Saturday, 13 June 2015

साले की शादी में साली की चुदाई

हैलो दोस्तो, मेरा नाम परवीन राजपूत है और मैं गाज़ियाबाद से हूँ। मेरी अभी एक साल पहले ही शादी हुई है। मैं काफी समय से अन्तर्वासना पर आप सभी की लिखी हुई कहानियां पढ़ रहा हूँ।
आज मैं भी आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ.. जो अभी कुछ समय पहले ही मेरे साथ घटी है।
बात तब की है.. जब मेरे छोटे साले की शादी थी तो मैं और मेरी पत्नी दो दिन पहले ही मेरी सुसराल गाज़ियाबाद पहुँच गए। वहाँ पर सबसे पहले मेरी साली ने हमारा स्वागत किया। फिर मैं अन्दर गया और सबसे मिलने के बाद मुझे एक कमरे में बैठा दिया गया।
तभी एक लड़की मुझे नमस्ते करते हुए मेरे लिए पानी लेकर आई। मैं तो उसे देखता ही रह गया.. वो इतनी मस्त और सुन्दर थी कि मैं तो क्या.. उसे देखकर तो किसी का भी सोया हुआ लंड अपने आप खड़ा हो जाए।
तभी मैंने उससे कहा- सॉरी.. मैंने आपको पहचाना नहीं?
तभी वो बोली- मैं पिंकी.. आपकी दूर की साली हूँ।
मैंने कहा- साली तो कभी भी दूर की नहीं होती है.. वो तो हमेशा दिलों में होती है।
वो हँस कर बोली- अच्छा जी.. साली से अभी तो ठीक से मिले भी नहीं हैं और आपने हमें दिल में भी रख लिया है।
मैंने कहा- इतनी सुंदर साली को तो दिल और दिमाग़ दोनों में रखना ज़रूरी है।
वो बोली- क्या मतलब?
मैंने कहा- मतलब भी समझ जाओगी..
उसके वो बड़ी-बड़ी चूचियाँ.. क्या तनी हुई थीं.. मैं तो बस उन्हें ही देख रहा था।
तभी वो मेरे पास आकर बैठ गई और नशीली आवाज में बोली- जीजा जी.. ऐसे क्या देख रहे हो?
तभी मैंने उसकी चुदास को समझते हुए कहा- कुछ है.. जो बहुत ही अच्छा लगा है.. इसलिए नज़र नहीं हट रही है।
तभी उसने और भी चुदासी होते हुए कहा- अच्छा जी.. मुझे भी तो बताओ कि मुझ में आपको ऐसा क्या पसंद आ गया?
तो मैंने बिंदास होकर कहा- तुम इतनी सुंदर और सेक्सी हो कि तुम्हें देखकर तो किसी का भी मूड खराब हो जाए।
तो उसने कहा- क्या सच में… इतनी सुन्दर हूँ?
तो मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। जब उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी थोड़ी और हिम्मत बढ़ गई और मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उसके मम्मों पर रख दिया और सहलाने लगा। मैं अपने एक हाथ से उसकी जाँघ को मसल रहा था और वो भी गर्म हो रही थी।
उसने भी मुँह से भी.. “ओ.. आह.. उई..” जैसी आवाजें करते हुए मेरे लंड को पैन्ट के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया।
तभी बाहर से कुछ आवाज़ आई.. और वो एकदम से उठ कर चली गई।
मैं कुछ उदास हो गया..
फिर कुछ समय बाद रात हो चली थी.. तो मैंने खाना खाया और उसके बाद सब अपने-अपने कमरे में सोने चले गए।
ससुराल का घर बड़ा था.. तो सब अलग-अलग कमरों में थे। मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी.. रात के 12 बज चुके थे।
तभी मैंने हिम्मत करके पिंकी का कमरा खोजा और उसके कमरे में चला गया।
वो उधर अकेली लेटी हुई थी और उसने उसने मैक्सी पहनी हुई थी.. तो मैं अन्दर जाकर उसके बिस्तर पर बैठ गया और धीरे-धीरे से उसकी मैक्सी को ऊपर करके उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
उसकी गोरी-गोरी जाँघों को देखकर मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड तन गया।
मैंने दरवाजे की कुण्डी लगाई और अपना लोवर उतार कर उसके बगल में लेट गया। फिर मैं अपना लंड उसकी जाँघों की दरार में रगड़ने लगा, उसका कोई भी प्रतिकार न होते देख कर मैं अपने हाथों से उसके कठोर चूचों को दबाने लगा।
वो एकदम से कसमसा कर मेरी तरफ घूम कर मेरे होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगी। मैं भी उसका साथ देने लगा और एक हाथ से उसकी कोमल नरम चूत को रगड़ने लगा। मैं ऊपर से ही उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
वो बहुत गरम हो चुकी थी और सिसकारियां भरने लगी।
फिर मैंने उसकी मैक्सी और पैन्टी दोनों उतार कर फेंक दीं।
मैं तो बस उसकी चूत को देखता ही रह गया। इतनी चिकनी और गोरी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था।
मैंने उसे सीधा लेटा कर 69 की अवस्था में आ गया, मैं उसकी चूत को और वो साली मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
साली मेरे लंड को इतनी मस्ती से चूस रही थी कि मेरे मुँह से भी ‘ओह.. आह..’ की आवाजें निकलने लगीं।
मुझे और भी ज्यादा जोश चढ़ गया.. मैं भी अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डालकर चूसने लगा। मैं कभी-कभी उसके दाने को दाँत से काट भी लेता.. तो वो एकदम से उछल जाती।
वो मेरे लंड को तो इस तरह चूस रही थी कि मेरी तो जान ही निकली जा रही थी। मैंने भी जोर-जोर से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
वो सिसकारियां भरने लगी और उसने अचानक अपने हाथों से पूरा ज़ोर लगा कर मेरे सिर को अपनी चूत में दबाते हुए अपना पानी छोड़ दिया.. मैंने उसका सारा रस पी लिया। फिर चूत को चाट-चाट कर साफ कर दिया।
वो निढाल हो गई.. तभी मैं खड़ा हुआ और उसके बालों को पकड़ कर उसके मुँह को चोदने लगा। दस मिनट चोदने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसके मुँह में ही छोड़ दिया.. वो उसे जूस की तरह गट-गट करके पी गई और उसने मेरा लवड़ा चाट-चाट कर साफ कर दिया।
अब हम दोनों निढाल हो कर एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए और आराम करने लगे। वो मेरे होंठों को चूसने लगी और मैं भी उसके मम्मों को मसलता रहा।
इसके बाद जब हम दोनों फिर से गरम हो गए तो मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना सुपारा उसकी चूत के मुँह पर लगा दिया.. उसकी चूत गीली थी और वो भी चुदासी थी.. सो उसने मेरे लौड़े को अपनी चूत में ले लिया।
उसकी एक हल्की सी ‘आह’ निकली और फिर एक-दो धक्कों में ही लवड़ा चूत की गहराइयों में गोता लगाने लगा।
बीस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद उसने अपना रज छोड़ दिया और मुझसे लिपट गई उसके माल की गर्मी से मेरा माल भी उसकी चूत में ही टपक गया।
हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में भींचे हुए जीजा-साली की चुदाई की कथा बांच रहे थे।
इसके बाद जब हम दोनों फिर से गरम हो गए तो मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना सुपारा उसकी चूत के मुँह पर लगा दिया.. उसकी चूत गीली थी और वो भी चुदासी थी.. सो उसने मेरे लौड़े को अपनी चूत में ले लिया।
उसकी एक हल्की सी ‘आह’ निकली और फिर एक-दो धक्कों में ही लवड़ा चूत की गहराइयों में गोता लगाने लगा।
बीस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद उसने अपना रज छोड़ दिया और मुझसे लिपट गई उसके माल की गर्मी से मेरा माल भी उसकी चूत में ही टपक गया।
हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में भींचे हुए जीजा-साली की चुदाई की कथा बांच रहे थे।
ये अभी तक आपने मेरे पिछले भाग में पढ़ा था।
तो मित्रों.. किस तरह मैंने अपनी साली के साथ चुदाई का पहला शॉट मारा.. उसके बाद तो अभी पूरी रात ही बाकी थी।
चुदाई के बाद बात करते-करते उसने मेरे लंड को फिर से सहलाना शुरू कर दिया, फिर मेरे लंड को मुँह में भर कर चूसने लगी। मैंने भी उसको मस्त मम्मों को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद हम दोनों फिर से गरम होने लगे।
मेरा लंड एकदम लोहे की रॉड जैसा सख़्त हो गया था.. तो मैंने भी उसको पकड़ा ओर जबरदस्त तरीके से उसके मुँह में अपना मोटा ओर लंबा लंड पेलना शुरू कर दिया। वो भी किसी मंजी हुई राण्ड की तरह बड़े मज़े से मेरे लंड को अपने हलक तक लेकर चूस रही थी।
कुछ देर बाद लंड चुसवाने के बाद मैंने उसे सीधा पलंग पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोल कर.. उसकी चूत पर अपना मुँह रख कर.. उसकी चूत को चूसने ओर चाटने लगा।
मुझे उसकी गुदगुदी चूत चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था। उसकी चूत से निकलता हुआ रस.. जो उसकी चूत से होकर मेरे मुँह में जा रहा था.. जो बहुत ही मजेदार था। कुछ देर चूत चाटने के बाद मैंने उसे ऊपर की ओर उठा कर उसे उल्टा लिटा दिया और उसकी कमर को चूमने लगा।
मैंने उसे चुम्बन करते-करते.. उसकी गाण्ड को अपने दोनों हाथों से उठाकर उसे कुतिया बना दिया।
अब मैं उसकी चूत पर अपने लंड के टोपे को उसकी गाण्ड के छेद पर रगड़ने लगा। मन तो हुआ कि इस बार इसकी गाण्ड मारी जाए.. पर फिर चूत की चुदास ने मेरा मन पलट दिया तो मैंने सोचा अभी तो पूरी रात पड़ी है साली साहिबा की गाण्ड भी बजा ही लूँगा।
वो बहुत ही गर्म हो रही थी.. वो बोलने लगी- साले हरामी जीजा.. अब मत तड़पा.. घुसा दे लौड़ा और फाड़ दे मेरी चिकनी चूत को.. डाल दे भोसड़ी के.. अपना लौड़ा.. ओह्ह..
उसने अपने हाथों में मेरा लंड लेकर ज़बरदस्ती अपने भोसड़े में घुसेड़ना शुरू कर दिया।
मैंने अपने एक हाथ से उसके मम्मे को कसकर पकड़ा और एक जोरदार धक्का मारा.. मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ.. उसकी बच्चेदानी में जाकर लगा.. और उसे बहुत ज़ोर से दर्द हुआ।
वो एकदम से कलप गई.. पर उसकी चीख को मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बन्द करके रोक लिया।
अब मैं कुछ देर के लिए रुक गया और उसके झूलते मम्मों को दोनों हाथों से पकड़कर धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया। कुछ पलों बाद.. जब वो सैट सी हो गई.. तब मैंने फिर से धीरे-धीरे से उसकी चूत में अपना लंड पेलना शुरू किया।
कुछ ही देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो भी अपनी मस्त गाण्ड को खुद ही आगे-पीछे करके मेरे लंड का पूरा मज़ा लेने लगी।
अब मैं भी अपना पूरा ज़ोर लगाकर उसकी चूत को चोद रहा था। कुछ देर की चुदाई के बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया.. जिससे मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था।
अब लौड़े की ठापों से पूरे कमरे में ‘फ़च.. फ़च..’ की आवाजें गूँज रही थीं।
करीब 20 से 25 मिनट की चुदाई के बाद वो दोबारा अकड़ गई और इस बार उसके झड़ने के साथ ही मैंने भी अपना गरम-गरम पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
झड़ने के बाद मैं वैसे ही उसको उल्टा लिटाकर उसके ऊपर ही लेट गया। फिर हम दोनों सीधे हुए और अगल-बगल में लेट गए।
हम दोनों की साँसें बहुत ही तेज़ी से चल रही थीं और वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर उन्हें चूसे जा रही थी।
अब दोनों थक चुके थे.. तो हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे और एक-दूसरे के अंगों को छेड़ने लगे।
फिर मैंने उससे पानी लाने के लिए कहा.. तो वो वैसे ही अपनी मैक्सी पहन कर चुपके से बाहर गई और मेरे लिए पानी के साथ-साथ गरम दूध भी लेकर आई।
सबसे पहले मैंने पानी पिया और फिर मैं बाथरूम में जाकर मूत कर आया..
उसने मुझे बड़ा गिलास भर कर दूध दिया। मैंने दूध पीना शुरू किया और उसने फिर से मेरे लण्ड के साथ खेलना शुरू कर दिया।
वो मेरे लंड को मुँह मे लेकर कुतिया की तरह चूसने लगी। मुझे फिर से मज़ा आने लगा और मेरा लंड फिर से चुदाई के लिए तैयार हो गया और मैंने उसको फिर से कुतिया बनाकर उसकी गाण्ड के छेद पर थूक लगाकर अपना लंड उसकी गाण्ड के छेद पर रखकर एक धक्का मारा और मेरा टोपा गाण्ड में अन्दर जाते ही उसकी ज़ोर से चीख निकल गई।
मैंने अपने हाथ से उसके मुँह को बंद कर दिया… वो दर्द के मारे रोने लगी पर मैंने रहम ना खाते हुए एक और जोरदार धक्का मारा.. जिससे मेरा पूरा लंड उसकी गाण्ड में अन्दर तक चला गया।
वो मुझे अलग हटाने की कोशिश करने लगी.. पर मैंने अपना पूरा ज़ोर उसकी शरीर पर डाला हुआ था तो वो हिलने में नाकाम रही।
फिर मैंने धक्के लगाने शुरू किए.. कुछ देर लण्ड जब अन्दर-बाहर होता रहा.. तो लंड ने उसकी गाण्ड में अपनी जगह बना ली और फिर उसे भी मज़ा आने लगा।
अब वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत में उंगली कर रहा था और धबाधब उसकी गाण्ड को पेल रहा था।
करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद अब मैं अपने पूरे जोश में आ चुका था.. तो मैंने रफ़्तार काफ़ी तेज कर दी और वो भी अपनी गाण्ड को हिला हिला कर मुझे चुदवा रही थी.. मगर मैं झड़ने का नाम ही नही ले रहा था।
कुछ देर उसकी चुदाई के बाद मैं पलंग पर सीधा लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गई। उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर अपनी गाण्ड के छेद पर सैट किया और मेरा लंड एक धक्के में ही सीधा अन्दर चला गया।
वो मेरे खड़े लण्ड पर बैठ कर ज़ोर-ज़ोर से उछल-उछल कर कूदने लगी।
मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैं उसके दोनों चूतड़ों को हाथों में लेकर ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था।
कुछ देर बाद अब मैं अपनी चरम सीमा पर आ चुका था.. तो मैंने उसकी गाण्ड को अपने दोनों हाथों से ऊपर किया ओर ज़ोर से पेलना शुरू कर दिया।
फिर 3-4 धक्के के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी गाण्ड में छोड़ दिया।
कुछ देर वो मेरे लंड पर ऐसे ही बैठी रही और फिर मेरा लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर आ गया।
अब हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेट गए और एक-दूसरे को चूमते और चाटते रहे।
फिर मैंने अपने आप को साफ़ किया और उसे एक लंबा चुम्बन करके अपने कमरे में चला गया।
उस रात मैंने उसको 3 से 4 बार पेला था। वो भी पूरी चुदक्कड़ थी उसने भी मुझे खूब चूस लिया था।

प्यास बुझती नहीं

हाँ तो दोस्तो, अब मैं अपनी कहानी शुरु करती हूँ जिसमें एक बार फ़िर से अब्बु और भैया ने मुझे चोदा।
उस दिन हुआ यह था कि मैं बहुत चुदासी थी और अम्मी नानी के घर गई हुई थी। यह तो आप लोग जानते ही है कि मेरी पहली चुदाई भी अब्बु ने ही की थी और फ़िर अम्मी ने भैया से भी चुदवाया था और अब वो लोग अकसर मुझे चोदा करते थे।
मगर इधर बहुत दिन से अब्बु अम्मी की फ़ैली हुई चूत में मस्त थे और भैया ने कोई दूसरी गर्ल फ़्रेन्ड फ़ंसा ली थी और मुझ पर ध्यान देना छोड़ ही दिया था।तब आखिर अम्मी के बाहर जाते ही मैंने सबसे पहले अपनी झांटे बनाई और रात को अब्बु के कमरे में गई।
अब्बु कोई मूवी देख रहे थे और मुझे देख कर बोले- बेटी, क्या हुआ आज बहुत दिन बाद अब्बा की याद आई?
तब मैंने कहा- आप तो अम्मी जान की चूत में ही फ़ंसे रहते हैं अब आपको मेरा ज़रा भी खयाल नहीं ! आपने मुझे कितने दिनों से नहीं चोदा है।
तब अब्बु ने दुलार जताते हुए कहा- ऊऊओह्ह ह्ह मेरी प्यारी रानी बेटी आजा, आज तुझे फिर से चोदता हूँ !
और यह कह कर उन्होंने डीवीडी बदल दी।
अब उसमें एक ब्ल्यू फ़िल्म चलने लगी। जिसमें एक छोटी सी लड़की को पाँच आदमी चोद रहे थे। जिसे देख कर मेरी आँखें बाहर आ गई और मैंने अब्बु से कहा- अब्बा यह बच्ची इन पांचों को एक साथ झेल रही है और उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकी उम्र भी अभी ज्यादा नहीं होगी।
तब अब्बु बोले- मेरी बच्ची, ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही होते हैं। साली इतनी सी है और तुम खुद ही देखो कि कैसे मज़े ले लेकर पांच पांच लण्डों का मज़ा एक साथ ले रही है। जबकि इसमें एक इसका बाप और एक भैया के अलावा तीन बाहर वाले हैं।
अब ये सब देख कर भला मेरी चूत में खाज़ क्यूं नहीं उठेगी।
तब मैंने अब्बु से कहा- अब्बु, मैं तो आप और भैया से ही चुदवाकर पनाह मांग लेती हूँ।
अब्बु ने कहा- जा बगल के कमरे से अफ़ाक को बुला ला। साला लण्ड हाथ में पकड़े सो रहा होगा।
तब मैं भैया के कमरे की तरफ़ बढी और देखा तो सच में वो अपने लण्ड को हाथ में लेकर सड़का मार रहा था।
मैं जल्दी से बढ़ते हुए बोली- हाय भैया, क्या गज़ब कर रहे हो। भला घर में इतनी खूबसूरत बहन होते हुए तुम्हें यह सब करना पड़े तो लानत है मेरी जवानी पर !
और मैंने झट से उनका लण्ड अपने कोमल हाथ में ले लिया, बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी जल्दी हाथ आगे पीछे करने लगी और फ़िर झट से मुँह में लेकर चूसने लगी और तब भैया का लण्ड पूरी औकात में आ गया और वो मेरे बालों को पकड़ते हुए जोर जोर से धक्का मारने लगे और फ़िर जल्दी ही उनका पानी मेरे मुँह में गिरा जिसे मैं चपर चपर करते हुए चाट गई और भैया से बोली- चलो अब्बु बुला रहे हैं, आज फ़िर से तुम दोनों मुझे चोदकर मज़ा दो।
और भैया का लण्ड पकड़ कर अब्बु के कमरे में ले आई और भैया को देखते ही अब्बु बोले- मैंने कहा था साला मुठ मार रहा होगा।
तब मैंने कहा- अब्बु, आप बहुत तजुरबेदार हैं, सच में भैया सड़का मार रहे थे।
और फ़िर मैंने अब्बु का लण्ड अपने मुँह में ले लिया और भैया पीछे से मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ते हुए अन्दर डालने की कोशिश करने लगे।
तब मैंने कहा- अब्बु जी, मैं भी ब्ल्यू फ़िल्म वाली लड़की की तरह पांच जनों से एक साथ ही चुदाना चाहती हूँ।
अब्बा ने कहा- बेटी, तू नहीं झेल पायेगी एक साथ पांच पांच को।
मगर मैं तो पूरी तरह से चुदासी हो ही चुकी थी, मैंने कहा- कान खोल के सुन लो आप दोनो को मुझे पांच जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है। अगर कल आप लोग ने मुझे पांच जन से नहीं चुदवाया तो बहुत बुरा होगा।
तब अब्बु ने कहा- अच्छा अच्छा मेरी रानी बेटी, मैं तो तेरे भले के लिये ही कह रहा था। अगर तेरी चूत फ़ट गई तो परेशानी तो हमीं लोगो को होगी। मगर जब तू नहीं मान रही तो मेरे बला से। अब चल आज तो हम दोनों से चुदवा ले !
यह कह कर उन्होंने फ़िर से अपना मूसल जैसा लण्ड मेरे मुँह में जोरदार धक्के के साथ अन्दर धकेल दिया और तभी भैया ने पीछे से मेरी गाण्ड फ़ैलाकर इतनी जोर से धक्का मारा कि मुझे नानी याद आ गई ऊऊउईई माआआ मर गई आआह्हहह भैया जरा धीरे से धक्का मारो तू तो नानी याद दिला रहा है।
तब अब्बु ने कहा- बेटी, चाहे जिसका नाम ले पर नानी का नाम ना ले।
तब मैंने कहा- क्यूं?
तब अब्बु बोले- तेरी नानी की चूत मैंने मारी थी और कई साल तक मैं उसकी चूत चोदता रहा था।
तब मेरे साथ साथ भैया का मुँह भी खुला रह गया, तब भैया ने कहा- अब्बु, क्या आपने नानी को चोदा है?
अब्बु ने कहा- हां यार, साली मेरी सास बहुत मस्तानी थी। तुझे तो पता ही है कि तेरी अम्मी की कम उमर में शादी हुई थी। जब मेरी शादी हुई थी मैं 19 साल का था और तेरी अम्मी 16 साल की थी और मेरी सास सिर्फ़ 30 साल की थी। मगर मेरे ससुर की उमर करीब 40 साल थी, वो तुम्हारी नानी को खुश भी नहीं कर पाता था। जाने भी दो इन बातों को, अभी तो फ़िलहाल चुदाई का मज़ा लो। उसकी चुदाई के बारे में फ़िर कभी बताऊँगा।
और तब भैया पीछे से मेरी गाण्ड मार रहे थे और अब्बु आगे से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धक्के लगा रहे थे।
अब मुझे भी मस्ती आने लगी और मैं अपने मुँह और गाण्ड को आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी थी और तब भैया झड़ गये थे। मगर अब्बु जी अभी भी नहीं झड़े थे और उन्होंने मुझे बेड पर खड़ा होने को कहा।
मैं खड़ी हो गई और तब अब्बु ने मेरे दोनों पैर अपने कन्धे के दायें बायें किए और मेरी चूत को मुँह में भर कर चूसने लगे। मैं बुरी तरह तप रही थी और अपने अब्बु का मुँह जोर जोर से अपनी चूत पर दबाने लगी। तब ही अब्बु खड़े होने की कोशिश करने लगे और मेरा बैलेन्स बिगड़ने लग।
तब मैंने घबरा कर कहा- आआअह्हह अब्बु क्या कर रहे है मैं गिर जाऊँगी !
मगर अब्बु नहीं माने और वो मुझे अपने कंधे पर बैठा कर खड़े हो गये। अब मैं अपनी दोनों टांगें उनकी गरदन में कस कर लपेटे हुए थी और अपनी चूत को उनके मुँह से दबाते हुए उनके सिर को भी जोर जोर से दबा रही थी और भैया आंख फ़ाड़े हुए अब्बु के इस पोज़ को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमें भी बहुत आ रहा था।
इस तरह से कोई पहली बार मेरी चूत चाट रहा था और थोड़ी देर बाद ही मैं ऊऊओहह्ह ऊओह्ह आह्हह आआअह्ह करते हुए झड़ गई और अब्बु का रस भी नीचे से पिचकारी की तरह बहने लगा और तब अब्बु मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लेटकर तुरंत अपने झड़े हुए लण्ड को मेरी दोनों चूचियों के बीच में रगड़ने लगे और मैं उनके नोक की तरह लण्ड की टोपी को मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी। पर अब्बु जल्दी जल्दी आगे पीछे कर रहे थे।
तब मैंने कहा- अब्बु, अपना लण्ड मेरे मुँह में दीजिये। आपका सारा माल बेकार ही जाया हो रहा है।
तब अब्बु ने अपने लण्ड को दोनों चूची के बीच से हटा कर मेरे मुँह में डाल दिया और मेरी चूची दबाने लगे और इस तरह से उनके लण्ड से थोड़ा सा रस और निकला, जिसे मैं चाट गई और फ़िर अब्बु ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में ठूंस दिया और उस दिन अब्बु और भैया दोनो ने मेरी गाण्ड ही मारी थी। मेरी बुर के साथ कोई हरकत नहीं की थी और फ़िर रात को दुबारा भी उन लोगों ने मेरी गाण्ड एक एक बार और मारी अब मेरी गाण्ड फ़ड़फ़ड़ा रही थी।
सुबह अब्बु ने कहा- क्यों रानी बेटी, क्या खयाल है? क्या अब भी पांच जन से चुदवाओगी?
मैंने गुस्से से कहा- साला बेटीचोद भोसड़ी वाले, कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना है।
तब अब्बु मुस्कुरा कर बोले- कोई बात नहीं, आज रात तैयार रहना, आज पांच लोगों को लेकर आऊँगा !
और फ़िर मुझे अब्बु से नानी की चुदाई की बात भी जाननी थी। आज रात मुझे पांच जन से एक साथ चुदाई का मज़ा आने वाला है मगर मुझे अफ़सोस है कि अन्तर्वासना बहुत सी पाठिकाओं को शायद आज भी कोई लण्ड नसीब नहीं हुआ होगा और उन्हें मोमबत्ती से काम चलाना पड़ता होगा क्योंकि हर लड़की मेरी तरह बाप और भैया से नहीं चुदवा सकती।

