Saturday, 30 May 2015

Hindi Gang Bang Fuck Story

रंग महल एक दो मंज़िला खूबसूरत सा मकान था जो साउत देल्ही मे
बना हुआ था. चोरों और उचे लंबे पेड़ और सामने बहोट ही बड़ा
आँगन उस बंगले की सुंदरता को और बढ़ा रहे थे.

रंग महल पर सफेद रंग पुता हुआ था, कॉंपाउंड के चारों और उँची
दीवारें थी जिन पर तार लगे हुए थे, एक बड़ा सा गाते था जो हारे
रंग का था.

उनीस वर्ष का राज आज कॉलेज से लाते घर आया था. उसने बातरूम
मे जाकर स्नान किया और अपना नाइट सूयीट पहन बिस्तर पर लेट गया.
राज अपनी बड़ी बेहन सुनीता 23 साल की जिसकी शादी हो चुकी थी और
एक 15 महीने के बाकछे की मा और छोटी बेहन शीला जो 18 साल की
थी रहता था. उसका बड़ा भाई एक सरकारी दफ़्तर मे उँचे पद पर
काम करता था.

अपने हाथों को अपने सिर के पीछे रख वो सीलिंग फन को घूर रहा
था. वो अपने साथ गहती पीछले दीनो की घटनाओ पर सोच रहा था.
आज कल वो कॉलेज से लाते घर आता था. कॉलेज के बाद वो अपने
दोस्त बॉब्बी के घर चला जाता था जो एक आलीशान बुगलोव मे रहता
था.

बॉब्बी उसके कॉलेज का दोस्त था और काफ़ी अमीर खंडन से था. अपने
खंडन की एकलौती ओउआलाद होने की वजह से उसे काफ़ी छूट मिली हुई
थी. उसे अपने मा बाप से पूरी आज़ादी मिली हुई थी, वो जो चाहे कर
सकता था.

आज से चह महीने पहले की बात है जब बॉब्बी ने पहली बार उसे अपने
घर बुलाया था. बॉब्बी की गाड़ी मे बैठ जब वो उसके घर पहुँचे
थे तो पहली बार बॉब्बी ने उससे पूछा था उसे उसकी (बूबी की ) मा
कैसी लगती है.

कुछ सालों की दोस्ती मे राज बॉब्बी की मा से कई बार मिल चुका था.
और उनके लिए उसके विचार काफ़ी अकचे थे.

"आंटी बहोट अची और स्वीट है," राज ने जवाब दिया.

"नमकीन भी है," बॉब्बी ने मुस्कुराते हुए कहा.

राज बॉब्बी की बात पर चौंक गया था और सोच मे पद गया की उसने
ऐसा क्यों कहा.

बूबी के मा शोभा आंटी ने उन दोनो का स्वागत किया और बॉब्बी की
और झुकते हुए उसके होठों को चूम लिया. ये कोई प्रेमी प्रेमिकाओं
वाला चुंबन नही था पर फिर भी राज ये देख कर चौंक पड़ा था.
उसने आज तक किसी को चूमते हुए नही देखा था.

राज बॉब्बी के पीछे पीछे उसके कमरे मे आ गया. कमरे मे आते ही
बॉब्बी ने टीवी ओं कर दिया और केबल म्यूज़िक चॅनेल लगा दिया.

राज एक कुर्सी पर बैठ गया और टीवी पर नाचती आध नगञा लड़कियों को
देखने लगा. उसे पता था की उसके पिताजी उसे घर मे इस तरह के
प्रोग्राम नही देखने देंगे.

उन आध नगञा लड़कियों को इस तरह नाचते देख राज का लंड उसकी पंत
मे पूरी तरह टन कर खड़ा हो गया था. उसकी पंत मे एक तंबू सा
बन गया था. उसने स्क्रीन पर देखा की छोटी बिकनी पहने दो लड़कियाँ
आपस मे अपनी गंद टकराकर नाच रही थी.

"यार!" तभी बॉब्बी ने कहा, "इस लड़की की गांद देख…….क्या सेक्सी गंद
है उसकी."

राज बड़ी उग्रता से स्क्रीन पर देखने लगा. उसका हाथ खुद बा खुद
उसके लंड पर चला गया और वो पंत के उपर से अपने लंड को मसालने
लगा.

"यार मे तुम्हे एक चीज़ दिखता हूँ," कहकर बॉब्बी ने रोंते कंट्रोल
उठाया और बटन दबा दिया.

राज ने जो स्क्रीन पर देखा, वो देख कर उसे लगा की उसका लंड उसी
वक़्त पानी छोड़ देगा.

उसने देखा की एक मोटा और लंबा लंड एक बलों से भारी छूट के
अंदर बाहर हो रहा है. उसने कई बार पॉर्न मॅगज़ीन्स मे छूट और
लंड देखे थे पर जो मज़ा उसे टीवी स्क्रीन पर देखने मे आ रहा था
वो मज़ा उसे कभी हासिल नही हुआ था.

वहाँ उस कलर टीवी पर एक मर्द एक औरत की चुदाई कर रहा था.
स्टिल फोटोग्रॅफ देखने मे और टीवी पर देखने ने काफ़ी अंतर है. राज
ने आज तक चुदाई देखी नही थी और सही मे उसके सामने टीवी पर वो
चुदाई देख रहा था.

बॉब्बी ने टीवी का वॉल्यूम बढ़ा दिया था जिससे कमरे मे उन कलाकारों के
सिसकने की आवाज़ें गूँज रही थी.

तभी उस मर्द ने अपना लंड उस छूट के बाहर निकाला और अपने हाथों
मे पकड़ मसालने लगा. थोड़ी ही देर मे उसने सफेद रंग का गढ़ा
वीर्या उस औरत की झांतों और छूट पे छोड़ दिया. वो मर्द सारा वीर्या
झड़ने के बाद अपना लंड उस छूट पर रग़ाद रहा था तभी उस औरत
का एक हाथ दिखाई दिया जो अपनी उंगली उस गिरे वीर्या से भर रही
थी.

वो लोग जो भी भाषा मे बात कर रहे हो पर एक शब्द जो राज ने सॉफ
सुना था वो था "मम्मी".
राज ने चौंकते हुए बूबी की तरफ देखा, "क्या उस मर्द ने अभी अभी
उस औरत को अपनी मा कहा?" उसने पूछा.

बॉब्बी ने अपना लंड अपनी पंत के बाहर निकाला हुआ था और मुठिया
रहा था. उसने अपने होठों मे एक सिगरेट फँसा रखी थी और उसके
काश ले रहा था.

बॉब्बी ने अपनी गर्दन हिला दी, "हन दोनो मा बेटा है."

बूबी की बात सुनकर राज के लंड ने पंत मे ही पानी छोड़ दिया.

"ये ना मुमकिन है यार! ऐसा नही हो सकता." राज तोड़ा विचलित होकर
बोला.

बॉब्बी राज की बात सुनकर हँसने लगा और उसके हैरत भरे चेहरे को
देखने लगा. "यार ये लोग कलाकार है. इनसे जो कहा जाएगा वो ये
करेंगे और कहेंगे. सवाल है इन्सेस्ट कहानी का……तुम्हे पता है ना……
मदारचोड़….बहनचोड़."

राज और गौर से उस फिल्म को देखने लगा जो जिस पर अब एक डिन्नर टेबल
का सीन आ रहा था जहाँ एक जवान लड़की किसी 60 साल के मर्द से
छुड़ा रही थी.

"देखो," बॉब्बी ने कहा, "ये उस लड़के के पिताजी और बेहन है. पिताजी
पहले ही अपनी बेटी की दो बार चुदाई कर छुआके है. तुम कहो तो मे
फिल्म रीवाइंड कर देता हूँ."

"ये सिर्फ़ एक फिल्म है, में सही कह रहा हूँ ना?" राज ने धीरे से
पूछा. (बाप और बेटी? मा और बेटा?)

बॉब्बी ने अपना सिर हिलाया और कहा, "दूसरे सीन मे बेहन बातरूम
मे शवर के नीचे अपने भाई से चुड़वति है और वो भी गंद मे."

राज वो फिल्म देखता रहा जहाँ दोनो भाई बेहन शवर के नीचे एक
दूसरे से खेल रहे थे और एक दूसरे के अंगों को मसल रहे थे.
राज ने देखा की बेहन अब घोड़ी बन गयी थी और अपने दोनो हाथों से
अपने छूतदों को फैला अपनी गंद दीखा रही थी.

भाई ने बिना कोई समय गँवेय अपना लंड उसकी गंद के छेड़ पर रखा
और अपना लंड पूरा अंदर तक घुसा दिया. उसके बाद तो ऐसे कई सीन
आए. जब बॉब्बी उसे घर छोड़ने जेया रहा था तो उसका लंड एक डंडे
की तरह उसकी पंत मे खड़ा था.

"पर ये सब बातें हक़ीक़त मे नही होती………क्या होती है?" राज ने
पूछा.

"यार!" बॉब्बी तोड़ा मुस्कुराते हुए बोला, "आज के संसार मे सब कुछ
होता है. जब आदमी काम वासना मे गरम होता है तो रिश्ते नाते
कुछ दिखाई नही देता वो किसी की भी छूट छोड़ने को तय्यार रहता
है चाहे वो मा बेहन बेटी ही क्यों ना हो."
राज बॉब्बी की बात सुनकर काफ़ी देर तक सोचता रहा फिर अपनी गर्दन
हिला दी, "नाही यार में नही मानता. अपने हिन्दुस्तान मे तो नही हो
सकता, बिल्कुल भी नही."

बॉब्बी एक शैतानी मुस्कुराहट से अपने दोस्त की और देख रहा था, फिर
उसने कहा, "मेरे दोस्त अपने इंडिया मे भी सब कुछ होता है. बात सिर्फ़
इतनी ही की तुम्हे पता नही है. तुम बड़े नादान और भोले हो."


* * * * * * * * * *

ये बॉब्बी ही था जिसने राज को उसके बेहन सुनीता की सुंदरता और सेक्सी
बदन के बारे मे बताया था. बॉब्बी अक्सर राज को कॉलेज के बाद अपनी
नई गाड़ी मे उसके घर छोड़ता था. जब भी वो उसके घर आता तो छाई
या ठंडा ज़रूर पी कर जाता था.

जब बूबी ने राज को घर छोड़ना शुरू किया तो सुनीता को वहाँ आए
एक हफ़्ता हो चुका था.

सुनतिया अपने हाथों मे एक ट्रे लिए कमरे मे दाखिल हुई. बड़े ध्यान
से चलते हुए उसने ट्रे को थम रखा था जिसपर कोका कोला की बॉटल
और कुछ नाश्ता था. बड़ी नाज़ूकटा से वो चलती हुई बॉब्बी के पास
आए थी और उसे इज़्ज़त से भाई कहते हुए कोका कोला पेश किया था.

सुनीता ने अपनी नज़रें बूबी से नही मिलाई और इस दरमियाँ उसने
अपना सिर ज़मीन की और झुका रखा था.

राज ने देखा की बूबी सुनीता को घूर रहा था, और जब वो कमरे से
चली गयी तो उसके होठों पर वही मुस्कान थी जो कॉलेज मे अक्सर
सनडर लड़कियों को देख कर आती थी या फिर रह चलती किसी जवान
लड़की को देख कर आती थी.

राज ने सुनीता को कमरे के बाहर जाते देखा तो पहली बार उसने
महसूस किया की उसकी बेहन एक सनडर लड़की है और एक कातिलाना जिस्म
की मल्लिका भी. बस उसी दिन से उसकी बेहन का चुंबकिया आकर्षा उसके
मान को हिलने लगा. जब वो चलती थी तो उसके मटकते कूल्हे और जब
वो गहरी सांस लेती थी तो उपर नीचे होते उसके उर्रोज उसे अपने मो
जाल मे फँस लेते.

राज ने महसूस किया की बॉब्बी अब ज़्यादा से ज़्यादा समय उसके घर पर
बिताने लगा था. अगर उसकी मा उसे किसी काम से सहर के बाहर भी
भेजती तो वो उसके घर आने के लिए वॉट निकल ही लेता था.

राज ने ये भी देखा की जब भी बॉब्बी घर पर होता तो सुनीता भी
ज़्यादा वक़्त उन दोनो के नज़दीक रहने की कोशिश करती और बड़े कामुक
अंदाज़ मे घूमती रहती थी. जिस तरह बूबी उसे देख रहा था शायद
उसे भी अछा लग रहा था.

सुनीता की शादी उसके पिताजी के दोस्त के बेटे के साथ हुई थी. पर
पति पत्नी मे काफ़ी आन बन रहती थी. तब सुनीता के ससुराल वालों ने
ये फ़ैसला किया की शायद थोड़ी दीनो के लिए ये दोनो एक दूसरे से
अलग रह ले, शायद उनकी अनबन मिट जाए. इसीलिए उसे कुछ दीनो के
लिए उसके मैके वापस भेज दिया गया था.

मातरतवा ने उसकी सुंदरता को और चार चाँद लगा दिया था. अब उसका
शरीर पहले से काफ़ी गतिला और गोरा हो गया था. गाल भी सेव की
तरह फूले फूले थे. अब वो शादी के फेले की डूबली पतली और सपाट
छातियों वाली सुनीता नही था. अब उसकी चुचियाँ भी काफ़ी बड़ी और
भारी भारी हो गयी थी. सुनीता अब एक सेक्सी बदन 38-26-35 की सेक्सी
महिला था. और जहाँ भी जाती मर्दों को आकर्षित अकरती.

सुनीता अपने 15 महीने के बाकछे को अपनी छाती का दूध भी पीलती
थी. राज ने पहली बार देखा की सुनीता ने अपने ब्लाउस के बटन खोले
और दूध से भारी चुचि अपने बचे के मुँह पर लगा दी. वो भूका
बाकचा उसके निपल को मुँह मे ले दूध पीने लगा.

ये सब देख राज के शरीर मे एक सिरहन सी दौड़ गयी. उसे अपने शरीर
मे पसीना छूटता महसूस हुआ और उसका लंड एक ही झटके मे टन कर
खड़ा हो गया. सुनीता ने उसे अपनी और देखते हुए देखा तो मुस्कुरा दी
और कहा, "तुम्हे इस तरह मुझे नही देखना चाहिए अगर पिताजी ने
देख लिया तो काफ़ी नाराज़ होंगे."

उस दिन के बाद राज के दीमग पर कहर के दिन शुरू हो गया. अब वो
हर मौका ढूँढने लगा की सुनीता बाकछे को दूध पाइलेट दीख जाए
और उसे उसकी नगञा चुचियों के दर्शन हो जाए. उसकी पूरी रात यही
सीन देखते हुए कटती और हर रात के बाद सुनीता को पाने की तम्माना
उसके मान मे और बढ़ती गयी.

* * * * * * * * * * *
बॉब्बी अक्सर राज के साथ सुनीता के बारे मे बात करता था. पर
हमेशा वो अपनी हद मे रहकर ही बात करता था. पर ऐसा शुरुआत मे
ही था. गुज़रते समय के साथ दोनो काफ़ी पॉर्न फिल्म्स देखने लगे थे
और ज़्यादा से जयदा चुदाई की कहानियाँ पढ़ने लगे थे. राज ने
महसूस किया की अब बॉब्बी सुनीता के बारे मे सेक्सी बातें भी करने
लगा था.

