि होता, आओ वहीँ झाड़ियों में मुत्ती करते हैं दोनों...

जूली: पागल है, अगर किसी ने देख लिया तो...

विजय: तो क्या हुआ गिनती में १ और बड़ा देना...
हा हा

जूली: अरे तू अपना ये तो अंदर कर ले....

विजय: अरे चलो न भाभी यहाँ कौन देख रहा है, फिर मूतने के लिए अभी बाहर निकालना ही है..
जूली: हे हे सही से चल न, इसको अंदर क्यों नहीं करता, कितना मस्ती में हिलाता हुआ चल रहा है...

विजय: किसको अंदर करूँ भाभी.....

जूली: अरे अपने इस तनतनाते हुए पप्पू को जीन्स में कर न.... कितना अजीब लग रहा है....

विजय: नहीं जानेमन, ये अब जीन्स में कहाँ जा पायेगा ...ये अंदर ही जायेगा मगर अब तो आपकी इस गोलमटोल चिकनी गांड में......यहाँ....

जूली: ऊऊईईईईईईईईईई क्या करता है .......

विजय: अरे ऊँगली ही तो की है जान... लण्ड तो अभी तक बहार ही है ...ये देखो....

जूली: तुझे हो क्या गया है आज....कितना बेशरम हो रहा है.... एक ये छोटी से स्कर्ट ही मेरी लाज बचाये है. और इसको भी बार बार हटा देता है....

विजय: रुको भाभी..... ये जगह सही है... यहाँ आप आराम से मूत सकती हैं.... ये वहाँ उस पेड़ के पीछे कर लो.....

जूली: हम्म्म्म ठीक है... तू क्या करेगा....

विजय: हे हे मैं देखूंगा कि आप ने कितनी की ....

जूली: पागल है क्या..... चल तू उधर देख .... कि कोई आ न जाए....पहले मैं कर लेती हूँ फिर तू भी कर लेना..
...............................

..............

विजय: वाओ भाभी मूतते हुए पीछे से आपकी गांड कितनी प्यारी लग रही है.....

जूली: तू अब इसे ही देखता रहेगा या इधर-उधर का भी ध्यान रखेगा.....

विजय: आप तो फालतू में नाराज हो रही हो.... केवल अकेला मैं ही कौन सा देख रहा हूँ....

जूली: उउउफ्फ्फ्फ्फ़ तो और कौन देख रहा है....

विजय: हाहा वो देखो बेंच पर.....वो जो अंकल बैठे हैं इधर ही देख रहे हैं.....

जूली:देख कितना बेशरम है...लगातार घूर रहा है...

विजय: वाह भाभी....आपको करने में शर्म नहीं... मैं और वो देख रहे हैं तो बेशरम....

जूली: अब आज तो तू पक्का पिटने वाला है....
अब जल्दी से चल यहाँ से....

विजय: एक मिनट न भाभी जी....जरा मुझे भी तो फ्रेश होने दो........

जूली: हाँ हाँ जल्दी कर.....

......................

जूली: देख अब कैसे चला गया...जब मैंने उसको घूरा ... शर्म नहीं आती इन बुड्ढों को.... राख में भी चिंगारी ढूँढ़ते रहते हैं......

विजय: हा हा भाभी क्या बात की है... वैसे आज तो उसको मजा आ गया होगा..इतनी चिकनी गांड देखकर.....पता नहीं घर जाकर दादी का क्या हाल करेंगे.... हा हा

जूली: हाहा तू भी ना....

विजय: भाभी...प्लीज जरा इसको सही तो कर दो ...देखो जीन्स में जा ही नहीं रहा....

जूली: यहाँ......हाए क्या कर रहा है.... कितना गरम हो रहा है ये.....

विजय: भाभी खुले में चुदाई करने का मजा ही अलग है....

जूली: नहीं यहाँ तो बिलकुल नहीं...... मैं ये रिस्क नहीं लेने वाली......तू इसको अंदर कर जल्दी....

विजय: अरे वही तो कर रहा हु भाभी... कोई नहीं है यहाँ बस इस पेड़ को पकड़ कर थोडा झुको ... केवल ५ मिनट लगेंगे....

जूली: आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआ क्या करता है .... मुझे दर्द हो रहा है ..... ओह मान जा ना प्लीज .... नहीईईईई आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मान जा नहीं न यहाँ कोई भी आ सकता है ........

विजय: श्ह्ह्ह्ह्ह्ह कोई नहीं आएगा ......... बस्स्स्स जरा सा ............. आज तो नहीं मानूंगा .....

जूली: अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह नहीं ना क्या करता है .... हट ना ...........ओह

जूली: ओहूऊऊऊऊऊ

विजय: ज्यादा आवाज मत करो ना .....वरना .....सबको पता चल जायेगा......

जूली: आआअह्हह्हह्हह्हह अह्ह्ह्हह्ह उउउउउ ओह्ह्ह्ह आह्हआ नहीईईईई तू पागल है ....आअह्ह्ह कितना ....... अंदर ......तक्क्क नहीईईईइ आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआ

कमीने दर्द हो रहा है ...................

अह्ह्ह्ह्ह्हाआआआआअ

विजय: बास्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स
जूली: ऊऊ औ ओ ओ ओ तू तो बहुत कमीना है.... आज के बाद मुझसे बात नहीं करना ......

विजय: क्यों क्या हुआ भाभी...... प्लीज ऐसा न बोलो... आई लव यू ....सो मच .....

जूली: लव होता तो इतना दुःख नहीं देता....न समय देखता है और न जगह .....

विजय: क्या भाभी आप भी, अब आपकी ये मस्त गांड देख पेरा पप्पू नहीं मन तो इसमें मेरी क्या गलती...

जूली: उन उउउउम जा भाग यहाँ से....

विजय: प्लीज मान जाओ न भाभी.....

जूली: चल अब जल्दी से घर चल देर हो रही है]

....................

.......................
विजय: भाभी प्लीज माफ़ कर दो न..... अच्छा अब कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा.....प्रोमिस...

जूली: अच्छा ठीक है ...पर कुछ समय दूर रह ...मेरा मूड बहुत ख़राब है....

विजय: ओके मेरी प्यारी भाभी ...पुचच च च च

...........

विजय: भाभी में अभी आता हूँ............जरा कुछ सामान लेना है....बाजार से भूल गया था ....
....................
...........
....

काफी देर बाद ...........

टेलीफोन कि रिंग ........ट्रिन ट्रिन .......ट्रिन ट्रिन

जूली: हेल्लो .......

मेरी किस्मत कि जूली ने फ़ोन स्पीकर पे कर लिया था ..

उसकी दोस्त नफीसा: हेलो मेरी जान,कहाँ हो आजकल

जूली: यहीं हूँ यार तू सुना..कहाँ मस्ती मार रही है...

नफीसा: वाह, मस्ती खुद कर रही है और मेरे को बोल रही है....

जूली:ओह लगता है अहमद भाई नहीं हैं आजकल जो मुझसे लड़ने लगी...

नफीसा: उनको छोड़ तू ये बता आज बाजार में किसके साथ मटक रही थी, बिलकुल छम्मक छल्लो की तरह ..

जूली: अरे बो तो रवि का छोटा भाई है ..मैं तेरी तरह नहीं हूँ जो किसी के भी साथ यूँ ही घूमने लागूं...

नफीसा: हाँ हाँ मैं तो ऐसी वैसी हूँ.... और तू कैसे घूम रही थी वो सब देखा मैंने.....मेरी आवाज भी नहीं सुनी..और अपने चूतड़ मटकती हुई निकल गई...

जूली: अरे यार मैंने सही में नहीं देखा, कहाँ थी तू...

नफीसा: उसी बाजार में जहाँ तू बिना कच्छी के अपने नंगे चूतड़ सबको दिखा रही थी...

जूली: अरे यार वो जरा वैसे ही हे हे ...जरा मस्ती का मूड था तो .... और तू क्या कर रही थी वहाँ ....

नफीसा: मैं तो अहमद के साथ शॉपिंग करने गई थी ...

जूली: हाय तो क्या अहमद भाई ने भी कुछ देखा ..

नफीसा: कुछ ...अरे सब कुछ देखा ...उन्होंने ही तो मुझे बताया ....कि ये आज जूली को क्या हो गया है ... उन्होंने तो तेरे उस भाई को तेरे नंगे चूतड़ों पर हाथ से सहलाते भी देखा....तभी तो मैं तुजसे ख रही थी ...

जूली: ओ माय गॉड, क्या कह रही है तू ...

नफीसा: बिलकुल वही जो हुआ....अब सच सच बता क्या बात है]

जूली: यार अहमद भाई कहीं इनसे तो कुछ नहीं कहेंगे]

नफीसा: अरे नहीं यार वो ऐसे नहीं हैं ...लेकिन तू मुझे बता ये सब क्या है ....और क्या क्या हुआ ...

जूली: अरे कुछ नहीं यार, बस थोड़ी मस्ती का मन था. इसलिए बस और कुछ नहीं यार ....

नफीसा: हम्म्म वो तो दिख ही रहा था.. तू बताती है या मैं रोबिन भाई जी से पूछूं ....

जूली: जा उन्ही से पूछ लेना... साली ब्लॅकमेल करती है ...

नफीसा: प्लीज बता ना यार क्या क्या हुआ ... और वो हैंडसम कौन था ...

जूली: बताया तो यार मेरा देवर है और बस थोडा मस्ती का मूड था तो ऐसे ही बाहर निकल लिए बस और कुछ नहीं हुआ....और तुझे मस्ती लेनी है तो तू भी बिना चड्डी के जाना, देखना बहुत मजा आएगा..

.नफीसा: अरे वो तो सही है.. तू बता न क्या हुआ मेरी जान.. कितनो ने ऊँगली की तेरी में... बता न यार..

जूली: नहीं यार ऐसा कुछ नहीं हुआ.... बस जैसे तूने देखा ऐसे ही किसी न किसी देखा होगा बस और तो कुछ नहीं हुआ....

नफीसा: अच्छा और तुम्हारे देवर, वो कहाँ तक पहुंचे..

जूली: कहीं तक नहीं यार... बस ऐसे ही थोड़ी बहुत मस्ती बस... और क्या मैं .........

......
.....
..

सॉरी दोस्तों टेप ने धोखा दे दिया..... लगता है यहीं तक बेटरी थी .....मगर इतना कुछ सुनकर मुझे ये तो लग गया था कि जूली को अब रोकना मुस्किल है ..

मैं कुछ देर तक बस सोच ही रहा था कि अब आगे क्या और कैसे करना चाहिए..
बहुत समय तक अनाप सनाप सोचने के बाद मैंने सब विचारों को बाहर निकाल फैंका ...फिर सोचा कि यार मैंने जूली को अब दिया ही क्या है ...

ये घर एस्वर्य या कुछ जरुरी सामान ...क्या ये सब ठीक था ...

आखिर उसकी भी अपनी ज़िंदगी है ....और सेक्स तो शारीर की जरूरत है... मगर मैंने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया

पर अब मुझे इस और ध्यान देना होगा...मैंने एक ही पल में सब सोच लिया कि मैं अब जूली का पूरा ध्यान रखूँगा... वो जो भी चाहती है जैसा भी चाहती है मैं उसमे उसका साथ दूंगा] आखिर मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ]

अब अगर उसने ये सब किया तो मैं नहीं समझता कि इसमें उसकी कोई गलती है....अगर उसको ये सब अच्छा लगता है तो उसको मिलना चाहिए...

और मैं भी कौन सा दूध का धुला हूँ] अपनी सेक्रेटरी से लेकर साली तक न जाने कितनी चूतों को मार चूका हूँ]

फिर अगर जूली मजे ले रही है तो ये उसका हक़ है]

अब ये सोचना था कि कैसे मैं उसको अपने विस्वास में लूँ]

ये सब सोचते हुए मैं घर पहुँच गया]

.......

ट्रिीिन्नन्नन्नन्नन्नन तृन्न्नन्न्न्न
जूली: कौन.....

मैं: खोल ना मैं हूँ]

दरवाजा खुलते ही....

जूली: क्या हुआ बड़ी देर लगा दी ....कहाँ रुक गए थे ..विजय का फोन आया कि वो तो २ घंटे पहले ही निकल गया .. वो और मैं दोनों कॉल कर रहे थे पर आपका फोन ही नहीं लग रहा था ... कहाँ थे ..कहीं कुछ हुआ तो नहीं..... कितना घबरा रही थी मैं ..... कुछ हुआ तो नहीं ......क्या तुम भी ......एक कॉल भी नहीं कर सकते थे.........

ओह माय गॉड, मुझे याद आया ...मैं अपना फोन कॉल ऑफ किया था ...जब रिकॉर्डिंग सुन रहा था ....और यहाँ ये सब कितने परेशान हो गए वेचारे...

मैं: ओह जरा ठहर मेरी जान ....ऐसा कुछ नहीं हुआ ... बस कोई मिल गया था ....और मेरा फोन गिरने से ऑफ हो गया था ...मुझे पता ही नहीं चला ....

जूली मेरे सीने से लग गई....मैंने कसकर उसे अपनी बाँहों मई जकड़ लिया...मुझे उसके कमसिन शरीर का अहसास होने लगा..जो पिछले १-२ साल से मैंने खो दिया था]

वाक़ई जूली एक बहुत खूबसूरत और कामी स्त्री थी] उसका अंग अंग रस से भरा था.... उसके उठे हुए नुकीले स्तन, चूची मेरे सीने में चुभ रहे थे..

उनके निप्पल तक का अहसास मुझे हो रहा था... मुझे पता था कि उसने ब्रा नहीं पहनी थी....क्युकि उसकी गहरी लाल रंग की ब्रा, कच्छी हमारे बेड के कोने में लैंप के पास रखीं थी]

जूली अमूमन तो घर पर ब्रा कच्छी पहनती ही नहीं थी] और अगर पहनी हो तो रात को सोने से पहले वो उनको उतार वहीँ रख देती थी]

वो हमेशा मेरे सामने ही ये सब करती थी, मगर मेरा उसके प्रति बिलकुल रूचि ख़त्म हो गई थी] इसलिए कोई ध्यान नहीं देता था]

मगर आज की सारी घटनाओ ने मेरा नजरिया ही बदल दिया था] मुझे जूली संसार की सबसे प्यारी स्त्री लग रही थी]

यकीन मानना मेरा लण्ड उस टेप को सुनने के बाद से खड़ा था और बहुत दिनों बाद आज जूली के शरीर की गर्मी महसूस कर उसको छू रहा था]

इसका एहसास जूली को भी हो रहा होगा...

मैंने अपना हाथ उसकी पीठ से लहराते हुए उसके गदराये चूतड़ों तक ले गया]

कसम से इतने सेक्सी चूतड़ किसी के नहीं हो सकते... ऐसा मखमली अहसास जैसे मक्खन एक पर्वत को चूतड़ का आकर दे दिया गया हो....

जूली ने सफ़ेद मिडी जैसा गाउन पहना था, जो उसके चूतड़ से थोडा ही नीचे होगा...मेरा हाथ सरलता से उसके गाउन के अंदर उसके नग्न नितम्बों (चूतड़ों) के ऊपर पहुँच गया था]

मैं उस मखबली एहसास से सराबोर हो गया था....जूली और कसकर मेरे से लिपट गई...

उसकी इस अदा ने मेरे दिल मैं उसके प्रति और भी प्यार भर दिया ....ये सच है कि वो कभी मुझे किसी बात के लिए मना नहीं करती थी]

आज ना जाने उसकी कितनी मस्ती कि थी और कई बार सेक्स भी किया था.... चाहती तो इस समय वो गहरी नींद सो रही होती ...

उसका शरीर इस समय तृप्त होना चाहिए, पर मेरे लिए वो फिर तैयार थी...वो कुछ मना नहीं कर रही थी..

बल्कि मेरे बाहों में सिमटी आहें भर रही थी...उसको मेरी जरुरत का हर पल ख्याल रहता था...

मैंने अपने हाथ को उसके चूतड़ों के चारों ओर सहलाकर, उसके दोनों उभारों को अपनी मुट्ठी में भरने के बाद अपनी दो ऊँगली से उसकी दरार को प्यार से सहलाया फिर अपनी उँगलियों को उसके गुदाद्वार यानि चूतड़ों के छेद पैर ले गया जो एक गरम भाप छोड़ रहा था....फिर वहाँ से मेरी उँगलियों ने उसकी मखमली चूत तक का सफ़र बड़ी रंगीनी के साथ किया...

जूली: आअहाआ ह्ह्ह्हह

बस उसके मुह से केवल आहें ही निकल रहीं थीं..

क्या बताऊँ कितना नरम अहसास था...मैं गांड और चूत के मुख को प्यार से ऐसे सहला रहा था कि इन दोनों बेचारो छेदों ने कितनी चोट सही हैं आज...

मगर गांड कि गर्मी और चूत के गीले पन ने मुझे ये बता दिया कि वो फिर चोट सहने के लिए तैयार हैं ...

मैंने अपने मुह से ही जूली के कन्धों पर बंधे स्ट्रैप खोल दिए....उसका गाउन नीचे गिर गया.... वो अब पूरी नग्न अवस्था में मेरी बाहों में थी...

मैंने उसको थोडा पीछे कर उसके गदराये मम्मो को देखा ...उन पर काफी सारे लाल लाल निसान थे ...जो शायद आज हमारे विजय साब बनाकर गए होंगे...

मगर जूली कभी कुछ छिपाने की कोशिश नहीं करती थी इसीलिए मुझे उस पर कभी कोई शक़ नहीं होता था ..
तभीइइइ

जूली: सुनो आप कपडे बदली कर लो.... मैं दूध गर्म कर देती हूँ ....

मैं: हाँ मेरी जान कितने दिन विजय के कारण हम कुछ नहीं कर पाये.. आज बहुत मन हो रहा है...

जूली के मुख पर एक सेक्सी मुस्कराहट थी...वो एक नई नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही थी ... उसने किचन में जाते हुए अपनी आँखों को झुकाकर एक संस्कारी स्त्री की तरह स्वीकृति दी...

उसकी इस अदा को देखकर कोई सपने में भी विस्वास नहीं कर सकता था कि आज पुरे दिन उसने किस तरह अपना अंग प्रदर्शन किया और बुरी तरह से अपने पति के रहते किसी परपुरुष से चुदाई करवाई...

यही होती हैं नारी कि अदाएं जिसे कोई नहीं समझ सकता] समझदार पुरुष को इन सबसे तालमेल बनाना ही होता हैं... वरना होता तो वाही हैं जो नारी चाहती हैं ..
अब या तो आपकी ख़ुशी के साथ या फिर आपका जीवन वर्वाद करने के बाद....

फिलहाल मैं कपडे उतार हल्का सा शावर ले, एक रेसमी लुंगी पहन.... अपने शरीर को deo से महकाकर ....विस्तर पर आ बैठ गया.
मुझे ध्यान आया जब मैंने जूली को छोड़ा था तब वो पूरी नंगी थी]

उसकी नाइटी अभी भी वहीँ पड़ी थी] इसका मतलब वो किचन में नंगी ही होगी]

बस मैं उठकर किचन की और जाने लगा]

ऐसा नहीं है कि ऐसा पहले नहीं होता था, मगर मैं कभी इस सब रोमांच के बारे में नहीं सोचता था]

पहले भी ना जाने कितनी बात जूली घर में नंगी ही और काम करती रहती थी मगर मैं उससे कोई रोमांस नहीं करता था और ना मुझे कोई अजीब लगता था] क्युकि हम दोनों यहाँ अकेले ही रहते थे] तो उस आज़ादी का फ़ायदा उठाते थे]

मैं भी ज्यादातर पूरा नंगा ही सोता हूँ और घर पर काफी कम कपडे ही पहनता हूँ]

मैं जब किचन में गया तो जूली नीचे झुकी हुई कोई सामान निकाल रही थी]

और आज वो ना जाने क्यों इस समय दुनिया की सबसे ज्यादा सेक्सी औरत लग रही थी]

एक पूरी नंगी, मस्त मस्त अंगो वाली नारी जब झुकी हो तो पीछे से उसके नंगे चूतड़ और उसके दोनों भाग से झांकती उसकी सबसे सुन्दर चूत]

क्या बताओ दोस्तों कितना जबर्दस्त दृश्य था] मैंने अपनी लुंगी वहीँ खोली और पीछे से उसको जाकर लिया]

उसने बड़े आश्चर्य से पीछे घूमकर देखा, क्युकि ऐसी अवस्था में शायद ये सब काफी समय बाद हुआ था]

शादी के ६ महीने या १ साल तक तो मैं ये सब रोमांस करता भी था मगर तब जूली घर पर इस तरह नंगी भी नहीं रहती थी]

मगर जब बो इतना खुली रहने लगी तो मैं अपने बिज़नस में व्यस्त हो गया]

इसीलिए उसने मुझे इस तरह देखा मगर वो इतनी ज्यादा प्यारी है कि उसने कुछ नहीं कहा]

वल्कि मेरे लण्ड पैर अपने सेक्सी चूतड़ को हिलाकर कहा, क्या हुआ आ तो रही हूँ...

मैं: क्या कर रही हो मेरी जान बहुत देर लगा दी]

जूली: बस आपके लिए केसर दूध और कुछ ड्राई फ्रूट तल रही थी]

मैं: वाओ जान मजा आ जायगा, क्या कुछ मीठा भी है घर पर...
मैंने साइड खिडकी को खोलते हुए कहा... हमारी किचन की एक तरफ एक छोटी खिडकी है जो वहार गैलरी में खुलती है]

वहाँ कॉलोनी के पीछे वाले रास्ते की सीढ़ी हैं तो दिन में ही वहाँ आना जाना होता है]

और वो भी बहुत कम गर्मी में वो खिडकी खुली ही रहती है]

पहले मैं ही बंद कर देता था कि जूली किचन में कुछ कम कपड़ो में काम करती थी तो कोई देखे ना...

मगर आज ना जाने किस बात से प्रेरित हो मैंने ही वो खिडकी खोल दी थी]

और वो भी तब जब मैं और जूली दोनों ही किचन मैं पुरे नंगे थे.... दोनों के शरीर पर एक कपडा नहीं था..

मैं जूली से रोमांस भी कर रहा था... ऐसे में कोई हमको देख लेता तो शायद उसका पजामा गीला हो जाता]

यूरिन से नहीं बल्कि..........हा हा हा ....

मेरे खिडकी खोलने पर भी जूली ने कुछ नहीं कहा वल्कि हामी भरी...

जूली: अहा कितनी गर्मी हो गई है ना... अच्छा किया आपने... थोडा सर्फ़ोकेशन दूर होगा...

मैंने उसको अपनी और करके उसके लाल रसीला लवों को अपने होठों में दबा लिया...

जूली ने भी अपने होठो को खोलकर और उचककर मेरे चुम्बन का जबाब दिया....

जूली की पीठ खिडकी की ओर थी और वो आँखे बंद कर मेरे चुम्बन में व्यस्त थी....

मेरे हाथ उसकी नग्न चिकनी पीठ से फिसलते हुए उसके चूतड़ तक पहुँच गए....

तभी एक पल के लिए मेरी आँख खुली....वैसे तो वाहर पूरा अँधेरा था... मगर मुझे एक पल को लगा की जैसे कोई वहाँ खड़ा है....

क्युकि मुझे सिगरेट की चिंगारी जलती नजर आई...

??????? कौन है वो ..????.
ली मेरी बाहों में एक बेल की तरह लिपटी थी बिलकुल नंगी, उसका गोरा, संगमरमरी जिस्म किचिन की दूधिया रोशनी में चमक रहा था]

और ये सब हमारी किचिन की खिडकी से कोई वावला देख रहा था]

मुझे नहीं पता कि वो कौन है हाँ ये निश्चित था कि कोई तो है....मैंने दो तीन बार सिगरेट जलती, बुझती देखी..

इस समय उसने सिगरेट अपने हाथों के पीछे कि हुई थी.... और वो साइड में होकर ...झुककर देख रहा था]

जूली ने होने होंठ अब मेरे गर्दन पआर रगड़ते हुए मेरे कानो के निचले भाग पर पहुचने कि कोशिश की...

वाकई सेक्स के मामले में वो जबरदस्त थी उसकी इस कोशिश से मेरा लण्ड पूरा खड़ा होकर उसकी चूत पैर टकराने लगा]

बहुत गरम और मस्त अहसास था.....मेरा लण्ड ज्यादा बड़ा तो नहीं, परन्तु ५.५ से ६ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा होगा] खड़ा होने पर उसकी स्किन खुद ऊपर हो जाती है और मोटा सुपाड़ा बाहर आ जाता था]

जो इस समय जूली की कसी हुई प्यारी चूत को छू रहा था]

तभी मेरे मन ने सोचा कि क्या जूली को इस आदमी के बारे में बताया जाये....

मेरे दिल ने कहा, अरे यही तो मौका है उसके दिल में खुद को सेक्स के मामले में बड़ा दिखाने का और आगे खुलकर मस्ती करने का....

बस मैंने जूली को और कसकर अपनी बाहों में जकरा और अपना सीधा हाथ से उसका सर और बाएं हाथ से चूतड़ सहलाते हुए ...

मैं बहुत धीरे से उसके कान में फुसफुसाया....

मैं: जान मुझे लग रहा है कि खिड़की से कोई हमको देख रहा है]

अचानक जूली ने कसमसाकर मेरी बाहों से निकलने की कोशिश करने लगी...उसकी हरकतों से साफ़ लगा की वो अपने नग्न जिस्म को छुपाना चाह रही है..

मैं: (फिर फुसफुसाते हुए) शांत रहो जान, मुझे देखने दो कि वो कौन है.....

जूली:पर मैं नंगी हूँ ...

वो मुझसे भी धीमी आवाज में मेरे कान में बोली...

हाँ आश्चर्य रूप से उसका वदन शांत हो गया था अब उसमे खुद को छुपाने की जल्दबाजी नहीं थी]

मैंने वैसे ही उसको चिपकाये हुए उसको कहा...

मैं: तो क्या हुआ जान, उसने तो हमको देख ही लिया है.... अब जरा मैं भी तो देखु कि ये साला है कौन...
तुम ऐसा करो वैसे ही प्यार करते हुए थोडा खिड़की के पास को खिसको...

वो शायद थोडा साइड में है ....और ऐसे जाहिर करना कि हमको कुछ नहीं पता.....

मुझे कुछ अंदेसा सा था... मगर मेरी सारी आशाओं से विपरीत जूली पहले से भी ज्यादा कामुक तरीके से मेरे से लिपट गई...

और उसने मेरी गर्दन में दांतो को गड़ाते हुए अपनी चूत को और भी तेजी से मेरे लण्ड पैर लगड़ा और घसते हुए अपनी पतली सेक्सी कमर घुमाते हुए बहुत धीरे धीरे .......खिड़की की ओर बढ़ने लगी...

मैं भी उसके साथ लिपटा हुआ आगे हो रहा था.... उसकी इस अदा मैं कुर्वान हो गया था....

ओह माय गॉड ...ये क्या... मेरे लण्ड के टॉप ने जूली के चूत का गीलापन तो पहले ही पता चल रहा था मगर एक बार खिसकने में .... मेरा लण्ड उसकी चूत के गर्म छेद से टिक गया ....

और तभी उसके सुपाड़े पर जूली की चूत का ढेर सारा पानी गिर गया....

ये क्या जो मेरी जान कई धक्को के बाद और कभी कभी तो मेरे झड़ने के बाद भी अशांत रहती थी ..

आज मेरे लण्ड को घुसाये बिना...केवल लण्ड के छुअन से ही धरासाई हो गई थी....

ये उसका आज का विजय का प्यार...या मेरा ऐसा प्यार करने का तरीका तो नहीं हो सकता...

ये जरूर एक ऐसा एहसास था कि कोई उसको नंगी अवस्था में ऐसे चुदाई करते देख रहा है.....

वाओ दोस्तों इस तरह के सेक्स ने यहाँ हमारे जीवन में अचानक ही एक अलग मोड़ ला दिया था...

जूली के चूत के पानी ने मेरे लण्ड को और भी जोश में ला दिया था...

मगर आश्चय ये था कि झड़ने के बाद भी जूली के जोश में रत्तीभर भी कमी नहीं आई थी.....

अब हम खिड़की के काफी निकट थे ....

अब हम कुछ नहीं बोल रहे थे क्युकि हमारी आवाज वो सुन सकता था....

जूली मेरी किसी हरकत का कोई विरोध नहीं कर रही थी......

मैंने उसको खिड़की कि पास वाली स्लैप को पर बैठा दिया......

पर वो अचानक उतर गई.......

जूली: नीचे ठंडा लग रहा है जान....

मैं: तो क्या हुआ जान, आओ अभी खूब गर्म कर दूंगा...

मैंने उसको खिड़की की ओर घुमाकर नीचे बैठ गया और उसके मखमली चूतड़ को अपनी लम्बी जीभ से चाटने लगा..

