Saturday, 31 January 2015

माँ दीदी को जमकर चोदा

दोस्तों ,जब में सेनिक स्कूल में पढकर घर आया तो मेरी समझ में ये तो आ गया था की अगर आपको सेक्स का आरंभ करना हे तो आपके घर से ज्यादा आसन कोई जगह नही क्योकि आप अपनी माँ बहन भाभी चाची मामी ताई को आसानी से मोका देख कर नंगा देख सकते हे ,उनके अंगो को छू सकते हे ,उनके कपड़ो को देख कर मूठ मार सकते हे ,और कोशिश करे तो उन्हें चोद भी सकते हे।
मेरे घर में मेरे पापा,मेरी माँ जिनकी उम्र ३८ साल के लगभग हे वो, और मुझसे बड़ी १ बहन नेहा हे। मेरी माँ का नाम कमलेश हे जो खुबसूरत तो हे ही साथ में आकर्षक बदन की मालकिन भी हे,उनके चूतड काफी गुदाज हे उनके बोबे तने हुए भरे पुरे हे। कमर एकदम पतली और होठ एसे की हमेशा चूमने का मन करे। मेरी बहन संगीता भी एकदम मस्त कटीली हे उसके चूतड जब वो चलती थी तो एसे हिलते थे की दिल में आग लग जाती थी,और बोबे तो उसकी टी शर्ट में से बाहर बाहर निकलने को बेताब रहते थे।
हम लोग एक मिडल-कलास फमिली है और एक छोटे से फ्लैट मे आगरा मे रहते हैं.
हमारा घर मे एक छोटा सा हाल, डिनिंग रूम दो बेडरूम और एक किचन है बाथरूम एक ही था और उसको सभी लोग इस्तेमाल करते थे.शुरू शुरू मे मुझे सेक्स के बारे कुछ नही मालूम था क्योंकि मै हाई सकूल मे पढ़ता था और हमारे बिल्डिंग मे भी अच्छी मेरे उमर की कोई लड़की नही थी. इसलिए मैने अभी तक सेक्स का मज़ा नही लिया था और ना ही मैने अब तक कोई नंगी लड़की देखी थी. हाँ मै कभी कभी पॉर्न मैगजीन मे नंगी तसबीर देख लिया करता था.
मुझे अभी तक याद है की मै अपना पहला मुठ मेरी दीदी के लिए ही मारा था. एक सन्डे सुबह सुबह जैसे ही मेरी दीदी बाथरूम से निकली मै बाथरूम मे घुस गया. मै बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और अपने कपड़े खोलना शुरू किया. मुझे जोरो की पिशाब लगी थी. पिशाब करने के बाद मै अपने लंड से खेलने लगा. एका एक मेरी नज़र बाथरूम के किनारे दीदी के उतरे हुए कपड़े पर पड़ी. वहां पर दीदी अपनी नाइटगाऊन उतार कर छोड़ गयी थी. जैसे ही मैने दीदी की नाइटगाऊन उठाया तो देखा की नाइटगाऊन के नीचे दीदी की ब्रा पडा हुआ था. जैसे ही मै दीदी का काले रंग का ब्रा उठाया तो मेरा लंड अपने आप खडा होने लगा. मै दीदी के नाइटगाऊन उठाया तो उसमे से दीदी के नीले रंग का पैँटी भी गिर कर नीचे गिर गया. मैने पैँटी भी उठा लिया. अब मेरे एक हाथ मे दीदी की पैँटी थी और दूसरे हाथ मे दीदी के ब्रा था.
ओह भगवान दीदी के अन्दर वाले कपड़े चूमे से ही कितना मज़ा आ रहा है यह वोही ब्रा हैं जो की कुछ देर पहले दीदी के चुन्चिओं को जकड रखा था और यह वोही पैँटी हैं जो की कुछ देर पहले तक दीदी की चूत से लिपटा था. यह सोच सोच करके मै हैरान हो रहा था और अंदर ही अंदर गरमा रहा था. मै सोच नही पा रहा था की मै दीदी के ब्रा और पैँटी को ले कर क्या करूँ. मै दीदी की ब्रा और पैँटी को ले कर हर तरफ़ से छुआ, सूंघा, चाटा और पता नही क्या क्या किया. मैने उन कपड़ों को अपने लंड पर मला. ब्रा को अपने छाती पर रखा. मै अपने खड़े लंड के ऊपर दीदी की पैँटी को पहना और वो लंड के ऊपर तना हुआ था. फिर बाद मे मैं दीदी की नाइटगाऊन को बाथरूम के दीवार के पास एक हैंगर पर टांग दिया. फिर कपड़े टांगने वाला पिन लेकर ब्रा को नाइटगाऊन के ऊपरी भाग मे फँसा दिया और पैँटी को नाइटगाऊन के कमर के पास फँसा दिया. अब ऐसा लग रहा था की दीदी बाथरूम मे दीवार के सहारे ख़ड़ी हैं और मुझे अपनी ब्रा और पैँटी दिखा रही हैं मै झट जा कर दीदी के नाइटगाऊन से चिपक गया और उनकी ब्रा को चूसने लगा और मन ही मन सोचने लगा की मैं दीदी की चुंची चूस रहा हूँ. मै अपना लंड को दीदी के पैँटी पर रगड़ने लगा और सोचने लगा की मै दीदी को चोद रहा हूँ. मै इतना गरम हो गया था की मेरा लंड फूल कर पूरा का पूरा टनना गया था और थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और मै झड़ गया. मेरे लंड ने पहली बार अपना पानी छोड़ा था और मेरे पानी से दीदी की पैँटी और नाइटगाऊन भीग गया था. मुझे पता नही की मेरे लंड ने कितना वीरज़ निकाला था लेकिन जो कुछ निकला था वो मेरे दीदी के नाम पर निकला था.
मेरा पहले पहले बार झड़ना इतना तेज़ था की मेरे पैर जवाब दे दिया और मै पैरों पर ख़ड़ा नही हो पा रहा था और मै चुप चाप बाथरूम के फ़र्श पर बैठ गया. थॉरी देर के बाद मुझे होश आया और मै उठ कर नहाने लगा. शोवेर के नीचे नहा कर मुझे कुछ ताज़गी महसूस हुआ और मै फ़्रेश हो गया. नहाने बाद मै दीवार से दीदी की नाइटगाऊन, ब्रा और पैँटी उतारा और उसमे से अपना वीर्य धो कर साफ़ किया और नीचे रख दिया. उस दिन के बाद से मेरा यह मुठ मरने का तरीक़ा मेरा सबसे फ़ेवरेट हो गया.
लेकिन एक दिन मै अपने दोस्तों के साथ वी सी आर पर एक बहुत ही सेक्सी फिल्म देख कर आया था और मौका न मिल पाने के कारन उस दिन मुठ नहीं मार सका था | इसलिए पूरा दिन परेशान रहा |मगर पूरा दिन मुझे मुठ मारने का मौका मिला ही नहीं और मुझे रात को बिना मुठ मरे ही सोना पड़ा |
उसी रात मेरे साथ वह हुआ जो शायद इस समाज की नजरो में गलत होगा मगर अब मेरी नजरो में गलत नहीं है | मुझे कामुकता के कारण नींद नहीं आ रही थी और मै करवटे बदल रहा था कि अचानक मेरी नजर मेरे बराबर में सोती हुई मेरी दीदी पर पड़ी | (यहाँ मै आपको बता दूँ की शुरू से ही हम दोनों भाई बहिन एक कमरे में सोते थे और हमारे मम्मी-पापा दुसरे कमरे में सोते थे |)नींद में बेफिक्र हो कर सो रही मेरी बहन बहुत-बहुत सुंदर लग रही थी | और सबसे बड़ी बात तो ये थी कि नींद में सोती हुई मेरी बहिन के बूब्स बाहर आ रहे थे |पहले तो उसके बूब्स देखते ही मेरे अंदर हवस जाग उठी मगर दुसरे ही पल मेरे अंदर का भाई भी जाग गया और मैंने खुद पर कण्ट्रोल करते हुए अपनी करवट बदल ली |
मगर बहुत जयादा देर तक मेरे अंदर का भाई जागा न रह सका और मेरे अंदर का मर्द जाग गया | मै दिन भर से तो परेशां था ही, अब जयादा देर खुद पर कण्ट्रोल न कर सका और वापिस करवट बदल कर अपनी ही छोटी बहन के बूब्स देखने लगा | सच कहता हूँ उस समय मेरे अंदर मिले जुले विचार आ रहे थे | कभी तो मै अपनी ही बहन के बूब्स देख कर उत्तेजित हो रहा था और कभी खुद पर ग्लानी महसूस करता था |
मगर फिर भी उसके बूब्स देखने का मौका मै खोना नहीं चाहता था इसलिए उस रात मै जी भरकर अपनी बहिन के बूब्स देखता रहा मगर उसे छूने कि हिम्मत नहीं कर सका | लेकिन उसके गोरे-चिट्टे छोटे-छोटे बूब्स ने मेरे लंड का हाल बुरा कर दिया था इसलिए मै लेटे-लेटे ही बिना पजामा खोले ही मुठ मारने लगा और अपनी बहन के बूब्स को निहारने लगा |
बस उस दिन के बाद से ही मै अपनी बहन को ही उस नजर से देखने लगा था जिसे ये समाज तो सेक्स कहता है लेकिंन मै उससे प्यार कहूँगा | उस रात के बाद से मै जाग-जाग कर अपनी बहन के सो जाने का इन्तजार करने लगा | और साथ ही इन्तजार करता उसके सोते समय बूब्स के बहार निकल जाने का | कभी कभी तो मै पूरी पूरी रात जगता रह जाता मगर संगीता के बूब्स बहार ना निकलते और मै डर के कारण उसे छू नहीं सकता था | अब तो दिन रात मेरे ऊपर मेरी ही सगी बहन के प्यार का भूत स्वर हो चूका था | मै सेक्सी फिल्म देखता तो मुझे दीदी नजर आती और दीदी को देखता तो सेक्सी फिल्म कि हिरोइन नजर आती | ये सिलसिला लगभग एक साल तक चलता रहा और मै ऐसे ही दीदी के नाम कि मुठ मारने लगा मगर कुछ करने कि हिम्मत नहीं कर सका |बस रात रात भर जाग कर अपनी बहन के बूब्स बाहर आने का इन्तजार करता |
लेकिन दिन-ब-दिन मेरे अंदर दीदी को पाने कि चाहत बढती जा रही थी | अब मेरी नजर सिर्फ और सिर्फ दीदी के बूब्स पर ही रूकने लगी थी | मै जाने अनजाने में सबके सामने भी दीदी के बूब्स ही निहारता रहता था और इस बात के लिए एक-दो बार मेरे दोस्तों ने मजाक मजाक में टोक भी दिया था, मगर मैंने उन्हें नाराजगी जताते हुए इस बात के लिए डांट दिया था | लेकिन सच तो यही था कि अब मै दीदी के प्यार मे पागल हो चूका था और उसको पाने कि चाहत में अपनी सभी हदे पार करने लगा था |
इसलिए अब रात को जब दीदी के बूब्स बहार नहीं निकलते थे तो मे खुद अपने हाथ से उन्हें बहार निकालने लगा था | लेकिन बूब्स को बहार निकालते समय मै इस बात का विशेष ध्यान रखता था कि कही दीदी कि नींद न टूट जाये |
धीरे धीरे मेरी हिम्मत भी बढती जा रही थी और मै रोज ही दीदी के बूब्स निकल कर धीरे धीरे उन्हें सहलाने लगा , कभी कभी हलके से किस कर देता तो कभी कभी अपना लंड ही उसके हाथ में दे देता |
एक रात मेरा पागलपन कुछ ज्यादा ही बढ गया और मै रोज कि तरह दीदी के बूब्स से खेलने लगा| साथ ही साथ अपना लंड दीदी के हाथ में दे कर मुठ मरवा रहा था कि अचानक मै अपना कण्ट्रोल खो बैठा और उत्तेजना में बहुत जोर जोर से दीदी के बूब्स चूसने लगा | अपनी उत्तेजना में मै ये भूल गया कि मै अपनी ही बड़ी बहन को सोते समय प्यार कर रहा हूँ और अपना लंड उसके हाथ में दे कर जोर जोर से मुठ मरवाते हुए, बहुत जोर जोर से उसके बूब्स अपने हाथ से दबाते हुए मै उससे लिप्स टू लिप्स किस्स करने लगा (और ये सब बहुत जोर जोर से करने लगा था ) कि अचानक दीदी कि नींद खुल गयी | लेकिन जिस टाइम दीदी कि नींद खुली उस टाइम मेरे होठ उसके होठो को चूस रहे थे इसलिए वो चिल्ला तो न सकी मगर डर बहुत गयी | मेरे ऊपर उस समय जैसे शैतान सावार था | मै उस समाया अपनी चरम सीमा के समीप था | मैंने दीदी के जग जाने कि परवाह नहीं कि और पागलो कि तरह उससे किस्स करता रहा , जोर जोर से उसके बूब्स दबाता रहा और उसके हाथ में अपना लंड दे कर जोर जोर से मुठ मरवाता रहा |दीदी इतनी डर चुकी थी कि वो निष्क्रिय सी मेरे नीचे चुपचाप पड़ी रही | कभी कभी उसके चेहरे पर दर्द के भाव जरुर आ रहे थे मगर होठों पर मेरे होंठ होने के कारण वो कुछ बोल नहीं सकती थी | थोड़ी ही देर में (सिर्फ चंद ही मिनटों में )मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया और मेरा सारा वीर्य दीदी के हाथ में था | मगर जैसे ही मेरे लंड ने पानी छोड़ा और मेरा पागलपन खत्म हुआ - मेरे हाल ख़राब हो गया | मुझे होश आया तो विचार आया कि अब दीदी मम्मी-पापा को सब बता देगी और अब मेरी खैर नहीं | बस यही सोच कर मेरी हालत ख़राब हुए जा रही थी | लेकिन दीदी चुपचाप गुमसुम और सहमी से अपने बिस्तर पर पड़ी हुई थी |
यहाँ तक कि न तो दीदी ने अपना हाथ ही साफ किया था और न ही उसने अपने बूब्स अंदर करे थे , वो तो जैसे गुमसुम सी हो गयी थी और मै उससे कही जयादा डर रहा था कि अभी दीदी चीखेगी और मम्मी-पापा को सब बता देगी | मै एक दम से दीदी के हाथ-पैर जोड़ने लगा और उससे मानाने लगा कि वो मम्मी-पापा से कुछ न कहे | मै बार बार उससे माफ़ी मांग रहा था कि जो हुआ वो गलती से हो गया मगर दीदी कि कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी | वो बस चुप चाप सी उसी हालत में पड़ी हुई थी | अंत में मैंने ही उसके बूब्स को ढँक दिया और उसे सुलाने लगा | जब बहुत देर तक दीदी ने कोई शोर नहीं मचाया तो मेरे दिल को थोडा सा चैन मिला कि कम से कम आज रात तो वो मम्मी-पापा को कुछ कहने वाली नहीं है लेकिन सुबह कि सोच का मुझे चिंता हुए जा रही थी | थोड़ी देर के बाद दीदी के रोने कि आवाज आने लगी | तब मैंने बार बार उससे माफ़ी मांगी और उससे वादा लिया कि वो मम्मी को कुछ नहीं कहेगी |जब दीदी ने मुझे वादा किया कि वो किसी को कुछ नहीं कहेगी तब कही जा कर मेरी जान में जान आई |
यूं तो दीदी ने मुझे वादा किया था कि वो किसी से कुछ नहीं कहेगी मगर सच तो ये है कि फिर भी मेरी गांड फट रही थी | मगर अगला पूरा दिन शांति से गुजर गया ,हाँ इतना जरुर था कि पूरे दिन मैं दीदी का विशेष ख्याल रख रहा था |अगली रात मैंने पूरी शांति के साथ गुजारी और बिना मुठ मरे या बिना दीदी के बूब्स देखे ही मै सो गया | | दीदी ने अभी तक किसी से मेरी शिकायत नहीं करी थी इस लिए अब डर कुछ कम हो गया था |उस रात मेरे दिल में फिर से अपनी बहन के बूब्स देखने कि इच्छा होने लगी | एक बार फिर से मेरा दिल दीदी के बूब्स को देखने के लिएय बेचैन हो गया था और मै रोज कि तरह दीदी के सोने का इन्तजार करने लगा था |लेकिन मैंने सोच रखा था कि इस बार मैं कोई गलती नहीं करूँगा |
रात के लगभग एक बजे जब मुझे लगा कि अब दीदी सो चुकी है तो मैंने फिर से उसके बूब्स को बाहर निकालें कि कोशिश करी | मगर जैसे ही मैंने दीदी के बूब्स को हाथ लगाया दीदी जाग गयी और बोली क्या कर रहे हो? एक बार फिर से मुझे दीदी ने रंगे हाथ पकड़ लिया था | मै एक दम से सक-पका गया और कोई उत्तर देते न बना | मै कुछ न बोल सका और अपना हाथ दीदी के बूब्स पर से हटाने लगा |तभी दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और वापिस अपने बूब्स पर रख दिया | इस बार दीदी बहुत शांत दिख रही थी | मुझे कुछ समझ में ना आ रहा था कि अब क्या होने वाला है ? कमरे में पूरा सन्नाटा छा चूका था कि तभी दीदी ने सन्नाटा तोड़ते हुए बहुत प्यार से कहा -
"मुझे पता है तू क्या करने वाले था ? तू मेरे बूब्स के साथ हमेशा कि तरह खेलना चाहते हो न ?"
उसकी ये बात सुन कर मै सन्न रह गया | मुझसे कोई बोल न बन पड़ा और मै हैरानी से दीदी को देखने लगा| दीदी फिर बोली- तुझको क्या लगता है तू जो रोज रात को मेरे बूब्स के साथ खेलते हो या मेरे हाथ में अपना वो (दीदी ने लंड न खेते हुए "वो" कहा था ) दे कर जो करते हो, मुझे उसका पता नहीं है?
भाई लड़की चाहे कोई भी हो इतनी गहरी नींद कभी नहीं सोती है कि कोई उसके बूब्स दबाये और उससे पता नहीं चल सके |मै हैरानी से दीदी कि बाते सुन रहा था और शर्म से पानी पानी हो रहा था | लेकिन जब दीदी ने ये सब बाते कही तो मै पूछ ही बैठा कि जब उसे ये सब पता था तो उसने आज तक मेरा विरोध क्यों नहीं किया? मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराई और बोली भाई जैसे तुझको ये सब अच्छा लगता है मुझे भी तो अच्छा लगता था | वरना तुम ही सोचो जिस नजर से तू मेरे बूब्स देखते थे , क्या मुझे नहीं पता था कि तेरी निगाह कहा पड रही है ? ये सब कहते कहते दीदी मुस्कुरा रही थी और मेरे हाथ से धीरे धीरे अपने बूब्स को दबा भी रही थी |
दीदी कि बाते सुन कर मेरे होश उड़ रहे थे मगर साथ ही साथ उत्तेजना से मेरा लंड भी खड़ा होता जा रहा था | लेकिन तभी मेरे दिमाग में परसों रात वाली बात याद आ गयी जब मेरी अत्यधिक उत्तेजना के कारण दीदी कि नींद खुल गयी थी| मेरे पूछने पर दीदी ने बताया कि सच तो ये है इस उस रात वो भी डर गयी थी क्योकि अभी तक मै उसके साथ सभ्यता से पेश आता रहा था और उस रात मै अचानक पागलो के जैसे उससे प्यार कर रहा था | दीदी ने बताया कि उसे डर इस बात से लग रहा था कि कही मै उसका रेप न कर दूँ |
बाद में दीदी ने कहा कि भाई हम दोनों भाई बहन है इसलिए हम दोनों के बीच में पति पत्नी वाला सम्बन्ध तो कभी बन नहीं सकता , मगर हाँ हम दोनों एक दुसरे कि जरूरते तो पूरी कर ही सकते है |
सच कहता हूँ दोस्तों शायद आप इस बात का विश्वास करे या नहीं मगर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था | न ही मै खुद इस बात पर विश्वास कर पा रहा था कि मेरी बहन (जो मेरी सगी बहन है ) मेरी शारीरिक जरूरते पूरी करने कि बात कर रही थी | मेरा लंड ये सोच सोच कर मचल रहा था कि अब उसे दीदी अपने हाथ से सहलाया करेगी और मै ये सोच सोच कर पागल हुए जा रहा था कि पिछलेदिनों जिन बूब्स के लिए मै पागल था और छुप छुप का उन्हें देखता था , अब उन्ही बूब्स को मै बेझिझक हो कर मै छू सकूँगा, दबा सकूँगा और चूस सकूँगा |और जब जब मेरे दिमाग में ये बात आती कि ये सब मै किसी और लड़की के साथ नहीं बल्कि अपनी सगी बहन के साथ चुदाई करूँगा...................मेरी उत्तेजन और भी बढ जाती |और अपनी इसी उत्तेजना मे मै एक बार फिर से पागलो कि तरह अपनी बहन पर टूट पड़ा | अब मै परसों से भी जयादा जोर से अपनी बहन के बूब्स दबाने लगा, परसों से भी जयादा जोर से उसके होंठ पीने लगा और बिना किसी डर या शर्म के उसका हाथ पकड़ कर पजामे के ऊपर ही अपने लंड पर रगड़ने लगा | हम दोनो के बदन में आग लगी हुई थी, और हम बेचैन थे कि, कब हम एक-दुसरे की बांहो में खो जाये।वासना की आग ने, हमारी सोचने-समझने की शक्ति शायद खतम कर दी थी। मैने जोर से अपनी प्यारी बहन को अपनी बांहो में कस लिया, और उसके पुरे चेहरे पर चुंबनो की बरसात कर दी। उसने भी मुझे अपनी बांहो में कस कर जकड लिया था, और उसकी कठोर चुचियां मेरी छाती में दब रही थी। उसकी चुचियों के खडे निप्पल की चुभन को, मैं अपने छाती पर महसूस कर रहा था। उसकी कमर और जांघे मेरी जांघो से सटी हुई थी, और मेरा खडा लंड मेरे पेन्ट के अंदर से ही उसकी स्कर्ट पर, ठीक उसकी बुर के उपर ठोकर मार रहा था। मेरी प्यारी दीदी अपनी चूत को मेरे खडे लंड पर, पेन्ट के उपर से रगड रही थी। हम दोनो के होंठ एक-दुसरे से जुडे हुए थे और मैं अपनी प्यारी बहन के पतले, रसीले होंठो को चुसते हुए, चुम रहा था। उसके होंठो को चुसते और काटते हुए, मैने अपनी जीभ को उसके मुंह में ठेल दिया था। उसके मुंह के अंदर जीभ को चारो तरफ घुमते हुए, उसकी जीभ से अपनी जीभ को लडाते हुए, दोनो भाई-बहन एक-दुसरे के बदन से खेल रहे थे। उसके हाथ मेरी पीठ पर से फिरते हुए, मेरे चुतडों और कमर को दबाते हुए, अपनी तरफ खींच रहे थे। मैं भी उसके चुतडों को दबाते हुए, उसकी गांड की दरार में स्कर्ट के उपर से ही अपनी उन्गली चला रहा था। कुछ देर तक इसी अवस्था में रहने के बाद मैने उसे छोड दिया, और वो बेड पर चली गई।

