Saturday, 13 June 2015

फूफा जी ने मेरी माँ चोद दी

मेरा नाम मोनू है। मैं 26 साल का लड़का हूँ। मैं सीकर का रहने वाला हूँ। मैं आज आपको मेरी मम्मी और मेरे फूफा जी के बारे में बताता हूँ। बात शायद 15-16 साल पुरानी है, मेरी मम्मी बड़ी ही सुंदर और गोरी हैं, देखने में बहुत ही मस्त लगती हैं। मुझे यह कहने में ही शर्म आ रही है, मगर क्या करूँ, मेरी मम्मी ने काम ही कुछ ऐसा किया था।
मेरी मम्मी बहुत ही लड़ाकू किस्म की महिला हैं। वो मेरे पापा और दादा-दादी से लड़ती रहती थीं। ऐसे ही एक बार मेरी मम्मी सब से लड़ कर मेरे नाना-नानी के घर पर आ गई थीं। हम लोग नाना-नानी के घर पर एक महीने से ज़्यादा समय से रह रहे थे।
एक दिन मेरे फूफा जी जो कि जयपुर में रहते हैं, हमारे घर आए। वो वहाँ पर किसी काम से आए थे और उन्हें 3-4 दिन वहीं पर ही रुकना था। उन्होंने खुद के लिए एक होटल में कमरा किराए पर ले रखा था। एक दिन वो हमारे घर आए। मेरे फूफा जी हमें बहुत अच्छे लगते हैं क्योंकि वो हमेशा हमारे लिए बहुत सा सामान लाते थे। मेरे फूफा जी 6 फुट लंबे गोरे और स्मार्ट हैं। उस समय उनकी उम्र 28 साल के लगभग रही होगी।
किस्मत से जिस दिन वो आए थे, उसी दिन मेरे नाना-नानी को बाहर काम से जाना था। जब फूफा जी हमारे घर आए तो वो हमारे लिए काफ़ी सामान लाए थे। आने के बाद वो नाना-नानी के साथ हॉल में बैठ कर बातें कर रहे थे। सारी बातों का केंद्र मेरे पापा और दादा-दादी थे। फूफा जी मेरे मम्मी को वापस चलने के लिए मना रहे थे।।
शाम को नाना-नानी फूफा जी को घर पर तीन दिन रुकने के लिए कह कर काम से चले गए थे। मैं, मेरी बहन और मेरी मम्मी फूफा जी के साथ हॉल में बैठे थे और बातें कर रहे थे। किसी बात पर मम्मी रोने जैसी हो गई थी और फूफा जी उन्हें समझा रहे थे।
तभी फूफा जी ने हमें यह कह कर बाहर खेलने भेज दिया कि बच्चों को ऐसी बातें नहीं बतानी चाहिए, इससे उनके मन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, पर मेरा मन तो मम्मी पर ही था। मैं वहाँ पर रुकना चाहता था और उनकी बातें सुनना चाहता था, पर मम्मी ने मुझे बाहर भेज दिया।
मैं और मेरी बहन घर के सामने पार्क में खेलने चले आए। पर मुझे उनकी बातें सुननी थीं तो मैं वापस घर आ गया और अंदर ना जाकर बाहर गेट के पास खड़ा हो कर उनकी बातें सुनने लगा।
मेरे फूफा जी कह रहे थे कि यह सब तो घर में चलता रहता है। इस पर घर छोड़ कर नहीं आते।
मम्मी- पर वो लोग मुझे पसंद नहीं करते हैं, मुझे परेशान करते हैं।
फूफा जी- भैया तो पसंद करते हैं ना ! आपको तो उनके साथ रहना है।
मम्मी- उनको मेरे साथ रहना होता तो मुझे लेने नहीं आते क्या?
फूफा जी- उन्होंने ही मुझे भेजा है।
मम्मी- नहीं, मुझे वहाँ नहीं जाना है। मैं वहाँ नहीं रह सकती !
और यह कह कर मम्मी रोने लगीं, फूफा जी उनको चुप कराने लगे, कभी उनके आँसू पोंछते कभी कुछ।
तभी मम्मी उनके गले से लग कर रोने लगीं। फूफा जी उनके सर पर हाथ फेर रहे थे। थोड़ी देर बाद मम्मी का रोना बंद हो गया पर मम्मी फूफा जी से चिपक कर ही खड़ी रहीं।
मम्मी और फूफा जी के हाथ दोनों की कमर पर फिर रहे थे। थोड़ी देर बाद फूफा जी मम्मी के होंठों को चूमने लगे। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है। उस उम्र में मुझे सेक्स के बारे मे कुछ भी पता नहीं था।
फूफा जी ने मम्मी को सोफे पर पटक दिया और उनका ब्लाउज खोल कर उनके स्तनों को चूसने लगे। उसके बाद उन्होंने अपने पैंट और अंडरवियर भी नीचे सरका दी। मम्मी का घाघरा ऊपर करके उनकी पैंटी उतार दी। उन्होंने मम्मी को ऊपर-नीचे किया और अपना लंड मम्मी की चूत में डाल दिया।
मम्मी तो सोफे पर बस अपनी आँखे बंद कर के लेटी हुई थीं। मम्मी के हाथ फूफा जी की कमर पर थे। थोड़ी देर बाद ही मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें फूफा जी की कमर से जकड़ दीं। अब फूफा जी मम्मी को हचक कर चोद रहे थे। मम्मी भी पूरी तरह से उनका साथ दे रही थीं।
करीब 10 मिनट के बाद फूफा जी ने मम्मी को औंधा करके कुतिया जैसा बना दिया और अब मम्मी के स्तन सोफे की तरफ झूल रहे थे और मम्मी की चूत फूफा जी की तरफ थी। फूफा जी ने मम्मी की चूत में लौड़ा डाल दिया। अब मम्मी घोड़ी बन कर चुदा रही थीं।
कुछ देर बाद फूफा जी ने मम्मी को फिर सीधा किया और उन पर चढ़ गए और तेज धक्के मारने चालू कर दिए।
मम्मी की मुँह से लगातार चीखें निकल रही थीं। थोड़ी देर बाद फूफा जी मम्मी की चूत में अपना लौड़ा घुसेड़ कर एकदम से अकड़ गए और फिर निढाल हो कर लेट गए।
मम्मी उठीं और अपनी पैंटी पहन कर कपड़े ठीक करके बोलीं- आज जाने कितने दिनों बाद चुदाई की है। मैं तो लाख कोशिश करने के बाद भी रुक नहीं पाई।
फूफा जी- मैं तो कबसे तुम्हें चोदने की सोच रहा था, पर आज मौका मिला है। रात को और मज़े से करेंगे। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
रात को खाना खाने के बाद हम लोग टीवी देख रहे थे। मम्मी और फूफा जी पास-पास ही बैठे थे। फूफा जी के हाथ मम्मी की कमर पर थे और मम्मी बार बार हटा रही थीं और धीरे से कह रही थीं- बच्चे देख लेंगे।
मम्मी ने हमे सोने के लिए कहा, पर हम लोग टीवी देखने के लिए कह रहे थे। शायद दोनों से इंतजार नहीं हो पा रहा था।
तो मम्मी ने फूफा जी की तरफ देखते हुए हंस कर कहा- मैं रसोई में जाकर बर्तन साफ कर लेती हूँ। तुम टीवी देख कर सोने चले जाना।
और मम्मी रसोई मे चली गई। थोड़ी देर बाद फूफा जी भी उठे और कहा- मोनू, मैं तो सोने जा रहा हूँ।
फूफा जी को कमरा रसोई के पास वाला ही मिला था। थोड़ी देर बाद जब मैं चुपचाप रसोई की तरफ गया तो कुछ आवाजें आ रही थीं। मैंने देखने की सोची और मैं रसोई की खिड़की में से देखने लगा। मैंने देखा कि मम्मी किचन की स्लैब पर हाथ टिका कर खड़ी हैं और पीछे से फूफा जी उनका गाउन ऊपर कर के उनकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहे थे।
कुछ देर बाद मम्मी ने कहा- हम लोग कमरे में चलते हैं।
फूफा जी ने कहा- अगर वो दोनों आ गए तो !