अब्बु और भाई

हेल्लो अन्तर्वासना के पाठकगण !
कैसे है आप सब। इस बार रमज़ान की वजह से मैं नेट पर रेगुलर नहीं आ पा रही हूं।
खैर ! अब वक्त मिला है तो आप सबकी खिदमत में एक नई कहानी अर्ज है और आप सबके बहुत सारे मेल मिले।
शुक्रिया मेरी कहानिया पसन्द करने का।
हां तो आज मैं आप सबको बता रही हूं कि अम्मी कहीं बाहर गई हुई थी और जैसा कि आप सबको पता ही है मेरे अब्बु और भैया मुझे कई बार चोद चुके है और दो चार बार तो साथ में भी चोदा है उन दोनों ने।
खैर करीब 15 दिन हो गये थे और मैंने उन दोनो से चुदाया नहीं था क्यूंकि मैं अपने बॉय फ़्रेंड से चुदवा कर बहुत थक जाती थी साला हरामी पता नहीं क्या खा कर चोदता था सारे कस बल ढीले कर देता था पर वो किसी काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था और मेरी आदत लगभग रोज़ ही चुदाने की हो गई थी जब तक बुर में लण्ड ना डलवा लूं चैन ही नहीं आता था।
पर इधर करीब 15 दिन से मैंने नहीं चुदवाया था और उस दिन रात को मैं अपने रूम में एक ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी जिसमे एक लड़की को चार चार साले मुस्टण्डे चोद रहे थे और वो भी साले काले काले हबशी, जिनके मोटे मोटे लण्ड देख कर मेरी आंखे भी फ़ट गई और उस लड़की के तो कहने ही क्या साली इस तरह अपनी गाण्ड और बुर चारों से मरवा रही थी जैसे पता नहीं कबसे चुदवाति आ रही हो।
खैर जब मूवी देखने के बाद मुझपे भी मस्ती चढी तब मैं अपने अब्बू के रूम की तरफ़ गई और धीरे से अन्दर चली गई अब्बु सो रहे थे।
मैंने धीरे से उनकी लुंगी हटा दी और उनका मुरझाया हुआ लण्ड हाथ में लेकर सहलाने लगी।
अब्बु थोड़ा सा कुनमुनाये और करवट लेकर सीधे हो गये अब मैंने अपनी निकर उतारी और पूरी तरह से नंगी हो गई और अपने जलते हुए होंठ लेकर उनके लण्ड को इतनी जोर से काटा कि वो आआह्हहह्हह कर के उठ बैठे और मुझे देखते ही बोले- मेरी रानी बेटी को आज मेरी याद कैसे आ गई?
और मेरे बाल पकड़ कर फ़िर से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धकेल दिया जिसे मैं मज़े से चूस रही थी तब अब्बु ने कहा आज मेरा खयाल कैसे आ गया? तब मैंने कहा अब्बु मैं आज अपने रूम में ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी उसमे एक बहुत ही कम उमर कि लड़की चार चार लोगों से एक साथ चुदवा रही थी।
तब अब्बु ने कहा- साले फ़िरंगी (अमेरिकन) होगी। वहां के लोग ऐसे ही होते है।
तब मैंने कहा अब्बु मैं भी ऐसे ही चुदवाउंगी।
तब अब्बु ने कहा नहीं मेरी बच्ची, उस तरह तो यहां कि अच्छी अच्छी चुद्दकड़ औरतें भी नहीं चुदा पाती, तो तू तो अभी बहुत कमसिन है मगर मैं ज़िद पे उतर आई और कहने लगी, नहीं अब्बु आपको मुझे चार लोगों से एक साथ चुदवाना ही होगा।
तब अब्बु ने कहा- अच्छा अभी चार लोग कहां से लाऊं। अभी तो सिर्फ़ मैं ही हूं और ज्यादा चुदासी हो तो जा बगल के रूम में तेरा भैया साला हाथ कि लगा रहा होगा उसको बुला ला!
और मैं नंगी ही भैया के कमरे की तरफ़ गई तो देखा कि भैया हकीकत में पूरी तरह से नंगा होकर अपने लण्ड को सहला रहा था। मैं दरवाज़े की आड़ से छुपकर देखने लगी और अब भैया जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था और उसके मुँह से ऊऊह ऊऊह्ह्ह आआअह्ह आआ आआह्हहह्ह की आवाज़ निकल रही थी।
तभी मैं दौड़ कर भैया के पास पहुची और जल्दी से उसके लण्ड को अपनी चूचियों पर पटकने लगी उसका लण्ड लम्बा होकर बस अपना रस उण्डेलने ही वाला था।
जैसे ही मैंने उसके लण्ड को हाथ में लेकर अपनि चूंची पे रगड़ा तो उसके लण्ड से ढेर सारा माल निकल पड़ा और मैं उसके गाढे रस को जल्दी जल्दी अपनी चूंची पे रगड़ते हुए बोली- अब्बु ठीक ही कह रहे थे तुम तो सही में हाथ की लगा रहे हो। अरे मेरे प्यारे चोदू भैया जब तेरे पास इतनी खूबसूरत चूत है चोदने के लिये तो किसलिये हाथ की मार रहे हो?
तब भैया मेरी चूची को जोर से दबाते हुए बोला- अरे मेरी चुद्दकड़ बहन, हाथ की मारने में भी बहुत मज़ा आता है।
तब मैंने कहा- अच्छा, अब चलो, अब्बु अपने रूम में बुला रहे हैं और मैं उसके झड़े हुए लण्ड को हाथ से पकड़ कर खीचते हुए अब्बु के रूम में ले आई।
तब अब्बु ने कहा- क्या हुअ बेटी, बहुत देर लगा दी।
तब मैंने कहा अब्बु आपने सही कहा था भैया हाथ की लगा रहे थे, वो तो मैं सही वक्त पर पहुच गई वरना तो इन्होने अपना कीमती माल बरबाद कर ही दिया होता!
तब अब्बु हसते हुए बोले- बेटी तजुरबा भी कुछ होता है मैंने तो पहले ही कहा था ये साला हाथ की मार रहा होगा। अच्छा, अब जल्दी से बेड पर आओ और मज़ा करो !
फ़िर जैसे ही मैं बेड पर चढी अब्बु मुझसे बोले कि अपने दोनों पैर उनके कन्धो पर रखूं और एक दूसरे से लपेट लूं।
मैंने ऐसा ही किया अब मेरी चूत अब्बु के बिल्कुल मुँह के पास थी और मैंने अपने दोनों पैर अब्बु कि गरदन के पीछे लपेटे हुए थे। अब अब्बु धीरे धीरे खड़े होने लगे जिससे मुझे डर लगने लगा। मैंने कहा अब्बु क्या कर रहे है मैं गिर जाउंगी।
तब अब्बु ने कहा- नहीं गिरोगी, आज नया स्टाईल देखो चूत, चुसाने का इस तरह तुमने ब्ल्यू फ़िल्म में भी नहीं देखा होगा और अबू खड़े हो गये। अब वो बिल्कुल सीधे खड़े थे और मेरी चूत को चूस रहे थे।
मुझे इस तरह डर भी बहुत लग रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था ।
तब ही अब्बु ने कहा- बेटी, अब तुम अपना सर नीचे कि तरफ़ झुकाओ।
पर मैंने मना कर दिया इस पर वो एक चपत लगाते हुए बोले, साली जैसा कहता हूं कर वरना आज दोनो जने एक साथ तेरी गाण्ड में लण्ड डाल कर फ़ाड़ देगें।
तब मै अपने सर को धीरे धीरे नीचे कि तरफ़ ले आई और अब मेरा मुँह उनके मुरझाये हुए लण्ड के पास था जिसे वो आगे बढाने लगे मैं उनका मतलब समझ गई थी और मैंने उनका लण्ड हाथ से पकड़ कर गप्प से मुँह में डाल लिया और चूसने लगी ।
वाआआह्हहह्ह बिल्कुल नया तरीका, बुर और लण्ड कि चुसाई का इस तरह से अब मेरा डर जाता रहा और थोड़ी देर बाद ही मैं जोर जोर से अपना मुँह अब्बु के लण्ड पे चलाने लगी ।
तो अब मैं अब्बु के कन्धे पर अपने दोनो पैर लपेटे उनका लण्ड चूस रही थी और अब्बु मेरी चूत को चूस रहे थे और वही किनारे मेरा भैया अपने लण्ड को हाथ में लेकर खड़ा था तब अब्बु ने मुझे नीचे लेटा दीया और भैया से कहा आओ बेटे आज साली कि चूत कि दोनों मिलकर धज्जीयाँ उड़ा देते है साली ब्ल्यू फ़िल्म देख कर चार लोगों से एक साथ चुदाने कि ज़िद्द कर रही है तो आज तो हम दोनों ही चार के बराबर चुदाई कर देते है बाकि कल बुरमरानी को चुदाता हूं चार मुस्टण्डों से!
और फ़िर अब्बु मेरी चूत के मु्ंह पर अपने लण्ड को रगड़ने लगे और भैया मेरे सर के पास मेरे मुँह पर आया और अपने लण्ड को मेरे हाथ में देकर चूसने को बोला।
तब मैं भैया के तगड़े लण्ड को हाथ से सहलाने लगी और अब्बु जी ने अचानक बुर पर चिकोटी काट ली और मेरी बुर के दाने के साथ छेड़खानी करने लगे आज वाकई अब्बु के साथ अलग ही तरह का मज़ा मिल रहा था जो पहले कभी नहीं मिला था।
उधर भैया ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दीया और मैं मज़े से चूसने लगी अब्बु जी भी अब मेरी बुर पे अपनी जबान रख कर चाटने लगे और फ़िर मैं भी अपने चूतड़ नीचे से उचकाने लगी अब मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- आआह्हह्ह आआअह्हह अब्बु जी बहुत मज़ा आ रहा है चूस डालो मेरी बुर को… पी जाओ साली को बहुत खाज मचती है इसमे आआह्हह्ह आज सारी खाज मिटा दो!
अब अब्बु ने अपनी जबान किसी लण्ड कि तरह अन्डर धकेल दी और मथनी कि तरह मथने लगे मेरी बुर को।
अब मुझे दो तरफ़ा मज़ा मिल रहा था एक तरफ़ भैया लण्ड मुँह में डाले था और अब्बु मेरी चूत को चूस रहे थे तब ही मैं आआह्हह आआअह्हह करते हुए झड़ गई और अब्बु मेरे सारे रस को बड़े मज़े से चाट गये और फ़िर भैया भी जोरदार धक्के मेरे मुँह में लगाते हुए झड़ गया उसके बाद थोड़ी देर तक हम लोग सुस्त से पढ़े रहे।
करीब 20 मिनट बाद अब्बु ने कहा अब बेटा, इसकी चुदाई करनी है वो भी इस तराह कि साली ब्ल्यू फ़िल्म कि चुदाई भूल जाय और ये कहकर मेरी चूंची को कसकर दाब दिया और भैया मेरी पीठ के पीछे से चिपक गया अब मैं अब्बु और भैया के बीच में पिसी जा रही थी।
आगे से अब्बु अपने सीने से कसकर मेरी दोनों चूची दाबे हुए मेरे लबों को चूस रहे थे और पीछे से मेरा भैया अपने दोनों हाथ से मेरी बुर कि दरारों को कुरेद रहा था और उसका 9′ का कड़ा लण्ड मैं अपनी गाण्ड पर साफ़ महसूस कर रही थी।
तब ही भैया ने गप्प से अपनी एक अंगुली मेरी चूत में डाल दी और अब्बु तो अब बकायदा मेरी एक चूंची के निप्पल को मुँह में दाब कर अपने होंठ से मसल रहे थे और दूसरी चूंची को हाथ से बहुत बेदरदी से दबा रहे थे।
मैं सिसक रही थी- आआह्हह अब्बु ज़रा धीरे धीरे दबाइये बहुत दर्द हो रहा है
और फ़िर अब्बु ने कहा- बेटा अब ज़रा आसन लगाने दे आज एक साथ दो लण्ड तेरी बुर में डलाउंगा तब मैंने कहा अब्बु जी आपके पास तो एक ही है।
तब अब्बु ने कहा- अरी छिनाल! ज़रा सबर तो कर और पीछे देख, तेरे भैया का लण्ड भी तो है और ये कहकर वो बेड पर लेट गये उनका लण्ड किसी साप कि तरह फ़ुफ़कार रहा था।
इस उम्र में भी अब्बु का लण्ड बहुत मोटा और लम्बा था मेरा दिल अन्डर से डर रहा था कि आज मेरी नन्हीं सी चूत का क्या होगा ?
तब अब्बु ने कहा मेरी प्यारी बेटी तू अपनी चूत को मेरे लण्ड पे रख कर बैठ जा और मैं अपने दोनो पैर छितरा कर उनके लण्ड पर बैठ गई और फ़िर उनका लण्ड थोड़ा सा मेरी चूत में घुस गया।
तब अब्बु ने कहा- अब तू मेरी तरफ़ झुक जा !
और जैसे ही उनका पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया और मैं जब झुकी तो अब्बु ने अपने दोनों हाथ से मुझे अपनी तरफ़ और खीच लिया और मेरे होंठ को चूसने लगे अब पीछे से भैया को इशारा किया कि तू भी अपना लण्ड इसकी चूत में घुसेड़ दे पर भैया इतना समझदार नहीं था वो अपने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद में घुसेड़ने लगा।
तब मैंने कहा अब्बु भैया तो गाण्ड में मारने जा रहा है.
तब भैया ने कहा- साले बहनचोद मैं कह रहा हूं कि बहन कि चूत में डाल और तू है कि गाण्ड के पीछे पड़ा है तब भैया ने कहा कि इसमे तो आप डाले हुए है मैं कहां से डालूं?
तब अब्बु ने कहा- साले आजकल के लड़के तो बस चूत मारना और गाण्ड मारना जानते है साले बस लड़की कि टांग उठाई और लगे चोदने, अरे साले हरामी जिसमे मैं डाले हूं उसी में तू भी अपना लण्ड डाल।
तब अब्बु ने मुझसे कहा- बेटी तू ज़रा अपनी बुर और उपर कर दे ताकि इस बहनचोद को साफ़ साफ़ नज़र आये तेरी चूत और फ़िर मैंने अपनी चूत और उपर उठा दी।
अब भैया अपने लण्ड को मेरी चूत पे रख कर घिसने लगा पर मेरी समझ में खुद भी नहीं आ रहा था जब अब्बु का लण्ड मेरी चूत में घुसा है।
तब भैया का लण्ड कैसे जायेगा हां अगर अंगुली पेलनी होती तो वो जा सकती थी पर मैं खमोश थी आखिर भैया ने बहुत ज़ोर देकर अपने लण्ड कि टोपी मेरी चूत में डाल ही दी और तब मुझे बहुत दर्द हुआ।
आआअह्हह ऊऊओह्हह अम्मीईई अब्बु बहुत दर्द हो रहा है ।
तब अब्बु ने कहा कि क्या भैया का पूरा लण्ड चला गया अन्दर। तब मैंने कहा नहीं अभी तो सिरफ़ टोपी ही गई है तब भैया ने एक धक्का और मारा और अब भैया का करीब चार इन्च लण्ड अन्डर घुस गया था।
मैं चीख रही थी- आआअह्हह अब्बूऊऊ जीईई पलज़्ज़ रहम कीजिये, मैं मर जाउगींईई आआह्ह्ह!
तब अबु मेरी चूंची को दबाते हुए बोले- बेटी अभी तुझे बहुत मज़ा आयेगा, जब दो लोगों का लण्ड एक साथ बुर में जाता है तब बहुत मज़ा आता है क्यूंकि मैंने तेरी अम्मी को भी इस तरह से तेरे चचा के साथ चोद चुका हूं!
और तब ही मेरे भैया ने एक और धक्का मारा और मेरा बेलेन्स बिगड़ गया और मैं अब्बु के सीने पर गिर गई और मेरी आंख से आंसू निकलने लगे और मेरी सिसकियाँ बंध गई।
अब भैया और अब्बु का पूरा पूरा लण्ड मेरी चूत में था और एक दूसरे के लण्ड से रगड़ खा रहा था और मेरी चूत कि दरार फ़ैलती जा रही थी.
अब मुझे भी दर्द कि जगह मज़ा आने लगा था और मैं धीरे धीरे उन दोनों का साथ देने लगी थी आआह्हह आआअह्हह्हह अब्बु बहुत अच्छा लग रहा है और अन्दर कीजिये आअह्ह ह्हह ऊऊफ़्फ़ कसम से बहुत मज़ा आ रहा है!
और अब दोनो बहुत ही जोरदार धक्के लगा रहे थे साथ साथ मेरी दोनो चूंची को भी मसल रहे थे तब ही कि तब का लण्ड मेरी चूत में झड़ा पर मैं समझ नहीं पाई कि किसका पानी मेरी चूत में गिरा है!
फ़िर कुछ देर बाद मैंने अपनी चूत में एक बार फ़िर से पानी कि फ़ुहार महसूस कि और फ़िर दोनो के लण्ड ढीले हो गये पर मैं अभी झड़ी नहीं थी तब मैंने अब्बु से कहा साला बेटी चोद कर अपना पानी तो आप लोगों ने निकाल लिया पर मेरा तो अभी पानी भी नहीं निकला साले अगर जलदी ही मेरी प्यास नहीं बुझाई तो तुम दोनों का लण्ड काट लूंगी।
तब अब्बु ने मुझे झट से अपने लण्ड पर बैठा लिया और मेरी चूंची को चूसते हुए बोले मेरी रानी ऐसे बात ना करो आज देखो मैंने तुमको कितना मज़ा दिया है और अभी तुम्हारा पानी भी निकाल देता हूं और फ़िर मुझसे कहा तुम ऐसा करो कि भैया से एक बार गाण्ड मरवा लो तुम्हारा पानी भी निकल जायेगा।
तब मैंने कहा- अबे जहील कहीं गाण्ड मरवाने से भी पानी निकलता है बेटीचोद, मेरी बुर में खाज है और तू गाण्ड मरवाने कि बात कर रहा है।
तब अब्बु ने कहा बेटी मैं बुर मारुंगा भैया गाण्ड मारेगा और उसके बाद भैया ने मेरी जम कर गाण्ड मारी और आगे से अब्बु मेरी चूत में अपना लण्ड पेले जा रहे थे अब मुझे दो तरफ़ से मज़ा मिल रहा था।
एक साथ बुर और गाण्ड मरवाने का थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गई और मेरी चूत से फ़स फ़स की अवाज़ आने लगी।

भाई से चुदाई

मेरा फिगर ३२-२८-३४ है और किसी वजह से छोटी उम्र में ही सैक्स की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगी। वैसे तो मेरा स्थाई घर जयपुर में है लेकिन मैं जोधपुर में मेरे भाई के साथ रहती हूँ। मै और मेरा भाई लगभग रोज चुदाई करते है। अब तो ये हाल है कि मैं दिन में एक बार जब तक भाई से चुद नहीं लेती मुझे नींद नहीं आती है। मैंने अपने भाई के अलावा किसी और से चुदाई नहीं की है।

मेरे भाई का नाम अंकित है। जब उसने मुझे पहली बार चोदा तो मेरी उम्र १८ साल थी। लेकिन उस उम्र में भी मैं जवान औरतों को मात दे रही थी। मेरे स्तनों का आकार तो सामान्य ही था लेकिन थे बहुत ही टाईट व तीखे। मेरा फिगर देखकर बड़े लोगों व बूढ़े लोगों का भी लण्ड खड़ा हो जाता था।

जब मैं कक्षा १० में थी तो तभी मैं और भईया अलग जोधपुर में रहने लग गये थे। भईया ने मुझे बड़े प्यार से पाला था।

एक दिन स्कूल से आकर मैने भईया से कहा- भईया स्कूल के वार्षिक फंक्शन में मैंने डांस करना है और ड्रेस कोड साड़ी है इसलिये मुझे साड़ी पहन कर जाना होगा, लेकिन मुझे साड़ी पहनना नहीं आता है और मेरे पास कोई अच्छी साड़ी भी नहीं है।

तो भईया कहा- अपनी नई साड़ी पहन लो !

मैंने कहा- हाँ ! लेकिन ब्लाउज और पेटीकोट तो मुझे नहीं आयेगे !

भईया ने कहा- ठीक है तेरे लिये बाजार से नया ब्लाउज और पेटीकोट ले आउँगा।

मैने कहा- ठीक है भईया ! पर पहले आप मुझे साड़ी पहनना सिखा दीजिये। जिस पर भईया ने मुझको साड़ी लाने को कहा। तो मै भाग कर कमरे में गई और साड़ी लेकर आई। मैंने उस समय टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी। मैने अपना टी-शर्ट उपर कर दिया तो मेरा गोरा पेट भईया की आंखो के सामने था। मेरा गोरा पेट देखकर भईया की आंखो में वासना चमकने लगी, उसके मन में बुरे बुरे ख्याल आने लगे। उसने धीरे से मेरे पेट पर हाथ फिराया तो मैं हंसने लगी।

भईया ने कहा- हंस क्यो रही हो?

मैं बोली- कुछ नहीं ! ऐसे ही ! गुदगुदी हो रही है।

भईया ने मेरे कमर पर साड़ी लपेटी लेकिन कपड़े पहने होने के कारण साड़ी मेरे बदन पर ठीक नहीं हो पा रही थी।

भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! तुम अपने कपड़े, अपनी पैन्ट उतारो !

मैने कहा- क्यों?

तो भईया ने कहा- इसलिये, क्योंकि साड़ी ठीक से नहीं आ पा रही है।

तो मैंने अपनी पैन्ट उतार दी। उस समय मैने गुलाबी रंग की पेन्टी पहनी थी। मै अपने भाई के सामने पेन्टी में थी।

मैंने कहा- जल्दी करो ना ! मेरे हाथ दुख रहे हैं क्योंकि मैं अपने हाथो से अपना टी-शर्ट उपर किये हुए खड़ी थी।

भईया ने मुझे कहा- तुम अपना टी-शर्ट उतार दो तो मै तुम्हें साड़ी पहना सिखाउंगा।

तो मैने अपने बटन को खोल कर टीशर्ट उतार दिया। अब मैं केवल ब्रा और पेन्टी में ही थी। भईया खड़ा रह कर मेरे बदन के आस पास साड़ी लपेटने लगा। भईया का हाथ मेरे बदन पर बार बार छू रहा था। जैसे तैसे भईया मुझे साड़ी पहनाई। फिर भईया ने कहा- देखो अंकिता जाकर आईने में ! साड़ी ठीक से बन्धी है या नहीं।

मै अपने कमरे में गई तथा आईने में अपने आप को देखने लगी। जब भईया बेडरूम में आया तो मै केवल ब्रा और पेन्टी में थी तथा केवल एक साड़ी लपेटे हुए थी।

तभी भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात कहूं? तुम्हारा एक स्तन छोटा और एक बड़ा है।

तो मैं गौर से देखने लगी, फिर बोली- नहीं दोनों बराबर हैं ! मैने अपना साड़ी का पल्लू हटा कर दिखाया।

तो भईया ने कहा- नहीं तुम्हें साड़ी पहनकर दिखाई नहीं दे रहा है।

मैने कहा- इससे क्या होगा?

तो भईया ने मुझे कहा- ये परेशानी तुमको तुम्हारी शादी के बाद आयेगी, जब तुम्हारा पति तुम्हारे दोनों स्तन बराबर नहीं पायेगा तो बड़ा नाराज होगा, और हाँ इससे तुम्हारी खूबसूरती भी कम हो जायेगी।

तो मैने कहा- भईया !अब मैं क्या करूँ? ये ठीक नहीं हो पायेंगे क्या?

भईया ने कहा- ठीक तो हो जायेगे लेकिन तुम्हें कहे अनुसार इलाज करना पड़ेगा और इसका इलाज केवल मालिश के द्वारा ही होगा।

तो मैने भईया से कहा- भईया ! आप प्लीज इसे ठीक कर दीजिये ना !