शुरू शुरू मे तो उसे बॉब्बी की बातें बुरी लगती थी, मगर उसने
महसूस किया की बॉब्बी का सुनीता के बारे मे इस तरह बात करने से
उसके शरीर मे उत्तेजना बढ़ जाती थी. जब भी पॉर्न फिल्म की किसी
कलाकार की चुचियाँ या गांद की तुलना वो सुनीता से करता तो उसे
अक्चा लगता.

बॉब्बी भी इस बात का ख़याल रखता को वो हद के आयेज ना जाए, कहीं
उसकी बातें उन दोनो की दोस्ती मे दरार ना दल दे. पर राज था जो
खुद अब टीवी पर दीखें वाली लड़की को चुड़ते देख उसकी जगह सुनीता
को रख सपने देखने लगा था.

राज ने महसूस किया की बॉब्बी जो भी फिल्म लगता वो अक्सर इन्सेस्ट
कहानी पर ही होती. कभी बेहन भाई से छुड़वा रही है तो कभी मा
बेटे से. कभी बाप बेटी को छोड़ रहा है.

एक दिन बॉब्बी ने राज से पूछा, "सुनीता अपने सुकून के लिए क्या करती
है?"

उस दिन वो दोनो बहोट ही मज़ेदार पॉर्न फिल्म देख रहे थे जिसमे एक मा
अपने एक बेटे के उपर चढ़ उसे छोड़ रही थी और दूसरा बेटा पीछे
से उसकी गंद मे लंड दल उसकी गंद मार रहा था. उस औरत का पति
और दोनो बेटों का बाप एक कुर्सी पर बैठा अपनी बेटी के चुततोड़ों को
सम्हले हुए था जो उसकी गोद मे बैठ उसे छोड़ रही थी.

राज बड़ी उत्सुकता से टीवी पर हो रही उस सामूहिक चुदाई को देख रहा
था, "तुम कहना क्या चाहते हो?" उसने बॉब्बी से कहा.

"मेरा मतलब चुदाई से है यार. तुम्हारी बेहन लंड का स्वाद चख
चुकी है और उसकी छूट भी लंड के लिए तरस रही होगी." बॉब्बी ने
जवाब दिया.

राज बॉब्बी से पहले इस बात पर सोच चुका था, उसने अपनी गर्दन
झटकाई और कहा, "नही मालूम यार शायद अपनी उंगली से काम
चलती होगी."

राज की बात सुन बॉब्बी जोरों से हँसने लगा और कहा, "यार तुम उसके
कैसे भाई हो? उसकी मदद करो………उसे छोड़ कर उसकी छूट की प्यास
बुझाओ."

अगर बॉब्बी ने ये बात कुछ महीनो पहेले कही होती तो शायद आज राज
उसे मार देता. पर चुदाई का गयाँ होने के बाद सुनीता को छोड़ने की
बात या कल्पना कोई बेमानी नही थी. हक़ीक़त मे कई बार वो ये
सपना देख छुआका था और उसकी दिली क्वाहिश थी को वो सुनीता को छोड़
सके. जब भी वो स्क्रीन पर किसी लड़की की चुदाई देखता तो वो यही
कल्पना करता था की उस लड़की जगह सुनीता है और वो अपना लंड उसकी
छूट के अंदर बाहर कर रहा है.

उस दिन के बाद दोनो के बीच और गरम और चुदाई भारी बातें होने
लगी. एक दिन जब राज ने पलट कर बॉब्बी को जवाब दिया की वो पहले
अपनी मा को छोड़े. राज की बात सुनकर बॉब्बी जोरों से हँसने लगा और
अपनी आँखों मे आए आसुओं को पौंचते हुए बोला, "यार ख़याल बुरा
नही है."

* * * * * * * * * *

एक दिन बॉब्बी ने उसे बताया की उसके पास एक देसी मा बेटे की चुदाई
की फिल्म आई है.

राज उसकी बात सुनकर खुश होगआया. उसने आज तक देसी चुदाई की फिल्म
नही देखी थी.

फिल्म के शुरुआत होते ही राज समझ गया की पूरी देसी है. फिल्म मे ना
तो टाइटल था और ना ही म्यूज़िक. ना ही फोटोग्रफी इतनी सनडर थी. ना
ही कोई कहानी की शुरुआत, तभी उसने देखा की एक औरत अपने हाथ मे
हॅंडी कॅम पकड़े उसे अपनी गंद पर फोकस किए हुए थी जहाँ एक लंड
उसकी छूट के अंदर बाहर हो रहा था.

फोटोग्रफी इतनी आक्ची नही थी और ना ही उसकी तस्वीरे सॉफ थी पर
सबसे ख़ासियत उस फिल्म मे थी उसकी आवाज़ जो सॉफ सुनाई दे रही थी.

"छोड़ हरामी…..और जोरों से छोड़ अपनी मा को……….मेने किसी लड़की को
जानम दिया है या किसी मर्द को." वो औरत बड़बड़ा रही थी.


"ले कुटिया ले मेरे लंड को और………आज में तेरी छूट को छोड़ छोड़
कर फाड़ डालूँगा…….ले अपने बेटे का लंड और ले ले अपनी छूट मे."
वो मर्द कह रहा था.

राज बड़ी उत्सुकता से उस फिल्म को देख रहा था, फिल्म अभी तक चेहरे
दिखाई नही दे रहे थे फिर भी उसे लग रहा था की जैसे कुछ जाना
पहचाना हो.

"ओह मम्मी! अपना मुँह खोलो जल्दी से, मम्मी ज़रा इधर घूमओ." उस
मर्द जल्दी से कहा.

थोड़ी ही देर मे हॅंडी कॅम गायब सा हुआ और फिर रह ने उस औरत का
माता देखा जो बड़ी जोरों से उस जवान मर्द का लंड चूस रही थी.

तभी गहरी सांसो की आवाज़ आई और उस मर्द की आवाज़ सुनाई दी. "हन
चूस मेरा लंड कुट्टिया. हन पीलो मेरा सारा पानी……अहह
ओह."

राज हमेशा की तरह अपने लंड को पंत के बाहर निकाल मसल रहा
था. 15 मिनिट की वो वीडियो को बहोट आक्ची फिल्म नही थी पर हिन्दी मे
डिओलॉगुए सुन वो काफ़ी उत्तेजित हो गया था.

वो मर्द के लंड ने सारा वीर्या उस औरत के मुँह मे छोड़ दिया था. उस
औरत ने लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और उसे हाथों मे पकड़
मुस्कुराने लगी.

"तुम्हारे लंड कितना पानी छोड़ा है, तुमने आज मूठ नही मारी क्या?"
वो औरत उस लंड को चाटते हुए बोली.

राज अचंभित नज़रों से उस चेहरे को देख रहा था आरू उसका लंड
ज़मीन पर पानी फैंक रहा था. अब उसकी समझ मे आया की क्यों कुछ
जाना पहचाना लग रहा था. ये फिल्म बॉब्बी के कमरे मे खींची गयी
थी. उसके दीवार पर लगी तस्वीर अभी भी टीवी पर दीख रही थी और
वो औरत शोभा आंटी जैसी नही बल्कि शोभा आंटी ही थी.   जैसे ही टीवी पर सीन ख़त्म हुआ राज पलट कर बॉब्बी को देखने लगा
जो उसके पीछे बिस्तर पर बैःता था.

"हन मेरे भाई वो मेरी मा ही थी." बॉब्बी मुस्कुराते हुए बोला.

राज खामोशी से बॉब्बी को घूरता रहा. बॉब्बी ने उसे बताया की किस
तरह वो अपने मा के साथ बरसों से चुदाई कर रहा है, सही मे
उसकी मा ने उसका कुँवारापन भंग किया था.

राज उत्सुकता उसकी बातें संटॅन रहा और वो खुद अपनी मा और बहनो
को छोड़ने के सपने देखने लगा.

* * * * * * * * * * *

राज अपने बिस्तर पर लेता सोच रहा था. वो झल्लाहट मे बगल मे
लेते अपने बड़े भाई अजय को देखने लगा जो सिर्फ़ शॉर्ट्स पहने
खर्राटें भर रहा था.

अगर पिताजी इस समय आ जाते तो ज़रूर सू कान से पकड़ कर इस तरह
सोने पर डाँटते. पिताजी पुराने ख़यालात के थे और नग्नता से उन्हे
काफ़ी चिढ़ थी. अगर उनका बस चले तो वो हर किसी से कहें की
बातरूम मे भी कपड़े पहन कर नहाओ.

राज ने किचन मे से आती अपनी मा की आवाज़ें सुनी. उसने घड़ी देखी
शाम के 5.ऊ बाज चुके थे और सुनीता का भी बाकछे को दूध
पीलने का समय हो चुका था. सुनीता ज़रूर हॉल मे बैठी अपने
ब्लाउस के बटन खोल बाकछे को दूध पीला रही होगी और बाकछे
बड़े मज़े से उसके निपल को चूस दूध पी रहा होगा.

उसने तुरंत अपने कपड़े बदले और हॉल मे आ गया.

जिस दिन से बॉब्बी ने उससे पूछा था की सुनीता अपनी छूट की प्यास
बुझाने के लिए क्या करती है उसी दिन से राज उस पर नज़र रखने
लगा था. आख़िर मे एक दिन उसने सुनीता को बातरूम मे देख ही लिया.
वो दीवार के सहारे खड़ी थी. उसने अपनी आँखे बंद कर रखी थी
और अपनी सारी को उठाए अपनी छूट मे उंगली कर रही थी.

राज की बदक़िस्मती थी की उसने अपने कपड़े नही उत्तरे हुए थे इसलिए
वो उसके नगञा बदन को नही देख पाया. वो उसे बातरूम की खिड़की से
देखते हुए खुद मूठ मरता रहा.

इस दृश्या ने बॉब्बी की बात की पुष्टि कर दी थी. सुनीता काफ़ी गरम
और चुदसी मिज़ाज़ की थी और कई महीनो से लंड ना मिलने की वहाः से
उसकी छूट काफ़ी प्यासी और भूकि थी.

* * * * * * * * * *

जैसे ही राज हॉल मे आया सुनीता उसे देख मुस्कुरा पड़ी. राज हॉल मे
आया और उसके पास बैठ गया. सुनीता को रति भर भी शरम नही
आई, उसने अपना ब्लाउस उठाया और अपना निपल अपने बाकछे के मुँह मे
दे दिया. अगर सच कहा जाए तो उसे मज़ा आ रहा था की कोई मर्द
उसकी नगञा चुचि को देख रहा है चाहे वो उसका सागा भाई ही क्यों
ना हो.

सुनीता अपने भाई राज के चेहरे पर आए भावों को पढ़ने लगी. उसने
महसूस किया की उसकी नागन चुचि को देख उसके चेहरे पर वही भाव
आए थे जो उसके पति अमित के चेहरे पर आते थे. राज के पंत बने
तंबू ने इस बात को और यकीन मे बदल दिया था की उसके नागन
छातियों को देख वो गरम और उत्तेजित हो जाता था.

उसे ये भी पता था की राज ही नही उसका दोस्त बॉब्बी भी उसे कामुक
और भूकि नज़रों से घूरता रहता था. वो उसकी नज़रों से घबराती
नही थी बल्कि उसे मज़ा आता था उनकी हालात देख कर.

राज और बॉब्बी के ख़याल ने उसे गरमा दिया था. उसे लगा की उसकी
छूट गीली हो गयी है तो उसने अपनी टाँगे सिकोड ली और अपने निचले
होहटों को दंटो से चबाने लगी.

उसी आक्ची तरह से पता था की किसी गैर मर्द से छुड़वाना नामुमकिन
है. इसलिए उसने कई बार सोचा क्यों ना अपने भाई को अपनी तरफ
आकर्षित करूँ और यही ख़याल करते हुए उसने कई बार उंगली से अपनी
छूट को ठंडा किया था.

एक तो बाकछे का निपल को चूसना और उपर से राज की कामुक निगाहें
उसे और गरमा रही थी. उसकी छूट इतनी गीली हो चुकी थी उसे
बियतना मुश्किल हो रहा था. मान तो कर रहा था की अभी सब लाज
शरम छोड़ राज के उपर चढ़ जौन और उसके लंड को अपने छूट मे ले
लूँ.

चह महीने हो चुके थे उसकी छूट को लंड का स्वाद चखे. आज भी
उसे याद है वो आखरी रात जब उसके पति ने उसकी छूट की अलविदाई
चुदाई की थी. उस रात उसके पति ने उसे 5 बार छोड़ा था और उसकी
छूट की धज्जिया उड़ा थी. चाहे लाख मान मुटाव था दोनो के बीच
पर जब बात चुदाई की आती तो दोनो सब कुछ भूल जाते थे.

उसे अपनी सुहग्रात अची तरह याद है जब उसके पति ने उसका
कुँवारापन लिया था. जब उसके पति ने पहली बार की चुदाई के बाद
रक्त से सती चदडार को देखा तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी
थी, और जब उसके धक्को का उछाल उछाल कर साथ दिया तो उसकी खुशी
का ठिकाना ही नही था.

सुनीता के बाकछे का पेट भर गया था. उसने निपल को मुँह के बाहर
निकाल दिया था और गहरी नींद मे सो गया था. सुनीता ने बाकछे को
सोफे पर लीता दिया और उसे ठप थापा कर सुलाने लगी.

सुनीता अपने ख़यालों मे खोई हुई थी, उसे पता भी नही चला की
कब उसके हाथ खुद बा खुद उसकी चुचियों को मसालने और रगड़ने
लगे. ये उसका नसीब था की उसकी चुचियों ज़रूरत से ज़्यादा दूध
पैदा करती थी. जितनी उसके बाकछे को ज़रूरत होती उससे ज़्यादा ही
दूध भर जाता उसकी छातियों मे. कभी कभी तो सहन करना
मुश्किल हो जाता था.

वो अपने ख़यालों मे खोई अपनी चुचियों को मसल दूध को बाहर
निकालने की कोशिश करने लगी. जब राज ने हॉल के दरवाज़े को बंद
किया तो उसका ध्यान टूटा और उसे महसूस हुआ की वो अपने भाई के
सामने क्या कर रही थी.

जैसे ही राज उसके पास आकर बैठा वो अपने ब्लाउस को दुरुस्त करने
लगी पर राज ने काँपते हाथों से उसकी एक चुचि को अपने हाथों मे
लिया और उसी तरह से मसालने लगा जिस तरह वो खुद मसल रही थी.

राज हैरत भारी नज़रों से अपनी बेहन की चुचि को देख रहा था
जिससे अब दूध छू कर बाहर निकल रहा था. सुनीता भी अपने भाई की
इस हरकत पर हैरान थी पर उसकी हरकत ने उसे जो मज़ा दिया वो
कुछ कह नही पाई.

सुनीता ने देखा की राज झुक कर उसके निपल से बहते दूध को चाट
रहा था पी रहा था. जैसे जैसे उसकी चुचि दूध के बोझ से
हल्की हो रही थी उसे काफ़ी आराम मिल रहा था.

तभी दोनो अपने स्वप्नालोक से बाहर आ गये. उनकी मम्मी की आवाज़ आई
की आकर छाई ले जाओ.

राज ने घबडा कर सुनीता की चुचि छोड़ दी और खड़ा हो गया. उसका
लंड टन कर पंत के अंदर खड़ा था और उसके अंडकोषों मे उठता
दर्द उससे सहन नही हो रहा था.

सुनीता ने खामोश नज़रों से अपने भाई का शुक्रिया किया. उसने अपनी
सारी को अड्जस्ट किया और उसे छाई लाने के लिए कहा. उत्तेजना मे उसकी
छूट पूरी तरह गीली हो चुकी थी.