उसने अपने घुटनो को बेड के किनारे पर जमा दिया। फिर वो इस तरह से झुक गई, जैसे कि वो बेड की दुसरी तरफ कोई चीज खोज रही हो। अपने घुटनो को बेड पर जमने के बाद, मेरी प्यारी बेहना ने गरदन घुमा कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए अपने स्कर्ट को उपर उठा दिया। इस प्रकार उसके खूबसुरत गोलाकार चुतड, जो कि नायलोन की एक जालीदार कसी हुई पेन्टी के अंदर कैद थे, दिखने लगे। उसकी चूत के उभार के उपर, उसकी पेन्टी एक दम कसी हुई थी और मैं देखा रहा था कि, चूत के उपर पेन्टी का जो भाग था, वो पुरी तरह से भीगा हुआ था। मैं दौड के उसके पास पहुंच गया और अपने चेहरे को, उसकी पेन्टी से ढकी हुई चूत और गांड के बिच में घुसा दिया। उसके बदन की खुश्बू, और उसकी चूत के पानी व पसिने की महक ने मेरा दिमाग घुमा दिया, और मैने बुर के रस से भीगी हुई उसकी पेन्टी को चाट लिया। वो आनंद से सिसकारीयां ले रही थी, और उसने मुझसे अपनी पेन्टी को निकाल देने का आग्रह किया।
मैने उसकी चूत और गांड को कस कर चुमा, उसके मांसल चुतडों को अपने दांतो से काटा और उसके बुर से निकलने वाली मादक गंध को एक लम्बी सांस लेकर अपने फेफडों में भर लिया। मेरा लंड पुरी तरह से खडा हो चुका था, और मैने अपने पेन्ट और अंडरवियर को खोल कर इसे आजादी दे दी। दीदी की मांसल, कंदील जांघो को अपने हाथो से कस कर पकडते हुए, मैं उसकी पेन्टी के उपर से ही उसकी चूत चाटने लगा। जालीदार पेन्टी से रीस-रीस कर बुर का पानी निकल रहा था। मैं पेन्टी के साथ ही उसकी बुर को अपने मुंह में भरते हुए, चुसते हुए, चाट रहा था। पेन्टी का बिच वाला भाग सीमट कर उसकी चूत और गांड की दरार में फस गया था, और मैं चूत चाटते हुए, उसकी गांड पर भी अपना मुंह मार रहा था। मेरे ऐसा करने से बहन की उत्तेजना बढ गई थी। वो अपनी गांड को नचाते हुए, अपनी चूत और चुतडों को मेरे चेहरे पर रगड रही थी। फिर मैने धीरे से अपनी बहन की पेन्टी को उतार दिया। उसके खूबसुरत चुतडों को देख कर मेरे लंड को जोरदार झटका लगा। उसके मैदे जैसे, गोरे चुतडों की बिच की खाई में भुरे रंग की अनछुई गांड, एकदम किसी फूल की कली की तरह दिख रही थी। जिसे शायद किसी विशेष अवसर पर (जैसाकि दीदी ने प्रोमिस किया था), मारने का मौका मुझे मिलने वाला था। उसकी गांड के निचे गुलाबी पंखुडियों वाली उसकी चिकनी चूत थी। दीदी की चूत के होंठ फडफडा रहे थे और भीगे हुए थे। मैने अपने हाथो को धीरे से उसके चुतडों और गांड की दरार में फिराया, फिर धीरे से हाथो को सरका कर उसकी बिना झांठो वाली चूत के छेद को अपनी उन्गलियों से कुरेदते हुए, सहलाने लगा। मेरी उन्गलियों पर उसकी चूत से निकला, उसका रस लग गया था। मैने उसे अपनी नाक के पास ले जा कर सुंघा, और फिर जीभ निकल कर चाट लिया। मेरी प्यारी बहन के मुंह लगातार सिसकारीयां निकल रही थी, और उसने मुझसे कहा,
“भाई, जैसाकि मैं समझती, अब तुमने जी भर कर मेरे चुतडों और चूत को देखा लिया है। इसलिये तुम्हे अपना काम शुरु करने में देर नही करनी चाहिए।”

मैं भी अब ज्यादा देर नही करना चाहता था, और झुक कर मैने उसकी चूत के होंठो पर अपने होंठो को जमा दिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। उसकी बुर का रस नमकीन-सा था। मैने उसकी बुर के कांपते हुए होंठो को, अपनी उन्गलियों से खोल दिया, और अपनी जीभ को कडा और नुकिला बना कर, चूत के छेद में घुसा कर उसके भगनशे को खोजने लगा।उसके छोटे-से भगनशे को खोजने में मुझे ज्यादा वक्त नही लगा। मैने उसे अपने होंठो के बिच दबा लिया, और अपनी जीभ से उसको छेडने लगा। दीदी ने आनंद और मजे से सिसकारीयां भरते हुए, अपनी गांड को नचाते हुए, एक बहुत जोर का धक्का अपनी चूत से मेरे मुंह की ओर मारा। ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी जीभ को वो अपनी चूत में निगल लेना चाहती हो। वो बहुत तेज सिसकारीयां ले रही थी, और शायद उत्तेजना की पराकाष्ठा तक पहुंच चुकी थी। मैं उसके भगनशे को अपने होंठो के बिच दबा कर चुसते हुए, अपनी जीभ को अब उसके पेशाब करने वाले छेद में भी घुमा रहा था। उसके पेशाब की तीव्र गंध ने मुझे पागल बना दिया था। मैने अपनी दो उन्गलियों की सहायता से, उसके पेशाब करने वाले छेद को थोडा फैला दिया। फिर अपनी जीभ को उसमे तेजी से नचाने लगा। मुजे ऐसा करने में मजा आ रहा था, और दीदी भी अपनी गांड को नचाते हुए सिसकारीयां ले रही थी।

“ओह भाई, तुम बहुत अच्छा कर रहे हो। डार्लिंग ब्रधर, इसी प्रकार से अपनी बहन की गरमाई हुई बुर को चाटो, हां,,, हां भाई,,,, मेरे पेशाब करने वाले छेद को भी चाटो और चुसो। मुझे बहुत मजा आ रहा है, और मुझे लगता है, शायद मेरा पेशाब निकल जायेगा। ओह भाई, तुम इस बात का ख्याल रखना कि, कहीं तुम मेरे मुत ही नही पी जाओ।”

मैने दीदी की चूत पर से, अपने मुंह को एक पल के लिये हटाते हुए कहा,
“ओह सिस्टर, तुम्हारे पेशाब और चूत की खूश्बु ने मुझे पागल बना दिया है। ऐसा लगता है कि, मैने तुम्हारी मुत की एक-दो बुंद पी भी ली है, और मैं अपने आप को इसका और ज्यादा स्वाद लेने से नही रोक पा रहा हुं। हाये दीदी, सच में तुम्हारे बदन से निकलने वाली हर चीज बहुत ही स्वादिष्ट है,,,,, ओह,,,,।”“ओह भाई ! लगता है, तुम कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो चुके हो, और मुझे ये बहुत पसंद है। तुम्हारा इस तरह से मुझे प्यार करना, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, प्यारे भाई। पर अगर तुम इसी तरह से मेरी चूत और पेशाब वाले छेद को चुसोगे, तो मुझे लगता है कि मेरा पेशाब निकल जायेगा। और मैं नही चाहती कि, हमारे कपडे और बिस्तर खराब हो,,,,,,,, ओह राजा, मेरे प्यारे सनम,,,,,,,तुम इस बात का ख्याल रखते हुए मुझे प्यार करो।”

मैं अभी तक पेशाब वाले छेद को चिडोर-चिडोर कर चाट रहा था। मगर दीदी के बोलने पर मैने उसको छोड कर, अपना ध्यान उसकी चूत और भगनशे पर लगा दिया। उसके भगनशे को अपने होंठो से छेडते हुए, उसकी पनियाई हुई बुर के कसे हुए छेद में, अपनी जीभ को नुकिला करके पेलने लगा। अपने हाथो से उसके चुतडों और गांड के छेद को सहलाते हुए, मैं उसकी गांड के छेद को अपने अंगुठे से छेडने लगा। मैं अपनी जीभ को कडा कर के उसकी चूत में तेजी के साथ पेल रहा था, और जीभ को बुर के अंदर पुरा ले जाकर उसे घुमा रहा था। दीदी भी अपने चुतडों को तेजी के साथ नचाते हुए, अपनी गांड को मेरी जीभ पर धकेल रही थी, और मैं उसकी बुर को चोद रहा था।

हालांकि, इस समय मेरा दिल अपनी प्यारी बहन की गांड के भुरे रंग के छेद को चाटने का कर रहा था। परंतु मैने देखा कि, दीदी अब उत्तेजना की सीमा को पार कर चुकी थी, शायद। वो अब अपने चुतडों नचाते हुए बहुत तेज सिसकारीयां ले रही थी।

“,,,,,भाई, तुम मुझे पागल बना रहे हो,,,,,,ओह,,,,डार्लिंग ब्रधर हां ऐसे,,,,, ही,,,,, ऐसे ही, चुसो मेरी चूत को,,,,,,,मेरी बुर के होंठो को अपने मुंह में भर कर,,,, ऐसे ही चाटो राजा,,,,,,ओह, प्यारे,,,,, बहुत अच्छा कर रहे हो तुम। इसी प्रकार से मेरी चूत के छेद में अपनी जीभ को पेलो, और अपने मुंह से चोद दो, मुझे। हाय, मेरे चोदु भाई,,,,, मेरी चूत के होंठो को काट लो और उन्हे काटते हुए अपनी जीभ को मेरी बुर में पेलो।”
चूत के रस को चाटते हुए और बुर में जीभ पेलते हुए, मैं उसके भगनशे को भी छेड देता था। मेरे ऐसा करने पर वो अपनी गांड को और ज्यादा तेजी के साथ लहराने लगती थी। दीदी अब पुरी उत्तेजना में आ चुकी थी। मैने अपने पंजो के बिच में उसके दोनो छुतडों को दबाया हुआ था, ताकि मुझे उसकी प्यारी चूत को अपने जीभ से चोदने में परेशानी ना हो। मैं अपनी नुकिली जीभ को उसकी चूत के अंदर गहराई तक पेल कर, घुमा रहा था।

“ओह भाआआईईईई,,,,,, ऐसे ही प्यारे, मेरे डार्लिंग ब्रधर,,,,, ऐसे ही। ओह,,,, खा जाओ मेरी चूत को, चुस लो इसका सारा रस,,,, प्यारे!!!! ओह,,, चोदु,,,, मेरे भगनशे को ऐसे ही छेडो और कस कर अपनी जीभ को पेलो,,,,,,,, ओओओओह्ह्ह्ह,,, सीईईईईईई मेरे चुदक्कड बालम,,,, मेरा अब निकलने ही वाला,,,, ओह…मैं गई,,,,,,, गईईईईई,,,,,,,, गई राआज्जाआआ,,,,, ओह बुरचोदु,,,,,,,,देखो मेरा निकल रहा है,,,,,,,,, हायेएएए,,, पी जाओ,,,,,, इसे!!!!! ओह,,,, पी,,,,, जाओ मेरी चूत से निकले पानी को,,,,,,,ईईईईईशीशीशीश्श्शीईई,,,, भाई, मेरी चूत से निकले स्वादिष्ट पानी को पीईईई जाआआओओओ प्याआआरेएएएए,,,,,”,
कहते हुए दीदी अपनी चूत झाडने लगी।

उसकी मखमली चूत से गाढा द्रव्य निकलने लगा। वो मेरे चेहरे को अपनी चूत और चुतडों के बिच दबाये हुए, बिस्तर पर अपनी गांड को नचाते हुए गीर गई। उसकी चूत अभी भी फडफडा रही थी, और उसकी गांड में भी कंपन हो रहा था। मैने उसकी चूत से निकले हुए रस की एक-एक बुंद को चाट लिया, और अपने सिर को उसकी मांसल जांघो के बिच से निकाल लिया।

मेरी बहन बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी। कमर के निचे वो पुरी नंगी थी। झड जाने के कारण उसकी आंखे बंध थी, और उसके गुलाबी होंठ हल्के-से खुले हुए थे। वो बहुत गहरी सांसे ले रही थी। उसने अपने एक पैर को घुटनो के पास से मोडा हुआ था और दुसरे पैर को फैलाया हुआ था। उसके लेटने की ये स्थिति बहुत ही कामुक थी। इस स्थिति में उसकी सुनहरी, गुलाबी चूत, गांड का भुरे रंग का छेद और उसके गुदाज चुतड मेरी आंखो के सामने खुले पडे थे और मुझे अपनी ओर खींच रहे थे। मेरा खडा लौडा, अब दर्द करने लगा था। मेरे लंड का सुपडा, एक लाल टमाटर के जैसा दिख रहा था। मेरे लंड को किसी छेद की सख्त जुरुरत महसूस हो रही थी। मैं गहरी सांसे खींचता हुआ, अपनी उत्तेजना पर काबु पाने की कोशिश कर रहा था। मेरे हाथ मेरी दीदी के नंगे चुतडों के साथ खेलने के लिये बेताब हो रहे थे। मैं अपने अंडकोषो को सहलाते हुए, सुपाडे के छेद पर जमा हुई पानी की बुंदो को देखते हुए, अपनी प्यारी नंगी बहन के बगल में बेड पर बैठ गया। मेरे बेड पर बैठते ही दीदी ने अपनी आंखे खोल दी। ऐसा लग रहा था, जैसे वो एक बहुत ही गहरी निंद से जागी हो। जब उसने मुझे और मेरे खडे लंड को देखा तो, जैसे उसे सब कुछ याद आ गया और उसने अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए, मेरे खडे लंड को अपने हाथो में भर लिया और बोली,
“ओह प्यारे, सच में तुमने मुझे बहुत सुख दिया है। ओह भाई, तुमने जो किया है, वो सच में बहुत खुशनुमा था। मैं बहुत दिनो के बाद इस प्रकार से झडी हुं।,,,,, ओह प्यारे, तुम्हारा लंड तो एकदम खडा है।,,,,,,ओह,,, मुझे ध्यान ही नही रहा कि, मेरे प्यारे भाई का डण्डा खडा होगा और उसे भी एक छेद की जुरूरत होगी। ओह डार्लिंग आओ,,,,,,,, जल्दी आओ, तुम्हारे लंड में खुजली हो रही होगी। मैं भी तैयार हुं,,,,, तुम्हारा खडा लंड देख कर मुझे भी उत्तेजना हो रही है, और मेरी बुर भी अब खुजलाने लगी है।”

“ऐसा नही है दीदी, अगर इस समय तुम्हारी ईच्छा नही है तो कोई बात नही है। मैं अपने लंड को हाथ से झाड लुन्गा।”