तो भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! तुम एक काम करो तुम साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट जाओ, मैं तुम्हारी अभी मालिश कर देता हूँ।

फिर मैं अपनी साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट गई। भईया ने अलमारी में से तेल की शीशी निकाली और बिस्तर पर मेरे पास आकर बैठ गया और कहा- तुम अपनी ब्रा उतार दो, नहीं तो तेल से खराब हो जायेगी।

मैने जल्दी से अपनी ब्रा को उतार दिया और अब मै मेरे भईया के सामने केवल पेन्टी में ही थी। भईया ने अपने हाथ में तेल ले कर फिर मेरे स्तनों पर लगाया और मेरे स्तनों की मालिश करने लगा। मैं अपनी आंखों को बंद किये हुए लेटी थी। भईया मेरे कच्चे और हल्के गुलाबी रंग के स्तन व उनके चूचुकों को मसल रहा था। पहली बार किसी लड़के ने मेरे स्तनों को हाथ लगाया था और वह मालिश कर रहा था। इस कारण से मुझे अजीब सा नशा छाने लगा।

तभी भईया ने मेरे गुलाबी चूचुक को अपने अंगूठे व उंगली के बीच में लेकर जोर से दबा दिया तो मै जोर से बुरी तरह चिल्ला उठी और बोली- आ आआ हहहहहहहह भईया इतनी जोर से नहीं ! आराम से !

इसके बाद तो मै अपने होश खोती जा रही थी तथा आसमान में उड़ने लगी थी लेकिन मेरा कोई गलत काम का मन नहीं था। लेकिन भईया मुझको पूरी तरह तैयार करके चोदने में मूड में था। करीब २० मिनट मालिश करने के बाद भईया ने मुझे कहा- अंकिता तुम्हारे स्तन अभी थोड़े ठीक हुए हैं लेकिन अगर तुम बुरा न मानो तो मैं तुम्हारी पूसी भी देख लूँ ताकि उसमें भी कोई परेशानी तो नहीं है।

तो मैने कहा- इसमें पूछने की कोई बात नहीं ! आप मेरे भईया है आप मेरा बुरा थोड़े ही करेंगे।

भईया उस समय भी कपड़े पहने हुए थे। मैने देखा कि भईया के कपडो पर भी तेल लग गया है। भइया उठे और अपने कपड़े निकाल दिये। मैने पूछा तो कहा कि मेरे कपड़ों पर तेल लग गया है, बदलने है। अब भईया मेरे सामने सिर्फ अन्डरवीयर में थे।

मैने भईया से कहा- भईया ! आप अपना अण्डरवीयर निकाल दो, नहीं तो ये भी गन्दा हो जायेगा।

तो भईया ने जल्दी से अपनी अण्डरवीयर उतार दी। भईया का लण्ड में लहराने लगा तो मैने भईया से पूछा- ये क्या है?

तो उसने कहा- यह लन्ड है और अंग्रेजी में इसको पेनिस कहते है और हम दोनो इसी पेनिस की वजह से इस दुनिया में आये हैं।

मैने पूछा- इससे क्या होता है?

भईया ने कहा- इससे चूत की शेप और साईज ठीक किया जाता है।

तो मैने मासूमियत से कहा- भईया ! क्या आप मेरी चूत की शेप भी ठीक करेंगे?

वह बोला- हाँ ! लेकिन पहले मैं यह देख तो लूँ कि तुम्हारी चूत ठीक है भी या नहीं ?

यह बोलकर उसने मुझे मेरी पेन्टी उतारने को कहा तो मैंने अपनी पेन्टी उतार दी। फिर भईया ने मेरे दोनों पैर फैला दिये और मेरी कुँवारी चूत को गौर से देखने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि आज अपनी इस कुँवारी और नादान और भोली भाली लड़की की सील तोडने को मौका मुझे मिला हैं। ये बात मुझे भईया ने बाद में बताई जो लिखी।

मैने पूछा- भईया आप क्या देख रहे है?

तो वो बोला- अंकिता ! तुम्हारी चूत का साईज बहुत छोटा है इसे बड़ा करना पडेगा !

मैने कहा- जल्दी से इसको बड़ा कर दो।

तो भईया ने कहा कि पहले मैं इस चूसूंगा, उसके बाद भईया ने अपनी जीभ मेरे नीचे डाल दी और चूसने लगा।

मेरी तो हालत ही खराब हो गई और मैं मस्ती के मारे आहह आहहहहहह आअ अ आ आ आ आहहहहह ओइइइइइइइ सीईइइइ आहहहहह करने लगी।

भईया ने कहा- मजा आया?

तो मैने कहा- बहुत ! और करो भईया !

काफी देर चूसने के बाद भईया ने कहा- अंकिता ! अब मुझे तुम्हारी चूत में अपना लण्ड घुसाना पड़ेगा पर मेरा लण्ड अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है तुम इसे खड़ा करने में मेरी मदद कर दो।

उसके बाद जैसे भईया ने कहा, मैं वेसा करने लगी। उसके लण्ड को चूमने लगी, मुँह में लेकर आगे पीछे करने लगी, चूसने लगी तो भईया भी मेरी तरह करने लगे और वो बोलने लगे ओ मेरी प्यारी बहन अंकिता ! आहहहहहहहह क्या जादू है तेरे गुलाबी होठो में ! जोर से चूस मेरी रानी ! और चूस ! मेरा मुँह में ले ले मेरा आज तू ! आहहहहह !

जब भईया का लण्ड पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया तो उसने मेरी दोनो टांगो के बीच में अपना मोटा लण्ड रखकर थोड़ी क्रीम लगाई मेरी चूत के अन्दर तक ! भईया ने १०० ग्राम क्रीम की शीशी को पूरी की पूरी मेरी चूत के ऊपर और अन्दर तथा अपने लण्ड पर लगा दिया और बोला- मैं तेरी चूत में अपना लण्ड डाल रहा हूँ !

और उसके बाद भईया ने एक जोरदार धक्का मारा, लण्ड पूरा मेरी चूत में एक बार में ही घुस गया, मेरी तो सांस ही अटक गई, मेरे मुँह से एक जोरदार तेज चीख निकली, मै रोने लगी और रोते हुए बोली- मार डाला ! मर गई रे ! मेरी चूत फट गई भईया ! उफफ नहीं, अपना लण्ड बाहर निकालो भईया ! मुझे अपनी चूत सही नहीं करवानी है, इसे बाहर निकालो !

लेकिन भईया ने मेरी एक नहीं सुनी और मेरे मुँह पर हाथ रखकर दूसरे हाथ से मेरे स्तन पकड़ कर मसलते हुए अपना लण्ड आगे पीछे करने लगे।

कुछ देर बाद मुझे थोड़ा आराम मिला तो भईया ने पूछा- अंकिता अब अच्छा लग रहा है ना !

तो मैने कहा- भईया ! बहुत मजा आ रहा है, जरा जोर से धक्के मारो मेरी चूत में !

और भईया जोर से मेरी चूत में झटके मारने लगे। अब भईया को और मुझको दोनों को मजा आ रहा था और हम दोनों सिसकियां ले रहे थे।

मैं भईया को कहने लगी- भईया ! आज तक तुमने मेरा इलाज क्यों नहीं किया? अब डालो ! जोर से डालो ! मारो जोर से झटके मारो भईया। भईया अब जोर जोर से झटके मारने लगे मै सातवें आसमान पर थी तथा मुझे मेरी चूत की चुदाई से त्रिलोक नजर आने लगा था और मैने भईया को कहा कि भईया मेरे चूत से कुछ निकलने वाला है !

भईया बोला- अंकिता ! ये तुम्हारी जवानी और चूत का रस है जो आने वाला है, अब मै भी तुम्हारे साथ आने वाला हूँ।

तभी मेरी चूत ने जोर की पिचकारी छोड़ी और मुझे बहुत मजा आने लगा। पहली बार मेरी चूत ने किसी लड़के के लन्ड से अपना रस छोड़ा था, अति आनन्द और मजे से मैं सीसीयाने लगी और एक तेजी खुशी की चीख निकली। और इसी के साथ में धडाम हो गई, मैं असमान की बुलन्दियों से कटी पंतग की भांति जमीन पर गिरने लगी।

तभी भईया का लण्ड मेरी चूत में फ़ूल कर झटके मारने लगा। मुझे फिर मेरी चूत में कुछ गरम गरम सा गिरता प्रतीत हुआ, ऐसा लगा किसी ने कोई गरम गरम चीज मेरी चूत में डाल दी हो। भईया ने मेरी चूत में अपना वीर्य निकाल दिया। जब मैं खड़ी हुई तो मुझे भईया का सहारा लेकर खड़ा होना पड़ा।

खड़ी होने पर भईया का वीर्य मेरी चूत से निकल कर मेरी जांघों पर बहने लगा तो मैने भईया से पूछा- यह क्या है?

तो वह बोला- यह पीने से ताकत आती है, तुम्हारी बॉडी सही हो जायेगी।

मैने अपने हाथ से अपनी जांघों तक आये हुए भईया के वीर्य को अंगुलियो पर लिया और चाट गई। मुझे पहले अजीब पर बाद में बहुत अच्छा लगा।

बाद में भईया ने पूछा- अंकिता मजा आया?

मैंने कहा- हाँ भईया ! आया ! लेकिन एक वादा करो कि आप ऐसे ही रोज मेरा इलाज करोगे।

भईया ने कहा- हाँ करूंगा, पर उसके लिए तुम्हें मेरी पत्नी बनना पड़ेगा, फिर मैं तुम्हारा हर समय इलाज करता रहूंगा।

मै मुस्कुरा दी और कहा- हाँ जी बनूंगी।

भईया कहा- अरे 'हाँ जी' क्यों कहा?

मैने कहा- अब आप मेरे पति हैं और लडकियाँ अपने पति का नाम नहीं लेती है न !

जंगल में मंगल

इलाहबाद के होटल में एक ही रात में तीन बार मेरी गाण्ड मारने के बाद बड़े जीजाजी को एक सप्ताह तक फ़िर मेरी गाण्ड मारने का मौका ना मिल सका। उन्होंने कई बार मौका निकाला पर वह सफ़ल नहीं हो सके।

हालांकि मुझे गाण्ड मराने में आनन्द तो आया था परन्तु मुझे यह सब अच्छा नहीं लगा था। मन में डर भी था। सेक्स के बारे में मुझे उस समय कोई जानकारी भी नही थी । पहली बार मैंने मुत्तु (लण्ड) और गांड का ऐसा उपयोग होते देखा था। गाण्ड के छेद में लण्ड घुसने पर मुझे बड़े जोर का दर्द होता था तथा टायलेट में भी तकलीफ होती थी इसलिए गांड मराने में मजा आने के बाद भी मैं बड़े जीजाजी से बच के रहता था पर वह कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने मौका निकाल ही लिया।

जंगल की सैर कराने के बहाने वह मुझे अपने साथ जंगल ले आए। सुबह सुबह वह और मैं जीप से जंगल के लिए निकले। करीब चार घंटे के सफर के बाद हम जंगल में उनकी ड्यूटी-पॉइंट पर पहुँचे। यह बड़ी ही खूबसूरत जगह थी। बीच जंगल में उनके रहने के लिए दो वृक्षो पर जमीन से करीब दस फीट ऊपर लकड़ी का दो कमरों वाला मकान बना था, जिसमें उपयोग के लिए सभी सामान था। बड़े जीजाजी जब भी जंगल में रहते वह इसी काष्ठ-घर में रुकते थे।

उन्होंने अपनी सेवा के लिए दो छोकरे रख रखे थे उनमें से एक नेपाली था तथा एक आदिवासी, लेकिन दोनों ही चिकने और आकर्षक थे। नेपाली का नाम शिव था तथा आदिवासी लड़के का नम शायद मथारू था। उनकी चाल ढाल देख कर ही मुझे लगा कि जीजाजी ने गांड मारने के लिए ही इन्हें रख रखा है।

जंगल में पहुँच कर जीजाजी ने दोनों से खाने की व्यवस्था करने को कहा तथा मुझे लेकर वह ऊपर कमरे में आ गए। आते ही वह बोले- योगेश तुम नहा कर तैयार हो जाओ।

मैं नहाने के लिए बाथरूम में चला गया पर वहां दरवाजा नहीं था, सिर्फ़ एक परदा लगा था। मैं नहाने लगा, तभी जीजाजी भी वहां आ गए। उन्होंने मुझे पकड़ कर मेरी चड्डी उतार दी तथा मेरी पीठ, जांघ और गाण्ड पर साबुन मलने लगे। बीच बीच में वह मेरी मुत्तु को भी सहला देते तथा मेरे गाण्ड के छेद में भी साबुन भर कर उंगली डाल देते।

मुंह पर साबुन लगा होने के कारण मेरी आँखें बंद थी। मैंने महसूस किया कि जीजाजी भी पूरी तरह नंगे हैं तथा मेरा हाथ पकड़ कर वह अपने लण्ड को सहला रहे हैं। मैंने पहली बार उनका लण्ड पकड़ा था। उसकी लम्बाई और मोटापन महसूस कर मैं डर सा गया कि इतना बड़ा और मोटा लण्ड कैसे मेरे छोटे से छेद में घुस जाता है।

जब उनका लण्ड पूरे जोश में आ गया तो उन्होंने थोड़ा और साबुन मेरे गाण्ड के छेद में लगा दिया तथा अपने लण्ड को मेरे छेद से टिका दिया।

उन्होंने एक जोर का धक्का दिया लण्ड का सुपारा अब मेरी गांड के अन्दर था। दर्द के मारे मेरी चीख निकल गई। बेरहम जीजाजी ने मेरी गाण्ड को थोड़ा सा दबाया और दोनों दोनों फांको को फैला कर छेद में अपना पूरा लण्ड घुसेड़ दिया तथा धीरे धीरे धक्के लगाने लगे।

थोड़े दर्द के बाद अब मुझे भी मजा आने लगा। जीजाजी पूरे जोश में थे। मुझे घोड़ा बनाकर लगातार लण्ड अन्दर बाहर कर रहे थे। बाथरूम फच फच की आवाज़ से गूँज रहा था। १५ मिनट बाद उन्होंने पिचकारी मेरे गाण्ड के छेद में ही छोड़ दी। उन्होंने ही मेरी गाण्ड साफ की तथा नहलाया। नहाने के बाद उन्होंने पूछा- योगी मजा आया। में शरमा गया, कोई जवाब नही दिया।

इसी बीच शिव और मथारू ने खाना तैयार कर लिया था। खाना खाने के बाद जीजाजी ने थोड़ी देर आराम किया। मुझे भी अपने पास लिटा कर मेरे लण्ड को सहलाया तथा उसे मसला भी। मेरे गाण्ड के छेद में उंगली डाली, मुझे मजा तो आ रहा था पर न जाने क्यूँ यह सब मुझे बहुत अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। वह पूरी तरह तन्नाया हुआ था।

उन्होंने मेरे मुत्तु को मसला तथा फिर मुझे तिरछा कर मेरी चड्डी नीच खिसका दी और मेरे गाण्ड के छेद में उंगली करने लगे। फिर उन्होंने कोई तेल मेरे छेद पर मला तथा अपने लण्ड पर भी लगाया। तिरछा लेटे होने के कारण वह मेरी गांड में अपना लण्ड नहीं घुसा पा रहे थे। उन्होंने मुझे पलट कर उल्टा कर दिया तथा वह मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गए। मेरे दोनों गाण्ड को मसला तथा उन्हें फैला कर मेरी गांड के छेद में एक जोर का धक्का मार कर एक ही बार में पूरा का पूरा लण्ड घुसेड़ दिया।

मैं दर्द से बिलबिला उठा। मेरी चीख निकल गई पर वह नहीं माने। वह लगातार धक्के पर धक्के मरे जा रहे थे। मुझे मजा तो आने लगा पर मेरे आंसू भी भी निकले। करीब १५ मिनट बाद वह झड़ गए और सारे का सारा रस मेरे गाण्ड के छेद में ही निकाल दिया।

जंगल में जीजाजी का चार दिन रुकने का प्रोग्राम था। दो घंटो में ही उन्होंने दो बार मेरी गांड मार ली। मैंने मन ही मन हिसाब लगाया कि यदि जीजाजी ने इसी रफ्तार से मेरी गांड मारी तो मैं तो मर ही जाऊंगा। उनका मोटा लण्ड घुसते समय बड़ा दर्द देता था तथा मेरी गांड से खून भी निकाल आता था। लेकिन मेरे पास कोई चारा नहीं था चुपचाप गांड मराते रहने के।

पहले ही दिन संध्या समय तक जीजाजी ने एक बार मेरी गांड और मारी तब वह मुझे जंगल की सैर कराने ले गए। जंगल काफी खूबसूरत था। प्राकृतिक सुन्दरता, हिरण, बारहसिंगे, नीलगाय और मोर देख कर मन खुश हो गया। लौटते लौटते रात के आठ बज गए। खाना तैयार था। हमने खाना खाया और मैं सोने के लिए लेट गया। मैं बहुत थक भी गया था। पर जीजाजी तो मेरी गांड का भुरता बनाने पर तुले थे। उस रात उन्होंने चार बार और मेरी गांड मारी। मेरी गांड का छेद फूल कर कुप्पा हो गया। पर मैं कर भी क्या सकता था। जंगल में मेरी सुनने वाला भी कोई नहीं था। वैसे भी मैं यह सब किसी से कह भी नहीं सकता था।

घर की बात है

अब मैं आपको अपने बारे में बता दूँ। मेरा नाम अमित है और मैं 19 साल का हूँ। मेरे घर में 4 सदस्य हैं। मेरी मम्मी और पापा और मैं और मेरी बहन रेखा। यह कहानी मेरे और मेरी बहन के बीच हुए सेक्स की कहानी है।

अब मैं आपको अपनी बहन के बारे में थोड़ा बता दूँ। वो 20 साल की है और बहुत सेक्सी है। बिलकुल रान्ड लगती है। उसका फ़िगर 34-26-38 है। मैं जब भी उसे देखता हूँ तो मेरा लन्ड फ़ुदकने लगता है। मेरा लन्ड हमेशा उसको चोदने को तड़पता रहता। लेकिन वो मेरी बहन है इसलिये अपने हमेशा मुठ मार के रह जाता। लेकिन जब से मैंने अन्तर्वासना को पढ़ना शुरु किया तो मुझे लगा कि बहनों को चोदने में कोई बुरी बात नहीं है। आखिर वो भी तो लड़की है, उसे भी तो एक लन्ड की जरुरत है, फ़िर चाहे वो लन्ड़ उसके भाई का ही क्यों न हो।

फिर मैंने अपना मन बदला और अपनी बहन को चोदने का मौका खोजने लगा। इसी बीच मुझे जब मौका मिलता तो मैं रेखा की ब्रा और पैन्टी पहनकर घर में घूमता। ऐसा करने में मुझे बड़ा मजा आता है। (कभी आप भी करना)

एक दिन जब घर पर कोई नहीं था तो मैंने सोचा कि चलो रेखा की ब्रा और पैन्टी पहनते हैं। मैं ब्रा और पैन्टी पहनकर घर में घूम रहा था कि तभी अचानक रेखा आ गई। मैं दो मिनट के लिये स्तब्ध रह गया और मेरे होश उड़ गये थे। रेखा मुझे देखती जा रही थी और मुझे लगा कि अब मेरी पोल खुल गई। लेकिन जैसा मैंने सोचा वैसा हुआ नहीं, रेखा तो जोर जोर से हँस रही थी।

मुझे थोड़ा अटपटा लगा और मैं कमरे में भाग गया। थोड़ी देर के बाद मैं उसके कमरे में उसकी ब्रा और पैन्टी देने गया। वहा मैंने देखा कि वो अपने कपड़े बदल रही है। रेखा की पीठ बिल्कुल नंगी थी।

मुझे देखकर उसने कहा- अच्छा हुआ कि तुम आ गये, मुझे मेरी ब्रा और पैन्टी चाहिये थी !

फिर उसने मुझ रोका और पूछा- तुम मेरी ब्रा और पैन्टी क्यों पहनते हो?

मैंने कहा- बस यूँ ही ! मुझे अच्छा लगता है तुम्हारे कपडे पहनना, लेकिन तुम माँ से कुछ मत कहना !

रेखा ने कहा- नहीं कहूँगी, लेकिन मुझे एक बात बताओ- क्या तुम्हें सिर्फ़ मेरी ब्रा-पैंटी ही अच्छी लगती है, मैं नहीं?

मैंने कहा- नहीं ऐसी बात नहीं है, तुम तो मेरी बहन हो, और बहन तो सभी को अच्छी लगती है।

रेखा ने कहा- अच्छा, तो तुम मेरा एक काम करोगे?

मैंने कहा- कौन सा काम?

फिर रेखा काफ़ी देर तक खामोश रही और थोड़ी देर बाद बोली- यह काम तुम कर सकते हो, लेकिन शायद तुम नहीं करोगे !

मैंने कहा- तुम कहो तो जरा ! तुम मेरी बहन हो और तुम्हारा हर काम मैं करुंगा, मैं तुम्हारी राखी का फ़र्ज निभाउंगा।

यह कहकर मैंने माहौल को हल्का करने की कोशिश की। लेकिन मुझे विश्वास नहीं हुआ जो उसने कहा।

रेखा ने मुझ से कहा- क्या तुम मुझे चोद सकते हो? अभी !

यह सुनते ही अचानक मैं डर गया और मैं रेखा से थोड़ा दूर हो गया।

मैंने कहा- यह क्या कह रही हो तुम? तुम मेरी बहन हो और कोई भी भाई अपनी बहन को नहीं चोदता है !

रेखा हँसते हुए बोली- अपनी बहन की ब्रा और पैन्टी पहनते हुए तो तुम्हें यह ख्याल नहीं आया कि मैं तुम्हारी बहन हूँ?

मैंने थोड़ा ठण्डे दिमाग से सोचा कि रेखा सही कह रही है और ऐसा मोका मुझे फिर नहीं मिलेगा। फिर भी मैंने यूँ ही कहा कि यह गलत है।

उसने कहा- इसमें कोई बुराई नहीं है, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, घर में कोई नहीं है, तेरे पास लण्ड है और मेरे पास चूत है ! जल्दी कर मेरे भाई ! लूट ले आज अपनी बहन की इज्जत !

रेखा के इतना सब कहने पर भी मैंने उससे कहा- मैं यह नहीं कर सकता, तुम मेरी बहन हो।

और इतना कहने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और मैं अपने आप को कोसता रहा कि मैंने अपनी बहन को चोदने का सुनहरा मौका खो दिया। लेकिन कुछ देर बाद मेरे कमरे के दरवाजे के नीचे से एक कागज (चिठ्ठी) आया। उस पर कुछ लिखा था, जिसे पढ़कर मुझे बहुत गुस्सा आया।

उस पर लिखा था- मेरे प्यारे भैया अमित, आज आपने यह साबित कर दिया कि आप कभी किसी लड़की को नहीं चोद सकते, भले ही वो आपकी बहन ही क्यों ना हो ! क्योंकि आप नपुंसक हो। आप में वो ताकत ही नहीं है जिसकी एक लड़की को जरुरत होती है। मुझे यह कहने में ज़रा भी शर्म नहीं कि मेरा भाई नामर्द है।

यह पढ़कर मेरे अन्दर का भाई मर गया और एक जानवर जाग गया। मैं रेखा के कमरे में गया। रेखा अपने बेड पर लेट कर किताब पढ़ रही थी। मुझे देखकर वो खड़ी हो गई और मुझसे पूछा- तुम वापस क्यों आये? मैंने कहा- मैं तुम्हारी चिठ्ठी का जवाब देने आया हूँ!

और इतना कहकर मैं रेखा के पास गया और उसके बाल पकड़कर खींचे और जैसे ही वो चिल्लाई तो मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिये। हम दोनों के होंठ आपस में लगभग 10-15 मिनट तक चिपके रहे। हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं अपनी बहन को चूम रहा हूँ और उसके होंठ चूस रहा हूँ।

थोड़ी देर बाद हमारे हम एक दूसरे से अलग हुए। फिर मैंने उसके पीछे जाकर उसकी शर्ट फाड़ दी, अब उसकी काली ब्रा साफ नजर आ रही थी। इतने में रेखा ने अपना हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया, और मेरा लन्ड निकाल लिया। मेरा लन्ड के बाहर आते ही मैंने कहा- यह ले मेरी प्यारी बहन ! देख ले अपने नामर्द भाई का लन्ड !

इस पर रेखा बोली- ऐसा मत कहो भाई, मैंने तो सिर्फ़ तुझे उकसाने के लिये ही ऐसा कहा था, ताकि तू अपनी बहन को चोदे और मुझे मेरे भाई का लन्ड चूसने को मिले !

मैंने कहा- ठीक है, अब चूस ले जितना चूसना है अपने भाई का लन्ड।

और रेखा मेरे लन्ड को चूसने लग गई। रेखा मेरे लन्ड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई आइसक्रीम खा रही हो। कुछ देर तक वो मेरा लन्ड ही चूसती रही। थोड़ी देर बाद मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये और खुद भी नंगा हो गया। नंगे होने के बाद रेखा मुझसे बोली- भैया, मेरी चूत में खुजली हो रही है, मेरी चूत की खुजली मिटाओ ना !

मैंने कहा- अभी लो बहना !

फिर मैंने उसकी चूत चाटना शुरु किया, आह ! आह क्या मुलायम चूत थी रेखा की ! मजा आ गया अपनी बहन की चूत चाटकर तो। चूत चाटने के बाद मैंने उसके स्तन दबाने शुरु किये और उनको चूसने लगा। जब मैं उसकी चूत चाट रहा था और स्तन दबा रहा था तब वो सिसकियाँ ले रही थी कुछ इस तरह से- आहऽऽ ऊ...ऊ...ऊ......ऊ आह ... आउच... आह...... ऊ... ऊ............आउच !