* * * * * * * * *

पूरा घर अंधेरे मे डूबा हुआ था. सारे इलाक़े की बिजली चली गयी
थी. रात के 11.00 बाज राजे थे और सुनीता और राज ही घर पर थे.

पूरी शाम बड़ी मुश्किल से राज ने अपने आपको संभाला था. तब से अब
तक वो दो बार मूठ मार चुका था पर उसका लंड था की शांत होने का
नाम ही नही ले रहा था. इस वक्त भी वो खुंते की तरह टन कर
खड़ा था.

वो और सुनीता घर की छत पर खामोश बैठे थे और आने वाली
ठंडी हवा का अनांड उठा रहे थे. घर के सभी सदस्या बगल के
बने पार्क मे गये थे जिससे इस भारी गर्मी मे खुली हवा का अनद ले
सके. बाकछे के सोने का समय था इसलिए सुनीता उनके साथ नही गयी
थी.

जब सुनीता ने कहा था की वो नही जेया पाएगी तो राज ने एक शैतानी
मुस्कुराहट सुनीता के चेहरे पर देखी थी. सुनीता ने एक बार फिर
बाकछे को दूध पिलाया था पर बंद कमरे के अंदर कारण पिताजी घर
पर थे.

छत पर बीची एक रज़ाई पर दोनो खामोशी से बैठे थे. सुनीता का
बाकचा मचरदानी से ढके पाले मे आराम से सो रहा था.

"दीदी?" राज ने कहा, "क्या में अपनी शर्ट उत्तर सकता हूँ, काफ़ी
गर्मी है?"

"हन उत्तर सकते हो, पापा घर पर नही है." सुनीता ने जवाब दिया.

राज ने एक आराम की सांस लेते हुए अपनी शर्ट उत्तर दी.

"क्या हुआ दीदी आप क्या सोच रही है, कुछ परेशानी है क्या?" राज ने
पूछा.

सुनीता ने जवाब दिया, "कुछ नही." और राज ने देखा की सुनीता अपनी
चुचियों को मसल रही थी.

"लगता है तुम्हे दर्द हो रहा है?" राज ने पूछा. उसका लंड किसी खुंते की तरह टन कर खड़ा था.

सुनीता ने अपनी गर्दन हन मे हिला दी. उसका ब्लाउस चुचि मे आते
ज़्यादा दूध से भीग गया था.

राज उठ कर उसके सामने आ गया और उसके आँखों मे झाँकने
लगा, "में कुछ आपकी मदद करूँ?" उसने पूछा.

सुनीता काफ़ी गरम थी. ख़ास तौर पर शाम के बाद तो उसकी गर्मी
शांत ही नही हुई थी. उसे चारों तरफ देखा और अंधेरे में
सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी. वो सीढ़ियों के बीच रुक गयी और राज
को आवाज़ देने लगी.

राज खामोशी से बैठा था की उसने सुनीता की आवाज़ सुनी.

राज उठकर सीढ़ियों के बीच आया तो देखा की सुनीता दीवार सहारे
खड़ी थी, उसने अपना ब्लाउस खोल दिया था और उसकी चुचियाँ नगञा
थी.

राज उसके पास पहुँचा और किसी भूके बाकछे की तरह उसके निपल
को मुँह चूसने लगा साथ ही वो उसकी चुचियों को भी मसल रहा
था. सुनीता सिसकी और उसने अपने होठों को दंटो मे दबा लिया जिससे
उसकी सिसकारी ना सुनाई दे जाए.

जैसे जैसे राज उसकी चुचि को चूस और मसल रहा था सुनीता की
छूट मचलने लगी और फुदकने लगी.

सुनीता ने महसूस किया की राज उसकी चुचि को चूस्टे हुए अपने बदन
को और उसे चिपका रखा है. उसका खड़ा लंड उसके पेट पर फंफना
रहा है.

सुनीता कामुकता मे सिसक पड़ी. उसका पति चुदाई का कोई भी मौका
हाथ से जाने नही देता था. काश उसका पति इस समय उसके साथ होता
और जब उसे लंड की ज़रूरत होती उसकी छूट की प्यास बुझता.

राज कभी उसकी बाई चुचि को मुँह मे ले चूस्टा तो कभी डाई
चुचि को. राज ने सुनीता को इतना कस कर भींच रखा था की उसका
खड़ा लंड सुनीता के पेट पर ठोकर मार रहा था.

सुनीता की छूट के गर्मी ने उसे पागल कर दिया था और राज को उसकी
गोलियाँ मे उठते उबाल ने. राज को लग रहा था की कहीं कुछ करने
से पहले ही उसका लंड पानी ना छोड़ दे. दोनो के दीमग मे रिश्तों की
अहमियत दूर तक नही थी. इस समय अहमियत और ज़रूरत थी तो सिर्फ़
चुदाई को. दोनो इस वक्त सिर्फ़ चुदाई चाहते थे.

राज ने उसके कपड़े खोलने लगा और सुनीता ने राज का कपड़े उत्तर दिया.
दोनो इतने उत्तेजित थे की उन्हे किसी बात का होश नही था. सुनीता ने
राज के लंड को पकड़ा और अपनी छूट के मुँह पर रख दिया.

राज तोड़ा सा झुका और और उसने सुनीता को संभालने के लिए उसके
चूतड़ पकड़ लिया. सुनीता के अनुभवी हाथों ने उसके लंड को ठीक
से अपनी छूट से लगाया और राज ने एक धक्का लगाकर अपना लंड उसकी
छूट मे घुसा दिया.

सुनीता की छूट की गर्मी और कसावट ने राज को पागल कर दिया. जैसे
ही उसका लंड अंदर घुसा उसने धक्के मरने शुरू कर दिए. राज को
अंदाज़ा नही थी की हक़ीक़त मे लड़की की छूट ऐसी होती है. इतनी
मुलायम, इतनी गरम और इतनी कसी.

राज ने सुनीता के छूतदों को कस कर पकड़ा और अपने से चिपकते हुए
धक्के मरने लगा. दोनो की छातियाँ एक दूसरे से धँसी हुई थी.
दोनो जोरों से सिसक रहे थे और चुदाई का मज़ा ले रहे थे. राज
इतना उत्तेजित था की 8-10 धक्कों मे ही उसके लंड ने पानी छोड़ दिया.

दोनो का शरीर पसीने मे नाहया हुआ था. राज के लंड ने वक़्त से
पहले पानी छोड़ दिया था और उसकी छूट ने पानी छोड़ा नही था. पर
उसे इस बात की फ़िकरा नही थी आयेज और भी मौके आनेवाले थे.
रंग महल च - 02
बाइ राज

"आराम से राज," सुनीता अपने भाई के कान मे फुसफुसा. राज अपनी
बेहन के उपर लेता हुआ था और अपने चूतड़ उछाल उछाल उसे छोड़
रहा था.

"ओह�.. दीदी," राज सिसका "अब मुझसे बर्दसाशट नही होता," इतना
कहकर उसने अपना वीर्या अपनी बेहन की छूट मे छोड़ दिया.

सुनीता राज के वीर्या को अपनी छूट मे अंदर तक गिरता महसूस कर
रही थी. सुनीता खुद झड़ने के कगार पर इस बार भी राज के लंड ने
पानी जल्दी छोड़ दिया. वो फिर प्यासी रह गयी.

राज सुनीता के उपर से हटा और उसके बगल मे लेट गया. सुबह होने को
आ रही थी. पूरा घर नींद मे सोया हुआ था. राज का बड़ा भाई विजय
जिसके साथ वो अपना कमरे शेर करता था, सरकारी काम से सहर के
बाहर गया हुआ था.

चुदाई की इक्चा और उस पर से मौका, इसी वजह से सुनीता रात को
चुपके से राज के कमरे मे आ गयी थी. आज तीसरा दिन था जो वो राज
के कमरे मे आई थी. विजय आज शाम के वक़्त कभी भी आ सकता
था.

सुनीता बिस्तर से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उसका बाकचा
कभी भी उठ सकता था और उसकी छोटी बेहन शीला उसे ढूँदने
लगे गी. उसने महसूस किया की उसके भाई का वीर्या उसकी छूट से बह
कर उसकी टॅंगो को भीगो रहा है. उसने अपने भाई की और देखा जो
बिस्तर पर नंगा लेता हुआ था, उसका लंड मुरझा गया था. उसका मान
किया की आयेज बढ़ कर वो उसके लंड को मुँह मे लेकर चूज़ पर समय
कम था.

सुनीता जैसे ही कमरे के बाहर निकल अंधेरे मे आयेज बढ़ी किसी के
हाथों ने उसे कमर से पकड़ा और अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख
उसकी चीख को दबा दिया.

"डरो मत सुनीता," एक मर्दाना आवाज़ उसके कानो मे पड़ी, "ये में
हूँ विजय."

विजय ने अपने कमरे का दरवाज़ा खोला और सुनीता को एक बार फिर अपने
कमरे मे धकेल दिया.

राज हड़बड़ा कर बिस्तर पर उठकर बैठ गया. वो अभी भी नंगा ही
था. उसने देखा की किस तरह विजय ने सुनीता को कमरे के अंदर
धकेला था.

सुनीता कमरे मे आते ही एक कोने मे अपने चेहरे को हाथों मे छुपाए
खड़ी हो गयी. शरम के मारे उसे विजय से आँखे मिलने की हिम्मत
नही हो रही थी. राज ने जल्दी से चादर को अपने नंगे बदन पर दल
ली और अपने मुरझाए लंड को छुपाने की कोशिश करने लगा.

विजय एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ बिस्तर के कोने पर बैठ
गया, "माफ़ करना पर ये सब क्या हो रहा है?"

राज और सुनीता के मुँह से एक शब्द भी नही निकाला, दोनो खामोश
जैसे थे वैसे ही रहे.

"खोमोश रहकर मासूम बनने की कोशिश मत करो, मेने अपनी आँखों
से सब कुछ देखा है," विजय ने धीरे से कहा. जैसे जैसे विजय बोलता जेया रहा था, राज का शरीर दर के मारे
काँप रहा था. उसे दर लग रहा था की पता नही विजय अब क्या
करेगा.

दर तो सुनीता को भी लग रहा था फिर भी उसने हिम्मत करके
पूछा, "क्या देखा तुमने?"

सुनीता ने अपने कपड़े ठीक किए और इस तरह बनने लगी जैसे उससे
मासूम और नादान कोई है ही नही, पर साथ ही वो राज के वीर्या को
अपनी छूट और जाँघो पर महसूस कर रही थी.

विजय ने उसकी और देखा और मुस्कुरा पड़ा, "तुम्हे और राज को देखा���
क्या इसके आयेज भी बतौन की मेने क्या देखा."

फिर धीरे से हंसते हुए बोला, "या फिर तुम्हारे कपड़े उत्तरुण और
तुम्हे तुम्हारी छूट मे राज का वीर्या दिखौं."

"में और राज��.. तुम्हारा कहने का मतलब क्या है, तुम क्या कह रहे
हो मेरी तो कुछ समझ मे नही आ रहा." सुनीता ने थोड़ी
कंपकँपति आवाज़ मे कहा.

फिर विजय ने बताना शुरू किया की किस तरह वो वक़्त से पहले घर
आ गया था. उसे उस समय अपने कमरे से अजीब सी आवाज़ें सुनाई दे
रही थी, उसने देखा की कमरे का दरवाज़ा बंद नही था. तब उसने
कमरे मे झाँक कर देखा तो पाया की पलंग के साइड मे नाइट लॅंप जल
रहा था, और उसने नंगे राज को किस तरह सुनीता की छूट मरते
देखा. फिर राज किस तरह झाड़ कर सुनीता पर लेट गया था.

विजय की बात सुनकर सुनीता ने राज को कस कर एक थप्पड़ मार
दिया, "कितनी बार तुमसे कहा था की दरवाज़ा आची तरह से बंद कर
लिया करो पर तुम हो की मेरी बात सुनते ही नही हो."

सुनीता की हालत देख विजय को हँसी आ गयी और वो अपनी कोहनी के
बाल बिस्तर पर अपनी टाँगे फैला लेट सा गया.

"अब बस भी करो सुनीता, ना तो मेने शोर मचाया है और ना ही तुम
दोनो को मारा या कुछ कहा है." विजय ने हंसते हुए कहा.

विजय ने अपना हाथ अपनी पंत के उपर से अपने खड़े लंड पर रखा
और लंड को सहलाते हुए बोला, "में तुम्हारी और राज की हालत समझ
सकता हूँ, में ये बात जनता हू की इस उमर मे सभी को सेक्स की
ज़रूरत होती है ! मुझे भी ज़रूरत है."

राज और सुनीता एक दूसरे को हैरत भारी नज़रों से देखने लगे.
विजय इतनी आराम से ये बात कह गया था की उनकी समझ मे नही आया
की क्या कहें और क्या करें.

"तुम कुछ समझी?" राज ने सुनीता से पूछा.

सुनीता ने अपनी गर्दन हन मे हिला दी. अब वो विजय की पंत मे उभरे
उभर को देख रही थी. सुनीता ने मान ही मान विजय से छुड़वाना का
फ़ैसला कर लिया था. एक भाई से तो वो छुड़वा ही चुकी थी फिर दूसरे
से छुड़वाना मे उसे क्या आपाती हो सकती थी. लंड लंड ही होता है
चाहे वो किसी का भी हो.

विजय ने सोचा की उसे ही पहल करनी होगी इसलिए उसने धीरे से
सुनीता से कहा, "बातरूम मे जाकर अपनी छूट को अची तरह धो
कर आओ. राज तुम सुनीता के आने के बाद नहाने चले जाना."

इतना कहने के बाद विजय कमरे के दरवाज़े की और बढ़ा और उसे आक्ची
तरह अंदर से बंद कर लिया. सुनीता बातरूम मे घुस गयी थी अपनी
छूट को सॉफ करने के लिए और विजय ने अपने कपड़े उत्तर दिए.

जब सुनीता बातरूम से बाहर आई तो उसे पता था की अब आयेज क्या
होने वाला है.

राज और विजय करीब करीब दीखने मे एक से थे. वही 5'8 की
लंबाई, गतिला शरीर, चौड़े कंधे. फ़र्क सिर्फ़ इतना था की विजय
के बॉल राज के बलों से ज़्यादा घने और काले थे.

ये सोच कर की आयेज क्या होने वाला है राज का लंड एक बार फिर खड़ा
होने लगा था. शायद उसे देखने मिल जे की उसका बड़ा भाई और बेहन
कैसे चुदाई करते है.

"राज! बड़ा हरामी है तू? तुमने तो अपने हिस्से का मज़ा ले लिया है अब
तू अंदर जेया." विजय अपनी पंत के बटन खोलते हुए बोला.

सुनीता ने देखा की विजय की बात सुनकर राज भागकर बातरूम मे घुस
गया था. सुनीता ने विजय के कहने पर बातरूम की कड़ी बाहर से
लगा दी.

"वो सला बहनचोड़ यहाँ रहा तो हमे देखते रहेगा, अब वो अंदर
मूठ मरेगा," विजय हंसते हुए बोला और अपनी पंत उत्तरने लगा.

सुनीता ने मूड कर अपने भाई विजय की और देखा जो अपने लंड की
गोलियों को सहला रहा था. सुनीता को ये देखकर ताज्जुब हुआ की विजय
के लंड पर लड़कियों की तरह एक भी बॉल नही था. बिना झांतो का
लंड काफ़ी लंबा और मोटा दीखाई दे रहा था.