अब जूली पूरी नंगी खिड़की की ओर मुह करके कड़ी थी.... वो खिड़की के इतने निकट थी कि उसका एक एक अंग वाहर वाले आदमी को दिख रहा होगा...

मगर जूली को इस सब के एहसास ने और भी कामुक बना दिया था.... वो किसी बात को मना नहीं कर रही थी]...

मेरी जीभ जैसे ही उसकी चूत वाले भाग पर पहुची...वहाँ कि चिकनाई और गर्माहट देख मैं समझ गया जूली बहुत रोमांचित है...

मैंने पिछले ३ सालों में एक बार भी उसके इस भाग में इतना रस महसूस नहीं किया था.....

मैंने सोच लिया कि आज अपनी ये चुदाई मैं यहीं किचिन में ही पूरी करूँगा....और बाहर वाले अजनबी का कोई ख्याल नहीं करूँगा...

चाहे वो पूरा देखे ....या कुछ हो ..
मैं पीछे से जूली के चूतड़ों को चाटता हुआ उसके दोनों भागो को हाथ से खोल जूली की गुलाबी दरार पर अपनी जीभ फिराते हुए उसके सुरमई छेद को अपनी जीभ की नोक से कुरेदता हूँ]

आअह्ह्ह्हाआआआआआ ह्ह्ह्ह्हाआआआ

जूली जोर से सिसकारी लेती है.....जूली का मुँह पूरी तरह खिड़की की तरफ था]

हम खिड़की से मात्र कुछ फिट की दूरी पर ही थे]

जूली ने एक हाथ अपना किचिन की स्लेप पर रखा था और दूसरे हाथ से अपने मम्मो को मसल रही थी....

मैं अपनी जीभ को उसकी चूत की ओर ले जाते हुए केवल ये सोच रहा था कि उस बेचारे का क्या हाल होगा......

उसको जूली की चूची बो भी उसके द्वारा खुद मसलती हुई न जाने कैसी लग रही होंगी....

और इस समय तो उसको जूली की चूत भी साफ़ दिखाई दे रही होगी...वो भी मचलती हुई...क्युकि जूली लगातार अपनी कमर घुमा रही थी...

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी रस से भरी हुई चूत में घुसेर दी.....

जूली: आआआऔऊऊऊऊऊऊ क्या करते हो डॉलिंग ..

मैं एक और काम करता हूँ....पता नहीं आज इस साले दिमाग में आईडिया भी कहाँ से आ रहे थे...

मैं जूली की दायीं पैर को उठा अपनी गोद में रख लेता हुआ...जिससे उसके दोनों पैरों में अच्छा खासा गेप बन जाता है....

उसकी चूत पीछे से तो खुल ही जाती है .... जिससे मेरी जीभ आसानी से उसको छोड़ने लगती है...

मगर मैं ये सोच रहा था की सामने से उसकी चूत कितनी खिली हुई दिख रही होगी....

कमाल तो ये था कि जूली को पता था वो अजनबी आदमी ठीक उसके सामने खड़ा है.... पर वो बिना किसी रूकावट के चूत चटवाते हुए सिस्कारियां निकाल रही थी.....

करीब १० मिनट तक उसकी चूत का सारा रस चाटने के बाद मै फिर से उठकर उसको चूमता हूँ और उसका मुँह नीचे पाने लण्ड कि और करता हूँ....

बस एक बार जूली अपनी आँखों के इशारे से मन सा करती हो और खिड़की ओर देखती है]

परन्तु जैसे ही मैं उसको फिर से नीचे करता हूँ वो अपने घुटनो पर पर बैठ जाती है और मेरे लण्ड को अपने हातों से पकड़, अपनी गीली जीभ बाहर निकाल चाटती है ....

और कुछ ही देर में लड़ को मुँह में ले चूसने लगती है ..

मैं: अह्ह्ह्हाआआआ आआअ ऊऊओ मजा लेते हुए उसकी ओर देखता हूँ कि वो तिरछी नजरों से खिड़की कि ओर देख रही थी.....

एक तो बला की खूबसूरत, पूरा नंगा जिस्म वो भी सेक्सी तरीके से लण्ड चूसते हुए .....तिरछी नजर से किसी अजनबी को ढूंढ़ते हुए वो क्या मस्तानी दिख रही थी...

मैं भी उसका अनुसरण करते हुए उधर बिना किसी प्रतिक्रिया के देखा हूँ]

अर्र्र्र्र्र्र्र्र्रीईईईए ये क्याआआआ वो महाशय तो बिलकुल खिड़की से निकट खड़े थे......वो अव खिड़की से बाहर जाती रोशनी की जद में थे.....

तो आसानी से दिख गए.... जरुर जूली को भी नजर आ गए होंगे...मगर उसने अपना कार्य (लण्ड चुसाई) में कोई रुकाबट नहीं की....

बल्कि मेरे लण्ड को अपने ही थूक से और भी गीला किया और भी मस्ती से चूसने लगी...सेक्स उसके सर चढ़कर बोल रहा था....

मैं खड़ा था तो मुझे उस आदमी का निचला भाग ही दिख रहा था....... उसने अपना पजामा नीचे खिसकाया हुआ था और हाथ से लण्ड को मसल रहा था या फिर मुठ मार रहा था]

माई गॉड आज एक अजनबी आदमी मेरे सामने मेरी ही नंगी बीवी को देख मुठ मार रहा है.....और उसको देख मेरे लण्ड भी लावा उगलने जैसा हो गया...

मैं जल्दी से उसके मुँह से अपना लण्ड बाहर खीच लेता हूँ ......और अब चुदाई के बारे में सोचने लगता हूँ की कैसे चोदुं की हम दोनों को भी मजा आये और उसको भी जो बेचारा हाथ से लगा है ....

हमारी ये चुदाई शायद सबसे ज्यादा रोमांचित केर वाली और मेरी अब तक की बेस्ट चुदाई होने वाली थी]

छुपकर और छुपाकर ना जाने कैसे-कैसे चुदाई की थी मगर इस तरह की अपने ही घर पर अपनी ही सेक्सी बीवी को पूरा नंगा कर किचिन में एक अजनवी आदमी के सामने लाइव शो करते हुए इस तरह चोदना मेरे को बहुत ही उत्तेजित कर रहा था....

मैंने जंद न झरने के कारण गपपपपपप की आवाज के साथ अपना लण्ड उसके मुँह से निकल लिया....जूली बड़े ही सेक्सी आँखों से मुझे देखती हुई खड़ी हो गई..

उसके बाएं हाथ में मेरा लण्ड अभी भी खेल रहा था...

उसने मेरे को ऐसे देखा कि अब क्या....मैंने बाएं हाथ से उसकी चूत को दो ऊँगली से बड़े प्यार से सहलाते हुए चोदे का इशारा दिया...

उसने मेरे लण्ड को अपने मुलायम हाथ से आगे से पीछे तक पूरे लण्ड पर फिराते हुए, अपनी बड़ी-बड़ी झील जैसी आँखों को नचाया.....

जैसे पूछ रही हो कि कहाँ और कैसे.....

मैंने उसके होंठो पर एक जोर दार चुम्मा लेते हुए उसे कहा ...

मैं: जान आज एक नया रोमांच करते हैं क्यों ना यहीं किचिन में ही चुदाई करें....

जूली: नहीं जानू, चलो ना बेडरूम में चलते है वहीँ ....

मैंने फिर से उसके होंठो को अपने होंठों में दबा लिया...वो बराबर मेरे लण्ड को सहलाकर...चुदाई का इन्तजार कर रही थी.....

मैं: अरे नहीं जान यहीं....

जूली: अच्छा ठीक है फिर खिड़की बंद कर दो ....

तभी हम दोनों को लगा जो खिड़की के बॉट निकट खड़ा था... वो थोडा खिसक कर पीछे को हो गया..

मैंने जूली के चेहरे पर एक सेक्सी मुस्कराहट नजर आई...

अब मैंने उसको स्लेप कि और इशारा किया ...

वाओ जूली ने खुद चुदाई का तरीका ढूंढ लिया था ..ये वैसे भी उसका पसंदीदा तरीका था....

वो बिलकुल खिड़की के पास ही स्लेप पर दोनों हाथ टिकाकर....अपने सेक्सी चूतड़ों को उठाकर झुककर खड़ी हो हो गई...

उसका पिछला हिस्सा चीख-चीख कर कह रहा था कि आओ इसमें किसी भी छेद में अपना लण्ड डाल दो...

बस मैंने कुछ नहीं सोचा...और उसकी पतली कमर पर दोनों हाथ टिकाकर उसे दबाते हुए अपना तना हुआ लण्ड उसके पीछे से चिपका दिया...

और मैं खिड़की के बाहर उस शख्स को ढूंढ़ने की कोशिश करने लगा....जो शायद एक साइड में ही खड़ा था.....

तभी जूली ने खुद ही, वो अपने सीधे हाथ को नीचे अपनी जांघो के बीच ले गई.... और थोडा सा झुककर मेरे लण्ड को पकड़ अपने चूत के छेद के मुहाने पर रख अपनी ऊँगली के नाखून से लण्ड को कुरेदा...

जो मेरे लिए धक्का लगाने का संकेत था... तभी मुझे वो जनाव भी दिख गए...

वो बहुत मजे से बिलकुल कोने में बैठे ...खिड़की की जाली से पूरा मजा ले रहे थे...उसकी नजर हमारी ओर नहीं थी वो सीधे जूली की चूत को बदस्तूर घूर रहे थे...

बस यही वो समय था जब मैंने अपनी कमर को एक झटका दिया....

हाआप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प् की आवाज के साथ मेरे लण्ड का सुपाड़ा चूत में चला गया.....जूली ने हलकी सी सिसकी के साथ अपने चूतड़ और भी ज्यादा पीछे को उभार दिए....

मैंने इस बार थोडा और तेज धक्का लगाया और पूरा लण्ड उसकी चूत में समां गया....

जूली: अहा!

अब मैंने जूली की ओर देखा, साधारणतया वो बहुत तेज सिसकारी लेती है.....मगर आज केवल अहा! ..

ऐसा नहीं कि दर्द के कारण वो ऐसा करती हो....वल्कि उसको बेडरूम में चुदाई के समय सेक्सी आवाजें निकलने अच्छा लगता था...

और वो ये भी अच्छी तरह जानती थी कि इस तरह की आवाजों से उसका साथी ज्यादा उत्तेजित हो और भी तेज धक्के लगाकर चुदाई करता है ....

मगर आज हलकी आवाज का कारण वो आदमी था..

मैंने देखा जूली बिना पलक झपकाए उसको देख रही है जो ऐसा लग रहा था कि बिलकुल हमारे सामने बैठा हो ...

वो खिड़की के कोने में नीचे बैठा हुए...जाली से चिपका था...और कम्बख्क के नजर पूरी तरह जूली के चूत पर ही थी...

उसने उसकी चूत में मेरे लण्ड को घुसते हुए पूरा साफ़ देखा होगा....

पर मेरी नजर तो जूली पर थी..न जाने वो क्या सोच रही थी ...उसकी नजर उस शख्स पर ही थी...मगर वो अपना कोई अंग छुपाने कि कोई कोशिश नहीं कर रही थी .....वल्कि और भी ज्यादा दिखा रही थी....

ना जाने उसकी ये कैसी उत्तेजना थी...जो उसे ये सब करने को प्रेरित कर रही थी]

अब मैंने लयबद्ध तरीके से उसकी कमर को पकड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए....

अहहहआआ ओहूऊओ ओह अहा ह्ह्ह्ह ओह्ह ह्ह्ह्ह

अह्ह्हा अह्ह्ह ओह्ह्ूओ हम दोनों ही आवाज के के साथ चुदाई कर रहे थे......

और वो अजनबी हमारे हर धक्के का मजा ले रहा था, मुझे पूरा यकीं था कि वो जिस जगह बैठा था उसको मेरा लण्ड चूत में अंदर बाहर जाता साफ़ दिख रहा होगा]....

ये सोचकर मेरे धक्को में और भी ज्यादा गति आ गई और जूली की सिस्कारियों में भी .....

अहहआआआआआआआआ ओह ह्ह्हह्हह्हह्हह्ह

आआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह आआआअ

ऊऊऊऊऊओ ओह्ह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

हम पर तो इन आवाजों का पूरा असर हो रहा था पता नहीं उस पर हो रहा था या नहीं....

५ मिनट बाद जूली खुद पोजीशन बदलने को बोलती है और घूमकर ...स्लेप पर बैठ जाती है वो बड़े स्टाइल से अपने दोनों पर खोलकर अपनी चूत का मुँह मेरे लण्ड के लिए खोल देती है...

मैं उसकी रस टपकती चूत को हाथ से सहला एक बार जीभ से चाटता हूँ....

और इस बार सामने से उसकी चूत में अपना लण्ड एक ही झटके में डाल देता हूँ.....

आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआ आआआआ

ओहो हो हो ह्ह्हह्हह्हह्हह्ह अह्हा अह्हा हां

मगर इस तरह मुझे लगा की उस बेचारे को अब केवल एक साइड ही दिख रही थी.......

मैंने जूली की दोनों टांगो के नीचे हाथ डाल उसको अपनी गोद में ले लिया....

हाँ इस सब में मैंने लण्ड एक इंच भी बाहर नहीं आने दिया.... और अब जूली मेरी गोद में लण्ड पर बैठी थी ..

मैं उसको ऐसे ही पकडे हुए खिड़की की और घूम गया..

जूली मेरे से चिपकी थी और उसकी पीठ खिड़की की ओर थी ....

अब बो शख्स आसानी से चूत में लुण्ड को आता जाता देख सकता था...

और मैंने फिर अपनी कमर हिलनी शुरू की..इस बार जूली भी मेरा साथ दे रही थी वो भी मेरे लण्ड पर कूदने लगी....

अह्हा ओह ह्ह्ह्ह आह आए ह्ह्ह्ह ओह ओह ह्ह्ह

दोनों तरफ से धक्के हम दोनों ही झेल नहीं पाये और जूली ने मुझे जकड़ लिया ...

मैं समझ गया कि उसका खेल ख़तम हो गया मेरा भी निकलने ही वाला था...

मैंने उसको फिर से स्लेप पर टिका दिया..... और अपना लण्ड बाहर निकाल सारा माल उसके पेट और चूची पर गिरा दिया......

हमने अभी सांस भी नहीं ली थी कि तभी बाहर से किसी महिला कि आवाज आई ....

कोई अनजान महिला : अजी सुनते हो कहाँ हो ....????
आवाज का असर तुरंत हुआ......वो अजनबी जल्दी से सामने वाले फ्लैट की ओर लपका और साथ ही...

श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ही कर रहा था जैसे उस महिला को चुप करा रहा हो.....

और जूली पूरी तरह खिड़की से चिपकी थी] उसको उस आदमी के बारे में जानने की कुछ ज्यादा ही उत्सुकता थी]

उसको इस बात का भी ख्याल नहीं था की हम रोशनी में हैं और बाहर वाले को अंदर का सब दिख रहा होगा..

जूली किस अवस्था में थी ये तो आप सभी को पता ही है.....

तभी जूली के मुख से आवाज निकली.....

जूली: अरे ये तो तिवारी आंटी थीं.......

मैं: क्याआआआआ

जूली: जरूर ये तिवारी अंकल ही होंगे.....मैंने पहले भी उनको कई बार इस जगह घूमते और स्मोक करते देखा है....

वो पूरी तरह स्योर थी.....

तिवारी अंकल एक रिटायर्ड अफसर थे] वो ३ साल पहले सेल्स इंस्पेक्टर से रिटायर हुए थे] अंकल और आंटी दोनों ही यहाँ रहते थे]

अंकल तो ६५ साल के थे पर आंटी जिनको मैं और जूली भाभी ही कहकर बुलाते थे...शायद ४० की ही थीं..

तिवारी अंकल की वो दूसरी बीवी थीं ... पहली बीवी शायद बीमारी के कारण स्वर्ग सिधार गई थी....

उनकी दूसरी बीवी जिनका नाम शीला भाभी है, बहुत खूबसूरत थी, उन्होंने खुद को बहुत मेन्टेन कर रखा था.....

by chance मैंने और जूली दोनों है एक बार उनको बिना कपड़ो के भी देख लिया था....लेकिन वो किस्सा बाद में अगर आप लोगों ने कहा तो......

तिवारी अंकल के दो ही बेटियां थीं एक की शादी तो उन्होंने कनाडा की है और दूसरी अभी MBA कर रही है....

दोनों ही उनकी पहली पत्नी से हैं... और बहुत ही मॉडर्न एवं खूबसूरत.....

ये उनका थोड़ा सा परिचय था....चलिए यथार्थ में लौटते हैं..............

मैं जूली को गोद में उठाकर नीचे उतरता हूँ...वो मेरे सीने से चिपकी हंस रही थी.....

मैं: हँसते हुए.....चलो यार आज तुम्हारी वजह से तिवारी अंकल कुछ तो गर्म हुए होंगे.....
और शीला भाभी की सुलगती जवानी पर कुछ तो आराम मिलेगा...हाहाहा

जूली: तुम भी ना ...मैं तो ये सोच रही हूँ ...कि कल मैं उनका सामना कैसे करुँगी.....

मैं: क्या जान तुम क्यों शरमा रही हो ...तुम तो पहले कि तरह ही बिंदास रहना....उनको पता ही नहीं होने देना कि हमने उनको देखा....

जूली: हाँ हाँ आप तो रहने ही दीजिये....आपको क्या पता ...पहले ही उनको नजर मेरे को चुभती रहती थी ...हमेशा मेरे कपड़ो में ही देखते रहते थे...

और आज तो उन्होंने सब कुछ देख लिया.... अब तो जब भी दिखेंगे ऐसा लगेगा जैसे कपड़ो के अंदर ही देख रहे हों....

मैं:हम्म्म जान,
मुझे तो डर है कि कहीं इधर उधर कुछ गलत न कर दें ...ऐसे आदमियों का क्या भरोसा अब जरा ध्यान रखना....

जूली: अरे नहीं, वो तो आप रहने दो .... उतनी हिम्मत तो किसी की नहीं.....बस मुझे जरा सी शरम ही आएगी जब भी उनके सामने जाउंगी....

मैं: छोडो भी यार, अब किस बात की शर्म सब कुछ तो उन्होंने देख ही लिया ही... अब तो उनको टीस करना यार....

जूली: हाँ ये भी ठीक है...मैं तो उनकी शर्मिंदी का ही मजा लुंगी....जूली ने कास कर मुझे चूम लिया...
अच्छा आप फ्रेश हो लो मैं दूध और ड्राई फ्रूट्स लाती हूँ ..

मैं उसके चूची को मसलता हुआ ...

मैं : ये तो पहले से गरम हैं जान यही पिला दो...

जूली: मेरे बालों को नोचते हुए... ये सब तो आपका ही है जानू .... जितना चाहे पी लेना ...पर अब आप फ्रेश तो हो....

मैं उसकी चूत में ऊँगली करते हुए ...क्यों तुमको नहीं फ्रेश होना...

जूली: हाँ हाँ बस आप चलो, मैं ये निपटाकर आती हूँ...

मैं: जरा ध्यान से कहीं तिवारी अंकल न आ जाएँ...
हाहाहा

जूली: हाँ बहुत दम है ना उनमें...उनको तो शीला भाभी ने ही निपटा दिया होगा...और क्या पता वहां भी ढेर हो गए हों ....मैं तो बेचारी उनके बारे में ही सोच रही हूँ.....

अच्छा अब आप जाओ न बहुत रात हो गई है...

और मैं अपनी अंगी बीवी को किचिन में छोड़ अपने बैडरूम में आ बाथरूम में घुस जाता हूँ...

वाकई बहुत मजेदार रात थी ...मेरे दिमाग में अब आगे के विचार चल रहे थे..
इस जबरदस्त चुदाई के बाद रात भर जूली मेरे से चिपकी रही, और बिस्तर पर नंगे चिपककर सोने का मजा ही अलग है]

सुबह जूली जल्दी उठ जाती है, वो सभी घरेलु कार्य बहुत दिल से करती है......

वो जब उठी तो आज पहली बार मेरी आँख भी जल्दी खुल गई...या यूँ कहिये कि मैं बहुत सोच रहा था कि कैसे अब सब कुछ किया जाये....

जूली ने धीरे से उठकर मेरे चेरे की ओर देखा फिर मेरे होंठों को चुम लिया....

उसने बहुत प्यार से मेरे लण्ड को सहलाया और झुककर उसपर भी एक गरम गरम चुम्बन दिया...

उसके झुकने के कारण पीछे से उसके मस्त नंगे चूतड़ और चूतड़ के बीच झलक रही गुलाबी, चिकनी चूत देख मेरा दिल भी वहां चूमने का किया....
पर मैंने अपनेआप पर कंट्रोल किया और सोने का बहाना किये लेटा रहा.....

मैं बंद अधखुली आँखों से जूली को देखते हुए अपनी रणनीति के बारे में सोच रहा था....कि मस्ती भी रहे और इज्जत भी बनी रहे....

जूली मेरे से खुल भी जाए....वो मेरे सामने मस्ती भी करे परन्तु उसको ये भी ना लगे कि मैं खुद चाहता हूँ कि बो दूसरे मर्दों से चुदवाये.....

पता नहीं मेरे ये कैसे विचार थे कि दिल मेरी प्यारी बीवी को दूसरे मर्दों की बाँहों में देखना भी चाहता था...
उसको सब कुछ करते देखना चाहता था...

पर ना जाने क्यों एक गहराई में एक जलन भी हो रही थी .... कि नहीं मेरी बीवी की नाजुक चूत और गांड पर सिर्फ मेरा हक़ है...इस पर मैं कोई और लण्ड सहन नहीं कर सकता....

लेकिन इंसान की इच्छा का कोई अंत नहीं होता और वो उसको पूरी करने के लिए हर हद से गुजर जाता है...

जूली को भी दूसरी डिशेस अच्छी लगनी लगी थीं..उसने भी दूसरे लण्डों का स्वाद ले लिया था...

वो तो अब सुधर ही नहीं सकती थी...अब तो बस इस सबसे एक सामजस्य बनाना था....

ट्रिनन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न
तभी घंटी बजने की आवाज आई...

जूली बाथरूम में थी वो फ्रेश होने गई थी ,,, मैं उठने ही जा रहा था कि फ्लशह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज आई ...

मतलब जूली ने भी घंटी की आवाज सुन ली थी...

मैंने सोचा ना जाने कौन होगा? .....

जूली वैसे ही नंगी बाथरूम से बाहर आई ....मैं फिर से सोने का बहाना कर लेट गया ....और सोचने लगा..

क्या जूली ऐसे ही या कैसे दरवाजा खोलेगी...और इस समय कौन होगा.....

इतने समय में मैंने कभी घर के किसी कार्य से कोई मतलब नहीं रखा था....जूली ने सबकुछ बहुत अच्छी तरह से व्यवस्थित किया हुआ था.....

जूली नंगी ही बाहर की तरफ बड़ी .....

मैं आश्चर्यचकित था कि ये क्या ऐसे ही दरवाजा खोलेगी .....और सुबह सुबह आने वाला है कौन ..

कोई पुरुष या महिला ......मैं सब कुछ से अनजान था ...

मैं चुपके से उठकर बैडरूम से दरवाजे के पीछे से देखता हूँ....

जूली अपना रात वाला गाउन उठा कर पहन रही थी ...अरे भाई वो रात किचिन में ही रह गया था...

मगर गाउन तो उसका पूरा पारदर्शी ही था.....और उसने नीचे ब्रा या कच्छी नहीं पहनी थी....

उसके सभी कोमल अंग बड़े सेक्सी अंदाज में अपनी उपस्थिति बता रहे थे....

मैं उसकी हर अदा और हर हरकत पर नजर रखे था...

उसने दरवाजा खोला .....सामने एक लड़का था ...
ओह वो कॉलोनी कि दूकान में ही काम करता है...
अंडे और ब्रेड लेकर आया था....

वो मुस्किल से ******* (***Edited***) साल का ही होगा..
मगर मैंने उस लड़के कि आँखों में भी जूली को देखने कि एक चमक देखी.....

कोई और समय होता तो शायद मैं जूली को ऐसे कपड़ों में दरवाजा खोलने पर डांटता.... पर अब स्थिति बदल गई थीं .....

मैंने देखा जूली ने बाहर किसी से मॉर्निंग भी कहा ...कौन था ये नहीं पता......

फिर बो अंदर आ फिर किचन में चली गई ....मेरे कुछ आवाज करने से उसको पता लग गया कि ...मैं जाग गया हूँ ...

मैंने देखा उसने सामान किचिन में रख मेरी लुंगी जो किचिन में ही थी... उठा अपने ऊपर कन्धों पर डाल ली...

इसका मतलब वो अब भी मेरे से घबरा रही थी..कि कहीं मैं उसको ऐसे कपड़ों के लिए डाँटूगा ....अब उसको क्या पता था कि मैं बहुत बदल गया हूँ...

मैंने सब विचारों का परित्याग कर केवल अब ये सोचा कि जूली को अपने लिए बहुत खोलूंगा..उसको इस सबमे अगर मजा आता है ....तो मैं भी उसका साथ दूंगा....

पर शायद चुदाई जैसी बात तक नहीं बढूंगा ... वरना बात बिगड़ भी सकती हैं.....

क्युकि मेरे अनुसार फिर शायद जूली बहुत खुलकर सबकुछ करने लगेगी और उसको मेरी बिलकुल परवाह नहीं रहेगी और हो सकता है फिर वो मेरी इज्जत भी ना करे....

तो यहाँ तक तो ठीक है ....मगर उसको इस सबके लिए खोलने में भी समय तो लगेगा ही ....और सब कुछ करने में जूली को तो बिलकुल बुरा नहीं लगने वाला ...ये पक्का था...

इसकी सुरुआत तो रात की चुदाई से हो ही गया था...पर अब इतना करना था ...कि जूली अपनी हर बात मुझसे करने लगे....

वो अपनी हर सेक्सी बात मुझे बताने लगे .....जिससे मेरे पीछे होने वाली घटनाएं भी मैं जान सकूँ....

अब मैं यही सब करना चाहता था... मैं नंगा ही फ्रेश हो किचिन में जूली की ओर बढ़ा.
मैंने किचिन में जाते ही जूली को पीछे से बाँहों में जकड़ लिया]

मैं: (जूली की गर्दन को चूमते हुए..) क्या कर रही हो जान...

मेरा लण्ड फिर खड़ा हो उसकी गांड में दस्तक देने लगा......

जूली: क्या बात है जानू, कल से कुछ ज्यादा ही रोमांटिक हो रहे हो.....क्या बात है ....आज तक तो कभी किचिन में भी नहीं आये और अब हर समय यहीं ......जरूर कुछ तो बात है ....

मैं : हाँ जान .....मैंने अब अपने काम को बहुत हल्का कर लिया है ....और अपनी जो सेक्ट्रेटरी रखी थी ना ..
नीलू ...उसने बहुत काम संभाल लिया है .....

जूली: ओह तो ये बात है, लगता है उसने मेरे बुद्धू राजा को रोमांटिक भी बना दिया है ....

उसने आँखे घूमते हुए बोला ....

केवल ऑफिस का काम ही ना ....फिर लण्ड को पकड़ते हुए ....कुछ और तो नहीं ना ....

मैं अचानक मेरे दिमाग में विचार आया ...) और बोला ....क्या यार जूली ..तुम भी ना .....अब जब हर समय साथ है ...तो सभी काम ही करेगी ना ...

और वो तो मेरी पर्सनल सेक्ट्रेटरी है ... (उसकी चूत को मसलते हुए) तो पर्सनल काम भी ....हाहाहा ...

जूली ने मुझे धक्का देते हुए ....

जूली : अच्छा जी ...खबरदार ...जो मेरा हक़ किसी को दिया तो .....वैसे भी वो छम्मकछल्लो कितना चमक धमक कर आती है ....

मैं: क्या यार तुम भी ना ..कहाँ हक़ वक और पुरानी फैशन की बात करती हो ....अरे जान जरा बहुत मजा लेने में क्या जाता है ....कौन सा मेरा लण्ड घिस जायेगा या उसकी चूस ही पुरानी हो जाएगी ...

जूली: अब तो आप पागल हो गए हो ....लगता है आप पर भी नजर रखनी होगी ...कहीं बाहर कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहे ....

मैं: (उसके उखड़े मूड को देखते हुए ...मामले को थोड़ा रोकते हुए) अरे नहीं मेरी जान बस थोड़ा बहुत मजाक ...बाकि क्या तुमको लगता है कि मैं कुछ करूँगा..

जूली: (मेरे होंठो पर जोरदार चुम्बन लेते हुए) हाँ मेरे राजा ..मुझे पता है... मेरा राजा और उसका ये पप्पू केवल मेरा है ....मगर उस कमीनी पर तो मुझे कोई भरोसा नहीं...