मम्मी- वो दोनों तो टीवी में बिज़ी हैं, नहीं आयेंगे, अब छोड़ो यार, एक राउंड तो कर लेते हैं, ऐसे छुप-छुप कर ही तो मज़ा आता है।
फूफा जी ने कहा- चलो !
और दोनों कमरे में चले गए। अंदर जाते ही दोनों ने दरवाजे की कुण्डी लगा दी कि कहीं हम ना आ जाएँ।
मैंने की-होल के छेद में से देखा तो फूफा जी मम्मी को अपना लंड चुसवा रहे थे और मम्मी चूस रही थीं। यह देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर बाद मम्मी पलंग पर अपनी टाँगें फैला कर लेट गईं और बोलीं- जल्दी से चोद लो मेरे राजा।
फिर फूफा जी ने लंड तुरंत मम्मी की चूत में डाल कर चुदाई चालू कर दी। फूफा जी जबरदस्त झटके मार रहे थे। मम्मी के मुँह से सीत्कारें निकल रही थीं। कमरे में से उन दोनों की धकापेल चुदाई की मादक ‘आहें’ और ‘फूउक्छ फॅक’ की आवाजें भी आ रही थीं।
मम्मी फूफा जी को धीरे करने के लिए कह रही थी कि कहीं हम ना सुन लें। मगर फूफा जी पर इसका कोई असर नहीं हो रहा था। वो तो बस अपनी छिनाल सलहज को चोदने में लगे रहे और बाद में मम्मी भी उनका साथ देने लगीं।
करीब आधे घंटे के बाद फूफा जी मम्मी के ऊपर ढेर हो गए और ज़ोर से झटके मार कर झड़ने लगे। उसके बाद मम्मी उठी और गाउन ठीक करती हुई बोलीं- उन दोनों को सुला कर रात को आऊँगी।
मम्मी को बाहर आता देख मैं भी जल्दी से टीवी के पास जाकर बैठ गया। किस्मत से मेरी बहन टीवी देखते-देखते ही सो गई थी।
बाद में मम्मी ने मुझे और मेरी बहन को कमरे में ले जाकर सुला दिया और खुद फूफा जी के कमरे में चुदवाने चली गईं।
उसके बाद तो फूफा जी और मम्मी को जब भी मौका मिला उनने खूब चुदाई की। उन्होंने तो बाथरूम, किचन, हॉल, स्टोर, छत, हर जगह धकापेल चुदन-चुदाई की और हमारे घर पर लाते समय कार में भी मम्मी को लंड चुसवाते और चोदते हुए लाए।
जयपुर आने के कई दिनों बाद तक फूफा जी हमारे घर नहीं आए थे।
मुझे नहीं पता कि किस कारण से नहीं आए थे, पर एक बार जब मेरे पापा, दादा, दादी को गाँव जाना था, वहाँ मेरे दादा जी की बहन बीमार थी और उनसे मिलने जाना था।
मैंने मम्मी को फ़ोन पर किसी से बात करते सुना कि वो सब तो गाँव चले जायेंगे, तुम आ जाना.. फिर हम अपना काम करेंगे… काफी दिन हो गए हैं।
मैं सोच में पड़ गया कि मम्मी किस से बात कर रही हैं, पर दोपहर को मेरा ये शक भी दूर हो गया।
पापा और दादा, दादी के जाने से कुछ वक्त पहले ही फूफा जी और बुआ अपने बेटे के साथ हमारे घर मिलने आ गए।
बुआ कह रही थीं- आप लोगों से मिले हुए काफी वक्त हो गया था, सो मिलने चली आई हूँ और इनको भी ले आई हूँ।
बुआ को देख कर हम सब लोग खुश हुए और उन्हें बताया कि हम सब बुआ जी से मिलने गाँव जा रहे हैं।
बुआ- पापा फिर तो आपके साथ हम लोग भी चलेंगे।
दादा- हाँ क्यों नहीं.. मैं भी सोच रहा था पर लगा कि तुम लोग व्यस्त होगे.. इस लिए नहीं कहा।
बुआ- कार में तो जगह है या हम हमारी कर ले कर चलें?
पापा- अरे नहीं हम तो तीन लोग ही जा रहे हैं.. तेरी भाभी नहीं जा रही और बच्चे हैं, तुम लोग भी बैठ जाओ।
बुआ ने फूफा जी से कहा- चलो.. हम भी चलते हैं।
तब फूफा जी ने कहा- मैं बहुत थक गया हूँ.. पिछले हफ्ते मैं बहुत व्यस्त रहा हूँ, तो मैं तो घर जाकर सोना चाहता हूँ और अगर तुम जाना चाहो तो चली जाओ..