“नही भाई, तुम अपनी बहन के होते हुए ऐसा कभी नही कर सकते, अगर कुछ करना होगा तो मैं करुन्गी। भाई, मैं इतनी स्वार्थी नही हुं कि, अपने प्यारे सगे भाई को ऐसे तडपता हुआ छोड दुं। आओ भाई, चढ जाओ अपनी बहन पर और जल्दी से चोदो,,,,,,,,,, चलो, जल्दी से चुदाई का खेल शुरु करें।”

मैने उसके होंठो पर एक जोरदार चुंबन जड दिया। और उसके मांसल, मलाईदार चुतडों को अपने हाथो से मसलते हुए, उससे कहा,
“दीदी, तुम फिर से घुटनो के बल हो जाओ, मैं तुम्हे पिछे से चोदना चाहता हुं।”मेरी बात सुन कर मेरी प्यारी सिस्टरने बिना एक पल गंवाये, फिर से वही पोजीसन बना ली। उसने घुटनो के बल होकर, अपनी गरदन को पिछे घुमा कर मुस्कुराते हुए, मुझे अपनी बडी-बडी आंखो को नचाते हुए आमंत्रण दिया। उसने अपने पैरों को फैला कर, अपने खजाने को मेरे लिये पुरा खोल दिया। मैने फिर से अपने चेहरे को उसकी जांघो के बिच घुसा दिया, और उसकी चूत को चाटने लगा। चूत चाटते हुए अपनी जीभ को उपर की तरफ ले गया, और उसकी खूबसुरत और मांसल गांड की दरार में अपनी जीभ को घुसा दिया और जीभ निकाल कर उसकी गांड को चाटने लगा। मैने अपने दोनो हाथो से उसके चुतडों फैला कर, उसकी गांड के छेद को चौडा कर दिया। फिर अपनी जीभ को कडा करके, उसकी गांड में धकेलने की कोशिश करने लगा। उसकी गांड बहुत टाईट थी और इसे मैं अपनी जीभ से नही चोद पाया। मगर मैं उसकी गांड को तब तक चाटता रहा, जब तक कि, दीदी चिल्लाने नही लगी और सिसयाते हुए मुझे बोलने लगी,
“ओह ब्रधर, अब देर मत करो। मैं अब गरम हो गई हुं। अब जल्दी से अपनी प्यारी बहन को चोद दो, और अपनी प्यास बुझा लो। मैं समझती हुं, अब हमारा ज्यादा देर करना उचित नही होगा। ओह भाई, जल्दी करो और अपने लंड को मेरी चूत में पेल दो।”

मैने अपने खडे लंड को उसकी गीली चूत के छेद पर लगा दिया। फिर एक जोरदार धक्के के साथ अपना पुर लंड उसकी बुर में, एक ही बार में पेल दिया। ओह, क्या अदभुत अहसास था, यह ! इसका वर्णन शब्दो में करना संभव नही है। उसकी रस से भरी, पनियाई हुई चूत ने, मेरे लौडे को अपनी गरम आगोश में ले लिया। उसकी मखमली चूत ने मेरे लंड को पुरी तरह से कस लिया। मैं धक्के लगाने लगा। मेरी प्यारी बहन ने भी अपनी गांड को पिछे की तरफ धकेलते हुए, मेरे लंड को अपनी चूत में लेना शुरु कर दिया। हम दोनो भाई-बहन, अब पुरी तरह से मदहोश होकर मजे की दुनिया में उतर चुके थे। मैं आगे झुक कर, उसकी कांख की तरफ से अपने हाथ को बाहर निकाल कर उसकी गुदाज चुचियों को, उसके ब्लाउस के उपर से ही दबाने लगा। उसकी चुचियां एकदम कठोर हो गई थी। उसकी ठोस चुचियों को दबाते हुए मैं अब तेजी से धक्के लगाने लगा था, और मेरी दीदी के मुंह से सिसकारीयां फुटने लगी थी। वो सिसकाते हुए बोल रही थी,
“ओह भाई, ऐसे ही, ऐसे ही चोदो, हां,,,, हां, इसी तरह से जोर-जोर से धक्का लगाओ, भाई। इसी प्रकार से चोदो, मुझे।”“आह, शीईईईई, दीदी तुम्हारी चूत कितनी टाईट और गरम है। ओह,,, मेरी प्यारी बहना,,,, लो अपनी चूत में मेरे लंड को,,,, ऐसे ही लो। देखो,,, ये लो मेरा लंड अपनी चूत में,,,,,, ये लो,,,,,,,, फिर से लो,,,,,,, क्या, एक और दुं ?? ले लो,,,, मेरी रानी बहन,,,,, हाये दीदी।”
मैं उसकी चूत की चुदाई, अब पुरी ताकत और तेजी के साथ कर रहा था। हम दोनो की उत्तेजना बढती जा रही थी। ऐसा लग रहा था कि, किसी भी पल मेरे लौडे से गरम लावा निकल पडेगा।

“ओह चोदु,,,,, चोदो,,,,,, और जोर से चोदो। ओह, कस कर मारो,,,,,, और जोर लगा कर धक्का मारो। ओह,,,, मेरा निकल जाआयेएएगाआ,,,,, उईईईईई!!!!!! कुत्तेएएए, और जोर से चोद, मुझे। बडी बहन की बुर चोदने वाले,,,, चोदु हरामी,,,, और जोर से मारो, अपना पुरा लंड मेरी चूत में घुसा कर चोद,,,,, कुतिया के बच्चे,,,,,,,,श्श्शीशीशीईईईईईई,,,,, मेरा निकल जायेगाआआ,,,,,,”

मैं अब और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मैं अपने लंड को पुरा बाहर निकल कर, फिर से उसकी गीली चूत में पेल देता। दीदी की चुचियों को दबाते हुए, उसके चुतडों पर हाथ फेरते और मसलते हुए, मैं बहुत तेजी के साथ दीदी को चोद रहा था। मेरी बहन, अब किसी कुतिया की तरह कुकिया रही थी। और वो अपने चुतडों को नचा-नचा कर, आगे-पिछे धकेलते हुए, मेरे लंड को अपनी चूत में लेते हुए, सिसिया रही थी,
“ओह चोदो, मेरे चोदु भाई, और जोर से चोदो। ओह,,,,,, मेरे चुदक्कड बलमा, श्श्शीशीशीशीईईईई,,,,,,, हरामजादे,,,,,,, और जोर से मारो मेरी चूत को,,,, ओह,,,, ओह,,,,,ईईईस्स्स,,,,आआह्ह,,,, बहनचोद,,,,, मेरा अब निकल रहा हैएएएए,,,, ओओओओह्ह्ह,,, ,,, श्श्शीशीशीशीईईईई,,,,,!!!!!”,
कहते हुए, अपने दांतो को पीसते हुए, और चुतडों को उचकाते हुए, वो झडने लगी।
मैने भी झडने ही वाला था। इसलिये चिल्ला कर उसको बोला,
“ओह कुतिया,,,,, लंडखोर,,,, साआल्ली,,, मेरे लिये रुको। मेरा भी अब निकलने वाला,,,,,,,, ओह,, रानी,,,, मेरे लंड का पानी भी,,,,, अपनी बुर में लोओओओ,,, ओह,,, लो,,, लो,,,, ओह ऊउफ्फ्फ,,,,,,,”
ठीक उसी समय मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं किसी के जोर से बोलने और चिल्लाने की आवाज सुन रहा हुं। जब मैने दरवाजे की तरफ मुड कर देखा तो, ओह,,, ये मैं क्या देखा रहा हुं !!!!!! मेरे अंदर की सांस, अंदर ही रह गई। सामने दरवाजे पर मेरी मम्मी खडी थी। उसका चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था। वो क्रोध में अपने होंठो को काट रही थी, और अपने कुल्हे पर अपने हाथ रख कर चिल्ला रही थी। उसका चिल्लाना तो, एक पल के लिये हम दोनो भाई-बहन को कुछ समझ में नही आया। थोडी देर बाद माँ को सामने देख मेरी तो फटी की फटी रह गयी ,में तुरंत दीदी के उप्पर से उठा,दीदी भी बिजली की गति से उठी और अपने कपडे लेके भाग गयी,सब इतनी जल्दी में हुआ की माँ की समझ में कुछ नही आया की हुआ क्या। में माँ के सामने सर झुक कर खड़ा हो गया,माँ ने मुझे डांटते हुए कहा की ये सब क्या हो रहा था,तुम दोनों भाई बहन को शर्म नही आई ये सब करते हुए।
माँ बहुत देर तक अनाप शनाप बकती रही और में सुनता रहा और सोचता रहा की दीदी इन सब बातो का क्या जवाब देगी। में माँ के सामने से निकला और चुपचाप घर से निकल गया,बहुत देर बाद मेने दीदी के सेल पर फोन मिलाया तो दीदी ने काट दिया ,बहुत देर बाद दीदी ने फोन उठाया तो मेने कहा की मरे आने के बाद क्या हुआ ,माँ ने क्या कहा ,दीदी ने कहा की में पहले तो सुनती रही फिर मेने माँ से कह दिया की में क्या करती,भाई ने मुझे जबरन पकड़ लिया और ये सब कर दिया मेने तो बहुत मना किया पर वो माना ही नही,मेने कहा की फिर माँ ने कुछ कहा की,दीदी बोली माँ ने मुझसे तो ये ही कहा की में तेरे पापा को ये बात नही बता सकती इसलिए तू और तेरा भाई इसका जिक्र किसी को मत करना और तुम दोनों आज से अलग अलग रूम में सोना।
मेरी समझ में ये नही आया की माँ ने पापा को ये बात बताने से क्यू मना किया,फिर सोचा माँ ने सोचा होगा की पापा को दुःख न ही इसलिए माँ पापा से ये बात छिपाना चाहती हे,में फिर से आज दिन के बारे में और दीदी की चुदाई के बारे में सोचने लगा की आज तो क्या ही मजा आया,अपनी बहन को चोदने में जो सुख मिला वो बेमिसाल था,में देर रात भटकने के बद अपने रूम में लोटा और चुपचाप सो गया,सुबह मेरी नींद खुली तो पापा ऑफिस जा चुके थे और दीदी कॉलेज।
में उठा तो मुझे माँ कही नही दिखा दी ,मेने देखा तो मुझे बाथरूम में से उनके नहाने की आवाज आई,कहते हे न चोर चोरी से जाये पर हेरा फेरी से न जाये ,न जाने क्यू मेरे दिमाग में आया की अज तो माँ को नहाते हुए देखा जाये,में बाथरूम के दरवाजे के बाहर खड़ा हो गया और उसमे कोई झिर्री तलाश करने लगा जिसमे से में अपनी प्यारी माँ को नहाते देख सकू।
तभी कहते है ना - जहां चाह , वहां राह | मुझे लकड़ी के दरवाजे के दो पाटो के बीच हल्का सा गैप मिला , वही से मै आँख सटाकर अन्दर देखने लगा ...आ..ह ...क्या नजारा था ....माँ के बड़े बड़े भाड़ी भड़कम चुतर पानी डालने के क्रम में ऊपर नीचे हो रहे थे | माँ के गोल गोल गांड को देखकर मेरे लंड ने सलामी दी।

परन्तु काफी कोशिश के बाद भी मै उनका चूत देखने में कामयाब नहीं हो सका ...बस चूत के उभार का हल्का झलक सा मिला | मैंने अपना लंड निकालकर उसे मुठीयाने लगा। .फिर आँख दरार से सटाकर माँ के नग्न बदन को देखते हुए अपने लंड को उमेठने लगा |थोड़ी देर बाद माँ जब झुकी तब पीछे से माँ के चूत के दरारों के दर्शन हुए .. मै धन्य हो गया ..माँ अपने बदन पर साबुन मल रही थी और अपनी चूत कस कसकर रगड़ रही थी ...मै थोड़ी देर देखता रहा फिर ध्यान आया मुझे देर हो रहा है और अगर चूत के चक्कर में थोड़ी देर और रहा तो या तो पिटूंगा या जेल जाउंगा |.
मॉम को नहाते देखने के बाद तो मेरा हाल और भी बुरा हो गया था,मुझे तो अब एक ही धुन सवार हो गयी थी की किसी भी तरह मॉम को चोदना हे,पर कैसे ये मेरी समझ नही आ रहा था। अब मेने एक काम शुरू किया की में जब भी मॉम के पास जाता तो अपने लोडे को खड़ा कर के मेरे लंड का उभर साफ दिख जाये। ये ही नही में ये भी कोशिश करने लगा की कमरे का दरवाजा तो बंद न करू और नंगा होकर मूठ मरू ताकि मॉम जब भी रूम में घुसे तो उन्हें मेरा लौड़ा दिख जाये।
एक दिन में अपनी कोशिश में कामयाब हो गया ,में अपने रूम में मूठ मर ही रहा था की मॉम रूम में आ गयी ,में उन्हें देख कर सक पकाया नही बल्कि मेने अपना टॉवल बड़े आराम से लोडे पर डाला और खड़ा हो गया पर में अपना लौड़ा मॉम को दिखने में कामयाब हो गया था,मॉम ने जोर से मुझे चिल्ला कर कहा,ये तुम क्या कर रहे थे ,तुम्हे शर्म नही आ रही थी की तुम्हारी मॉम या बहन तुम्हारे रूम में आ सकती हे ,और ये करने से तुम्हारी ज़िंदगी ख़राब हो जाएगी।
मुझे सब पता हे लेकिन कर सकता हु? मेने मेने कहा। मॉम फिर जोर से बोली ,क्या मतलब ? मेने कहा ,मॉम में आपको नंगा देखना चाहता हु ,क्या ,मॉम जोर चिल्लाई तेरा दिमाग तो ख़राब नही हो गया , तू अपनी मॉम से ऐसे कैसे कह सकता हे ? मेने कहा आप सोच लीजिये अगर आप नही मानती तो में ऐसे ही मूठ मारूंगा,मॉम अब और ठंडी पड़ी,
मगर तभी मॉम बोली "ठीक है मतलब तुझे चुत देखनी है....अभी बाथरूम से आती हूँ तो तुझे अपनी बुर दिखाती हूँ" कहती हुई बेड से निचे उतर ब्लाउज के बटन बंद करने लगी. मेरी कुछ समझ में नहीं आया की मॉम अपना ब्लाउज क्यों बंद कर रही है मैं मॉम के चेहरे की तरफ देखने लगा तो मॉम आँख नचाते हुए बोली "चुत ही तो देखनी है...वो तो मैं पेटिकोट उठा कर दिखा दूंगी..." फिर तेजी से बाहर निकल बाथरूम चली गई. मैं सोच में पड़ गया मैं मॉम को पूरा नंगा देखना चाहता था. मैं उनकी चूची और चुत दोनों देखना चाहता था और साथ में उनको चोदना भी चाहता था, पर वो तो बाद की बात थी पहले यहाँ मॉम के नंगे बदन को देखने का जुगार लगाना बहुत जरुरी था. मैंने सोचा की मुझे कुछ हिम्मत से काम लेना होगा. मॉम जब वापस रूम में आकर अपने पेटिकोट को घुटनों के ऊपर तक चढा कर बिस्तर पर बैठने लगी तो मैं बोला " मॉम...मैं….चू…चू…चूची भी देखना...चाहता हूँ". मॉम इस पर चौंकने का नाटक करती बोली "क्या मतलब...चूची भी देखनी है….चुत भी देखनी है....मतलब तू तो मुझे पूरा नंगा देखना चाहता है....हाय....बड़ा बेशर्म है....अपनी मॉम को नंगा देखना चाहता है....क्यों मैं ठीक समझी ना...तू अपनी मॉम को नंगा देखना चाहता है...बोल, ...ठीक है ना...." मैं भी शरमाते हुए हिम्मत दिखाते बोला "हां मॉम....मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो....मैं....मैं आप को पूरा...नंगा देखना....चाहता..."

"बड़ा अच्छा हिसाब है तेरा....अच्छी लगती हो.....अच्छी लगने का मतलब तुझे नंगी हो कर दिखाऊ...कपड़ो में अच्छी नहीं लगती हूँ क्या...."

"हाय मॉम मेरा वो मतलब नहीं था....वो तो आपने कहा था....फिर मैंने सोचा....सोचा...."

"...तुने जो भी सोचा सही सोचा....मैं अपने बेटे को दुखी नहीं देख सकती....मुझे ख़ुशी है की मेरा इक्कीस साल का बेटा अपनी मॉम को इतना पसंद करता है की वो नंगा देखना चाहता है.... मैं तुझे पूरा नंगा हो कर दिखाउंगी.....फिर तुम मुझे बताना की तुम अपनी मॉम के साथ क्या-क्या करना चाहते हो....".

मेरी तो जैसे लाँटरी लग गई. चेहरे पर मुस्कान और आँखों में चमक वापस आ गई. मॉम बिस्तर से उतर कर नीचे खड़ी हो गई और हंसते हुए बोली "पहले पेटिको़ट ऊपर उठाऊ या ब्लाउज खोलू..." मैंने मुस्कुराते हुए कहा "हाय मॉम दोनों....खोलो....पेटिको़ट भी और ब्लाउज भी...."

"इस.....स......स....बेशर्म पूरा नंगा करेगा....चल तेरे लिए मैं कुछ भी कर दूंगी....अपने बेटे के लिए कुछ भी...पहले ब्लाउज खोल लेती हूँ फिर पेटिको़ट खोलूंगी....चलेगा ना..." गर्दन हिला कर मॉम ने पूछा तो मैंने भी सहमती में गर्दन हिलाते हुए अपने गालो को शर्म से लाल कर मॉम को देखा. मॉम ने चटाक-चटाक ब्लाउज के बटन खोले और फिर अपने ब्लाउज को खोल कर पीछे की तरफ घूम गई और मुझे अपनी ब्रा का हूक
खोलने के लिए बोला मैंने कांपते हाथो से उनके ब्रा का हूक खोल दिया. मॉम फिर सामने की तरफ घूम गई. मॉम के घूमते ही मेरी आँखों के सामने मॉम की मदमस्त, गदराई हुई मस्तानी कठोर चूचियां आ गई. मैं पहली बार अपनी मॉम के इन गोरे गुब्बारों को पूरा नंगा देख रहा था. इतने पास से देखने पर गोरी चूचियां और उनकी ऊपर की नीली नसे, भूरापन लिए हुए गाढे गुलाबी रंग की उसकी निप्पले और उनके चारो तरफ का गुलाबी घेरा जिन पर छोटे-छोटे दाने जैसा उगा हुआ था सब नज़र आ रहा था. मैं एक दम कूद कर हाय करते हुए उछला तो मॉम मुस्कुराती हुई बोली "अरे, रे इतना उतावला मत बन अब तो नंगा कर दिया है आराम से देखना....ले...देख..." कहती हुई मेरे पास आई. मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो निचे खड़ी थी इसलिए मेरा चेहरा उनके चुचियों के पास आराम से पहुँच रहा था. मैं चुचियों को ध्यान से से देखते हुए बोला "हाय...मॉम पकड़े..."