सुनीता मान ही मान विजय के लंड को राज के लंड से तुलना करने लगी.
विजय का लंड राज के लंड से तकरीबन 3' से 4' इंच लंबा था और
सबसे बड़ी बात तो वो उसके पति के लंड से भी लंबा था.

विजय धीरे से सुनीता के पास आया और उसे बिस्तर के पास झुका कर
घोड़ी बना दिया. फिर उसके गाउन को उपर करते हुए उसके उभरे हुए
चुतताड पर थप्पड़ मरने लगा.

"चुदाई का पहला रौंद तोड़ा जल्दी करना है," कहका उसने अपना खड़ा
लंड उसकी गीली छूट के मुँह पर रख दिया.

सुनीता तोड़ा पीछे को हुई तो विजय का लंड बड़े आराम से उसकी
छूट के अंदर घुस गया. सुनीता को शादी के बाद पहली बार ऐसा
लगा की कोई लंड उसकी छूट के दीवारों को चीरते हुए अंदर घुस
रहा है. उसे हल्का दर्द भी हो रहा था पर उसे मज़ा भी बहोट आ
रहा था.

विजय एक अनुभवी छोड़ू की तरह अपनी बेहन के चुतताड पकड़ धीमे
धीमे धक्को से उसे छोड़ रहा था.

सुनीता के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लग रही थी. यही वो पल था
जिसकी उसे चाहत थी. राज तो एक अनाड़ी और जानवर की तरह उसे छोड़
झाड़ कर अलग हो जाता था. उसकी यही इक्चा था की कोई उसे इतने
प्यार से छोड़े, और विजय वही कर रहा था. हर धक्के में विजय
का लंड उसकी छूट की और गहराई तक चला जाता. उसके अंडकोष जब
उसकी छूट की दरारों से टकराते तो सुनीता के मुँह से एक मादक
सिसकारी निकल पड़ती, `ओह आआआहह हाां."

सुनीता सोच रही थी की उसने बेकार ही अपना समय राज के पीछे
बर्बाद किया. जब इसी घर की छत के नीचे इतना प्यारा लंड था तो
उसने विजय को पहले क्यों नही बहकाया. विजय ठीक उसके पति की तरह
था जिसके पास एक बड़ा और लंबा लंड था जिसे इस्टामाल करना उसे
बखूबी आता था.

सुनीता ने अपना एक हाथ अपनी टॅंगो के बीच अपनी छूट के नीचे इस
तरह रखा की जब भी विजय धक्का मरता तो उसके अंडकोष यूस्क
उंगलियों से टकराते. विजय अब गहरी साँसे लेते हुए तेज़ी से धक्के
मार रहा था.

जोरों से छोड़ते हुए विजय अपने लंड को सुनीता की छूट के अंदर
बाहर होते देख रहा था. धक्के मरते हुए उसने सुनीता की चुतताड
को तोड़ा फैलाया और अपनी बेहन की गंद के भूरे छेड़ को देखने
लगा.

सुनीता की छूट मे बढ़ती गर्मी को उसने महसूस किया और उसे अक्चा
लग रहा था. शायद उसका छोटा भाई रह सुनीता को वो नही दे पाया
था जिसकी इसे ज़रूरत थी वो खुश था की राज की जगह वो सुनीता
की छूट को वो सब कुछ दे रहा था.

विजय अपने साथी अफ्फ्सरों के साथ सहर के बाहर एक सेमिनार अटेंड
करने गया हुआ था, जहाँ उसने मौका निकल कर अपनी मा की पुरानी
दोस्त और पड़ोसी से मिलने का समय निकाला. ये पपोसी जिसे वो आंटी
बुलाता था, इसी आंटी ने कई साल पहले उसका परिचय सेक्स से करवाया
था. इसी आंटी ने उसे सिखाया था की चुदाई मे किस तरह औरतों को
खुश किया जाता है और सही मैने मे चुदाई क्या होती है.

एक दिन वो जब उसके घर गया था तो उसने खुशी खुशी बातरूम के
दीवार से सत्कार उसके 8'इंची लंड को अपनी छूट मे ले लिया था, और
उसके पति और बाकछे हॉल मे बैठे टीवी देखते रहे. ठीक उसी तरह
आज भी दोपहर को उसने होटेल के बातरूम मे आंटी को इसी तरह
छोड़ा था.

टीन दिन के इस सेमिनार मे उसने आंटी के परिवार के साथ होटेल मे
खाना भी खाया और यहाँ तक उसी के बेडरूम के बिस्तर पर उसकी
चुदाई भी की. फिर ठीक पुराने दीनो की तरह उसे बातरूम मे घोड़ी
बनाकर छोड़ा. एक दिन तो शाम की छाई के वक़्त उसके घर चला गया
हॉल के सोफे पर बैठ उससे अपना लंड चुस्वाया.

टीन दीनो के उस चुदाई मेले ने उसे काफ़ी तका दिया था. पर जब उसने
राज को सुनीता को छोड़ते देखा तो उसे लगा की उसके लंड को गोलियाँ
मे फिर से उबाल आ गया है और उसकी भी इक्चा हुई की वो अपनी बेहन
की छूट को अपने वीर्या से भर दे.

अब वो सुनीता की छूट को कस कस कर छोड़ रहा था. थोड़ी ही देर मे
उसने एक गहरी साँस ली और उसके चुततादों को जोरोन्स से भींचते हुए
अपना लंड उसकी छूट मे गहराई तक पेल दिया और अपना पानी उसकी छूट
मे छोड़ दिया.

सुनीता ने अपना चेहरा बिस्तर मे दबा लिया और था विजय के लंड का
मज़्ज़ा ले रही थी. जब विजय ने अपना लंड उसकी छूट से बाहर निकाला
तो वो बिस्तर पर लुढ़क गयी.

सुनीता की टाँगे हर बार की तरह कांप रही थी. जब भी उसकी छूट
पानी छोड़ती थी तो उसका शरीर जोरोर्न कांपता था. आज वो विजय के
लंड से दो बार झंडी थी. उसका दिल खुशी के मारे जोरों से धड़क
रहा था. आज वो दो बार झड़ी थी. कई दीनो बाद उसकी छूट की
प्यास बुझी थी. विजय ने बातरूम की कुण्डी खोल दी और राज को बाहर कमरे मे आने को
कहा जहाँ उसकी बेहन बिस्तर पर छुड़वा कर निढाल पड़ी हुई थी. अब
भी उसकी छूट से विजय का वीर्या तपाक रहा था.

विजय ने राज के पयज़ामे मे उसके खड़े लंड को देखा और कहा, "अपने
कपड़े उत्तरो और सुनीता के बगल मे लेट जाओ."

सुनीता अपने दोनो भाई विजय और राज को देखने लगी. राज नंगा
होकर उसके बगल मे आकर पीठ के बाल लेट गया था.

विजय ने सुनीता को राज के उपर लेट जाने को कहा. सुनीता ने वैसे
ही किया. जैसे ही सुनीता उपर आई राज ने उसके झूलते मम्मो को
पकड़ लिया और अपनी बेहन के दूध से भारी निपल को चूसने लगा.

सुनीता तोड़ा उपर को हुई और राज के लंड को पकड़ कर अपनी छूट से
लगा लिया, फिर नीचे होते हुए उसके पूरे लंड को अपनी छूट मे ले
लिया.

विजय सुनीता को थोड़ी देर तक देखता रहा जो राज के लंड पर उपर
नीचे होते हुए छोड़ रही थी��कितना अक्चा नज़ारा था उसके भाई
बेहन आपस मे चुदाई कर रहे थे��.कितना मज़ाअ आ रहा था.

विजय बिस्तर पर सामने की तरफ आया और अपने फिर से खड़े लंड को
सुनीता के होठों पर रगड़ने लगा.

सुनीता ने नज़रें उठा कर विजय की और देखा, "अपना मुँह खोलो
जानू�..और मेरे लंड को बड़े प्यार से चूसो." विजय ने कहा.

ये सब देख राज ने नीचे से धक्के लगाने बंद कर दिया. उसने देखा
की किस तरह सुनीता ने अपना मुँह खोला और विजय के लंड को अंदर
ले किसी लोल्ल्यपोप की तरह चूसने लगी.

राज हैरत भारी नज़रों से सुनीता को देख रहा था जो अपना पूरा
मुँह खोले विजय के पूरे लंड को अपने गले तक लेकर चूस रही थी.

सुनीता बड़े प्यार से विजय के लंड को चूस रही थी साथ ही उसकी
गोलियाँ को भी मसल रही थी, पर उसने राज के लंड को भी
नज़रअंदाज़ नही किया था, वो उसके लंड को पूरा अपने छूट मे लेकर
अपनी छूट घिस रही थी.

ये सब राज की नज़रों से कुछ इंच की दूरी पर हो रहा था. वो देख
रहा था की किस तरह उनकी बेहन अपने भाई के लंड को बड़ी मस्ती से
चूस रही थी, किस तरह उसके लंड को मसालते हुए अपना मुँह आयेज
पीछे कर चूस रही थी.

राज ने अपनी बेहन के दोनो चुततादों को पकड़ा और एक बार फिर तेज़ी
से अपने कूल्हे उछाल अपने लंड को उसकी छूट के अंदर बाहर करने
लगा.

विजय सुनीता को बड़े प्यार भारी नज़रों से देख रहा था जो प्यार
से उसके लंड को चूस रही थी, पर उसके दीमग मे तो कुछ और था.

उसने थूक से भर अपने लंड को सुनीता के मुँह से बाहर निकाला और
राज और सुनीता के पीछे की और आ गया. राज का लंड बड़ी तेज़ी से
उसकी छूट के अंदर बाहर हो रहा था, सुनीता भी उछाल उछाल कर
धक्के लगा रही थी.

सुनीता ने देखा की विजय उसके बिस्तर पर उसके पीछे आ गया था
और उसकी गंद पर झुक गया��.वो समझ गयी की विजय क्या चाहता
है, एक अजीब नशा उसके बदन मे दौड़ गया. ये सोच कर ही उसकी
छूट ने पानी छोड़ दिया और वहाँ विजय ने अपनी एक उंगली उसकी गंद
के छेड़ मे डाल दी.

विजय ने सुनीता की मदभरी आँखों की और देखा जैसे उससे कुछ
पूछ रहा हो. अपनी उंगली उसकी गंद मे दल कर वो समझ गया था की
सुनीता का पति इस छेड़ का भी मज़ा ले चुका है पर वो सुनीता की
सहमति चाहता था की क्या वो तय्यार है दो लंड को एक साथ लेने के
लिए.

उसकी आंटी ने उसे समझाया था की हमेशा गंद मरने से पहले वो
सामने वेल की रज़ामंदी ले ले कारण उसके मूसल लंड उस जैसी चूड़ी
चुदाई औरत को भी तकलीफ़ दी थी.

सुनीता ने कभी दो मर्दों से एक साथ नही चुडवाया था. उसने सुना
ज़रूर था की दो लंड से छुड़वाने मे काफ़ी मज़ा आता है, उसकी
सहेलिया बताया करती थी पर क्या आज वो दो लंड लेने के लिए तय्यार
है.

उसने ये मज़ा भी ले लेने की तन ली और विजय को अपनी सहमति दे दी
पर फुसफुसते हुए कहा की वो आराम से करे.

राज ने अपनी साँसे रोक ली और विजय को सुनीता की गंद के पीछे
देखने लगा.

विजय तोड़ा हिचकिचा रहा था, थोड़ी ही देर मे क्या कुछ हो गया
था, उसने पहले सुनीता की चुदाई की थी, फिर लंड चूस्वाया था
और अब वो उसकी गंद मरने जेया रहा था. जैसे ही उसने अपना लंड
सुनीता की गंद के छेड़ पर रखा उसे अपनी दूसरी बेहन शीला का
ख़याल आया.

क्या वो शीला को पा सकेगा, जिस तरह वो सुनीता को छोड़ रहा है
उस तरह शीला को भी छोड़ पाएगा. क्या राज भी���.

विजय ने धीरे और आराम से अपना लंड उसकी गंद मे घुसने लगा.
उसने उसके चुतताड कस कर पकड़ रखे थे. उसकी आंटी ने उसे
सिखाया था जब भी वो किसी की गंद मारे तो बड़े अर्रम से और प्यार
से मारे.

विजय ने अपने लंड को तोड़ा बाहर खींचा और ढेर सारा थूक सुनीता
की गंद पर थूक दिया फिर अपने लंड को अंदर घुसने लगा. आख़िर
उसका लंड उसकी गंद मे घुस गया.

सुनीता तो मज़े के नशे मे चूर था. उसने तो कभी सोचा भी नही
था की वो इस तरह का मज़ा कभी ले पाएगी. उसके एक भाई का लंड
उसकी गंद मे घुसा हुआ था और दूसरा भाई नीचे से धक्के मार उसकी
छूट को छोड़ रहा था.

उसने महसूस किया की अब दोनो भाई अपने अपने छेड़ मे धक्के मार रहे
है. थोड़ी देर मे दोनो धक्के से धक्के मिला उसे छोड़ रहे थे.
विजय लंड बाहर खींचता तो राज का लंड उसकी छूट के गहराई तक
चला जाता और राज लंड बाहर की और खींचता तो विजय का लंड उसकी
गंद मे.

वो भी उछाल उछाल कर दोनो लंड का मज़ा ले रही थी. उसके मुँह से
सिसकारिया फूट रही थी, "ओह हन चूड़ो मुझे ऑश ऊवू ज़ोर
से और जूऊर से."

सुनीता की सिसकारियाँ सुन तो जैसे दोनो भाई पागल हो गये और ज़ोर
ज़ोर से उसकी छूट और गंद मरने लाए. पूरा कमरा चुदाई की आवाज़े
और तीनो की सिसकारियों से गूँज रहा था.

तभी सुनीता के मान एक ख़याल आया. उसके दोनो छेड़ तो दो लंड से
भरे हुए थे, पर उसका मुँह खाली था, काश इस वक़्त उसका पति
यहाँ होता और अपना लंड मेरे मुँह मे देता तो कितना मज़ा आता.

और अगर उसके पति की जगह ऊए लंड उसके पिताजी का होता तो
���..ओह क्या नज़ारा होता परिवारिक चुदाई का. दो भाई और बाप
मिलकर मुझे छोड़ते. सुनीता तो ख़याल से ही पागल सी हो गयी.

थोड़ी देर मे दोनो भाइयों ने अपनी जगह बदल ली. दोनो भाई उसकी
छूट और गंद को वीर्या से भरने लगे और उसकी छूट पानी पर पानी
छोड़ रही थी.

सुनीता चुदाई के नशे मे इतना खो गयी थी उसकी चुदाई इक्चा और
बढ़ गयी. पिईताजी के लंड की वो कल्पना करने लगी.

राज ने सबसे पहले पहल की. अब वो अपने आप को रोक नही पा रहा
था, उसने सुनीता की चुचियों को ज़ोर से पकड़ते हुए मसाला और टीन
धक्के उपर की और मरते हुए अपना वीर्या उसकी छूट मे छोड़ दिया.

सुनीता राज की छाती पर लुढ़क गयी, और सिसकने लगी. उसकी छूट
ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया था वहीं विजय अपने धक्कों की रफ़्तार
को तेज करते हुए अपना लंड उसकी गंद के अंदर बाहर कर रहट था
और आख़िर मे उसने भी अपना वीर्या उसकी गंद मे उंड़ेल दिया.