मैं: अरे नहीं जानू क्यों उस बेचारी को गली दे रही हो .. कितना ख्याल रखती है वो मेरा ...

जूली: अरे तो मैं ख्याल रखने को कब मना कर रहीं हूँ ......लेकिन मेरा हक़ नहीं ....

मैंने जूली को कसकर अपनी बाँहों में ले लिया ...अरे मेरी जान मैं और मेरा लण्ड हमेशा तुम्हारे हैं ...किसी चूत में वो दम नहीं कि इ तुमसे छीन सकें...

जूली भी मुझसे चिपक गई ... हाँ जानू मुझे पता है ...थोड़ा बहुत तो सही है मगर (मेरे लण्ड को मुट्ठी में पकड़) ये मैं किसी के साथ नहीं बाँट सकती ...

जूली: अच्छा चलो अब जल्दी से तैयार तो हो जाओ...ये क्या ऐसे नंगु पंगु ...यहाँ खड़े हो ....अच्छा मैं ये खिड़की बंद कर देती हूँ..... वरना सब हमारी रासलीला देख देखकर मजा लेते रहेंगे...

मैंने उसके कन्धों से अपनी लुंगी उठा बांधते हुए ...क्या जान तुम भी ...फिर से .... अरे कोई देखता है तो इसमें हमारा क्या नुक्सान है ....देखने दो साले को ...

जूली: ओह क्या करते हो .... मैंने अभी पुरे कपडे नहीं पहने ...तो ....

मैं: अरे तो क्या हुआ जान, हम अपने घर पर ही तो हैं, कौन सा कोई बाजार में नंगे घूम रहे हैं .... अब इन छोटी छोटी बातों को ना सोचकर केवल मजे लिया करो]

जूली: अच्छा तो क्या अब खिड़की खुला छोड़कर नंगी घूमू ...एक तो पता नहीं कल तिवारी अंकल ने ना जाने क्या क्या देखा होगा ...मैं तो सोचकर ही शर्म से मरी जा रहीं हूँ...

मैं: क्या अदा है मेरी जान की, अरे कुछ नहीं होता मेरी जान तुम तो नार्मल व्यबहार करना .... देखना वो ही झेपंगे...हाहाहा .....
और तुम इतनी खूबसूरत हो मेरी जान. तुमको पता है खूबसूरत चीजें दिखाई जाती हैं ...ना की परदे में रखी जाती हैं....

जूली: हाँ हाँ, मुझे पता है ये सब नीलू को देखकर ही बोल रहे हो ..कितने छोटे कपडे पहनकर आती है वो ..

मैं: अरे यार फिर उसके पीछे...कपडे पहनने वाला नहीं ..वल्कि उसको गन्दी नजर से देखने वाला गन्दा होता है ...ये तो तुम खुद कहती हो ना ...

और मैंने कभी तुमको मना किया कुछ भी या किसी भी तरह पहनने को ....ये हमारा जीवन है चाहे जो खाएं ..या पहने ...हमको दूसरे से क्या मतलब ...

तुमको जो अच्छा लगे करो ना ...

जूली: आप दुनिया के सबसे प्यारे हस्बैंड हो ...पुछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह मुुु हुुुु आआआआ उसने एक लम्बा चुम्मा लिया ...

मैं: वो तो मैं हूँ, मगर मेरी रानी भी काम नहीं है ....मैंने भी उसको अपने से चिपका लिया ....तो जान अब इन खिड़की या दरवाजे से मत डरना ...

हमको किसी से मतलब नहीं, हम अपनी लाइफ मजे करेंगे .....और हाँ जो कुछ भी होगा वो एक दूसरे को भी बताएँगे ....चाहे जो हो ...

जूली: अरे तो मैं कहाँ कुछ छुपाती हूँ, सब कुछ तो ...फिर भी ...हाँ ऐसा वैसा कुछ मत करना ...नहीं तो ...तुको पता ही है ....

मैं: अच्छा धमकी...अरे भाई मैं जब तुमको आजादी दे रहा हूँ तो मुझे भी तो कुछ आजादी मिलनी चाहिए न ..

जूली: ह्म्म्म्म्म चलो थोड़ा बहुत करने की आजादी है ..मगर अपने पप्पू को संभाल कर रखना ....वरना इतने जोर से काटूंगी कि ...कभी मुह नहीं उठाएगा .. हे हे हे ....

मैं: अच्छा जी ....चलो काट लेना ....फिर मुह में तो लेना ही होगा .....हाहाहा

जूली:मारूंगी अब हाँ .... अच्छा चलो अब जल्दी से तैयार हो जाओ ....

मैं: ठीक है जान ....अरे हाँ याद आया कल शायद अमित आएगा डिनर पर ...बता देना अगर कुछ चाहिए तो....

अमित मेरा पुराना दोस्त है वो डॉक्टर है, उसकी कुछ समय पहले ही शादी हुई है .. नेहा से ,.वो ऑस्ट्रेलिया में ही ज्यादा रही है ...इसलिए बहुत मॉडर्न है ....

जूली: अच्छा तो अब तो नेहा के साथ ही आएंगे ..

मैं: हाँ यार बहुत दिन से उसको बुला रहा था तो कल ही उसका फ़ोन आया ...आने के लिए ....

जूली: ठीक है जानू मैं सब तयारी कर लुंगी ....

मैं: और हाँ जरा मॉडर्न कपडे ही पहनना, मैं नहीं चाहता कि अमित के सामने मेरी बीवी ..जो नेहा कई गुना खूबसूरत है जरा भी फीकी लगे ...

जूली: मगर वो तो कितने छोटे कपडे पहनती है ..याद है शादी के चार दिन बाद ही उसने अपनी उस पार्टी में किता छोटा मिडी पहना था ...और सबको अपनी वो चमकीली पैंटी दिखाती घूम रही थी ....

मैं: क्या यार .....मगर मेरी जान उससे कहीं ज्यादा बोल्ड और खूबसूरत है...दरअसल मैं उस साले को दिखाना चाहता हूँ कि हमारे भारत की लड़की उन जैसी फॉरेन में पली भरी से कहीं अधिक खूबसूरत होती हैं बस ....

जूली: ओह ...ठीक है ....अब आप तैयार तो हो ना ...

उसने मुझे बाथरूम की ओर धकेल दिया ...
मैं नहाकर बाहर आया ... जूली बेड पर झुकी हुई मेरे कपडे सही कर रही थी ....

उसका गाउन चूतड़ से आधा खिसक गया था....जो उसके गोल और मादक चूतड़ों की झलक दिखा रहा था ....

मैंने उसके चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए ही कहा..जान आज या कल जब भी अमित आये तो उसको अपने इन जालिम चूतड़ों के दर्शन करा देना ...देखना पगला जायेगा शाळा ...

जूली: मुझे तो लगता है कि अभी तो आप ही पगला गए हैं....कैसी बातें कर रहे हैं.....

क्या उन लोगों के सामने बिना कच्छी के जाउंगी...
वैसे आप चिंता न करें ...मैंने कल कुछ अच्छे सेट का आर्डर दिया है .....आज कोशिश करुँगी ...शायद मिल जाएँ...

मैं: अच्छा तो क्या ब्रा, चड्डी भी आर्डर पर तैयार होने लगे...

जूली: जी हाँ जानू ...अब तो हर चीज फैशन पर आ गई है .....मगर कुछ रुपए दे जाना ...

मैं: ठीक है मेरी जान ....

मैं तैयार होते हुए सोचने लगा कि आज शायद ये फिर उसी दुकान पर जाएगी ....क्या करूँ कैसे करूँ ....

जूली: और हाँ आप ये मत समझो कि आपके दोस्त सीधे हैं वो तो आपके सामने सीधा होने का ढोंग करते हैं ....वरना हम लोगों को मर्दों की सब आदतों के बारे में पता होता है ....

मैं: अच्छा तो कौन शाळा तुमको छेड़ता है ....अभी बताओ ...कमीने को ठीक करता हूँ ...

जूली: बस तुम्हारी इसी आदत के कारण वो तुमसे डरते हैं .... वरना ....

मैं: अरे नहीं जान ... क्या मैं तुमको ऐसा लगता हूँ ...
वो तो थोड़ा काम में बिजी हो गया था ..बस ...

जूली: हाँ हाँ मैं सब समझ सकती हूँ ....जब आप उनसे जरा प्यार से बोलेंगे तो आप उन सबकी नजर को खुद समझ जाएंगे ....

मैं: अच्छा अमित भी ऐसा ही है क्या ....यार वो तो बहुत सीधा लगता है ....

जूली: हाँ मुझे पता है वो कितना सीधा है ....हेहे

मैं: क्या यार पहेलियाँ क्यों बुझा रही हो ..सच बताओ ना ...हमने कल निर्णय लिया था ना कि हम सब कुछ एक दूसरे को बताएँगे ....

इससे हमारे रिस्ता और भी मजबूत होगा ...और अब से हम खुद खुले विचारों के साथ जिएंगे ....एक दूसरे को रोक टोक नहीं करेंगे....

जूली: (मुझे चूमते हुए) अरे जानू, आपको क्या लगता है कि क्या मैं आपसे कुछ छुपाती हूँ ...

मैं: तो बताओ न अमित ने कुछ किया क्या ...

जूली: अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं ...मगर उसकी आदतें भी बाकी सभी मर्दों की तरह ही हैं ....

वैसे भी मेरी मुलकात तो बस दो तीन बार ही तो हुई होगी .....

आपको याद है उसकी शादी के बाद पार्टी में ...उसने कितनी पी ली थी....बस जब वो मेरे साथ डांस कर रहा था, तब उसका व्यबहार उतना सभ्य नहीं था ...

मैं: क्या यार कितने भरी शब्दों का प्रयोग कर रही हो ...खुली भाषा में बताओ न..उसने तुमको क्या किया ..

जूली: ओह तुम भी न ....अरे ऐसा भी क्या बस जब वो मेरे साथ नाच रहा था ....तब ही उसने कुछ शरारत की थीं .....

मैं: अरे नहीं यार वो उस बेचारे ने बहुत पी ली थी ...इसीलिए ..थोड़ा बहुत हाथ लग गया होगा ...

जूली: अच्छा आपको तो बहुत पता है ना ....क्या आपको याद है उस दिन मैंने अपनी वो पतली वाली लाल जींस और सफ़ेद शार्ट टॉप पहना था ...जो कमर तक ही आता है ...

मैं: अरे हाँ जान मैं कैसे भूल सकता हूँ ....

जूली: बस वो नाचते - नाचते बार-बार मेरे कमर पर हाथ रख रहा था ....मैं हटाती तो फिर से टॉप के अंदर कर मेरी नंगी कमर को सहला देता ...

कई बार उसने अपने गाल मेरे गालों से चिपकाये और नाचते हुए चूम भी लेता था ....

मैं: अरे यार ये सब तो नार्मल है न ...

जूली: अच्छा और उसके हाथों का कई बार सरककर मेरे चूतड़ों तक पहुँच जाना और ना केवल सहलाना वल्कि दबा भी देना ...

मैं: हम्म्म तब तो हो सकता है .... मगर ये भी तो हो सकता है की बाकई गलती से ही हुआ हो....

जूली: हाँ गलती से .....अगर गलती से हुआ होता तो आदमी का ये खड़ा नहीं होता ....
(उसने मेरे लण्ड को छूते हुए कहा)

मैं: क्या कहती हो यार ...क्या उसका लण्ड भी खड़ा हो गया था ...क्या तुमने उसको छुआ भी था ....

मैंने अब उसके सामने खुले शब्दों का प्रयोग करने लगा जिससे वो और भी खुल जाये ...वैसे मैंने सुना तो था कि वो बहुत आसानी से सभी लण्ड, चूत जैसे शब्द बोलती है ....

जूली: हाँ जानू जब वो मुझे चिपकाता तो अपनी कमर भी मेरे से चिपका देता था ,,,तो मुझे उसका अहसास तो होगा ना ,,,,

मैं: अच्छा कहाँ लगा उसका लण्ड तुम्हारे ...

जूली: ओह अब ज्यादा क्यों परेसान कर रहे हो ...मेरी जांघ के ऊपर के भाग पर ...
पर मैं चरण दूर हो गई .... बस अब आप जल्दी तैयार हो मैं भी फटाफट तैयार हो आपका नास्ता लगाती हूँ ...

मैं: अच्छा जानू ......

उसके बाथरूम में जाते ही सबसे पहले मैंने अपना रिकॉर्डर पेन ओन कर उसके पर्स में डाला ...

और ये भी सोचने लगा कि यार कैसे आज इनकी उस शॉपिंग को देखा जाए ....

मैंने एक बार फिर बिल पर से उस दुकान का एड्रेस नोट किया और जूली से उसका जाने के समय के बारे में जानने कि सोचने लगा ....

तभी जूली भी बाथरूम से बिलकुल नंगी नहाकर बाहर आ गई ....

जूली में ये दो आदत थीं कि एक तो बो कपडे हमेशा कमरे में आकर ही पहनती थी ...इसलिए बाथरूम से हमेशा नंगी या केवल टॉवल लपेट कर ही बाहर आती थी ...

और रात को सोते हुए मेरे लण्ड पर अपना हाथ रखकर ही सोती थी.....

और ये दोनों आदतें मुझे बहुत पसंद थी....

उसने हल्का सा गाउन ही डाला और हम दोनों ने नास्ता किया ...फिर मैं उसको चूमकर ऑफिस के लिए निकल गया ....
अपने मन में अच्छी तरह सब कुछ सोच विचार कर मैं घर से निकल गया ....

ऑफिस में भी मन नहीं लग रहा था.....दिल में कुछ अलग ही विचारों ने धर कर लिया था ...

मैं किसी भी तरह आज जूली की उस दूकानदार के साथ मुलाकात को देखना चाहता था ....जिसने मेरी सुंदरता की मूरत जूली को ना केवल नंगा ही नहीं देखा था .......वल्कि उसकी गद्देदार, गुलाबी और रसीली चूत एवं गांड को सहलाया था ...

उसकी चोटियों जैसी नुकीली चूचियों को दबाया और निप्पल तक को छुआ था ...

उस दिन तो वो विजय के साथ थी ....जो उस दुकानदार के लिए तो जूली का पति ही था ...

शायद इसलिए वो ज्यादा हिम्मत नहीं कर पाया होगा ...पर आज जब जूली उससे अकेले मिलने मिलेगी ...तो पता नहीं क्या-क्या करेगा ....

इसीलिए आज मैंने जूली के पर्स में वौइस् रिकॉर्डर तो रखा ...परन्तु पैसे नहीं रखे ...जिससे उसकी दुकान पर जाने का कार्यक्रम पता लग सके ...

करीब १२:०० बजे मुझे जूली का फोन आया .....

जूली: अरे सॉरी मैंने आपको परेसान किया ....वो आज आप शायद पैसे देना भूल गए ...वो क्या है कि मैं बाजार आई थी तो .....

मैं: ओह जान ...ये आज कैसे हो गया ....तुम चिंता ना करो ...बताओ तुम कहाँ हो ...मैं भिजवाता हूँ .....

जूली: मैं कश्मीरी मार्किट में हूँ ......

मैं: ठीक है .... १० मिनट रुको .....

................

.............................

मैं वहां पहुंच एक जानकार के हाथ उसको पैसे भिजवा देता हूँ .....

वो उस अंडरगार्मेंट्स की दुकान के बहुत पास थी ....

और आज मेरी जान क्या लग रही थी ....मैंने देखा हर कोई केवल उसे ही घूर रहा था .....

उसने एक स्किन टाइट सफ़ेद कैप्री पहनी थी, जो उसके घुटनो से करीव ६ इंच नीचे थी....और पिंक टाइट सिल्की शर्ट पहनी थी .....

उसने अपने रेशमी बाल खुले छोड़ रखे थे .....और गोरे मुखड़े पर .... पिंक फ्रेम का फैशनेबल गोगल था ..जो उसके चेहरे को हीरोइन की तरह चमका रहा था ...

उसने हाई हील की सफ़ेद कई तनी वाली सैंडल पहनी थी ....कुल मिलाकर वो क़यामत लग रही थी .....

मैंने बहुत सावधानी से उसका पीछा किया .....उसने कुछ दुकानो पर इधर उधर कुछ-कुछ वस्तुओं को देखा ....

मगर कुछ लिया नहीं .....हाँ इस दौरान कुछ मनचलों ने जरूर उसको छुआ ...... वो उसके पास से उसके चूतड़ों को सहलाते हुए निकल गए ....

दरअसल उसकी सफ़ेद कैप्री कुछ पतले कपडे की थी ...जिससे कुछ पारदर्शी हो गई थी ....

उसकी कैप्री से जूली की गुलाबी त्वचा झांक रही थी ...जिससे उसका बदन गजब ढा रहा था ...

इसके ऊपर मेरी जान का क़यामत बदन ....जिसका एक-एक अंग संंचे में ढला था ....

मैं अब जूली के काफी निकट था ...मैंने ध्यान दिया कि उसकी कैप्री से उसकी पैंटी की किनारी का तो पता चल रहा था ....मगर रंग का नहीं ..इसका मतलब आज उसने सफ़ेद ही कच्छी पहनी थी ...

मगर उसकी शर्ट से कहीं भी ब्रा की किसी भी तनी का पता नहीं चल रहा था .....यानि वो बिना ब्रा के ही शर्ट पहने थी ....

तभी उसकी गोल मटोल चूची इतना हिल रही थी ...और जालिम ने अपना ऊपर का बटन भी खोल रजा था ....जिससे गोलाइयों का पूरा आकार पता चल रहा था ....

ज्यादातर लोग उससे टकराने का प्रयास कर रहे थे ...

मैंने आज तक जूली को इस तरह से वाच नहीं किया था .... ये एक अलग ही अनुभव था ....

उसके पीछे चलते हुए ....जूली के एक रिदम में हिलते डुलते चूतड़ को देख ..मेरे दिमाग में बस एक ही ख्याल आ रहा था कि .....

इस दृश्य को देख जब मेरा ये हाल था तो दूसरों के दिल का क्या होता होगा ....

कुछ देर में ही जूली उसी दुकाल में प्रवेश कर जाती है ....

दूकान काफी बड़ी थी ...मैं भी अंदर जा एक ओर खुद को छुपाते हुए .....जूली पर नजर रखे था ...

वो सीधे एक ओर जहाँ कोई मध्यम कद का एक लड़का खड़ा था ....उस ओर जाती है .
मैं इधर उधर देखता हुआ, जूली से छिपता छिपाता ...
उस पर नजर रखे था .....

उन दोनों की कोई आवाज तो मुझे सुनाई नहीं दे रही थी ..... मगर

जूली उस लड़के से बहुत हंस हंस कर बात कर रही थी ...

लड़का भी बार बार जूली को छू रहा था ....और उसकी चूचिओं की और ही देख रहा था .....

जूली बार बार अपनी शर्ट सही करने का बहाना कर उसका ध्यान और भी ज्यादा अपनी चूचियों पर आकर्षित कर रही थी ....

इधर उधर नजर मारते हुए ही मैंने देखा कि एक लड़की बहुत कामुक ढंग से एक छोटी सी ...डोरी वाली कच्छी को अपनी जीन्स के ऊपर से ही बांधकर देख - परख रही थी ....

और दूसरी तरफ एक मोटी सी लड़की ...एक उम्रदराज अंकल को अपनी मोटी-मोटी छातियाँ उभारकर न जाने क्या बता रही थी ....

कुल मिलाकर बहुत सेक्सी दृश्य थे .....

तभी जूली एक और बने पर्दों के पीछे जाने लगी ....मेरे सामने ही उस लड़के ने जूली के चूतड़ों पर हाथ रख उसे आगे आने के लिए कहा ....

मैं अभी उस ओर जाने का जुगाड़ कर ही रहा था ...कि एक बहुत सेक्सी लड़की मेरे सामने आ पूछने लगी ...

लड़की: क्या चाहिए सर ....

मैं: व् वव वो .....

लड़की: अरे शर्माइये नहीं सर ....यहाँ हर तरह के अंडरगार्मेंट्स मिलते हैं .....आपको अपनी बीवी के लिए चाहिए या गर्लफ्रेंड के लिए ....

मैं: अररर्र रे नहीं व् व् वव वव वो क्या है कि ....

लड़की: अरे सर आप तो केवल साइज बताइये .... मैं आपको ऐसे डिज़ाइन दिखाउंगी कि आपकी गर्लफ्रेंड खुश हो जायगी ...और आपको भी .....हे हे ...

मैं: अरे वो क्या है कि मुझे बीवी के लिए ही चाहिए ....और वो अभी यहीं आने वाली है ...मैं उसी का इन्तजार कर रहा हूँ ,,,,

लड़की: ओह ...ठीक है सर ...मैं वहां हूँ ....आप कहें तो तब तक मैं आपको भी दिखा सकती हूँ ....

उसके खुले गले के टॉप से उसकी गदराई चूची का काफी भाग दिख रहा था ....

मैं: (उसकी चूची को ही देखते हुए) क्या?

लड़की: अपना टॉप सही करते हुए ....क्या सर आप भी ...अंडरगारमेंट और क्या .....

मैं: ठीक है अभी आता हूँ .....

उस लड़की के जाने के बाद मैंने पर्दों की ओर रुख किया ...तभी वो लड़का बाहर को आ गया ...

मैंने एक कोने के थोड़ा सा पर्दा हटा ...अपने लिए जगह बनाई ...

चारों ओर देखा किसी की नजर वहां नहीं थी ...ये जगह एक कोने में बनी थी ....

और चारों ओर काफी परदे लगे थे .... मैं दो पर्दो के बीच खुद को छिपाकर ...नीचे को बैठ गया...

अब कोई आसानी से मुझे नहीं देख सकता था ....

मैंने अंदर की ओर देखा ... अंदर दो तीन जमीन पर गद्दे बिछे थे ...एक बड़ी सी मेज रखी थी ....

मेज पर कुछ ब्रा चड्डी से सेट रखे थे ...और दो कुर्सी भी थीं ,,,, बाकि चारों ओर सामान बिखरा था ...

जूली मेज के पास खड़ी थी ..उसके हाथ में एक बहुत नए स्टाइल की ब्रा थी ....जिसे वो चारों ओर से देख रही थी ...

फिर उसने ब्रा को मेज पर रखा ओर एक बार पर्दों को देखा ...फिर अचानक उसने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए ....

माय गॉड ,,,, उसको जरा भी नहीं लगा कि ये एक खुली दूकान है ...

और चारों ओर केवल पर्दों का ही पार्टीशन है .....

जूली बिना किसी डर और शर्म के अपनी शर्ट पूरी निकाल वहीँ मेज पर रख देती है ....

उसका दमकता शरीर अब केवल एक सफ़ेद कैप्री में ....मेरे सामने था .....

उसके पूरी तरह गोलाई लिए हुए चूचियाँ ..और उनपर कामुकता के रस से भरे उसके गुलाबी निप्पल ...ऊपर उठे हुए जो किसी को भी पागल करने के लिए काफी थे ...

इस समय पूरी तरह नग्न मेरे सामने थे .... उसने अपनी चूचियों को एक बार खुद अपने हाथों से मसलकर ठीक किया ....

जैसे टाइट शर्ट में कसी होने से उनको कष्ट हुआ हो और जूली उन दोनों को सहलाकर उनको पुचकार के मना रही हो ....

कुल मिलाकर बहुत सेक्सी दृश्य था....

फिर वो अपनी ब्रा को उठा उसे ...उलट पुलट कर पहनने के लिए देखने लगी ....

तभी वो लड़का बिना कोई आवाज लगाये अंदर आ गया ....

जूली शरमाते हुए...अपनी ब्रा को चूची पर रख उनको छुपाने का नाकामयाब प्रयास करते हुए ).... अररर रा एक मिनट ....ववव वो मैं पहन ही रही थी ...

लड़का: क्या मैडम जी आप भी अभी तक शरमा रही हो ....

लाइए मैं सही कर देता हूँ ....

उसके हाथ में एक क्रीम का डब्बा था ....

वो उसको खोल उसमें से क्रीम निकाल जूली की ओर बड़ा और बहुत अधिकार से उसके हाथ से ब्रा ले वापस मेज पर रख देता है ...

जूली बुरी तरह शरमा रही थी .....मगर उसकी आखों में लस्ट साफ़ दिख रहा था ....

लड़के ने अपने एक हाथ से जूली के हाथो को उसकी चूची से हटाते हुए ...अपना सीधे हाथ में लगी क्रीम उसकी चूची के ऊपरी भाग में मालनी शुरू कर दी ...

बहुत रोमांचित अनुभव था ....एक पब्लिक प्लेस में ..मेरे सामने ...मेरी सेक्सी बीवी टॉपलेस खड़ी थी ..

और एक अनजान लड़का उसकी नंगी चूचियों पर क्रीम लगा रहा था ....मेरी बीवी क्रीम लगवा भी रही थी और शरमा भी रही थी ....

जूली: अह्हाआ क्या कर रहे हो .... क्यों यो ओ ???

लड़का: अरे मैडम जी नई ब्रा है ..... और ये विदेशी कपडे की है ....आपकी इतनी मुलायम त्वचा को कोई नुक्सान ना हो इसीलिए ये लगा रहा हूँ ...

जूली: ओह ठीक है ....

बस इतना सुनते ही उस लड़के हाथ अब पूरी चूची पर चलने लगे ....

जूली: अहा धीरे धीरे .....

जूली ने अपने चूतड़ मेज पर टिकाकर अपने दोनों हाथ से मेज को पकड़ लिया ...

इस अवस्था में जूली की दोनों चूची और भी ज्यादा ऊपर उठ गई ....

उस लड़के ने अब अपने दोनों हाथों में क्रीम ले ली ...
और जूली की दोनों चूची अपने हाथों में ले मलने के वहाने से मसलने लगा ....

जूली ने अपनी आँखे बंद कर ली थी ...और उसने मुह से हलकी सिसकारी भी निकल रही थी ...

साफ़ लग रहा था ...जूली को बहुत आनंद आ रहा है ...
मैं खुद को पूरी तरह से छुपाये हुए जूली की रासलीला देख रहा था ......

जूली को देखकर कतई ये नहीं लग रहा था कि वो परेशान हो रही हो या उसको किसी का डर हो ...

उसकी बंद आँखों और मुँह से निकलती हलकी आहों से यही प्रतीत हो रहा था कि उसको मजा आ रहा है .....

जूली : अहाआआ क्या कर रहे हो ..बस्स्स्स्स ना

लड़का: हाँ मेडम जी बस हो ही गया ...आप ये वाली क्रीम ले लेना ...इससे बॉडी चमाचम हो जाती है और नए कपडे से को निसान भी नहीं पड़ता ...

उसने जूली के चारों ओर ब्रा वाले भाग पर क्रीम मलते हुए ही बोला .....

अब लड़के का हाथ उसकी चूची से फिसलता हुआ नीचे उसके समतल पेट पर था ....

उसने पूरे पेट पर मालिस करने के बाद उसकी सबसे खूबसूरत और गहरी टुंडी में अपनी ऊँगली दाल दी ...

जूली: अहाआआआआआआ इइइइइइइइइइइ
जूली ने कसकर उसका हाथ पकड़ लिया....

लड़का: अर्र्र्र्र्रीईईए मैडमजी इसको चमका रहा हूँ ......

जूली: बस्स्स्स्स्स्स्स अब रहने दो ... मैं पहन कर बताती हूँ कि सही है या नहीं ....

लड़का ने जबरदस्ती अपना हाथ छुड़ाते हुए.... अपने बाएं हाथ से जूली का हाथ पकड़कर अपना सीधा हाथ आगे से उसकी कैप्री में डालने का प्रयास करने लगा ..

जूली: ओह नहीईईईईईईईई ये क्या कर रहे हो ...वहां नहीं ........

लड़का: अरे क्या मैडम जी आप ऐसा क्यों कर रही हो ..यहाँ कोई नहीं आएगा ....

उसने थोड़ा और जोर लगाकर अपना हाथ कुछ इंच और उसकी कैप्री में अंदर को सरका दिया ...

एक तो पहले से ही जूली ने अपनी कैप्री अपनी टुंडी से काफी नीचे पहनी थी ....और इस समय उस लड़के का हाथ करीब ५-६ इंच तो उसकी कैप्री में था ...

मेरे हिसाब से उसकी उँगलियों का अगला भाग जूली की चूत के ऊपरी हिस्से तक तो पहुंच ही गया था ...

और ये भी पक्का था कि बो नंगी चूत को ही छू रहा होगा ///क्युकि जब हम ऊपर से हाथ घुसाते हैं तो हाथ कैप्री एवं कच्छी के भी अंदर गया होगा ...

परन्तु आज शायद जूली पूरे मूड में नहीं थी ..उसने अपना दूसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ लिया और जोर लगाकर अपनी कैप्री से बाहर खीच लिया ...