तब बुआ बोली- चलो मैं चली जाती हूँ, आप घर जाकर सो जाना।
इस पर पापा दादा और दादी बोलीं- यह क्या घर नहीं है.. यहीं पर ही सो जाना.. इससे सीमा (मेरी मम्मी) को भी डर नहीं लगेगा और हम लोग भी चिंता नहीं करेंगे।
तब तक मैं समझ चुका था कि यह मम्मी और फूफा जी का प्लान है और इसमें सबसे ज्यादा चिंता है फूफा जी और मम्मी हमारे जाने के बाद कुछ तो करेंगे और मैं ये सब देखना चाहता था इसलिए मैंने भी जाने से मना कर दिया, यह कह कर कि मैं भी फूफा जी के पास ही रुकूँगा।
सबने इसे मेरा फूफा जी से लगाव माना और राजी हो गए।
इससे मम्मी और फूफा जी थोड़े अपसेट हो गए, पर कुछ नहीं बोले।
मेरे मना करते ही बुआ बोलीं- मेरी बहन और उनके बेटे को भी छोड़ जाते हैं, क्योंकि धूप भी है और गाँव में ये लोग बीमार हो जायेंगे।
यहाँ तो ये सब खेल ही लेंगे और और फूफा जी और मम्मी हमारा ध्यान भी रख लेंगे।
इस पर सब लोग राजी हो गए और पापा बुआ और दादा जी चले गए।
घर पर हम बच्चे और फूफाजी और मम्मी रह गए।
मेरा मन उदास था कि अब ये दोनों कुछ नहीं कर पायेंगे और मेरा रुकना बेकार ही गया।
फूफा जी और मम्मी भी अपसेट लग रहे थे, पर जाहिर नहीं कर रहे थे।
हम सब हॉल में बैठे टीवी पर कार्टून देख थे और फूफा जी अपना हाथ बार-बार खुद के लंड पर फेर रहे थे और मम्मी मुस्कुरा रही थीं।
तभी मम्मी फूफा जी के पास आकर बैठ गईं और और दोनों धीरे-धीरे बात करने लगे..
मैं उनकी बात तो सुन नहीं पाया, मगर ये जरूर समझ गया कि दोनों कुछ प्लानिंग कर रहे थे।
तभी फूफा जी ने कहा- चलो, हम कंप्यूटर पर गेम खेलते हैं।
हम लोग हमारी कंप्यूटर की लैब में आ गए।
मेरे पापा का कंप्यूटर इंस्टिट्यूट है और वो नीचे है।
फूफा जी ने तीन कंप्यूटर चालू कर दिए और उन पर गेम चला दिए।
हम तीनों खुश हो गए, इतने में मम्मी भी वहाँ पर आ गईं और पीछे से देखने लगीं।
हम कंप्यूटर पर गेम खेल रहे थे और फूफा जी मेरी मम्मी के कूल्हों और कमर पर हाथ फेर कर अपना गेम खेल रहे थे।
थोड़ी देर बाद मम्मी चली गईं और फूफा जी भी सोने की कह कर चले गए।
जाते-जाते कहा- बाहर मत निकलना.. बस गेम खेलना और कंप्यूटर बंद करके बाद में ऊपर आना।
फूफा जी के जाते ही मैं टॉयलेट का बहाना करके ऊपर आ गया और हमारे कमरे की ओर जाने लगा, तो हॉल में से आवाजें सुनाई दीं।
खिड़की से देखने पर मैंने देखा कि फूफा जी मम्मी को पीछे से पकड़े हुए हैं और उनके दोनों हाथ मम्मी के मम्मों पर हैं।
वो मम्मी की गर्दन पर चूम रहे थे और मम्मी आँखें बंद करके मजे ले रही थीं।
उसके बाद फूफा जी ने एक हाथ मम्मी के पेटीकोट में डाल दिया।
इससे मम्मी को झटका लगा और वो पीछे की ओर हटीं, तो उनकी गाण्ड फूफा जी के लंड से टकरा गई..
मम्मी- कहीं बच्चे आ गए तो?
फूफा जी- नहीं आयेंगे.. वो तो गेम में व्यस्त हैं… एक घंटे से पहले नहीं उठने वाले..
मम्मी- अगर आ गए तो… फिर हम फंस जायेंगे।
फूफा जी- नहीं आयेंगे.. मैं कह रहा हूँ न.. तुम मूड ख़राब मत करो जान.. इतने दिनों बाद तो मौका लगा है… आज तो जम कर मजे लूँगा..
मम्मी- तो लो न.. किसने मना किया है।
इस पर फूफा जी ने मम्मी की साड़ी हटा दी।
तो मम्मी बोलीं- कपड़े मत उतारो.. कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी।
फूफा जी- अरे कोई नहीं आएगा.. मैं दरवाजे पर मैं ताला लगा कर आया हूँ… कोई नहीं आएगा.. और बिना कपड़ों के तुम कैसी दिखती हो.. ये भी तो देखें… और जब बिना कपड़ों के ही अंग से अंग मिलेंगे तब इससे दुगना मजा आएगा…
इतना कहते-कहते मम्मी के जिस्म से ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार फेंके।
अब मम्मी सिर्फ पैन्टी और ब्रा में ही थीं।
फूफा जी ने अपने भी सारे कपड़े खुद ही उतार दिए और मम्मी को हॉल के तख्त पर ले जाकर लिटा दिया।
फूफा जी मम्मी के होंठों को चूस रहे थे और अपने हाथ लगातार मम्मी के बोबे, पैंटी और जिस्म पर फ़िर रहे थे।
इसके बाद फूफा जी ने मम्मी की ब्रा हटा कर उनके बोबे चूसने चालू कर दिए।
इससे मम्मी और मस्त हो गईं।
कुछ देर बाद फूफा जी ने उनकी पैन्टी भी उतार फेंकी।
अब मम्मी पूरी नंगी थीं और फूफा जी उनकी चूत में बार-बार ऊँगली कर रहे थे इससे मम्मी और मस्त हो गईं और अपने पाँव इधर-उधर करने लगीं।
मम्मी फूफा जी के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही मसल रही थीं तो फूफा जी ने अंपने लंड को बाहर निकाल लिया।
फूफा जी ने अपना लंड मम्मी के मुँह पर लगाया तो मम्मी ने मुँह फेर लिया।
तब फूफा जी ने कहा- बड़ा मजा आएगा मुँह में.. लो तो सही…
मम्मी ने कहा- मैंने कभी नहीं लिया.. मुझे अच्छा नहीं लगता।
तब फूफा जी ने कहा- मानो तो मेरी बात.. तुम्हें बहुत मजा आएगा।
यह कह कर उन्होंने जबरदस्ती मम्मी के मुँह में लंड डाल दिया।
इस पर मम्मी थोड़ा झिझकीं.. मगर थोड़ी देर में पूरा लंड मुँह में ले कर मजे से चाटने लगीं।
फूफा जी मम्मी की चूत में ऊँगली कर रहे थे।
थोड़ी देर में मम्मी फूफा जी से बोलीं- अब बस चूत की गर्मी शांत करो.. मुझसे रुका नहीं जा रहा…
यह सुन कर फूफा जी लेट गए और मम्मी को ऊपर आकर लंड पर बैठने को कहा।
तब मम्मी फूफा जी के लंड को पकड़ कर अपनी चूत में डाल कर सीधी फूफा जी के ऊपर बैठ गईं और आगे-पीछे होने लगीं।
मम्मी आँखें बन्द करके तेजी से आगे-पीछे हो रही थीं।
उनके और फूफा जी के मुँह से लगातार सिसकारियाँ और आवाजें निकल रही थीं।
दो मिनट के बाद मम्मी फूफा जी के ऊपर पसर कर लेट गईं जैसे उनमें जान ही नहीं बची हो।
तब फूफा जी ने मम्मी को नीचे किया और उनकी टाँगें अपने कन्धों पर रखीं और मम्मी को झटके मारने चालू कर दिए।
उनके हर झटके पर मम्मी बिस्तर पर ही आगे-पीछे हो रही थीं, उनके बोबे जबरदस्त तरीके से हिल रहे थे.. बड़ा ही ‘चुदासी भरा मंजर’ था।
मम्मी बुरी तरह से सिसकारियाँ ले रही थीं।
फूफा जी की गति लगातार ही बढ़ रही थी।
करीब बीस मिनट तक ऐसे चोदते-चोदते फूफा जी और मम्मी पसीने से लथपथ हो गए थे।
तब फूफा जी बोले- मेरा निकल रहा है क्या करूँ?