"हाँ...हाँ....पकड़ ले जकड़...ले अब जब नंगा कर के दिखा रही हूँ तो...छूने क्यों नहीं दूंगी....ले आराम से पकड़ कर मजा कर......अपनी मॉम की नंगी चुचियों से खेल...." मैंने अपने दोनों हाथ बढा कर दोनों चुचियों को आराम से दोनों हाथो में थाम लिया. नंगी चुचियों के पहले स्पर्श ने ही मेरे होश उड़ा. उफ्फ्फ मॉम की चूचियां कितनी गठीली और गुदाज थी, इसका अंदाजा मुझे इन मस्तानी चुचियों को हाथ में पकड़ कर ही हुआ. मेरा लण्ड फरफराने लगा. दोनों चुचियों को दोनों हथेली में कस हलके दबाब के साथ मसलते हुए चुटकी में निप्पल को पकड़ हलके से दबाया जैसे किशमिश के दाने को दबाते है. मॉम के मुंह से एक हलकी सी आह निकल गई. मैंने घबरा कर चूची छोड़ी तो मॉम ने मेरा हाथ पकड़ फिर से अपनी चुचियों पर रखते हुए दबाया तो मैं समझ गया की मॉम को मेरा दबाना अच्छा लग रहा है और मैं जैसे चाहू इनकी चुचियों के साथ खेल सकता हूँ. गर्दन उचका कर चुचियों के पास मुंह लगा कर एक हाथ से चूची को पकड़ दबाते हुए दूसरी चूची को जैसे ही अपने होंठो से छुआ मुझे लगा जैसे मॉम गनगना गई उनका बदन सिहर गया. मेरे सर के पीछे हाथ लगा बालों में हाथ फेरते हुए मेरे सर को अपनी चुचियों पर जोर से दबाया. मैंने भी अपने होंठो को खोलते हुए उनकी चुचियों के निप्पल सहित जितना हो सकता था उतना उनकी चुचियों को अपने मुंह में भर लिया और चूसते हुए अपनी जीभ को निप्पल के चारो तरफ घुमाते हुए चुमलाया तो मॉम सिसयाते हुए बोली "आह....आ...हा....सी...सी....ये क्या कर रहा है...उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़.....मार डाला....साले मैं तो तुझे अनारी समझती थी....मगर....तू....तो खिलाड़ी निकला रे.....हाय...चूची चूसना जानता है.....मैं सोच रही थी सब तेरे को सिखाना पड़ेगा....हाय...चूस ...सीईई....ऐसे ही निप्पल को मुंह में लेकर चूस और चूची दबा....हाय रस निकाल बहुत दिन हो गए....." अब तो मैं जैसे भूखा शेर बन गया और मॉम की चुचियों को मुंह में भर ऐसे चूसने लगा जैसे सही में उसमे से रस निकल कर खा जाऊंगा. कभी बाई चूची को कभी दाहिनी चूची को मुंह में भर भर कर लेते हुए निप्पलों को अपने होंठो के बीच दबा दबा कर चूसते हुए रबर की तरह खींच रहा था. चुचियों के निप्पल के चारो तरफ के घेरे में जीभ चलाते हुए जब दुसरे हाथ से मॉम की चूची को पकड़ कर दबाते हुए निप्पल को चुटकी में पकड़ कर खींचा तो मस्ती में लहराते हुए मॉम लड़खड़ाती आवाज़ में बोली "हाय ....सीईई...ई...उफ्फ्फ्फ्फ्फ....चूस ले.....पूरा रस चूस.....मजा आ रहा है....तेरी मॉम को बहुत मजा आ रहा है .....हाय तू तो चूची को क्रिकेट की गेंद समझ कर दबा रहा है....मेरे निप्पल क्या मुंह में ले चूस....तू बहुत अच्छा चूसता है....हाय मजा आ गया ....पर क्या तू चूची ही चूसता रहेगा.....बूर नहीं देखेगा अपनी मॉम की चुत नहीं देखनी है तुझे.....हाय उस समय से मरा जा रहा था और अभी....जब चूची मिल गई तो उसी में खो गया है....हाय चल बहुत दूध पी लिया.....अब बाद में पीना" मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिए मैं अभी भी चूची पर मुंह मारे जा रहा था. इस पर मॉम ने मेरे सर के बालों को पकड़ कर पीछे की तरफ खींचते हुए अपनी चूची से मेरा मुंह अलग किया और बोली "साले....हरामी....चूची...छोड़....कितना दूध पिएगा....हाय अब तुझे अपनी चूत का रस पिलाती हु....चल हट माधरचोद....." गाली देने से मुझे अब कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि मैं समझ गया था की ये तो मॉम का शगल है और शायद मार भी सकती है अगर मैं इसके मन मुताबिक ना करू तो. पर दुधारू गाये की लथार तो सहनी ही परती है. इसकी चिंता मुझे अब नहीं थी. मॉम लगता था अब गरम हो चूँकि थी और चुदवाना चाहती थी. मैं पीछे हट गया और मॉम के पेट पर चुम्मा ले कर बोला "हाय मॉम बूर का रस पिलाओगी...हाय जल्दी से खोलो ना..." मॉम पेटिको़ट के नाड़े को झटके के साथ खोलती हुई बोली "....अब तो तुझे पिलाना ही पड़ेगा...ठहर जा अभी तुझे पिलाती अपनी चुत पूरा खोल कर उसकी चटनी चटाऊंगी फिर...देखना तुझे कैसा मजा आता है...." पेटिको़ट सरसराते हुए निचे गिरता चला गया पैंटी तो पहनी नहीं थी इसलिए पेटिको़ट के निचे गिरते ही मॉम पूरी नंगी हो गई. मेरी नजर उनके दोनों जन्घो के बीच के तिकोने पर गई. दोनों चिकनी मोटी मोटी रानो के बीच में मॉम की बूर का तिकोना नज़र आ रहा था. चुत पर हलकी झांटे उग आई थी. मगर इसे झांटो का जंगल नहीं कह सकते थे. ये तो चुत की खूबसूरती को और बढा रहा था. उसके बीच मॉम की गोरी गुलाबी चुत की मोटी फांके झांक रही थी. दोनों जांघ थोड़ा अलग थे फिर भी चुत की फांके आपस में सटी हुई थी और जैसा की मैंने बाथरूम में पीछे से देखा था एक वैसा तो नहीं मगर फिर भी एक लकीर सी बना रही थी दोनों फांके. मॉम की कमर को पकड़ सर को झुकाते हुए चुत के पास ले जाकर देखने की कोशिश की तो मॉम अपने आप को छुड़ाते हुए बोली " ऐसे नहीं....ऐसे ठीक से नहीं देख पाओगे....दोनों जांघ फैला कर अभी दिखाती हूँ...फिर आराम से बैठ कर मेरी बूर को देखना और फिर तुझे उसके अन्दर का माल खिलाउगीं...घबरा मत बेटे ...मैं तुझे अपनी चुत पूरा खोल कर दिखाउंगी और....उसकी चटनी भी चटाउगीं...चल छोड़ कहते हुए पीछे मुड़ी. पीछे मुड़ते ही मॉम गुदाज चुत्तर और गांड मेरी आँखों के सामने नज़र आ गए. मॉम चल रही थी और उसके दोनों चुत्तर थिरकते हुए हिल रहे थे और आपस में चिपके हुए हिलते हुए ऐसे लग रहे थे जैसे बात कर रहे हो और मेरे लण्ड को पुकार रहे हो. लौड़ा दुबारा अपनी पूरी औकात पर आ चूका था और फनफना रहा था. मॉम ड्रेसिंग टेबल के पास रखे गद्देदार सोफे वाली कुर्सी पर बैठ गई और हाथो के इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और बोली "हाय...बेटे ...आ जा तुझे मजे करवाती हूँ....अपने मालपुए का स्वाद चखाती हूँ....देख बेटे मैं इस कुर्सी के दोनों हत्थों पर अपनी दोनों टांगो को रख कर जांघ टिका कर फैलाऊंगी ना तो मेरी चुत पूरी उभर कर सामने आ जायेगी और फिर तुम उसके दोनों फांको को अपने हाथ से फैला कर अन्दर का माल चाटना....इस तरह से तुम्हारी जीभ पूरा बूर के अन्दर घुस जायेगी....ठीक है बेटा ...आ जा....जल्दी कर....अभी एक पानी तेरे मुंह में गिरा देती हूँ फिर तुझे पूरा मजा दूंगी...." मैं जल्दी से बिस्तर छोर मॉम की कुर्सी के पास गया और जमीं पर बैठ गया. मॉम ने अपने दोनों पैरो को सोफे के हत्थों के ऊपर चढा कर अपनी दोनों जांघो को फैला दिया. रानो के फैलते ही मॉम की चुत उभर कर मेरी आँखों के सामने आ गई. उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़....क्या खूबसूरत चुत थी. गोरी गुलाबी....काले काले झांटो के जंगल के बीच में से झांकती ऐसी लग रही थी जैसे बादलो के पीछे से चाँद मुस्कुरा रहा है. एक दम पावरोटी के जैसी फूली हुई चुत थी. दोनों पैर कुर्सी के हत्थों के ऊपर चढा कर फैला देने के बाद भी चुत के दोनों होंठ अलग नहीं हुए थे. चुत पर ऊपर के हिस्से में झांटे थी मगर निचे गुलाबी कचौरी जैसे होंठो के आस पास एक दम बाल नहीं थे. मैं जमीन पर बैठ कर मॉम के दोनों रानो पर दोनों हाथ रख कर गर्दन झुका कर एक दम ध्यान से मॉम की चुत को देखने लगा. चुत के सबसे ऊपर में किसी तोते के लाल चोंच की तरह बाहर की तरफ निकली हुई मॉम के चुत का भागनाशा था. कचौरी के जैसी चुत के दोनों फांको पर अपना हाथ लगा कर दोनों फांको को हल्का सा फैलाती हुई मॉम बोली रोहित ....ध्यान से देख ले....अच्छी तरह से अपनी मॉम की बूर को देख बेटा....चुत फैला के देखेगा तो तुझे....पानी जैसा नज़र आएगा....उसको चाट का अच्छी तरह से खाना....चुत की असली चटनी वही है...." मॉम के चुत के दोनों होंठ फ़ैल और सिकुर रहे थे. मैंने अपनी गर्दन को झुका दिया और जीभ निकल कर सबसे पहले चुत के आस पास वाले भागो को चाटने लगा. रानो के जोर और जांघो को भी चाटा.
जांघो को हल्का हल्का काटा भी फिर जल्दी से मॉम की चुत पर अपने होंठो को रख कर एक चुम्मा लिया और जीभ निकाल कर पूरी दरार पर एक बार चलाया. जीभ छुलाते ही मॉम सिसया उठी और बोली "सीईई....बहुत अच्छा बेटा ...तुम्हे आता है...मुझे लग रहा था की सिखाना पड़ेगा मगर तू तो बहुत होशियार है....हाय….बूर चाटना आता है.... ऐसे ही....रोहित तुने शुरुआत बहुत अच्छी की है....अब पूरी चुत पर अपनी जीभ फिराते हुए.....मेरी बूर की टीट को पहले अपने होंठो के बीच दबा कर चूस...देख मैं बताना भूल गई थी....चुत के सबसे ऊपर में जो लाल-लाल निकला हुआ है ना....उसी को होंठो के बीच दबा के चूसेगा....तब मेरी चुत में रस निकलने लगेगा....फिर तू आराम से चाट कर चूसना....सीईईई