जूली: मैंने मना किया न ..... मैं केवल ब्रा चेक करुँगी ...बस पैंटी घर जाकर चेक करके बता दूंगी ...यहां नहीं ..

लड़के का मुँह देख लग रहा था जैसे उसके हाथ से ना जाने कितनी कीमती चीज छीन ली गई हो ...

जूली: ओह ज़मील आज मुझे जल्दी जाना है .... फिर कभी तुम घर आकर आराम से चेक कर लेना ....

और जूली ने झुककर उस लड़के के मुँह पर चूम लिया ..

बस अब तो जमील की प्रसन्नता का गुब्बारा फट पड़ा..

उसने जूली को कसकर अपनी बाँहों में भर लिया ...

उसने अपनी कमर जूली के चूत वाले भाग पर घिसते हुए ही बोला ....

लड़का: मैडम जी कल से आपकी याद में मेरा लण्ड खड़ा ही है ...ये साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा ...

साफ़ लग रहा था कि वो अपना लण्ड जूली कि चूत पर रगर रहा था ...चाहे कैप्री के ऊपर से ही ...

लड़का: मैडमजी जब से आपकी इतनी प्यारी चूत देखी है .... मेरा लण्ड ने तो जिद्द पकड़ ली है कि एक बार तो वहां जरूर जाऊँगा ...

जूली: ओह छोडो ना

लड़का उसको और कसकर चिपकते हुए ....) सच मेमशाब मैंने पूरी जिंदगी इतनी प्यारी और चिकनी चूत नहीं देखी ....

यहाँ बाहर मेरे यहाँ ६-७ लड़कियां काम करती हैं मैं सबको यहीं कई बार चोद चुका हूँ ...

मगर सबकी चूत आपकी चूत के सामने बिलकुल बेकार है ....

सच कहूँ कल एक बार आपकी चूत छूने से ही मेरा पानी निकल गया था ...

और आपके पति भी कितने अच्छे हैं उन्होंने खुद अपने हाथो से मेरे को मजा करवाया ...

जूली: ओह नहींंंंंंं

लड़का: अहा हा ह्ह्ह्ह्ह्ह सही मैडम जी ...मैंने ३-४ शादीसुदा को भी चोदा है और मेरी दिली इच्छा थी कि काश मैं उनको ..उनके पति के सामने चोदूँ ....

पर वो सभी ना जाने क्यों डरती हैं ....सुसरी चुद्वाते हुए तो खूब आवाज करेंगी पर पति से कहने से भी डरती हैं ...

पर आप एक दम अलग हो आप तो अपने पति के सामने ही मजा करती हो ....

आपको तो भाई शाब के सामने ही चोदूंगा ....

तभी अचानक जूली ने उसको कसकर धक्का दिया ...वो पीछे को हो गया ...

जूली: बस बहुत हो गया ... अब मुझे जाने दो ...
और हाँ वो मेरे पति नहीं थे समझे ....
तुम अपना काम करो .... मैं ऐसी वैसी नहीं हूँ ...

लड़का: ओह सॉरी मैडम जी ....वो मैं समझा इसीलिए .. इसका मतलब ......

जूली ने जल्दी से अपनी शर्ट पहनी ओर ...जल्दी जल्दी वहां से वाहर निकल गई ....

मैं और वो लड़का भौचक्के से उसको जाता देखते रह गए ...

कि अचानक ये हुआ क्या ??????
मैं वहां खड़ा अभी जूली के बारे में सोच ही रहा था ,,,कि ये अचानक उसको क्या हुआ ....

वो चुदवाने को मना तो कर सकती थी ...मगर इस तरह ...अपने नए वाले कच्छी, ब्रा भी छोड़कर यूँ भाग जाना ....

जरूर कोई बात तो है ....

मैं वहां से निकल ...जूली के पीछे जाने की सोच ही रहा था ...और उस लड़के जमील के हटने का इन्तजार कर रहा था ....कि .........

लगता था कि जमील कुछ ज्यादा ही गर्म हो गया था ...उसने अपना लोअर नीचे कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया ....

उसका लण्ड कुछ बहुत ही अजीव सा था .... ६-७ इंच लम्बा और शायद २.५ से ३ इंच मोटा ...पर उसका सुपाड़ा बहुत खतरनाक था ...एक तो मुस्लिम लण्ड की तरह बिलकुल खुला और बहुत मोटा ...

मुझे लगा की इसके लण्ड का ये अगला भाग ...अच्छी अच्छी चूतों की चीख निकाल देता होगा ...

और खास बात ये थी कि लण्ड बहुत अजीव कर्व लिए था ...एक दम सीधा नहीं था ....

तो इस समय वो अपने लण्ड को सहलाते हुए ही बात भी कर रहा था ... जैसे उसको समझा रहा हो ...

लड़का: ओह मेरे यार मैं क्या करूँ ...साली, अच्छी खासी पट गई थी .... मगर ना जाने क्या हुआ ...पुछ मान जा ...फिर किसी दिन दिलाऊंगा ....

मैं अभी ये सोच ही रहा था ....कि क्या जूली को उसके इस भयंकर लण्ड का आभास हो गया था ... जो वो ऐसे भाग गई .....

कि तभी उस लड़के और मेरी नजर एक साथ ही सामने एक परदे पर पड़ी .....

वहां एक लड़की जो शायद उसी दूकान पर काम करती थी ...दिखी..जो छुपकर, जाने का प्रयास कर रही थी ...

लड़का: ऐ एएए शवाना...इधर आ .....तू क्या कर रही है ...यहाँ ......

मैं स्थिति को समझने का प्रयास कर ही रहा था .... और ये भी सोच रहा था .. कि उस लड़के के पास आ गई थी ...

मगर वो अभी भी लण्ड को अपने हाथ से पकडे उससे बात कर रहा था ...उसने अपना लण्ड अभी तक लोअर के अंदर नहीं किया था .....

शवाना: वो सर मैं तो आपको ये ढूंढ रही थी ये सामान दिखाना था ... उसके हाथ में दो ब्रा थीं .....

शवाना कोई ५ फुट छोटे कद की, पतली दुबली ...सांवले रंग की थी .... उसके पहनावे और मेकअप से लग रहा था कि वो एक गरीब परिवार की होगी ..

उसने एक सस्ती सी झीनी काले रंग की कुर्ती और सफ़ेद टाइट पजामी पहनी थी ... कुर्ती से उसकी ब्रा साफ़ दिख रही थी ...

उसने अपने कंधे तक के बालों को खुला छोड़ रखा था ...जो कुछ बिखरे हुए भी थे .....

उसकी चूचियाँ तो कुछ खास नहीं थीं ..कुर्ती से हलकी सी ही उभरी हुई दिख रही थीं ...

मगर हाँ उसकी गांड काफी उभरी हुई दिख रही थी ...जो उसके पूरे शरीर का सबसे आकर्षक भाग था ..

तभी ............

रिंग टोन $$$$$$$$$$$$$
वहां एक मोबाइल बजता है

लड़का: रुक तू अभी ....ये तो उसी का फोन है ....

हाँ मैडमजी क्या हुआ आप इतना नाराज क्यों हो गई ...अगर मुझसे कोई गलती हो गई हो तो माफ़ कर दो ... अपना सामान तो ले जाती ....

.............ओह ये तो जूली का ही फोन था ..... मैंने रात को अपने वॉयस रिकॉर्डर से जान लिया था ...कि जूली ने उससे क्या बात करी थी ...जो यहाँ बता रहा हूँ ...

जूली: अरे मैं तुमसे नाराज नहीं हूँ .....वो वहां कोई खड़ा था ना ...इसलिए मैं आ गई .... मुझे बहुत शर्म आ रही थी ...वहां ...

लड़का: अरे मैडम जी ये कोई नहीं ...शवाना ही थी ..आप ही के कपडे लेकर आई थी ..... ये यहाँ सिलाई का काम करती है ...
इससे न डरो .... आप आ जाओ ...

जूली: अरे नहीं अब नहीं और वहां मुझे अच्छा नहीं लगा ...तुम्हारे यहाँ एक चेंज रूम भी होना चाहिए ना ..

लड़का: अब क्या करूँ मैडम जी ...वो हो ही नहीं पाया ..मगर आप डरो नहीं ..यहाँ कोई नहीं आता ..केवल यही सब ही आती हैं... बस ...

जूली: छोड़ो ये सब तुम ऐसा करना, मैं बता दूंगी ...मेरे घर ही भिजवा देना ...या खुद ही ले आना ..मैं वहीँ चेक करके बता दूंगी ....

लड़का: ठीक है मैडम जी बताओ .. कहाँ????.........मैं अभी आ जाता हूँ ....

जूली: अरे अभी तो नहीं ... मुझे अभी बाजार में ही काम है ... और फिर इनके ऑफिस जाना है ...
फिर १-२ दिन में बता दूंगी ....

लड़का: ओह मैडम जी ...ये तो बहुत बुरा हुआ ....इस शाली की वजह से ... वो शवाना को बालों से पकड़ अपने लण्ड पर झुका देता है .... जो फिर से तन गया था ...

और इस समय कहीं ज्यादा भयंकर हो गया था .... ये शायद जूली की सेक्सी आवाज के कारण हुआ था ...

शवाना भी उसके लण्ड को अपने हाथ से पकड़ झुक ....उसको पुचकारने लगती है ....

मैं उस लड़के की किस्मत पर रस्क करने लगता हूँ ...कि क्या किस्मत है साले की ...

अभी कुछ देर पहले मेरी बीवी के मम्मो को मसल रहा था ...और अब इस लड़की से अपना लण्ड चुसवा रहा है ....

शवाना कि पीठ मेरी ओर थी ...जब वो झुकी तो उसकी कुर्ती उसके मोटे चूतड़ों से ऊपर सरक गई ...

ओह माय गॉड ....उसके विशाल चूतड़ केवल सफ़ेद टाइट पजामी में मेरे सामने थे ....

उसके चूतड़ उसकी उस इलास्टिक वाली पजामी में नहीं समां रहे थे ...

उसके झुकने से उसकी पजामी उसके चूतड़ों से काफी नीचे को फिसल रही थी जिससे उसके चूतड़ों का ऊपरी हिस्सा ...और चूतड़ों कि दरार तक साफ़-साफ़ दिख रही थी ...

उसने एक काली कच्छी भी पहनी थी ...जो पूरी साफ़ उसकी पजामी से दिख रही थी ...

लेकिन उसकी कच्छी बहुत पुरानी थी ...जिसकी इलास्टिक तक ढीली हो गई थी ...

जो उसकी पजामी के साथ ही नीचे को सिमट गई थी ...

इस सेक्सी दृश्य को देख मैं जूली को भूल गया .... सोचा उसको तो बाद में भी देख लेंगे ...पहले इसको ही देखा जाये ....

लड़का अपना लण्ड चुसवाते हुए ...जूली से अभी भी बात कर रहा था ....

लड़का: क्या मैडम जी आप तो मेरा खड़ा करके भाग गई ...अब मैं क्या करूँ....

जूली: तुम पागल हो क्या ? इसमें मैं क्या कर सकती हूँ ...वो तुम समझो ...

मुझे मेरे कपडे चाहिए बस ...बाकि अपना जो भी है वो तुम जानो ...हे हे हे हे हा हा

लड़का: मैडम जी ऐसा ना करो .....

जूली: अच्छा ठीक है फिर बात करती हूँ ...अभी तुम अपना काम करो ...बाई बाई ...

लड़का: ओह नहीईईईईईई मैडम जी ...ये क्या ...

और वो गुस्से में ही ...उस बेचारी शवाना पर टूट पड़ता है ....

लड़का: चल सुसरी तेरी वजह से आज एक प्यारी चूत निकल गई ... चल अब तू ही इसे शांत कर ...

वो उसको उसी मेज पर झुकाकर ...उसकी पजामी एक दम से नीचे खीच देता है ...
मैं बिना पलक झपकाये उधर देख रहा था ...

वो लड़का जमील कैसे शवाना के साथ मस्ती कर रहा था .........

कुछ लड़कियां कपड़ों में बेइंतहा खूबसूरत लगती हैं मगर वो अपने अंदर के अंगों का ध्यान नहीं रखती ...इसलिए कपड़ों के बिना उनमे वो रस नहीं आता ...

मगर कुछ देखने में तो साधारण ही होती हैं, पर कच्छी निकालते ही उनकी गांड और चूत देखते ही लण्ड पानी छोड़ देता है ...

शवाना कुछ वैसी ही थी ..... उसके गांड और चूत में एक अलग ही कशिश थी ...जो उसको खास बना रही थी .....

जमील ने लण्ड चूसती शवाना का हाथ पकड़ ऊपर उठाया और उसको घुमाकर मेज की ओर झुका दिया ...

उसने अपने दोनों हाथ से मेज को पकड़ लिया ... और खुद को तैयार करने लगी ...

उसको पता था कि आगे क्या होने वाला है ....

जमील मेरी बीवी के साथ तो बहुत प्यार से पेश आ रहा था ...
मगर शवाना के साथ जालिमो की तरह व्यबहार कर रहा था ....

वो उन मर्दों में था कि जब तक चूत नहीं मिलती तब तक उसको प्यार से सहलाते हैं ...

और जब एक बार उस चूत में लण्ड चला जाये ..तो फिर बेदर्दी पर उतर आते हैं ...

वो शवाना को पहले कई बार चोद चुका था ...जो कि साफ़ पता चल रहा था ...इसलिए उस बेचारी के साथ जालिमो जैसा व्यवहार कर रहा था ....

शवाना मेज पर झुककर खड़ी थी... उसकी कुर्ती तो पहले ही बहुत ऊपर खिसक गई थी ....

और पजामी भी चूतड़ से काफी नीचे आ गई थी ...

जमील ने अपने बाएं हाथ की सभी उँगलियाँ एक साथ पजामी में फंसाई और एक झटके से उसको ....शवाना के विशाल चूतड़ों से खींच दिया ....

शवाना: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़

उसकी टाइट पजामी एक ही बार में उसकी जांघों से भी नीचे आ गई ....

और शवाना के विशाल चूतड़ ...पूरी गोलाई लिए मेरे सामने थे ....

क्युकि जब उसकी इतनी टाइट पजामी ने बिलकुल साथ नहीं दिया ...जो इतना नीचे सरक ..

तो शवाना की कच्छी क्या साथ देती वो तो पहले ही अपनी अंतिम साँसे गिन रही थी ... वो भी पजामी के साथ ही नीचे आ गई ....

मैं शवाना के विशाल चूतड़ों का दृश्य ज्यादा देर नहीं देख पाया ....

क्युकि उस कमीन जमील ने अपना लण्ड पीछे से शवाना के चूतड़ों से चिपका उसको ढक दिया ..

शवाना: अहा ह्ह्ह्ह नहीं सर व्ववूो नहीं करो .....

जमील: क्यों तुझे अब क्या हुआ .... साली उसको भी भगा दिया और खुद भी नखरे कर रही है ..

शवाना लगातार अपनी कमर हिला जमील के खतरनाक लण्ड को अपने चूतड़ों से हटा रही थी ..

शवाना: नहीं सर बहुत दर्द हो रहा है ...आज सुबह ही अंकल ने मेरी गांड को सुजा दिया है .... बहुत चीस उठ रही है ...

आप आगे से कर लो नहीं तो मैं मर जाउंगी ...

जमील अब थोड़ा रहम दिल भी दिखा ...वो नीचे बैठकर उसके चूतड़ों को दोनों हाथ से पकड़ खोलकर देखता है ...

वाओ मेरा दिल कब से ये देखने का कर रहा था ...

शवाना के विशाल चूतड़ इस कदर गोलाई लिए और आपस में चिपके थे ....की उसके झुककर खड़े होने पर भी ....गांड या चूत का छेद नहीं दिख रहा था ...

मगर जमील के द्वारा दोनों भाग चीरने से अब उसके दोनों छेद दिखने लगे...

गांड का छेद तो पूरा लाल और काफी कटा कटा सा दिख रहा था ...

मगर पीछे से झांकती चूत बहुत खूबसूरत दिख रही थी ...

जमील ने वहां रखी क्रीम अपने हाथ में ली और उसके गांड के छेद पर बड़े प्यार से लगाई ....

जमील: ये साला अब्बु भी न .... तुस्से मना किया है ना कि मत जाया कर सुबह सुबह उसके पास

उसके लिए तो रेश्मा और परवीन ही सही हैं, झेल तो लेती हैं उसका आराम से ....

फरबा लेगी तू किसी दिन उससे अपनी ....

और उसने कुछ क्रीम उसकी चूत के छेद पर भी लगाई ...

मैंने सोचा कि ये साले दोनों बाप बेटे कितनी चूतों के साथ मजे ले रहे हैं ....

फिर जमील ने खड़े हो पीछे से ही अपना लण्ड शवाना कि चूत में फंसा दिया ...

शवाना: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआ इइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ

वो तो दुकान में चल रहे तेज म्यूजिक कि वजह से उसकी चीख किसी ने नहीं सुनी ....

वाकई जमील के लण्ड का सुपाड़ा था ही ऐसा ... जो मैंने सोचा था वही हुआ....

उस बेचारी शवाना कि कोमल चूत कि चीख निकल गई ....

लेकिन एक खास बात यह भी थी कि अब लण्ड आराम से अंदर जा रहा था ...

मतलब केवल पहली चोट के बाद वो चूत को फिर मजे ही देता था ....

मैं ना जाने क्यों ये सोच रहा था कि ये लण्ड जूली की चूत में जा रहा है और वो चिल्ला रही है ...

अब वहां जमील अपनी कमर हिला हिला कर शवाना को चोद रहा था ....

और वहां दोनों की आहें गूंज रही थीं ...

मेरा लण्ड भी बेकाबू हो गया था ... और अब मुझे वहां रुकना भारी लगने लगा ...

मैं चुपचाप वहां से वाहर निकला ...और बिना किसी से मिले दुकान से वाहर आ गया
दूकान से बाहर आते समय मुझे वो लड़की फिर मिली जो मुझे ब्रा चड्डी खरीदने के लिए कह रही थी ....

ना जाने क्यों वो एक टेरी मुस्कान लिए मुझे देख रही थी ......

मैंने भी उसको एक स्माइल दी .... और दूकान से बाहर निकल आया ....

पहले चारों ओर देखा ... फिर साबधानी से अपनी कार तक पहुंचा .... और ऑफिस आ गया ....

मन बहुत रोमांचित था ... मगर काम में नहीं लगा ..

फिर अमित को फोन किया ...उसको आज रात मेरे यहाँ डिनर पर आना था ....

उसने कहा की वो ९ बजे तक पहुंचेगा ...साथ में नीलू भी होगी ....

ये सोचकर मेरे दिल में गुदगुदी हुई .... पता नहीं आज सेक्सी क्या पहनकर आएगी ...

फिर जूली के बारे में सोचने लगा कि ना जाने आज क्या पहनेगी और कैसे पेश आएगी ...

जल्दी जल्दी कुछ काम निपटाकर 6 बजे तक ही घर पहुँच गया ....

जूली ने दरवाजा खोला ....

लगता है वो शाम के लिए तैयारी में ही लगी थी ... और तैयार होने जा रही थी ....

उसके गोरे बदन पर केवल एक नीला तौलिया था .... जो उसने अपनी चूचियों से बांध रखा था ....

जैसे अमूमन लड़कियां नहाने के बाद बांधती हैं .... पर जूली अभी बिना नहाये लग रही थी ....

उसके बाल बिखरे थे .... और चेहरे पर भी पसीने के निसान थे ....

लगता था कि वो बाथरूम में नहाने गई थी ...और मेरी घंटी की आवाज सुन ऐसे ही दरवाजा खोलने आ गई ....

उसकी टॉवल कुछ लम्बी थी तो घुटनो से करीब ६ इंच ऊपर तक तो आती ही थी .. इसलिए जूली की गदराई जांघों का कुछ भाग ही दिखता था ...

मैंने जूली को अपनी बाँहों में भर लिया ...

उसने प्यार से मेरे गाल पर चूमा और कहा अंदर तिवारी भाभी हैं ....

वो रात वाले अंकल याद हैं ना .... उनकी बीवी हम दोनों ही उनको भाभी ही कहते थे ...

अंकल तो ६५ के करीब थे मगर ये उनकी दूसरी शादी थी तो भाभी केवल ४० के आसपास ही थी .....

उन्होंने खुद को बहुत मेन्टेन कर रखा है ... कुछ मोटी तो हैं ....पर ५ फुट ४ इंच लम्बी ,रंग साफ़ , ३७ २८ ३५ की फिगर उनको पूरी कॉलोनी में एक सेक्सी महिला की लाइन में रखती थी...

मैंने जूली से इसारे से ही पूछा कहाँ ....???

उसने हमरे बैडरूम की ओर इशारा किया ...

मैं: और तुम क्या तैयार हो रही हो ...ये टॉवल फकर ही क्यों घूम रही हो ..

जूली: अरे मैं काम निपटाकर नहाने गई थी ... कि तभी ये आ गई ... इसीलिए ...

मैं: और अभी ...मेरी जगह कोई और होता तो ....

जूली: तो क्या .... यहाँ कौन आता है .... ??

तभी अंदर से ही भाभी कि आवाज आती है ...

भाभी: अरे कौन है जूली ... क्या ये हैं ...(वो तिवारी अंकल को समझ रही थी)

तभी वो बैडरूम के दरवाजे से दिखीं....

माय गॉड क़यामत लग रही थी ....

उन्होंने जूली का जोगिंग वाला नेकर और एक पीली कुर्ती पहनी थी जो उनके पेट तक ही थी ....

नेकर इतना टाइट था कि उनकी फूली हुई चूत का उभार ही नहीं वल्कि चूत कि पूरी शेप ही साफ़ दिख रही थी ...

मेरी नजर तो वहां से हटी ही नहीं ...ऐसा लग रहा था जैसे डबल रोटी को चूत का आकार दे वहां लगा दिया हो ....

भाभी कि नजर जैसे ही मुझ पर पड़ी ...

भाभी: हाय राम कह पीछे को हो गई ...

जूली: (बैडरूम में जाते हुए)...अरे भाभी ये हैं ... आज थोड़ा जल्दी आ गए ...

मैंने बताया था न कि आज इनके दोस्त डिनर पर आने वाले हैं ....

मैं भी बिना शरमाये बैडरूम में चला आया ...जहाँ भाभी सिकुरी सिमटी खड़ी थीं ...

मैं: अरे भाभी शरमा क्यों रही हो .... इतनी मस्त तो लग रही हो ...

आपको तो ऐसे कपडे पहनकर ही रहना चाहिए ...

भाभी: हाँ हाँ ठीक है ..पर इस समय तुम बाहर जाओ न मैं जरा अपने कपडे बदल लूँ ...

जूली: हा हा हा क्या भाभी, आप इनसे क्यों शरमा रही हो ....

(मेरे से कहती है ...)

जानू आज भाभी का मूड भी सेक्सी कपडे पहनने का कर रहा था .....

भाभी : चल पागल .... मेरा कहाँ ...वो तो ये एए ...

जूली: हाँ हाँ अंकल ने ही कहा ...पर है तो आपका भी मन ना ...

भाभी कुछ ज्यादा ही शरमा रही थीं ...और अपनी दोनों टांगो की कैची बना अपनी चूत के उभार को छुपाने की नाकामयाब कोशिश में लगीं थीं ...

जूली: जानू आज भाभी मेरे कपडे पहन पहनकर देख रही है ... कह रही थीं की कल से अंकल ज़िद्द कर रहे हैं की ये क्या बुड्ढों वाले कपडे पहनती हो .... जूली जैसे फैशन वाले कपडे पहना करो ... हा हा हा ...

मैं: तो सही ही तो कहते हैं ..हमारी भाभी है ही इतनी सेक्सी और देखो इन कपड़ों में तो तुमसे भी ज्यादा सेक्सी लग रही हैं ...

जूली: हा ह हा ह कहीं तुम्हारा दिल तो खराब नहीं हो रहा ...

भाभी: तुम दोनों पागल हो गए हो क्या? चलो अब जाओ मुझे चेंज करने दो ....

मैं: ओह भाभी कतना शरमाती हो आप ... ऐसा करो आज इन्ही कपड़ों में अंकल के सामने जाओ ..
देखना वो कितने खुश हो जायेंगे ...

जूली: हाँ भाभी ... अंकल की भी मर्जी यही तो है .. तो आज ये ही सही ....

पता नहीं उन्होंने क्या सोचा .... और एक कातिल मुस्कुराहट के साथ कहा ... तुम दोनों ऐसी हरकतें कर मेरा हाल बुरा करवाओगे ....

भाभी: अच्छा ठीक है मैं चलती हूँ तुम दोनों मजे करो ...और हाँ .....खिड़की बंद कर लेना .. ही ही

मैं चोंक गया ....

जूली दरवाजा बंद करके आ गई ...

मैं: ये भाभी क्या कह रही थीं... खिड़की मतलब ...क्या कल ये भी थीं ...इन्होने भी कुछ देखा क्या ...

जूली: अरे नहीं जानू ...हा हा हा आज तो बहुत खुश थी ... कल अंकल ने जमकर इनको .....

मैं: क्या ....?? ये सच है ..इन्होने खुद तुमको बताया ...

जूली: और नहीं तो क्या .... पहले तो शिकायत कर रही थी ... फिर तो बहुत खुश होकर बता रही थी..

कि कल कई महीने के बाद इन्होने मजे किये ...जानू तुम्हारी सैतानी से इनके जीवन में भी रंग भर गया ...

जूली: अच्छा आप चेंज करो मैं बस जरा देर में नहाकर आती हूँ .... अभी बहुत काम करने हैं ...

.........
......

मैंने देखा बेड पर जूली के काफी कपडे फैले पड़े थे....एक कोने में एक सूट (सलवार, कुरता) भी रखा था ....

वो जूली का तो नहीं था ...वो जरूर भाभी का ही था ..

मैंने उस सूट को उठा देखने लगा ... तभी कुछ नीचे गिरा ...

अरे ये तो एक जोड़ी ब्रा, चड्डी थे .... सफ़ेद ब्रा और सफ़ेद ही चड्डी ...दोनों सिंपल बनाबट के थे ...

चड्डी तो उन्होंने पहनी ही नहीं थी ये तो उनकी चूत के उभार से ही पता चल गया था ...
पर अब इसका मतलब भाभी ने ब्रा भी नहीं पहनी थी..
.....

मैंने दोनों को उठा एक बार अपने हाथ से सहलाया ... और वैसे ही रख दिया ....

और भाभी के चूत और चूची के बारे में सोचने लगा ...

तभी मुझे अपने रिकॉर्डर का ध्यान आया ... जूली तो बाथरूम में थी ...

मैंने जल्दी से उसके पर्स से रिकॉर्डर निकाल उसको अपने फोन से जोड़ लिया ...

और सुनते हुए ... अपना काम करने लगा .
मैंने रिकॉर्डिंग सुनते हुए ही अपने सभी कपडे निकाल दिए .... कच्छा भी .....

और टॉवल ले इन्तजार करने लगा .... गर्मी बहुत थी..

सोचा नहाकर ही तैयार होता हूँ ....

आज की रिकॉर्डिंग बहुत बोर थी ...ज्यादातर ब्लैंक ही थी ...

क्युकि जूली अकेले थी तो बहुत जगह आवाज थी ही नहीं .....

मैंने सोचा चलो जूली के साथ ही नहाकर मस्ती की जाये .....

कि तभी ....

ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न टिन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न
ये तो मेरे घर कि घंटी थी .....

कौन होगा ....??????

जूली: कौन है ......

...: खोलो बेटा .....

दरवाजा खुलने की आवाज.........

जूली: ओह्ह आप आइये अंकल .....
गुड मॉर्निंग ...

ये तिवारी अंकल थे ...वो रात वाले ... जिन्होंने पूरा लाइव शो देखा था ....

अंकल: हाँ बेटा .. गॉड ब्लेस्स यू ... पुछ्ह्ह

जूली: अरे अंकल क्या करते हो, मेरे हाथ गंदे हैं ....
वो क्या है कि मैं कपडे धो रही थी ....

अंकल जब भी मिलते थे तो माथे पर किस करते थे ...जो शायद उन्होंने की होगी ...

अंकल: अरे तो क्या हुआ बच्चे .... तभी तू पूरी गीली है ...

जूली: हाँ अंकल, बताइये क्या काम है ....

मैं सोच रहा था कि पता नहीं जूली ने क्या पहना होगा .. और अंकल को अब क्या दिखा रही होगी ?????

अंकल: बेटा वो तेरी आंटी को भी अब तेरी तरह मॉडर्न कपडे पहनने का शौक हो गया है ....

क्या तू उसको बाजार से शॉपिंग करवा देगी .. बा उसको शौक तो हो गया ....पर पता नहीं है कि कहाँ और कैसे ...

तो तू उसकी हेल्प कर देना ...

जूली: हा हा अंकल, उनको या आपको ...

अंकल: अरे मैं तो कबसे उसको बोलता था ... कि तेरी तरह सेक्सी कपडे पहना करे ...