उसकी सिसकियों से पूरा कमरा गूंज रहा था। कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा। लेकिन फिर रेखा बोली- भाई, अब बहुत हो गया चाटना-चटाना, अब असली काम शुरु करो !

फिर मैं वो काम करने के लिये तैयार हुआ जो दुनिया का कोई भी भाई करना नहीं चाहता, लेकिन जब आपकी बहन ही आपके सामने अपनी दोनों टांगें खोलकर बैठ जाये तो आप कर ही क्या सकते हैं, इसलिये मैं मजबूर था और मैंने अपना लन्ड डाल दिया अपनी बहन की चूत में !

और रेखा जोर चिल्लाई- आह......आउच.........आह...............ऊ...।

फिर मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु किये और वो सिसकियाँ लेने लगी।

मैंने रेखा से पूछा- मेरी प्यारी बहना, मेरी रन्डी बहना, मजा आ रहा है ना अपने भाई से चुदने में?

रेखा बोली- हाँ, मेरे बहनचोद भाई, मजा आ रहा है !

इसी बीच मेरे धक्कों की स्पीड बढ़ती जा रही थी और उसकी सिसकियों की भी।

मैंने रेखा से पूछा- रन्डी रेखा, लगता है तुम्हें चुदने का काफी अनुभव है। कितनों से चुदवा चुकी हो अब तक?

रेखा बोली- 10 या 15 जनो से चुद चुकी हूँ अब तक !

मैंने कहा- 10-15 ? तुम क्या रन्डी बनना चाहती हो?

रेखा बोली- हाँ भैया, लेकिन ये बातें बाद में करेगे, अभी तो तुम मुझे जोर-जोर चोदो और फाड़ दो मेरी चूत को ॰

फिर मैंने अपने धक्कों की गति दोगुनी कर दी और रेखा को जोर-जोर चोदने लगा। रेखा भी जोर-जोर चिल्ला रही थी- चोद, मादरचोद, बहनचोद चोद अपनी बहन को ! आज फाड़ दे अपनी बहन की चूत को, आह... ...आउच......... आह............... ऊ... मेरे प्यारे भैया ! चोद, चोद, चोद, फाड दे............

फिर लगभग 25-30 मिनट बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। काफी देर तक हम एक दूसरे से चिपके रहे। थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और हम दोनों ने एक दूसरे को देखा। तभी रेखा हँस पड़ी। रेखा के हँसने से मेरे दिल का बोझ कम हो गया। रेखा ने मेरे होठों पर चूमते हुये कहा- भगवान, मेरे जैसा भाई सभी को दे !

लेकिन फिर उसने मुझे उदास देखते हुये कहा- भैया, इस बारे में ज्यादा मत सोचो, ये तो "घर की बात है।"

फिर मैं भी हँस पडा और बाजार जाकर आई-पिल लेकर आया ताकि वो माँ ना बन जाये। इस तरह हम भाई-बहन की पहली सेक्स कहानी खत्म हुई।

Raja Ka Farman

इस स्वप्न में मैं एक ऐसे देश में पहुँच गई हूँ जहाँ का राजा बहुत ही क्रूर और कामोत्तेजित है, उसके देश में लड़कियाँ जैसे ही जवान होती हैं, उन्हें राजा के पास एक महीने के लिए भेज दिया जाता है और वो उनका कामार्य भंग करता है, उन्हें भोगता है और एक महीने बाद उन्हें अपने घर वापिस भेज देता है।

यदि कोई लड़की उसके बाद माँ बनती है, तो उसकी महल में वापसी राजा की रखैल के रूप में होती है वो वहाँ बच्चे को जन्म देने और चालीस साल पार करने के बाद दासी बन कर रहती है, जो कोई परिवार अपनी बेटी को राजा से भोग लगवाने नहीं भेजता, उसकी बेटी उठवा ली जाती और उसकी बाज़ार में बोली लगवाई जाती, जो उसे खरीदता वो सबके सामने उसे चोदता, खसोटता और उसे अपनी नोकरानी बना कर रखता अपने ख़ास आदमियों से उसे चुदाता और जब मन भर जाता तो फिर किसी को बेच देता!!

इस तरह जब मैंने वहाँ कदम रखा तो बहुत से मर्द मुझे बेचैन निगाहों से देखने लगे मेरे आसपास मंडराने लगे कोई मेरी गाण्ड छूकर चला जाता तो कोई फबतियाँ कसता यह कहते हुए कि आज तुझे रखैल नहीं, अपनी रानी बनाऊँगा।

एक ने तो हद ही कर दी, पीछे से आते हुए मेरी अन्तःचोली कपड़ों के भीतर से ही खोल दी !!! वहाँ कहीं जाकर चोली फिर से बंद करने की जगह नहीं थी तो मैं कुछ आगे बढ़ी, चलने से मेरी चूचियाँ हिलने लगी, तो एक आदमी सामने से आया और कहने लगा- तुम से नहीं संभल रही तो मैं थाम लूँ !!

उस पर मैंने उस आदमी पर हाथ उठा दिया, उसने हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी और खींच कर दूसरे हाथ से मेरी चूचियाँ मसल दी।

तभी वहाँ खड़े भूखे मर्द मेरी और बढ़ने लगे और बोले- आओ, इसे राजा के पास ले जाते हैं ! खूब बड़ा इनाम मिलेगा !

और सभी मुझे पकड़ कर राजा के दरबार में ले गए, दरबार बहुत बड़ा था, वहाँ बहुत सी दासियाँ थी, सभी दासियाँ अधनंगी थी, आते जाते मंत्री, तंत्री, रक्षक उन दासियों को छेड़ रहे थे, उनका बदन मसल रहे थे, बहुत कामुक माहौल था।

राजा ने सुनवाई शुरू की तो एक रखैल राजा की गोद में आ बैठी। राजा ने उसके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और सुनवाई करते करते अपना लण्ड चुसवाने लगा।

सभी मंत्री इतनी सारी नंगी औरतों को देख कर अपना लण्ड अपने हाथों से मसल रहे थे।

तभी मेरी सुनवाई की बारी आई, बाहर हुई घटना विस्तार में बताई गई।

सब कुछ सुनकर राजा ने पूछा- इतना गुरूर किस बात का तुझे लड़की...? आखिर ऐसा क्या है तेरे पास? ये चूचियाँ? यह गाण्ड? यह चूत? ये तो हर औरत के पास होती है और इस देश में औरतों की कमी नहीं ! मेरी एक आवाज़ पर यहाँ चूतों की कतार लग जाती है।

तभी वो अपनी रखैल को

चूमने लगा और उसने अपनी रखैल को कुछ इशारा किया और ताली बजाई।

रखैल उसके पैरों के पास लेट गई और हवा में टांगें करके उसने अपनी टांगें खोल के चूत उसके सामने पेश कर दी। देखते ही देखते बीस-पच्चीस रखैलें आई और अपनी टांगें खोल कर हर मंत्री के सामने चूत पेश करने लगी !!

मंत्रियों के मसलते लण्ड फुफकारने लगे, और सभी ने रखैलो की चूतों में अपने अपने लण्ड घुसा दिए और चुदाई करने लगे।

राजा ने पूछा- अब बोल लड़की !

मैं शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी, मैंने राजा से जबान लड़ाई- आप यह सब क्यों कर रहे हैं...?

राजा बोला- ताकि तुझे तेरी औकात पता लगे कि तुम औरतें सिर्फ मर्दों से चुदने और चूसने-चुसवाने के लिए पैदा होती हो ! हाथ उठाने के लिए नहीं, और अगर हाथ उठ भी जाता है तो भी लण्ड के लिए उठना चाहिए...!!!

कहते हुए राजा ने फैसला सुनाया- आज से लेकर कल इसी समय तक तेरी लगातार चुदाई होगी और वो भी भरे महल में..!!!

राजा: सिपाहियो ले जाओ इस लड़की को और तैयार करो हमारे लिए ! इसकी अक्ल तो हम ठिकाने लगायेंगे, आजकल बहुत पर निकल आए हैं इन रांडों के !!

मुझे महल में ले जाया गया और स्नानघर में ले जाकर एक तालाब में कपड़ों समेत धकेल दिया गया। फिर सिपाही भी नंगे हो अन्दर उतर आए और मेरे बदन को धोने के बहाने मसलने लगे।

एक ने मेरी चूत में ऊँगली डाल दी, एक ने गाण्ड में अंगूठा घुसा दिया और हाथों की उंगलियों और हथेलियों से मेरी गोल-गोल गाण्ड को मसल कर मज़े लेने लगा।

एक ने मेरे चूचे दबोच लिए और एक मेरा दाना हिला हिला के मुझे तड़पाने लगा।

मेरे मुँह से आनन्द भरी आहें निकलने लगी।

तभी एक ने मेरे मुँह में दो उंगलियाँ डाल दी, कोई भी अपने औजार का प्रयोग नहीं कर रहा था, क्यूंकि सबको पता था कि मैं राजा का माल हूँ, और मुझ में मुँह मारना यानि जान से हाथ धोना !

तभी राजा अन्दर आया और मुझे 5-6 सिपाहियों के बीच कसमसाता देख मजे लेने लगा। मैं आँखें बंद कर आहें भर रही थी, मेरी अन्तर्वासना जाग चुकी थी, आँखों में कामवासना भर चुकी थी।

तभी जाने अनजाने मेरे हाथ एक सिपाही के लण्ड तक जा पहुँचे, सिपाही झेंपते हुए पीछे हो गया यह सोच कर कि राजा को पता लगा तो लण्ड कटवा देंगे!

मैं चुदने को तड़पने लगी।

तभी राजा ने सिपाहियों को जाने का इशारा किया और मेरी कामतन्द्रा टूट गई।

राजा पानी में उतर आया और उसने मेरे कंधे पर जोर से काट खाया, मेरा खून निकलने लगा और मुझे अपनी ओर खींचा...

राजा : मैं जानता हूँ कि तू अब खुद के काबू में भी नहीं है...

मैं : जा जा ! तुझ में इतनी हिम्मत नहीं कि किसी औरत का सतीत्व बिना उसकी मर्जी के तोड़ सके ! इतनी हिम्मत होती तो क्या औरतों पर जुल्म करता? उन्हें मजबूर करके अपनी रखैल बनाता? अपने फरमान से प्रजा को दुखी करता?? नहीं, तू तो एक नपुंसक है, जब तेरी कोई भी पत्नी माँ नहीं बन सकी तो तूने बाहरी औरतों का शोषण किया, तेरे जैसा बुज़दिल और बेगैरत इन्सान मैंने आज तक नहीं देखा..!!

राजा : मैं बेगैरत..? मैं बुज़्दिल..? तो तू क्या है? रण्डियो की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व..!!!

मैं : वो तेरे आदेश का पालन कर रहे थे और अगर मैं साथ न देती तो तू उनका क़त्ल करवा देता ! मेरी वजह से किसी बेक़सूर की जान जाये, यह पाप मैं अपने सर नहीं ले सकती..!!

राजा : अच्छा !!!

यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा...

राजा : मैं बेगैरत..? मैं बुज़दिल..? तो तू क्या है? रण्डियो की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व..!!!

मैं : वो तेरे आदेश का पालन कर रहे थे और अगर मैं साथ न देती तो तू उनका क़त्ल करवा देता ! मेरी वजह से किसी बेक़सूर की जान जाये, यह पाप मैं अपने सर नहीं ले सकती..!!

राजा : अच्छा !!!

यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा...

उसने मेरी चूचियाँ थामने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिए, मैं दो कदम पीछे हो गई, राजा भी देखते ही देखते आगे आ गया।

मेरे मन में एक तरकीब सूझी, राजा जैसे ही और आगे बढ़ा, मैंने पानी के अन्दर ही उसके लण्ड पर दबाव बनाया, राजा मन ही मन खुश हो रहा था, तभी उसकी शरारत भरी मुस्कान, दर्द भरी कराह में बदल गयी, मैंने उसका लण्ड जो मरोड़ दिया था।

राजा लण्ड पकडे वहीं खड़ा रहा और मैं वहाँ से भाग निकली।

राजा ने मेरे पीछे सैनिक लगा दिए, मैं एक शयनकक्ष में जा घुसी, शयन कक्ष खाली था, मैंने परदे उतार कर जल्दी से अपना बदन ढका, और एक मूरत के पीछे छिप गई।

तभी दरवाजे पे दस्तक हुई...

सिपाही: महारानी जी, यहाँ कोई स्त्री आई है..??

मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था सो मैंने जवाब दिया.. अगर जवाब न देती तो वो सिपाही अन्दर चला आता .!!!

मैं कमरे के भीतर से : नहीं यहाँ कोई नहीं आया, तुम जाओ हम कुछ देर विश्राम करना चाहते हैं..!!

सिपाही: महारानी जी, क्षमा करें, महाराज का आदेश है...!!!

तब तक मैंने महारानी के वस्त्र पहन लिए थे और खिड़की की तरफ मुँह करके खड़ी हो गई और थोड़ा सा घूँघट भी निकाल लिया..

मैं : ठीक है, आ जाओ..

सिपाही कमरे में घुसा और कमरा तलाशने लगा, मेरे पास आया और सर झुका कर कहने लगा- क्षमा कीजिए महारानी जी ! यहाँ कोई नहीं है..!!

सिपाही के जाते ही मैं भी रानी के वेश में कमरे से बाहर निकली, ताज्जुब की बात तो यह थी कि कहीं पर भी कच्छी और ब्रा नाम की चीज़ नहीं थी, मैं महारानी के वस्त्रों में तो थी पर अन्दर से एकदम नंगी

! मेरे चूचे चलते-भागते हिल रहे थे, कि तभी मैं एक जगह जाकर छुपी..... और पकड़ ली गई।

जगह थी "वासना गृह"

वहाँ राजा नग्नावस्था में था, उसके आसपास उसकी बहुत सी रखैलें थी, एक की चूची एक हाथ में दूसरी की चूची दूसरे हाथ में, तीसरी छाती पर बैठी चूत चटवा रही थी, चौथी टट्टे चाट रही थी, पांचवी लण्ड

एक बार गाण्ड में लेती फिर उछल कर चूत में लेती।

परदे के पीछे से देख देख कर मैं अपना घाघरा उठा कर ऊँगली करने लगी, महारानी के कंगनों की आवाज़ से मैं पकड़ी गई।

राजा ने आपातकाल बैठक बुलाई, राज्य के सभी मर्दों को न्योता दिया गया, राजा नग्न अवस्था में ही बैठक में आया...

और राजा ने फरमान सुनाया- इस लड़की ने मुझसे चुदने से इनकार किया

है, इसलिए इसकी इसी दरबार में बोली लगेगी, ऐसी बोली जैसी आज तक किसी की नहीं हुई होगी। इस बोली के बाद इसका

इसी सभा में चीरहरण होगा, उसके बाद यह रखैल तो क्या किसी की दासी बनने के लायक भी नहीं रह

जाएगी, इसके चीर और यौवनहरण के बाद इसकी चूत और गांड सिल दी जाएगी, चूचे और जबान काट

लिए जायेंगे। और हाँ, बोली लड़की की नहीं उसकी जवानी की लगेगी, चूचे, गाण्ड, गदराया बदन, जांघें,

बाहें, होंठ, बगलें जिस्म के हर हिस्से की बोली लगेगी..!!!

राजा ने फरमान सुनाया- इस लड़की ने मुझसे चुदने से इनकार किया है, इसलिए इसकी इसी दरबार में बोली लगेगी, ऐसी बोली जैसी आज तक किसी की नहीं हुई होगी। इस बोली के बाद इसका इसी सभा में चीरहरण होगा, उसके बाद यह रखैल तो क्या किसी की दासी बनने के लायक भी नहीं रह जाएगी, इसके चीर और यौवनहरण के बाद इसकी चूत और गांड सिल दी जाएगी, चूचे और जबान काट लिए जायेंगे। और हाँ, बोली लड़की की नहीं उसकी जवानी की लगेगी, चूचे, गाण्ड, गदराया बदन, जांघें, बाहें, होंठ, बगलें जिस्म के हर हिस्से की बोली लगेगी..!!!

यह सुन कर तो मेरे होश उड़ गए..

अब और क्या होना बाकी है मेरे साथ...?

मुझे मन ही मन डर लग रहा था..!!!

यह सुन सभा में ख़ुशी से शोरगुल होने लगा, लोग ठहाके लगाने लगे, फबतियाँ कसने लगे, भीड़ में से आवाज़ आई- आज मज़ा आयेगा ! मैं अभी घर से अशर्फ़ियाँ उठा लाता हूँ !

मेरी तो हवा निकल रही थी कि अब जाने आगे मेरे साथ क्या होने वाला है, इससे पहले जो हुआ वो कम था क्या...!!!

कि अचानक आवाज़ आई..

राजा : बोली ठीक 15 मिनट बाद आरम्भ होगी ताकि आप सभी इस समय में इसके जिस्म का मुआयना कर लें और अपने हिसाब से बोली लगायें..!!!

मेरे जिस्म से कपड़े फाड़ कर फिंकवा दिए गए, लोगों की तो मौज हो गई।

तभी एक मंत्री ने राजा से अनुरोध किया- महाराज, क्या हम इसे छूकर देख सकते हैं? ताकि हमें भी भरोसा हो जाये कि जो माल हम खरीद रहे हैं उसमें किसी बात की कमी तो
नहीं..!!!

राजा : ठीक है छू लो !! आखिर ग्राहक को भी पता होना चाहिए कि जिस चीज की वो कीमत दे रहा है वो असल में क्या है और कैसा है..!!! हा ह़ा हा हा !!

मंत्री मेरी तरफ बढ़ चला, तो भीड़ से आवाज़ आई- मंत्री जी छुइएगा नहीं ! कहीं पानी न छोड़ दे राण्ड..!!!

एक और आवाज़ आई- और अगर छू भी रहे हैं जनाब, तो मसल डालियेगा ! और हाँ ! जिस्म का कोई अंग ना रहने पाए..!!!

यह सुन कर लोग ठहाके लगाने लगे..

मैं नंगी खड़ी पानी-पानी हो रही थी, मुझे अब तक केवल पाँच लोगो ने छुआ था, राजा और उसके सिपाहियों ने और अब छठे की बारी थी।

वो आया और आते ही उसने मेरे केशों में हाथ फेरा, फिर अचानक से बालों को खींच कर उसने मुझे धक्का दिया और भीड़ की तरफ मुँह करके बोला- क्यों कैसी रही?

सभी लोगों ने उसे वाह-वाही दी।

फिर वो मेरी तरफ बढ़ा, दोनों हाथों से मेरे चूचे थाम कर बोला- बहुत गरम माल है ! ऐसा लग रहा है कि हाथों में पिघल रहा है !

और मेरे चूचे बेदर्दी से मसलने लगा। चूचे पकड़ कर उसने यकायक मुझे अपनी ओर खींचा और मेरी गाण्ड पर ज़ोरदार तमाचे लगाने शुरू कर दिए, कहने लगा- नीचे से भी कड़क है !

फिर उसने मुझे ज़मीन पर धकेल दिया और दो सिपाही बुलवा कर मेरी टांगें हवा में खुलवा दी, मेरी चूत की फांकें खोल कर बोलने लगा- अरे कोई चोदो इस राण्ड को ! वरना पानी बहा बहा कर पूरा महल अपने काम रस से भर देगी...!!!

भीड़ से आवाज़ आई- हम भी तो उसमें डूबना चाहते हैं !

तभी

महामंत्री ने एलान किया- बोली शुरू की जाये !

पहली बोली महाराज की।

महाराज ने कहा- सबसे पहले होंठो की बोली, एक सौ सोने की अशर्फियाँ !

बोली बढ़ते-बढ़ते 2500 अशर्फियों तक पहुँची और फिर मेरे होंठ आखिरकार बिक गए, किसी साहूकार ने खरीदे थे।

साहूकार आगे आया और मेरे होंठो पर चूमने लगा, भरा दरबार मेरी लुट ती हुई इज्ज़त देख रहा था, मेरे होंठ चूसते हुए उसने अपनी जबान मेरे मुँह में डाल दी और मेरी गर्दन पकड़ ली।

सभी लोगों के मुँह में पानी आ रहा था, लार टपक रही थी।

फिर मेरी बगलों की बोली हुई, जिन्हें 1500 अशर्फियों में दो भाइयों ने खरीदा।

दोनों अपना लण्ड झुलाते, मेरे दोनों तरफ आ गए और दोनों ने अपने अपने लण्ड मेरी बगलों में घुसा दिए और घिसने लगे।

उधर साहूकार ने भी अपने फनफ़नाता लण्ड निकाला और सर की तरफ खड़े हो मेरा चेहरा अपनी ओर करते हुए अपना लण्ड मेरे मुंह में पेल दिया...

अब मेरे जिस्म पर तीन लण्ड थे।

फिर मेरे चूचों की बोली शुरू हुई।

महामंत्री ने मेरे चूचे 5000 अशर्फियों में खरीद लिए और आकर मेरी कमर पर बैठ मेरे चूचे चूसने लगे।

फिर मेरे हाथों की बोली लगी।

दो व्यपारियो ने मेरे हाथ खरीदे और अपने अपने लण्ड मेरे हाथों में मुठ मराने के लिए दे दिए।फिर बोली लगी मेरी गांड की !

दस हज़ार अशर्फियों में गाण्ड भी बिक गई।

गाण्ड का फूल कोमल था, उसे एक बलिष्ठ पहलवान ने खरीदा था।

वो आया और मुझे अपने
नीचे सीधा करके लेटा लिया। इस तरह कि मेरा चेहरा छत की तरफ हो।

अब मुझ पर सात लण्ड सवार थे, दो हाथों में, दो बगलों में, एक चूचों में, एक मुँह में और एक गाण्ड में !

और अब बारी राजकुमारी चूत की थी !

वो इतने लण्डों की वजह से रस चो चो कर बेहाल थी।

मैं जल्दी ही अपनी चूत में एक मोटा ताज़ा लौड़ा लेना चाहती थी।

मेरी इज्ज़त तो लुट ही चुकी थी, मैं सबके सामने नंगी हुई अलग अलग जगह से चुद रही थी, मैं खुद पर अपना नियंत्रण खो चुकी थी।

इतने मर्द मेरे जिस्म से लिपटे थे, मैं इसी सोच में थी कि मुझे सुनाई पड़ा- इसकी चूत आपकी हुई !

मैंने मुँह से साहूकार का लण्ड निकाला और चेहरा उठा कर इधर-उधर देखा तो क्या देखती हूँ,

चूत राजा ने खरीदी थी, वो भी दस-बीस हज़ार में नहीं, पूरे एक लाख अशर्फियों में !

राजा आया, जो कि पहले से नंगा था, आकर मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगा...

उधर मेरा मुँह लण्ड खा-खा कर थक चुका था...कि साहूकार ने अपना काम रस छोड़ दिया, मेरे मुँह में भर दिया और उठ कर पूरी कामलीला देखने लगा..

मेरी बगलों से लंड-रस बह रहा था, चूचो पर महामंत्री जी अपने हाथों से घुन्डियाँ घुमा कर मुझे मीठी सी टीस दे रहे थे, हाथ वाले लण्ड, मैं अभी भी जोर जोर से हिला रही थी, और पहलवान मेरी गाण्ड फाड़ रहा था।

उस पर चोट खाए राजा ने जोर से एक झटका मारा और मेरी चूत फाड़ डाली।

मेरी चूत से

खून नहीं निकला तो राजा बोला- तू तो खेली-खाई है, तो भी तेरे इतने नखरे हैं... ये ले ...!!!

कह कर उसने एक और ज़ोर से झटका मारा.... एक मीठी सी आह के साथ एक .. तैरती सी तरंग मेरे जिस्म में फ़ैल गई।

अब तो गाण्ड का दर्द भी जा चुका था... ऐसा लग रहा था जैसी दुनिया भर का समंदर मेरी दो टांगों के बीच समा गया है।

सभी मंत्रिगण मेरे हाल देख कर मुठ मार रहे थे...

महामंत्री मेरे चूचे और जोर से मसल मसल के दाँतों से काटने लगे...

मैं कराह रही थी.. आःह्ह्ह आआह्ह्ह्ह से दरबार गूँज रहा था...

मेरी आहें.. राजा और पहलवान को लुभा रही थी कि तभी राजा अपने हाथ से मेरी चूत का दाना छेड़ने लगा..

मैं तड़प उठी...

मैंने अपने हाथ से एक लण्ड छोड़ राजा के हाथ पर हाथ रख दिया और जोर-जोर से भींचने लगी.. राजा के हाथ को अपने दाने पर दबाने लगी..

तभी मंत्री जी ने अपना काम रस मेरे चूचों पर छोड़ दिया... और जिस्म से हट गए..

उन्होंने हटते ही मेरे होंठों पे ज़ोरदार चुम्मा दिया और बोले-. तू कमाल की है... अगर राजा का चूचे काटने का फरमान नहीं होता तो शायद में तेरे चूचे चूसने, दबाने के लिए तुझे हमेशा के लिए अपने पास रख लेता...

तभी साहूकार पिनियाते हुए आया और बोला- इसके होंठ मेरे हैं... तू क्यों चूम रहा है..?