mummu ki 1000 chudai

Meri ek ajeeb si chahat thi. Mujhe
apni maa ko chudwate huwe
dekhna tha. Darwaje, khirki,
bathroom- har jagah ke har ched
me aankh rakhke bhi dekh liya.
Saali ki gand bhi naseeb nahi huyi.
Mujhe unhe chodna nahi tha, bass
dard se katrati, apni chut pe lund
ghused ke chillati or tilmilati, rhoti,
girdgirdati, magar ussi lund ko
lekar chumti, chusti aur wapas
apne chut mein panah deti- yehi
dekhna tha.
Naseeb bhi aisa tha ke maa saali
koi sati-savitri lagti thi. Mann hi
mann mein kahani banake, mote
lund laake, mann hi mann maa ko
chudwata tha. Unhi ki khayalon
mein muth marte marte tang aa
gaya tha main. Har raat ko ek hi
duwa karta tha: "kuch to dikhado."
Meri maa, kisi bhi dusre aunty ki
tarah hi dikhti hain- thodi moti hai
par chehra kafi sundar hai. Figure
bhi umar ke hisab se thik thak tha.
Kabhi kabhi sochta tha ke unko
unke bedroom pe nanga karke
khud hi chod dalun. Par yeh
aasaan nahi tha. Uss 40 saal purani
boor mein ek hi lund ke parking ka
license tha, aur woh mere baap ka.
Kutiya kapde bhi aise pahenti thi
ke mano uska bass chale toh muh
bhi dhakde. Naram swabhav ki yeh
aurat, dusre mard se baat toh
duur, unke baare mein shayad
sochti bhi nahi thi. Aur agar main
kuch ulta sidha karun toh mera
baap mujhe zinda jala dega. Aisi
paristhitiyon mein, mera adhura
sapna, sapna hi rehne wala tha, ke
ekdin ek masiha aaya, naam Akbar
Haji. School mein usse meri
dushmani thi. Ameer baap ka ladka
tha aur paise lutane mein maahir
bhi. Woh naya naya class XI mein
aaya tha, aur mujhe ussa maar-
peet ho gayi kyun ke usne mujhe
maadarchod bola tha.
Aaj, 6 mahine baad, woh hi mera
aakhri raasta tha. Woh bahut hi
hatta-gatta aur kafi takatwar tha.
Apne class mein ladkiyon ke beech
ek badi baat tha uska mota tagda
lund. Kisi ek ladki ne usse peshaab
karte huwe dekh liya tha aur tabse
Akbar school mein mashur ho
gaya. School mein doston ke beech
baat-cheet karke pata chala, ke yeh
gandu Akbar, ladki patane mein
maahir hai. Kisi maal ko bhi ek
ghanta me utha sakta hai. Itna bhi
suna ke woh ab thodi aunty type
maal talash raha hai. Mera kaam ho
gaya tha. Bass der thi toh Akbar se
baat karne ki.
Akbar phone pe busy tha jab main
uske paas gaya. Mere paas tab tak
koi cell phone nahi tha. Yehi mauka
tha usse kuch paise maarke ek
phone kharidun.
"Akbar!" maine usse pukara.
"Haan bol kya hai?" usne mujhse
pucha.
"Kaisa hai? Suna hai chut maarne
ke liye aunty dhoond raha hai?"
"Haan. Par tujhko kya?" woh thoda
gusse mein aagaya.
Maine aawaz neeche karke bola-
"Meri maa chalegi? Ekdam mast
hai. Bass patana hai."
"Subah subah nasha chada liya hai
kya?" woh mere baat se hayraan
tha.
"Abey nahi re. Tu toh mera dost
hai. Aakhir dost hi toh dost ke
kaam aata hai. Hai na?" maine usse
samjhaya.
"Tu mujhe puri baat bata. Tera kya
lafda hai issme?" woh kafi addiyal
tha aur mujhe batana hi pada-
"Dekh yaar, mujhe apni maa ko
chodte huye dekhna hai. Bass. Aur
kuch nahi."
"Aur issliye tu apne maa ki dalali
kar raha hai?" usne pucha.
"Dalali nahi dost. Phir bhi agar tu
yeh dalali samajh raha hai toh kuch
paise de dena." maine bola.
"Kitna chahiye?"
"Tu kitna de sakta hai?"
"500. Usse zyada nahi. Kutiya ka
photo dikha."
Main rakam shun ke zyada khus
nahi tha. 500 mein kuch nahi
hoga. Phir bhi main maan gaya aur
tutey tutey aawaz mein bolne laga- "Photo
nahi hai. Har shaam chaar baje
woh puja karne jaati hai. Toh pura
ghar khali hota hai. Aaj maine maa
ko bol aaya hun ke main 8 baje tak
ghar lautunga, dost ka birthday
hai. Tu ghanti bajake mere liye
puchna. Woh jab bolegi main ghar
mein nahi hun toh bolna ke tu kisi
zaruri kaam se aaya hai aur mujhe
mile bagair tu ja nahi payega. Ek
baar ghar mein ghus gaya toh fir
teri baari. Woh jab puja karne
jaaye toh chupke se darwaja khol
dena, main ghus jaunga. Aur haan,
bedroom mein please please
please mat le jana. Wahan chupne
ki jagah nahi hai. Jo karna,
drawing room me hi karna.
Papa 9 baje tak laut jaate hain, toh
jo bhi ho, 9 baje se pehle khatam
karna. Thik hai?" sab kuch shunke
woh kafi confident tha. Main
wahan se utha aur bola- "Toh
pawne-chaar baje, Shri Krishna
Vihar ke gate pe. Aaj hi. Taiyaar hai
na?"
Main ajeeb sa mehsus kar raha tha.
Lund itna bada ho gaya tha ke
pant ke bahar se dikh raha tha.
Mera sirr chakra raha tha aur main
bass chaar bajne ke intezaar mein
pal ginn raha tha.
Akbar time pe haazir tha. Maine
usse apna ghar dikhaya aur
darwaje ke saamne seedi ke
peeche chup gaya. Usne ghanti
bajayi toh mano mera pura badan
hill gaya. Aab mujhe chup chap un
dono ki baat-cheet aur harkatein
shunna aur dekhna tha.
Ting tong....
Maa: kaun?
Akbar: aunty main
Akbar. Abhi ka dost.
Maa (darwaja khol ke) : beta Abhi
toh nahi hai. Woh 8 baje tak
aayega.
Akbar: aunty bahut zaruri hai. Main
kya thodi der baith sakta hun?
Uske aane tak?
Maa: Thik hai beta. Aao andar aao.
Main jaldi jaldi puja karke aati hun.
Tum baitho.
Darwaja bandh hone ke ek minute
baad Akbar ne mujhe andar bula
liya. Ghar mein ghuste hi bolne
laga, "Aaj tere kutiya maa ki chut
faad ke jaunga. Kamini puri
raapchik hai be!"
Main ghar ke kone me parde ke
peeche chup gaya. Darr ke maare
mere pao kaap rahe the par main
kisi tarah khada tha. Thodi der
mein maa laut gayi. Puja ghar mein
pankha nahi hone se pure pasine
mein lat-pat woh Akbar ke paas
sofa mein baith gayi.
Maa: toh bolo beta, kaise aana
huwa?
Akbar: aunty woh Abhi se thoda
kaam tha.
Maa: oh! Thik hai. Kuch loge?
Akbar: nahi aunty, bass ek glass
pani.
15 minute beet chuke the aur ab
tak koi masala nahi tha.
Mera Akbar pe bharosa dhire dhire
kam ho raha tha, par achanak hi
woh apne pure form me aagaya.
Maa pani ki glass aur kuch samose
ek tray me lekar jaise hi Akbar ke
paas aayi, Akbar ne mano galti se
glass to palta diya aur maa ka
badan pura pani pani ho gaya. Par
main toh hayraan tab reh gaya jab
Akbar ne apna rumaal nikalke maa
ke choochiyon ke beech pani
ponchne laga. Iss ghatna se dang,
meri maa gusse mein jal uthi.
Maa: yeh kya kar rahe ho? Sharam
nahi aati?
Akbar: sorry aunty. Galti ho gayi.
Maa: nikal jao. Isi waqt nikal jao
mere ghar se.
Akbar: kyun aunty?
Maa: tum jaante ho tumne abhi
abhi kya kiya hai?
Akbar: ab tak toh kuch nahi kiya
aunty. Karunga toh ab.
Maa: kya matlab hai tumhara?
Akbar: samjhi nahi? Toh main
samjhata hun.
Woh khada ho gaya aur maa ki
taraf badne laga.
Maa: wohi ruk jaao. Warna police
ko bulaungi.
Akbar ne apna phone nikaal ke
maa ko dene gaya aur bola, "Yeh
lo. Jise chaho bulao. Aaj apko aisa
maza dunga ke zindagi bhar isko
yaad karoge." Maa deewar mein
peeth tek ke khadi thi aur Akbar ke
pehle sparsh se jaise unka saara
gussa chala gaya. Woh kehne lagi:
"Beta, aisa mat karo. Main shadi
shuda hun." Akbar chup tha aur
paas jaa ke maa ke pallu ko
kheench diya aur maa ki koi virodh
ke bina hi unki saree unke tann se
alag ho gayi. Akbar ka hath maa ke
petticoat ke andar tha aur tabhi
maa ka saara gussa unhe jawab de
gaya. Akbar ab unke hoonth chum
raha tha aur choochiyon ko daba
raha tha. Maine bhi parde ke
peeche muth marna shuru kar
diya.
Kuch hi minute mein maa apni bra
aur panty pe thi aur Akbar nanga,
apne mote lund ko hawa mein
ghumate huwe.
Maa: beta, yeh main samhal nahi
paungi. Yeh bahut mota hai. Main
buddhi ho gayi hun.
Akbar: aunty ek baar muh mein
toh lijiye.
Maa ne uske lund ko pura nigal
liya.
Maa:
mmmmm....mmmmm.....mmmmm.....mmmmmm....aahh....mmmmmm.
Akbar: aunty aur zor se. Aaahhh....
Maa ne apne panty utar ke phenk
diya aur apne ghutno ke bal ho kar
Akbar ka lund chusta raha. Maa
boli: "bedroom mein aao na."
Akbar: nahi mujhe khade khade
aapko chodna hai.
Maa: toh mera chut kaun
chaatega?
Akbar: oh yeh baat hai?
Usne maa ko dhakel diya jisse maa
zameen pe baith gayi aur Akbar ne
unke chut par hamla kiya.
Maa: aaaaaaahhhhh!!!.....
Oh...oh....oh....oooooo....aha...aha....aha...maaaaaaaaaaah!!!....
Akbar ka zubaan maa ke jitni
gehrai pe jaa raha tha, unki
cheekhein utni tez ho rahi thi. Maa
isse zyada der seh nahi payi aur
boli: "aur mat tadpao. Kaam pura
karo. Mera jaan nikla ja raha hai."
Akbar ne maa ko uthaya aur
deewar pe jaake tek diya. Wahan
se bass do feet ki doori pe main
parde ke peeche chupa meri maa
ko chodte huwe dekh raha tha.
Main pura garam tha aur ek pal ke
liye toh socha ke main bhi kutiya ki
chut maar dun par kisi tarah
samhal liya. Akbar apni puri taakat
ke saath maa ki chut faad raha tha,
aur maa, deewar se chipki huyi
maza loot rahi thi.
Maa: itna zor
nahi...nahi....aah...aah....phat...chut....mera...aah...aaah...mera
chut phat
jaaye....aaaha...aaah....oooooooh!
Akbar: maza...aaah....maza...aaa
raha hai?
Maa:
haan....haan....aaah...aaah....aaah...ooohhh....aaa...rah....ha....hai...ma...za...bahut....ma...za...aah...raha...hai...aah....uuuuiiiiimaaaaaaahh!
Akbar: main aur nahi pakad sakta,
aaah...yeh gaya mera garam maal
aap ke chut ke andar.
Maa: oh! Akbar tumne toh jaan hi
nikal di.
Main isi dauran chupke se ghar se
nikal gaya. Thodi der baad Akbar
jab nikal raha tha toh maa boli:
"phir aana beta." Akbar jawab diya,
"aap itne pyar se bulayengi toh
zaroor aaunga."......... Ek aadat si lag gayi iss ke baad.
Aisa lagne laga ke duniya ka har
lund meri maa ki chut me laake
ghusa dun. Par Akbar ke baad koi
aisa nazar mein nahi tha. Toh main
thoda idhar udhar dekhne laga kisi
achche chudakkad ke talash mein,
par mil nahi raha tha. Mujhe maa
ko har roz chudwate huye dekhna
tha aur wahi mere dil-o-dimag pe
chaane laga.
Akbar ke jaane ke baad maa apne
purane roop mein wapas aa gayi
thi. Us ghatna ya Akbar ke aane ka
na toh unhone koi zikar kiya, aur
na toh mujhe kuch poocha. Sab
kuch normal tha. Par mujhe pata
chal gaya tha woh kitni badi
randee hain. Dusre din bhi kuch
huwa nahi. Baki dino ki tarah din
shuru huwa aur shaam hote hote
main ghar bhi wapas aagaya tha.
Main apna aapa kho raha tha. Mere
dimag mein itni hulchul ho rahi thi
ke mujhse sambhala nahi ja raha
tha. Papa bhi ghar aa gaye the aur
mujhe apne room mein kitabon ke
saath baithna pada. Kuch der baad
ghar mein ek mehmaan aaya. Unhe
main nahi jaanta tha.
Woh papa ke office mein kaam
karte hain aur unko humare ghar
papa ne khaane pe bulaya tha.
Raat kafi ho gayi thi aur woh
mehmaan tab bhi papa ke saath
baat karne me busy tha. Jab baat
khatam huyi toh papa ne unko
kaha raat ko humare ghar rukne
ke liye. Baaton baaton me mujhe
yeh bhi pata chala ke unhone
shaadi nahi ki hai aur koi family
bhi nahi hai. Toh woh raazi ho
gaye.
Shone se pehle main jab mummy
papa ke room mein gaya toh bed
ke neeche ek gulabi rang ki cheez
nazar aayi. Nikaal ke dekha toh
pata chala woh condom ka packet
hai. Bass tabhi mere dimag mein
ek ghatiya idea aaya. Main apne
room mein jaake apne bed ke upar
chaddar ke neeche do takiya
rakha. Aisa lag raha tha ke main so
raha hun, aur lights off kar ke
mummy papa ke bed ke neeche
jaake chhup gaya.
Kuch der baad mummy papa ghar
me ghuse. Papa bahut khush nazar
aa rahe the aur mummy bhi.
Main bed ke neeche se zyada
bahar nikalne ki himmar nahi kar
pa raha tha par uss me hi jitna
nazar aa raha tha, waise hi dekha,
papa mummy ke aankho pe ek
kaale rang ka kapda baandh rahe
the. Mujhe thoda ajeeb laga par
mujhse bhi zyada hayrani huyi
meri maa ko.
Maa: Yeh kya kar rahe ho ji?
Papa: Kuch nahi. Tumse thodi
mohabbat karni hai.
Maa: Uff!! Aap bhi na. Par aankhon
me kapda kyun baandh rahe ho?
Papa: Thodi badmashi bhi karni
hai. Samjhi?
Maa: Samjhi samjhi. Par aaj
achanak yeh sab? Ghar mein
mehmaan bhi hain.
Papa: Toh kya huwa. Main kya apni
biwi se pyar bhi nahi kar sakta?
Maa: Haath bhi baandh doge?
Bataoge bhi aapka irada kya hai?
Papa: Tum bass khadi raho chup
chap. Tumhe aaj thoda tadpane ka
mann hai. Maza aaye ga.
Maine dekha ke maa khadi hain
cupboard ke saamne. Unke
aankhon mein patti bandhe hain
aur haath deewar me lage keelon
ke saath do rassi ke sahare kasske
bandhe huwe.
Unke kapde tab bhi badan pe the
aur papa, chupke se ghar ke bahar
nikal gaye. Maa khade khade papa
ko bulane lagi.
Maa: Aji kahan gaye? Mujhe yun
bandh ke kahan gumm ho gaye ji?
Thodi der koi jawab nahi tha.
Mujhe bhi ghar pura nahi dikh
raha tha aur
main zyada bahar nikalne ki
himmat nahi kar pa raha tha. Kuch
hi der mein papa laut aaye aur
saath humare mehmaan uncle bhi.
Main hayraan tha. Mere dil zoroon
se dhadak raha tha aur mujhe pata
nahi tha kya hone wala hai.
Maa: Kahan chale gaye the ji?
Papa: Kahin nahi darling. Yehi pe
tha. Tumhe thoda dara raha tha.
Maa: Chalo jo bhi ho, mere ankhon
se patti utaro.
Papa: Utarenge, utarenge. Pehle
thoda sitam toh karne do.
Itne mein uss aadmi ne jaa ke maa
ki gardan mein chumna shuru kar
diya. Itna achanak huya ke maa
sihar uthi,
Maa: aaah!!!
Papa: Maza aa raha hai?
Maa: Haan! Karte rahiye. Karte
rahiye.
Papa ka yeh roop dekhke main
maano aasman se gira. Uncle maa
ke badan ke har hisse ko chumte
jaa raha tha, aur papa pass khade
sirf aawaz de rahe the. Maa khade
khade maza loot rahi thi aur unhe
pata bhi nahi tha ke unka pati kisi
aur se unko chudwa raha hai.
Uncle maa ki blouse utaar ke unke
choochiyon ko daba raha tha aur
maa ke labon ko chum raha tha.
Maa:
Mmmmmm!!!.....dabao!!...ooh!!......aur
zor se!!.....aaaahhh!...zor se....zor
se.......maaaah!!
Papa: Kaisa lag raha hai?
Maa: Achcha....aaaaah...bah......hut
achhh....chaaa..ah!
Uncle ne maa ke sab kapde utar
diye aur unke chut pe apna zubaan
ghusa diya. Maa sihar uthi.
Maa:...ha....aaaah.....ooh....oho!!...aaah..ah...ah...ah...mmmmmm...ah......ah.....ah!!
Maa ke siva har koi chup tha, aur
unki siskiyan pure ghar mein
guunj rahi thi.
Maa:
Mere......ha.....ha.....haath....uuuuuuuhu......kh...ollll.....do....na!!
Mujhe....woh.....ha....ha......ha.....ha......ha......ha.....chusna
hai.....
Papa ek lamba sa stool leke aaye
aur maa ke saamne rakh diya.
Uncle uspe khade hoke maa ke
muh pe apna lund ghusa diya aur
woh chusne lagi.
Maa:
ummm....ummm...ummm....ummmm....ummm...ummmmmm....ummm...
Kuch der yeh chala aur uncle
neeche aa gaye. Unki nazar phir
maa ki chut par padi aur iss baar
unhone do ungli ghusa di aur
hilane lage. Maa tadapne lagi.
Haath bandhe huwe, aankhon
mein patti, sirr ko idhar udhar
hilati, kabhi kamar ko hilati, kabhi
iss paer ko uthati toh kabhi uss
paer ko, kabhi sisakti toh kabhi
chillati woh tadap rahi thi. Ab meri
nazar papa pe padi. Kya scene tha.
Wahan baap khade apne biwi ko
chudwake muth maar raha tha aur
yahan beta apni maa ki chudi dekh
kar bistar ke neeche lete lete muth
maar raha tha.
Maa: Main khadi nahi reh paa
rahi...aah....aaah....thoda toh
ruko.....main marr
jaungi....aah....oooh....oooh...uuuuuu....nahi
nahi....aaaaah...haan....haaan.....haaan.....zor
se.....haan......haaan.....aaaaah...aaach.....chchaa
laggg raha hai.
Maa ke paeron ko aapne haathon
se uthakar woh aadmi unki chut
maar raha tha aur maa bass chilla
rahi thi par har baar jab bhi woh
apne orgasm ke climax mein aa rahi thi, woh
chhod de raha tha. Isse maa ki
tadap aur badh rahi thi.
Maa:
Aaaah....ah.....ah....ah....ah.....ah.....aisa.....ma....ma....mattt.....karo....nahi....nahi....ghusao
na.....abhi nikal ne wala tha. Mere
pao hil rahe hai. Main khadi nahi
ho pa rahi. Kuch dekh bhi nahi pa
rahi. Please ghusao please....aaah!
Yeh lagbhag 6-7 baar huwa aur
maa rone lagi. Siskiyon ke saath
bolne lagi,
Maa: Karo....ka....ro.....mujhse raha
nahi jaata....har baar
tum....aaahh....tum....aym mauke par
chhod rahe
ho.....nahi....isss...baaa....aaaar....please..matttt...aaaahhh....karrrna....haan.....haan....ho
raha hai.....ho raha
hai......aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah....ho
gaya!!!
Woh uncle chupke se ghar se nikal
gaya aur main bhi kisi tarah se
nikal aaya aur apne room me jaa
ke so gaya. Par ek baat mujhe pata
chala ke chodne se bhi zyada
chudai dekhne ki chahat mujhme
kaise aayi. Pichle teen dinon se main dekh
raha tha, maa theek nahi lag rahi
thi. Saat din pehle maa apne maike
gayi thi aur jab se lauti hain, tab se
woh kafi kamzor nazar aa rahi thi.
Kuch gadbadi thi unme, joh mujhe
nazar nahi aa raha tha. Woh na
theek se chal pa rahi thi, na theek
se baith sakti thi. Mujhe thoda
bahut sakk tha ke zarur kuch
huwa hai unke saath. Maine unse
jaanne ki kosish ki par unka jawab
mere liye kaafi nahi tha. Woh kuch
chupa rahi thi jo unke baatein
mujhe unke baton se pata chal
raha tha. Jab unhone kuch saaf
bataya nahi toh maine bhi puchna
chod diya aur apna kaam karne
laga.
Shaam ke lag-bhag saat baje meri
maa ke phone pe ek message aaya.
Maa kitchen me thi toh unhe pata
nahi chala. Main jab us message ko
padha toh mera sakk kafi gehra
huwa. Message kisi unknown
number se tha aur usme likha tha:
"Ab tum kaisi ho? Sab thik thak toh
hai na? Kya hum phir mill sakte
hain?"
Woh number mere liye unknown
tha, par sayad maa ke liye nahi.
Maine unka inbox dekha toh us
number se ek do blank messages
the. Maine uss number ko note kar
liya aur seedha PCO chala gaya.
♥Phone: Trrring trrring!
Trrring trrring!..... Hello!
♥Main: Hello!
♥Phone: Haan kaun?
♥Main: Aap kaun?
♥Phone: Aapne phone kiya hai.
Aap pehle bataiye aap kaun.
♥Main: Dekhiye, mere number pe
aapne abhi ek message bheja hai.
Mera number hai 9105******
♥Phone: Oh! Yeh toh Saakshi ji ka
number hai.
♥Main: Haan. Main unka beta bol
raha hun.
♥Phone: Arey tu. Main Suresh
mama. Pehchana?
♥Main: Suresh mama aap? Par aap
ko kaise pata chala ke meri maa ki
tabiyat kharab hai? Aur aap ka
number maa ne apne phone pe
save kyun nahi kiya hai?
♥Suresh mama:
Mmm...matlab...mm. Pata nahi. Mera
matlab hai ke.... Arey chod na in
baaton ko. Main Blue Moon hotel
me thehra hun. Kuch dinon ke liya
yahan aana pada. Tu aaja. Thodi
baatein karenge.
♥Main: Aap kitne dinon se ho
yahan pe?
♥Suresh mama: Aaj hi aaya hun. Tu
aaja. Phir baat karenge.
♥Main: Thik hai main maa se puch
ke aata hun.
♥Suresh mama: Maa...se... Arey maa
se kya puchna. Tu aaja na.
♥Main: Achcha theek hai. Dekhta
hun.
Maine phone rakh diya. Suresh
mama mera apna mama nahi hai.
Woh mere mama ka dost tha.
Mama se jhagra hone ke baad
humse bhi zyaada talukat nahi
rakhte the. Achanak unka meri
maa ke phone par message aur
unka mujhe apne hotel room me
bhi bulana, mujhe dal me kuch kala
laga. Upar se ek baat mere dimag
mein hamesa thi. Do teen saal
pehle ekbar main Suresh mama
aur mami ko mila tha. Woh
meeting ekdum achanak se huwa
tha. Main apne camera mein ek film
reel load karke ghar ja raha tha aur
mama ko maine ek dukan pe
dekha aur wohi jaake maine baat
karna suru kar diya. Mami bahut
achchi thi aur unke saath mere
photos bhi hain mere personal
album mein. Jab woh photo lene ki
baat aayi toh mama aur mami
dono hi hichkichane lage par
maine kuch photos le liye.
Unme se teen mami ke photos the
mama ke saath aur do photos the
mere saath. Unhone mujhe apne
ghar bhi bulaya tha. Par teen char
din baad jab main school se ghar
laut raha tha, tab apne car me
maine Suresh mama ko dekha ek
aurat ke saath kahin jaate huwe.
Par woh aurat mami nahi, koi aur
thi. Sayad se Suresh mama ne bhi
mujhe dekha par unhone apni car
nahi roki. Aur tabse woh mujhe
avoid karte hain aur sayad se darr
te bhi hain. Mera sakk gehrata jaa
raha tha aur maine maa ko bina
bataye Hotel Blue Moon jaane ka
faisla kar liya. Jab Hotel pahucha
toh maine reception me mama ka
naam batake room number
poocha. Phir ek baat mere dimag
me aayi aur maine unke iss hotel mein check-
in ka date pooch liya. Pehle
receptionist ne inkaar kar diya par
jab maine usse 100 ka ek note
dikhaya toh usne sab bata diya.
Receptionist ne joh date bataya,
woh dus din pehle ka tha. Aur
mama ne mujhe bola tha ke woh
aaj hi aaye hain. Yeh mere liye
pehla jhatka tha. Suresh mama
bahut hi gande kisam ke aadmi
hain aur jab bhi woh kahin pe
haazir hote hain toh yeh baat
pakki hai ke kuch golmaal hone
wala hai.
Doosra jhatka tab laga jab uss
receptionist ne mujhe ek log book
pe sign karne ko kaha, jispe iss
hotel me har aane jaane walon ka
record hota hai. Room number
208 me, jo ki mere mama ka room
hai, wahan pe Sakhshi Dubey,
yaani meri maa ka bhi sign hai
theek saat din pehle ke date mein.
Maine wapas receptionist se
poocha ke Suresh Radia ke room
me koi aurat aayi thi ke nahi. Usne
jawab diya ke ek aurat aayi thi aur
purey chaar din tak unke saath
ruki thi. Maine socha, 'Meri maa,
Suresh mama ke saath hotel me
char din.... Aur woh bhi apne
maaike jaane ke bahane!' Mujhe
kuch samajh mein nahi aa raha
tha.
******************
Suresh mama ke room mein jab
gaya toh woh bahut khush nazar
aa rahe the aur woh mujhse
baatein karne lage. Mujhe kuch
samajh me nahi aa raha tha ke kya
hone wala hai aur tabhi mere
saare sawalon ke jawab mere
saamne aane lage:
♥Mama: Tere paas woh photos
hain jo tune teri so called mami ke
saath kheenchi thi?
♥Main: So called kyun?
♥Mama: Kyun ki woh meri girl
friend hai. Meri biwi nahi. Meri biwi
toh woh hai jiske saath tune
mujhe uss din car mein dekha tha.
♥Main: Oh! Toh aap mujhse kya
chahte hain?
♥Mama: Woh photos mujhe de de.
Agar meri biwi ko pata chal gaya
toh uske papa ke sarey property
woh apne naam kar legi aur mujhe
ghar se nikal degi.
♥Main: Kuch samjha nahi.
♥Mama: Main samjhata hun. Mere
sasurji ki 2-3 crore rupay ke
property hain aur woh yeh sab
mere aur mere biwi ke naam karne
wale hain. Unhe lungs cancer
huwa hai aur unke paas zyada din
nahi hai. Mujhe property ka aadha
hissa tab tak milega jab tak meri
biwi chahegi. Ab jab tak woh
photos tere paas hai tab tak main
chain se nahi reh sakta. Woh
mujhe de de.
♥Main: Kyun? Usse mujhe kya
milega?
♥Mama: Kuch nahi. Ya phir bahut
kuch.
♥Main: Mujhe 30 lakh rupay
chahiye.
♥Mama: Kuch nahi. Ya phir bahut
kuch.
♥Main: Mujhe 30 lakh rupay
chahiye.
♥Mama: Mujhe pata tha tu aise
nahi maanega. Isiliye maine tere
liye kuch intezaam kiya hai. Yeh le
kuch voice recordings sun. Phir
tujhe chaar movie bhi dikhaunga.
♥Main: Yeh sab kiske hain?
♥Mama: Sun ke toh dekh. Tujhe
pata chal jaayega.
Yeh kehke unhone apna cell phone
mujhe de diya..........
******************
Maine head-phone ko apne kaano
mein lagaya aur woh voice
recordings sunne laga. Pehla
aawaz Suresh mama ka tha.
♥Mama: Arey aaja aaja. Kitne dino
baad. Kitni badal gayi hai. Puri
aunty-type lag rahi hai pata hai?
Itna dur theek tha, par jab maine
dusri awaaz suni toh main ekdum
se sure tha ke woh meri maa ki
hai.
♥Maa: Tu bhi toh badal gaya hai....
Woh sab baatein chhod. Suna hai
tu amir banne wala hai. 3-4 crore
rupay milenge.
♥Mama: Theek suna hai.
♥Maa: Oye hoye! Kya karega itne
paise ka? Kuch mujhe bhi de na.
♥Mama: Dunga dunga. Magar
pehle ek rakhayel rakkhunga. Sali
ko har roz chodunga.
♥Maa: ha ha ha ha ha..... Bakwas
mat kar. Bata na kya karega?
♥Mama: Bakwas nahi hai. Sachchi
me.
♥Maa: Phir toh mujhe kuch nahi
milega. Sara wohi kha jayegi.
♥Mama: Tu ban ja na meri
rakhayel. Tera hissa bhi tujhe
milega aur....
♥Maa: Chup kar. Ulta seedha bolta
rahta hai. Bachpan mein rakhi
pehnati thi tujhe. Bhul gaya.
♥Mama: Haan. Toh kya? Bachpan
mein rakhi pehnati thi aur ab
condom pehnayegi. Tab aarti utarti
thi aur ab pant utaregi. Ha ha ha
ha.....
♥Maa: Ha ha ha ha ha....
♥Mama: Hasi toh phasi. Kyun didi?
Ya phir..... Darling kahun?
♥Maa: Chup kar. Harami sala.
♥Mama: Haan haan. Tu kuch mat
bol. Mujhe pata hai bachpan mein
tu kya thi. Tujhe pata hai tu jab
nahati thi, main tujhe chhup chhup
ke dekhta tha. Aur tu toh sali
khidki kholke nangi nahati thi.
♥Maa: Haan pata hai. Woh khidki
toh tere liye hi khula rakhti thi. Ha
ha ha....
♥Mama: Kya? Kya boli tu?
♥Maa: Haan. Tu jab mujhe nahate
huye dekhta tha toh mujhe achcha
lagta tha. Aur tu toh kabhi mere
samne baat hi nahi karta tha. Tune
toh koi kosish hi nahi ki mujhe
patane ki.
♥Mama: Aur us padosh ke Verma
uncle, jo tujhe maths padhata tha?
Aur woh cosmetics shop ka
dukandar? Un sab ke saath kya
lafda tha?
♥Maa: Woh dono toh purey
madarchod they.
♥Mama: Bata na unke saath tera
kya chakkar tha?
♥Maa: Nahi bataungi.
♥Mama: Bata na bata na. Please.
Mujhe pata hai un dono ke saath
tera kuch toh lafda tha. Kya tha bol
na.
♥Maa: Itni chahat hai sunne ki?
Theek hai toh phir sun.......
♥Mama: Ruk ruk. Apni saari ke
aanchal ko apne chhaati se thoda
hata.
♥Maa: Kyun?
♥Mama: Tera cleavage dekhna hai.
Nahi toh koi feeling nahi aa rahi
hai.
♥Maa: Chutiya sala. Dekh.... Itna
chalega?
♥Mama: Chalega nahi. Daudega.
Uff!!! kya mast cheez hai tere paas.
Haan abb bol........ Maa: Tu toh jaanta hi hai jab
main class XI me thi, tab kitne
ladke mujhpe marte the. Toh
mujhe ek baat pata tha ke mujhe
kabhi ladkon ki kami nahi hogi.
Bass ishaare kar do aur pura line
lag jaayega.
♥Mama: Aur isiliye tu ek ko pakadti
thi aur ek ko chorti thi?
♥Maa: Bilkul wohi. Toh meri pehli
nazar thi mere school ke ek
teacher par. Manish naam tha uska.
Chemistry padhata tha woh. Meri
sabse badi kamzori bhi ittefaak se
Chemistry hi thi.
♥Mama: Yeh Manish toh wohi hai
na? Woh scooter pe aata tha aur
bahut maarta tha. Sale ne mere
gand pe scale se maara tha. Uske
saath kabse tu.......?
♥Maa: Ab sunta ja. Abhi bahut
saare naye kisse baki hain.
♥Mama: Sab tere shaadi se pehle?
♥Maa: Haan. Aur shaadi ke baad ke
bhi hain 5-6. Par woh alag
kahaniyan hai.
♥Mama: Teri maa ka.... Kya bol rahi
hai tu? Kitno ne tere upar haath
maara hai? Teri chut abhi tak chut
hai ya national highway ban chuka
hai?
♥Maa: Tu abhi chup kar aur mujhe
bolne de.
♥Mama: Haan meri maa. Tu bol......
Jee bharke bol.
♥Maa: Haan toh main kahan thi........
Manish right?
♥Mama: Haan.
♥Maa: Woh Manish kaafi
handsome tha. Sab ko maarta tha,
par mujhe usne kabhi nahi maara.
Thoda bahut harami tha, lekin sala
tha badhiya.
♥Mama: Uski tareef chod aur point
pe aa.
♥Maa: Aati hun baba. Mujhe yaad
hai, woh chup chup ke mujhe
dekha karta tha. Tujhe yaad hoga
humare school uniform mein
ladkiyon ke salwar kameez the aur
purey school mein sabse zyada
backless salwar meri thi.
♥Mama: Kaise bhulun? Tab toh film
ki heroiney itni expose nahi karti
thi, jitna tu karti thi. Shaadi ke baad
kya huwa? Tu toh jaise Mother
Teresa ban gayi. Maine dekha hai,
kitne dhake dhuke kapde pahenne
lagi shaadi ke baad. Kyun?
♥Maa: Mere kapde itne bhi chotey
nahi the.... aur shaadi ke baad toh
logon ka bhi khayal toh rakhna hai
na. Woh kya kahenge? Aur shaadi
ke baad agar waise kapde pahenti
toh log sakk karte na. Aur ab tak
main pakdi bhi ja chuki hoti.
♥Mama: Haan! Sahi baat hai.
♥Maa: Jo bhi ho, ab chup chap sun.
Ek bhi baat nahi karega nahi toh
main nahi bataungi.
♥Mama: Achcha baba, theek hai.
♥Maa: Haan. Toh ek din Chemistry
lab mein woh chup chup ke meri
khuli peeth ko nihaar raha tha.
Maine bhi apne baalon ko peeche
se hata liya jisse ki woh achchi
tarah se sab kuch dekhe. Main
apne jism ko thodi bahut idhar
udhar bhi kar rahi thi taaki uske
badan mein bhi kuch hulchul ho.
Mujhe lag raha tha ki woh bass
mujhe hi dekh raha tha. Main
mann hi mann sochne lagi ke woh
chupke se mere paas aayega aur
meri khuli peeth mein apna haath
fayrayega aur theek peeth ke
beechon-beech chumega. Phir
woh mere salwaar ko thoda
uthake meri navel ke aas paas
apne haathon ko ghumayega aur
kuch daer baad mere boobs ko
mashle ga, apne ungliyon ke saath
mere nipples se khelega. Pata hai,
sochte sochte meri panty puri
bheeg chuki thi. Main pasine se
paani paani ho gayi thi aur woh
bewakuf test tube leke humein
experiments sikhane laga.
Main tab tak virgin thi aur mujhse
raha nahi jaa raha tha. Mujhe bass
uska lund chahiye tha aur main
uske liye kisi bhi hadd tak jaa sakti
thi. Woh uss din ka aakhri class tha
aur woh khatam hone ke baad
mere class ka har koi ghar jaane
laga. Maine sochi ke yehi mauka
hai usse patane ka aur main lab
room ke bahar khadi rahi. Par
mere naseeb mein woh uss din
kahan tha. Harami ne lab se bahar
aake mujhe dekha tak nahi aur
apna scooter start karke chalta
bana. Main wohi khadi ki khadi reh
gayi. Meri saanse phoolne lagi aur
jism jalne laga. Mera gala sukh
gaya tha aur sirr bhi chakrane laga.
Main apne aap ko samhal nahi paa
rahi thi. Ussne mujhe dekha tak
nahi. Main gusse se laal peeli ho
rahi thi aur tabhi school ka
sweeper Jagat aaya aur mujhe
bola... "School hour khatam ho
gaya hai. Ab ghar jao. Yahan pe
khade mat raho. Abhi mujhe jhadu
maarna hai. Bahut dhool udega."
Woh kaafi achchi tarah se hi mujhe
bola par main itni gusse mein thi
ke mere muh se gaali nikal gayi.
Maine jawab diya... "Ja behenchod,
apna kaam kar. Mujhe tangg mat
kar." Meri gaali sunke woh bhi
bahut gusse mein aagaya. Woh
bolne laga... "Kyun be saali, gaali
deti hai? Chal Principal ke paas.
Chal..." Principal ka naam sunte hi
main darr gayi. Principal mujhe
bilkul pasand nahi karta tha aur
mere uniform par bhi kaafi aitraaz
tha. Jagat ne meri baazu ko pakad
ke hila diya aur mujhe ghaseetne
laga. Mujhe usse rokna tha par jab usne mujhe chhuwa,
mere purey badan mein maano
bijli daudne lagi. Jagat mujhse
umar me 5-6 saal bada tha aur
kaafi taakatwar bhi tha. Toh main
kosish karke bhi usse apna haath
chura nahi paayi. Hum Principal ke
room ki taraf badh rahe the aur
mera darr bhi badh raha tha.
Main kaafi tanav mein aa gayi thi.
Pehle se hi mere badan mein
sholey bhadak rahe the aur Jagat
ne mujhe chhukar usse aur
bhadka diya; aur tabhi, jab hum
first floor pe the, maine kisi tarah
se usse dhakel diya ek khaali class
room ke andar aur bahar se
darwaja bandh kar diya. Woh
andar bandh, darwaaje pe mukke
aur laath maar raha tha, aur main
bahar khadi, wahan se nikalne ki
taiyaari mein thi. Ek do kadam
aage badhte hi seerdhi pe kadmon
ke aawaz mujhe miley, aur saath
mein chaabiyon ki chan-chan.
School ka chaukidaar idhar aa raha
tha class-rooms ke darwaajon pe
tala lagane. Jagat ko room ke
andar bandh karne ke baad jo
shaanti mujhe mili thi woh pal
bhar mein gayab ho gaya. Mujhe
lagne laga ke aaj mujhe Principal
se koi nahi bacha sakta.
Jagat ko ab rokne ka ek hi tareeka
tha. Main daudke uss class room ke
andar ghus gayi jahan pe Jagat
kaid tha aur usko andar se bandh
kar diya. Woh tab tak shaant ho
gaya tha. Maine usse kaha...
"Dekho, chaukidaar idhar aa raha
hai darwaaje pe tala lagane. Woh
pehle room check karega. Agar
usne hum dono ko yahan dekh
liya, toh meri toh beizzati hogi hi,
tumhari naukri bhi jaayegi. Toh
hum kahin chup jaate hain. Woh
jab sab kaam karke laut jaayega
toh hum bhi yahan se nikal
jaayenge. Pehle iss room se nikalte
hain." Woh bhi raazi ho gaya.
Mujhe pata tha ke agar hum abhi
nikalne ki kosish karein toh woh
humein dekh lega aur sayad pakad
bhi lega. Toh hum daudke first
floor ke ladies toilet mein jaake
chup gaye. Waqt wahan pe jaise
tham sa gaya tha. Garmi mein main
pura pasina pasina ho gayi thi.
Toilet ke darwaaje se thoda nikalke
dekha toh chaukidaar theek
seerdhi ke saamne khada hoke
beedi pee raha tha. Main bore
hone lagi thi. Ek pal ke gusse ne
mujhe iss sweeper ke saath ladies
toilet mein bandh kar diya, aur jo
iss sabka wajah hai, Manish sir,
woh abhi ghar mein aaram karta
hoga. Manish ka naam dimag mein
aate hi mere jism mein phir se
hulchul hone lagi. Main Chemistry
lab mein aaj beete palon ko yaad
karne laga aur main phir se garam
ho gayi. Mere khule peeth mein
achanak se kaisi ajib si gudgudi
hone lagi.
Main soch rahi thi ke sayad se yeh
mera vaham hoga par main galat
thi. Jagat chupke se mujhe bola...
"Ruko! Tumhare peeth pe ek
makdi hai." Mujhe makdiyon se
bahut darr lagta tha aur main
chillane hi wali thi par maine
khudko rok liya. Usne apne
haathon se uss makdi ko hata diya,
par jab uske haath mere badan
mein laga toh phir se maano ek
bijli si daud gayi mere badan se.
Issi hungamay mein meri odhni
thodi neeche aa chuki thi aur mera
cleavage saaf dikh raha tha. Maine
dekha Jagat mere chhati par
nazrein gardhaye rakhka hai aur
uske aankhon mein kaisi ek
chamak hai. Mujhse aur raha nahi
gaya. Main uske taraf badhne lagi.
Main kabu se bahar ho gayi thi aur usko pakadke chumne lagi.
♥Mama: Oh my God! Pehli baar ek
sweeper ke saath??
♥Maa: Main bekabu thi aur wahan
jo bhi hota main ussi ke saath kar
leti.
♥Mama: Hai! Kaash main hota
wahan. Jo bhi ho. Aage bata.
♥Maa: Phir main uske hoton ko
chumne lagi aur hum dono ke
jubaan ek dusre ke saath lipat rahi
thi. Woh pehle pehle thoda ghabra
sa gaya tha par kuch pal baad woh
bhi mazey uthane laga. Usne
mujhe kasske pakda tha aur uske
jismani taakat ke saamne main
moum ke tarah pighalne lagi. Uska
khada lund uske pant ke andar se
mere chut ke darwaaje pe dastak
de raha tha. Maine uske pant ke
andar haath daalke uske lund ko
pakad liya. Main uske lund ko
dheere dheere massal rahi thi aur
woh mere hothon ko apne daaton
se kaat raha tha. Uski taakat kisi
janwar ke jaisi thi. Mere kameez ke
andar apna haath ghusake woh
itne zor se meri gaand ko daba
raha tha ke, kuch der baad woh
dukhne laga. Maine uske shirt
utaarke uske purey badan ke
chumne lagi. Jab maine uska pant
utara toh ek mota sa lund mere
saamne khada tha.
Zindagi mein pehli baar koi mujhe
chodne wala tha aur mujhe uska
itna bada lund samhalna tha. Us ko
dekhte hi mere boobs jaise jhumm
uthi, aur jaise koi janmon se
bhukhi kuttiya kisi khaane ki cheez
pe jhapat ti hai, main uske lund par
jhapat ke usko muh mein le liya
aur purey galey tak ghusa liya. Hum
dono ko hi ekdum chup rehna tha
aur isiliye hum har dard ko chup
chap sehte jaa rahe the. Dheere
dheere main uss lund ko chusne
lagi. Meri chut puri tarah se bheeg
gayi thi aur aisa lag raha tha ke
wahan pe kisine maano aag
laga diya hai. Mujhse aur raha nahi
jaa raha tha. Mujhe apni chut ki
aag bujhani thi. Main kaafi der tak
uske lund ko chusta raha. Phir
maine apne kapde utaarke uske
saamne khadi ho gayi aur boli...
"Ab tumhe jo karna hai karo..."
Woh sayad thoda hichkicha raha
tha aur isiliye ab tak usne bolne
layak kuch kiya nahi tha. Magar jab
maine usse kaha ke uski jo marzi,
woh kar sakta hai, tab uske rang
dekhne ke the. Usne pehle mere
baalon ko pakda aur thoda hila ke
mere gardan par apna daant
gadhaya. Mera pura badan hilne
laga. Woh ek haath se mere boobs
ko kisi janwar ke tarah daba raha
tha aur dusre haath se mere chut
pe ungli kar raha tha. Aur main
toilet ke deewar se chipki huyi
khadi rahi. Mere purey badan ko
chumne aur masalne se jab uska
jee bhar gaya toh usne mere
jaangho ko uthaya aur uske beech
se apne lund ke liye jagah bana
liya.
Meri 16 saal ki tamanna puri ho
gayi. Ek mota sa lund mere chut ko
phadke andar ghusi. Suresh main
bata nahi sakti woh feelings. Mujhe
tab cheekhna tha, chillana tha,
galey phadke bolna tha 'mujhe
chodo. Jee bharke chodo. Mere
chut ko phad do.' Par mujhe chup
rehna tha. Woh apni puri taakat se
mere komal chut ko apne lohey ke
lund se ghayal karta jaa raha tha.
Pehli baar itna dard huwa ke mere
aankh mein aansu aa gaye. Mera
pura chehra laal pad gaya. Par
main uske lund ke har vaar ko liye
ja rahi thi. Kuch der baad mera
jism jawab de gaya main aur nahi
le sakti thi. Uska taakat aur bal kafi
zyada tha mere liye. Aur condom
bhi nahi pehna tha usne. Maine ek
jhatke se usko hataya aur phir
uske lund ke upar jhapat ke phirse
chusne lagi jab tak woh apna maal
ugal na de. Aur jab woh
jwaalamukhi phata toh mera muh
safed chip-chipa rass se bhar
gaya.........Mama: Toh kaisa laga bhaanje?
Main thodi der chup raha. Mera
lund khada ho gaya tha.
♥Main: Kya kahun?
♥Mama: Achcha laga na?
♥Main: Hmmmm..
♥Mama: Haan mujhe pata tha...
tujhe itna achcha nahi laga. Chal
film dekhte hain.
♥Main: Film???
♥Mama: Haan... Bahut achchi film
hai. Ekdum mast. Maza aa jayega.
♥Main: Kaun hai uss film me?
♥Mama: Khud hi dekh lena.
Maine bina baat aage badhaya aur
unke piche chalta bana unke
bedroom tak, jahan pe TV tha. DVD
player on karke Suresh mama ne
usme ek disc dala. Pehle ek blank
screen aaya. Phir maine dekha do
nangi ladkiyan, dono hi firangi, ek
garden mein naach rahi hai aur
kuch ladke bhi unke sath naach
rahe hain. Maine mama se pucha
♥Main: Toh ab aap mujhe porn film
dikhayenge?
♥Mama: Sahi samjha.
♥Main: Par yeh dekhke main kya
karun?
♥Mama: Dekhta ja. Sab samajh
jayega. Yeh part ko toh maine edit
karke andar dala hai. Asli film toh
abhi suru hi nahi huyi.
Main phirse dekhne laga. 5-10
minute tak woh nanga naach
chalta raha. Phir se ek do second
ke liye ek blank screen aaya. Aur
uske baad screen pe mama k hotel
room ka drawing space dikha. Do
aadmi sofa pe baithe hain. Dono hi
kaafi hatta-gatta. Koi handycam
leke shoot kar raha hai. Thodi der
baad awaaz aayi toh pata chala
woh Suresh mama hi hain. Camera
jab dusri taraf ghuma toh mere
dimaag mein hulchul si mach gayi.
Main sochne laga ki main sayad se
koi sapna dekh raha hun. Neele
rang ki saari, aur noodle straps
blouse, aur kuch chote-mote
gehne. Baal khule huwe aur halka
sa make-up. Maine apni mummy ko
aise kabhi nahi dekha tha.
♥Mama: Kaisi lag rahi hai film?
Main kuch kehna nahin chahta tha
phar mere muh se phisal gaya...
"Suru se hi superhit."
♥Mama: Tu teri maa ki tarah hi
chutiya hai. Ha ha ha ha ha.
Maine koi jawab nahi diya. Wapas
film pe hi concentrate karne laga.
Maa aa k sofa pe woh do aadmi k
beech baith gayi. Unme se ek maa
ki taraf jhuk gaya aur dusre ke
taraf maa jhuk ke baithi. Phir un
sab mein baatein chalne lagi. Mama
ne unn dono k naam bataye.
♥Mama: Yeh Kumaar hai aur yeh
Sanjeev.
Dono mein se ek pura takla tha.
Uska naam tha Kumaar aur ek k
dahine gaal pe gehre ghaav ka
nishan tha, uska naam Sanjeev tha.
Unn sab mein kuch baatein chali jo
theek se sunaai nahi diya. Phir
camera maa k upar focus huyi. Maa
ne ek baar upar dekha aur phir sirr
ko neeche jhukake apne saari k
pallu ko thoda sarkaya. Unke bade
bade boobs k gehre cleavage mere
aankhon k saamne the. Mujhe kuch ajeeb sa mehsus hone
laga. Camera kaafi der tak maa k
cleavage k upar hi focus huwe tha.
Aur phir unhone apne seene se
saari k pallu ko hata ke kamar
mein haath daal k khadi ho gayi. Yeh dekh ke mera sirr chakrane
laga.