पर मानती ही नहीं थी ...अब खुद कह रही है ....

जूली: क्यों ऐसा क्या हुआ ....???

अंकल: ये तू उसी से पूछना ....

जूली:ठीक है अंकल .....

अंकल: और २-४ ऐसी नाइटी भी दिला देना ... जिसमे सब दिखे .....

जूली: हा हा अंकल आप भी ना ... अब आंटी ऐसे कपडे पहन किसको दिखाएंगी....

अंकल: अरे बेटी कितनी सेक्सी लगती है ना .... मैं चाहता हूँ ...बो तुम जैसी हो जाये ...और जीवन कि मजे करे ....

जूली: ओह छोडो ना अंकल क्या करते हो ???

??????

अंकल: और उसको अपने जैसा बोल्ड भी बना देना कि ...किसी क़े सामने ऐसे कपडे पहन आराम से खड़े हो सके ...

जूली: अच्छा तो क्या आप भी मुझे गन्दी नजर से देख रहे हो ....

अंकल: अरे नहीं बेटा .... मैं तो तेरी तारीफ कर रहा हूँ ......

अगर तेरी आंटी भी तेरे जैसी हो जाये तो मैं तो फिर से जवान हो जाऊंगा ....

जूली: अरे अंकल आप तो अभी भी जवान हो ...ये किसने कह दिया कि आप बूढ़े हो .....

अंकल: ओह थैक्स बेटा ...कल तो तेरी आंटी भी मान गई ...तभी तो ऐसे कपड़ो की ज़िद्द कर रही है ....

जूली: ओके अंकल ...मैं उनको खूब सेक्सी बना दूंगी .. आप चिंता ना करो ....अच्छा अब मुझे देखना बंद करो .. आप आंटी को ही देखना ...हे हे ...

अंकल: अरे नहीं बेटा, तू तो है ही इतनी सेक्सी ..कि हर डैम देखने का दिल करता है ...

जूली: ठीक है अब बहुत देख लिया ... अब मुझे काम करने दो .... बाई बाई ..

अंकल: ओह बाई बेटा .....

.........

.........

बस फिर ज्यादा कुछ नहीं था .....

......................

तभी जूली पूरी नंगी बाथरूम से बाहर आती है ...हमेशा की तरह ....

मुझे देख मुस्कुराती है .....

मैं भी उसको चूमकर ...

मैं: अच्छा जान मैं भी फ्रेश हो लेता हूँ ....

जूली: ओके जानू ....

मैं बाथरूम में चला जाता हूँ .
बाथरूम में जाकर नहाने की तैयारी कर ही रहा था कि मुझे घंटी की आवाज सुनाई दी ...

ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न

मैं सोचने लगा कि अभी कौन आ गया ...अमित तो रात को आने वाला था .....

तभी मेरे दिमाग में आया ..कि जूली तो सिर्फ टॉवल में ही थी .... वो कैसे दरवाजा खोलेगी ....

ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न

एक बार फिर से घंटी बजी ....

इसका मतलब जूली कपडे पहन रही होगी .... इसीलिए कोई बेचारा इन्तजार कर रहा होगा ....

मगर अचानक मुझे दरवाजा खुलने की आवाज भी आ गई ...

इतनी जल्दी तो जूली कपडे नहीं पहन सकती ... उसने शायद गाउन डालकर ही दरवाजा खोल दिया होगा ...

मैं खुद को रोक नहीं पाया .... फिर से रोसनदान पर चढ़कर देखने लगा कि आखिर क्या पहनकर उसने दरवाजा खोला ...

और है कौन आने वाला ...??????????

और मैं चोंक गया .... जूली अभी भी टॉवल में ही थी ..

उसने वैसे ही दरवाजा खोला था ...

और आने वाले तिवारी अंकल थे .... उनके हाथ में जूली के कपडे थे जो भाभी पहनकर गई थी ..,

जूली: ओह आप अंकल .... क्या हुआ ????

अंकल: बेटा लो ये तेरे कपडे ....

जूली: अरे इतनी क्या जल्दी थी .... आ जाते ....
(फिर थोड़ा ब्लश करके मुस्कुराते हुए)
क्यों आपको भाभी अच्छी नहीं लगी इन कपड़ो में ...

अंकल: अरे नहीं सही ही थी .... उसमें इतना दम कहाँ ...ये कपडे तो तेरे पर ही गजब ढाते हैं ....

जूली: अरे नहीं अंकल .... भाभी भी गजब ढा रही थीं ...रवि तो बस उनको ही देख रहे थे ...

अंकल: क्या रवि आ गया .??? उसने बताया नहीं ...

जूली: अरे भूल गईं होंगी ... पर रवि उनको देख मस्त हो गए थे ...

अंकल: अच्छा तो उसने भी ...उसको इन कपड़ों में देख लिया .....

जूली: वैसे सच बताओ अंकल .... आंटी मस्त लग रही थी या नहीं .....

अंकल: हाँ बेटा लग तो जानमारु रही थी ... अब तू कल उसको बढ़िया ...बढ़िया सेट दिलवा देना ...

जूली: ठीक है अंकल .... आप चिंता ना करो ..मैं उनको पूरा सेक्सी बना दूंगी ...

अंकल: अच्छा अब उसके कपडे तो दे दे ... कह रही है वही पहनेगी .... अपनी कच्ची ब्रा भी यहीं छोड़कर चली गई ...

जूली: हाय तो क्या भाभी अभी नंगी ही बैठी हैं ....

(दोनों अंदर बैडरूम में ही आ जाते हैं ...)

अंकल: हाँ बेटा ... जब मैं आया तब तो नंगी ही थी ... जल्दी दे .... कहीं और कोई आ गया तो ... हे हे हे ...

जूली: क्या अंकल आप भी .....
ये रखे हैं भाभी के कपडे ....

अंकल कपड़ों को एक हाथ से पकड़ .....बेड पर जूली के बाकी कपडे और कच्छी ब्रा देख रहे थे ,,,

अंकल: बेटा तू अपनी भाभी को कुछ बढ़िया ऐसे छोटे छोटे ...कच्छी ब्रा भी दिला देना .....

जूली: (थोड़ा शरमाते हुए) ओह क्या अंकल ... आप भी ना .... मेरे ना देख ,

भाभी के कच्छी ब्रा लो और जाइये ... वो वहां नंगी बैठी इन्तजार कर रही होंगी ...

हा हा हा ...

तभी मेरे देखते- देखते अंकल ने तुरंत बो कर दिया जिसकी कल्पना भी नहीं की थी ....

अंकल जूली के टॉवल को पकड़) दिखा तूने कौन से पहने हैं इस समय ....

टॉवल शायद बहुत ढीला सा ही बंधा था .... जो तुरंत खुल गया ....

और मेरी आँखे खुली की खुली रह गईं ....

बैडरूम की सफेद चमकती रौशनी में जूली पूरी नंगी .. एक ६५ साल के आदमी के सामने पूरी नंगी खड़ी थी ...

और वो भी तब जब उसका पति यानि कि मैं ...घर पर .. बाथरूम में था ....

जूली: (बुरी तरह हड़बड़ाते हुए) नहीईईईईईईई अंकल ... क्या कर रहे हो ..... मैंने अभी कुछ नहीं पहना ...

और उनके हाथ से चरण टॉवल खीच .. अपने को आगे से ढकने कि कोशिश कर रही थी ....

अंकल: ओह सॉरी बेटा ... हा हा हा .... मुझे नहीं पता था ....

पर कमाल लग रही हो .....

जूली: अच्छा अब जल्दी जाओ ...रवि अंदर ही हैं ....
(उसने बाथरूम की ओर चुपके से इशारा किया ....और ना जाने क्यों बहुत फुसफुसाते हुए बात कर रही थी)

वो मजे भी लेना चाहती थी ... और अभी भी मुझसे डरती थी ... और ये सब छुपाना भी चाहती थी ...

अंकल भी जो थोड़ा खुल गए थे ...उनको भी शायद याद आ गया था कि मैं अभी घर पर ही हूँ ...

वो भी थोड़ा सा डरकर बाहर को निकल गए ...

अंकल: अरे सॉरी बेटा ....

जूली: अब क्या हुआ ????

अंकल: अरे उसी के लिए ... मैंने तुमको नंगा देख लिया ... वो वाकई मुझे नहीं पता था कि तुमने ....

जूली: अरे छोड़ो भी ना अंकल ... ऐसे कह रहे हो जैसे .. पहली बार देखा हो ...

जूली कि बातें सुन साफ़ लग रहा था ... कि वो बहुत बोल्ड लड़की थी ....

अंकल: हे हे हे ...वो क्या बेटा .... वो तो हे हे अलग बात थी .... मगर इस टाइम तो गजब ....सही में बेटा ... तू बहुत सेक्सी है ....
रवि बहुत लकी है .....

जूली फिर शरमाते हुए ...) ओह अंकल थैंक्स .... अब आप जाओ रवि आते होंगे ....

जूली ने अभी भी टॉवल बाँधा नहीं था .... केवल अपने हाथ से अगला हिस्सा धक ... अपनी बगल से पकड़ा हुआ था .....

अंकल: (फुसफुसाते हुए) बेटा एक बात कहू ...बुरा माता मानें प्लीज़ ....

जूली: अब क्या है ????????

अंकल: बेटा एक बार और हल्का सा दिखा दे ... दिल कि इच्छा पूरी हो जाएगी ....

जूली: पागल हो क्या ??? जाओ यहाँ से जाकर भाभी को देखो वो भी नंगी बैठी आपका इन्तजार कर रही हैं ....
हे हे हे हा हा हा ....

जूली के कहने से कहीं भी नहीं लग रहा था कि उसको कोई ऐतराज हुआ हो .....

अंकल : ओह प्लीज़ बेटा ....

जूली उनको धकेलते हुए ....नहीं जाओ अब ...

अंकल मायूस सा चेहरा लिए .... दरवाजे के बहार चले जाते हैं .....

अब वो मुझे नहीं दिख रहे थे .... हाँ जूली जरूर दरवाजा पकडे खड़ी थी ...जो पीछे से पूरी नंगी थी ...
उसके उभरे हुई मस्त गांड गजब ढा रही थी ...

पर अभी जूली कि शैतानी ख़त्म नहीं हुई थी ...

उसने दरवाजा बंद करने से पहले जैसे ही हाथ उठाया ... उसका तौलिया फिर निचे गिर गया ....

जूली: थोड़ा ज़ोर से ... बाई बाई अंकल ....

माय गॉड ... वो एक बार फिर अंकल को ....

और उस शैतान कि नानी ने अंकल को अपने नंगी बॉडी कि झलक दिखा हँसते हुए दरवाजा बंद कर लिया ...

मैं बस यही सोच रहा था .... कि ये अब रात को अमित को कितना परेसान करने वाली है .
मैं नहाकर बाहर आया .... हमेशा की तरह नंगा ....

जूली की मस्ती को देख मुझे गुस्सा बिलकुल नहीं आ रहा था .... बल्कि एक अलग ही किस्म का रोमांच महसूस कर रहा था ....

इसका असर मेरे लण्ड पर साफ़ दिख रहा था ... ठन्डे पानी से नहाने के बाद भी लण्ड ९० डिग्री पर खड़ा था ...

जूली ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी अपने बाल सही कर रही थी ....

उसने नारंगी रंग का सिल्की गाउन पहना था ...जो फुल गाउन था .... मगर उसका गला बहुत गहरा था ..

इसमें जूली जरा भी झुकती थी तो उसकी जानलेवा चूचियों का नजारा हो जाता था ....

और अगर जूली ने अंदर ब्रा नहीं पहना हो ... जो अक्सर वो करती थी ....

वल्कि यूँ कहो कि घर पर तो वो ब्रा कच्छी पहनती ही नहीं थी .... तो बिलकुल गलत नहीं होगा .....

जब इस गाउन में वो ब्रा नहीं पहनती थी तो ... उसकी गोल मटोल एवं सख्त चूचियाँ उसके गाउन के कपडे को पाकर नीचे कर पूरी तरह से बाहर निकलने की कोशिश करती थी ....

उसकी चूचियाँ भी जूली की तरह ही सैतान थीं ....

मुझे अब ज्ञात हो गया था... कि मेरी जान जूली के इन प्यारे अंगो को ...मेरे घर में आने वाले ही नहीं..... बल्कि बाजार में बाहर के लोग भी देख - देख आनद लेते हैं ...

हाँ मैंने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया था .... वो तो आज विजय के कारण मैं भी इस सबका भाग बन गया था ....

अब मैं जूली को ये अहसास करना चाहता था ... कि मैं भी एक आम इंसान ही हूँ .... और तरह के सेक्स में मजा लेता हूँ ....

मैं कोई दकियानूसी मर्द नहीं हूँ ..... मुझे भी जूली की हरकतें अच्छी लगती हैं .... और आनद लेता हूँ ....

जिससे वो मुझसे डरे नहीं और मुझे सब कुछ बताये ..

मुझे यूँ सब कुछ छुपकर न देखना पड़े ... और मेरा समय भी बचे ... जिससे मेरे काम पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा ....

मैंने सर को पोंछने के बाद टॉवल वहीँ रखा और नंगा ही जूली के पीछे जाकर खड़ा हो गया ....

मैं जैसे ही थोड़ा सा आगे हुआ ... मेरा लण्ड जूली के गर्दन के निचले हिस्से को छूने लगा ....

उसने बड़े प्यार से पीछे घूमकर मेरे लण्ड को अपने बाएं हाथ में पकड़ लिया ...

उसके सीधे हाथ में हेयर ड्रेसर था .... उसने फिर सैतानी करते हुए ....

अपने बाएं हाथ से पूरे लण्ड को सहलाते हुए ... हेयर ड्रेसर का मुह मेरे लण्ड पर कर दिया ....

और गर्म हवा से लण्ड को और भी क्याडा गर्म करते हुए ....

जूली: क्या बात ... कल से पप्पू का आराम का मन नहीं कर रहा क्या ..??????
जब देखो खड़ा ही रहता हैं .... हा हा हा ....

जूली में यही एक ख़ास बात थी .... कि वो हर स्थिति में बहुत शांत रहती थी .... और बहुत प्यार से पेश आती थी ...

तभी अपनी जान की कोई भी बात मुझे जरा भी बुरी नहीं लगती थी .......


मैंने चौंकने की एक्टिंग करते हुए कहा .....

अरे ये क्या जान तुम्हारे कपडे वापस आ गए ... क्या हुआ ..?????

भाभी को पसंद नहीं आये क्या .....या अंकल ने पहनने को मना कर दिया ......

जूली ने मेरे लण्ड पर बहुत गर्म किस करते हुए कहा ...

जूली:हा हा अरे नहीं जानू ...ये तो अंकल ही आये थे ... वो भाभीजी के कपडे यहीं रह गए थे ...न उनको ही लेने ....

और हाँ उनको तो ये कपडे बहुत अच्छे लगे ...और मेरे से ज़िद्द कर रहे थे कि ....भाभी को कई जोड़ी ऐसे ही कपडे दिल देना .... हा हा

मैं: अरे वाह! ये तो बहुत अच्छी बात है .... आखिर अंकल भी नए ज़माने के हो गए ....

अब मैंने जूली को छेड़ते हुए पूछा ...

मैं :. अरे कब आये ...

जूली: जैसे ही आप बाथरूम में गए थे ना तभी आ गए थे ....

उसको लगा मैं अब चुप हो जाऊँगा .... पर मेरे मन में तो पूरी सैतानी आ गई थी ....

मैं: ओह क्या बात ....तो क्या तुमने टॉवल में ही दरवाजा खोल दिया था ....फिर तो अंकल को रात वाला सीन याद आ गया होगा ... हा हा हा

जूली: अररर्र रे वो ओऊ तो आप ये सब सोच रहे हो ... अरे मैं तो सब भूल गई थी ......
हाँ शायद मैं वैसे ही थी ....
पर उनको देख लगा नहीं कि वो ......

हाय राम वो क्या सोच रहे होंगे ...

मैं: ओह क्या यार ... तुम भी ना इस सबसे मजा लो ...
मैं तो चाहता हूँ कि उनकी लाइफ भी मजेदार हो जाए ...
तुम तो भाभी को भी अपनी तरह सेक्सी बना देना ...

अब लगता था कि जूली भी मुझसे थोड़ा मजा लेना चाहती थी ...

जूली: हाँ फिर मेरी एक चिंता और बढ़ जाएगी ...

मैं : वो क्या ...?????

जूली: (हँसते हुए ) हा हा .... कि मेरा जानू कहीं भाभी से भी तो रोमांस नहीं कर रहा ...

मैं: हा हा तो क्या हुआ जान .... कुछ मजा हम भी ले लेंगे .... तुमको कोई ऐतराज ...

जूली: अरे नहीं मुझे क्या ऐतराज होगा .... जिसमे मेरे जानू को खुशी मिले ... उसी में मेरी ख़ुशी है ...

उसने बहुत ही गर्म तरीके से मेरे लण्ड को चूमा ...

मुझे लगा कि अगर मैंने इसको नहीं रोका तो अभी मेरा लण्ड बगावत कर देगा ... और जूली को अभी ही चोदना पड़ेगा ....

मैंने उससे कहा कि चलो फिर आज अमित के सामने इतना सेक्सी दिखना कि वो अपनी नीलू को भूल जाये ......
साला हर टाइम उसकी तारीफ़ ही करता रहता है ...

चलो अब जल्दी से तैयार हो जाओ .
जूली भी मेरी बातों से अब मस्त हो गई थी ... उसका डर धीरे धीरे निकल रहा था ...

वो भी तैयार होते हुए ही बात कर रही थी ....

जूली: जानू बताओ ना फिर आज मैं क्या पहनू???

मैं: जान आज तुम बिना कपड़ों के ही रहो .... देखना साला अमित जलभुन मरेगा ....

जूली: (मुस्कुराते हुए) हाँ और अगर उसने कुछ कर दिया तो ...

मैं: अच्छा तो तुम क्या ऐसे भी रह लॉगी...हा हा हा ....फिर, नीलू भी होगी.....बदला लेने के लिए ....

जूली: हाँ मैं आपके मुह से यही तो सुन्ना चाहती थी ...आप तो बस अपना ही फ़ायदा देख रहे हैं न ...
आप तो बस नीलू के ही बारे में ही सोच रहे होंगे.....

(उसने अब अपना मुह फुला लिया)

मैं: अरे नहीं मेरी जान वो सब तो बस थोड़ा मजा लेने के लिए ....वरना मेरी जान जैसी तो इस पुरे जहाँ में नहीं है ...

जूली: हाँ हाँ मुझे सब पता है ... याद है जब हमारी पहली पार्टी में ....अमित भाई जी ने मेरे साथ वो सब हरकतें करी थीं तब आपने कौन सा उससे कुछ कहा था ....

मैं: अरे जान, वो उस दिन नशे में था ...वैसे वो तुम्हारी बहुत इज़्ज़त करता है ...

जूली: हाँ हाँ मुझे पता है .... सभी मर्द एक जैसे ही होते हैं ...जरा सा छूट मिली नहीं कि ...

मैं: हा हा हा हा ...अच्छा तो क्या मैं भी ऐसा ही हूँ ...

जूली: और नहीं तो क्या .... ये तो आपकी सेक्रैटरी भी जानती है ....

मैं: हाँ ....तुम तो बात कहाँ से कहाँ ले जाती हो ...
अच्छा आज ये पहन लो ..(मैंने कपड़ों की ओर देखते हुए कहा )

मैंने उसको एक मिडी की ओर इशारा किया .... वो रॉयल ब्लू कलर की बहुत सेक्सी ड्रेस थी ...

जूली: हाँ मैं भी यही सोच रही थी .... पर आज मैं इसके मैचिंग की कच्छी नहीं ला पाई ...और ये दूसरे रंग की बहुत खराब दिखेगी ....

मैं: अरे तो यार बिना कच्छी के पहनो ना .... मजा आ जायेगा ....

जूली: हाँ ...तुम लोगो को ही ना ... और यहाँ मैं कोई काम ही नहीं कर पाउंगी ....
बस कपडे ही सही करती रहूंगी...

दरअसल उसकी ये मिडी उसके उसके विशाल चूतड़ों को ही ढक पाती थी बस ... शायद चूतड़ों से ३-४ इंच नीचे तक ही पहुँच पाती होगी...

और जूली जरा भी हिलती डुलती थी तो अंदर की झलक मिल जाती थी ...

अगर झुककर कोई काम करती थी तब तो पूरा ..... प्रदेश ही दिखता था ...

हम अभी कपड़ों को चूज़ कर ही रहे थे कि...

एक बार फिर ....

ट्रिन न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न ट्रिन न्न्न्न्न्न्न्न्न्न

कोई आ गया था ... जो घंटी बजा रहा था .....

मैं: अरे ये इतनी जल्दी कैसे आ गया ....

जूली: अरे नहीं जानू ...अनु होगी ...मैंने उसको आज काम करने के लिए बुला लिया था ....

अनु हमारी कॉलोनी में ही पीछे कि तरफ बनी एक गरीब बस्ती में रहती थी ...

बहुत गरीबी में उसका परिवार जी रहा था ... उसका बाप शराबी .... छोटे छोटे ... ५ भाई बहन .. माँ घरों के साफ़ सफाई और छोटे मोटे काम करती थी ...

जूली कभी कभी उसको कुछ काम करने के लिए बुला लेती थी ....

मैं पिछले काफी समय से उससे नहीं मिला था .... क्युकि अपने काम में ही बिजी रहता था ....

जूली ने दरबाजा खोला ....

अनु ही थी ... वो अंदर आ गई ....

अनु: सॉरी भाभी ... देर हो गई ... वो घर का काम भी करना था न ...

जूली: कोई बात नहीं .... अभी बहुत समय है ... तू आराम से काम कर ले ...

मैं उसको देखता रह गया .....उसकी उम्र तो पता नहीं ...पर वो लम्बी पतली .... और काफी खूबसूरत थी ...

उसको देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो एक इतने गरीब परिवार में रहती थी ....

आज उसका रंग भी काफी साफ़ लग रहा था ...

उसने एक घुटनो तक का फ्रॉक पहन रखा था .... जो शायद आज ही धोकर पहना था . वो .साफ़ सुथरी होकर आई थी ..

उसके बाल भी सही से बने हुए थे..

जूली ने बता दिया होगा कि कोई आने वाला है ... तो बो खुद तैयार होकर आई थी ....

फ्रॉक से उसकी पतली लम्बी टांगे घुटनो के नीचे नंगी दिख रहीं थी ... जो बहुत सुन्दर लग रही थी ...

आज पहली बार मैंने उसके सीने की ओर ध्यान दिया ... तो कसे हुए फ्रॉक से साफ़ महसूस हुआ कि उसके उभार आने शुरू हो गए हैं ...

उभारो ने गोलाई में आना शुरू कर दिया था ....

जूली उसको लेकर किचन की तरफ चली गई ...

जाते जाते ... अनु ने मुझे "नमस्ते भैया" कहा ...
जिसका मैंने सर हिलाकर जवाब दिया ...

अब मैं अनु के बारे में सोचते हुए ही तैयार होने लगा .
मैंने गर्मी ज्यादा होने के कारण ... हल्का कुरता पजामा डाल लिया ....

फिर ना जाने क्यों मन में अनु को देखने का ख्याल आया .....

और मैं अनायास किचिन की ओर बढ़ गया ....

अनु नीचे उखडु बैठी ..आटा गूंध रही थी ...

उसकी फ्रॉक कमर तक उठी थी .... और अंदर से उसकी काले रंग कच्छी साफ़ दिख रही थी ...

कच्छी बहुत पुरानी थी और उसकी किनारी ढीली हो गई थीं ....

उसके बार बार हिलने से किनारी उठ जाती थी और कच्छी के अंदर का साफ रंग भी दिख जाता था ...

तभी उसकी नजर मुझ पर पड़ी ... वो शरमा गई ...और उसने तुरंत अपनी टांगे भींच ली ....

अनु: अरे भैया आप .... क्या हुआ ..कुछ लाऊँ क्या ??

जूली काम करते हुए ही घूम कर देखती है ....

जूली: (अनु से ) अरे पगली तुझे क्या हुआ ...तू अपना काम कर ना ...

उसको सकुचाता देखकर.... इनसे क्या शरमाना ... तेरे भैया ही तो हैं ....

अनु फिर से बैठकर आटा गूंधने लगी ....मगर उसके पैर अब बंद थे ....

मैं: जान इसके कपडे भी नए बनबा देना ... काफी पुराने हो गए हैं ....

जूली: अरे मैं तो कब से कह रही हूँ ... ये पगली ही तैयार नहीं होती ....ये जो कच्छी पहनी है... वो भी मैंने दी थी .... इसके तो बड़ी थी .... पर ये बोली ये ही दे दो .... वरना पहले तो उस फटी कच्छी में ही घूमती थी ...

अनु: क्या भाभी आप भी ना ये सब भैया से क्यों बोल रही हो ...

जूली: तो क्या हुआ .... अब तुझे शर्म आ रही है ... और जब वो फटी कच्छी पहन सबको दिखाती घूमती थी ... तब नहीं आती थी ....

अनु: ब्ब्ब्ब बो बब ब्बो

मैं: ओह क्या जान.... क्यों इस बेचारी को परेसान कर रही हो ...

जूली: अरे मैं कहाँ .... अच्छा आप जरा उस आचार के डब्बे को उतार दो ...

आचार का डब्बा बहुत ऊपर स्लैप पर रखा था.....

मैं भी किसी चीज पर चढ़ कर ही उत्तर सकता था ....

मैं: जान इसके लिए तो अंदर से कोई मेज या कुर्सी लेकर आओ ...

जूली: अब वो सब नहीं ..... ऐसा करो आप इस अनु को ऊपर उठा दो ...ये उत्तर देगी ...

मैं अभी इसके बारे में सोच ही रहा था ... कि

जूली: चल यहाँ आ अनु .... अब बस कर ...गुंध तो गया ...अब क्या इसकी जान निकालेगी ...
चल अपने हाथ धो ले ....

अनु हाथ धो मेरे पास आ खड़ी हो ऊपर देख रही थी ...

जूली: चलो इसको ऊपर उठाओ ...

मैंने अनु की कमर को दोनों हाथ से पकड़ ऊपर उठा दिया ....

अनु: ओह नहीं पहुंच रहा भाभी ...

मैंने उसको और ऊपर उठाया ...

मेरे सीधा हाथ फिसलने लगा ...और उसको नियंत्रित करने के लिए मैंने उसके चूतड़ों के नीचे टिका दिया ...

उसका बैलेंस तो बन गया ...और वो कुछ ऊपर भी हो गई ... मगर मेरा सीधा हाथ ठीक उसके मखमल जैसे चूतड़ों के बीचो बीच था ...

मुझे अच्छी तरह पता था ... कि जूली हर तरह से दूसरे मर्दों से सेक्स का मजा ले रही है ..परन्तु फिर भी ना जाने अपनी इस हरकत से मेरे दिल में एक डर सा होने लगा ...

मैंने घबराकर जूली की ओर देखा ..पर उसका ध्यान आचार के डब्बे की ओर ही था ...

बस मुझे मौका मिल गया .... मैंने अच्छी तरह से अनु के छोटे छोटे मुलायम चूतड़ों को ... बैलेंस बनाने के बहाने ....टटोला ...

उसकी फ्रॉक भी ऊपर को खिसक गई ... और मेरी उंगलिया ... उसके चूतड़ों के नग्न मांस में भी धंस सी गई ...

अनु ने डब्बा उतारकर ...जूली को पकड़ा दिया ... जो उसको बराबर निर्देश दे रही थी ...

अब जूली ने हमको देखा ...

मैंने हाथ हटाने की कोशिश की .... पर उसका बलके बिगड़ा ....

मैंने उसको आगे से संभाला .... इत्तेफ़ाक़ से मेरा हाथ उसके पेट के निचले हिस्से पर पड़ा ...

मैंने जैसे ही उसको संभाला ... मेरे हाथ ने उसके फ्रॉक को ऊपर को समेटते हुए उसके नाभि के नीचे से पकड़ लिया ...

मेरी उँगलियाँ उसकी कोमल चूत को छू रही थीं ...

ये सब कुछ बस एक पल के लिए हुआ ... और अनु मेरी गोद से कूद गई ...

मैंने घबराकर जूली की ओर देखा ...

मगर वो बेशरम केवल मुस्कुरा रही थी ....

मैं: बस हो गया तुम्हारा काम अब ..ठीक है मैं जाता हूँ ..
मैं तुरंत किचिन से बाहर आ गया .
अपने बैडरूम में आने के बाद भी एक मस्त अहसास मेरे को हो रहा था ....

ये अहसास केवल इसी बात का नहीं था कि...

मैंने अनु के मक्खन जैसे चूतड़ों को छुआ था या उसकी कोरी चूत को कच्छी से झांकते देखा था ...