महामंत्री बोला- अरे सबसे पहले तो तूने ही मुँह मारा है इस पर.. तू हट गया तो मैंने भी मार लिया अपना मुँह ! अब कुआँ चाहे किसी का भी हो, कुआँ पानी तो हर

किसी को पिलाता है ना...?

दोनों व्यापारियों की भी पिचकारी छूटने लगी थी, दोनों ने मेरे चेहरे पर पिचकारी दे मारी.. और बोले- चाट इसको... नहीं तो फिर से मुठ मारेगी तू हमारी...

मेरी हालत.. सचमुच की रांडों जैसी हो गई थी कि तभी पहलवान छूटने लगा और दोनों हाथों से मेरे चूचों पर जो माल गिरा था उसे मेरे चूचों पर मसलने लगा...

महामंत्री खड़े खड़े तमाशा देख रहा था.. कि कराहट से मेरा मुँह खुल गया है...

तभी राजा मेरे ऊपर आया और मेरे होंठो को उसने अपने मुँह में भर लिया, काटने-खसोटने लगा...

तभी पहलवान झड़ने लगा और उसने सारा रास मेरी गाण्ड में ही छोड़ दिया...

उसका लण्ड छोटा होकर मेरी गाण्ड से बाहर आ गया..

अब राजा को मौका मिल गया.. वो तो पहले से ही मुझ पर सवार था..

अब मेरे जिस्म पर वो हक़ ज़माने लगा, कभी मेरे चूचे मसलता, कभी मेरे मुँह में हाथ डाल देता..

वो मेरी जवानी लूट रहा था और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी..

इतने में उसने पहलवान को मेरे नीचे से हटने का मौका दिया..

अब मैं कालीन पर और राजा मेरी चूत में घुसा बैठा था...

वो अब मेरी गाण्ड में दो ऊँगलियाँ घुसाने लगा.. और मैं मदमस्त हुई अपनी जवानी का रस लुटा रही थी..

अब मैं भी मज़े लेने लगी थी.. मेरे अंदर की छिपी राण्ड अब बाहर आकर अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी... मेरी आहें दरबार में गूँज रही थी..

कि तभी अचानक राजा ने लण्ड निकाल कर मेरी गाण्ड में पेल दिया...

राजा अब झड़ने वाला था... राजा ने एक झटके से अपना लण्ड फिर मेरी चूत में पेला और झड़ने लगा...

आगे बढ़ कर मेरे होंठ चूसने लगा... उसने मेरी चूचक मसले ... और मेरे अन्दर ही झड़ गया... उसके बाद वो मुझ पर से हट गया ..

उसने सिपाहियो को मुझे खड़ा करने को बोला..

मैं कामरस में भीगी हुई थी, मेरे से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था..

जैसे तैसे मैं सिपाहियो के सहारे खड़ी हुई।

हवा में कामरस की खुशबू मुझे और चुदने को मजबूर कर रही थी...

मैं मदमस्त हुई अपनी जवानी का रस लुटा रही थी..

अब मैं भी मज़े लेने लगी थी.. मेरे अंदर की छिपी राण्ड अब बाहर आकर अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी... मेरी आहें दरबार में गूँज रही थी..

कि तभी अचानक राजा ने लण्ड निकाल कर मेरी गाण्ड में पेल दिया...

राजा अब झड़ने वाला था... राजा ने एक झटके से अपना लण्ड फिर मेरी चूत में पेला और झड़ने लगा...

आगे बढ़ कर मेरे होंठ चूसने लगा... उसने मेरी चूचक मसले ... और मेरे अन्दर ही झड़ गया... उसके बाद वो मुझ पर से हट गया ..

उसने सिपाहियो को मुझे खड़ा करने को बोला..

मैं कामरस में भीगी हुई थी, मेरे से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था..

जैसे तैसे मैं सिपाहियो के सहारे खड़ी हुई।

हवा में कामरस की खुशबू मुझे और चुदने को मजबूर कर रही थी...

सभी मर्द मुझ पर हंस रहे थे, मेरी बेबसी का मजाक बना रहे थे, राजा ठहाके लगा रहा था...

कि तभी मुझ पर जोर से पानी फेंका गया..

मेरी आधी बेहोशी चूर चूर हो गई, मेरे जिस्म से काम रस हट गया..

मेरा गोरा जिस्म सबकी निगाहों में चमकने लगा..

मेरे गीले बाल मेरी चूचियों को ढकने की नाकाम कोशिश कर रहे थे..

मेरे थरथराते होंठ पानी से भीग कर कई लण्डों को आमंत्रित कर रहे थे...

मेरी चमकती गाण्ड चुद कर और चौड़ी हो गई थी...

मेरी हालत देखने लायक थी...

सभी सभासद मेरा आँखों से बलात्कार कर रहे थे..

मैंने अपने हाथों से अपने लाल चूचों और बहती चूत को छिपाने की कोशिश की..

कि तभी दो सिपाही आए और मेरे जिस्म से मेरे हाथों को अलग कर अलग अलग दिशा में थाम लिया।

मैं नंगी खड़ी जमीन में गड़े जा रही थी..!!

सब मंत्री खड़े होकर मुझ पर थूकने लगे.. और ठहाके लगा कर हंसने लगे...

एक सिपाही दो लट्ठ लेकर आया, मोटे-मोटे लट्ठ, जो लंड से कई गुना बड़े और मोटे थे।

एक मेरी चूत में और दूसरा मेरी गाण्ड में घुसा दिया गया..

दर्द के मारे मैं चिल्लाने लगी...

तभी एक कसाई को बुलवाया गया.. ताकि वो मेरे चूचे और ज़बान काट सके..

कसाई अपने औज़ारों की धार तेज कर रहा था..

वो मेरे करीब आया और काटने के लिए उसने अपनी कटार उठाई..

कि तभी पीछे से आवाज़ आई..

राजा : रुको ...!!!

सभी सभासद बातें बनाने लगे..- यह क्या हो गया .. चिकने बदन पर राजा फिसल गया...!!!

राजा : इस लड़की ने जितना दर्द सहना था, सह चुकी... और ऐसा नहीं कि इसने सिर्फ दर्द सहा... इसने सिपाहियों के हाथों से मसले जाने पर आहें भी भरी.. और अपनी चूत की मादक सुगंध सूंघ कर यह भी चुदने को बेताब हुई.. इससे यह साबित होता है कि लड़की में जिस्म का गुरूर जरूर है.. पर यदि इसे ठीक ढंग से गर्म किया जाये तो यह 8-10 लड़कियों का मज़ा एक ही बार में दे सकती है... इसलिए मैं इसकी चूत, गाण्ड सिलने का आदेश वापिस लेता हूँ और लड़की पर छोड़ता हूँ कि वो मेरी सबसे प्यारी रखैल बनना चाहती है या गली मोहल्ले में नंगी घूमने वाली रंडी? या फिर किसी टुच्चे की रखैल बन कर अपनी जवानी बर्बाद करना चाहती

है और नौकरानी बने रहना चाहती है सारी ज़िन्दगी..!!!

मैं राजा के हाथ लुट चुकी थी और कई मर्द मुझे अब भोग चुके थे... राजा की बाकी दासियों की तरह मैं भी उसके लण्ड की दीवानी हो चुकी थी..

इसलिए मैंने उसकी रखैल बन कर रहना मंज़ूर किया।

अब राजा हर रात मेरे साथ गुज़ारता, मैं हर वक़्त नंगी रहती...मेरी अन्तर्वासना हर समय जागृत रहती...

राजा जब आता, तब मुझे चोदता...

मेरे जीवन में अब वासना.. काम .. चुदाई.. लंड के सिवा कुछ नहीं रह गया था...

समाप्त !!!!

सास के साथ मस्ती

मेरा नाम राज है और मैं 28 साल का हूँ, दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरी शादी को हुए दो साल हो गए है, मेरी सास 36 साल की एकदम जवान औरत है, बहुत सेक्सी है, मेरा तो उसे देखते ही खड़ा हो जाता है। मैं हमेशा उसकी फोटो देख के मुठ मारता हूँ, मैं हमेशा उसको देखता रहता था, हमेशा उसको चोदना चाहता था, उसके मुँह पर मुठ मारने का मन करता था।
बात उन दिनों की है जब मेरे सास हमारे यहाँ रहने आई क्योंकि मेरे बीवी की तबीयत ख़राब रहती थी, मैं बहुत खुश हो गया। जब वो नहाने जाती तो नहाने के बाद मैं तुरन्त नहाने चला जाता था ताकि वो आपने कपडे नहीं धो पाए। उसके गीले कपड़ों में मैं ब्रा और पैंटी खोजता और मैं उसकी गीली पैंटी को सूंघता और उसको मुँह में डाल कर चूस लेता। मैं दोनों पर खूब मुठ मरता था, जब वो सोती थी तो अकसर उसकी साड़ी उठ जाती थी और मैं उसकी फोटो ले लेता था। इस तरह मुझे बहुत मजा आने लगा, फिर क्या, मैं उसको चोदना चाहता था।

और आखिर वो दिन आ गया, एक दिन मेरे बीवी अपने छोटे भाई जो सात साल का है उसे लेकर पार्क में घूमने चली गई, मैं और मेरी सास घर पर अकेले थे। मैं बिस्तर पर बैठ कर लैपटॉप पर काम कर रहा था। इतने में मेरी सास मेरे पास आकर बिस्तर के ऊपर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उठा कर मेरे मुँह पर ढक कर बोली- ले चाट ले अपनी सास की बुर ! यही चाहते थे न तुम ?

मेरी कुछ समझ में नहीं आया।

साड़ी के अंदर बिल्कुल अँधेरा था।

वह बोली- क्या मुझे नहीं पता कि तुझे क्या चाहिये !

मैं उठा और अलग हो गया।

वो बोली- क्यों ? अपनी सास की बुर नहीं चाटनी?

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, साड़ी खोल दी और पेटीकोट के अंदर घुस गया। उसकी जाघें बहुत मोटी और मस्त थी।

फिर मैंने उसकी पैंटी सूंघी, क्या खुशबू थी ! फिर मैं उसकी पैंटी को चाटने लगा।

मैंने पूछा- आपको कैसे पता चला कि मुझे क्या चाहिए?

बोली- साले ! हमेशा मुझे घूरते रहते हो ! मेरे नहाने के बाद तुरंत नहाने चले जाते हो ! मेरी पैंटी और ब्रा पर मुठ मारते हो और पूछते हो कैसे पता चला? पैंटी धोते समय मुझे पता चल गया।

बोली- क्या मैं तुम्हें इतनी अच्छी लगती हूँ?

मैंने कहा- बहुत अच्छी !

चोदना चाहते हो मुझ को?

मैंने कहा- हां ! बहुत दिनों से !

बोली- आजा राजा चोद दे अपनी सास को !

मैं पागल सा हो गया। मैंने पेटीकोट खोल दिया, अब वो सिर्फ पैंटी और ब्लाउज मैं थी, मैंने पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और पैंटी निकाल दी और मुँह में लेकर चूसने लगा।

वह बोली- पैंटी से बहुत खेल चुके ! अब बुर से खेलो !

क्या लाल बुर थी साली की ! और थोड़े थोड़े बाल थे ! मस्त सेक्सी लग रही थी।

मैंने अपना मुँह उसकी बुर पर रख दिया और चाटना शुरु कर दिया। वो सिसकारिययाँ लेने लगी- और चाट साले, पीले अपनी सास की बुर !

मैं लगातार बुर चाटता रहा।

इतने में बोली- मुझे पेशाब करना है !

मैंने कहा- रुको ! मेरे मुँह में करो !

वो बोली- क्यों ?

मैंने कहा- मैं पी लूँगा !

वो बोली- साले, मेरा पेशाब पीयोगे?

मैंने कहा- हाँ, मैं बुर के पास मुँह रखता हूँ, तुम करो !

उसने पेशाब करना शुरु किया, मैं पूरा पेशाब पी गया और कहा- मज़ा आ गया !

वो बोली- कैसा था ?

मैंने कहा- बहुत स्वादिष्ट !

मैंने उसकी बुर चाट कर साफ कर दी और उसमें उंगली डाल कर हिलाने लगा। फिर मैंने उसकी गांड को चाटना शुरु किया। क्या गांड थी साली की ! पर छेद बहुत छोटा था, शायद कोरी गांड थी ! मैंने उसकी गांड पूरी चाट ली।

वो बोली- नीचे ही लगा रहेगा या ऊपर भी आएगा ?

उसके काले ब्लाउज से सफेद ब्रा साफ़ दिख रही थी। मुझे ब्लाउज के ऊपर से ब्रा देखने में बहुत अच्छा लगता है, मैं ब्लाउज के ऊपर से ब्रा छूने लगा और फिर ब्लाउज खोल दिया और ब्रा के ऊपर से चूचियों को दबाने लगा।

क्या बड़ी-बड़ी चूचियाँ थी साली की !

फिर मैंने ब्रा खोल दी और चूचियों को मुँह में ले लिया और खूब चूसा। वो बहुत मज़े ले रही थी मस्त-मस्त गालियाँ दी रही थी।

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और जीभ उसके मुँह में डाल दी।

वो बोली- चलो, अब जल्दी से चोद दो !

मैंने कहा- पहले लण्ड तो चूस लो !

बोली- ला दे !

और मेरा लण्ड चूसने लगी। मै अपना लण्ड उसके मुँह में आगे-पीछे करने लगा।

अब मुझे नहीं रहा गया, मेरा लंड साप की तरह फ़ुन्कारें मार रहा था, मैंने लंड उसकी बुर पर रखा और धीरे-धीरे पूरा लण्ड अपनी सास की बुर में पेल दिया।

वो जोर से चीखी और बोली- हरामी, धीरे से !

मैंने अपना लण्ड उसकी बुर में आगे-पीछे करना शुरु किया। वो भी मस्त होकर गाण्ड उठा-उठा कर चुदवा रही थी और गालियाँ दे रही थी- चोद दे हरामी अपनी सास को ! फ़ाड़ दे मेरी बुर !

मैंने स्पीड बढ़ा दी और कहा- कुछ देर में मेरा गिरने वाला है ! जल्दी मुँह खोलो !

और सारा माल मैंने उसके मुँह में डाल दिया और कुछ उसके चेहरे पर फ़ैला दिया और सारा माल पिलाया।

मैंने पूछा- मज़ा आया?

वो बोली- बहुत मज़ा आया !

उसने कहा- मेरे गांड मारेगा ?

मैंने कहा- हाँ !

पर काफी देर हो गई थी, हमें डर था कि कहीं मेरे बीवी न आ जाये !

वो बोली- ठीक है ! अगली बार !

गाण्ड की कहानी अगले भाग में !

अब क्या, जब भी मौका मिलता मैं अपनी सास को खूब चोदता हूँ और वो भी बड़े मज़े से चुदवाती है।