Phir screen mein woh takla
Kumaar aaya aur maa ko peeche se
pakda. Maa ne apne saari k pallu
ko chhor diya aur ab unka badan
aadha nanga tha, sirf ek chota sa
blouse. Kumaar ne maa k honthon
ko chumna shuru kiya. Mujhse
raha nahi jaa raha tha. Mama the
kamre mein toh main muth nahi
maar sakta tha, isiliye kisi tarha
baitha tha. Kissing scene shuru
hone k kuch minute baad Kumaar
maa k blouse dhire dhire upar
uthane laga. Kuch hi pal mein do
bade bade goley bahar aa gaye.
Kumaar maa k boobs ko janwar k
tarah massalne laga. Kuch pal mein
hi woh laal tamatar jaisa ho gaya.
Phir maa niche baithi aur Kumaar k
pant ka zip utar k uska lund
chusne lagi.. Maa: mmmmmmm....
ummmm.....ummmmm!!!
♥Kumaar: Ha...aaahh! Chus saali
chus... tere liye hi itna lamba
banaya hai.
♥Maa: Ummmmm... ummmm...
aah... ummmm!!!
Thodi der tak maa uske lund ko
chusti rahi. Camera jab thoda duur
gaya aur pura ghar dikha, toh
maine dekha ki Sanjeev sofa k side
mein baith kar unn dono ki
chudaai dekh raha hai. Kumaar
maa ki taango ko phaelake uski
chut maar raha hai aur maa
Sanjeev ko bula rahi hai unn dono ko chudaai mein join karne
ke liye. Maa: Sanjeeeeeeeev! Tu...uh... uh...
tum bhi... aaaaaaaahhh jao.
Tumhara....lu.... lund
chh...uuuu...usna haai...
aaaaaaaaaaah!!
♥Sanjeev: Pehle Kumaar k lund ka
maza lo.. Phir mera.
♥Maa: ahaha! mmmmh!
mmmmhhh! mmmhhh! aha! ah!
ah! uuuhhhh!....
Kumaar sofa pe baitha aur maa ko
apne godi mein bithaya. Maa ne
dheere se Kumaar ke mote lund ko
apne garam chut k andar dala aur
Kumaar uski chut ko neeche se zor
zor se chodne laga. Maa: aaaahhh... aahhh... uuuhhh...
ssss... uuuhhhhh...aaaahh... nahi
nahi... haan... wahan wahin pa...
wah...wahin par.... haan zor se...
zo... zo... aaaaaaaaaaaaahh!
Phir dono ne position change kiya.
Ab maa Kumaar ki taraf muh karke
baithi aur uske mote lambe lund ke
upar uchchalne lagi.
♥Maa: ah! ah! ah! ah! aaah!... uh!
uh! uh! mmmmmmmmm! aaha!.....
Uchchalte uchchalte hi maa ne
Sanjeev ko apni oar bulaya. Udhar
Kumaar uski chut maar raha tha
aur idhar maa Sanjeev ka lund ka
bhi maza lena chahti thi. Sanjeev
ne maa ka haath pakad k kuch der
khada raha. Phir Kumaar chillaya
♥Kumaar: Main ab maal chhorne
wala hun. Aur nahi hota mujhse.
Maa turant phisal ke Kumaar k lund
ko apne muh pe le k chus ne lagi
jab tak uska maal na nikle.
Par abhi maa k jism ko thandak
nahi pahuchi thi. Jis waqt woh
khadi huyi, peeche se Sanjeev aa k
usko pakad liya aur uski boobs ko
phir se massalne laga. Sofa pe Kumaar pada tha toh maa
Sanjeev ko bedroom leh gayi.
Camera bhi uske peeche gaya.
Maa bister pe chut phad k leti huyi
thi aus Sanjeev uska chut chaat
raha tha. Maa: ahaha! mmmmh!
mmmmhhh! mmmhhh! aha! ah!
ah! uuuhhhh!....
Phir Sanjeev ne apne kapde utaar k
maa ki ek taang upar utha k
peeche se chodna suru kiya. Maa
kaafi zor zor se chilla rahi thi. Thodi der baad unhone phir
position change kiya. Iss baar
Sanjeev bistar pe seedha laet gaya
aur maa uske lund ke upar baith
ke kudne lagi. Ab sayad maa ko
bahud zyada dard ho raha tha toh
woh aur zor se chillane lagi.