मम्मी ने कहा- अन्दर ही डाल लो.. वर्ना तुम्हें मजा नहीं आएगा।
इतने में ही फूफा जी मम्मी के ऊपर पूरा फ़ैल गए और मम्मी को कस कर पकड़ लिया।
फूफा जी लम्बे-लम्बे झटके मारने लगे और ऐसा लगा जैसे चूत के रास्ते लंड को ज्यादा अन्दर डाल रहे हों।
फूफा जी अपना सारा माल मम्मी की चूत में डाल कर मम्मी के ऊपर निढाल पड़ गए।
दोनों की साँसें बड़ी तेज चल रही थीं।
थोड़ी देर बाद फूफा जी मम्मी से अलग हुए और लेटे रहे।
मम्मी ने कहा- आज तो मजा आ गया.. कई दिनों बाद नीचे की खुजली शांत हुई है। अब कपड़े पहन लेते हैं बच्चे कभी भी ऊपर आ सकते हैं और मुश्किल हो जाएगी।
मम्मी उठीं और अपनी ब्रा का हुक लगाने लगीं।
तो फूफा जी ने हाथ पकड़ लिया और कहा- अभी तो और करेंगे।
पर मम्मी मान नहीं रही थीं।
इतने में मैंने देखा कि फूफा जी का लंड दुबारा खड़ा हो गया है।
मम्मी डर के मारे मान ही नहीं रही थीं और खड़ी हो गईं।
इस पर फूफा जी ने उन्हें पीछे से पकड़ कर जबरदस्ती नीचे झुका कर घोड़ी बना कर उनकी चूत में लंड डाल कर चुदाई चालू कर दी।
अब मम्मी कुछ नहीं बोलीं और आराम से लौड़ा डलवा कर चुदाई के मजे लेने लगीं।
फूफा जी मम्मी के बोबे मसल रहे थे।
मम्मी दर्द और चुदाई के मिले-जुले अहसास से सिसक रही थीं।
कुछ देर बाद फूफा जी ने अपना लंड निकाल कर मम्मी के गाण्ड के छेद पर लगा दिया और आगे की तरफ किया।
इससे मम्मी झटके के साथ आगे हुईं और फूफा जी को गाण्ड में डालने से मना करने लगीं, पर फूफा जी कहाँ मानने वाले थे।
उन्होंने आखिरकार जबरदस्ती गाण्ड में लंड डाल ही दिया।
मम्मी की तो जोरदार चीख ही निकल गई.. वो तो उन्होंने अपने मुँह तकिये में दबा लिया।
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मम्मी की आँखों में से तो आंसू ही निकल आए।
पहले फूफा जी धीरे-धीरे कर रहे थे.. बाद में तो उन्होंने रफ्तार बढ़ा दी।
शायद अब मम्मी का दर्द कम हो गया था, अब वो भी मजे से गाण्ड मरवा रही थीं।
थोड़ी देर बाद फूफा जी ने मम्मी को बिस्तर पर पूरा लिटा दिया और वो खुद उनके ऊपर लेट गए।
फूफा जी ने मम्मी के बोबे पीछे से पकड़ कर दबाना चालू कर दिए और मम्मी की गर्दन और पीठ की चूमा-चाटी चालू कर दी।
इससे मम्मी को और मजा आने लगा।
थोड़ी देर बाद फिर फूफा जी लंबे लम्बे झटके मारने लगे और मम्मी की गाण्ड को वीर्य से भर कर बिस्तर पसर गए।
करीब पांच मिनट बाद मम्मी उठीं और सबसे पहले कपड़े पहने..