वल्कि इस बात का था कि जूली को भी इस सबमे मजा आ रहा था ... और वो भी सहयोग कर रही थी ....

मैं ये भी सोच रहा था .... कि जैसे जब कोई दूसरा मर्द मेरी जूली के साथ मस्ती करता है ... और मुझे मजा आ रहा है ....

क्या इसी अहसास को जूली भी महसूस कर रही है ...और वो भी इसी तरह मेरी साहयता कर रही है ...

अब ये देखने वाली बात होगी कि क्या जूली मेरे सामने ही किसी गैर मर्द से चुदवाती है ...

या उससे पहले मैं जूली के सामने ..अनु या किसी और कमसिन लड़की को चोदता हूँ .....

इस सब बातों को सोचते हुए मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था ....और ख़ुशी में उसने पानी कि कुछ बूंदें भी टपका दी थीं .....

तभी जूली कमरे में आती है ...

उसके चेहरे से कोई अन्य प्रतिक्रिया नहीं दिखती ...

उसने बहुत बेबाकी से अपना गाउन उतार दिया ..

एक बार फिर मैं उसके सुन्दर शरीर को देखने लगा ... उसने कुछ नहीं पहना था ....

अब वो बहुत मादकता के साथ अपने पूरे नंगे बदन पर कोई लोशन का लैप लगाती है ....

फिर मुझे देखते हुए ही कहती है ...

जूली: जान तो तुमने क्या सोचा ...??? क्या पहनू फिर मैं आज ....

मैं: एक बार फिर उसकी ड्रेसेस को देखने ...परखने लगता हूँ ....

फिर वो एक जोड़ी अपनी कच्छी ..ब्रा को पहन लेती है .....

मैं: क्यों क....क्या यही सेट पहनना है ....

जूली: हाँ ... ये तो मुझे यही पहनना है ... बाकी रुको मैं बताती हूँ ....

वो एक वहुत सेक्सी ड्रेस निकाल कर लाती है ...ये उसने उसके भाई के रिसेप्शन पर पहना था ...

ये वाला ड्रेस .
सब उसको वहां देखते रह गए थे ...हाँ रिसेप्शन पार्टी के समय तो उसने इसके नीचे पतली हाफ केप्री पहनी थी ...

परन्तु जब रात को उसने केप्री निकाल दी थी ... तब तो घर के ही लोग थे ...

मगर सभी उसी को भूखी नजरों से ताक रहे थे ... चाहे वो जूली के जीजा हों ..या उसके भाई ...और पापा ...

उस समय बिस्तर आदि लगते समय ..जूली के जरा से झुकने से ही उसकी सफ़ेद कच्छी सभी को रोमांचित कर रही थी ....

मैंने तुरंत हाँ कर दी ... और ये भी कहा कि यार इसके नीचे बस वो वाली सफ़ेद कच्छी ही पहनना ...

जूली: कौन सी ...वो वाली ...वो तो कब की फट गई..

ये वाली बुरी है क्या ???

उसने अभी एक सिल्की ..स्किन टाइट ... वी शेप स्काई ब्लू ...पहनी थी ....

मैं: नहीं जान इसमें तो और भी ज्यादा सेक्सी लग रही हो ... मगर बस इसी के ऊपर यह पहनना ... वो उस दिन वाली कैप्री नहीं पहनना ....

जूली: अरे जानू फिर तो बहुत संभलकर रहना होगा ... तुम ही देखो ...फिर ..

मैं: हाँ हाँ ... मुझे पता है ... पर अमित ही तो है ,.. वो तो अपना ही है ना ... और फिर नीलू से क्या शरमाना..

जूली: ठीक है जानू .. जैसा आप कहो ....

मैंने कसकर जूली को अपने से चिपका लिया ... और कच्छी के ऊपर से उसके गोल मटोल चूतड़ों को सहलाने लगा ..

तभी अनु अंदर आती है ...

अनु: भभीईइ ....इइइइइइइ ओह

हम दोनों अलग हो जाते हैं ..

जूली: क्या हुआ ???

अनु: वो तो हो गया भाभी ... अब क्या करू ...???

जूली: ले जरा ये लोशन .मेरे बैक , पैर और हिप पर लगा दे ...जहाँ जहाँ ...दिख रहा है ...

अनु: ये क्या है भाभी ...

जूली: ये शाइनिंग लोशन है .... और फिर तू भी तैयार हो जाना ... ये फ्रॉक उतार कर ... मैंने ये कपडे रखे हैं ... ये पहन लेना ..

मैंने देखा उसने एक सफ़ेद नेकर और टॉप था जो थोड़ा पुराना था ...मगर सूती था ...

जूली: और हाँ ये कच्छी मत पहनना .. मैं कल तुझको बढ़िया वाली दिलाउंगी .... मुझे भी जाना है कल तो तू भी वहीँ से अपने साइज की ले लेना ..

अनु: जी भाभी ..

इस बार अनु ने कुछ नहीं कहा ....वो बार बार मुझे ही देख रही थी ...

शायद किचिन वाला किस्सा उसको भी अच्छा लगा था ...

जूली उसको उठा कहती है ...

जूली: बस अब हो गया ..अब तू ये कपडे ले और तैयार हो जा ...चाहे तो नह लेना ... पसीने की नहीं आएगी ..

अनु: जी भाभी ....

अनु ड्रेस लेकर ..मुझे तिरछी नजर से देखते हुए ,,,बाथरूम में चली जाती है ....

अनु की ड्रेस .
इधर जूली तैयार होने लगती है ....

बाथरूम से सॉवॅर की आवाज से लग जाता है कि अनु नहा रही है ...

कुछ देर बाद ...

अनु: भाभी यहाँ तौलिया नहीं है ....

जूली: ओह! (मुझसे) जरा सुनो जानू .. अनु को तौलिया दे दो ना ..वो बालकोनी में होगा ...

मेरी तो बांछे खिल जाती हैं ... ना जाने अनु कैसी हालत में होगी ...

कच्छी पहन कर नहाईं है ..या पूरी नंगी होगी ...

उसकी पूरी नंगी ...तस्वीर लिए मैं तोलिया लेकर बाथरूम के दरवाजे पर पहुँच जाता हूँ .
मैं दरवाजे से बाहर खड़ा अनु को आवाज देने की सोच ही रहा था कि ...

जूली: अनु ले टॉवल .....

जाने अनजाने जूली हर तरह से सहायता कर रही थी ... अगर मैं आवाज देता तो हो सकता था कि वो शर्म के कारण दरवाजा नहीं खोलती ...

या अपने को ढकने के बाद ही खोलती .. मगर जूली की आवाज ने उसको रिलैक्स कर दिया था ...

जैसे ही दरवाजा की चटकनी खुलने की आवाज आई ..

मैंने भी दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया ..

और दरवाजा पूरा खुल गया ....

ओह माय गॉड ... मेरे जीवन का एक और मधुरम दृश्य मेरा इन्तजार कर रहा था ....

वो पूरी नंगी थी .... उसने अभी अभी स्नान किया था .. और उसका सेक्सी गीला बदन गजब ढा रहा था ...

वो उझे देखते ही हल्का सा झुकी .
मैं आँखे फारे उसके सामने के अंगों को नग्न अवस्था में देख ही रहा था कि

पहले तो अपनी कोमल चूत को अपने हाथ से ढकने का प्रयास करती है ...

फिर वो मेरी ओर पीठ कर लेती है ....

ये दूसरा मनोरम दृश्य मेरे सामने था ... जो चित्र के द्वारा मैं आपको बताने की कोशिश करता हूँ
वो वहुत ज्यादा शरमा रही थी ,,,मगर कोई चीख चिल्हाट नहीं थी ....

मैं आँखे भर उसके नंगे मांसल चूतड़ ...एवं मखमली पीठ को देख रहा था ...

फिर मैंने ही उसको टॉवल पकड़ाते हुए कहा ..

मैं: ले जल्दी से पोंछ कर बाहर आ जा ...

पहली बार उसके मुह से आवाज निकली ...
उसने टॉवल से खुद को ढकते हुए ही कहा
अनु: भैया आप .... मैं भाभी को समझी थी ...

तभी जूली की आवाज आती है ...

जूली: ओह तू कितना शरमाती है अनु ...तेरे भैया ही तो हैं ...

तभी वो मुझसे कहती है ...

जूली: सुनो जी .... मेरे बॉडी क्लीनर से इसकी पीठ और कंधे साफ़ करवा देना ... और घुटने भी ..वरना इस वाली ड्रेस से वो गंदे ना दिखें ...

हे खुदा ...कितनी प्यारी बीवी तूने दी है ... वो मेरी हर इच्छा को समझ जाती है ..

उसने शायद मेरी आँखे और लण्ड की आवाज को सुन लिया था ...

जो वो मुझे इस नग्न सुंदरता की मूरत को चुने का मौका भी दे रही थी ...

तभी ...

अनु: नहीईइइइइइइइइइ भाभी ... मैंने साफ़ कर ली है ...

जूली खुद आकर देखती है ...

जूली: पागल है क्या ..??? कितने धब्बे दिख रहे हैं ..
क्या तू खुद सुन्दर नहीं दिखना चाहती ...

अनु: हाँ वव वो वव.... भाभी पर ये सब ...भैया ...नहीईईईईईईई

जूली: एक लगाउंगी तुझको .... क्या हुआ तो ... भैया ही तो हैं तेरे .....
और वो सब जो तेरे पापा ने किया था ....

अनु: ओह नहीं ना भाभी .... प्लीज .....

जूली: हाँ तो ठीक है चुपचाप साफ़ करा कर जल्दी बाहर आ ... देर हो रही है ....

मैं सब कुछ सुनकर भी ....कुछ भी नहीं बोल पाया ...

पता नही इसके पापा वाली बात क्या थी ...

जूली बाहर मिकल जाती है ...

अनु वही रखे स्टूल पर बैठ जाती है उसने टॉवल खुद हटा दी थी ...

मैं जूली का क्लीनर उठा उसकी पीठ के धब्बो पर लगाने लगता हूँ ..
मैं पूरी सराफत का परिचय देता हुआ उसके किसी अंग को नहीं छूता ...

बस अपनी आँखों से उनका रसपान करते हुए ...उसकी पीठ .... कंधे .... उसकी नाजुक चूची का ऊपरी भाग ..और उसके घुटने को साफ़ कर देता हूँ ...

अनु के सभी अंग अब पहले से कई गुना ज्यादा चमक रहे थे ...

उसके अंगो पर अब शरम की लाली भी आ गई थी ..

कुछ देर बाद अनु तैयार होने लगती है ..
लगता था उसकी शरम भी अब बहुत काम हो रही थी ..

कहते हैं ना की जब कोई लड़की या औरत जब किसी मर्द के सामने नंगी हो जाती है ... या जब उसको अपना नंगापन ..किसी मर्द के सामने अच्छा लगने लगता है ... तो उसकी शरम अपनेआप ख़त्म हो जाती है ....

तो इस समय अनु भी बिना शर्माए मेरे सामने कपडे बदल रही थी ..
जूली की सूती सफ़ेद ... फैंसी ड्रेस पहन वो गजब ढा रही थी ....

मैं एक तक उसको देख रहा था ..
और अब साथ साथ ये भी सोच रहा था ..की जूली मेरी कितनी सहायता कर रही है ....

क्या इसलिए कि ..वो भी चाहती है कि आगे से मैं भी उसकी ऐसे ही सहायता करूँ ...

या फिर कुछ और ....

एक और प्रश्न भी मेरे दिमाग में चल रहा था कि आखिर अनु के साथ उसके पिता ने क्या किया था ...??
कहते हैं चाहे कितनी भी मस्ती कर लो ..पर नई चूत देखते है ...दिमाग उसको पाने के लिए पागल हो जाता है ...

यही हाल मेरा था ....

हम तीनो ही तैयार हो गए थे ... जूली ने अनु का भी हल्का मेकअप कर दिया था ...

वो वला की खूबसूरत दिख रही थी ....

मेरे दिमाग में उसकी ही चूत घूम रही थी ...

वैसे जूली की चूत ...अनु से कहीं ज्यादा सुन्दर और चिकनी थी ...

पर अनु की चूत का नयापन मेरे दिमाग को पागल कर रहा था ....

इंतजार करते हुए ९:३० हो गए ...

जूली ने अनु के घर भी फ़ोन कर दिया था ... कि वो आज रात हमारे यहाँ ही रुकेगी ..

पहले भी वो २-३ बार हमारे यहाँ रुक चुकी है ... तो कई बड़ी बात नहीं थी ...

परन्तु आज कि बात अलग थी ... मेरे दिल में कुछ अलग ही धक धक हो रही थी ...

रिंग गगगग रिंग ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग
तभी अमित का फ़ोन आया ...

मैं: क्या हुआ यार इतनी देर कहाँ लगा दी ....

अमित: ओह सॉरी यार ... आज का कार्यक्रम रद्द हो गया है .... हम नहीं आ पाएंगे ....

मैं: क्याआआआ

अमित: एक मिनट ... तू नीचे आ ....

मैं: तू पागल हो गया है .... क्या बोल रहा है ??...कहाँ है तू ...?????????

अमित: अच्छा रुक मैं आता हूँ ....

जूली: क्या हुआ ??????

मैं: पता नहीं क्या कह रहा है ????

२ मिनट के बाद

ट्रीन्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न ट्री न्न्न्न्न्न्न्न्न्न्न

जूली ने दरवाजा खोला?????

जूली: ओह आप आ तो गए .... क्या हुआ अमित भैया ???

उसने जूली को देख एक दम से गले लगाया और उसके गाल को चूमा ...

अमित हमेशा ऐसे ही मिलता था ... विदेशी कल्चर ..और उसकी पत्नी नीलू भी ....

उसने नजर भरकर जूली को देखा ...

अमित: वाओ जूली आज तो मस्त सेक्सी लग रही हो ...

जूली: अरे नीलू कहाँ है भैया ...

अमित: अरे क्या कहूँ हम दोनों यहीं आ रहे थे .. कि नीलू के माँ डैड का फ़ोन आ गया ... वो कहीं जा रहे थे .. मगर कुछ इमर्जेन्सी हो गई ... तो अभी आधे घंटे बाद उनका प्लेन यहीं आ रहा है ...
हम दोनों उनको ही लेने जा रहे हैं ....
सॉरी यार फिर कभी जरूर आएंगे ....

मैं: अरे यार एक दम ... ये सब कैसे ...

अमित: यार फिर बताऊंगा ... मुझे तो इस पार्टी को मिस करने का बहुत दुःख है ....

अच्छा यार ज़रा जल्दी में हूँ ....

माफ़ कर दो ...तुम दोनों मुझको ...

उसने एक बार फिर जूली को अपने गले लगाया ...

इस बार मैं पीछे ही था ... मैंने साफ़ देखा उसके बायां हाथ जूली के चूतड़ पर था ....

फिर वो तेजी से बाहर को निकल गया ....

मैं भी जल्दी से बाहर को आया ... उसको सी ऑफ करने के लिए ....

मैं उसके साथ ही नीचे आ गया ... नीलू को भी एक नजर देखने के लिए ....

नीलू उसकी महंगी कार में ही बैठी थी ...

मैं उसकी और गया ...


उसने तुरंत दरवाजा खोला ....

नीलू ने पिंक मिनी स्कर्ट और टॉप पहना था ...

जैसे ही वो नीचे उतरने लगी ....

उसके बायां पैर जमीन पर रखते ही ..उसकी स्कर्ट ऊपर हो गई ...

और दोनों पैर के बीच बहुत ज्यादा गैप हो गया ...

मुझे उसकी नेट वाली लाल कच्छी दिखी ...

मेरी नजर वहीँ थी कि ...

नीलू: ओह रवि एक मिनट ...

मैं सॉरी बोल पीछे हटा ...

नीलू ने बाहर आ मेरे सीने से लग गाल को हल्का सा किश किया ...

मुझे अमित कि हरकत याद आ गई ...

मैंने भी अपना बायां हाथ नीलू के चूतड़ पर रखा ..

ओह गॉड मेरी किस्मत ....

मेरे उँगलियों को पूरी तरह से नंगे ... मख्खन जैसे चूतड़ों का स्पर्श मिला ....

नीलू कि स्कर्ट बैठने से ...पीछे से सिमट कर ऊपर हो गई थी ...

और उसने शायद लाल टोंग पहना था .... जिससे उसके चूतड़ के दोनों भाग नंगे थे ...

मेरी उँगलियाँ खुद बा खुद उसके चूतड़ के मुलायम गोस्त में गड गई ...

मैंने भी नीलू के गाल पर किश किया ...

और जब गाड़ी में देखा तो अमित ड्राइविंग सीट पर बैठ गया था ...और वो मेरे हाथ को देख कर मुस्कुरा रहा था ....

मैंने जल्दी से नीलू को छोड़ा ... और पीछे हट गया ..

नीलू: सॉरी अमित ...फिर बनाएंगे यार प्रोग्राम ... अब तुम दोनों आना हमारे घर ...

मैं: कोई नहीं ... मगर ये सब भी देखना ही था ... ठीक है ....

नीलू घूमकर गाड़ी में बैठने लगी ...

उसने अभी भी अपनी स्कर्ट ठीक नहीं की थी ...

उसके चूतड़ की एक झलक मुझे मिल गई ...

ना जाने मुझमे कहाँ से हिम्मत आ गई ... मैंने नीलू को रोका और उसकी स्कर्ट सही कर दी ...

नीलू: क्या हुआ रवि ??

मैं: अरे यार स्कर्ट ऊपर हो गई थी ...

नीलू: ओह ... थैंक्स ...

अमित: हा हा हा ... नीलू आज ...जूली तुमसे कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी ...

नीलू: (चिढ़कर) ..तो नीचे क्यों आ गए ... वहीँ रुक जाते ...ना
मैं रवि के साथ चली जाती हूँ ....

अमित: ओह यार .... मैं तो तैयार हूँ ... क्यों रवि ....??

मैं: हाँ हाँ ... ठीक है ... सोच ले ...
मुझे भी उनके सामने कुछ बोल्ड होना पड़ा ...

अमित गाड़ी स्टार्ट कर लेता है ...

अमित: चल अच्छा फिर कभी सोचेंगे ... वरना इसके पापा सोचेंगे ... कि यार मेरी बेटी का पति कैसे बदल गया ...

और मैं उन दोनों को विदा कर ऊपर आता हूँ ...

दरवाजा खुला था ....

मैं अंदर गया ...

अनु हमारे बैडरूम के दरवाजे पर खड़े हो चुपचाप कुछ झाँक रही थी ....

मैं चुपके से वहां गया ... मुझे देखते ही वो डरकर पीछे हो गई ....

मैंने भी अंदर देखा ....

एक और सरप्राइज तैयार था ....

अंदर तिवारी अंकल और जूली थे ...
मैं जैसे ही बैडरूम के अंदर देखता हूँ ...

थोड़ा आश्चर्यचकित हो जाता हूँ ...

अंदर बैडरूम के अंदर तिवारी अंकल केवल एक सिल्की लुंगी में थे ....

वैसे वो पहले भी कई बार ऐसे ही आ जाते थे ...

पर आज उनकी बाँहों में मेरी सेक्सी बीवी मचल रही थी ...

मैंने पीछे हटती अनु को रोक लिया ...

उसको मुह पर ऊँगली रख श्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह का इशारा कर चुप रहने को कहा ...

वो भी बिलकुल भी आवाज न कर मेरे साथ ही लगकर खड़ी हो गई ....

जूली ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी ...

अंकल ने उसको पीछे से अपनी बाँहों में जकड़ा था ...

मैंने अपनी साँसों को कुछ नियंत्रित करते हुए उन दोनों की हरकतों पर ध्यान दिया ....

अंकल की हाइट ज्यादा थी ...तो कुछ अपनी टांगों को मोड़कर नीचे हो गए थे ...

ऐसा उन्होंने अपने लण्ड को जूली की गांड पर सेट करने के लिए किया था ...

अंकल का लण्ड जूली की मखमली, गद्देदार गांड से चिपका था ...

और अंकल अपनी कमर को लगातार हिलाकर लण्ड को रगड़ रहे थे ...

दोनों इस मजेदार रगड़ का मजा ले रहे थे ...

मुझे नहीं पता कि बीच में उनकी क्या स्थिति थी ..

जूली की झुकी होने से ये साफ़ था ..कि उसकी ड्रेस उसके चूतड़ से खिसक ऊपर को हो गई होगी ...

इसका मतलब अंकल के लण्ड का अहसास उसको कच्छी के ऊपर से हो रहा होगा ...

पर मुझे ये नहीं पता था कि... अंकल का लण्ड लुंगी से बाहर था या अंदर ... अंकल ने अंडरवियर पहना था या नहीं ....

इन सभी बात से मैं अनजान था ....

तभी मेरी नजर ड्रेसिंग टेबल के सीसे पर पड़ी ...

अंकल के बाँहों में चिपकी जूली कि चूचियों पर उनका सीधा हाथ पूरी तरह लिपटा था ...

और वो अपने पंजे से जूली की बायीं मस्त चूची को मसल रहे थे ...

यहाँ तक होता तब भी ठीक था ..पर ...

अंकल का दायां हाथ आगे से उसकी ड्रेस के अंदर ..जूली की टांगों के बीच था ...

उनके हाथ के हिलने से जूली की ड्रेस ऊपर नीचे हो रही थी ..

और ये महसूस हो रहा था ... कि अंकल बड़े कलात्मक तरीके से मेरी इस बेकरार बीवी जूली की प्यारी चूत से छेड़छाड़ कर रहे हैं ...

अब मैंने उनकी बातों को सुनने का प्रयास किया ...

जूली: ओह अंकल मत करो ना ...सब यहीं हैं ...

अंकल: आह्ह्हा अह्ह्ह यार ये क्या बात है ????

जूली: आपका अच्छा ख़ासा तो है ...

अंकल: केवल तेरे गरम बॉडी से ही बस ....वरना तेरी आंटी के पास इतना नहीं हो पता ...

जूली: अंकल प्लीज छोड़ दो ना .... रवि आ गए तो क्या सोचेंगे ...

अंकल: अरे वो नीचे है ...मैंने खुद देखा था .... तभी तो आया ....

जूली: ओह्ह्ह ...अनु भी तो है ....

अंकल: अह्ह्ह हाआआआ ववो किचिन में है ....

तभी जूली ने अपना बायां हाथ पीछे कर ...

जूली: ओह अंकल कितना बड़ा है ...

ओह उसने अंकल का लण्ड पकड़ा था ...

वो थोड़ा साइड में हुए ....तो मैंने देखा कि अंकल का लण्ड लुंगी से बाहर था ...

जूली ने उनके लण्ड पर अपना हाथ फिराया ... और उसको लुंगी के अंदर कर दिया ...

जूली: सच अंकल आप बिलकुल निराश मत हो .. आपका रवि से भी बड़ा और मजबूत है ...

अंकल: पर तुम्हारी आंटी के सामने ये धोखा दे देता है ....सच बेटा ..
कल तुमको नंगा देख ..कई महीने बाद मैं उसको संतुष्ट कर पाया ...
पर यकीन मानो मैं तेरे को सोच कर ही उसको चोद रहा था ...

जूली: धत्त अंकल कैसी बात करते हो ... अब आप जाओ ... रवि आते ही होंगे ...

अंकल बाहर को आने लगे ... मैंने अनु को तुरंत किचिन में किया ...

और खुद दरवाजे से ऐसे अंदर को आया कि ...अभी आ ही रहा हूँ ..

मैं: ओह अंकलजी नमस्ते ...

अंकल: (हड़बड़ाते हुए) हा ह ह हाँ बेटा ... कैसे हो ...

मैं: ठीक ....हूँ और आप ....

अंकल: मैं भी बेटा .....बस तुम्हारी आंटी के सर में दर्द था ... तो गोली लेने आ गया था ....

मैं: अरे तो क्या हुआ ..??? आप ही का घर है ...

अंकल: अच्छा जूली बेटा मैं चलता हूँ फिर ... बाई ..

जूली: बाई .... वो दरवाजा बंद कर ...
गए वो लोग .. अब फिर क्या कह रहे थे ...

मैं: (बैडरूम में जाते हुए ..) कुछ नहीं ... अब फिर कभी आएंगे ...

जूली किचिन में जाते हुए ...

जूली: ठीक है .... आप चेंज कर लो .. मैं खाना लगवाती हूँ ...

मैं: ह्म्म्म्म्म

बैडरूम में जाते ही मुझे एक और झटका लगता है ...

मुझे याद था जूली ने जो कच्छी पहनी थी .... वो ड्रेसिंग टेबल पर रखी थी ..
बैडरूम में ड्रेसिंग टेबल पर एक ओर जूली की कच्छी रखी थी...

इसका मतलब वो इतनी छोटी ड्रेस में बिना कच्छी के ही है ...

मैंने उसकी कच्छी को अपने हाथ में लेकर... अभी कुछ देर पहले हुए दृश्य के बारे में सोचने लगा ...

जूली झुकी हुई है ...उसकी ड्रेस कमर तक सिमटी है ...
उसके नंगे चूतड़ से अंकल का लण्ड चिपका है .. जो उन्होंने लुंगी से बाहर निकाल लिया है ...

कितनी हिम्मत आ गई है दोनों में ... दरवाजा खुला छोड़ ...

अनु घर पर ही है ... मैं भी दूर नहीं हूँ ..और दोनों कैसे अपने नंगे अंगो को मिलाकर मजे ले रहे थे ..

अभी एक सवाल और मेरे दिमाग में आ रहा था ...

जूली ने कच्छी खुद उतारी थी ..या अंकल में इतनी हिम्मत आ गई थी ...

ये दोनों कितना आगे बढ़ गए हैं .... ये सब अभी सस्पेंस ही था ...

मैंने अपना कुरता पजामा ...निकाल ...बरमूडा पहन लिया ...

गर्मी बहुत थी ..इसलिए अंडरवियर भी उतार दिया ...

मैं फिर से किचिन में चला गया ....

अनु खाना लगा रही थी .... और जूली झुकी हुई कुछ कर रही थी ...

मेरी नजर सीधे उसके नंगे चूतड़ पर ही जाती है ..

उसके गोल मटोल ... दूध जैसे चूतड़ ..खिले हुए मेरे सामने थे ....

केवल चूतड़ ही नहीं ... उसके इस अवस्था में झुके होने से उसके चूतड़ों के दोनों भाग से ..जूली की छोटी सी कोमल चूत भी झाँक रही थी ....

मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ों को सहलाते हुए ..सीधे अपनी दो ऊँगली उसकी सुरमई चूत के छेद पर रख देता हूँ ....

मेरी ऊँगली को एक अलग सा अहसास होता है ...

उँगलियों पर कुछ गीलापन ..जो शायद उसके चूत के रस था ..पर कुछ चिपचिपा और सूखा सा रस भी लगता है ...

मेरे दिमाग में फितूर तो जाग ही गया था ...

क्या ये सूखा रस अंकल का था ... क्या पता अंकल ने अपना लण्ड जूली की चूत के ऊपर भी घिसा हो ...

और उनका कुछ प्रीकम यहाँ लग गया हो ...

जूली उस समय ऐसे ही तो झुकी थी .. और जहाँ तक मैं समझता हूँ ...

इस अवस्था में तो जरूर अंकल का लण्ड ..जूली के चूत के छेद पर ही दस्तक दे रहा होगा ...

पता नहीं मैं क्या-क्या सोच रहा था ... और ये सब सोचते हुए .. ये सुसरा मेरा लण्ड भी खड़ा हो रहा था ..

क्या पता ...अंकल का लण्ड ने जूली की चूत के ऊपर ही ऊपर घिसा था ..

या कही कुछ अंदर भी किया हो ....

तभी जूली एक दम से खड़ी हो जाती है ..और ..

जूली: (अनु की ओर देखते हुए) ...क्या करते हो ????

मैं: (बिना शरमाये और ना सुनते हुए ..).. क्या हुआ जान ???? ये कच्छी कब निकाल दी ...

जूलीपहले तो कुछ चुप रहती है ..फिर ..खुद ही ..) अरे नहीं ..
मैं तो कपडे बदलने ही गई थी .... कि तभी अंकल आ गए ...

मैं हँसते हुए ..) हा हा .. तो क्या जान ...कहीं अंकल ने तो नहीं देख लिया कुछ ... हा हा

मेरी बात पर एक दम से अनु भी हंस पड़ती है ...

जूली उसको गुस्से से देखती है ...

जूली: तू क्यों हंस रही है ... ..और हटो अब आप ... मैं आती हूँ ... आप बैठो .. पहले खाना खा लेते हैं ...

और बिना कुछ कहे वो बैडरूम में चली जाती है ...

हम दोनों को ही उसकी इस नखरीली अदा पर हंसी आ रही थी ....

मैंने देखा अनु मेरे बरमुडे को ध्यान से देख रही है ...

बरमूडा लण्ड वाले भाग से काफी उठ गया था ...