♥Maa: aaaaaaahhh!!!...
aaaaaaahhh!!!... aaaaaaahhh!!!...
aaaaaaahhh!!!... aaaaaaahhh!!!...
aaaaaaahhh!!!... aaaaaaahhh!!!...
uuuuuuuhhh!!!... aaaaaaahhh!!!...
uuuuuuuhhh!!!... aaaaaaahhh!!!...
uuuuuuuhhh!!!... aaaaaaahhh!!!...
uuuuuuuhhh!!!...
aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh!!!

Kuch minute mein hi maa ki chut
phad ke safed paani jaisa ras nikla
aur unhone ek gehri si saans
bhari... Mujhe bhi pata chala k meri
pant gili ho chuki hai.  Yeh kahani hai mere bachpan ki. Mujhe bass uss raat ki kuch jhalkiyan yaad hai. Main tab 8 ya 9 saal ka tha. Uss din mere nanaji aane wale the. Bahar bahut baarish ho rahi thi. Raat ke 11 baj chuke they par nanaji ka koi ata pata nahi tha. Tab mobile phone ka bhi itna use nahi shuru huwa tha, jo ki aaj hai. Train late tha, ya phir kahin koi samasya ho gayi...humein kuch pata nahi tha. Hum bass unki raah dekh rahe they.



Agle din subah 6 baje mujhe school jana tha toh main 12 baje sone chala gaya. Maa aur papa ne kaha ke woh bhi thodi der tak dekhenge aur phir sone chale jaayenge.


Tab hum logon ka apna ghar bana nahi tha. Hum kiraay ke ghar mein reh rahe they. Main mummy ke saath sota tha aur papa apne ghar mein sote they. Mummy ko jaldi sone ki aadat thi aur papa der raat tak kaam karte they, toh mummy ko neend aane mein takleef hoti thi.


Jo bhi ho, uss raat mujhe achche se neend nahi aa rahi thi. Teen baar meri aankh khuli. Pehli baar dekha toh mummy so rahi thi. Mujhe pata chala ke nanaji abhi tak nahi aaye, aur sayad aayenge bhi nahi, kyun ki aagar nanaji aate toh mummy papa ke kamre mein soti, aur nanaji mere paas. Dusri baar jab main jaaga toh mummy bistar pe nahi thi. Main phir so gaya. Teesri baar kuch aawazein sunke meri aankhein khul gayi. Andhere mein kuch theek se dikhai nahi de raha tha. Kuch pal baad jab thoda sa dikhai dene laga toh dekha ke mere paas koi leta huwa hai. Maine socha sayad se mummy hogi. Par theek se dekhne mein laga ke koi ek nahi, do insaan hai. Kaise ajeeb tarike se kuch kar rahe hain.. Mujhe kuch samajh mein nahi aa raha tha. Ek toh mummy hai. Dusra kaun hai?? Papa? Dono mein badi hi dheeme aawaz mein baatein chal rahi thi.

Maa: Bade achche mood mein hain aaj. Kya baat hai?

Papa (sayad) : Kitne din ho gaye. Hai na?

Maa: Haan par aaj bhi kisi bhi mard ko jala sakti hun...itni garam hun main

Papa (sayad) : Sach? To jalao...

Maa: Dekhna chahoge? Hm um um um ummmmmmm...... ummmmm...

Phir dono baith gaye aur kuch ek dusre ko chumne lage. Aisa chumma main isse pehle sirf TV mein logon ko karte huwe dekha tha. Kaise hoton ko ek dusre ke muh ke andar ghusake, apne zubaan ke ek dusre ke saath lapet ke ek dusre ko chumm rahe the dono. Maa uss aadmi, jo sayad se papa they, unke godi pe baith ke ek dusre ke saath lipat ke ek dusre ke sareer ke har ang ko chumne lage. Phir se unn dono mein baatei shuru ho gayi.

Maa: Tumhara chota nawab toh kaafi bada ho gaya hai.

Papa (sayad) : Kitna chusa tumne isko. Bada toh hoga hi. Ab kya karun.

Maa: Gadi jab itna garam ho gaya hai toh usko garage kar hi do.

Papa (sayad) : Chalo. Garage kar raha hun.

Maa: Theek se karna. Idhar udhar mat ghusa dena.... Nahi wahan nahi! Gand pe nahi... chinku so raha hai. Main chilla dungi. Ah.. Uh uh uh uh uh uh uh!

Mujhe pata nahi chal raha tha ke kya ho raha hai. Mummy uss admi je god pe baith ke uchchal rahi thi aur chilla nahi paa rahi thi toh halki halki siskiyan le rahi thi... Maa: Dekho...mmmm... mmm... mujhssssssse.. chup nahi rahaa... ha... ha.. ha... jata. Main chilla dungeeeeeh! Bahuuuut dard ho raha haaaih. uh uh uh. Please chorr do. Ssssssshhh! Mmmmmm uh! Doggie style... Please

Papa (sayad) : Oh! My bitch wants some doggie!!

Maa: Sure.


Ab isme kutte billiyan kya karengi mujhe pata nahi tha. Mujhe lag raha tha ke kuch ajeeb ho raha hai, par kya, ye samajhne ki meri har kosish nakaam ho chuki thi. Woh dusra aadmi papa hai ya nahi, yeh bhi mujhe samajh mein nahi aa raha tha. Ab maine dekha ke mummy bed ke upar ek janwar ke tarah khadi thi aur woh aadmi ghutne ke bal khade hoke kuch kar raha tha. Mummy apne danton se dant daba kar kisi bhi tarah chup chap woh sahan kar rahi thi. Pata chal raha tha ke unhe bahut dard ho raha hai. Phir bhi woh dono aisa kyun kar rahe hai main samajh nahi paya. Mummy ne aawaz dabane ke liye uss aadmi ko phirse chummna shuru kiya. Aur woh aadmi apne ghutnon ke bal khade apna kamar hila raha tha. Thodi der baad mummy phir boli...

Maa: Mujhse aur nahi saha jata. Aaah! Ab toh meri gaand ko chorr do please! Maine chilla diya toh mera beta jag jayega.

Papa (sayad) : Ha! Ha! Ha! Woh ab tak nahi utha. Iska matlab woh kal subah hi uthega.

Maa: Itni garmi hai toh kal subah woh jab school chala jayega, tab maar lena. Meri choot abhi bahut garam hai. Usko thoda shaanti do.


Woh dono phir bistar pe let gaye... Is baar mummy neeche aur woh aadmi upar. Mummy apne taange phaela rakkhe they aur uss aadmi ne apne pisaab karne wale agn ko mummy ke taangon ke beech kahi ghusa diya aur usko wahin pe hilane laga. Mummy ki siskiyaan tab bhi nahi ruki...

Maa: mm.. mmm... mmm... ah... ah... ah... ah... ah...

Papa (sayad) : Kya? Choot ko sukoon mila?

Maa: Haan... Haan!... mill... mill... mill...raha hai... mera sayad nikalne wala hai... Uima.. Uima...aah. Tumne condom pehna hai na?

Papa (sayad) : nahi... Kya ruk jaaun?

Maa: Nahi nahi... Abhi mat rukna... Abhi rukey toh mar jaungi... Karte raho... Maza aaa aaaah... Aaa...maza aa raha hai... Aaaaaaaaaaaaaaah! Mera nikal gaya.

Papa (sayad) : Aur mera bhi...

Maa: WOW! Ek saath?

Dono bistar mein pade rahe. Saansein phuli huyi. Pura pasina pasina. Aur kuch duur main. Apne aankhein bandh karke pada tha. Par mujhe ek baat sabse ajeeb lagi- agar mummy papa ko yeh sab kuch karna hi tha toh mere saamne aise chori chupe kyun? Woh apne kamre me bhi toh kar sakte they!