मेरी कहानी कैसे लगी, जरूर बताना।

पति,पत्नी,सास ,ससुर की रासलीला

मेरा नाम पार्थो है और मैं अपने मा बाप का एकलौता बेटा हूँ. मैं २८ साल का हूँ. मैं रोज़ एक्सेर्सिसे करता हूँ और नहाने के पहलेशारेर पर खूब तेल माता हूँ. मेरा तंदुरस्ती इसीलिए काफी अच्चीहाई. मेरा लुंड करीब १०" लुम्बा और करीब ३ ½" मोटा है. पहलेमेरा लुंड का सुपर काफी लाल रंग का था लेकिन अस परोस मी रहनेवालीन के छूट छोड़ छोड़ कर अब मेरा सुपर कला पर गया है. मैं अब तक करीब १० १२ औरतों को छोड़ चूका हूँ. हमारे परोस किऔरतें मुझसे कई बार अपनी छूट चुदा चुकी हैं और जब मौकमिलता है मैं उनकी छूट और गंद मी अपना लुंड पेल कर जम कर्चुदै करता हूँ. अब मेरी शादी हो गयी है और अब परोसिओं कोचोड़ने का मौका बहुत काम मिलता है.मेरे पत्नी का नाम नुपुर है और व्हो एक सुन्दर भरे बदन वाली औरत्हाई. मेरे विफे के चुन्ची का साइज़ ३६क् और चुतर का साइज़ करीब ४०.हमारा परिवार बहुत ही कांसेर्वतिवे है लेकिन शादी के बाद नुपुरको हमारे परिवार का कांसेर्वतिवे रहन सहन अच्छा नही लगा.उसने हमसे इस बारे मी बात कि और मैंने उसे बताई कि हाँ मैं भी इस्तारफ कि रहन सहन से परेशां हूँ, लेकिन मैं कुछ नहे कर सकता.हाँ अगर तुम कुछ कर सकती हो तो तुम्हे हमारी तरफ से खुला चुथई. इसके बाद नुपुर चुप हो गयी और अपना काम मी लग गुई. एक दिन्मै और नुपुर रात को चुदाई कर रहे थे. नुपुर मरे उत्तेजेना केकफी बर्बर रही थी, जैसे हाँ हाँ मेरे रजा छोडो मुझे, और्जोर से छोडो, फार दो आज मेरी छूट को लेकिन अपना लुंड सम्हाल केराखना अभी तो तुम्हे मेरी गंद भी पह्रनी है.मैं नुपुर कि छूट जोर जोर से छोड़ रह था और बर्बर रहता, "चुप चिनल रंडी, पहले अपनी तंगो को और फैला अपनी चूत्धिला कर और मेरा लुंड पुरा का पुरा उंदर घुसने दे, साली कि चोत्त्मे हमेशा ही खुजली रहती है, आज मैं तेरी छूट छोड़ छोड़ कर्भोसरा बना दूंगा. आरे मेरी चुडैल रानी जरा धीरे धीरे bol,जैसे ही तेरे छूट को मेरा लुंड दिखता है बस तू बर्बराने लग्तीहाई, जितना लुंड प्लिवती है उतना ही चिल्लाती है. धीरे धीरे बोल्तेरे ससुर और सास बगल के कमरे मी है, व्हो कई कहेंगे. नुपुर ने मुझको अपनी बाँहों मी भर कर अपनी चुतर उछालते हुए कही, "आरे सास और ससुर मेरा चिल्लाना सुन सुम्झेंगे कि उनका लरका अपनी बीवी किचूत छोड़ रह है और इससे व्हो भी गरमा कर अपनी चुदाई शुरू कर्देंगे. अच्छा ही होगा मेरी सास कि छूट चुदेगी, दिन भर बहुत्बोलती है मन करता है कि उनकी छूट मी किसी कुत्ते का लुंड पिल्वाडून."मैं बोला "चुप हरामजादी, सास ससुर कि चुदाई कि बात नहीकारते." नुपुर तुनक कर बोली, "कुओं न बोलूं, क्या तिम्हारे मा बापके छूट और लुंड नही है? क्या उन्होने चुदाई का मज़ा नही लियाहाई, अगर ऐसा है तो तुम सास कि छूट से कैसे निकले? आरे तुम्नाही जानते, तेरे मा और बाप रोज दुपहर को खाना खाने के बाद अप्नेकमरे मी जाकर खूब चुदाई कटते हैं."तेरे को कैसे मालूम कि मेरा बाप दोपहर को मेरी मा को छोड़ता है,क्या तुने देखा है क्या? आरे देखने कि क्या जरूरत है, तुम्हारी मा भी छूट मी लुंड जाते हो बहुत बर्बरती है और तेरा बापितना जोर जोर से से तेरे मा को छोड़ता है कि पलंग चर्मारानेलाग्ती है. इन आवाज को सुन सुन कर मैं भी अपनी छूट मी अपनी उन्ग्लीदल कर हिलती हूँ. "तू बहुत चिनल औरत है, अपने सास और ससुर्की चुदाई का हिसाब रखती है. मेरे को लगता है कि तू जरूर सेमेरे माबाप कि चुदाई देख चुकी है" मैं नुपुर से बोला. नुपुर तब्बोली, "हाँ मैंने तेरे माबाप कि चुदाई रोज़ देखती हूँ". "कैसे?"आरे कैसे क्या, जब तेरे मा और बाप दोपहर का खाना खा कर अप्नेबेद्रूम मी जाते है तो मैं उनके कमरे कि खिरकी के पीछे खरीहो जाती हूँ जहन से मुझे उंदर कमरे मी जो हो रही सब कर्वाहिसफ्सफ़ दिक्लाई पार्टी है. तो क्या तू रोज मेरे माबाप कि चुदैदेखती रहती है? और क्या, कबसे? एही करीब दोतीन महीने से.अच्छा अब बोल चिनल रुन्दी जब तेरे सास और ससुर कि चुदाई देख्तीराह्ती है तो क्या उनको मालूम चलता? सास को एह बात मालूम नही, हन्तेरे बाप को मालूम है कि मैं खिरकी से उनकी चुदाई कि ससान देख्राही हूँ. व्हो कैसे? एक दिन मैं रोज कि तरह से अपने सास और ससुर के बेडरूम के खिरकी पीछे खरी थी और उनकी चुदाई देख रही थी कि एकाएक ससुर जी अपना लुंड सास कि छूट मी पेलते पेलते अपना मुँह खिरकी कि तरफ घुमाया. मेरे पास इतना टीम नही था कि मैं चुप जाऊँ और ससुर जी ने हमे खिरकी के बाहर खरे देख लिया. मैं भी क्या करती, मैवान्ही खरी रहे और उनकी चुदाई का ससान देखती रही. ससुर जिहुमे देख कर सिर्फ मुस्कुरा दिया और सास कि तंग हमारी तरफ घुमाकर हमे दिखा दिखा कर अपना लुंड सास कि बुर मी अन्दर बाहर कर्नेलागे. तू पूरी तरह से रुन्दी है, अच्छा अब बोल तुने मेरे बाप कोमेरे मा को कैसे छोड़ते हैं. नुपुर बोली, "एक सफी बात बातों, तेरिमा नंगी होने पर बहुत सेक्सी लगती है और व्हो बहुत हुद्दकरौरत है." कैसे मालूम?"एकदिन मैं उनकी चुदाई देख रहे थी कि देखी बाबुजी ने ससुमा केसर कपरे उतर दिया और माजी बिल्कुल नंगी हो बाबुजी से लिपत्रही थी और उनका लौरा अपने हाथ मी पाकर कर जोर जोर से मसल्राही थी. बाबुजी एक हाथ से नंगी माजी कि चुन्ची दबा रहती और दुसरे हाथ कि उन्ग्लेओं से माजी कि छूट खोद रहे थी.सास जी जोर जोर से सिसकारी भर रही थी और बोल रही थी, "हैमेरे रजा जल्दी करो, मेरी छूट तुम्हारे लुंड खाने के लिए बहुतातुर है. जल्दी से मुझे बिस्टर पर दल कर अपना लुंड मेरी गर्मी छूट मी पेल दो और मुझे छोडो. बौजी ने कहा, "आरे रुको इतनी भिजल्दी क्या है, जर मुझे तुम्हारा छूट को पहले अपने उंगली सेफिर जीव से छोड़ने दे फिर मैं तेरी छूट मी पाना लुंड डालूँगा.अभी अभी तो कमरे आई हो और अभी से छूट छोड़ने कि बात कह्राही हो? अभी तो पुरा दोपहर पर हुआ है, पार्थो तो अभी ४५घन्ती नही आयेगा और उसके आने के बाद ही चाय मिलेगी." माजी नेह सब सुन कर बोली, "है तुम्हे मेरी छूट मी उंगली करना है और्चातना है, वो सब बाद मी कर लेना पहले मेरी छूट मी अपना लुन्द्पेलो, मैं बहुत चुदसी हूँ.""ऐसी भी क्या बात है और इतनी जल्दीक्यों है," बाबुजी ने माजी से बोला.माजी बोली आज सुबह मैं जब सुंदर (हमारे घर का नौकर) कोजगाने के लिए गयी थी तो उसके कमरे मी देखी कि वो अपनी बीवी (सुधा) को पलंग के किनारे उलटी लेटा कर उसकी छूट मी पीछे सीपना लुंड दल कर दाना डान छोड़ रह है. सुधा बोल रहीथी, "जल्दी निकालो नही तो माजी आ गायेंगी और हमे चुदते हेदेख कर क्या कहेंगी." सुन्दर बोला, "आरे चुप कर और हमे मेज़ लेले कर तेरी छूट छोड़ने दे, अभी हमे बहुत मज़ा आ रह है. अगरिस समय माजी भी आयेंगी तो मैं उनके सामने ही तुझे इसी तरफ्चोद्ता रहूंगा." उस समय सुन्दर ऎंड सुधा दोनो ही पूरी तरह सेनंगे थे और बगल मी उनका बच्चा लेटा हुआ था. सुंदर अपने दोनोहाथ से सुधा कि दोनो चुन्ची पाकर मसल रह था और अपनी कमार्चाला कर सुधा कि छूट छोड़ रह था. थोरी देर के बाद सुधा बोल्नेलगी, "है जल्दी से पुरा का पुरा लुंड दल कर हमे छोडो, बहुत्माज़ा आ रह है. आने दो माजी को मैं उनके सामने ही अपनी चूत्मर्वौंगी. क्या होगा ज्यादा से ज्यादा माजी गरम हो कर बाबुजी सीप्नी छूट मरवा लेंगी. बस अब जोर जोर से मुझे छोडो." मैं सुंदर और सुधा कि चुदाई देख कर सुबह से ही गरम हो रही हूँ और मेरिचूत मी बहुत खाज हो रही है. जल्दी से तुम मुझे छोडो, नहीतो मैं अभी जा कर सुंदर से अपनी छूट मर्वाती हूँ."इन सब बात सुन कर बाबुजी ने कहा, "आरे एह तुमने पहले क्यों नहिबोला, मैं सुबह ही तेरी छूट को छोड़ कर त्र छूट कि गर्मी कोथान्दा कर देता. चल बिस्टर पर लेट कर अपनी तंगो को फैला औरप्नी हाथ से अपनी छूट कि पत्शन को खोल, मैं अभी अपना लुंड तेरिचूत मी डालता हूँ." फिर बाबुजी ने माजी को पलंग पर दल कर्चित लेटा दिया और उनके पैर अपने कांडों पर रख कर अपना लुन्द्माजी कि छूट मी एक झटके से दल दिया. माजी ओह! ओह! करने लागिऔर अपनी कमर उचल उचल कर बाबुजी का लुंड अपने छूट मी लेने लगी. सास कि गर्मी देख कर ससुरजी ने भी जोर जोर से अपना लुन्दंदर बाहर करने लगे. तब बाबुजी ने कहा, "अरी सुन, जरा मुझीह बता कि सुधा नंगी कैसे लगती है?" माम्जी ने पूछा, "क्योंतुम्हे इससे क्या लेना देना?" बाबुजी बोले, "अरी कुछ नही, मुझेसुधा देखने मी अच्छी लगती है इसीलिए पूछा रह हूँ कि सुधानंगी कैसे लगती है?" "क्या तुम सुधा कि लेना चाहते हो?" माजीने बाबुजी से पूछा. "लेना तो चाहता हूँ, लेकिन क्या वो देगी?बाबुजी ने कहा. "तुम बहुत दिलफेंक हो, अच्छा मैं देखती हूँ किक्य कर सकती हूँ. लेकिन तुम अभी मुझे जम कर छोडो, मैं छूट किखुज्ली से मरी जा रही हूँ" माजी ने बाबुजी से कहा. फिर मैनेनुपुर से पूछा कि एह सब देखने के बाद तू ने क्या किया? तो नुपुर नेकहा कि मैं क्या करता, मैं ने अपनी उंगली से अपनी छूट कि गर्मी निकल दे.दो दिन बाद जब मैं और नुपुर अपने बिस्टर एक दुसरे को चूम रहे ठेतो नुपुर ने कहा, "लगता है बाबुजी हमको बहुत पसंद कर्तेहाई." "क्या मतलब?" "नही कुछ नही, बाबुजी हम को आजकल घुरघुर कर देखा करते है और मैं जब नहा कर बाथरूम से निकल्तीहूँ तुब वो हमको ऐसे देखते हैं जिसकी हमको अभी पाकर कर्बिस्टर दल कर मेरी छूट कि धुनाई कर देंगे" निपुर बोली. "तुम क्यबक रही हो. तुम्हारा दीमक तो ठीक है?" मैंने नुपुर से कहा.नुपुर मुझसे बोली, "मैं बिल्कुल सही कहा रही हूँ, तेरा बाप मुझेअपने बिस्टर पर लेटना चाहता है. तीख है मैं भी कल से तेरेबप को पटना चालू कर दूंगी, तुम घबराना मत अगर तेरे बप्तेरी बीवी को चोदेगा तो तुम उसकी बीवी को छोड़ लेना और नही तो मेरिमा तो है उसको छोड़ लेना, बस सब हिसाब किताब बराबर." नुपुर कि एह सब बात सुन कर मैंने कहा, "चिनल तेरी छूट मी बहुत खुजली है,तू अपनी ससुर से छूट मर्वागी? तुझे शरम नही आएगी?और फिर्लोग क्या कहेंगे?" नुपुर बोली, "आरे लोग जब जानेगे तब न कहेंगे?मैं कान्हा सब गाती फिरुंगी कि मैंने अपनी छूट अपनी ससुर सेचुद्वाया? और फिर तुमको भी तो एक दुसरी छूट मिल रही है चोद्नेके लिए. आरे भाई हम सब लोग शादी शुदा तो हैं ही, बस सिर्फ्हुम्लोग अपने अपने छोड़ने के पार्टनर बदलेंगे, हमको एक नया लुन्द्मिलेगा और तुमको एक या हो सकता है दो दो ने छूट मिलेगी और जब्चाहोगे तुम हमे छोड़ लेना, मैं कान्हा मन कर रही हूँ? मैंने कहा, "ठीक है जैसी तेरी मर्जी, लेकिन देख लेना कंही कोइगर्गबर् नो पी". नुपुर बोली, "आरी कोई गर्बर नही होगा, तेरा बप्तो हमे अपने आंख से रोज़ छोड़ रह है अब उसके लौरे से अपनी चूत्चोद्वंगी."अगले दिन से नुपुर खूब सज धज कर रहने लगी और बाबुजी केसामने आते ही अपनी पल्लू गिरा कर उनको अपनी चुन्ची कि दिखानेलगी. बाबुजी भी नुपुर कि चुन्ची कि घुर घुर कर देखा कर्तेठे और हमारी आंख बचा कर अपनी लुंड को मसलते रहते थे. मैभी एह सब देख कर गरम होता था और सोचता रहता था कि कब मैं अपनी या सास कि छूट को अपने लुंड का पानी से नहालौंगा. इसी बिच,मेरे मामा के एन्हा से खबर आया कि मामी बीमार हैं तो माजी उन्हेदेखने के लिए दो दिन के लिए अपने भाई के चले गए.तब अगले दिन नुपुर मुझसे बोली, "आज मैं तेरे बाप का लुंड अपने चूत्मे दल्वंगी, तुम कमरे के बाहर से या खिरकी से देखना, लेकिंचिनता मत करना. माजी के आते ही मैं तुम्हे माजी कि छूट दिल्वादुन्गी और नही तो मेरी मा याने तेरे सास तो है ही. मैं उनको तेरेसे चुदवाने के लिए पता लूँगा और वो अपने दामाद के लुंड से अप्निचूत चुदवाने के लिए टायर हो जाएंगी." मैंने कहा "ठीक है आज्तुम बाबुजी से अपनी छूट कि खुजली मिटा लो मैं दो दिन बाद अपनी माकी छूट कि खुजली मितौंगा." नुपुर एह सुन कर बहुत खुस हो गयी और मुझको अपनी बांहों मी भर कर खूब चुम्मा दिया और फिर झुक कर्मेरे लुंड को अपनी मुँह ले लिया.मैं भी मरे गर्म के खरे खरे हिनुपुर कि मुँह को छोड़ने लगा. थोरी देर के बाद मैं नुपुर कि मुँह कंदर खलास हो गया तो नुपुर मी सारा का सारा पानी पी गयी और्फिर हम से बोली, "है बहुत मज़ा आया, अब तुम जल्दी से मेरी चूत्य गंद अपने लुंड से छोड़ दो, मैं बहुत गरम हो गयी हूँ." मैबोला, "गरम हो गयी हो तो जाकर बाबुजी का लुंड अपनी छूट मेपिलवा ले, बाबुजी तेरी छूट कि साड़ी मस्ती झर देंगे." "आरे क्यों जल रहे हो, दो दिन बाद तुम भी अपनी मा या अपनी सास कि छूट किमास्ती अपने लौरे निकल देना, लेकिन फिलहाल तुम मेरी छूट कि मस्तीझार दो", नुपुर ने मुझसे कहा. नुपुर कि एह सब बातें सुन सुन कर्मेरा लौरा खरा हो गया था इसलिए मैंने नुपुर को (जो कि पहले सही नंगी थी) बिस्टर पर लेटा कर उसके दोनो पैर अपने कन्धों पर्रख लिया और अपना लुंड का सुपर उसके छूट के मुँह पर लगा दिया.नुपुर अपने छूट पर लुंड का एहसास से ही अपनी कमर उचल कर गैप सेमेरा लुंड अपने छूट के अन्दर कर लिया और मुझसे बोलने लगी, "क्योंतार्पा रहे हो, जल्दी से जोर जोर से धक्के मरो और मेरी छूट किमास्ती झर दो." मैं भी नुपुर कि दोनो चुन्ची को पाकर कर नुपुरको जोर जोर से छोड़ने लगा. नुपुर भी अपनी कमर उचल उचल कर हमारे धक्को के जबाब दे रही थे और बर्बर रही थी, "है और्तेज, और तेज तेज छोडो मेरे रजा. आज तुम मेरा छूट अपने लुंड केधाक्के से फार डालो, कल से तुम्हे फर्ने के लिए अपने मा या सास किचूत मिलेगी तब उनको भी छोड़ छोड़ कर फरना. ओह! ओह! बहुत मज़ा रह है, ही! आज जब तुम मेरी छूट छोड़ छोड़ कर फार दल रहेहो कल तेरा बाप कया फरेगा, क्या मैं उनसे अपनी गंद फरुन्गी?"हमलोग ऐसे ही एक दुसरे को गली देते हुए अपनी चुदाई पूरी कि.अगले दिन माजी अपने भाई के घर कोई फुच्शन के होने वाघा सेचाली गयी. नुपुर नहाने के बाद कोई ब्लौसे या ब्रा नही पहनी,सिर्फ पेट्तिकोअत और साड़ी लप्पेट कर खाना बनने लगी. खाना बनाते समय नुपुर कि चूची पर से उसकी पल्लू हटने से उसकी चुन्ची सफ्सफ़ दिख रह था और उन चुन्ची को बाबुजी बारे घुर घुर कर देख्राहे थे. नुपुर ने खाना बना कर हमे और बाबुजी को खाना खाने केलिए बुलाया.
खाना परोसते समय नुपुर कि पल्लू हट जा रही थीऔर उसकी चुन्ची बाहर को अ रह था और उसको देख देख कर मेरमण खराब हो रह था और बाबुजी अपने लौरे को अपने धोती के उपेरसे खाभी कभी सहला रहे थे. मैं एह देख कर नुपुर के तरफ्देखा तो वो हंस परी. खाना खाने के बाद नुपुर ने दूध का गिलास्बबुजी के कमरे ले गयी, उस समय भी नुपुर कि चुंचे बाहर कोदिख रही थी. बाबुजी ने कहा, "नुपुर आज मैं एह दूध नहीपिऊंगा". "क्यों?" नुपुर ने पूछा. "नही मैं आज दुसरी दूध पियोंगा", बाबुजी ने कहा. "दूसरी दूध, मतलब?" तब बाबुजी नेकहा दूसरी दूध मतलब वह दूध जो मैं आज खाना खाते वक़्त देख्रह था और एह कह कर बाबुजी ने नुपुर कि चुन्चेओं को पाकर लिया.नुपुर तो एही चाहती थी मगर नखरा दिखा कर उसने बाबुजी सेकही "एह आप क्या कर रहें है? चोरी आपका लरका आ जाएगा. "अरेअने दो लार्के को, मैं अज उसके सामने ही मैं तुम्हारी चुंची चोसुन्गौर फिर तुझे नंगी करके तेरी छूट मी अपना लुंड दल कर तेरिचूत चोदुन्गा" बाबूजी ने नुपुर से कहा. "नही बाबूजी चोरियेना, एहाप क्या कर रहें है, मैं आप कि बहु हूँ और आप मेरी चुन्चीमसल रहें है और कहा रहें है कि आप मुझको नंगी करके मेरिचूत अपना लुंड दल कर मुझे चोदेंगे" नुपुर ने बाबुजी से कही. तब बाबुजी ने नुपुर कि चुन्ची चोर कर उसको अपनी गूढ़ मी उठालिया और उसको बिस्टर पर दल दिया और एक हाथ से नुपुर कि सरेयूतारने लगेऔर और दुसरे हाथ से उसकी चुन्ची दबाने लगे. बबुजीनुपुर कि चुन्ची मसलते हुए कभी कभी उसकी घुंडी भी मसल्राहे थे और बोल रहे थे कि "है मेरी बहु, मैं कब से तुम्हारी इन्मास्त चुन्ची को मसलने के लिए तरस रह था, आज मेरा सपना पुराहुआ. अब आज मैं तुझे नही चोरुंगा, चाहे आज कुछ भी हो जाये मैआज तुझको जरूर चोदुन्गा". उधर नुपुर अपने ससुर के हाथ अप्नेचुन्ची पर हटाने कि कोशिश कर रही थी और बाबुजी से कह रही थे "है बाबुजी मुझे चोर दीजिए, मैं आप कि बहु हूँ, मुझेनंगी मत करियेहमारे बुजुर्ग है मुझको मत छोडिये".बाबुजी ने तब बोला, "हरामजादी, अभी तो तू खाना खाते वक़्त हुम्कोअप्नी चुन्ची का नज़ारा दिखा रही थी और अब छूट चुदवाने किबरी आई तो नखरा दिखा रही है, अभी मैं तुझको नंगी कर्केतेरे छूट मी अपना ९" का लुम्बा लुंड पेलूँगा और तुझको खूब जीभर कर चोदुन्गा". नुपुर तब बोली, "आरे बाबुजी, मैं आपकी बहु हुनौर आप मेरे ससुर हैं, क्या कोई सौर अपनी बहु को छोड़ता है?" "हाँ ससुर बहु कि छूट मरता है, अगर बहु चुदासी हो तो ससुर बहु किछोत और गंद जरूर मरता है" बाबुजी ने बोला और नुपुर को अप्निगोदी मी उठा कर बिस्टर पर पटक दिया. नुपुर को बिस्टर पर पटककर बाबुजी ने नुपुर कि चुन्ची को अपने हाथ मी ले कर जोर जोर सेदबने लगे और बोल रहे थे, "साली रंडी, आज मैं तेरे छूट किभूख मिटा दूंगा, देखता हूँ कि तेरी छूट कितना चुदाई सह सक्तिहाई." थोरी देर के बाद बाबुजी ने नुपुर कि एक चुन्ची अपने मुँह मेले कर चूसने लगे.अपनी चुन्ची मसलाई और चुसी से नुपुर भी अब गरम हो गयी थी और उसने बाबुजी को अपने सुदोल हाथों से जाकर लिया और उनके चेहेरेको चूमने लगी और बर्बर रही थी, "ओह! बौब्जी, ससुरजी क्यओंमुझे तंग कर रहे हो, जो भी करना है जल्दी करो, मैं मारी जारही हूँ." तब बौजी ने नुपुर कि साड़ी को उसके बदन से कींच करुसको नंगी कर दिया और उसकी छूट मी अपना मुँह लगा कर उसकी चूत्चाटने लगे. तब मैं भी कमरे के अन्दर दाखिल हो गया और बबुजीसे पूछा, "बाबुजी एह आप क्या कर रहें है, नुपुर आपकी बहु है औराप उसको ही छोड़ने कि तयारी कर रहें हैं?" बाबुजी बोले, "आरे तेरा बीबी तो पहले से ही अपनी तंग उठा कर अपनी छूट मी मेरा लुन्द्लेना चाहती है, मैं तो बस उसकी कविश पूरी कर रह हूँ." मैं तब्बोला, "तीख है बाबुजी, आप चाहे तो नुपुर को छोड़ सकते हैन्लेकिन आपको चुदाई कि फ़ीस देनी परेगी." "कैसा फ़ीस, क्या नुपुर एक्रंडी है? तीख है बोल कितनी फ़ीस देनी परिगी? जो भी फीस्चाहिया बोल दे आज मैं नुपुर को बिना छोड नही चोरुंगा" बबुजीबोले. मैंने बाबुजी से बोला, "मुझे कोई पैसा या रूपया नही चाहेया. बस आज अप जिस तरह से मेरी बीवी को छोड़ रहे हैं, वैसेही आप अपनी बीवी को मेरे सामने नंगी करके मुझसे चुद्वाए, बस्यही है नुपुर कि चुदाई कि फ़ीस." बाबुजी बोले, "तीख है, मैजैसे आज तेरी बीवी को छोड़ने जा रह हूँ, मेरी बीवी आते ही मैं उस्कोतेरे सामने नंगी करके पेश करूँगा, फिर तू जैसे चाहे मेरे बिविको छोड़ सकता है."इतना सुनते ही मैं नुपुर जो कि पलंग पर नंगी चित लेटी थी, कपास गया और अपने हाथों से नुपुर कि छूट को खोल कर कर बबुजीसे कहा, "लो बाबुजी मेरी बीवी कि छूट तुम्हारे लुंड खाने के लियेतायर है, आओ और इसकी छूट मी अपना लुंड पेल कर इस रंडी को खूब छोडो. छोड़ छोड़ कर आज इसकी छूट कि खुजली मिटा दो, साली किचूत हमेशा लुंड खाने के लिए टायर रहती है." इतना सुनते हिबबुजी ने अपना तन्तानाया हुआ लुंड नुपुर कि छूट के दरवाजे पे रखकर अपने दोनो तों से उसकी चुन्ची पाकर लिया और एक जोर दर्दाक्खा मर कर अपना ९" का खरा कुंद नुपुर कि छूट मी एक ही बार मेडल दिया.नुपुर इस जोर दर झटके सह न पी और उसकी मुँह से एक्चिख निकल गयी. तब बाबुजी नुपुर से बोले, "चुप हरामजादी,वैसे तो तेरी छूट हमेशा चुदास से भरी रहती है, और आज जब्मैने अपना लौरा तेरे छूट मी दिया तो चिल्लाती है." नुपुर तब मुस्कुरा कर्बोली, "आरे नही मेरे प्यारे चोदु ससुरजी, मैं तो कबसे तुम्हारा गधे जैसा लुंड अपनी छूट से खाने के लिए प्यासी थी,लेकिन आज तुमने जब अपना लौरा मेरी छूट मी एकाएक घुसेर दिया तोमेरी छूट कल्ला उठी. अब ठीक है और अब तुम आराम से मुझे जित्नाचाहे छोडो, मैं मुस्कुरा मुस्कुरा कर अपनी गंद उचल उचल कर्तुम्हारा लुंड अपनी छूट मी पिल्वुन्गी और तुम्हारा लौरे का सारा रुस्पनी छूट से पी जाउंगी.