तीनो बिस्तर पर पसीने से लथपथ लुढ़क गये. तीनो की खुशी का
ठिकाना नही था इस सामूहिक चुदाई के बाद

रंग महल च – 03
बाइ राज


सुनीता के पिताजी, मिस्टर. अजय कौल एक शानदार व्यक्तित्वा के मालिक
थे. उनकी लंबाई करीब 6'2 थी, गतिला शरीर, चौड़े कंधे नीली
आँखे. 53 साल की उमर मे भी वो काफ़ी जवान दीखाई देते थे. उनकी
एक डॉवा की दुकान थी जो उनके घर के पास ही थी. उनके जिट्नी भी
जान पहचान वेल थे सभी उनकी काफ़ी इज़्ज़त किया करते थे.

आज वो अपनी दुकान के काउंटर के पीछे खड़े हो एक पर्ची देख रहे
थे जिसे एक लड़कीं ने उन्हे अभी अभी पकड़ाई थी. वो इस लड़की को
पहचानते थे. ये मार्केट मे अक्सर दीखाई दिया करती थी और अक्सर
उसकी दुकान से दवाई या मेकप का समान खरीदने आया करती थी.

जब वो दुकान मे दाखिल हुई थी तो उसने उसे देखा था, उसने एक हल्के
नीले रंग का सलवार सूट पहन रखा था और एक कला दुपाता उसने
कंधे पर दल रखा था. उसने काफ़ी भारी मेकप किया हुआ था और
होठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगाई हुई थी.

उस लड़की ने अजय को पर्ची पकड़ाई और मेक उप के समान वेल काउंटर
पर देखने लगी.

अजय ने अक्सर इस लड़की को इत्तरते हुए मार्केट मे देखा था. वो अपने
कूल्हे मटका मटका मार्केट मे घूमती थी. उसने कई बार उसे अलग अलग
गाड़ियों मे बैठ कर जाते देखा था. उसे पूरा विश्वास था की ये
लड़की धनदा करती है और पेशे से एक वैश्या है.

उस लड़की के बदन से उठती पर्फ्यूम की सुगंध वो महसूस कर रहा था
साथ ही उसकी लो कट के कमीज़ से उसकी चुचियों की दरार सॉफ
दीखाई दे रही थी और उसके निपल भी झीने कपड़े से बाहर को
निकलते दीख रहे थे. उसके पेशे मे ब्रा की क्या ज़रूरत है.

"बेटा," अजय ने कहा, "ये तुम्हारी पर्ची है."

उस लड़की को बेटा बुलाने पर एक बार तो गुस्सा आया फिर उसेन हन मे
अपनी गर्दन हिला दी.

अजय उसके चेहरे को देख उसकी उमर का अंदाज़ा लगाने लगा. शायद 28-
29 साल की होगी, और देखने मे काफ़ी अची लग रही थी.

अजय ने उसकी पर्ची मे लिखी दवाइयाँ निकाली और उसके हाथ मे पकड़ा
दी. जैसे ही वो पर्स से पैसे निकालने लगी अजय उसकी भारी भारी
छातियों को घूर्ने लगा. उसे पता था की अजय क्या देख रहा है
इसलिए वो इस अंदाज़ मे खड़ी हो गयी की अजय और आक्ची तरह उसकी
चुचियों को देख सके.

उस औरत ने पैसे पकड़ते हुए उसके हाथ को छू लिया. अजय दुकान के
बाहर देखने लगा और अपने सूखे होठों पर ज़ुबान फिरने लगा.

"क्या चाहिए? शॉर्ट टाइम या फुल नाइट," उस लड़की ने उसका हाथ
पकड़ते हुए कहा.

एक हाथ से अपने लंड को सहलाते हुए अजय ने कहा, "शॉर्ट टाइम." दोनो ने पैसे तय किए और अजय ने उसे एक घंटे बाद आने को कहा
क्यों की वो दुकान बंद करने वाला था. वो लड़की एक हल्की सी मुस्कराहट
देते हुए दुकान से चली गयी. एक घंटे बाद अजय ने दुकान बंद की
और उसका इंतेज़ार करने लगा.

एक घंटे बाद वो आते हुए दीखी. अज़ान ने शटर उठा दिया और वो
अंदर आ गयी. अजय ने फिर से शटर गिरा कर बंद कर दिया.

अजय ने उसे पैसे दिए और उसके छोटे और गरम बदन को अपनी बाहों
मे भर लिया. वो उसके पीठ को सहलाते हुए उसके होंठ और गार्डम को
चूमने लगा.

"अक्चा भाई साहिब…." वो हंसते हुए बोली, "समय क्यों बर्बाद कर रहे
हो?"

"भाई साहेब नही………छा…छा बोलो" अजय अपने लंड को उसकी छूट पर
घिसने लगा. उसे तोड़ा झुक कर ऐसा करना पद रहा था कारण उसकी
लंबाई सिर्फ़ 5'2 थी और उसकी 6'2.

अजय ने उसकी कमीज़ उत्तर दी और झुक कर उसकी चुचियों को मसालने
लगा और उसके निपल चूसने लगा. उसने दूसरे हाथ से उसके सलवार का
नडा खोला और नीचे खिसका दिया और और उसकी नंगी गंद को सहलाने
लगा. उसने पनटी नही पहन रखी थी.

उसने उस लड़की को काउंटर सामने रखे हुए बड़े से कार्ड बोर्ड बॉक्स पर
लीता दिया जो उसने वाहा बिस्तर के रूप मे रखा था. वो इतना बेदर्दी
नही था की उसे ठंडे फर्श पर नंगा लीता देता.

अजय ने फिर अपनी सफेद कमीज़ उत्तरी. उसकी छाती भूरे बालों से
भारी हुई थी. उसने उठ कर अपनी पंत भी खोल कर उत्तर दी. अब वो
कार्टून पर लेती उस रॅंड के भरे शरीर को देख रहा था. पता नही
सुबह से कितने लंड वो ले चुकी होगी, शायद टीन या उससे भी ज़्यादा.

उस लड़की ने उसके भारी मूसल लंड को देखा तो देखती रह
गयी, "आराम से छा….छा."

वो सोच रहा था की पता नही ये लड़की इस धांडे मे है, ये भी तो
किसी की बेटी होगी जैसे सुनीता और शीला उसकी बेटियाँ है.

"क्या नाम है तुम्हारा?" अजय अपने लंड को मसालते और अपने होठों
पर ज़ुबान फेरते हुए पूछा.

"क्या नाम चाहिए छा….छा." वो मादक मुस्कान के साथ बोली साथ ही
लेते हुए अपनी एक तंग दूसरे तंग पर घिसने लगी.

"सुनीता," बिना सोचे उसके मुँह से निकाला.

अजय ने काउंटर पर रखे कॉंडम के डिब्बे मे से एक कॉंडम निकाला और
अपने 8' इंची लंड पर लगा लिया.

अजय उसकी टॅंगो के बीच आ गया और देखने लगा की किस तरह वो
अपनी छूट को फैलाए हुए थी. उसकी गुलाबी छूट का आंद्रूणई हिस्सा
सॉफ दिखाई दे रहा था. उसने अपने लंड को पकड़ा और उसकी छूट पर
लगाकर हल्का सा धक्का दिया. फिर उसने उसकी टॅंगो को उठा कर अपने
कंधे पर रख ली और एक ज़ोर का धक्का मार अपना लंड पूरा का पूरा
अंदर घुसा दिया.

"आराम से छा….छा दर्द होता है," वो दर्द से हल्के से चीख पड़ी.

अजय थोड़ी देर तक उसे जोरों से छोड़ता रहा और हर धक्के के साथ
अपने लंड को और अंदर तक पेल देता. उसकी छूट वैसे तो लंड लेने
की आदि थी फिर भी अजय को लगा की उसकी छूट की मांसपेशियाँ उसके
लंड को जकड़े हुए है.

"छा….चल कितना बड़ा लंड है तुम्हारा," उसने अपनी प्यारी आवाज़ मे
कहा.

"सुनीता," उसने अपनी आँखे बंद कर पूछा, "तुम्हारे साथ वो कार मे
कौन था?" वो उसकी गंद को मसालने लगा. और अपनी उंगली उसकी गंद मे
डालते हुए जोरों से धक्के मरने लगा.

"छा…..छा वो मेरा दोस्त था." उसने जवाब दिया.

"नही …….दोस्त नही……लड़का था." अब वो उसकी गंद मे उंगली अंदर बाहर
करने लगा.

"हन….लड़का था छा….छा." वो भी उसके साथ खेलने लगी.

अजय कल्पना करने लगा की वो एक गाड़ी मे किसी लड़के साथ बैठी है
और अपनी टाँगे फैला रखी है और वो लड़का गाड़ी चलते हुए उसकी
छूट को मसल रहा है, "और उसने तुम्हारे साथ क्या किया?" अजय ने
अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए पूछा.

वो कल्पना करने लगा की गाड़ी की पीचली सीट पर वो लेती हुई है
और वो लड़का उसे छूट को छोड़ रहा है.

"ओह…छा…छा उसने मेरे साथ बदतंमजी की." उसने कहा और अपनी टाँगे
अजय के कंधों से निकल उसकी कमर से लपेट ली. अब वो अपनी कमर
हिल्ला उसके धक्कों का साथ देने लगी.

"क्या किया उसने?" अजय ने पूछा, और उसकी एक चुचि को ज़ोर से
भींकने लगा और सुनीता की भारी चुचि की कल्पना करने लगा.

"मेरे मामे दबाए फिर….." जिस तरह से अजय उसे छोड़ रहा था वो
समझ गयी की इस तरह की बातें अजय मे और जोश भर देती है.

"फिर…सुनीता" अजय उसके निपल को भींचते हुए बोला.

"फिर उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया और बोला…..दब्ाओ" कहते
हुए उसने अपनी टाँगे उसकी कमर मे और कस ली.

"फिर क्या हुआ?" अजय ने पूछा.

"फिर उसने अपना हाथ मेरी टॅंगो के बीच रखकर मेरी छूट से खेला
और अपनी उंगली से मेरी छूट को छोड़ा." उसने कहा, "फिर मुझे
पीछले सीट पर लेजकर मेरी सलवार उत्तर दी और अपना लंड मेरी
छूट मे डालकर मुझे छोड़ा." वो गहरी साँसे लेते हुए बोली.

"मज़ा आया तुम्हे?" अजय ने पूछा. अब वो और ज़ोर से उसे छोड़ने लगा.
उसकी गोलियाँ उसकी गंद पर ठोकर मार रही थी. ये कल्पना उसे
बहोट मज़ा दे रही थी और वो क नौजवान की तरह इस लड़की को
छोड़ना चाहता था.

"नही छा….छा मुझे बहोट तकलीफ़ हुई," उसने कहा,

"लेकिन अब तो मज़ा रहा है ना…….सच सच बताओ झूठ मत बोलना……
अपने डॅडी को सच बोलो सुनीता." अजय उसे और जोरों से छोड़ते हुए
बोला.

उस छोटी सी दवाई की दुकान मे उन दोनो की गहरी साँसे और चुदाई की
आवाज़े गूँज रही थी.

"हन…पिताजी….बहोट मज़ाअ आ रहा है….लेकिन आपका लंड उसके लंड से
ज़्यादा लंबा और मोटा है…….आपके लंड से बहोट मज़ा मिल रहा है."
वो अपने अनुभव से समझ गयी की अजय का अब छूटने वाला है.

"क्या उसने अपना पानी तुम्हारी छूट मे छोड़ा था?" अजय का अब छूटने
वाला था.

"हन….अंदर डाला था……आप भी अपना पानी मेरी छूट के अंदर छोड़
दो, अपनी सुनीता की छूट को अपने वीर्या से भर दो." वो कूल्हे
उछलते हुए बोली.

यही तो वो सुन्नना चाहता था. वो कल्पना करने लगा की ठीक इसी
तरह सुनीता उसके नीचे लेते उससे छुड़वा रही है और उसके लंड ने
कॉंडम मे अपना वीर्या छोड़ दिया.

18 साल की शीला को बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था की उसके भाई विजय
और राज उसकी बड़ी बेहन सुनीता की चुदाई करते है. और रोज़ करते
है. वो तो अपने ही ख़यालों मे खोई रहती थी. उसके घर मे इतनी
पाबंदी थी उसे बड़ी मुश्किल से घर से बाहर निकालने का मौका मिला
करता था. उसे अपनी पढ़ाई पूरी किए आज 6 महीने हो गये थे. उस दिन से आज
तक वो सिर्फ़ टीन बार घर से बाहर जेया सकी थी वो भी अपने माता
पिता के साथ. उसके पिताजी उसे वो आज़ादी नही देते थे जो उसकी बाकी
सहेलियों को मिलती थी.

कॉलेज के भी क्या दिन था. सहेलियों के साथ गॅप शॅप करना, लड़कों
की बातें करना, सेक्स पर चर्चा करना. उनके घर मे व्क्र या द्वड
प्लेयर नही था इसलिए वो कोई पिक्चर वागरह भी नही देख सकती
थी. उसे पिक्चर्स के बारे मे पूरा गयाँ था.

बरसात का मौसम शुरू हो चुका था. आज सुबह से ही काफ़ी बारिश
हो रही थी. शीला हर नौजवान लड़के लड़की की तरह पहली बारिश
का मज़ा लेने अपने घर के आँगन मे खड़ी बारिश के नीचे भीग
रही थी.

उसके कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे. उसका सुडौल बदन, उसका
आकर्षक फिगर 36-26-34 बड़ा ही प्यारा लग रहा था. उसके भीगे
कपड़े उसके बदन से पूरी तरह चिपक गये थे.

शीला को अब ठंड लगने लगी थी. उसने अपने चेहरे से पानी को
पौंचा और एक मीठी मुस्कान के साथ अंदर जाने की तय्यरी करने
लगी. तभी उसने विजय अपने भाई को देखा जो उसे अजीब नज़रों से
घूर रहा था. वो भी पूरी तरह भीग चुका था. उसके भी कपड़े
उसके शरीर से चिपके हुए था और उसका खड़ा लंड एक टेंट सा उसके
पंत मे बनाए हुए था.

शीला की नज़र जैसे ही विजय के खड़े लंड पर पड़ी उसकी छूट मे
एक सर सराहट से दौड़ गयी. उसकी छूट मे जोरों की खुजली मचने
लगी.

शीला को पता था की लंड क्या होता है. उसे ये भी पता था की लंड
किस मे इस्टामाल होता है और वो कहाँ कहाँ घुस सकता है. सुनीता
ने उसे सब बताया था औरत और मर्द का क्या संबंध होता है और
मर्द एक औरत के साथ क्या क्या करता है. कॉलेज मे सहेलियाँ भी
अक्सर चुदाई की बातें करती थी और अपना अपना अनुभव शेर करती
थी.

शीला को भी कई लड़कों ने बाहर चलने को इन्वाइट किया था पर अपने
घर का महॉल और पिताजी के गुस्से की वजह से उसकी हिम्मत नही पड़ी.

करीब एक साल पहेले की बात है, वो विजय के कमरे मे कुछ
ढूँढने के लिए गयी थी. विजय बातरूम मे शवर के नीचे स्नान
कर रहा था. बातरूम का दरवाज़ा खुला था. बातरूम का दरवाज़ा
खुला देख उसे अंदर झाँकने की इक्चा हुई.

शीला ने देखा की विजय उसकी और पीठ किए नहा रहा है. उसके
गोरे चुतताड और लंबी टाँगे देख उसके दिल मे हलचल सी मच गयी.
फिर विजय अपने बलों मे शॅमपू लगते हुए उसकी और घूमा तब
शीला ने जिंदगी मे पहली बार हक़ीक़त मे लंड देखा. विजय का लंड
खुंते की तरह उसके सामने खड़ा था.