इस बार मम्मी ने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी और फूफा जी से कहने लगीं- आज तो बड़ा मजा आया.. और मौका मिला तो आज एक बार फिर करेंगे।
इसके बाद तो मैं फटाफट नीचे आ गया।
थोड़ी देर में मम्मी भी नीचे आ गईं उनके चेहरे से चुदाई से हुआ संतोष और थकान साफ दिख रही थी।
मेरी माँ एक बेहद ही खूबसूरत और काफ़ी आकर्षक महिला हैं। उनका रंग गोरा और चेहरा इतना सुन्दर है कि जो भी उनको देखता है बस देखता ही रह जाता है।
मेरे फूफाजी के साथ उनके जिस्मानी रिश्ते थे, जो सिर्फ उन दोनों के अलावा शायद मुझे ही पता है।
फूफाजी हमारे घर आते-जाते हैं और मौका मिलने पर मम्मी और फूफाजी चुदाई जरूर करते हैं ऐसा मैंने कई बार देखा है।
अब मैं आपको उस दिन की कहानी को बताने जा रहा हूँ, जब मेरे पापा ने मेरे दादा जी को हॉस्पिटल में भर्ती करवा रखा था।
पापा और दादी उनके पास ही रात को रुकते थे।
रात को हमें डर नहीं लगे इसलिए बुआ और फूफाजी हमारे घर सोते थे।
फूफा जी दिन में दादा जी के पास रहते थे और पापा और दादी रात को वहाँ सोते थे।
एक दिन फूफाजी रात को आए, पर बुआ को नहीं लाए थे।
बस अपने बेटे को लाए थे।
बुआ को घर में किसी काम के बहाने छोड़ आए थे, घर पर रात को बस में, मम्मी और मेरी बहन और मेरा भाई थे।
हम सबको एक कमरे में सोना था और फूफाजी को दूसरे कमरे में सोना था।
हम लोग शाम को खूब खेले और मम्मी घर के काम में व्यस्त थीं और फूफाजी टीवी देख रहे थे।
रात में जब खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में गया तो मैंने अपने बगल वाले कमरे में कुछ बातें होते हुए सुनी, मैं समझ गया कि ये आवाजें फूफाजी और मेरी मम्मी की हैं।
मैंने ध्यान से सुना तो पाया कि फूफाजी मम्मी से कह रहे थे- रात में जब बच्चे सो जाएँ, तो तुम मेरे कमरे में आ जाना.. मैं दरवाजा खुला छोड़ कर सोऊँगा.. बस पूरे कपड़े उतार कर आना.. मजा आएगा.. आते ही चुदाई करेंगे।
सबके सो जाने के बाद मैंने मम्मी को अपने सारे कपड़े उतारते हुए देखा तो समझ गया कि आज की रात मम्मी फूफाजी के साथ बितायेंगी।
मम्मी अपने सारे कपड़े उतारने के बाद बगल के कमरे में चली गईं।
जब मम्मी कमरे में गईं उस समय फूफाजी बाथरूम में गए हुए थे।
मम्मी कमरे में जाकर खड़ी हो गईं।
तभी फूफाजी बाथरूम से निकले।
उस समय वो भी पूरी तरह से निर्वस्त्र थे।
जब मैंने उनके लण्ड को देखा तो उसकी लम्बाई को देख कर मैं समझ गया कि उसकी लम्बाई साढ़े सात से आठ इन्च की होगी।
फूफाजी का लण्ड पूरी तरह से तना हुआ था।
फूफाजी मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गए, मम्मी फूफाजी को देख कर मुस्कुराईं और उनके गले से चिपक गईं।
मम्मी के चिपकने के बाद फूफाजी ने मम्मी की गाण्ड पर एक हाथ को रखते हुए सहलाया।
इसके बाद फूफाजी ने मम्मी को पकड़ कर पीछे घुमा दिया और मम्मी की गाण्ड से अपने लण्ड को सटा दिया।
फूफाजी ने क्रीम को अपने लण्ड पर लगा कर मम्मी से कुछ कहने लगे, जो मैं सुन नहीं पा रहा था।
शायद मम्मी फूफाजी को किसी बात के लिए मना कर रही थीं, पर फूफाजी मान नहीं रहे थे।
वो तो बस अपने लंड पर क्रीम लगा रहे थे।
फिर उन्होंने लंड मम्मी की गाण्ड पर लंड लगा कर और एक जोर से झटका मारा, तो मम्मी के मुँह से जोर से आवाज निकली, जो कि मेरे कान तक पहुँचने के लिए काफ़ी थी।
फूफाजी ने एक हाथ से मम्मी के कमर को पकड़ लिया और अपने कमर को हिलाने लगे।
अब फूफाजी ने अपने कमर को हिलाते हुए मम्मी से पूछा- दर्द तो नहीं हो रहा?
तो मम्मी ने कराहते हुए बताया- हो रहा है…
इतना सुन कर फूफाजी ने एक जोर का झटका मारा तो मम्मी जैसे उछल पड़ीं।
मम्मी ने फूफाजी से कराहते हुए धीरे-धीरे झटके मारने के लिए बोला लेकिन उनकी इस बात का फूफाजी पर कोई भी असर नहीं पड़ा और वो मम्मी को वैसे ही पेलते रहे।
वैसे तो वो अपनी कमर को जोर-जोर से ही हिला रहे थे लेकिन जब अपने कमर को थोड़ा और तेजी से झटका लगाते तो मम्मी की हालत देखते ही बनती थी।
कुछ देर के बाद फूफाजी ने मम्मी को ड्रेसिंग-टेबल के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की चूत को देख-देख कर पेलने लगे।
मम्मी की चूत पर अपने हाथ रखने के बाद वो मम्मी को वैसे ही झटके लगाते रहे और मम्मी की गाण्ड में अपने पूरे लण्ड को घुसा दिया।
अब उनका पूरा लण्ड मम्मी की गाण्ड में चला गया था।
कुछ देर तक उसी तरह से झटका लगाने के बाद फूफाजी की कमर की रफ्तार बढ़ने लगी..