बाबुजी इतना सुनते ही नुपुर पर पिल परे और उसकी चुन्ची कोमसलते हुए उसकी छूट मी कास कास कर धक्का मर कर छोड़ना शुरू करदिया. नुपुर भी अपने वादा के मुताबिक बबुब्जी के हर धक्के का जवाबप्नी चुतर उचल उचल कर दे रही थी. कमरे मी सिर्फ फौच्फूच कि आवाज सुने पर रह था. इस जबर्दत चुदाई से नुपुर किचूत से झाग निकालना शुरू हो गया था, लेकिन बाबुजी और नुपुर इनसब बातों से बेखबर दोनो एक दुसरे कि छूट उर लुंड का पानी निकालने मी तन्मय थे और एक दुसरे को उपर और नीचे से धक् मरकर छोड़ रहे थे. नुपुर अपनी चुदाई से पागल हो कर बर्बर रहीथी, "है! है! मेरे चोदु ससुरजी, क्या जोरदार धक्के मर मर कराज तुम हमे छोड़ रहे हो, क्या तुम ऐसे ही मेरे सासु जी को भिचोदते होगे? तब तो उनकी छूट अब तक फैल कर पुरा का पुरा भोस्राबन गया होगा. क्या तुम्हे अब भी सासूजी कि ढीली चुन्ची मसलने मय उनकी फैली हुए छूट को छोड़ने मी मज़ा अत है? मरो मरो और्जोर से मरो, आज तुम अपना सारा का सारा लुंड मेरी छूट मी पेल दो और्खुब रगर रगर कर छोडो मुझे. हमे बहुत मज़ा आ रह है. बुसैसे ही अपने बेटे के सामने उसकी बीवी कि छूट मी अपना लौरा पेलते रहो. कल तुम्हारे बेटे को अपनी माँ को छोड़ने मी भी बहुत मज़ा आयेगा.हाँ अगर तेरी बीवी अपनी छूट अपनी बेटे से चुदवाने के राजी न हो तोकल मैं मेरी माँ को बुला लूंगी और उसको तेरे बेटे कि लुंड सेचुद्वौंगी. बस अभी तुम अपने बेटे के सामने उसकी बीवी को ऐसे हिचोदते रहो." बुबुजी भी नुपुर को जोर जोर छोड़ रहे थे और बर्बराराहे थे, "है! मेरे चुद्क्कर बहु, तेरी छूट तो पूरी मख्हन जैसहाई, तेरी छूट छोड़ कर मैं आनंद से पागल हुआ जा रह हूँ. क्यातेरी मा कि छूट ऐसे ही चिकना और चुदास से भरी है? उसको बुलालाना, मा और बेटी दोनो को एकसाथ छोड़ने मी बहुत मज़ा आयेगा. वैसेतेरे मा कि गंद बहुत भरी भरी है, उसकी गंद मी लुंड पेलने मेबहुत सुख मिलेगा. कल तेरा पति तो अपनी मा कि छूट मी लुंड घुसेरेगा और मैं तेरी छूट मरूँगा और तेरी मा कि गंद मी अप्निलुन्द पेलूँगा. है! है! तेरी छूट मी क्या जादू भरा है, एह तोमेरे लौरे कि पानी किंच कर निकालना चाहती है. है मैं अब्झारने वाला हूँ. ले ले मेरी चुद्द्कर बहु अपनी छूट से मेरे लुंड किंरित पी जा, कल एह पानी तेरी मा को उसकी गंद से पिल्वाऊंगा. ले मैअब जह्रने वाला हूँ, अपनी तंगो को और फैला, मैं तेरी छूट मी अपनालुन्द का अमृत डालने वाला हूऊऊउन्." इतना कहने के बाद बाबुजी जिका लुंड नुपुर कि छूट के अन्दर उलटी कर दी, और नुपुर आंख बन्द्कर्के अपनी छूट कि झरने आनंद लेटी रही.बाबुजी और नुपुर कि जबदस्त चुदाई देख कर मेरा लौरा भी अब तन्ना गया था और थोरी देर के बाद मैंने बाबुजी को नुपुर के उपेरसे उठाया और अपना लुंड नुपुर कि छूट मी पेल दिया. नुपुर ने हुम्कोअप्नी हाथों और पैर से जाकर कर हमको एक जोरदार चुम्मा दिया और्मुस्कुरा कर बोली, "तेरे बाप से अपनी छूट चुद्वा कर बहुत मज़ा आया,अब कल तेरा बरी है. कल तेरे को अपनी मा और सासूजी को छोड़ना है.क्या तू दोनो कि छूट मी अपना लुंड दल पायेगा?" मैंने बोला,"भोसृकिचुदासी औरत, मैं अपनी मा और सासूजी कि छूट तो क्या तेरे खान्दंमे जितने छूट है उन सुब को छोड़ दूंगा, बस उन सब छूट को मेरेसमने तू पेश करती जा. फिर देख मैं तेरे खंडन कि सुब चूतोंकी क्या हल बनता हूँ." नुपुर एह सुन कर मुस्कुर दी और बोली, "वह्मेरे चोदु रजा, कल जब तू अपने मा कि छूट मी अपना मुसल जैसलुन्द पेलेगा तो तुझको बहुत मज़ा आयेगा. मैं भी तब अपनी छूट मी बाबुजी का लुंड पिल्वौंगी. कल घर कि दोनो चिनल सास और बहुअप्नी अपनी आदमी बदल कर एक ही बिस्तर पर तंग उठा कर खुब्चुद्वौंगी." मैं इन सब बातों को सुन कर और गरमा गया और नुपुर्की छूट मी अपना लुंड जोर जोर से पेलने लगा. थोरी देर के बाद मुझेलगा कि मेरा पानी लिकने वाला है और मैं नुपुर से बोला, "ले ले रंदिले अपने छूट मी तुने अपने ससुर से चुद्वा कर उसका पानी भरा था लीब मेरा पानी अपनी छूट मी भर ले." नुपुर भी अब झरने के करीब्थी और उसने अपनी चुतर उचल कर बोली, "ला ला मेरे रजा मेरिचूत तू अपने लुंड के पानी से भर दे, एह छूट तो अब तुम दोनो बप्बेते के लौरे के लिए है, तुमलोग जब चाहो इसे अपने पानी से भर्सकते हो, मैं हमेशा एह छूट तुम दोनो के लिए खुली रखूंगी".इतना सुन कर मैं नुपुर के छूट अन्दर अपना लुंड और ठेल कर दोमिनुते के लिया रुका और मेरा लुंड उसकी छूट के अन्दर उलटी कर दी.नुपुर कि छूट भी मेरे झरने के साथ साथ अपनी पानी चोर दिया. इसके बाद मैं और बाबुजी उसी बिस्टर पर नुपुर को बित्च मी रख करुसकी एक एक चुन्ची अपने अपने मुँह मी भर कर सो गए. सुबह जबंख खुली तो देखा कि बाबुजी का लुंड नुपुर कि छूट मी फंसा था.इसका मतलब था कि नुपुर ने मेरे सो जाने के बाद बाबुजी से फिर्चुद्वाई थी. मैं गौर से नुपुर कि छूट पर देखा तो पाया कि उस्किचूत से अब तक चुदाई का पानी रिस रिस कर बाहर आ रह है औरुसकी गंद के नीचे बिस्तर को गिला कर रह था. मैं नुपुर और्बबुजी को उठाया और बाथरूम मी जाकर सुबह का सारा काम खाताम्कारने के बाद बाहर आया तो पाया कि बाबुजी भी नहा धो कर चाय पीराहे हैं और अख़बार पढ़ रहे हैं. मैं बाबुजी को उनकी कल का वादयद दिलाया तो बोह बोले, "बेटे चिंता मत कर. मैं आज ही जा कराप्नी बीवी को ले आऊंगा और तेरे सामने उसको नंगी करके तुझसे चुद्वाऊंगा." थोरी देर के बाद बाबुजी गौण मा को लाने और नुपुरापने घर अपनी मा को लाने चली गयी. मैं भी खाना खा कर अप्नेदाफ्तर के लिए रवाना हो गया. मैं दिन भर ऑफिस मी कोई काम नहीक्र सका. हर्बक्त मेरे नको के सामने कल रात का सीन घूम रह ठौर मैं एह सोच सोच कर आज मैं अपनी मा और ससुमा को छोड़ने वालाहूँ मेरे लौरा खरा हो रह था. जैसे तैसे दिन पुरा हुआ और मैघर चला आया.घर आकार मैंने देखा कि नुपुर अपनी मा को ले आई है. मेरी ससुमेक बहुत ही सुन्दर और सुन्दर बदन वाली औरत है. उनकी तिघ्त और्बरी बरी चुन्ची और चल्कता हुआ चूतर देख कर मेरा मन उन्कोअभी छोड़ने को हुआ और मैंने नुपुर से एह कहा. लेकिन नुपुर ने कहे "नही अभी कुछ नही. जो कुछ होगा सुब के सामने होगा औरिस्केलिये तुम बाबुजी और अपनी मा का इन्तिजर करो." मैं चुप चपप्न खरा लुंड लेके अपने कमरे मी चला आया. थोरी देर के बद्बबुजी और मा अ गए. मा को देख कर मैं समझ गया कि आज माने के पहले ब्यूटी पार्लर हो के आई हैं.मा आज बहुत हिसुन्दर लग रही थी. बाबुजी तब नुपुर से बोले, "क्यों बहु सबकुछ टायर हैं न?" "हाँ बाबुजी, जैसा अपने कहा था मैं वैसा हिसाब बंदोबस्त कर राखी हैं" नुपुर बोली. मा ने बाबुजी और नुपुरसे पुन्ची, "कैसा बंदोबस्त और क्या होना है?" बाबुजी बोले, "तुम्चुप चाप देखती चलो, सब कुछ तीख हो रह है, और जो भी हो रह है वो हमारे परिवार के लिए अच्छा होने वाला है." मा तब्जोर दे कर बोली, "आरे क्या होने वाला है, एह तो पता चले." बबुजीना कहा कि आज मैं और पार्थो दोनो एक एक नया शादी करेंगे." "क्यबक रहे हो? तुम को इस समय कौन अपनी लार्की देगा और घर मी जब्नुपुर मौजूद है तो पार्थो फिर से क्यों एक और शादी करेगा? शादिके लिए लार्की कहाँ है, मुझे कुछ समझ मी नही अ रह hai" माबबुजी से बोली. तब बाबुजी मा से बोले, "तो सुनो मैं आज अपने बहुयानी कि नुपुर से शादी करूँगा और पार्थो आज तुमसे शादी करेगा औरिन बातों का गवाह हमारे समधिन जी रहेंगी". "आरे मैं दो दिन्घर पर नही थी और तुम लोग ने क्या क्या खिच्री पका रखा है?एह सब क्या बकवास लगा रखा है?" मा बिगार कर बौजी से बोली. बाबुजी ने तब अपना तेवर बदल कर मा से बोले कि, "आरे क्योंखाम्खा हल्ला मचा रही हो, हम जो भी कर रहे है सुब कि भालैके लिए कर रहे हैं. जरा सोचो, जब हम लोग नयी शादी कर्लेंगे तो हम को और पार्थो को नयी छूट मिलेगी छोड़ने लिए और्तुमको और नुपुर को नयी लौरा मिलेगा चुदवाने के लिए. सुबसे मजेकी बात तो एह है कि बात घर कि घर मी रहेगी." तब नुपुर भी मासे बोली, "सासुजी मन जाईये न, बाबुजी ठीख ही कह रहेन्हें". "चुप हरामजादी, चिनल कुटी मुझे मालूम है कि तेरे चूत्मे हमेशा लुंड के लिए खुजली रहती है, लेकिन इसका मतलब तो एह्नाहे है कि चुदाई के लिए हमलोग आपस मी अपने आदमी बदल ले?" मानुपुर को बिगार कर बोली. तब मेरे ससुमा अपनी समधिन से बोली, "बहनजी अब आप् मन भी जयेये, देखिए न इस बात पर घर केसभी लोग राजी हैं, और फिर आजकल कि दुनिया मी एह सब चल्ताहाई. हर घर मी एह सब हो रह. अब देखिए न हमारे परोस मी एक्बेंगली फमिली है जिसमे मा बाप और उनके तीन बेटे और दो बेतिंहाई. बेटों और बेटियों कि शादी हो चुकी है. अब उस फमिली मी फ्रीसेक्स चालू है. जब जिस का मन होता है, वो किसी के साथ, कहीं भिऔर किसीके भी सामने छोड़ना शुरू कर देता है. छोड़ने वाला एह नहिदेखता कि जिसकी छूट मी अपना लुंड दल रह है वो उसकी मा, याबहन, या भाभी या साली या बहु है. बस लुंड खरा हुआ नही कि जोभी सामने है उसकी साड़ी उठाई और उसकी छूट मी अपना लुंड पेल देताहाई.
चाहे वो उसका माँ, बहन, भाभी, बेटी या बहु क्यों न हो. एह्फ्री सेक्स का सिलसिला उस घर के आदमी ने ही शुरू किया था और अब उन्केबहू के मैके मी और बेटी कि ससुराल मी भी चालू हो गया है.इसीलिए बहनजी मैतो कहती हूँ कि अप जो भी हो रह है होने दे और चुप चाप शामिल हो जाये." इतना सुब सुन कर मा ने नुपुर सेबोली, "बहु मुझे तो कुछ समझ नही अत, पता नहीं तुम लोगो कोक्य हो गया है. अच्छा ले चल, अपनी मन कि मुराद पूरी कर ले. चलाज तू मुझे भी अपनी तरह चिनल बना दे और मेरी छूट मेरे बेतेके लौरे से चुदने दे."इतना सुनते ही बाबुजी हंस दिए और बोले चलो आज से इस घर मी भिफ्री सेक्स चालू होने जा रह है. जय हो छूट महारानी और लुन्द्माहराज कि. फिर वो नुपुर के पास आकार खडे हो गए. मेरे ससुमांदर कमरे मी से माला और सिंदूर दानी उठा लाई. बबुजे ने एक मलानुपुर को पहनाया और नुपुर ने भी एक माला बाबुजी को पहनाया. फिर्बबुजी ने नुपुर कि मांग मी सिन्दूर भरा. मेरे ससुमा ने नुपुर को अशिर्बाद देती हुई बोली, "अब तक तू मेरी बेटी थी मगर आज्से तुमेरी समधिन बन गयी है. मैं चाहता हू कि समधी जी तुझ्कोखुब छोड और साल भरके अन्दर तेरे गोदी मेक नन्हा सा बछाकेले." फिर बाबुजी ने माला मेरे मा को दिया और बोले, "लो एह मलाब अपने बेटे के गले मी दल दो. आज से तेरा बेटा ही तेरा आदमी होगौर तुझको नंगी कर तेरी छूट मी अपना लुंड पेलेगा." मा एह सुनकर बाबुजी से बोली, "अच्छा है, मैं तो तुम्हारे बुधे लुंड तंग आगई थी अब एक जवान लुंड मुझे चोदेगा और मेरी छूट कि मस्तिझारेगा." इसके बाद मा ने नुपुर से माला ले कर मेरे गले पहना दियौर मुस्कुरा कर बोली, "अब तक तू मेरा बेटा था लेकिन आज मैं तुझ्कोमाला पहना कर तेरे को अपनी आदमी मानती हूँ और अब चल आदमी बनानेका फ़र्ज़ पुरा कर." मैंने भी मा कि मांग मी सिन्दूर दल दिया और मा से बोला, "अब आज से तुम मेरी मा नही मेरी पत्नी हो और चलो मेरेबिस्टर पर और हमलोग अपने पतिपतनी का धर्म निभाएँगे." बबुजीताब बोले, "रुको, रुको अभी नए नए शादी हुए है, तुम लोग अप्नेबरों का पैर छुओ." एह सुन कर मा और मैंने बाबुजी और नुपुर केपैर छुए और नुपुर ने मा को अशिर्बाद देते हुए बोली, "बहुस्वोभ्ग्यावती बोनो और जल्दी से पुत्रवती बनो."तब मैंने देखा कि बाबुजी अपने कपरे खोलने लगे और अपने कप्रयूतर कर नुपुर को भी नंगी कर दिया.आज नुपुर अपनी झंते बिल्कुल्सफ़ कर रखी थी, उसकी छूट से हलके हलके रुस निकल रह था औरिस्लिये उसकी छूट बहुत चमक रही थी. मैं भी एह देख कर अप्नेकप्रे उतर दिए और अपनी मा के सामने बिल्कुल नंगा हो गया. मा मेराखारा १०" का लुंड देख कर बोली, "बेटा पार्थो तेरा तो लुंड बहुत्जंदर है. एह तो कोई भी चूड़ी या उन्चिदी छूट कि मस्त चुदाई कर के झर सकता है." मैं तब अपनी मा के कपरे उतरने शुरू किया.सुबसे पहले मैंने उनकी साड़ी उतर दिया, फिर उनकी ब्लौसे के हूक्ख्लो कर ब्लौसे उनके शारीर से अलग किया. अब मेरी मा मेरे सम्नेसिर्फ़ पेट्तिकोअत और ब्रा पहने खरी थीं. मैं ब्रा के उप्पर से उन्किचुन्ची पाकर पहले हलके हलके से दबाया. चुन्ची पर हाथ पर्तेही मा बोली, "बेटा मेरी चुन्ची को जोर जोर से दबा, इसकी साड़ी दुध्तु आज पी ले, मेरी चुन्ची बहुत दिनों से थिक से मसली नही गयिहाई." मैं भी मा कि ब्रा खोल कर उनकी एक चुन्ची को जोर जोर दबनेलगा और दुसरी चुन्ची मी मुह लगा कर उसकी निप्प्ले अपने मुन्ह्मे लेकर चूसने लगा. मा अपने चुन्ची दबी और चुसी से गरमा गयीऔर अपने हाथों मी मेरा लौरा पाकर लिया और उसकी सुपर खोलने और्बंद करने लगी. अब मैंने भी मा कि पेट्तिकोअत का नारा खींच करुसको उनकी तंगो से अलग कर दिया. आज मा पेट्तिकोअत के नीचे पैंटी नही पहने हुए थी और उनकी पेट्तिकोअत खुलते ही वो पूरी तरह सेनंगी हो गयी. उनके नंगे होते ही मैं मा को बिस्टर पर चित लेतादिया और उनके उपर चरने लगा.तबतक बाबुजी बोली, "आरे पर्थोरुको, अभी एक काम बाकी है." "क्या काम", मैंने बाबुजी सेपुचा. "रुको मैं आ रह हूँ" बाबुजी बोले और चित लेटी नंगी माके पास आ गए. उन्होने मा कि छूट को अपने दोनो हाथ से खोल कर्बोले, "ले बेटा मैं आज नुपुर कि चुदाई कि फ़ीस पुरा कर रह हूँ, लीब तू भी मेरी बीवी कि छूट मी अपना लुंड पेल कर इसको जब चाहे,जैसे चाहे छोड़." मैं एह सुन कर अपनी नंगी मा पर पेट के लेट गया और दोनो हाथ सयूनकी चुन्ची मसलने लगा और अपनी होतों से उनकी होतों को चुस्नेलगा. अपनी चुन्ची मसले और होंठ चुसी से मेरी मा बहुत गर्मगाये और अपने पैर मेरे दोनो तरफ फैला दिए जिससे कि मेरा लुंड अबुनकी छूट के मुहाने लग गया. मैं धीर से अपनी मा से पूछा, "माब तुमको छोड़ सकता हूँ?" मा ने मेरे छाती मी अपना मुँह चुप कर्शर्मा के बोली, "जाओ मैं नही जानती.तुझे जो भी करना है कर,लेकिन जल्दी कर." मैं एह सुन कर मा से बोला, "आरे छूट चुद्वानेकी इतनी जल्दी है तो मेरा लुंड को अपनी छूट कि दरवाजे पर रखौर फिर देख अमी कितना जल्दी करता हूँ." मा ने मेरे लुंड अप्नेनाजुक तों से पाकर कर अपनी छूट पर लगा दिया और मुझको अपने हाथ और पैर से बांध लिया. अब मैं अपनी कमर को उठा कर एक जोर द्र्धक्का मर कर अपना १०" का लुंड मा कि छूट के अन्दर दल दिया. मैस जोर धक्के से तिलमिला उठी और जोर से सिसकारी मर कर हमको और्जोर से जाकर लिया. मैंने मा से पूछा, "मा क्या ज्यादा लग गया है,क्या मैं अपना लुंड बाहर निकल लूँ?" "ख़बरदार, लुंड बाहर मत्निकालना, बस अब छूट मी अपना लुंड पेलते रहो और मेरी छूट का पनिनिकल दे." मैं भी अब कमर उठा उठा कर अपनी मा कि छूट मी लुन्दंदर बाहर करता रह.मेरी मा अपनी छूट कि चुदाई इस जोरदार चुदाई से बहुत उत्तेजित होगई और बर्बराने लगी, "है! है! देखो देखो सब लोग देखो, कैसेमेरा बेटा मेरी छूट छोड़ छोड़ कर फार रह है. है! इसका लुन्द्कितना बार और मोटा है और छूट को कैसे सुख दे रह है. है!मैं तो मेरे बेटे के लुंड कि दीवानी हो गयी हूँ. आरे बेटा अब इसके बाद मैं तो घर पर कभी भी कपरे नही पहनुगा. गर पर हुमेशानंगी ही रहूंगी जिससे कि तू जब चाहे जैसे चाहे मेरी छूट मापना लुंड दल सकता है. हाँ हाँ और जोर से धक्के मर. पुरा का पुरालुन्द आने दे मेरी छूट मी, दल दल और तेजी से दल. क्या तुझको मेरिचूत मी अपना लुंड पेलने मी मजा अ रह है?" मैं तब अपनी मा किचूत मी अपना लुंड पेलते हुए बोला, "आरे मेरी चुदक्कर मा, तुम्हाराचूत तो पूरी मक्खन कि तरह चिकना है. इसमे लुंड पेलने मी बहुत्माज़ा आ रह है. कितने दिनों से मैं ऐसे ही सुन्दर चिकने छूट कोचोड़ने के लिए आतुर था. आज मेरी मन कि मुराद पूरी हो रही है.क्यों मा, क्या तुमको मेरे लुंड से अपनी छूट मरवाने मी मज़ा आ रहहाई?"मा भी अपनी चूतर उठा उठा कर मेरे धक्के के जवाब देतिजा रही थी और मुझको चूम रही थी, फिर मा ने मुझ्सेपुचा, "क्यों बेटे मेरी छूट छोड़ने मी तुझको मजा आ रह है न?मेरी चुतर पर लेटने से तुझको मज़ा आ रह है कि नही, तुझ्कोताक्लीफ़ तो नही हो रह है?" "आरे नही मा, तकलीफ कैसा? मुझको तुम्हारी छूट मी लुंड दल कर छोड़ने मी बहुत मज़ा आ रह है. अब्मै रोज़ तुम्हारी छूट छोडा करूँगा, तुम चुद्वओगी नहुमसे?" माबोली, "आरे बेटा मैं तो तेरे लुंड कि देवानी हो गए हूँ, अब जब्चाहे जैसे चाहे तू मुझको छोड़ना रोज़ छोड़ना. अच्छा अब बाते बंदकर और मन लगा कर मेरी छूट मर. बहुत मज़ा आ रह है."उधर बाबुजी ने भी नुपुर को मा के बगल मी लिटा कर उसकी छूट मापना लुंड दल छोड़ रहे थे. नुपुर मेरे और मा कि चुदाई कि बतेंसुं कर मुस्कुरा रहे थी. उसने अपना एक हाथ बारह कर मा कि एक्चुन्ची अपने हथ्ले कर उसकी निप्प्ले को मसल रही थी. नुपुर नेअपनी ससुमा से पूछी, "क्यों ससुमा अपने बेटे लुंड खा कर मस्त होरही हो? इधर मैं भी अपने ससुरजी का लुंड खूब मेज़ से अप्निचूत को खिला रही हूँ. एक साथ एक ही बिस्टर पर बाप बेटे दोनो अपनी बहु और मा कि छूट मी अपनी अपनी लुंड दल कर छोड़ रह है,सही मी बहुत मज़ा अ रह है. ससुमा आप् को मज़ा आ रही न. अबाज से इस घर मी भी फ्री सेक्स चालू हो गया है. एह एक अच्छी बठै. अब हमे इस फ्री सेक्स मी घर के और मेम्बेर्स को शामिल कर लेनाचाहिये. क्यों ससुमा आपका क्या ख्याल है." मा ने तब अपनी हाथ सेनुपुर कि छूट पर एक हलकी सी चपत जमाते हुए बोली, "सही मेबहू, इस फ्री सेक्स मी बहुत मज़ा है. अब आज से सेक्स के बारे तू जो भिकहेगे मैं सब बात मनुगी. अब हम अपनी बेटी और दामादों को भी इस्फ्री सेक्स मी शामिल कर लेंगे. मुझे तो एह सोच सोच कर मस्ती चर्रही है कि मैं अब अपने दामादों कि लुंड अपने बेतिओं के सामने अप्निचूत मी पिल्वौंगी." "हाँ मैं भी अब अपने भाई को इन्ह बुला लौन्गीऔर उसका लुंड भी आपकी छूट को खिल्वौंगी" नुपुर मी मेरे मा सेकही. बबुजे तब मुझसे बोले, "बेटा बात बाद मी करना, अभी जो कर रहे हो वो पुरा करो. जल्दी से अपनी मा कि छूट कि मस्ती झारो.मैं तो अब नुपुर को छोड़ते छोड़ते झरने के करीब अ गया हूँ, तेराक्य हल है." मैं अपनी मा कि बुर मी अपना लुंड धकियाते हेबोला, "बाबुजी मेरा भी मॉल अब गिरने वाला है, क्या मैं मा कि चूटके अन्दर अपना मॉल गिरा सकता हूँ?" "बेटा वो छूट अब तेरे छोड़ने किएलिये है, तेरी मरजी तू कहाँ अपना मॉल गिर्यागा, छूट मी, गंद मी यौसकी मुँह मी. मैं तो अपना मॉल नुपुर कि छूट के नदर ही डालूँगा"बाबुजी अपनी चुदाई रोक कर नुपुर कि चुन्ची को चूसते हुए मुझ्सेबोले. तब मैंने अपनी मा से पूछा, "बोल मेरी चुद्ती मा बोल, कहान्मै अपना मॉल गिरों? क्या तुम्हारी छूट के अन्दर दल दूँ या फिर्बहर निकल कर तेरे पेट के उप्पर चोरून?" मा अपनी कमर उचाल्तेहुए बोली, "आरे बेटा, बीज चाहे जिसका भी हो, जिसका खेत है फसलुसी कि नाम होता है. तू मेरी छूट के अन्दर ही अपना पानी चोर.आरे जब बेटे लुंड अपनी छूट मी पिल्वाया है तो उसका पानी भी छूट कंदर ही लूंगी. मैं तो झरने वाली हूँ अब तू भी अपनी जल्दी जल्दिचोद कर अपना लुंड मेरे छूट के अन्दर झर. मैं अपने बेटे से चूत्चुद्वा कर अपनी पेट मी उसकी बाछा लेना चाहती हूँ." मैं एह सब्सुं कर अपना लुंड मा कि छूट के जर तक घुसेर दिया और मेरा लुन्द्से पानी निकल कर मा कि छूट भरने लगा. मेरे झरने का साथ हिसाथ मा भी अपनी छूट के पानी से मेरा लुंड को नहला दिया.इंडियन फमिली मी चुदाई (कोन्त्द.)अब तक बाबुजी ऎंड नुपुर ने भी अपनी चुदाई पुरा कर चुके थे.जैसे ही मैं अपना लुंड मा कि छूट से बाहर निकला, नुपुर झट मेरेपस अ गयी और मेरा लुंड, जिसमे से अभी मा और मेरे पानी कमिश्रण छु रह था, पाकर कर मा के मुह मी कागा दिया और बोली, "आरे ससुमा जल्दी अपनी मुह खोलिए और एह अमृत को चाट चाटकर साफ कर दीजिए. एह अमृत बहुत ही कीमती है और इससे स्त्री कसुन्दरता और भी बर्हता है." मा भी नुपुर के कहने के अनुसर्मेरा लुंड अपने तों से पाकर कर चाट चाट कर साफ कर दिया. ताभुम लोग नंगे ही खाना खाने कि टेबल पर अ गए और खाना खाया.खाना खाने के बाद, मेरी ससुमा, नुपुर कि मा, बोली "हम अब तक तुम्लोगों कि चिदै देख देख कर गरमा गयी हूँ अब कोई एक मेरी चूत्मे अपना दल कर चुदाई करे." नुपुर अपनी मा से बोली, "अभी नही,तुम्हारी चुदाई तो कल होगी. कल तुम्हारी शादी पार्थो से होगा और तब्तुम अपने आदमी लुंड से अपनी छूट मर्वोगी. अभी तुम हम सब को एक्नंगी डान्स दिखा दो." मेरे ससूमा अपनी बेटी कि बात मन कर हमसब के अपनी नंगी जिस्म को मोर मोर कर, अपनी गंद और चुन्ची हिलाहिला कर एक फिल्मी गाना के साथ डान्स किया. इसके बाद हम लोग फिर सेबेद्रूम मी चले गए और अपनी अपनी चुदाई कि सेकंड राउंड कितायारी करने लगे. बाबुजी कमरे आते ही नुपुर को अपनी गोदी बैथालिया और उसकी चुन्ची को दोनो तों से मसलन शुरू किया. नुपुर भी पीछे नही थी. उसने भी अपनी हाथों बाबुजी का लुंड पाकर कर्मरोरने लगी.मई भी एह देख कर अपनी मा के पास गया उनको अप्नेपस लिटा कर उनकी चुन्ची से खेलने लगा.थोरी देर बाद मा ने मुझसे बोली, "बेटा ला मैं तेरा लुंड चूस देतिन्हून." मैं जल्दी से मा कि पैर कि तरफ मुह कर के लेट गया और माकी छूट पर अपना मुह रख दिया. अब मेरी मा मेरा लुंड अपने मुह मेले कर्चुस आरही थी और मैं उसकी छूट को अपनी जीव से चाट रहता. थोरी देर के बाद बाबुजी भी पलंग के किनारे पर बैठ गयेऔर नुपुर ने भी उनका लुंड अपने मुह मी लेकर चूसने लगी. दोनोऔरत लुंड चूसने मी माहिर लग रही थी क्योंकि थोरी देर मी ही हुम्बप बेटे का लुंड खरा हो गया. बाबुजी ने तब नुपुर को पलंग पृथा कर पेट के बल ऐसे लेटा दिया कि उसकी टंगे पलंग के नीचेझूल रहे थी और कमर से उप्पर का हिस्सा पलंग पर था. बबुजीने तब अपना खरा हुआ लुंड नुपुर कि छूट कि छेद पर रख कर एक्धाक्का दिया और अपनी लुंड नुपुर कि छूट मी उतर दिया. नुपुर अपनी छूट मी लुंड घुसते ही बोली, "है! ससुरजी बार मज़ा अ रह है,इस तरीके से तो आपका पुरा पुरा लुंड मेरी छूट मी घुस गया है. अबाप धक्के मर मर कर हमको छोडिये. जरा मेरी ससुमा भी देख लेंकी उनके पति का लुंड कैसे उनकी घर कि बहु कि छूट मी घुस कर्कस कास कर चोदै कर रह है." एह सुन कर मा बोली, "मुझे तोपहाले से ही मालूम था कि मेरे बेटे कि शादी एक चिनल औरत से होगई है और्चिनल औरत को तो बस लुंड चाहिऐ अपनी छूट कि चुदैके लिए. लुंड कि भूखी चुदासी चिनल औरत एह कभी नही देख्तीकी छोड़ने वाल लुंड किसका है, उसका पति का या अपने ससुर का. चुदा लोबहू अपने ससुर के लुंड से बाद मी न कहना कि ससुमा ने पाने पतिका लुंड नहे दिलवाया." नुपुर एह सुन कर बोली, "आरे वह मेरिचुदाक्कर ससुमा, अपने बेटे का लुंड अपनी छूट से खा रहे हो और्हुमे ज्ञान दे रही हो. सही सही बताना ससुमा, अब तक कितने लुंड अपनी छूट से खा चुकी हो. हमे तो लगता है आप् कि छूट अब तक्कई लुंड के धक्के झेल चुकी है." मा बोली, "हरामजादी चिनाल्ससुर छोडी नुपुर भोसरिकी, तहर जा तेरी जुबान अब बहुत चल रहीहाई, मुझसे पूछती है कि मैंने कितना लुंड से अब तक चुद्वाई है.आरे तू अपनी बोल, अब कितने लुंड का पानी अपने छूट और गंद मी भारिराखी है. आरे मैं तो अब तक करीब एक दर्ज़न लुंड अपनी छूट मेपिलवा चुकी हूँ और इनमे से कई ने तो मेरी गंद का मज़ा भी लियाहाई. आज तेरी गंद भी मेरा, नही अब तेरा, मर्द भी चोदेगा. क्या तुवो हलाब्बी लुंड अपने गंद मी पिलवा पायेगी?" "आरे ससुमा, क्योंपरेशन होते हो, एह क्या इससे मोटा और लुम्बा लुंड भी मैं अपने गंदौर छूट मी पिलवा सकती हूँ" नुपुर बोली.अब तक मैं और बाबुजी मा और नुपुर कि बातें सुन रहे थे.