उसका बिना बलों का लंड पानी के नीचे चमक रहा था. उसके मुँहे
से कोई आवाज़ ना निकाला इसलिए उसने अपने मुँह पर हाथ रख लिया. जब
तक उसमे हिम्मत थी वो खड़ी विजय को नहाते देखती रही. फिर दौड़
कर अपने कमरे मे जाकर बिस्तर पर लेट गयी. उसकी छूट मे आग लगी
हुई थी. वो जोरों से अपनी छूट को मसालने लगी थी.

उसने लंड को देखा था और उसने अपनी छूट को मसाला था. उस दिन से
तो उसकी अडॅप्ट सी हो गयी थी जब भी उसकी छूट गर्माती वो हाथों से
रग़ाद और मसल कर अपनी छूट की गर्मी को शांत करती.

और आज वो दोनो बारिश मे भीगते हुए एक दूसरे को घूर रहे थे,
जैसे अक्सर हिन्दी पिकतुरों मे होता है.

विजय की आँखों मे कुछ था जिसे देख कर उसका दिल धड़क रहा था.
उसके दिल की धड़कने तेज हो गयी थी. और उत्तेजना मे उसके निपल टन
कर खड़े हो गये थे. उसकी छूट मे अजीब सी खुजली मचने लगी
थी.

वो उसकी और देख कर मुस्कुरई और उसके बगल से निकली तो विजय के
मुँह से `फॅंटॅस्टिक' निकल गया.

शीला उसके बगल से निकली तो विजय उसे देख रहा था, उसकी लंबाई
5'4 थी और फिगर भी काफ़ी मद मस्त था. गोल चेहरा और सिल्क जैसे
लंबे बाल. उसकी आँखे ठीक उनकी मा पर गयी थी, गहरी नीले रंग
की उसके गुलाबी होंठ काफ़ी भरे भरे थे.

विजय काम पर से घर आ गया था. उसका भाई राज कॉलेज गया हुआ
था और सुनीता मा के साथ बाकछे को लेकर डॉक्टर के पास गयी थी
बाकछे को तिक्का लगवाने. पिताजी हमेशा की तरह दवाई की दुकान पर
थे. विजय और शीला आज आकेयलए थे घर मे.

विजय आज काफ़ी उततजन मे था. सुनीता की माहवारी चल रही थी और
उसने तो लंड चूसने से भी इनकार कर दिया था. आज सुनीता को
तीसरा दिन था. राज और वो छोड़ने के लिए मारे जेया रहे थे. अगर
और कोई दिन होता तो डॉन वन बातरूम मे मूठ मार ली होती पर जब एक
दो दिन मे छूट मिलने वाली हो तो मूठ क्यों मारी जाए.

राज ने तो एक बार सुनीता से भीक भी माँगी, गिड़गिडया भी को वो
उसके लंड को चूस कर शांत कर दे.

"जेया हरामी," सुनीता ने हंसते हुए कहा था, "जाकर मूठ मार लो
में तो नही चूसने वाली."

विजय राज की हालत देख कर हँसने लगा था, जिस तरह राज गिड़गिदा
रहा था, पर वो राज की तरह सुनीता के आयेज नही गिड गिडाएगा.

"राज रेने दे जब इसके छूट मे आग लगती है तो साली पूरे मोहल्ले
से छुड़वा लेगी," विजय ने राज से कहा, "आज हम कह रहे है तो
साली नखरे दीखा रही है, इसकी छूट मे आग लगने दे तब इसे
बताएँगे."

विजय शीला के पीछे पीछे घर मे आ गया देखा की शीला अपने
कमरे मे जेया रही थी.

गीले कपड़े विजय के बदन से पूरी तरह चिपक हुए थे, विजय
शीला को देखे जेया रहा था और अपने लंड को पंत के उपर से मसल
रहा था.

शीले ने विजय की और देखा और मुसकुरूते हुए अपने कमरे मे चली
गयी, विजय ये सोच कर ही पागल हुए जेया रहा था की शीला अब अपने
गीले कपड़े उत्तरेगी. उसे ये विश्वास था की शीला ने अभी तक किसी
से चुडवाया नही है, वो पूरी तरह कुँवारी है और इस सोच ने उसके
बदन मे और आग लगा दी.

विजय शीला को अपने कमरे मे जाते हुए देखता रहा. उसके गीले
कपड़े बदन पर इस तरह चिपके हुए थे की उसके बदन का हर कटाव
सॉफ दिखाई दे रहा था. विजय अपने बदन की गर्मी से अपने आपको रोक
ना सका और अपने खड़े लंड को पंत के उपर से ही मसालने लगा.

विजय जल्दी से शीला के कमरे पर आया तो देखा की दरवाज़ा खुला
हुआ है, वो कमरे के अंदर आ गया.

शीला अपने गीले बल्लों को सूखा रही थी, उसके गीले कपड़े अब भी
उसके बदन से चिपके हुए थे. शीला को इस तरह खड़े देख विजय का
लंड पंत के अंदर फूंकर मरने लगा.

शीला तो खुद विजय का इंतेज़ार कर रही थी, इसलिए वो उसे देख
चौंकी नही बल्कि सोच मे पद गयी की उसका भाई अब क्या करेगा.

विजय अपने होठों पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए कमरे का दरवाज़ा बंद
कर दिया और शीला से कहा, "खाने मी क्या है?"

शीला को उमीद थी विजय उसके पीछे पीछे आएगा. उसका मान कर
रहा था की आज फिर विजय शवर के नीचे नहाने जाए तो उसे एक
बार फिर उसके लंड की झलक देखने को मिल जाए. कितने महीनो से वो
इस पल का इंतेज़ार कर रही थी. इस सोच ने ही उसकी छूट मे खुजली
मचा दी और गीली हो गयी.

शीला के बदन मे हलचल मची हुई थी. वो विजय को देख रही थी,
उसकी साँसे तेज हो गयी थी और सोच रही थी की उसे क्या करना
चाहिए. उसका दिल तो कर रहा था की वो आयेज बढ़ कर विजय की बाहों
मे समा जाए. उसे चूमे और अपने से चिपका ले. उसके दीमग मे वो
सीन आ रहा था जब दो प्रेमी मिलते है तो क्या क्या करते है.

पर विजय उसका सागा भाई था. अपने भाई के बारे मे ऐसा सोचना पाप
था पर वो अपने दिल के हाथों मजबूर थी. विजय की आँखे भी यही
कह रही थी की वो भी उसे चाहता है और उसे पाना चाहता है, खाने
के लिए पूछना तो एक बहाना था.

विजय को उकसाने के लिए वो क्या करे. वैसे तो वो भी पहला कदम
बढ़ा सकती थी, पर उसे शरम आ रही थी. उसने हिम्मत करके अपनी
कमीज़ उठाई और अपनी शलवार का नडा ढीला कर दिया. शलवार उसके
टॅंगो पर फिसल का नीचे खिसक गयी.

वो सोच रही थी उसकी इस हरकत पर विजय क्या करेगा, उसे थप्पड़
मरेगा, उसपर चिल्लाए गा या उसे बाहों मे भर कर प्यार करेगा.

विजय शीला की हरकत देख रहा था, उसकी आँखों मे भी वही कुछ
था जो उसने हमेशा अपनी प्रेमिकाओं की आँखों मे देखा था. शीला
भी उसे पाना चाहती है. विजय आयेज बढ़ा और शीला को अपनी बाहों
मे भर लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख उन्हे चूमने लगा.

शीला को आछा लगा की उसकी सोच सही थी. विजय ने ना तो उसे
थप्पड़ मारा था और ना ही उस पर गुस्सा हुआ था बल्कि उसे बाहों मे
भर चूम रहा था. वो आज जिंदगी मे पहली बार किसी मर्द की बाहों
मे थी.

विजय थोड़ी देर तो उसे चूमता रहा फिर उसे अलग कर जल्दी से अपने
गीले कपड़े उत्तर नंगा हो गया. उसका तन्ना हुआ लंड खूँटे की
जैसे खड़ा था.

"आओ मेरी जान" कहकर विजय ने उसका हाथ पकड़ा और बिस्तर पे ले
आया.

"क्या तुमने पहले कभी लंड नही देखा? ज़रा तुम्हारा हाथ देना……"
कहकर विजय ने शीला का हाथ अपने लंड पर रख दिया. शीला की
ठंडी उंगलिया और हथेली विजय के गरम लंड को सहलाने लगी.

"ऑश भैया ये कितना गरम है! इतना मोटा और लंबा भी है……मेने
तो सोचा भी नही था की आपका लंड ऐसा होगा." शीला ये कहकर अपनी
जिंदगी के पहले लंड को मसालने लगी और भींचने लगी.

विजय फिर धीरे धीरे शीला के कपड़े उत्तरने लगा. जब वो पूरी
तरह नंगी हो गयी तो उसने उसके चुचियों को अपनी हाथों बे भर
मसालने लगा. फिर उसेन उसके निपल को मुँह मे लिया और जोरों से
चूसने लगा.

"ऑश भैया……कितना मज़ाअ एयेए रहा है….ऑश हाआँ चूवसो भैया…"
शीला भी मस्त मे सिसकने लगी. शीला ने विजय को सिर को पकड़ कर अपनी चुचियों पर दबा दिया,
उत्तेजना मे उसकी टाँगे काँप रही थी. उसने अपनी टॅंगो को और विजय
की टॅंगो से चिपका दिया और अपनी छूट को उसके खड़े लंड पर
रगड़ने लगी.

विजय ने उसकी चुचि को चूस्टे हुए अपना हाथ नीचे को किया और
शीला की गीली छूट पर रख दिया. अब वो बड़े प्यार से उसकी छूट
को सहला रहा था, और वो साथ ही उसकी गर्दन चूमने लगा फिर वो
सुके कानो की लाउ पर अपनी ज़ुबान फिरने लगा.

जैसे जैसे विजय की उंगलियाँ उसकी छूट के सहला रही थी, शीला
की साँसे और तेज होने लगी. उसके बदन मे एक अजीब से मस्ती चने
लगी थी.

विजय ने शीला को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके उपर आ गया. वो
उसकी पूरे बदन को चूमने लगा. शीला उसके नीचे उसका लंड लेने
को तैया थी. वो जनता था की अगर आज उसने इसे नही छोड़ा तो एक दिन
राज ज़रूर उसकी छूट फाड़ देगा.

विजय का लंड ये सोच कर और टन गया की वो राज से पहले शीला की
छूट मरेगा. किस तरह राज ने सुनीता की छूट मारी थी. आज वॉक
हश था की उसने राज को शीला के मामले मे हरा दिया था. शीला की
छूट मरके वो राज से सुनीता का बदला ले लेगा.

विजय उसकी टॅंगो के बीच आ गया और धीरे से उसके कान ने
फुसफुसाया, "अपनी टाँगे खोलो मेरी प्यारी बहना आज में तुम्हे
लड़की से औरत बना दूँगा."

"हन हन……..भैया आज मुझे छोड़ दो." शीला भी उत्तेजित स्वर मे
बोली.

जिस तरह से शीला ने छोड़ो शब्द कहा था, विजय के चेहरे पर
मुस्कान आ गयी. उसके बेहन को कॉलेज मे आक्ची शिक्षा मिली है.

उसने अपने खड़े लंड को हाथ मे पकड़ा और शीला की छूट को तोड़ा
फैलते हुए उसके मुँह पर रख दिया.

"तोड़ा दर्द सहन करना मेरी जान, शुरू में थोड़ी तकलीफ़ होगी पर
जब लंड अंदर चला जाएगा तो तुम्हे बहोट मज़ा आएगा," कहकर
विजय उसके होठों को चूसने लगा और अपना लंड उसकी छूट मे
घुसने की कोशिश करने लगा.

विजय को अपना लंड शीला की खूनवारी छूट मे घूसने मे बड़ी
तकलीफ़ हो रही थी, और शीला भी दर्द के मारे रोने लगी थी.

शीला को दर्द को सहन करने की कोशिश करने लगी, सुनीता ने उसे
बताया था की पहली बार तोड़ा दर्द होगा पर बाद मे बहोट मज़ा
आएगा.

दो टीन कोशिश के बाद विजय अपने लंड के सूपदे को उसकी छूट मे
घूसने मे कामयाब हो गया.

"ऑश….भैया….बहोट दर्द हो रहा है…… प्लीज़ इसे बाहर निकल लो
में बर्दाश नही कर पवँगी." शीला दर्द के मारे चीख पड़ी,
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे.

विजय ने उसकी चीख पर कोई ध्यान नही दिया और दो टीन ज़ोर से
धक्के मार्कर उसकी छूट की झिल्ली फाड़ दी और अपना लंड उसकी छूट
मे पूरा का पूरा घुसा दिया.

शीला ने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया और अपने दर्द को सहन
करने की कोशिश करने लगी. उसकी आँखों से तार तार आँसू बह रहे
थे. छूट मे दर्द इतना हो रहा था की वो अपनी टाँगे पटक रही थी.

पर धीरे धीरे उसका दर्द कम होता गया और उसकी छूट विजय के
लंड को सहन करनी लगी. उसे विजय का लंड बहोट ही मोटा लग रहा
था, उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मूसल उसकी छूट मे घुस
गया है.

शीला सोचने लगी की क्या विजय का लंड सबसे बड़ा लंड है या इससे
भी बड़े लंड दुनिया मे होते है. जब उसकी शादी हो जाएगी तो क्या
उसके पति का लंड भी ऐसा होगा या इससे बड़ा? या इससे पतला और
छोटा. वो इन्ही ख़यालों मे खोई हुई थी. तभी उसने विजय के होठों
को अपने होठों पर महसूस किया जो उसके होठों को चूसने लगा था.

शीला ने आज पहली बार लंड का स्वाद चखा था. उसने सुना तो बहोट
था चुदाई के बारे मे पर आज वास्तव मे हक़ीक़त मे वो छुड़वा रही
थी. वो भी किसी और नही से बल्कि अपने सगे चुड़क्कड़ भाई से.

विजय ने अब उसकी दोनो चुचियों को अपने हहतों मे लेकर मसालने लगा
था, कभी अपनी जीब उसके निपल पर फिरता तो कभी उसके निपल को
अपने दाँतों के बीच लेकर हौले से काट लेता.

विजय चाहता था की शीला की छूट उसके लंड के ढके सहने के
काबिल हो जाए, वो शीला को इतना गरमा देना चाहता था की वो उसके
धक्को को सहन कर सके. विजय को अपने आप पर काबू रखना बहोट
मुश्किल हो रहा था कारण शीला की छूट इतनी ज़्यादा कसी और गरम
थी की बड़ी मुश्किल से वो अपने आप को रोक रहा था.

विजय ने जब देखा की शीला तोड़ा शांत पद गयी तो उसने धीरे
धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया. वो बड़े प्यार से
उसे चूमते हुए और उसकी चुचियों को सहलाते हुए ढके मार रहा
था. शीला उसकी बेहन थी और उसकी इक्चा थी शीला अपनी पहली
चुदाई का पूरा लुफ्ट उठाए.

विजय इतने प्यार से उसे छोड़ रहा था की वो चाहता था की शीला इस
चुदाई को हमेशा याद रखे और वो बार बार उससी से चुडवाए.

शीला को दर्द तो तोड़ा तोड़ा अभी हो रहा था पर अब उसे मज़ा भी
आने लगा था. वो भी अब अपने कूल्हे उठा कर विजय के धक्कों का
साथ देने लगी.