तो मैं समझ गया कि उनका सब अब अन्तिम चरण पर था।
मेरा सोचना बिलकुल ही सही था क्योंकि कुछ देर के बाद देर तक फूफाजी मम्मी के कन्धे पर अपना सर टिका कर शान्त पड़े रहे।
मम्मी और फूफाजी की साँसें बहुत जोर से चल रही थीं।
कुछ देर तक वैसे खड़े रहने के बाद फूफाजी ने अपने लण्ड को मम्मी के गाण्ड से निकाल दिया।
अब मम्मी बाथरूम में चली गईं।
फूफाजी भी उनके पीछे चले गए।
कुछ देर के बाद जब दोनों बाहर निकले तो मैंने देखा कि मम्मी ने फूफाजी के लण्ड को अपने एक हाथ से पकड़ रखा था।
कमरे में आने के बाद दोनों बिस्तर पर बैठ गए।
अब फूफाजी ने मम्मी को इशारे से लण्ड को चाटने के लिए बोला।
मम्मी फ़र्श पर बैठ गईं और फूफाजी के लण्ड को अपने मुँह में लेकर चाटने लगीं।
फूफाजी मम्मी की चूचियों को अपने हाथ में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगे।
लगभग पांच मिनट के बाद जब फूफाजी पूरी तरह से गरम हो गए तो मम्मी को लण्ड को छोड़ने के लिए बोला।
मम्मी ने जब लण्ड को मुँह से निकाला तो फूफाजी का लण्ड पूरी तरह से तन चुका था।
अब फूफाजी का लण्ड मम्मी की चूत में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था।
अब फूफाजी ने मम्मी को बिस्तर पर लेटने के लिए बोला, मम्मी बिस्तर पर लेट गईं।
फूफाजी ने मम्मी की चूत के बालों को सहलाना शुरू किया।
इसी बीच फूफाजी ने मम्मी की चूत पर काट भी लिया।
मम्मी ने दर्द के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं और जोर-जोर से साँसें खींचने लगीं।
इसके बाद फूफाजी ने मम्मी की चूत को अपने दोनों हाथों से फ़ैलाया और बोले- य झांटें तो बहुत ही ज्यादा हैं।
फूफाजी ने बगल की टेबल से पापा का शेविंग किट निकाल कर मम्मी की चूत के बाल साफ़ कर दिए।
इसके बाद फूफाजी मम्मी की जांघ पर बैठ गए, अब उनके लिए बर्दाश्त करना जैसे मुश्किल हो रहा था।
फूफाजी ने अपने लण्ड को एक हाथ से पकड़ कर मम्मी की चूत पर सटाया और दूसरे हाथ से मम्मी की चूत को फ़ैलाया।
फूफाजी ने अपने लण्ड को मम्मी की चूत के छेद पे रख कर अपनी कमर को हल्का सा आगे की तरफ़ धकेला, तो मम्मी के मुँह से हल्की सी सिसकी निकली।
मैं समझ गया कि मम्मी की चूत में उनका लण्ड का लाल टोपा भीतर चला गया होगा, लेकिन ऐसा नहीं था।
मम्मी की चूत फूफाजी के लण्ड के लिए छोटी थी।
अब फूफाजी ने मम्मी के दोनों पैरों को मोड़ करके फ़ैला दिया और दोनों पैरों के बीच में आ गए।
अब मम्मी की चूत पर अपने लण्ड को सटा कर रगड़ने लगे।
दो मिनट तक ऐसा करने से मम्मी धीरे-धीरे गरम होने लगीं और तेज साँसें लेने लगीं।
कुछ देर के बाद मम्मी ने अपनी चूत को अपने दोनों हाथों से फ़ैला दिया और फूफाजी को लण्ड को घुसवाने के लिए बोलीं और कहा- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा.. जल्दी डाल कर मुझे शांत करो।
फूफाजी ने अपने लण्ड को मम्मी की चूत के छेद पर रख कर जोर से झटका मारा तो मम्मी अपनी जगह से दो इन्च ऊपर खिसक गईं।
मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि फूफाजी का लण्ड मम्मी की चूत में चला गया था।
अब फूफाजी अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाने लगे और मम्मी उनके हर झटके के साथ हिलने लगीं।
मम्मी के मम्मे हर झटके के साथ आगे-पीछे हिल रहे थे।
बीच-बीच में फूफाजी उनको मुँह में लेकर चूस रहे थे।
मम्मी कभी आँखें बंद करके सिसकारी लेतीं, तो कभी-कभी खुद के मम्मों को दबातीं।
मम्मी के दोनों हाथ फूफाजी की कमर और गाण्ड व सर के बालों पर फिर रहे थे।
फूफाजी ने मम्मी की चूत में से लंड निकाल कर उन्हें घोड़ी बना दिया और पीछे से चूत में लंड डाल दिया।
फूफाजी मम्मी की कमर पकड़ कर जोर-जोर से झटके मार रहे थे।
मम्मी बुरी तरह से सिसिया रही थी, मम्मी के मम्मे लटक कर हिल रहे थे और ऐसे लग रहे थे जैसे बस अभी टपक जायेंगे।
थोड़ी देर बाद फूफाजी ने मम्मी को सीधा लेटाया और मम्मी के ऊपर चढ़ गए और दोनों एक-दूसरे को अपनी बांहों में कस लिया।
फूफाजी ने मम्मी के गाल पर एक पप्पी ली और एक जोर का झटका मारा तो मम्मी कराह उठीं।
फूफाजी ने पूछा- दर्द कर रहा है?
तो मम्मी ने कराहते हुए जवाब दिया- हां आऔऊऊऊऊऊ आह्हह्हइइ..।
अब फूफाजी ने मम्मी की दोनों कलाईयों को पकड़ कर एक जोर से झटका मारा तो मम्मी तो जैसे पूरी तरह से कांप गईं।
अब फूफाजी मम्मी की चूचियों को मुँह से पकड़ कर धीरे-धीरे पीने लगे और अपने कमर को धीरे-धीरे हिलाने लगे।
मम्मी अब पूरी मस्ती के साथ ‘आहें’ भरने लगीं।
अब फूफाजी ने अपने लंड को मम्मी के पूरा अन्दर ले जाने के लिए जोर-जोर से दो-तीन झटके मारे।
उनके तेज झटकों से ऐसा लगा रहा था, जैसे वो बस लंड आर-पार कर देंगे।
इस झटकों से तो मम्मी पूरी तरह से कांपते हुए मुँह से सिर्फ ‘आऊऊउ आह्हफ़’ की आवाज निकाल पा रही थीं और उधर फूफाजी अपने कमर को जोर-जोर से हिला रहे थे।
तभी मम्मी ने बोला- थोड़ा धीरे-धीरे अन्दर डालिए न आआ.. अह्हह्हह्हह्हह्ह।
अब फूफाजी ने मम्मी को बोला- अभी तो आधा ही अन्दर गया है। आज तो बस तुम्हारी चूत की ऐसी-तैसी करनी है, कई दिनों बाद मिली है.. आज इसको ऐसे ही दो दिन तक चोदूँगा।
यह कहते हुए फूफाजी ने जोर-जोर से तीन-चार झटके लगाए तो मम्मी ‘आआआऐईईईईईइ औआआआ’ की आवाज के साथ जैसे धीमी आवाज में चीख पड़ीं।
फूफाजी ने अपने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाल दिया और मम्मी के दोनों चूचियों को फ़िर से मसलना शुरू कर दिया।
कुछ देर के बाद फूफाजी ने अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया और मम्मी की “आअह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊओह्ह” कराहती हुई आवाज आने लगी।
फूफाजी ने अपने होंठों को मम्मी के होंठों को कस लिया और जोर-जोर से झटके मारने लगे।
तब मम्मी अपने होंठों को आजाद करते हुए पूछा- अभी और कितना बाहर है राजा?
फूफाजी ने बोला- थोड़ा सा ही रहा गया है.. डाल दूँ पूरा?
तो मम्मी ने ‘हामी’ में अपने सर को हिलाया।
फूफाजी ने अपने कमर को जोर के झटके के साथ अपने लण्ड को पूरा अन्दर कर दिया।
कुछ देर तक जोर के झटके मारने के बाद फूफाजी ने एक तरफ़ से मम्मी के मम्मों को जोर से मसलना शुरू किया तो दूसरी तरफ़ मम्मी के होंठों को चूसना शुरू किया।
अब वो भी फूफाजी के सुर के साथ अपना ताल मिलाने लगी थीं।
फूफाजी ने पूछा- मजा आ रहा है?