क्युकि मेरा लण्ड कुछ सख्त हो गया था ...

मैं अनु के पास वाली कुर्सी पर बैठ जाता हूँ ..

और अपने हाथ को उसके चूतड़ छोटे ..मुलायम चूतड़ मर रख उसको छेड़ता हूँ ..

मैं: तू क्यों मजे ले रही है ... क्यों इतने जोर से हंस रही थी ...

अनु कसमसाते हुए ...

अनु: नहीं भैया ...वो तो ... क्या कर रहे हो ...

वो मेरे आगे से निकलने की कोशिश करती है ...

मैं उसको कसकर पकड़ झटका देता हूँ ...

वो गड़बड़ाकर ...मेरी गोद में बैठ सी जाती है ...

उसके चूतड़ ठीक मेरे लण्ड पर थे ...

उसके कसमसाने से उसके चूतड़ ...मेरे खड़े हो चुके लण्ड को आहूत मजा दे रहे थे ....

अनु: क्या कर रहे हो भैया .. छोडो ना

मैं उसको गुदगुदी के बहाने उसके पेट और छोटी छोटी चूचियों को नापते हुए ...

मैं: पहले ये बता जब अंकल आये तो जूली क्या कर रही थी ...

अनु कसमसा तो रही थी ... मगर मेरी गोदी से हटने का कोई ज्यादा प्रयास नहीं कर रही थी ...

लगता था उसको भी मजा आ रहा था ..

अनु: ओह ...ह्ह्ह्ह्ह्ह वववव व्व्वो भैया .... मुझे ..नहीईईईई .... हाँ वो अपने कपडे ही बदल रही थी ...

मैं: अरे ये बता क्या कर रही थी ... कपडे तो अभी भी पहने ही हैं ना ...

अनु: आआररर रे वो अपनी कच्छी ही निकाल रही थी ...

मैं : अच्छा उसने खुद ही निकाली ना ... कहीं अंकल ने तो नहींंं

अनु: ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह नहीईइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ ना भाभी ने ही ... हाँ अंकल ने उनको पीछे से नंगा देख लिया था ....

मैं: ओह अच्छा ...तभी ...वो ...

अनु: हाँ .....अंकल ने उनको पीछे से पकड़ लिया था ...

उसकी बाते सुन मैं इतना उत्तेजित हो गया कि ...मैंने गुदगुदी करते ..करते अपना हाथ उसके सफ़ेद नेकर के अंदर घुसा दिया .....

कि तभी .......?????
अनु मेरी गोद में बैठी ....बुरी तरह से मचल रही थी ...

वो पूरी तरह से मेरे से चिपकी थी ...

उसके छोटे - छोटे चूतड़ मेरे ६ इंची तने हुए लण्ड को बेहाल किये थे ....

अनु एक परफेक्ट डांसर की तरह अपनी कमर को हिला रही थी ...

और अपने चूतड़ के हर भाग को मेरे लण्ड से रगड़ रही थी ...

इधर मेरे हाथ उसको पकड़ने एवं गुदगुदी के वहाने उसके पूरे चिकने शरीर को टटोल रहे थे ...

उसने केवल एक सफ़ेद कॉटन का टॉप और नेकर ही पहना था ...

जिसके अंदर न तो कोई समीज या अन्य कपडा था ...और ना ही नीचे कच्छी थी...

मेरे हाथों को उसका चिकना शरीर लगभग नंगा ही प्रतीत हो रहा था ...

मेरे हाथ उसके टॉप के अंदर नंगे पेट एवं कभी कभी उसकी छोटी सी बिलकुल टाइट चूची तक भी पहुँच जाते थे ...

तो कभी उसकी नंगी टांगों, जांघों को रगड़ते हुए उसकी छोटी मुनिया सी चूत को भी रगड़ देते थे ...

अनु पूरी मस्त हो गई थी.... और बेहद गरम आवाजें निकाल रही थी ...

अनु: आह्ह्ह्ह्हाआ इइइइइइइइइइइइइइइइइइइ ऊ उउउउउउउउउ क्या कर रहे हो भैय्ाा आए ????

मैं बिना कुछ बोले केवल उसको बुरी तरह से छेड़ते हुए ... खुद भी मजे ले रहा था ...

मैं: अच्छा तो तेरी भाभी के नंगे चूतड़ से ...पीछे से चिपक कर अंकल ने क्या किया ... बता नहीं तो ....

अनु: ओह भैया ... आपने भी तो देखा था ना ... छोड़ दो ना आह्ह्ह्ह्हाआआआ इइइइइइ

मैं: अच्छा छोड़ दू ...क्यों छोड़ू????? ले अभी ...तू बता ना ..क्या तूने अंकल का देखा था ..???

अनु: क्या देखा था .... ओह्ह्ह्ह नहीईईईईईईईईई

मैं: अच्छा नहीं देखा ...झूट ....

अनु: अरे हाँ ...पर क्याआआआआ ????

मैं: उनका खड़ा हुआ लण्ड ...मैं उससे जल्द से जल्द खुलना चाह रहा था ...

अनु: धत्त्त्त् भैया ...चलो अब छोड़ो ...नहीं तो चिल्ला कर भाभी को बुला लुंगी ....

मैं: अच्छा तो बुला ना ....मैंने उसके नेकर पर हाथ रख अपनी उंगलिया ..नेकर के अंदर डालने की कोशिश की ..

नेकर जूली का था ...इसलिए शायद उसकी कमर में बहुत ढीला होगा ...

मैंने देखा उसने एक तरफ पिन लगाकर उसको अपनी कमर पर टाइट किया था ....

वो इतना टाइट हो गया था कि मेरी उँगलियाँ भी अंदर नहीं गई ...

अनु ने मेरा हाथ पकड़ लिया ..

अनु: नहीईईईई भैया ....मैं भाभी को बुलाती हूँ ... आप उन्ही से पूछ लेना ...उन्होंने तो देखा था ...उन अंकल का ....

अनु अब बाकई खुल रही थी ....

उसकी बात सुन मेरी हिम्मत बड़ गई ....

मैंने उसके हाथ को छुड़ाकर ..एक झटका दिया ...

उसके नेकर कि पिन खुल गई ...और नेकर आगे से पूरा ढीला हो गया ...

और मेरी सभी उँगलियों ने अनु के शरीर के सबसे कोमल भाग पर अपना कब्ज़ा कर लिया ...

अनु ने एक जोर से हिचकी ली ...

अनु: आआउउच नहीईईईईईईईई

मैं बयां नहीं कर सकता कि उसकी चूत कितनी मुलायम थी ...

मुझे लगा जैसे मैं मख्खन की टिक्की में उँगलियाँ घुमा रहा हूँ ....

मैं ये देख और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया था ..की इतनी कम उम्र में भी उसकी चूत से रस निकल रहा था ....

इसका मतलब अनु अब जवान हो चुकी थी .... और मेरा लण्ड उस मख्खन में जाने को फुफकार रहा था ...

तभी जूली की आवाज आई ...
वो किचिन में प्रवेश कर रही थी ...

अनु मेरी गोद में थी ... मेरा बायां हाथ उसके छाती से लिपटा था ...

और दायाँ उसके नेकर के अंदर उसकी चूत पर था ..

कुछ देर तक तो हम दोनों भौचक्के थे ...

मैंने तुरंत अनु को गोद से हटा दिया ....

मगर जूली के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे ... वो नार्मल आई और सामान देखने लगी ...

अनु: वो भाभी ...भैया परेसान कर रहे हैं ...

जूली: अच्छा और तूने ही कुछ किया होगा ....

अनु: मैं क्या करूँ भाभी ?????

जूली: अच्छा परेसान मत हो ... मैंने तेरे घर फोन कर दिया है ... आज यही रुक जाना ... ओके

अनु: ठीक है भाभी ....

जूली: चल पहले खाना खा ले ... फिर कपडे बदल लेना ...

अनु जैसे ही उठकर आगे बड़ी ...उसका नेकर उसके पैरों पर गिर गया ...

लगता है नेकर बहुत ढीला था ....

मैं तो थोड़ा सा डर गया पर ...

जूली : जोर से हँसते हुए ....हा हा हा हा हा हा ..क्या तुझसे जब नेकर नहीं संभलता ...तो मत पहन ..

अनु ने शरमाते हुए नेकर ऊपर कर अपने हाथों से पकड़ लिया ....

इतनी देर में मेरी नजरों ने एक बार फिर ..उसके चिकने चूतड़ और छेद का मनोरम दर्शन किया ...

जूली: चल जा मैंने अपनी एक समीज अंदर रखी है .. इसको निकाल......और वो पहन ले ...

अनु जल्दी से अंदर चली जाती है ....

अब मैंने जूली को ध्यान से देखा ... उसने भी अपनी शॉर्ट वाली पिंक झीनी नाइटी पहनी थी ...

उसका पूरा नग्न शरीर दिख रहा था ... उसने अंदर कुछ नहीं पहना था ...

तभी अनु किचिन में एक पतली सफ़ेद समीज पहने आती है ...जो उसकी जांघो तक ही थी ....

अनु: भाभी बस यही ...

जूली: और क्या रात को सोना ही तो है ... क्या ५० कपडे पहनेगी ....

अनु केवल मुस्कुरा देती है ..
अनु के साथ इतनी छेड़खानी होने के बाद ...वो अब काफी खुल चुकी थी ...

उसका चेहरा बिलकुल लाल था ....

और अब वो शरमाने की वजाए ... मजे ही ले रही थी ...

उसने जूली की जो सफ़ेद रंग की समीज पहनी थी ...

उसमे कंधो पर पतली रेसमी लैस थी ... जो उसकी छाती पर बहुत नीचे थी ...

उसका सीना काफी हद तक नंगा था ...

अनु के जरा से झुकने से उसकी पूरी नंगी चूची साफ़ साफ़ दिख जा रही थी ...

वो बार-बार उठकर काम कर रही थी .... तभी उसके समीज के दोनों साइड के कट से ..

जो उसके कमर तक थे ....समीज के हटने से उसकी नंगी जांघें ...तो कभी उसके चूतड़ तक झलक दिखा जाते थे ....

मेरा लण्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था ....

अनु की मस्ती देख वो कुछ ज्यादा ही मस्ता रहा था..

इधर जूली ने भी कमाल कर रखा था .... वो कोई मौका ...रोमांटिक होने ,,,या बनाने का नहीं छोड़ रही थी ....

देखा जाए तो ...इस समय जूली ..अपनी इस छोटी सी पारदर्शी ..नाइटी में ...लगभग नंगी ही दिख रही थी ...

मगर मेरे लण्ड को उससे कोई मतलब नहीं था ..और ना वो जूली की नग्ण्ता देख ...इतना फ़ुफ़कारता था ..

जो इस समय अनु के नंगे अंग ..जो अभी विकसित भी नहीं हुए थे ...

उनको देख लण्ड ने ववाल मचा रखा था ....

मेरी समझ में अच्छी तरह आ गया था ..कि ये लण्ड भी उस तेज तर्रार ..शिकारी कुत्ते कि तरह है ..जो अपने जानकार लोगो को देख शांत रहता है ..

पर जहाँ कोई अजनवी देखा नहीं ..कि ..बुरी तरह उग्र हो जाता है ...

अनु को देख मेरे लण्ड का भी वही हाल था ...

और ये भी समझ आ गया था .. कि जूली के नंगे अंगों को देख ... तिवारी अंकल, विजय या दूसरे लोगों का क्या हाल होता होगा ...

तभी मेरे दिमाग में शाम वाली बात आ जाती है ...

मैं: अरे जान ...शाम क्या कह रही थी ...???

जूली: किस वारे में ???

मैं : वो जब में अनु को नहला रहा था ...तब कि तो मत शरमा.... अब क्यों ऐसा कर रही है ...
क्या कोई पहले भी इसको नहला चुका है..या नंगा देख चुका है ...

अपनी बात सुनते ही तुरंत अनु ने प्रतिरोध किया ...

अनु: क्या भैया ...आप फिर ...

जूली: तू चुप कर खाना खा ... तुझसे किसी ने कुछ पूछा क्या ???

जूली की डाँट से वो कुछ डर गई ...

और 'जी भाभी' बोल नजरे नीचे कर खाने लगी ...

जूली: जानू और कोई नहीं इसके फादर ही ... वो शराबी ..जब देखो इसको परेसान करता रहता है ...

मैं: क्याआआआआ ?????
क्या कह रही है तू ....
क्या ये सच है ..
इसके पापा ही ..
क्या करते हैं वो ...

अनु एक बार फिर ...

अनु: रहने दो ना भाभी ....

जूली: अरे इसकी कुछ समय पहले तक बिस्तर पर सूसू निकल जाती थी ...ना फिर ...

अनु: छीइइइइइइइइइइइइ भाभी नहीं ना ..

जूली: अच्छा वो तो एक बीमारी ही है ना ... इसमें शरमा क्यों रही है ...

अनु: पर वो तो बहुत पहले की बात है ना ...अब क्यों ..

मैं दोनों की बातें रस लेकर सुन रहा था .....

मैं: हाँ तो फिर क्या हुआ???

जूली: तो इसके पापा ही रोज इसके कपडे बदल ..इसको साफ़ करते थे ...

मैं: और इसकी माँ ..वो नहीं ...

जूली: वही तो .... वो सोती रहती थी .. और इसके पापा को ही बोलती थी ...
ये बेचारी डर के मारे कुछ नहीं बोलती थी ...

मैं: वो तो है ...
तो इसमें गलत क्या है ...हर बाप ..यही करेगा ...

जूली: अरे आगे तो सुनो ....
वो इसकी बिस्तर के साथ साथ ...इसके कपडे ..कच्छी सब निकाल पूरा नंगा कर देते थे ...
और इसका पूरा शरीर साफ़ करते थे ...

मैं: हाँ तो क्या हुआ ...गीले हो जाते होंगे ना ...

जूली: अरे नहीं ...इसका कोई पूरा थोड़ी निकलता था ..
केवल डर की बीमारी थी ... केवल जरा सा निकल जाता था ...

मैं: ओह ....
फिर वो क्या करते थे ???

जूली: वही तो ....

इसके पुरे शरीर को वहाने से छूते the ..रगड़ते थे ..

अनु: बस भाभी ना ...

जूली: उस समय बस नहीं बोलती थी ....

मैं: और क्या करते थे वो ...

जूली: इसके नंगे बदन से चिपक कर लेट जाते थे ..
इसको सोए हुआ जानकर...इसके निप्पल को चूसते हैं ..इसके होंटों को भी चूमते हैं ...

और अभी उस दिन तो बता रही थी ...कि इसकी मुनिया को भी चाटा था ..क्यों अनु ...???

मैं जूली की बात सुन ..आश्चर्यचकित था...

क्या एक बाप आप ही बेटी के साथ ...

अनु सर झुकाये बैठी थी ....

उसने कोई जवाब नहीं दिया ...

मैं: तो क्या अब भी इसको सूसू निकल जाती है ...

अनु तुरंत ना में सर हिलाती है ...

अनु: नहीं भैया ....

जूली: अरे नहीं ... अब तो ये बिलकुल ठीक है ...
मगर इसका बाप अब भी ....

मैं: क्याआआआआआ

जूली: हाँ ..जब पीकर आता है ... तो इसी के बिस्तर पर आकर ..इसको डराता है ...
कि दिखा आज तो नहीं मूता तूने ...
और इसको नंगा कर परेसान करता है ...

मैं: साल ..शराबी ..हरामी ...

जूली: अरे आप क्यों गाली दे रहे हो ...

अनु: भाभी आप बहुत गन्दी हो ...मैं भी भैया को आपकी बात बता दूंगी हाँ ...

अनु कुछ ज्यादा ही बुरा मान रही थी ,,,

मगर इसमें मेरा फ़ायदा ही था ...

लगता है उसके पास कोई जूली के राज हैं ..जो मैं उससे जान सकता हूँ ....

मैं: वो क्या अनु ...???

जूली: अच्छा मेरी कौन सी बात है .... हा हा ..मैं कोई तेरी तरह बिस्तर पर सूसू नहीं करती ...

अनु: धत्त्त भाभी ...
अब तो मैं बता दूंगी ...

जूली: तो बता दे ना .. मैं कुछ नहीं छुपाती अपने जानू से हाँ ....

अनु: अच्छा वो जो डॉक्टर अंकल ..
अचानक ज़िंदगी ने एक रोमांचक मोड़ ले लिया था ...

जो अब तक मैं जी रहा था ..वो केवल सूखी नदी की तरह था ....

और अब ऐसा लग रहा था जैसे ज़िंदगी में रस ही रस आ गया हो ....

अब तक किताबो या लोगो से सुने सभी सामाजिक विचार मुझे बेकार लगने लगे थे ...

इज्जत, सम्मान, मर्यादा सब आपके दिल में ही अच्छे लगते हैं ...दिखावट करने से ये आपको जंजीरों में जकड़ लेते हैं ...

मैं अगर इन सब में पड़ता ...तो अब तक जूली से लड़ झगड़ कर ... हम दोनों की जिंदगी नरक बना लेता ...

मगर मेरी सोच अलग है ....

लण्ड किसी की भी चूत में जाए ..इससे ना तो लण्ड को फर्क पड़ता है ..और ना ही चूत का ही कुछ नुकसान होता है ...

परन्तु बदलाव आने से ...एक अलग मजा आता है ..और जवानी बरकरार रहती है ...

मैं देख रहा था ...की जूली के चेहरे पर एक अनोखी चमक बरकरार रहती है ...

ये सब उसके चंचल जीवन के कारण ही था ...

हम तीनो को ही खाना ..खाते हुए मस्ती करने में बहुत मजा आ रहा था ...

मैंने जूली को चुप कराते हुए कहा ...

मैं: तू चुप कर जान ...मुझे भी तो पता चले ..कि मेरे पीछे उस साले डॉक्टर ने क्या किया ..??
हा हा हा हा ..

मैं जोर से हंसा भी ..जिससे माहौल हल्का ही बना रहे ..

अनु:हाँ भैया ...मेरे को चिड़ा रही हैं भाभी ...जब आप यहाँ नहीं थे तब ...ना

मैं: पुच च च च ..(मैंने अनु को अपने पास करके उसके गाल को चूमते हुए पूछा) बता बेटा ..क्या किया डॉक्टर ने ...

जूली अपने चेहरे को नीचे कर खाते हुए ही ...आँखे ऊपर को चढ़ा ..हम दोनों को घूर रही थी ...

उसके चेहरे पर कई भाव आ जा रहे थे ...

उसके चेहरे के भावो को देख ..मुझे लग रहा था कि ..जरूर कुछ ..अलग राज़ खुलने वाला है ...

क्या डॉक्टर ने ..मेरे पीछे जूली की चुदाई की थी ...वो भी अनु के सामने ...????

क्या इसीलिए जूली ...अनु को मेरे से इतना ..क्लोज कर रही है ...

मैंने अपने सीधे हाथ से अनु की नंगी ..चिकनी जांघे सहलाते हुए उसको बढ़ावा दिया ...

अनु: वो भैया ..भाभी की तबियत खराब नहीं हो गई थी ... जब ...
तब आपने ही तो भेजा था ना डॉक्टर को ...
भाभी बिलकुल चल ही नहीं पा रही थी ..
तब ना ..उन डॉक्टर ने भाभी को नंगा करके ...सुई लगाईं थी ...

मैं: क्याआआआआ ....

जूली: एएएएए मारूंगी ..क्या वकवास कर रही है ...

मैं: क्यों मारेगी ...वही कौन सी सुई लगाई थी ..हा हा हा हा

मैंने बिलकुल ऐसे जाहिर किया ..जैसे कुछ हुआ ही नहीं ...

मेरे इस वर्ताब से माहौल सामान्य बना रहता है ..

जूली जो कुछ बैचेन हो गई थी ..अब मजे ले रही थी ...

जूली: अरे नहीं जानू ...मैं तो बिलकुल बेजान ही हो गई थी उस दिन ....
मेरा ब्लड प्रेशर बहुत काम हो गया था ...

मैं: हाँ मुझे पता है जान ...सॉरी यार उस समय मैं तुम्हारे पास नहीं था ..

जूली: ओह थैंक्स माय लव ..

मैं :फिर डॉक्टर ने कहाँ इंजेक्शन लगाया ...

जूली: अरे उस दिन मैंने पीला वाला .लॉन्ग गाउन पहना था ना ...बस ...उसी कारण...

मैं: अरे तो क्या हुआ जान ... डॉक्टर जब चूतड़ों पर इंजेक्शन ठोंकता है ...तो उसके सामने तो सभी को नंगा होना ही पड़ता है ...

अनु: हाँ भैया ... मगर भाभी ने तो उस दिन ..कच्छी भी नहीं पहनी थी ...
डॉक्टर ने तो भाभी के चूतड़ और सुसू पूरी नंगी देखी थी ..हे हे ..

अनु को कुछ ज्यादा ही मस्ती चढ़ गई थी ...

मगर अब हम दोनों ही उसकी बातों से मजा ले रहे थे ..

जूली: इसे देखो जरा ..कितनी चुगली कर रही है ..
अरे जानू वो गाउन ..केवल नीचे से ऊपर ही हो सकता है ना ...
मुझे तो पता ही नहीं था ..की वो इंजेक्शन लगाएंगे ...
वरना मैं कोई पजामा जैसा कपडा डाल लेती ..

मैं: अरे तो क्या हुआ जान ... क्या फरक पड़ता है ..

जूली: मुझे तो बाद में समझ आया ... फिर बहुत शर्म भी आई ..
पहली बार मुझे लगा कि ..कच्छी पहननी चाहिए थी ..
पर तब तो उन्होंने इंजेक्शन लगा गाउन ठीक भी कर दिया था ...

अनु: नहीं भाभी ..बहुत देर तक उन्होंने आपके चूतड़ सहलाये थे .. मैंने देखा था ...

अनु ने तो जैसे पूरा मोर्चा संभाल लिया था ... उसको लगा आज जूली कि डांट पढ़बा कर ही रहेगी ...

जूली: ओह ... नहीं जान ..मुझे कोई होश नहीं था ..मुझे नहीं पता ..ये क्या बक रही है ....

मैं: हा हा हा हा ...मुझे पता है जान ...
मैंने अनु को और भी अपने से चिपका ..उसके जांघो के जड़ तक अपना हाथ पंहुचा दिया ...

आश्चर्य जनक रूप से उसने अपने दोनों पैरो के को खोल ...एक गैप बना दिया ...

मेरी उँगलियों ने एक बार फिर उसकी कोरी ..छोटी से चिकनी ..फ़ुद्दी को सहलाना शुरू कर दिया ...

मैं: मेरी प्यारी बच्ची ...वो जो डॉक्टर है ना सुई लगाने से पहले ..उस जगह को मुलायम करने के लिए ..मलते हैं ....

अनु: अहा ह्ह्ह्ह्ह......... जज्जी ........भैया

जूली: समझी पागल ...

अनु: मुझे लगा ..कि वो भाभी के साथ कोई गन्दी हरकत कर रहे हों ...

मैं: नहीं बेटा ...

ऐसी बातें करते हुए और ... मजे लेते हुए हम तीनो ने खाना खत्म किया ...

अब बारी थी सोने कि .........

मेरे मन में ना जाने कितने विचार चल रहे थे ... कि आज रात अनु के साथ कुछ न कुछ तो करता हूँ ...

मगर अनु जब भी आती है ... वो बाहर के कमरे में ही सोती है ....

अब उसको अपने बैडरूम में तो सुला नहीं सकता था ...

और अगर रात को सोते हुए उठकर कुछ करता हूँ तो .कैसे ...

यही सब प्लान मेरे दिमाग में चल रहे थे ....

मगर ये पक्का था कि आज यार कुछ करूँगा जरूर ..

जब जूली भी लगभग साथ दे रही है ...

और अनु भी मजे ले रही है ...कोई विरोध नहीं कर रही ..

तो ये मौका नहीं छोड़ना चाहिए ...

मेरा लण्ड भी बैठने का नाम नहीं ले रहे था ...

उसको भी एक टाइट माल कि ख़ुश्बू आ रही थी ...

किचिन के सब काम निबटने और बिस्तर लगाने तक ..कई बार मैंने अनु को छेड़ा ...

उसके नंगे चूतड़ों को मसला ... उसकी चूची को सहलाया ...

अनु ने हर बार मेरा साथ दिया ....

दो बार तो उसने खुद मेरे लण्ड को पकड़ दबाया ...

मैंने सोच लिया ..कि आज रात को ये ...उसके किसी न किसी छेद में तो डालूँगा ही ..
अनु की चिकनी फ़ुद्दी और मनमोहक चूतड़ ने मेरी सोचने समझने की शक्ति को बिलकुल ख़त्म ही कर दिया था ....

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था ..कि कैसे इसकी ठुकाई करूँ ...

साफ़ नजर आ रहा था कि ..जुली कुछ नहीं कह रही है ...

वल्कि हर बार साहयता ही कर रही है ...

फिर भी मुझमे खुलकर कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी ...

शायद ये हम दोनों का एक दूसरे के प्रति असीम प्यार था ...

जो एक दूसरे की इच्छा का सम्मान भी कर रहे थे ..

मगर एक दूसरे के सामने खुलकर किसी दूसरे से रोमांस नहीं कर पा रहे थे ...

मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अगर मैं अनु को चोद रहा हूँ ...और जूली देख ले ...तो क्या वो कोई प्रतिक्रिया देगी ...

या मेरी तरह ही चुप रहेगी ....

अब सोने का इन्तजार था ...

अनु ने अपना बिस्तर बाहर के कमरे में ही लगया था ..

मैं यही सोच रहा था ...कि रात को एक बार कोशिश तो जरूर करूँगा ...

ये अच्छा ही था कि जूली बैडरूम में रहेगी ..और मैं आसानी से अनु कि टाइट चूत खोल पाउँगा ..

मगर फिर एक डर भी सता रहा था ...कि अगर वो ज़ोर से चिल्ला दी तो क्या होगा ...

बहुत से विचार मेरे दिल में आ जा रहे थे ...

मैं बहुत साड़ी बाते सोच रहा था ...

कि अनु को ऐसे करके चोदूंगा ..वैसे चोदूंगा ..

यहाँ तक कि मैंने दो तीन ..चिकनी क्रीम भी ढूंढ कर पास रख ली थीं ...

मेरे सैतानी लण्ड ने आज एक क़त्ल का पूरा इंतजाम कर लिया था ...

और वो हर हाल में इस काण्ड को करने के लिए तैयार था ...

फिर काम निपटाकर जूली अंदर आई ...

और उसने मेरे पुराने सभी विचारों पर बिंदु लगा दिया ..

अहा ये जूली ने क्या कर दिया ...

पता नहीं मेरे फायदे के लिए किया .... या सब कुछ रोकने के लिए ...

मगर मुझे ये बहुत बुरा लगा ....

दरअसल ..हमरे घर में ऐ0 सी० केवल बैडरूम में ही लगा है ...

बाहर के कमरे में केवल छत का पंखा है ...जो सोफे वाली तरफ है ..

जहाँ अनु ने बिस्तर लगाया था ..वहां हवा बिलकुल नहीं पहुचती ...

जूली ने वहां आते ही उसको कहा ...

जूली: अरे अनु यहाँ तू कैसे सोयेगी ....रात को गर्मी में मर जाएगी ...
चल अंदर ही सो जाना ...

लगता है जैसे अनु मेरे से उल्टा सोच रही थी ...

जहाँ मैं उसको अलग आराम से चोदना चाह रहा था ..

वहीँ वो शायद मेरे पास लेटने की सोच रही थी ..

क्युकि वो एक दम से तैयार हो गई ....

और उसने फटाफट अपना बिस्तर उठाया ..और बैडरूम में आ देखने लगी कि किस तरफ लगाना है ..

मैं कुछ कहना ही चाह रहा था ..

मगर तभी जूली ने एक और बम छोड दिया ...

जूली: ये कहाँ ले आई बेबकूफ ..इसको बाहर ही रख दे ..
यहीं बेड़ पर ही सो जाना ...

अब मुझसे नहीं रुक गया ..

मैं: अरे जान यहाँ ..कैसे ...

जूली: अरे सो जाएगी एक तरफ को जानू ....
वहां गर्मी में तो मर जायेगी सुबह तक

मैं चुप करके अब इस स्थिति के बारे में विचार करने लगता हूँ ...

पता नहीं ये अच्छा हुआ या गलत ...

पर जब अनु..... जूली के पास ही सोयेगी .तब तो में हाथ भी नहीं लगा पाउँगा ...

मेरा दिल कहीं न कहीं डूबने लगा था ... और जूली को बुरा भी कह रह था ....

अब तीनो बिस्तर पर आ जाते हैं ...

एक ओर मैं था ..बीच में जूली ..एवं दूसरी तरफ अनु लेट गई ....

ऐ सी अनु वाली साइड में लगा था ....