बबुजीबोला, "आरे चुदाई करते वक़्त क्यों माथा पाछे कर रहो? अभी हम बाप बेटे मिल कर दोनो कि छूट और गंद पच्छी किये देता हूँ." एह्कः कर बाबुजी ने नुपुर कि छूट से अपना लुंड निकला और उसको फिरसे नुपुर कि गंद मी एक झटके से दल दिया. नुपुर अपनी गंद मेबबुजी का लुंड एक झटके से दुल ने से चीख उठी और फिर शांत होगये और कहने लगी, "है ससुरजी, एक ही झटके मी पुरा पुरा कलुन्द मेरी सुखी गंद मी उतर दिया, खैर कोई बात नही. अब आप् मंलगा कर अपनी प्यारी बहु कि गंद और छूट आराम से छोडिये." एह देखकर मेरी मा कुझ्से बोली, "बेटा, तेरा बाप और तेरी औरत तो फिर सेजवानी का खेल खेलना शुरू कर दिया है, क्या तू अभी भी मेरी चूत्मे मुह दल कर पर रहेगा? चल जल्दी मेरी छूट से मुह हटा औरुसमे अपना लुंड दल कर मेरी चुदाई शुरू कर दे." मैं मा सेबोला, "मा अभी तो मैंने तुम्हारी छूट मारी, अब तुम्हारी गंद मर्नेकी इच्छा है. बोलो क्या अपने बेटे का लुंड अपने गंद मी लोगी?" मेरी मा ने मुझसे कही, "बेटा अब तो हमारी और तुम्हारी शादी हो गयीहाई और इसलिए एह शारीर अब तुम्हारा है, तुम चाहे मेरी छूट चोदोया मेरी गंद मरो या अपना लुंड मेरी मुह मी दल उसको चुस्वाओ, मुझेसब मंजूर है. अब हट मुझे पट लेटने दे और फिरतु मेरी गंद अपनालुन्द पेल कर मेरी गंद मरना शुरू कर."इसके बाद मा बिस्तर पर नुपुर के बगल मी पट लेट गयी और अप्निदोनो हाथों से अपनी चुतर को खींच कर अपनी गंद कि छेद को खोला.तब मैंने ढेर सारा कोल्ड करें उनके गंद कि छेद मी अपनी ऊँगली सेंदर और बाहर लगाया. इसके बाद मैं मा के उपर चार गया और अप्निहथों से उनकी चुन्ची को पाकर कर मसलने लगा. थोरी देर्चुन्ची मसलने के बाद मा ने अपनी चूतर नीचे से उपर कि तरफुचालने लगी. मैं समझ गया कि अब मा गंद मरवाने के लिए गरम्हो गयी है. मैंने तब ढेर सारा ठुक लेके अपने लौरे मर माला और अपना लुंड का सुपर मा कि गंद कि छेद पर रख दिया. मा तब धिरेसे बोली, "शुरू मी धीरे धीरे लुंड पलना, नही तो बहुत दर्धोगा." मैंने अपनी मा कि चुन्ची कि घुंडी को मसलते हेबोला, "बिल्कुल मत घरों, मैं बहुत धीरे धीरे तुम्हारी गंद मी अपनालुन्द घुसेरुन्गा, तुमको कोई तकलीफ नही होगी." "ठीक है, चल्लुन्द मेरी गंद मी दल" मा बोली. मैंने अपनी कमर को धीरे धिरेआगे करते हुए अपना सुपर मा कि गंद मी दल दिया. गंद मी मेरालुन्द घुसते ही मा सिस्किया लेनी शुरू कर दी और मुझसे बोली, "बेतातु वाकई ही एक मर्द है. अभी तुने मेरा छूट को छोडा और फिर तुमेरी गंद मर रह है. तेरे लुंड मी बहुत ताकत है. मैं तेरे लुन्द्पर कुर्बान हो गयी हूँ. बोल तू अब मुझ को रोज़ चोदेगा और मेरी गंद्मारेगा?" मैं मा कि गंद मी लुंड अन्दर बाहर करते हुए बोला, "आरेमेरी चुदासी मा, क्यों घबराते हो, अब हम एक फ्री सेक्स फमिली केमेम्बेर हैं. इसलिए मैं नही तो और कोई तुम्हारी छूट और गंद दोनो मरेगा. तुम्हारी छूट और गंद खली नही रहेगा. अब देखो न नुपुर्कल या परसों तक सुंदर और सुधा को भी पता कर हमारे फ्री सेक्स्ग्रौप मी शामिल कर लेगी, फिर तुम्हारी छूट और गंद कि चुदैसुन्दर कि लौरे से होगी और मैं अपना लुंड सुधा कि छूट और गंद मेपेलूँगा और बाबुजी अपना लुंड नुपुर और उसकी मा कि छूट मेदालेंगे." इतना कह कर मैंने मा कि दोनो चुन्ची को दोना हाथों सेक्स कर पाकर लिया और जोर जोर से उनकी गंद मी अपना लुंड डालने लगा.थोरी देर के बाद मैं और मा दोनो एक साथ झर गए. झरने के बद्मा ने मेरा लुंड को अपनी मुह मी भर कर चाट चाट कर चूस चूस कर्सफ़ कर दिया.इधर मैं अपनी मा कि गंद मर रह था और उधर बाबुजी और नुपुर दोनो बहुत जबरदस्त चुदाई मी जुटे हुए थे. इस समय नुपुर बबुजीके ऊपर बैठ कर उनका लुंड अपने छूट से छोड़ रही थी. वो जबुचल उचल कर धक्के मर रही थी तो उसकी चुन्ची हवा मी उचाल्राहे थे और वो जोर जोर सिसकी मर कर बुबुजी के लुंड पर अप्निचुतर उचल कर अपनी छूट चुद्वा रही थी. हमलोग को फारिग होतेदेख कर नुपुर ने मेरे और अपनी मा से बोली, "देखो, देखो बेटा और्दमद चूड़ी रंदिओं देखो, कैसे मेरे ससुर का लुंड मेरी छूट कंदर बाहर हो रह है. इस समय मैं तो सत्येन असमान उर रही हूँ.तुमलोग कि छूट का क्या हल है." मेरी ससुमा ने तब बोली, "सबश्बेती सबश, तू मेरे नाम रोशन करेगी. अपनी जवानी मी मैं भी खूब लुंड अपने छूट और गंद मी पिल्वाया है. आज तुझको अपने ससुर कयूप्पेर चार कर उनकी लुंड को अपने छूट से छोड़ते हुए देख कर बहुताच्छा लगा. तुझको देख कर मुझे अपनी जवानी कि यद् आ गयी. मैबोला, "क्या सासु मा क्या यद् अ गया?" तब मेरी सासु मा बोली, "आरेयद क्या आया, मेरी तो छूट पूरी तरह से गीली ho gayee. मैं भी इसितारह से अपनी शादी के बाद अपनी ससुर और जेठ को छोडती थी, और्वो लोग नीचे से अपनी कमर उचल उचल कर मेरी छूट मी अपना अपनालुन्द पेल्लेट थे और दोनो हाथों से मेरी चुन्ची को मसला कर्तेठे." "आरे वह, मा तुम तो मुझसे भी जयादा चुद्दक्र थी," नुपुर्बबुजी को छोड़ते हुए बोली.तब मेरी मा बोली, "आरे बेटी एह तो कुछ भी नही. मैं जब शादी केबाद अपनी ससुराल मी गयी तो सुहाग रात के बाद से घर के सरे मर्द्बरी बरी से हमे छोड़ते थे. एक मेरे उपर से उतरा नही कि दुस्रापना लुंड खरा किये मेरे उपर अ जाता था और मैं पैर फैलाये सुब के लुंड अपने छूट मी पिल्वाती थी. और तो और, कभी कभी तो घरके दो दो मर्द एक साथ मेरी चुदाई करता था, एक खरे खरे मेरिचूतर पाकर कर मेरी छूट मी अपना लुंड डालता था और दूसरा मेरेपीचे आ कर मेरी चुन्ची पाकर कर मेरी गंद मी अपना लुंड पेल्ताथा. शादी के बाद करीब ५६ साल तक मुझको ठीक से कपरे पहन्नेका मौका नही मिल क्यों कि हर वक़्त कोई न कोई मुझको नंगी कर केकिसी न किसी असं से छोड़ता था. मैं करीब करीब उन्दिनो घर कंदर नंगी ही बिस्टर पर परी रहती थी और घर का कोई न कोइमार्ड आकर हमारे उपर, नीचे और पीछे कि मुह से हमे अपना लुन्द्खिला जाता था. मेज़ कि बात तो एह था कि घर के सभी औरतों कोमेरी लगातार चुदाई कि बात मालूम थी क्योंकि कभी कभी जब कोई घर का आदमी हमे छोड़ता था तो उनकी बीवी भी हमरा पलंग के पस्खारी रहती थी और वो अपने आदमी को जोश दिला दिला कर मेरिचूत और गंद कि चूड़ी करवाती और फिर हंस कर अपने कमरे मेचाली जाती थी.एक बार कि बात है जब कि घर के सरे लोग दुस्रेगओं मी गए हुए थे और घर पर सिर्फ मैं और मेरी सास थी. ताभिघर का दो नौकर आकार मेरी सास और मेरी साड़ी उठा कर हमे चोद्दिया. मेरे आँखों के सामने मेरी सास ने उस दिन दिल खोल अपनी चूत्घर के नौकर से मर्वई, फिर हमे बाद मी मालूम चला कि मेरी सासुस नौकर से पहले से ही चुद्वाती थी और अपनी बात छिपाने केलिए उन्होने मेरी छूट भी दुसरे नौकर से चुद्वा दिया. एह सिल्सिलाकफी दिनों तक चला और बाद मी मुझको मालूम हुआ कि घर कि सरिलार्केँ और औरतों कि छूट और गंद से इन नौकरों की लुंड खातीथी. फिर तो एक दिन जब घर पर कोई नही था, हम सब औरतों नेमिल कर एक ही कमरे मी अपनी छूट उन नौकरों से चुद्वाया और अपने सामने लटकों कि गंद मर्वई.मैं अपनी सास और मा कि बातें सुन कर बहुत गर्नमा गया और मेरालौरा तन्ना गया. एह देख कर मेरी सास झट मेरे सामने बैठ गयीऔर मेरे लुंड अपनी मुह मी घुसा कर जोर जोर से चूसने लगी. तब माभी मेरे सास के पीछे बैठ कर उनकी छूट से अपनी मुह मिल दियौर उनकी छूट को अपनी जीव से चाटने लगी. जब मेरा लौरा तन्तानागाया तो मेरी सास बैठे बैठे ही पलता गयी और मेरी तरफ अप्निगंद कर दिया और्मै भी अपना खरा लुंड उनके गंद मी दल दिया.बाबुजी तब नुपुर से बोले, "जा चिनार, जाकर सुन्दर और्सुधा को भिबुला ला. आज हमलोग उनलोगों को भी अपनी फ्री सेक्स फमिली मी शमिलकर लेटा हूँ." एह सुन कर नुपुर ने अपने बदन पर एक साड़ी लप्पेट ली और मुस्कुराती हुई चल दी. थोरी देर के बाद नुपुर अपने साथ्सुन्दर और सुधा को साथ लेकर कमरे आई. जब सुन्दर और सुधाकमारे मी आई तब मैं मा को गोदी पर बैतः कर उनकी छूट मी डालकर उनकी चुन्ही मसल रह था और बौजी मेरे सास को घोडी बनाकर पीछे उनकी छूट मी लुंड दल कर उनको छोड़ रहे थी. एह सब्देख कर सुन्दर अनर सुधा कि आंखे पहिली कि पहली रह गयी. तब्मा मेरे गोदी से उठ कर सुन्दर के पास गयी और उसके कपरों कयूप्पेर से उसका लुंड पाकर कर मसलने लगी. सुंदर का लुंड पर अप्नेमाल्किन हाथ परते ही खरा होने लगा था. सुधा भी हमारी समुहिक्चुदै देख कर गरमा गयी थी और वो आगे बढ़ कर मेरे लुंड अप्नेहाथ माँ पाकर लिया और थोरी देर उसको मसलने बाद झिक कर मेरा लुन्द्का सुपर निकल कर चूसने लगी और मैं भी ब्लौसे के उप्पर से सुधा कि चुन्ची पाकर कर दबाने लगा.एह सब देख कर बबुजीहुमारे पास ई और सुधा के पीछे खरे हो गए और उसकी साड़ी और्पेत्तिकोअत् उठा लार अपना लुंड सुधा कि छूट मी एक ही झटके से उतर्दिया.सुधा वैसे ही एक बहुत ही कामुक औरत थी. अपने छूट मी बबुजीका लुंड घुसते ही सुधा अपना सर घुमा कर बाबुजी को देखा और्मुस्कुरा कर बोली, "बाबुजी मैं जानती हूँ कि आप् बहुत अच्छे तरिकेसे छोड़ते है और आपका लुंड बहुत मोट और लुम्बा है. छोडिये बबुजीमेरी छूट खूब जोर जोर से धक्के मर कर छोडी. मैं इस समय बहुत्गार्मा गयी हूँ, क्योंकि जब बीबीजी (नुपुर) हमारे कमरे मी गयीथी उस समय हम चुदाई कि तयारी कर रहे थे. इसलिए मैं कफिगार्मा गयी थी और इन्ह आ कर आप् लोगो कि चुदाई देख कर मैं तो आपे से बाहर हो गयी हूँ. इस समय आप् कुछ मत कही बस मेरिचूत मी अपना लुंड पेलते रहिये. जितना बात हो वो सब बाद मी कर्लेंगे." बबुज्जे भी सुधा के कहने अनुसार सुधा कि चुतर को अप्नेहथों से पाकर कर उसको छोड़ते रहे. उधर मा अबतक सुन्दर का लुन्द्चुस चूस कर चुदाई के टायर कर लिया था और सिंदर मा को घोरिबना कर पीछे से उनकी छूट छोड़ रह था. इन लोगो कि चुदाई देखकर मेरी सास गरमा गयी और चुदास से भर उठीं. वो मेरे को चित्लेता कर मेरे उप्पर चार कर मेरा लुंड अपनी छूट मी ले लिया और्नुपुर भी मेरे उपर चार कर मेरे मुह से अपनी छूट भीरा दिया और्बोली, "चाटो मेरे रजा, मेरी छूट चाटो. इस समय तो तुम्हारी मापने नौकर का लुंड अन्दर ले रही है और तुम्हारा लुंड मेरी मा नेअपनी छूट मी घुसेर लिया है. अब तुम अपने बाप कि चूड़ी मेरी छूट को चाटो और अपनी जीव से छोडो." मैं भी नुपुर कि छूट मी अपनाजीव घुसेर दिया और अपना कमर उठा उठा कर सास कि छूट को अप्नेलुन्द छोड़ना शुरू कर दिया. पूरे कमरे मी चुदाई कि फच फच्पकत पकट कि आवाज गूंज रही थी और पुरा कमरा चुदाई कि महोलसे भरा हुआ था. जमीन पर मा को सुंदर और सुधा को बबुजीघोरी बना कर ढाका धक् छोड़ रहे थी और मा और सुधा कि मुह सेसिस्कारी निकल रही थी. सुधा कभी कभी अपनी हाथ बारह कर माकी चुन्ची मसल रही थी.थोरी देर के बाद बाबुजी और सुंदर दोनो झर गए और उन्होने अपनापन लुंड छूट के अन्दर से निकल लिया. लुंड निकलते ही मा और्सुधा कि छूट से सफ़ेद सफ़ेद घर पानी निकलने लगा. एह देख कर मा और सुधा ने एक दुसरे कि छूट मी अपना मुह लगा चाटना शुरू करदिया और दोनो ने एक दुसरे कि छूट चाट चाट कर साफ कर दिया. फिर्दोनो ने सुंदर और बाबुजी का लुंड को चूस कर साफ कर दिया. इधाराब्तक मेरी सास और नुपुर भी अपनी अपनी छूट का पानी निकल चुकिथी. अब सुधा और नुपुर बिना कोई कपर पहने नंगे ही कित्चें मजा कर चाय और नाश्ता बना कर कमरे मी आईं और हम पंचो नेमिल कर नंगे ही चाय पिया और नाश्ता किया. नाश्ता करते वक़्त चरोनौरतें एक लीन से नंगी हो कर पैर फैलाये हमारे सामने बैठेथी. उनकी इस तरह से बैठने से उनकी छूट कि पत्तियन काफी खुलिहुई थी और हमलोगों को उनकी गुलाबी छूट अन्दर तक साफ साफ दिख्रह था. वो जब आपस मी या हमसे बात कर रही थी तो उन्किचुन्ची हिल रही थी. एह सब एख कर हम लोगो कि खरा होना शुरुहो गया और हमने अपनी लुंड को सहलाने लगे. एह सब देख कर औरतों का मन अब खराब होने लगा और वो उठ कर हम लोगों के पास आ गयी.सुधा और मेरी मा मेरे पास, नुपुर बाबुजी के पास और मेरी सस्सुंदर के पास आ कर खरी हो गयी. हमने सुधा कि नंगी चुन्चीपर अपना हाथ रख कर उसकी चुन्ची को अपने हाथों से धीरे धिरेदाबने लगा.सुधा हमसे बोली, "क्या भैयाजी औरतों कि चुन्ची धीरे धिरेनाही दबाया जाता. उनको तो जोर जोर से मसलन चैहिये. मैंने सुधासे पूछा, "औरतों के साथ और क्या क्या करना चैहिये?" तब सुधाबोली, "आरे मेरे भोले रजा, तुम्हे मैं क्या क्या बातों कि औरतों केसाथ क्या क्या करना कहिये. आरे औरतों का शारीर से खूब जम खेल्नाचैहिये. उनकी चुन्ची और चुतर को दम लगा कर मसलन चाहिऐ, उनकी चुन्ची को मुह मी ले कर चूसना चाहिऐ, उनकी बुर को को हथोंसे दबाना, मसलन और जीव से चाटना चाहिऐ, फिर उनके बुर मी अपनागाधे जैस लुंड दल जम कर छोड़ना चाहिऐ. अब समझे कि औरतों सेक्य क्या करना चाहिऐ." मैं तब सुधा कि एक चुन्ची अपने हाथ सेक्स कास कर मसलने लगा और दुसरी चुन्ची को अपने मुह मी भर कर्चुसने लगा. सुधा अपनी चुन्ची मसलने और चूसने से बहुत गर्मगाई और मेरा लुंड पाकर उसकी सुपर को खोलने और बंद करने लगी.मैं जब अपना कमर उपर को उठाया तो सुधा झुक कर मेरे सुपर कोअपने मुह मी भर कर चूसने लगी. सुधा को झुकते देख कर मैं नापना हाथ उसकी पीठ पर से ले जा कर उसकी चुतर को सहलाने लगौर फिर अपनी एक उंगली उसकी गंद कि छेद पर रख दिया और दुस्राहाथ उसके चुन्ची पर से हाथ कर उसकी छूट पर रख दिया. अप्निगंद और छूट पर मेरा हाथ परते ही सुधा मेरी तरफ देखी और्मुस्कुरा दिया और अपनी कमर हिला हिला कर मुझको इशारा करे लगीकी मैं उसकी छूट और गंद को अपनी उंगली से खोडून. मैं भी सुधा कि इशारे के मुताबिक उसकी छूट और गंद मी अपना उंगली पेल करंदर बाहर करने लगा. सुधा अपनी छूट और गंद मी मेरा उन्ग्लीपिलवा कर बहुत गर्म हो गयी और मुझसे बोली, "भैयाजी अप्किउन्गली काफी मोती और लुम्बी है, मेरी छूट और गंद दोनो अप्किउन्गली से फैल गयी है. जब अक लुंड इनमे घुसेगा तो न जाने क्याहोगा.मुझे तो आप् अपनी उंगली से ही छोड़ कर खलास कर दोगे।" मैताब बोला, "साली रंडी कुटिया चिनल सुधा अभी तो मैं तेरी गंद और्चूत मी सिर्फ अपनी उंगली ही डाला है तो अपनी कमर चलाना शुरुकर दिया. जब मैं अपना लुंड तेरी आगे और पीछे के छेद मी दलुन्गातो तेरी छूट ऎंड गंद दोनो फट जायेगी."इतना कह कर मैंने पाना लुंड उसकी मुह से कींच कर निकला और उस्केप्पीचे आ गया. मेरा लुंड सुधा कि ठुक से काफी गिला हा गया था और मैं अपना लुंड उसकी छूट के दरवाजे पर रह कर एक हल्का धक्कामारा तो मेरा सुपर उसकी छूट मी धंस गया. मेरा लुंड काफी मोताहोने के कारन सुधा को तकलीफ हो रही थी और वो मुझ्सेबोली, "प्लेस इस को बाहेर निकालो मुझे दर्द हो रह." मैंने उसकी बातको न सुनते हुए उसकी छूट मी पाना लुंड धीरे धीरे अन्दर दल्नेचालू किया. सुधा जोर जोर से चीकें मर्नाय्लागी, "आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआआआ, प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज़, बहर्निकलूऊऊऊऊऊऊऊऊओ, प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज़ बोहत दर्द होता हैईईईईईईप्ल्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्" लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और जोर जोर से उस्किचूत मी लुंड पेल कर उसकी छूट मरने लगा." थोरी देर बाद सुधाको भी मज़ा आने लगा और उसकी मुह से मजेदार आवाजें निकालना शुरू हो गयी, "ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ, और जोर से, अंदर करो, प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज़ और्जोरे से, और आगय्य्य्य्य, प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज़ और जोर से मरो, अआज पहाड़ केरख दो मेरी चूऊऊओत्त्त्त्त्, आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्, प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज़ और जोर से,"इन आवाजों से मैं और गरम हो गया और मैं जोर जोर से धक्का मर्नेलगा फिर करीब १० मिनुतेस के बाद सुधा झरने को हुई और वो अप्निचूत चुद्वाते हुए बोली, "जल्दी कर गंडू, तेज़ी से मार, मेंचूत्ने वाली हू, जल्दी कर, और जोर से कर," और करीब दोमिनुतेस के बाद हम दोनो एक साथ खलास हो गयी. मैंने अपना मॉल सेसुधा कि छूट छूट पूरी तरह से भर दिया और उसके उप्पर लेट कर्हफ्ने लगा. करीब २० मिनुतेस के बाद हमलोग शांत हुए और मेरा लुन्द्सुधा कि छूट के अन्दर फिर से खरा होने लगा.तब मैंने सुधा से बोला, "एक बार फिर." सुधा बोली, "ठीक है" तब हमने सुधा से बोला, "इस दफा तुम्हारी गंद मरू गा". सुधाबोली, "नही प्लेस, छूट मार लो लेकिन गंद मत मरो, तुम्हारा लुन्द्बहुत लुम्बा और मोटा है बोहुत दर्द हो गा, मेरी गंद फट जायेगी".मैंने सुधा से मिन्नत करने लगा तो सुधा मन गयी और मैं उस्कोघोरी बना कर पलंग के किनारे लेटा दिया और बाथरूम से तेल किशिशी लेकर उसकी गंद और मेरे लुंड खूब तेल लगाया.उसके बाद मैनेअपने लुंड पर थोरा सा ठुक लगाया और सुपर को उसकी गंद कि चेद्मे रख कर हल्का सा धक्का दे कर सुपर को सुधा कि गंद के चेद्के अन्दर कर दिया. सुधा चिल्लाने लगी लेकिन मैं उसकी एक न सुन्तेहुए अपना पुरा पुरा का लुंड उन्सी गंद मी दल दिया. फिर हम सुधाकिचूतर को पाकर कर उसकी गंद छोड़ने लगा. मुझको सुधा कि गंद्चोड़ने मी बहुत अच्छा लग रह ठौर मैंने सुधा से बोला, "तुम्हारिगंद तो तुम्हारी छूट से बोहत जिअदा मज़ा दे रही है, दिल केर्ताहाई कई तुम्हारी गंद ही मरता राहू". फिर मैंने अपनी स्पीड बर्हाकर उसकी गंद को जोर जोर से छोड़ता रह और थोरी देर के बाद मेरेलुन्द ने उसकी गंद के अन्दर अपना पानी चोर दिया.