तो मम्मी ने सर ‘हां’ में हिलाया।
कुछ देर के बाद फूफाजी शरीर ऐंठने सा लगा और उन्होंने मम्मी को कस कर पकड़ लिया।
मम्मी भी उनसे चिपक गईं और दोनों टांगों से फूफाजी को कस लिया।
थोड़ी देर बाद फूफाजी मम्मी की चूत में लंड अन्दर तक डालने लगे और मम्मी इसमें उनका सहयोग करने लगीं।
उनका पूरा वीर्य मम्मी की चूत को गीला करने लगा तो मम्मी ‘आई लव यू मेरी जान आह्हह..’ करके अपने दोनों हाथों को फूफाजी के पीठ पर रगड़ते हुए पूरी तरह से फूफाजी के आगोश में खो गईं।
फूफाजी मम्मी के ऊपर निढाल हो कर पसर गए।
कुछ देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद फूफाजी ने उठ कर अपने लण्ड को निकाला फूफाजी ने मम्मी की चूत को देखा तो वो काफ़ी फ़ूल चुकी थी।
मम्मी थोड़ी देर चुपचाप वैसे ही लेटी रहीं और थोड़ी देर बाद उठ कर बाथरूम में गईं.. वहां फ्रेश होने के बाद वो जब बाहर आईं तो मुस्कुराते हुए फूफाजी की तरफ़ देखती रहीं।
फूफाजी ने पूछा- मजा आया?
तो बोलीं- बड़ा मजा आया.. पर आज तो तुमने मेरी चूत को और गाण्ड को सुजा दिया…
फूफाजी ने अपने लंड को सहलाते हुए कहा- कई दिनों बाद तुम्हारी चूत मिली थी तो क्या करता..
ऐसा कह कर उन्होंने मम्मी को अपनी और खींच लिया और इसके बाद मम्मी की एक बार और जबरदस्त चुदाई की।
इस बार तो मम्मी की आँखों से आंसू ही निकल गए थे।
यह पता नहीं कि वो ख़ुशी के थे या दर्द के थे।

साले की शादी में साली की चुदाई

हैलो दोस्तो, मेरा नाम परवीन राजपूत है और मैं गाज़ियाबाद से हूँ। मेरी अभी एक साल पहले ही शादी हुई है। मैं काफी समय से अन्तर्वासना पर आप सभी की लिखी हुई कहानियां पढ़ रहा हूँ।
आज मैं भी आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ.. जो अभी कुछ समय पहले ही मेरे साथ घटी है।
बात तब की है.. जब मेरे छोटे साले की शादी थी तो मैं और मेरी पत्नी दो दिन पहले ही मेरी सुसराल गाज़ियाबाद पहुँच गए। वहाँ पर सबसे पहले मेरी साली ने हमारा स्वागत किया। फिर मैं अन्दर गया और सबसे मिलने के बाद मुझे एक कमरे में बैठा दिया गया।
तभी एक लड़की मुझे नमस्ते करते हुए मेरे लिए पानी लेकर आई। मैं तो उसे देखता ही रह गया.. वो इतनी मस्त और सुन्दर थी कि मैं तो क्या.. उसे देखकर तो किसी का भी सोया हुआ लंड अपने आप खड़ा हो जाए।
तभी मैंने उससे कहा- सॉरी.. मैंने आपको पहचाना नहीं?
तभी वो बोली- मैं पिंकी.. आपकी दूर की साली हूँ।
मैंने कहा- साली तो कभी भी दूर की नहीं होती है.. वो तो हमेशा दिलों में होती है।
वो हँस कर बोली- अच्छा जी.. साली से अभी तो ठीक से मिले भी नहीं हैं और आपने हमें दिल में भी रख लिया है।
मैंने कहा- इतनी सुंदर साली को तो दिल और दिमाग़ दोनों में रखना ज़रूरी है।
वो बोली- क्या मतलब?
मैंने कहा- मतलब भी समझ जाओगी..
उसके वो बड़ी-बड़ी चूचियाँ.. क्या तनी हुई थीं.. मैं तो बस उन्हें ही देख रहा था।
तभी वो मेरे पास आकर बैठ गई और नशीली आवाज में बोली- जीजा जी.. ऐसे क्या देख रहे हो?
तभी मैंने उसकी चुदास को समझते हुए कहा- कुछ है.. जो बहुत ही अच्छा लगा है.. इसलिए नज़र नहीं हट रही है।
तभी उसने और भी चुदासी होते हुए कहा- अच्छा जी.. मुझे भी तो बताओ कि मुझ में आपको ऐसा क्या पसंद आ गया?
तो मैंने बिंदास होकर कहा- तुम इतनी सुंदर और सेक्सी हो कि तुम्हें देखकर तो किसी का भी मूड खराब हो जाए।
तो उसने कहा- क्या सच में… इतनी सुन्दर हूँ?
तो मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। जब उसने कुछ नहीं कहा तो मेरी थोड़ी और हिम्मत बढ़ गई और मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उसके मम्मों पर रख दिया और सहलाने लगा। मैं अपने एक हाथ से उसकी जाँघ को मसल रहा था और वो भी गर्म हो रही थी।
उसने भी मुँह से भी.. “ओ.. आह.. उई..” जैसी आवाजें करते हुए मेरे लंड को पैन्ट के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया।
तभी बाहर से कुछ आवाज़ आई.. और वो एकदम से उठ कर चली गई।
मैं कुछ उदास हो गया..