मैंने कमर में एक पतला कपडा बाँध लिया था ...और पूरा नंगा था ....

वैसे मैं नंगा ही सोता था ... पर आज अनु के कारण मैंने वो कपडा बाँध लिया था ...

जूली अपनी उसी शार्ट नाइटी में थी ...जो उसके पैर मोड़ने से उसके कमर से भी ऊपर चली गई थी ..

उसके मस्त नंगे चूतड़ मेरे से चिपके थे ...

उधर अनु केवल एक समीज में लेटी थी ..

हाँ उसमे अभी भी शर्म थी ..या वाकई ठण्ड के कारण वहां रखी पतली चादर ओड ली थी ...

उसका केवल सीने तक का ही बदन मुझे दिख रहा था ..

करीब आधे घंटे तक में सोचता रहा कि यार क्या करू ...

एक मस्त नंगे चूतड़ ..मेरे लण्ड को आमंतरण दे रहे थे ..

मगर उसे तो आज नई डिश दिख रही थी ...

मेरा कपडा खुल कर एक ओर हो गया था ...ओर अब नंगा लण्ड छत कि ओर तना खड़ा था ...

मेरे बस करवट लेते ही वो जूली के नंगे चूतड़ से चिपक जाता ...

मगर ना जाने क्यों मैं सीधा लेटा ..अनु के बारे में सोच रहा था ....

कि क्या रिस्क लू ..उस तरफ जा अनु को चिपका लू ..

मगर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी ...

फिर मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया ..

मैंने जूली कि ओर करवट ले ली और

.मैं जूली से पीछे से चिपक गया ..

मेरे लण्ड ने जूली के चूतड़ के बीचों बीच अपनी जगह बना ली ....

जूली भी थोड़ा सा खिसक ... अपने चूतड़ों को हिलाकर .. लण्ड को सही जगह सेट कर लेती है ..

अब मैं हाथ बड़ा सीधे अपने हाथ को अनु की चादर में डाल देता हूँ ...

मुझे पता था कि जूली आँखे खोले मेरे हाथ को ही देख रही है ...

मगर मैंने सब कुछ जानकार भी अपने हाथ को अनु कि चादर में डाल दिया ...

और हाथ अनु के नंगे पेट पर रखा ...

अनु की समीज उसके पेट से भी ऊपर चली गई थी ..

मैंने जूली की परवाह ना करते हुए ... अपना हाथ सीधे पेट से सरकाते हुए ...

अनु की मासूम फ़ुद्दी तक ले गया ...

जहाँ अभी बालों ने भी पूरी तरह निकलना शुरू नहीं किया था ...

उसका ये प्रदेश किसी मखमल से भी ज्यादा कोमल था ....

मेरी उँगलियों ने उसकी फ़ुद्दी को सहलाते हुए ..जल्दी ही उसके बेमिसाल छेद को टटोल लिया ...

अनु कसमसाई ...उसने आँखे खोली ..और सर घुमाकर जूली की ओर देखा ...

जूली की भी आँखे खुलीं थी ...

बस अनु बिदक गई ...और उसने तुरंत मेरा हाथ झटक दिया ....

अनु : क्या करते हो भैया ...सोने दो ना ...

मैं पहले तो घबरा गया ...मगर फिर मेरे दिमाग ने काम किया ...

मैं: अरे मैं देख रहा हूँ कि तूने कहीं सूसू तो नहीं कर दिया ... गद्दा खराब हो जायेगा ...

जूली: हा हा ..और एक दम ऐ सी के सामने लेती है .. जरा संभलकर ...

अनु: क्या भाभी आप भी ...मैं नहीं बोल रही आपसे ..

तभी जूली ने बो कर दिया जिसकी मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी ..
अनु की मख्खन जैसी फ़ुद्दी के छूने से ..मेरे लण्ड में जबरदस्त तनाव आ गया था ....

जिसको जूली ने भी महसूस कर लिया था ...

मेरी समझ से बिलकुल परे था कि...

एक बीवी होकर भी वो अपने पति के सेक्सी रोमांस का
मजा ले रही है ...

ना केवल मजे ले रही है ..वल्कि मेरे इस काम में सहयोग भी कर रही है ...

अब ना जाने उसके मन में क्या था ...

इन सब बातों को सोचने के बारे में ...मेरे दिल और दिमाग दोनों ने ही मना कर दिया था ...

अनु की नाजुक जवानी को चखने के लिए उसमे इतना तनाव आ गया था ...

कि दिल और दिमाग दोनों ही सो गए थे ....

उनको तो बस अब एक ही मंजिल दिख रही थी ....

चाहे उस तक कैसे भी जाया जाये ....

अनु: ओह भाभी ....भैया भी ..पापा की तरह परेशान कर रहे हैं ...

जूली ने अनु का हाथ पकड़ ...खेंच कर सीधे मेरे तने हुए लण्ड पर रख दिया .....

जूली: तू भी तो पागल है ... बदला क्यों नहीं लेती ...
तू भी देख ..कि कहीं तेरे भैया ने तो सूसू नहीं की ..
हे हे हे हे

जूली के इस घटना से मैं भौचक्का रह गया ..
और शायद अनु भी ...

हाथ के खिचने से वो जूली के ऊपर को आ गई थी ..

जूली ने ना केवल अनु का हाथ ..मेरे लण्ड पर रखा ..वल्कि उसको वहां पकडे भी रही ..

कि कहीं अनु जल्दी से हटा न ले ...

अनु का छोटा सा कोमल हाथ ...मेरे लण्ड को मजे दे ही रहा था कि ...........

अब अनु ने भी मेरी समझ पर परदा डालने वाली हरकत की....

उसने कसकर अपनी छोटे छोटे हाथ से बनी जरा सी मुट्ठी में मेरे लण्ड को जकड लिया ...

अनु: हाँ भाभी ये आप ठीक कहती हो ...
क्या अब भी भैया ..सूसू कर देते हैं बिस्तर पर ...

जूली: हा हा ...हाँ बेटा ...तुझे क्या पता ..कि ये अब भी बहुत नालायक हैं ..
ना जाने कहाँ कहाँ ..मुत्ती करते हैं ...मेरे कपडे तक गीले कर देते हैं ...

मैंने अनु के हाथ को लण्ड से हटाने की कोई जल्दी नहीं की ......

लेकिन कुछ प्रतिवाद तो करना ही था ..इसलिए ..

मैं: तुम दोनों पागल हो गए हो क्या ..??
ये क्या वकवास लगा रखी है....

तभी अनु मेरे लण्ड को सहलाते हुए अपना हाथ ..लण्ड के सुपाड़े के टॉप पर ले जाती है ..

उसको कुछ चिपचिपा महसूस हुआ ...

मेरे लण्ड से लगातार प्रीकम निकल रहा था ...

अनु: हाँ भाभी ..आप ठीक कह रही हो ...भैया ने आज भी सूसू की है ..
देखो कितना गीला है ...

जूली: हा हा हा ...

मैं: हा हा चल पागल ...फिर तो तूने भी की है ..अपनी देख वहां भी कितना गीला है ...

शायद जूली जैसी समझदार पत्नी बहुत कम लोगों को मिलती है ...

मेरा दिल कर रहा था कि ..जमाने भर कि खुशियाँ लाकर उसके कदमो में डाल दूँ ...

मेरे लण्ड और अनु की चूत के गीलेपन की बात से ही वो समझ गई.....कि हम दोनों अब क्या चाहते हैं ...

वो बिना कुछ जाहिर करे अनु को एक झटके से ...अपने ऊपर से पलटकर मेरी ओर कर देती है ..

और खुद अनु की जगह पर खिसक जाती है ..

फिर बड़े ही रहस्य्मय आवाज में बोलती है ..

जूली: ओह तुम दोनों ने मेरी नींद का सत्यानाश कर दिया है ...
तू इधर आ और अब तुम दोनों ...
एक दूसरे की देखते रहो ..
कि किसने की और किसने नहीं की सूसू

अनु एकबारगी तो बोखला सी गई ...

पर बाद में सीधी होकर लेट गई ...

मैं समझ नहीं पा रहा था कि कुछ बोलूं या नहीं ...

मैंने घूमकर देखा ....जूली बाकई दूसरी और करवट लेकर लेट गई थी ...

अब मैंने अनु के चेहरे की ओर देखा ...

उसके चेहरे पर कई भाव थे ....

उसकी आँखों में वासना और डर दोनों नजर आ रहे थे ..
जबकि होंटो पर हलकी मुस्कुराहट भी थी ...

मेरे दिल में एक डर भी था ..कि कहीं जूली कुछ फंसा तो नहीं रही ...

मगर पिछले दिनों मैंने जो कुछ भी देखा और सुना था ...जूली का वो खुला रूप याद कर मेरा सारा डर निकल गया ...

मैंने झुककर अनु के पतले कांपते होंठो पर अपने होंठ रख दिए ...

अनु तो जैसे सब कुछ करने को तैयार थी ...

लगता है ... इस उम्र में उसकी वासना अब उसके वश से बाहर हो चुकी थी ....

वो लालायित होकर अपने मुँह को खोलकर ...मेरा साथ देने लगी ...

मैं उसके ऊपर तिरछा होकर झुका था ...

उसका बायां हाथ मेरे लण्ड को छू रहा था...

अचानक मैंने महसूस किया कि उसने फिर से अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को पकड़ लिया है ...

उसकी बैचेनी को समझते हुए मैंने उसके होंठो को छोड़कर ...........ऊपर उठा ....

मैंने उसकी समीज की ढीली आस्तीन को उसके कंधो से नीचे सरका दिया ...

अनु इतनी समझदार थी कि वो तुरंत समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ ...

उसने अपने दोनों हाथों से अपनी आस्तीन को निकाल दिया ...

मैंने उसके सीने से समीज को नीचे कर उसकी नाजुक ...छोटी छोटी चूचियों को एक ही बार में अपनी हथेली से सहलाया ...

अनु: (बहुत धीरे से) अहाआआ

उसकी समीज उसके पेट पर इकट्ठी हो गई थी ...

मैंने एक बार फिर समीज नीचे को की ...

अनु ने जूली की ओर देखते हुए ... अपने चूतड़ को उठाकर ...
अपने हाथ और पैर से समीज को पूरा निकाल दिया ...

जूली अपने नंगे चूतड़ को उठा ..हमारी ओर करवट लिए वैसे ही लेती थी ....

उसकी साँसे बता रही थी .. कि वो सो गई है ...या सोने का नाटक कर रही है ......

मेरा कमर से लिपटा ..कपडा तो कब का खुलकर ..बिस्तर से नीचे गिर गया था ...

अब अनु भी पूरी नंगी हो गई थी ...

नाईट बल्ब की नीली रोशनी में उसका नंगा बदन गजब लग रहा था ...

मैंने नीचे झुककर उसकी एक चूची को पूरा अपने मुँह में ले लिया ...

उसकी पूरी चूची मेरे मुँह में आ गई ... मैं उसको हलके हलके चूसते हुए ..
अपनी जीभ कि नोक से उसके जरा से निप्पल को कुरेदने लगा ...

अनु पागल सी हो गई ...

उसने अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को पकड़ उमेठ सा दिया ...

मैंने अपना बायां हाथ उसकी जांघो के बीच ले जाकर सीधे उसकी फ़ुद्दी पर रखा ...

और अपनी ऊँगली से उसके छेद को कुरेदते हुए ही एक ऊँगली अंदर डालने का प्रयास करने लगा ....

अनु कुनमुनाने लगी ....

लगता है उसको दर्द का अहसास हो रहा था ...

मुझे संसय होने लगा कि इतने टाइट छेद में मेरा लण्ड कैसे जायेगा ....

वाकई उसका छेद बहुत टाइट था ... मेरी ऊँगली जरा भी उसमे नहीं जा पा रही थी ....

मैंने अपनी ऊँगली अनु के मुँह में डाली ...
उसके थूक से गीली कर फिर से उसके चूत में डालने का प्रयास किया ..

मगर इस बार ..
मेरा बैडरूम मुझे कभी इतना प्यारा नहीं लगा ...

मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ..

कि ज़िंदगी इतनी रंगीन हो सकती है ...

मेरे सामने ही ..बेड के दूसरी छोड़ पर मेरी सेक्सी बीवी लगभग नंगी करवट लिए लेटी है ...

उसकी अति पारदर्शी नाइटी ..जो खड़े होने पर उसके घुटनो से ६ इंच ऊपर तक आती थी ...

इस समय सिमट कर उसके पेट से भी ऊपर थी ...

और मेरी जान अपने गोरे बदन पर कच्छी तो पहनती ही नहीं थी ....

उसके मस्त चूतड़ ..पीछे को उठे हुए ....मेरे सेक्स को कहीं अधिक भरका रहे थे ....

अब तक मजेदार भोजन खिलाने वाली मेरी बीवी ने.... आज एक ऐसी मीठी डिश मेरे सामने रख दी थी ,,,और सोने का नाटक कर रही थी ...

कि जिसकी कल्पना शायद हर पति करता होगा ..

मगर उसे मायूसी ही मिलती होगी ....

अनु के रसीले बदन से खेलते हुए ...मैं अपनी किस्मत पर रस्क कर रहा था ...

इस छोटी सी लोंडिया को देख मैंने कभी नहीं सोचा था कि ...
ये इतनी गरम होगी ....

और चुदाई के बारे में इतना जानती होगी ...

मेरा लैंड उसके हाथो ..में मस्ती से अंगड़ाई ले रहा था ...

और बार-बार मुँह उठाकर उसकी कोमल फ़ुद्दी को देख रहा था ...

या बोल रहा हो ...कि आज तुझे जन्नत कि सैर कराऊंगा ...

उसकी फ़ुद्दी भी मेरी उँगलियों के नीचे बुरी तरह मचल रही थी ...

वो सब कुछ कर गुजरने को आतुर थी ...

शायद ..उसकी फ़ुद्दी ..होने वाले कत्लेआम से अनभिग थी .....

मेरे और अनु के बदन पर एक भी कपडा नहीं था ..

अनु बार-बार मेरे गठीले एवं संतुलित बदन से कसकर चिपक जाती थी ...

मेरा मुँह उसकी दोनों रसीली आमियों को निचोड़ने में ही लगा था ...

मैं कभी दाई ..तो कभी बायीं चूची को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था ...

अनु कुछ ज्यादा ही मचल रही थी ...

वो मेरी तरफ घूम कर ..अपना सीधा पैर मेरी कमर पर रख देती है ...

मैं भी अपना हाथ आगे उसकी फ़ुद्दी से हटा ...उसके मांसल चूतड़ों पर रख उसको अपने से चिपका लेता हूँ ..

इस अवस्था में उसकी रसीली चूत मेरे लण्ड से चिपक जाती है ....

शाम से हो रहे घटनाक्रम से अनु सच में सेक्स लिए पागल हो रही थी ...

वो अपनी चूत को मेरे लण्ड से सटा खुद ही अपनी कमर हिला रही थी ..

उसकी रस छोड़ रही चूत मेरे लण्ड को और भी ज्यादा भड़का रही थी ...

मैंने एक बात और भी गौर की..... कि अनु शुरू शुरू में बार बार ...जूली की ओर घूमकर देख रही थी ....

उसको भी कुछ डर जूली का था...

मगर अब बहुत देर से वो मेरे से हर प्रकार से खेल रही थी ...

उसने एक बार भी जूली की ओर ध्यान नहीं दिया था ...

या तो वासना उस पर इस कदर हावी हो चुकी थी ...
की वो सब कुछ भूल चुकी थी ..

या अब वो जूली के प्रति निश्चिंत हो चुकी थी ....

हाँ मैं उसी की ओर करवट से लेटा था ...

तो मेरी नजर बार बार जूली पर जा रही थी ...

कमाल है ..उसने एक बार भी ना तो गर्दन घुमाई थी ..
और ना उसका बदन जरा भी हिला था ...

जूली पूरी तरह से अनु का उद्घाटन करने को तैयार थी .........

मेरा लण्ड इस तरह की मस्ती से ..और भी लम्बा, मोटा हो गया था .....

मैं अपने हाथ से उसके चूतडो को मसलते हुए .. अपनी ओर दबा रहा था ...

और अनु अपने कमर को हिलाते हुए मखमली चूत को मेरे लण्ड पर मसल रही थी ...

मेरे मुँह में उसकी चूची थी ...

हम दोनों बिलकुल नहीं बोल रहे थे ..

मगर फिर भी मेरे द्वारा चूची चूसने की ..पुच पिच जैसी आवाजे हो ही रही थीं ....

अनु की बेकरारी मुझे उसके साथ और भी ज्यादा खेलने को मजबूर कर रही थी ....

मैंने उसको सीधा करके बिस्तर पर लिटा दिया ...

अब मैं उसके ऊपर आ गया ......

मैंने एक बार उसके कंपकंपाते होठो को चूमा ...

फिर उसकी गर्दन को चूमते हुए ...जरा सा उठकर ..नजर भर अनु के मस्त उठानो को देखा ...

दोनों चूची छोटे आम की तरह ..उठी हुई ..जबरदस्त टाइट ... और उन पर पूरे गुलाबी ..छोटे से निप्पल ..

जानलेवा नजारा था ...

मैंने दोनों निप्पल को बारी बारी से .. अपने होंटों से सहलाया ..

फिर नीचे सरकते हुए उसके पतले पेट तक पंहुचा ..अब मैंने उसके पेट को चूमते हुए ..
अपनी जीभ उसकी प्यारी सी नाभि पर रख दी ...

मैं जीभ को नाभि के चारों ओर घुमाने लगा ...

अनु मचल रही थी ...उसके मुँह से अब हलकी हलकी आहें निकलने लगी ...

अनु: अह्ह्हाआ ह्ह्ह्ह आ

मैं थोड़ा और नीचे हुआ ...

मैंने अनु के पैरों को फैलाया ...और उसकी कोमल कली फ़ुद्दी ...पहली बार इतनी नजदीक से देखा ...

उसके दोनों फूल ..कास कर एक दूसरे से चिपके थे ...

चूत पर एक भी बाल नहीं था ...

जूली की चूत भी गजब की है .... बिलकुल छोटी बच्ची जैसी ....
मगर उस पर बाल तो आ चुके ही थी ... भले ही वो कीमती हेयर रेमोवेर से उनको साफ़ कर अपनी चूत को चिकना बनाये रखती थी ...

और फिर लण्ड खाने से उसकी चूत कुछ तो अलग हो गई थी ...

मगर अनु की चूत बिलकुल अनछुई थी .... उस पर अभी बालों ने आना शुरू नहीं किया था ...

जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी ..उसका तो कहना ही क्या ...

इतनी प्यारी कोमल अनु की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी ....

उसके चूत से निकल रहे काम रस की खुसबू मेरे को मदहोश कर रही थी ....

मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी ...

अनु: अह्ह्हाआआआ ज

जोर से तरफी ...उसने अपनी कमर उठा ..बेकरारी का सबूत दिया ....

मैं उस खुसबू से बैचेन हो गया और ,,

मैंने अपनी जीभ उसके चूत के मुँह पर रख दी ...

बहुत मजेदार स्वाद था .... मैं पूरी जीभ निकाल चाटने लगा ...

मुझे चूत चाटने में वैसे बी बहुत मजा आता था ...

और अनु जैसी कमसिन चूत तो मख्खन से भी ज्यादा मजेदार थी ...

मैं उसकी दोनों टाँगे पकड़ ..पूरी तरह से खोलकर ...

उसकी चूत को चाट रहा था ...

मेरी जीभ अनु के चूत के छेद को कुरेदती हुई अब अंदर भी जा रही थी ....

उसकी चूत के पानी का नमकीन स्वाद मुझे मदहोश किये जा रहा था ....

मैं इतना मदहोश हो गया कि मैंने अनु की टाँगे ऊपर को उठाकर ...

उसके चूतड़ तक चाटने लगा ...

कई बार मेरी जीभ ने उसके चूतड़ के छेद को भी चाटा.....

अनु बार बार सिस्कारियां लिए जा रही थी ...

हम दोनों को ही अब जूली की कोई परवाह नहीं थी ...

मैंने चाट चाट कर उसका निचला हिस्सा पूरा गीले कर दिया था ...

अनु की चूत और गांड दोनों ही मेरे थूक से सने थे ...

मेरा लण्ड बुरी तरह फुफकार रहा था ...

मैंने एक कोशिश करने की सोची ...

मैंने अनु को ठीक पोजीशन में कर उसके पैरों को फैला लिया ...

और अपना लण्ड का मुँह ... उसके लपलपाती ..चूत के मुख पर टिका दिया .
ये मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीं पल था ...

एक अनछुई कली ...पूरी नग्न ...मेरे नीचे दबी थी ...

उसके चिकने कोमल बदन पर एक चिंदी वस्त्र नहीं था ...

मैंने उसके दोनों पैरों को मोड़कर ... फैलाकर चोडा कर दिया ....

उसकी छोटी सी चूत ..एक दम से खिलकर सामने आ गई ...

मैंने अपनी कमर को आगे कर ..अपना तनतनाते लण्ड को उन कलियों सी चिपका दिया ...

मेरे गर्म सुपाड़े का स्पर्श अपने चूत के मुह पर होते ही अनु सिसकार उठी ...

मैं धीरे धीरे ...उसी अवस्था ..में लण्ड को घिसने लगा ..

दिल कर रहा था कि एक ही झटके में पूरा लण्ड अंदर डाल दूँ ...

मगर ये ही एक शादीशुदा मर्द का अनुभव होता है ..

कि वो जल्दबाजी नहीं करता ....

मैं बाएं हाथ को नीचे ले जाकर लण्ड को पकड़ लेता हूँ ..

फिर कुछ पीछे को होकर लण्ड को चूत के मुख को खोलते हुए अंदर सरकाने की कोशिश करता हूँ ...

अनु बार-बार कमर उचकाकर अपनी बैचेनी जाहिर कर रही थी ...

१० मिनट तक मैं लण्ड को चोदने वाले स्टाइल में ही चूत के ऊपर घिसता रहा ...

१-२ बार सुपाड़ा ..जरा जरा ...सा ही चूत को खोल अंदर जाने का प्रयास भी कर रहा था ..

मगर अनु का जिस्म अभी बिलकुल दर्द सहने का आदि नहीं था ...

वो खुद उसे हटा देती थी ...

शायद उसको हल्के सी भी दर्द का अंदाजा नहीं था ...

उसको केवल आनंद चाहिए था ..

इसलिए हल्का सा भी दर्द होते ही वो पीछे हट जाती थी ..

इससे पहले भी मैंने 4-5 लड़कियों की कुआरी झिल्ली को तोडा था ..

मुझे यकीन था की अनु अभी तक कुआंरी है ...

और उस हर अवस्था का अच्छा अनुभव रखता था ..

जिन 4-5 लड़कियों की मैंने झिल्ली तोड़ी थी ...
उसमे एक तो बहुत चिल्लाई थी ...

उसने पूरा घर सर पर उठा लिया था ..

उस सबको याद करके ...
एवं जूली के इतना निकट होने से मैं ये काम आसानी से नहीं कर पा रहा था ...

मुझे पता था ..कि अनु आसानी से मेरे लण्ड को नहीं ले पायेगी ...

और अगर ज़ोर से झटके से अंदर घुसाता हूँ तो बहुत ववाल हो सकता है ...

खून, चादर, चीख चिल्लाहट ..और ना जाने कितनी परेसानी आ सकती है ...

हो सकता है जूली भी इसी सबका इन्तजार कर रही हो ...

फिर वो मेरे पर हावी हो रंगरालिओं के साथ-साथ दवाव भी बना सकती है ...

मेरा ज़मीर ..मेरे को उसके सामने कभी नीचे दिखने को राजी नहीं था ...

वो भी एक चुदाई के लिए ...

क्या मुझे अपने लण्ड पर काबू नहीं था ..??

मुझे खुद पर पूरा भरोसा था ...

मैं अपने लण्ड को ..अपने हिसाब से ही चुदाई के लिए इस्तेमाल करता था ....

ज़बरदस्ती कभी करता नहीं था ...
और जो तैयार हो ..
उसको छोड़ता नहीं था ....

अनु के साथ भी मैं वैसे ही मजे ले रहा था ...

मुझे पता था ..कि लौंडिया घर की ही है...

और बहुत से मौके आएंगे ...

जब कभी अकेला मिला ..तब ठोंक दूंगा ...

और अगर प्यार से ले गई तो ठीक ..

वरना खून खराबा तो होगा ही ....

अनु की नाचती कमर बता रही थी की उसको इस सबमे भी चुदाई का मजा आ रहा है ...

खुद को मजा देने के लिए ..

मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत के पूरा लेटी अवस्था में चिपका दिया ....

और में ऊपर ..नीचे होकर मजा लेने लगा ...

लण्ड पूरा अनु की चूत से चिपककर ..उसके पेट तक जा रहा था ...

उसकी चूत की गर्मी से मेरा लण्ड लावा छोडने को तैयार था ...

पर लगता है कि...

अनु कि चूत के छेद पर अब लण्ड छू नहीं पा रहा था ..

या उसको पहले टॉप के धक्को से ज्यादा आनंद आ रहा था ...

वो कसमसाकर मुझे ऊपर को कर देती है ...

फिर खुद अपने पैरों को मेरी कमर से बांधकर

अपना हाथ नीचे कर मेरे लण्ड को पकड़ लेती है ...

उसके पसीने से भीगे ..नरम छोटे हाथो में आकर लण्ड और मेरी हालत ख़राब होने लगती है ...

वो लण्ड के सुपाड़े को फिर अपनी चूत के छेद से चिपका देती है ...

और कमर हिलाने लगती है ...

अब मैं भी कमर को थोड़ा कसकर ..आगे पीछे करने लगता हूँ ...

उसके कैसे हुए हाथो में मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरा लण्ड ..चूत के अंदर ही है ...

मैं जोर जोर से कमर हिलाने लगा ,जैसे चुदाई ही कर रहा हूँ ...

अनु लण्ड को छोड़ ही नहीं रही थी ...

कि कहीं मैं फिर से लण्ड को वहां से हटा न लूँ ...

अब लण्ड का सुपाड़ा ..आधा से १ इंच तक भी चूत के अंदर चला जा रहा था ...

अनु ने इतनी कसकर लण्ड पकड़ा था कि ...वो वहां से इधर उधर न हो ...

इसीलिए चूत में भी ज्यादा नहीं घुस पा रहा था ...

वरना कुछ झटके तो इतने जोरदार थे कि लण्ड अब तक आधा तो घुस ही जाता ...

और तभी मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी ...

मैं: अहाआआआआ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआअ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊ ओह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

कई पिचकारी अनु की चूतको पूरा गीली करती हुई उसके पेट और छाती तक को भिगो गई ...

सच बहुत ज्यादा वीर्य निकला था ....

अनु ने अब भी कसकर लण्ड को पकड़ा था ....

मुझे जन्नत का मजा आ रहा था ...

फिर मैं मुझमे अब जरा सी भी हिम्मत नहीं बची थी ,,

मैं एक ओर गिरकर लेट गया ...

मुझे बस इतना ध्यान है ...

कि अनु उठकर बाथरूम में गई ....

कुछ देर बाद मैंने देखा अनु बाथरूम से बाहर निकली ..

वो अभी भी पूरी नंगी थी ...

उसने बाथरूम का दरवाजा ..लाइट कुछ बंद नहीं की ..

और फिर से मेरे से चिपक लेट गई ...

उसने अपनी समीज भी नहीं पहनी ...

वो पूरी नंगी उसी अवस्था में मुझसे चिपक लेट गई ..

मेरे में इतनी ताकत भी नहीं बची थी ...
कि अपना हाथ भी उस पर रख सकु ...

नींद ने मेरे ऊपर पूरा कब्ज़ा कर लिया था ...

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Tarak mehta ka sex chasma.

Gokuldham society..........
morning time..bhide house--- madhvi kitchen mai nasta bana rahi thi wo is waqt saree mai thi uski gand bahut badi dikh rahi thi wo red color ki saadi mai thi or wo sleveless blouse pahne hui thi jisme se wo bahut hi sexy lag rahi thi.......uske bade boobs blosi mai se nikalne ki kosis kar rahe the wo kitchen mai nasta banane mai busy thi.......tabhi kitchen mai bhide ki entry hoti hai or wo madhvi ke naseele badan ko dekh kar apne lund ko sahlata hai.......... uska lund 6 inch ka hai wo use apne pajame se nikaalta hai or madhvi ko piche se pakad leta hai madhvi ghabra jaati hai..........
madhvi-kya aap bhi kabhi bhi kahi par bhi suru ho jate ho chodiye mujhe bahut kaam hai.....
madhvi apne aap ko chudaane ki poori kosis karti hai par bhide nahi chodta hai.....
bhidd- madhvi mai kya karu tumhe dekhte hi mera lund khada ho jata hai.....ab tho ise shant karne hi padhega........
wo madhvi ki saari uthane lagta hai...........madhvi bhide ka hath rokte…

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