Mai Nay Mummy ko jungle main chudwaya

Hi reader i am 18 year old & my name is karan it my first story about main Engg. kerke apne dosto ke saath apne city bhopal aaya tha bhopal lake ka city hai yahann kafi lakes hai ,my father is in marchent navey & my mom Also Engg Graduate wo bhi job karti hai papa jadater tour per hote hai mom bhi bhut open thoughts wali hai meri mummy ka name Menka hai. humlog 6 dost bade chodu type ke hain , hum sab apni apni mom ko chod chuke hai phir humne ek plan banaya ki panchoo
Dost milkar ek dosre ki maa ko chodenge ,to sab say pahle main apne doston ke naam bata doon (vickey,tinku,monti,titu,veru) ,to sab say pahle mere dostoon nay meri mom ki choot phade nay plan banaya. main kaha thik hain par mom ko patana padega or wo tum mujh per rehne do kyuki main to mom ko chod chukka hoon par ek saath mere 5 dosto say chud wane ke liye drama karna padega , Phir main ghar par ja kar mom ko bataya ki titu ka birth day hain wo party ek picnic per dega to mom nay kaha to main bhi chalungi yahi to hum chahte the sara program set karke main dostoon ko bata diya ki agle din hum sab city say 60 km door ak jungle main le ja kar meri mummy ko chodenge .ab main aap ko apni mom ki figure bata deta hoon mom ki hight 5 foot 8 inch hain maa ka rang gora hain boobs 38 , kamar 30 or back boobs(hip/butts) 36 hain, mummy ki age 38 hain ,mom ki taange well shaped hain or patli kamar flat pet per gahri nabhi bahut mast mom ki nabhi main ak nelaa moti jada hai jisse wah or bhi mast lagti hain mom hamesa sadi apni nabhi ke niche bandhe tee hai mummy ke jism per bilkul cherbi /fat jama nahi hain. Agle din hum sab subhe 8 baje ghar say chal diye mummy nay yellow sari pehni thi or tight blouse main unke boobs aajad hoone ko betab the mom nay sadi nabhi ke niche bandhi thi jisse wo or bhi koubsorat lag rahi thi . Phir hum sab jungle ki taraf apni scorpio main chal diye raste main mom ko pani pyas lagi (hum sab mom ko ye dikhane ke liye ki janmdin manane ja rahe hain koob saari cold drink snaks or bahot kuch le gaye the) tabhi monti nay mom ko cold drink dedi cold drink main halke nashe ki davai mili hui thi mummy cold drink pete hi madhos ho gai or mast ho gai (mom scorpio ki peche wali seet per bai thi or unki ek taraf vickey or ak taraf tinku baitha tha , monti or titu sabse peche wali per bai the main draiving kar raha tha or veeru mere saath waali seet per tha) phir mom mast hota dekh titu bola aunty aaj to bahut mast lag rahi ho to maa nain kaha thanks phir mom nain kaha kya ac on nahi hai mujhe bahut garmi lag rahi to veru nay kaha nahi aunty ac on phir mom nay kaha mujhe to garmi lag rahi main to apni sadi uttar rahi ho or mummy nay sadi uttar di mummy blouse or peticoot main thi ,blouse ke v shape main say mom kay bahut jayada boobs dikne lage . tab hi titu bola aunty aaj mere b/day per kya dogi to mom boli jo tum chaho tab titu bola aunty aap ke ghar ke nariyal bahut sunder to mom boli or unka pani bahut meetha hai to hum ye double meaning wali baat per has diye per mummy kuch nahi samjhi or mom bli mujhe to aab bhi garmi lag rahi or mom nay peticoot or blouse bhi uttar diya cold drink apna aser dikha rahi thi or mom sky blue bra or same colour ki penti main aagai to titu bola aunty aap ka kya figure hai to mom has di or boli titu tum bahut badmash ho, bahut main tain karana padta hai or phir mom nay apne haath seet ke peche kar liye jisse mummy ki boobs hawa main tan gaye .phir vickey mom ki tundi (nabhi) main or nabhi ki golai per ungli pher nay laga to veru bola aunty aap ki navel is so beautifull mummy boli pata nahi tum mardo ko meri navel kyu mast lagti hai phir veeru bola aunty aap apni nabhi main say moti nikal kar ise chidwa kyu nahi leti ho
to mummy boli abki bar ise nikaal kar jarur chiwaongi tabhi tinku mom ki nabhi say moti nikal nay laga per us pe nahi nikla to vickey mom ki tundi ko chusne laga to mummy nay apne dono haatho say uska sir pakad liya or vickey mummy nabhi khub der tak chusta raha or chus chus ker moti nikal diya phir to mummy bahut frank ho gai, or monti or titu mummy ke boobs pakad ker masal nay lage to mummy boli titu aaj tumhara
b/day hai or mere paas is coot ke alawa or kuch bhi nahi hain or mom boli titu kyat um meri choot maroge per tab hi mom boli ke titu tum ko to choot mil jaye gi per ye log bhi to choot ke liye tadap te honge kya tum aaj ke din meri bur apne dosto ke saath sare karna chahoge to titu bola aunty jab aap ki bur ka tarbuja kate ga to phir sab main batega or phir hum sab husne lage ,phir mummy boli per tum sab meri choot ki dhajjiyan mat uda dena or phir mummy husne lagi. Mummy haste hua keh rahi thi mere baccho meri choot ki khal chir do phad do.veru bola aunty tumhare bete ke aage tumhari choot phadenge ,main bola salo meri maa ki choot apni maa ki choot ki tareh chodna Kahi mummy ki choot nap hat jaye to mom boli bete jab chudna hai to darna kya. Tab hi veeru mere kaan main bola abhi junle aane main der hai thodi masti ho jaye aunty ke saath to main bola main kab mana rara ho tum chaho to mummy ki kutiya(bur) abhi chir do phir veru bola aunty hamara ak dost or hai uska naam maddy hain main ak dum chauk gaya kyuki mere dost mujhe ise naam say bolatain hain per mere ghar waloon ko mera ye naam nahi pata ,phir veru bola aunty maddy ki mummy bahut pataka hain mom ko ye nahi malum tha ki ye log unhi ke bare main baat kar rahe hain phir mom boli us kutiya ki bur nahi phadi adhi tak tum logo nay,veru bola aunty us ki mast jawani dekh ker socity waaloki ki bhi laar tapkne lagti hai ,mom boli aisi kutiya ki bur main to gadhe ka lund gusedna chahiye phir tinku bola or aunty us kutiya ki bur ki mahak pane ko to hum sab ke dady bhi betab hain ye sab baat sun ker mom ko kuch jalen hone lagi .or mom gusse boli bhagwan kare iyse kutiyaon ki choot ko 100 -200 admi ak sang chod de or phir bhi choot na phate to kutte , bell(ox),bhaisa(male bafellow)mil ker Sali ki buriya ka tanka tod de hum sab muskrane lage or tabhi gadi road say utar kar jungle main ghusjati hain or 5-6 km ak dam sun san jagah main ruk jati hain (hum apne saath apni surksha ke liye 2 pistol or 1 mouser legaye the,or rubber ki bullet wal pistol bhi) wahan per koi nahi tha charo taraf jungle hi jungle paas hi ak grass ka field tha or us jagah kob sare tree bhi the trees shadow main mulayam grass ka field sunder lag raha tha or pas hi ak saaf pani ka talab tha mummy gadhi se uttar ker talab main ternelagi or jab mom talab say bahar nikli to titu nay mummy ki bra or panty uttar di mom ab bilkul nude thi or hamare 6 lund chodne ko tayar the hum logo nay bhi apne kapde utar diye , mom apni pussy hemesha cleen shave rakhti hai or mummy grass per let gai veru or vickey mom ki chuchiyan chusne lage titu mom ki nabhi chusne laga monti choot ki phanke chusne laga chuste chuste use mom ki choot main rakhi taufi nikal aai wah bur ras main bil kul bhigi hui thi monti nay thodi der taufi ko chusa or phir wo taufi titu ko dedi titu nay wo nabhi main ghusa di nabhi ras ka madur pan ker nay laga mom safar main apni choot main taufi rak leti hai or tinku mom ke rasile hoot or main apne lund ko sahlate hua kah raha tha chus dalo is kutiya ke jism ko . hum sab mummy ke jism ko chuste samy un part per kaath khate main or veru chuchi ko masal ker dabate or chuchi ki ghundiyo ko ungli say masal dete ya phir ghundiyo ko danto say daba daba ker mom ke istano ko masal deta ,titu mom ki nabhi ko chuste chuste tundi ke kinaro per kaath khata or monti bur ki phanko ko danto say daba daba ker chusraha tha mom ko bahut maja aaraha tha phir hum sab bari bari apni position change kar lete kabhi koi chuchi ki ghundi chusta to kabhi tundi to kabhi choot ki phanke.phir mom boli b/day boy apna gift lele mom chahti thi ki ab hum log unki choot say khele, phir titu mom ki choot lene ko tayar ho gaya or monti ,vickey mom ke boobs masalne lage phir titu nay apna 8 inch ka pahlwal mom ki choot per sata
diya or mummy boli chod dalo apni is kutiya ko. .....oh....oh..yes.es..ses...hai....main....mar...gayi....ye..kya ...ho..raha hai.....ohffff.f.f.f.f.f. ab aur sehan nahi hota.....dal de raja...tera mota land dal meri choot me aur ise phar de...to ye dal diya....ab bating kitna chahiye...nahi to chut phat jayegi...usne adha hi dala tha mom boli bas.wo adhe ko hi andar bahar karne laga...phir wo mauka dekh kar jhuka aur unke lips ko choosne laga aur....achanak pura land ghuser diya....mummy chilla nahi saki kyoki lips uske mooh me the...usne thora pause karte hue in-out chalu kiya aur mom bol uthi......are aur ho to dal de bahut maza aa raha hai.....aur sare kamre me phach...phach....ki aawaj....ane lagi.or titu ka cum mom ki yoni main nikal gaya

phir mom boli mere yaroo tum mujhe jannet ki ser kara do ab bari veru ki hai
mummy boli phir veru apna 9 inch or 4. 5 inch ka mota jo ki titu say bada tha
or mom boli mere veru raja chir de apni aunty ki choot.
veru kissed her all over her belly veru nay apna khada Lund meri maa ki choot me daal diya. She was shouting now--yes veru fuck your friend�s mom fuck your slut aunty I could not believe it--main apni sexy maa ko nangi karke chodte dekh raha tha. fill me with your cum veru, put your sperm inside friend�s mom pussy, fuck me & tear my pussy, she said and passed her trademark sexy smile. veru ejaculated his semen inside mom after 15 minutes two naked bodies exploded.

Ab monti bola main chodunga is aunty ki kutiya ko or usne apna lund haaton main le ker mummy ki yoni per sata diya or usne jaise hi unki bur mein ghusana shuru kiya unhone chikhna shuru kar diya ohhhhhhh nahih mujhko chodddddddddddddddd do kubhi ye moka mile na mile or jor se wo jor jor se chode ja raha tha uski
speed bahut tej ho gayi thi aawaze aa rahi thi unki body mein se aisa lug raha tha ki koi slap mar raha ho unki gaand dekhi puri kaap rahi thi aage piche mmmmmmmmmmmmmmmmm oggggggggggg ohhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh orrrrrrrrrrrrrrrr mmmmmmmm usne mom ko kes ke pakad liya i know ki monti ka cum nikalne wal hai mummy nay bola ki cum ko under hi tapka du kuch nahi hoga usne kes ke pakad liya or ek dum se speed tej kar di or cum ko rokne ki puri koshish ki or phir 5 minute mein ek dum se bahut sara cum nikal gaya mummy ki choot ke under.

Mom boli tum sab bahut badiya log ho mujhe maja kara rehe ho abhi tak tum teeno meri choot ka band baja diya hai man to ker ta hai tum san ka lund is bhosdi main ak bar main le loon phir mom talab per nahane chali gai or idher hum nay deside ker liya ki ab ki baar momm ki chudai vickey karega ,mummy talab main rest ker rehi thi chudai say unki bur thak gai thi idher hum log aaps main baatin ker rehe the titu or veru keh rehe the teri mummy ki chuchiyan itni badi ,gol or thos(hard)kaisay hai to main kaha ki mom ak bar usa apni sister ke yahaan gai thi tab hi unhone apna breast implant karaya , phir main bola ki yaroo mari mausi bhi bahut pataka hai ab jab bhi wo India aayengi unki youni
Ka bhi bhog lagwaoon ga tum sab ko or hum sab has diye.phir monti bola ki bhai karan aunty ki choot kitni kasi hui hai man to karta hai ki 2-3 dino tak codta rahoo tab veru or titu bole ki wastav main aunty ki choot bahut tight hai hamare mom ki choot to phel gai hai to main bola ki aakhir mummy kiski hai . main bola ki hamare pure pariwar main koi mard nahi hai jo mummy KO chodna nahi chahta.

Phir maa talab say bahar aaker let gai or vickey bola its my turn phir vickey grass per leti hui mom ko upper say niche dekne laga unki hawa main uthi hui chuchiyan or talab main jane ki wajah say unka jism gila ho gaya tha or pani chuchiyo or pet per say hota hua unki nabhi main bhar gai or mom ki cleen shaved puddi ki phanke pani say bhig ker mast ho gai thi.
Sab say pahle 5-10 min tak vickey mom ki chuchi masal ta raha phir wo chuchi ki gundiyo ko ungliyo say masal nay laga phir wo ghundiyo ko chusne laga or kabhi kabhi ghundiyo ko danto ke deba deta phir wo mom ke pet per kiss kerte hua mom ki tundi(navel) chusne laga mummy nay apne dono haato say uska sir pakde liya or apna sir uper ko khich liya or apne danto say apne lips deba ne legi or mummy hasne lagi mom ka pet halka halka kaap raha tha or mom kah rahi or jor say chus meri nabhi ko ,phir nabhi chusne ke baad vickey mummy ki bur ki phanke haat say dabane laga jaise bade budde logo ke per dabate hai phair usne mom ki bur chusna suroo kiya or 3-4 min bur chusta raha hay ye kaisa nasha hai.....me mar gayi are...are ...oh..oh....yes...aur andar ...aur andar......yes...yesss.... ...main mar jaoongi.....hay aaja re...... mom boli meri choot me land dal de.....vickey nay mom ki tango ko upar ki taraf uthaya nichhe ek gadhi(car) pillow lagaya aur land ko choot me dhire se dala....choot kafi soft aur pholi thi....adha land dal kar vickey poocha thik hai......mummy nay kaha dard ho raha hai....vickey thoda land nikal kar andar bahar karna suru kiya....mummy ko maja aane laga aur wo chutar hilane lagi phir vickey nay achanak pura land under ghusa diya.....wo jor se chilayi.....fat gayi re meri choot...kya ghusaya hai doosri hi ball per sixer diya re..... .....vickey nay unki masti ko dekhte hooye speed bhara di aur mom ko maja aane laga....wo bol uthi...aur jor se dal....phar dal re.....kya..chodta hai..re...aisa maja to pehli raat ko bhi nahi aaya.mom boli, meri choot ka to aaj bhosra banega...kyo ki meri choot kafi....tang(narrow) hai....... aur mummy khalas ho gayi..........or mom boli ki thoda rest ker liya jaye or hum sab fast food or cold drink pene lage mom nay thodi si cold drink apni choot ko bhi pila di or cold drink ki thandak pa ker choot phir say khil utthi or pehle ki tareh choot main kasav aagya or 1 hour bad mom phir chudne ke liye tayar ho gai ab ki bari tinku ki thi.

Tinku mom say bola ki aunty apki chudai talab ke pani main karenge mom boli good idea mom pani main let gai pani unke pet baraber tha or hum logo nay unke sir ke niche ak bada ka stone rak diya jisse unka sir pani na dube mom ki choot ko talab ka pani pure tarah kaver kiye tha yani choot puri tarah pani main doobi hui thi or tinku talab main bane ak gadhe main khada ho gaya or phir mom ki tango ko phaila ker unki tango bhich khada ho gaya or uska tana hua lund bilkul mom ke choot ke ched per tha or wo chodne ko tayar. laga.....oh....oh..yes.es..ses...hai....main....mar...gayi....ye..kya ...ho..raha hai.....ohffff.f.f.f.f.f. ab aur sehan nahi hota.....dal de raja -kya dalu darling...tera mota land dal meri choot me aur ise phar de...to ye dal diya....ab batana kitna chahiye...nahi to chut phat jayegi....tinku nay adha hi dala tha mom boli bas..tinku lund under baher karne laga or ak saath pura lund ghusa diya mummy uuuuuuuuiiiiiiiiii phaddddddddddddiiiii chhhiiirrrdddeeeeee choot pani main doobne ke kakan salp salp ki aawaj aarahi thi mom ki choot main say lund ke saath pani bhi choot main chala jata tha jisse choot per lund ki pakad babut majboot ho jati or lund choot main choot ko phadta hua muskil say gusta or tinku nay mom ki choot ki aisi ghisai ki ke choot ka pani chute gaya or tinku nay apne cum say mom ki nabhi bhar di or phir ak ungli tundi(navel)main ghusa ker nabhi ki malish ker nay laga or phir mom or tinku pani say baher aa gaye or mere pancho dost mom ke jism say lipet ker mummy ko thanks kehne lage koi chuchi daba raha tha koi choot masal raha tha koi nabhi main ungli dale hua tha mom hasne lagi thi or bole rahi thi agli bak kum say kum 10 dosto key sath mil ker chodna tab main bola its my turn to mere dost bole aaj bas to apni maa ki choot phadte hua dehke ga chode ga nahi,mere dost bole bete teri mom ko to call girl ban jan chahiye phir wo mom say bole aunty aap ki choot to randi bazar main khoob bikegi to mom boli ghar ke lundo say bache tab to bikegi to mere dost bole ki aunty apni family ke kin kin logo say chudi ho to mom boli ki phele lunch ka arrange karo phir pehli chudai say ab tak ki sari chudai yo ke bare main bataogi ,main bola chalo thik hai dupher ke 12 bej rahe the hum sab mom say bole ki hum kane ke liye khuch fruits tood late hai jungle main say mom boli aacha hai tum sab jao nahi to or pereshan karoge or main jab tak yahaan graas sheet per aaram ker leti hoon .

Or hum sab jungle main apni pistol le ker fruits lene chele gaye jab hum 2 baje wapes aaye to dekte hai ki meri mom to gehri ned main so rahi hai lekin wahan per 3 jangli aadmi meri mom ke jawani ko nihar rhe hai hum samaj gaye ki ab ye unhe choddege or hum agar bachanay gaye to ye log or logo ko bula layenge is liye hum nay deside kiya ki ab mom ki chudai in jungliyo ke dwara dekenge or phir wo log mom ki jawani say khel nay lage mom ki ned tot gai per wo chikhi nahi balki sahas se denti rehi wo samaj gai ki bacche bhi nahi hai or ager unhone koi chal chali to ye log kuch bhi ker sakte ho sakta hai or logo ko le aaye mom man hi man sochne lagi ki ab to choot phadwani pedegi,or mom sochne lagi ki chalo unki desire bhi pori ho jeye gi neegow se chude ki kyuki ye log neegrows say bhi strong the or ab khel suroo hua choot ki chudai ka or mom khus ho chudwane ko tayar ho gai.
Do junglio nay mom ki tange hawa main utha di jisse mom ki choot khul ke samne aagai or ak jungle nay apna lauda mom ki yoni per sata ke jor say apna laura mom ki yoni main ghused diya is ka lauda 12inch lamba 4inch mota tha ak ki jor dar chik nikal gai or wo chillai ki meri ccccchhhhhhoooooooottttttt ppppphat gggggggggiii uuuuuuuuiiiiiii mmmmmmmmmaaaaaa phaaaaaaadddiiii kkkkuuuuuuuttteee nay meri ccccchhooott or mummy ki choot say khoon bahne laga or phir wo tinu bari bari 1-2 hour tak mom ko lagatar chodte rahe or phir wahanse chalegaye unke jate hi hum sab wahan pahuche to main bola mummy teri choot say khoon kai say beh raha hai to wo boli 3 junglio nay teri maa ki chudai ki thi tum sab ke jane ke baad or mom hasti hui boli phad di teri maa ki choot uuuuuuuiiiiiii mmmmmmmmaaaaaa mmmmaaaarrrrrr ggggaaaaaaaiiii.

Phir hum sab nay lunch kiya or mom nay bataya ki sab say pehle mere mujhe mere papa or unke 4 dosto nay goa main beach per choda tha us samay meri age 15 year thi bahut khoon nikla tha meri choot say us samay meri mom dady say bahut naraj hui ki or keh rahi ki in kutton say apni beti ki choot kyu phadwai per dady nay unki choot ki malish ker ke unko mana liya tha phir next time nanaji or unke 3 dosto nay khet choda tha mujhe uske baad mere ko meri mausi ki shadi main mere 2 mamaji or 1 mausaji or 3 mama ke dosto nay is choot ka ras pan kiya to mere dost bole kaas hamare mom ki bhi choot phadi hote kise nay to mom bole ye sab choot ke nasib main hota hai phir mom boli ak baar main office ke kaam say Uk gai apne 2 boss ke saat wahan per best deal ke liye mere dono boss nay mujhe 3 english clients say chudne ko bola or phir un pancho(five) nay milker choot ka Band bajaya or mere India ke office may mere 2 peon or 3 security gards nay mil ker late night tak choda mere dosto nay kaha aunty app ko to bahut maja aaya ho ga to mummy boli ye choot to bani hi phdene ke liye hai or mummy boli mere husband ke sare dost mujhe chood chuke hai or to or is ke dada ji nay bhi apni last b/day per apne 3 dosto ke shath chudai ki or phir hum wahan say ghar ke liye chal diyeor raste bhar mom ke jism say mere dost khel te rahe to dosto ye thi meri mom ki gang chudai