विजय ने अब अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी. शीला भी अब उसका पूरा
साथ देने लगी और सिसकने लगी, "ऑश भैया हन चूऊओदो मुझे
ऑश अयाया बड़ा मज़ाअ रहा है."

विजय का लंड अब उसकी छूट की गहराइयों तक जेया रहा था, विजय को
भी बड़ा मज़ा आ रहा था, "ऑश मेरी प्यारी बहाना तेरी चूओत तो
मुझे इतनाअ मज़्ज़ा दे रही है हाआँ ले ले अपने भाई का लंड अपनी
छूट मे ऑश."

दोनो ने एक दूसरे को कस कर अपनी बाहों मे भींच रखा था और ताल
से ताल मिला कर चुदाई कर रहे थे.

तभी विजय ने देखा की शीला ने अपनी टाँगे उठा कर उसकी कमर से
लपेट ली है और अपने कूल्हे ऑरा आगे को कर उसका लंड अपनी छूट मे
और अंदर तक ले रही है. उसके मुँह से सिसकारियाँ फुट रही थी वो
समझ गया की शीला की छूट ने पानी छोड़ने वाली है.

"ऑश भाइया ये मेरी छूट को क्या हो रहा है ऐसा लग रहा है की
जैसे कुछ निकल रहा है ऑश माआ."

विजय समझ गया की शीला की छूट ने पानी छोड़ दिया है. उसके
भी लंड मे तनाव आने लगा था. विजय ने अपना लंड बाहर निकाला
और उसे रगड़ते हुए अपना वीर्या शीला के पेट पर छोड़ दिया.

विजय लुढ़क कर शीला के बगल मे बिस्तर पर लेट गया. दोनो की तेज
सांसो की आवाज़ कमरे मे गूँज रही थी. विजय शीला के पसीने से
भरे बदन को सहलाते हुए अपनी उखड़ी सांसो को काबू मे करने की
कोशिश कर रहा था.

व्जे बिस्तर पर लेता शीला को देख रहा था. उसकी छोटी और प्यारी
बेहन चुदाई के बाद और सनडर दीख रही थी. उसे बड़ा प्यार आ
रहा था अपनी इस बेहन पर. सुनीता की छूट से भी बड़ी प्यारी
छूट थी शीला की.

उसने राज से बदला ले लिया था. राज ने पहले सुनीता की छूट मारी
और उसने पहले शीला की. पर वो राज से ज़्यादा खुशनसीब था की उसे
कुँवारी छूट छोड़ने को मिली. कुँवारी छूट छोड़ने का ये उसका पहला
अनुभव था.

थोड़ी देर सुसताने के बाद विजय बिस्तर से उठा और बातरूम की और
बढ़ गया. शीला उसे बातरूम जाते देखती रही. उसका मुरझाया हुआ
लंड भी उसे लंबा लग रहा था. उसकी छूट मे अभी भी हल्का सा
दर्द था पर जो आनंद उसे छूट मरवा कर मिला था इस समय उठ रहे
दर्द से कहीं अक्चा था. वो मान ही मान खुश थी की आज वो एक लड़की
से औरत बन गयी थी.

विजय ने बातरूम मे जाकर अपने लंड को देखा. उसका लंड उसके और
शीला के वीर्या के साथ साथ शीला की छूट से निकले खून से भी
भरा हुआ था. उसने रग़ाद रग़ाद कर अपने लंड को साबुन से अची
तरह धोया और बाहर आ गया. उसने देखा की शीला बिस्तर पर पेट
के बाल लेती हुई ही.

विजय तो शीला की उभरी और फूली हुई गंद देखता ही रह गया. उसकी
गंद को देखते ही उसका लंड एक बार फिर तंन गया और फूंकर मरने
लगा.

विजय सोचने लगा की जब वो एक बार शीला की कुँवारी छूट तो छोड़
चुका है तो क्यों ना आज उसकी खूनवारी गंद भी मार दी जाए. उसने
ड्रेसिंग टेबल पर देखा और पॉंड्स क्रीम की शीशी उठी ली.

क्रीम की शीशी खोलने के बाद वो उसमे से क्रीम निकल अपने लंड पर
मलने लगा. वो क्रीम इस तरह लगा रहा था की उसका लंड पूरी तरह
से चिकना हो जाए.

फिर विजय अपनी बेहन शीला के पास बिस्तर पर आया जो खून के
धब्बों से भारी चादर पर लेती थी.

"शीला मेरी जान मज़ा आया ना तुम्हे?" विजय ने उसकी गंद पर हाथ
फिरते हुए कहा.

शीला ने करवट बदली और विजय को देखने लगी, "हन भैया, बहोट
मज़ा आया, मुझे नही मालूम था की चुदाई मे इतना मज़ा मिलता
है."

विजय झुका और उसकी गर्दन और कंधों को चूमने लगा साथ ही वो
उसकी गंद की दरार मे हाथ फिरा रहा था और उसकी गंद के छेड़ को
कुरेड भी रहा था.

"जानू आज तुम्हे एक और चीज़ सीखनी है," विजय उसकी गंद मे अपनी एक उंगली घुसते हुए बोला.

विजय का हाथ पानी गंद पर महसूस कर शीला समझ गयी की उसका
भाई उसकी गंद भी मारना चाहता है, "क्या मेरी गंद मरने का इरादा
है?"

"तुम्हे गंद मरने के विषय मे किसने बताया?" विजय ने उससे पूछा,
वो मान ही मान सोचने लगा की कहीं शीला पहले सिर्फ़ गंद तो नही
मरवा चुकी.

"एक सहेली ने और सुनीता दीदी ने." शीला ने जवाब दिया.

"विजय पीछे से उसकी टाँगों के बीच आ गया और उसकी गंद को
चूमने लगा, और अपनी ज़ुबान उसकी गंद के छेड़ पर घूमने
लगा, "और क्या बताया मेरी जान?"

शीला को विजय के मुँह से निकलती गर्म साँसे उसे अपनी गंद पर
बहोट आक्ची लग रही थी. उत्तेजना मे उसने अपनी टॅंगो को और फैला
दिया जिससे विजय को आसानी हो सके.

"सुनीता दीदी ने मुझे बताया की एक तो गंद मरवाने से गार्ब रह जाने
का ख़तरा नही रहता. उन्होने ये भी बताया की शुरू मे दर्द तो बहोट
होता है पर बाद मे मज़ा भी उतना ही मिलता है." कहकर शीला ने
अपने कूल्हे तोड़ा उपर को उठा दिया.

"क्या गंद मरवाना चाहोगी?" विजय ने उसकी गंद मे उंगली घुसते हुए
पूछा.

शीला ने मूड कर अपने भाई की और देखा, "भैया आप आराम से
करेंगे ना मुझे ज़्यादा तकलीफ़ तो नही होगी ना."

"तुम इसकी बिल्कुल चिंता मत करो में बड़े प्यार से करूँगा," विजय
ने कहा.

विजय ने उसकी गंद का चूमा लिया और अपना हाथ उसकी छूट पर रख
दिया जो पहली चुदाई के कारण थोड़ी सूज गयी थी. वो चाहता था की
शीला अपने पूरे मान से गंद मरवाए और शायद यही सोच कर उसकी
छूट से खेलने लगा शायद गरम होने से वो खुद ही अपने आप कहे.

विजय ने देखा की शीला की कोई प्रतिक्रिया नही हो रही थी, "बोलो
ना मेरी जान गंद मर्वानी है या नही?"

"भैया एक दिन तो इसका भी मज़ा लेना ही है, आपसे या फिर अपने पति
से तो फिर आज ही क्यों ना गंद मरवाने का मज़ा लूट लूँ." थोड़ी देर
सोचने के बाद शीला ने कहा.
"पर भैया तोड़ा धीरे धीरे करना."

विजय ने शीला को बिस्तर के किनारे पर खड़ा कर उसे घोड़ी बना
दिया. उसके सिर के नीचे तकिया लगा दिया और उसकी टॅंगो को फैला
दिया. फिर उसकी गंद को सहलाते हुए छेड़ पर क्रीम लगाने लगा.
थोड़ी क्रीम अपनी उंगली मे ले उसने उंगली गंद के अंदर घुसा दी और
अंदर के हिस्से को चिकना करने लगा.

जैसे ही विजय की उंगली उसकी गंद मे घुसी शीला को हल्का सा दर्द
हुआ पर वैसा नही जैसा उसने सुना था. थोड़ी देर मे उसे विजय की
उंगली अपनी गंद मे आक्ची लगने लगी.

विजय ने भी महसूस किया की शीला को भी अब मज़ा आने लगा है.
जिस तरह से उसकी उंगली बड़ी मुश्किल से उसकी गंद मे गयी थी उसे
पक्का यकीन हो गया की आज तक इस उंगली के अलावा शीला की गंद मे
कुछ नही घुसा है.

उसने अपनी उंगली उसकी गंद से निकल ली और अपने लॉड को पकड़ कर
गंद के छेड़ पर रख दिया. उसने ज़ोर लगाकर अपना लंड अंदर घुसने
की कोशिश की पर छेड़ इतना तंग था की उसका सूपड़ा भी अंदर नही
घुस पाया.

विजय ने थोड़ी सी और क्रीम लेकर उसकी गंद पर अची तरह लगाने
लगा. अब वो साथ ही उसकी छूट मे भी उंगली घुसा अंदर बेर कर
रहा था.

विजय ने अब शीला के चुतताड को तोड़ा फैलाया और अपने लंड को और
ज़ोर लगाकर अंदर करने लगा.
शीला दर्द का मारे मारी जेया रही थी. बड़ी मुश्किल से वो अपनी
चीख को मुँह मे दबा पाई. विजय ने तोड़ा और ज़ोर लगाकर अपना
सूपड़ा अंदर घुसा दिया. विजय शीला के दर्द की परवाह ना करते हुए
अपने लंड को तोड़ा तोड़ा अंदर घुसने लगा.

जब करीद आधा लंड अंदर घुस गया तो विजय थोड़ी देर के लिए रुक
गया जिससे शीला की गंद उसके लंड को आक्ची तरह अड्जस्ट कर सके.
वो शीला को ज़्यादा तकलीफ़ नही देना चाहता था. वो उसकी पीठ और
चूतड़ शेला कर उसे आराम देने की कोशिश करने लगा.

थोड़ी देर मे ही शीला की साँसे शांत हो गयी और उसका बदन तोड़ा
ढीला पड़ने लगा. विजय ने शीला को शांत होते देखा तो दो टीन
छोटे ढके लगा अपने लंड को और अंदर घुसा दिया.

शीला के मुँह से एक दर्द भारी चीख नाइकल पड़ी. उसने बिस्तर की
चादर को जोरों से पकड़ लिया और चिल्ला उठी, `ऊऊऊऊओ
हाईईईईईईईईईई मार गाइिईईईईई."

"ऑश भाइईईईया चूओद दीजिए मेरी गंद फात गई है बाहर
निकाल लो अपनी लंड को��.." शीला रोते हुए बोल पड़ी, उसकी आँखों
से लगातार आँसू बह रहे थे.

विजय ने फिर भी उसकी चीख की परवाह नही की और ज़ोर का धक्का
मार अपने लंड को पूरा पूरा अंदर घुसा दिया. उसे याद है आंटी ने
उसे बताया था की अगर ऐसे वक़्त मे वो अपना लंड किसी की गंद से
बाहर निकाल लेगा तो डॉडरा वो उस गंद को नही मार पाएगा.

उसकी आंटी ने उसे समझाया था की कुँवारी लड़की की गंद मरते वक़्त
शुरू मे दर्द होता है और वो कितना भी चिल्लाए "निकालो निकालो" पर
तुम अपना लंड बाहर नही निकालना, कारण 3 4 मिनिट के बाद उन्हे
इतना मज़ा आएगा की वो रोज़ तुमसे गंद मरवाना खुद चली आएगी.

विजय ने आंटी की बातें याद कर शीला को बिस्तर पर दबा दिया
था और अपने लंड को सूकी गंद के अंदर घूमने लगा.

शीला से दर्द सहन नही हो रहा था, वो अपना सिर इधर उधर पटक
रही थी, फिर विजय की और देखते हुए बोली, "प्लीज़ छोड़ दो मुझे
तुमने तो कहा था की प्यार से करोगे पर तुमने अपना वादा तोड़ दिया."

"नही मेरी जान��..शुरू में तो हमेशा थोड़ी तकलीफ़ होती ही है,
तुम तोड़ा साबरा से काम लो." विजय धीरे से बोला और अपना हाथ उसके
बदन के नीचे से कर उसके ममो को सहलाने लगा, साथ ही उसके
निपल भी भींचने लगा.

विजय उसके छूतदों के बीच अपना लंड फँसे उसकी गंद को भी
सहला रहा था. वो इंतेज़ार कर रहा था की कब शीला का दर्द कम हो
और उसे भी मज़ा आने लगे.

आख़िर शीला का दर्द कम हुआ और उसने अपने शरीर को ढीला छोड़
दिया.

शीला ने महसूस किया की अब उसकी गंद मे दर्द नही हो रहा है, और
उसे लंड का एहसास भी अक्चा लगने लगा था. हल्का हल्का दर्द अब भी
हो रहा था पर उसे मज़ा भी आने लगा था. विजय ने जाने के लिए थोड़े हल्के धक्के मरने शुरू किए. शीला
भी अब उत्तेजना मे आती जेया रही थी, उसके मुँह से हल्की से सिसकारी
नकली और उसने विजय के हहतों को अपने चुचि पर दबा दिया.

विजय उसकी इस हरकत को देख मुस्कुरा पड़ा और अपने लंड को उसकी गंद
के अंदर बाहर करने लगा.

उत्तेजना मे शीला ने अपनी आँखे बंद कर ली और खुद अपनी चुचियों
को मसालने लगी. उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियाँ निकल रही थी.

विजय ने उसके चुतताड पकड़े और अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी.

"ओह बाऐिया ओह हाआँ," शीला सिसक पड़ी.

करीब 10 मिनिट के बाद विजय के अंडकोषों मे तणनव उठने लगा और
उसने अपना वीर्या शीला की गंद मे छोड़ दिया. जब उसके लंड वीर्या की
एक एक बूँद निकल गयी तो वो शीला की पीठ पर "माज़ा आ गया"
कहकर लुढ़क गया.

थोड़ी देर सुसताने के बाद विजय ने करवट बदली और अपने लंड को
शीला की गंद से बाहर निकल लिया. फिर बिस्तर की चादर से पहले
अपने लंड को पौंचा और फिर शीला की गंद भी साफ कर दी.

विजय ने धीरे से सहारा देते हुए शीला को बातरूम मे ले गया और
उसे आक्ची तरह से सॉफ किया जिससे चुदाई का कोई नामो नैशन बाकी
ना रह जाए.

बातरूम से बाहर आने के बाद विजय ने बिस्तर की चादर बदल डी
और शीला ने सॉफ स्लीपिंग गाउन पहन कर बिस्तर पर लेट गयी.
विजय ने उसके होठों को चूमा और अपने कमरे मे आ गया.

शायद संजोग ही था की जैसे ही नहाने के लिए बातरूम मे घूसा
उसने अपनी मा और सुनीता को घर मे घुसते सुना.

*******

अजय आज खुश नही था. बारिश की वजह से कोई धनदा नही हुआ
था. आज तो वो घर भी देरी से पहुँचा कारण रास्ते मे ट्रॅफिक
इतना जाम था और उपर से वो रह चलती वैश्या जिसे वो सुनीता
बुलाता था आ गयी थी.

मंगलवार की शाम को तो जैसे नियम ही बन गया था, वो एयेए जाती
थी अजय से छुड़वाने के लिए. अजय भी उसे अपनी बेटी सुनीता
समझता और अपने मान की चुदाई की हर कल्पना को पूरा करने की
कोशिश करता. वो भी उसका पूरा साथ देती थी पर उसने कभी अजय
को अपनी गंद मरने नही दी. सवाल था पैसों का.

"पिताजी अगर लंड गंद मे डालने का इतना शौक है तो मेरी कीमत
बदह दो?" उसने उसकी गंद मे उंगली करते विजय से कहा.

"तुम तो पहले भी कई बार गंद मरवा चुकी हो? में क्यों पैसे ज़्यादा
दो" विजय ने उससे कहा. दोनो बंद दुकान के अंदर ओर्ड बोर्ड के
डिब्बों पर लेते हुए थे.

"हन कई लोग मेरी गंद मरते है, पर उसके लिए वो ज़्यादा पैसा देते
हैं मेरी जान," कहकेर उसेन कॉंडम पहने उसके लंड को अपनी छूट के
मुँह से लगा दिया.

चुदाई का दौर मस्त गुज़रा था, वो उसे पिताजी बुलाती थी और वो उसे
सुनीता बेटी.

जब अजय वैश्या सुनीता की छूट मे अपना पानी छोड़ रहा था उसी
वक़्त उसका बड़ा बेटा विजय उसकी छोटी बेटी शीला की गंद मे अपना
पानी छोड़ रहा था.

और जब ये दोनो जगह चुदाई का दौर चल रहा था राज ट्रॅफिक मे
फँसा हुआ था. उसका लंड पूरी तरह से उसकी पंत के अंदर टन कर
खड़ा था और उसे उमीद थी की आज तो कम से कम सुनीता उसके लंड
को चूस कर उसका पानी छुड़ा देगी��.. उसी समय सुनीता अपनी मा
सीमा के साथ गोद मे अपनी बची को उठाए पानी भरे रास्तों से
गुज़र रही थी.

श्रीमती सीमा कौल, मिस्टर अजय कौल की धरम पत्नी जो हटते कटे चार
बाकचों की मा थी खुद को पता नही था की वो 46 साल की है या 48.
उसके घर वालों ने कभी इस बात पर ध्यान नही दिया था.

पर उमर जॉब ही दीखने मे वो आज भी काफ़ी जवान दिखाई देती थी.
चार बाकछे पैदा करने के बाद भी सीमा ने अपना फिगर 34-28-26 का
बना कर रखा था. लोग अक्सर धोका खा जाते थे और उसे सुनीता
और शीला की बड़ी बेहन समझ लेते थे.

आज भी कुछ ऐसा ही हुआ था, हॉस्पिटल मे एक जवान डॉक्टर उसके पास
से इस तरह निकाला की उसने उसके लंड को अपनी गंद पर साफ महसूस
किया. सीम इन साब बातों की आदि हो चुकी थी. उसे अपनी सुंदरता
और बदन पर गर्व होता था की आज भी वो मर्दों को रिझा सकती है.

वहीं उसे अपने पति से नफ़रत से होने लगी थी, जो बिस्तर मे घुसते
ही उसपर चढ़ जाता था और दो चार धक्के मार अपना पानी छोड़ देता
था. उसकी छूट प्यासी की प्यासी रह जाती थी. अब वो पहले जैसा नही
था जो किसीस जमाने मे घंटो उसकी छूट की चुदाई किया करता था.
जब वो गैर मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित पति तो उसे रहट मिलती की
अजय उसके ढलती उमर की वजह से उसे पूरी तरह संतुष्ट नही करता
बल्कि उसकी खुद की जिस्मानी कमज़ोरी होगी.

घर पहुँचते ही सीमा ने बचो को बिस्तर पर लीटने मे मदद की
फिर अपने कमरे मे आ गयी. उसके कपड़े बारिश मे पूरी तरह से
भीग चुके थे, ठंड के मारे उसका पूरा बदन काँप रहा था.

सीमा ने राज को घर मे आते नही देखा क्यों की वो जल्दी मे थी.
कमरे मे आते ही वो अपने गीले कपड़े उत्तरने लगी. जब वो अपने बदन
को टवल से पॉंच रही थी तो उसे लगा की कोई उसे देख रहा है.
उसेन पलट कर दरवाज़े की और देखा तो पाया की राज उसे घूर रहा
था और उसका एक हाथ अपने लंड को सहला रहा था.

एक बार तो वो राज को देख कर चौंक पड़ी फिर जैसे ही उसने कुछ
कहने के लिए मुँह खोला, राज बोल पड़ा�� "मम्मी तुम बहोट खूबसूरत
हो."

सीमा को खुद को पता नही की क्या हुआ और क्यों हुआ और उसे टवल को
ज़मीन पर गिर जाने दिया, "राज दरवाज़ा बंद कर दो." कहकर उसने
अपना हाथ आयेज बढ़ा दिया.

सीमा चाहती थी की राज अंदर आ जाए पर वो ये देख कर चुआंक पड़ी
राज ने अंदर आते ही कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया था.

"राज?" उसने पूछा, "क्या हुआ है तुम्हे? तुम बीमार तो नही हो?"

राज आयेज बढ़ा और अपनी मा के गले लग गया जैसे एक छोटा बचा
अपनी मा के गले लगता है. सिर्फ़ फराक ये था की इस वक़्त उसकी मा
नंगी थी और वो चुदाई की भूक मे पागल हो रहा था, उसका लंड
उसकी पंत से बाहर आनए को बेताब था. वो अपनी मा की पीठ पर अपना
हाथ सहलाने लगा और बदन से उठती खुसबू का आनंद लेने लगा.

"राज, अपने गीले कपड़े उत्तरो नही तो बीमार पद जाओगे," सीमा ने
कहा और वो आक्ची तरह उसके लंड को अपनी छूट पर महसूस कर रही
थी. जैसे ही राज ने अपनी गीली शर्ट उत्तरी सीमा उसकी गीले बलों और
छाती को टवल से पौंचने लगी. जैसे ही उसके हाथ उसकी गातीले
बदन पर फिरे उसकी साँसे तेज हो गयी.

सीमा राज को देख रही थी, उसने अपने जूते फैंके और अपनी पंत की
बेल्ट खोल उसे निकाल डी. उसका खड़ा लंड पूरी तरह से ताना हुआ था
और उसकी सेफ कॉटन की अंडरवेर को फाड़ कर बाहर आने के लिए
बेताब हो रहा था��..उसका बेटा अब जवान हो गया था�.. ठीक अपने
बाप की तरह.

सीमा के मान मे भी कई दीनो से दबी चुदाई की प्यास जाग उठी,
भारी सांसो से वो राज के लंड को घूरती रही. उसके मुँह मे पानी आ
गया था. बिना कुछ कहे वो आयेज बढ़ी और राज के सामने घुटनो के
बाल बैठ गयी. फिर उसने उसकी अंडरवेर को नीचे खिसका निकल दिया
और टवल से उसकी टॅंगो को, उसकी जाँघो को, उसके लंड को और उसके
छूतदों को पौंचने लगी.

राज अपनी मा को अपने बदन को पौंचते देखते रहा.

सीमा उसके बदन को पौंचती जेया रही थी, राज की उत्तेजना उससे छुपी
नही थी. वो ये भी समझ रही थी की उसकी नग्नता की वजह से ही
वो उत्तेजित हो रहा है.

सीमा ने टवल को ज़मीन पर गिर जाने दिया और उसके लंड को अपने
हाथों से पकड़ आयेज पीछे करने लगी.

"माआ��ओह�.हन मा��." राज सिसक पड़ा.

उसके लंड से छूटे वीर्या को बड़े प्यार से देखने लगी. फिर वो अपनी
जीब उसके वीर्या को चाटने लगी. उसका खरा और अटपटा स्वाद कई
दीनो से भूके उसके मुँह को बड़ा प्यारा लगा.

सीमा समझ चुकी थी की अब पीछे हटने की कोई गुंजाइश नही थी
इसलिए उसने इस बात पर सोचना दिया और अपना सारा ध्यान राज के लंड
और उसके वीर्या पर लगा दिया. उसने अपना मुँह खोला और उसके लंड को
अंदर ले लिया और चूसने लगी.

राज को विश्वास नही हो रहा था की उसकी अपनी मा उसके लंड को
चूसेगी. उसकी सग़ी और सनडर मा उसके लंड को कभी चूसेगी ये तो
उसने सपने मे भी नही सोचा था.

वो तो घर जल्दी आ गया था और उसे जोरों की भूक लगी थी. वो तो
अपनी मा के कमरे मे खाने के बारे मे पूछने के लिए आया था. मा
के कमरे का दरवाज़ा खुला देख वो चुआंक पड़ा था. उसने तोड़ा सा
दरवाज़ा धकेल अंदर झाँका तो उसने अपनी मा को नंगी अवस्था मे
देखा. उनेक बदन का हर कटाव सॉफ दिखाई दे रहा था. वो एक दम
उसकी बेहन सुनीता की तरह थी, वही भारी भारी छातियाँ, सुडौल
जिस्म और पतली कमर.

आज वो अपने नसीब पर खुश था. जो उसने सपने मे नही सोचा था
वही उसके साथ हो रहा था, उसकी अपनी मा उसके सामने घूटनो के बाल
बैठी उसके लंड को बड़े प्यार से चूस रही थी.

अब सुनीता अपनी माहवारी के समय उसके लंड को नही चूसेगी तो तेल
लेने जाए वो अब उसकी मा उसके पास है और ये बहोट बड़ी बात थी
उसके लिए.

उसे अपने दोस्त बॉब्बी की याद आ गयी जो अपनी मा को बराबर छोड़ता
था और उसने ही ये सब के लिए उसे उकसाया था. आज उसकी कही हर बात
पूरी हो रही थी.

राज ने अपनी मा के सिर को दोनो हाथों से पकड़ रखा था और उसके
मुँह मे धक्के मार रहा था. उसका लंड सीमा के थूक से पूरी तरह
गीला हो चुका था. सीमा बड़े प्यार से अपने बेटे के लंड को अपने
मुलायम हाथों से पकड़ उसके लंड को चूस रही थी साथ ही उसकी
गोलैईयों को भी सहला रही थी. उसने अपनी आँखे बंद कर रखी थी
और पूरा मज़ा ले रही थी.

राज ने अपना लंड सीमा के मुँह से बाहर निकाला और नीचे झुकता हुए
उसके होठों को चूम लिया. फिर उसने सीमा को घूमते हुए घोड़ी
बना दिया.

राज सीमा के पीछे आ गया, उसकी साँसे तेज हो चुकी थी. उसे दर
था की कहीं मा उसे माना ना कर दे, फिर भी हिम्मत कर उसने अपना
लंड अपनी मा की बलों रहित छूट पर रख दिया.

सीमा मुड़कर मादकता मे अपने बेटे को देख रही थी. राज ने एक धक्का
मारा और उसका लंड सीमा की छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर
घुस गया.

जब लंड पूरी तरह उसकी छूट मे घुस गया तो राज ने सीमा के
चुतताड पकड़ लिया और धक्के लगाने लगा. हर धक्के के साथ वो
अपनी रफ़्तार तेज करता जेया रहा था. उसे दर लग रहा था की कब उसकी
मा का इरादा बदल जाए और वो पीछे हट जाए. उसके खुद के लंड
मे उबाल आता जेया रहा था और वो जल्दी से जल्दी अपना पानी छोड़ देना
चाहता था.

सीमा पहली बार अपने बेटे के लंड का मज़ा ले रही थी. आज कल उसका
पति अजय उसकी चुदाई नही करता था और ना ही उसकी छूट को चूस्टा
और ना ही अपना लंड चूस्वाता था. सीमा को लंड चूसने मे बड़ा
मज़ाअ आता था. शादी के बाद पहली बार जब अजय ने उसके मुँह मे
लंड डाला था तब से उसे लंड चूसना बहोट अक्चा लगता था. जब भी
अजय उसके मुँह मे अपना वीर्या छोड़ता तो वो बड़े प्यार से उसे पी जाती
थी.

राज के लंड का स्वाद भी उसे बहोट अक्चा लगा था. वो उसके लंड का
पानी भी पीना चाहती पर जब राज ने उसे घोड़ी बना उसके मुँह को
चूमा था वो समझ गयी थी राज के इरादे कुछ और है. जब राज ने
अपने लंड को उसकी छूट मे घुसाया तो उसे राज के लंड की गर्मी अपनी
छूट मे बड़ी अची लगी थी.

अब वो राज के हर धक्के का साथ अपने चुतताड आयेज पीछे कर दे रही
थी. कई दीनो से लंड को प्यासी उसकी छूट को आज पूरा मज़ा मिल
रहा था. जिस तरह से राज उसे छोड़ रहा था वो समझ गयी थी की
राज कोई अनाड़ी नही वो पहले भी कई बार चुदाई कर चुका है शायद
कॉलेज मे किसी लड़की की या फिर मोहल्ले मे किसी नौकरानी की या फिर
किसे अपने���.

राज के हर धक्के पर वो सिसक रही थी, "ह राज्ज्ज बेटा और ज़ोर
से ऑश हाआँ और ज़ोर से चूओड़ो फाड़ दो मेरी चूऊत को"

राज का लंड भी पूरी उबाल पर था पहले तो उसकी मा ने उसके लंड को
चूस चूस कर झड़ने के करीब ला दिया और अब उसकी छूट की गर्मी
उसके लंड को और गरमा रही थी. वो भी अब जल्दी ही अपना पानी छोड़ना
चाहता था, "ओह माआ तुम्हारी छूट कितनी गरम है ऑश मेरा तो
छूटने वाला है," राज सीमा के चुतताड पकड़ ज़ोर के धक्के मरते
बोला.

"हाआअँ बीता चूओद दो अपना पानी मेरी चूओत मे हाआँ" कहकर
सीमा ने अपने चुतताड ज़ोर से पीछे की और किए और तभी राज के
लंड ने अपना पानी छोड़ दिया.

जैसे ही राज के लंड का पानी सीमा ने अपनी छूट मे गिरते महसूस
किया उसने अपनी छूट मे उसके लंड को इस तरह जाकड़ लिया की राज के
लंड से एक एक बून नीचूड़ जाए और अपने चूतड़ को जोरों से आयेज
पीछे करने लगी.

"ओह हाआआं आाज मेरी चूओत की प्याअस बुझी है." सीमा
सिसकते हुए बोली और उसकी छूट भी झाड़ गयी.

दोनो ये काम कर तो चुके थे पर एक दूसरे से शरम के मारे आँख
नही मिला पाए. राज ने जल्दी से अपना लंड सीमा की छूट से बाहर
निकाला और अपने कपड़े पहन अपने कमरे मे चला गया और सीमा बिना
कुछ राज से कहे ये उसे देखे बातरूम मे नहाने चली गयी. 

1 comment:

  1. मुझे बकवास आह आह , मैं बड़ा डिक की जरूरत है , कौन बड़ा लंड है जल्दी आना मेरी बिल्ली में अपने 12 इंच का लंड दर्ज .मेरे साथ असली सेक्स के लिए ,अपने सेक्स लड़की के रूप में विज्ञापन मुझे >>> सीमा शर्मा

    मुझे और अधिक मनोरंजन के साथ वास्तविक सेक्स में >>> सीमा शर्मा

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