फिर कुछ समय बाद रात हो चली थी.. तो मैंने खाना खाया और उसके बाद सब अपने-अपने कमरे में सोने चले गए।
ससुराल का घर बड़ा था.. तो सब अलग-अलग कमरों में थे। मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी.. रात के 12 बज चुके थे।
तभी मैंने हिम्मत करके पिंकी का कमरा खोजा और उसके कमरे में चला गया।
वो उधर अकेली लेटी हुई थी और उसने उसने मैक्सी पहनी हुई थी.. तो मैं अन्दर जाकर उसके बिस्तर पर बैठ गया और धीरे-धीरे से उसकी मैक्सी को ऊपर करके उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
उसकी गोरी-गोरी जाँघों को देखकर मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड तन गया।
मैंने दरवाजे की कुण्डी लगाई और अपना लोवर उतार कर उसके बगल में लेट गया। फिर मैं अपना लंड उसकी जाँघों की दरार में रगड़ने लगा, उसका कोई भी प्रतिकार न होते देख कर मैं अपने हाथों से उसके कठोर चूचों को दबाने लगा।
वो एकदम से कसमसा कर मेरी तरफ घूम कर मेरे होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगी। मैं भी उसका साथ देने लगा और एक हाथ से उसकी कोमल नरम चूत को रगड़ने लगा। मैं ऊपर से ही उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
वो बहुत गरम हो चुकी थी और सिसकारियां भरने लगी।
फिर मैंने उसकी मैक्सी और पैन्टी दोनों उतार कर फेंक दीं।
मैं तो बस उसकी चूत को देखता ही रह गया। इतनी चिकनी और गोरी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था।
मैंने उसे सीधा लेटा कर 69 की अवस्था में आ गया, मैं उसकी चूत को और वो साली मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
साली मेरे लंड को इतनी मस्ती से चूस रही थी कि मेरे मुँह से भी ‘ओह.. आह..’ की आवाजें निकलने लगीं।
मुझे और भी ज्यादा जोश चढ़ गया.. मैं भी अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डालकर चूसने लगा। मैं कभी-कभी उसके दाने को दाँत से काट भी लेता.. तो वो एकदम से उछल जाती।
वो मेरे लंड को तो इस तरह चूस रही थी कि मेरी तो जान ही निकली जा रही थी। मैंने भी जोर-जोर से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
वो सिसकारियां भरने लगी और उसने अचानक अपने हाथों से पूरा ज़ोर लगा कर मेरे सिर को अपनी चूत में दबाते हुए अपना पानी छोड़ दिया.. मैंने उसका सारा रस पी लिया। फिर चूत को चाट-चाट कर साफ कर दिया।
वो निढाल हो गई.. तभी मैं खड़ा हुआ और उसके बालों को पकड़ कर उसके मुँह को चोदने लगा। दस मिनट चोदने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसके मुँह में ही छोड़ दिया.. वो उसे जूस की तरह गट-गट करके पी गई और उसने मेरा लवड़ा चाट-चाट कर साफ कर दिया।
अब हम दोनों निढाल हो कर एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए और आराम करने लगे। वो मेरे होंठों को चूसने लगी और मैं भी उसके मम्मों को मसलता रहा।
इसके बाद जब हम दोनों फिर से गरम हो गए तो मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना सुपारा उसकी चूत के मुँह पर लगा दिया.. उसकी चूत गीली थी और वो भी चुदासी थी.. सो उसने मेरे लौड़े को अपनी चूत में ले लिया।
उसकी एक हल्की सी ‘आह’ निकली और फिर एक-दो धक्कों में ही लवड़ा चूत की गहराइयों में गोता लगाने लगा।
बीस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद उसने अपना रज छोड़ दिया और मुझसे लिपट गई उसके माल की गर्मी से मेरा माल भी उसकी चूत में ही टपक गया।
हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में भींचे हुए जीजा-साली की चुदाई की कथा बांच रहे थे।
इसके बाद जब हम दोनों फिर से गरम हो गए तो मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना सुपारा उसकी चूत के मुँह पर लगा दिया.. उसकी चूत गीली थी और वो भी चुदासी थी.. सो उसने मेरे लौड़े को अपनी चूत में ले लिया।
उसकी एक हल्की सी ‘आह’ निकली और फिर एक-दो धक्कों में ही लवड़ा चूत की गहराइयों में गोता लगाने लगा।
बीस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद उसने अपना रज छोड़ दिया और मुझसे लिपट गई उसके माल की गर्मी से मेरा माल भी उसकी चूत में ही टपक गया।
हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में भींचे हुए जीजा-साली की चुदाई की कथा बांच रहे थे।
ये अभी तक आपने मेरे पिछले भाग में पढ़ा था।
तो मित्रों.. किस तरह मैंने अपनी साली के साथ चुदाई का पहला शॉट मारा.. उसके बाद तो अभी पूरी रात ही बाकी थी।
चुदाई के बाद बात करते-करते उसने मेरे लंड को फिर से सहलाना शुरू कर दिया, फिर मेरे लंड को मुँह में भर कर चूसने लगी। मैंने भी उसको मस्त मम्मों को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद हम दोनों फिर से गरम होने लगे।
मेरा लंड एकदम लोहे की रॉड जैसा सख़्त हो गया था.. तो मैंने भी उसको पकड़ा ओर जबरदस्त तरीके से उसके मुँह में अपना मोटा ओर लंबा लंड पेलना शुरू कर दिया। वो भी किसी मंजी हुई राण्ड की तरह बड़े मज़े से मेरे लंड को अपने हलक तक लेकर चूस रही थी।
कुछ देर बाद लंड चुसवाने के बाद मैंने उसे सीधा पलंग पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोल कर.. उसकी चूत पर अपना मुँह रख कर.. उसकी चूत को चूसने ओर चाटने लगा।
मुझे उसकी गुदगुदी चूत चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था। उसकी चूत से निकलता हुआ रस.. जो उसकी चूत से होकर मेरे मुँह में जा रहा था.. जो बहुत ही मजेदार था। कुछ देर चूत चाटने के बाद मैंने उसे ऊपर की ओर उठा कर उसे उल्टा लिटा दिया और उसकी कमर को चूमने लगा।
मैंने उसे चुम्बन करते-करते.. उसकी गाण्ड को अपने दोनों हाथों से उठाकर उसे कुतिया बना दिया।
अब मैं उसकी चूत पर अपने लंड के टोपे को उसकी गाण्ड के छेद पर रगड़ने लगा। मन तो हुआ कि इस बार इसकी गाण्ड मारी जाए.. पर फिर चूत की चुदास ने मेरा मन पलट दिया तो मैंने सोचा अभी तो पूरी रात पड़ी है साली साहिबा की गाण्ड भी बजा ही लूँगा।
वो बहुत ही गर्म हो रही थी.. वो बोलने लगी- साले हरामी जीजा.. अब मत तड़पा.. घुसा दे लौड़ा और फाड़ दे मेरी चिकनी चूत को.. डाल दे भोसड़ी के.. अपना लौड़ा.. ओह्ह..
उसने अपने हाथों में मेरा लंड लेकर ज़बरदस्ती अपने भोसड़े में घुसेड़ना शुरू कर दिया।
मैंने अपने एक हाथ से उसके मम्मे को कसकर पकड़ा और एक जोरदार धक्का मारा.. मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ.. उसकी बच्चेदानी में जाकर लगा.. और उसे बहुत ज़ोर से दर्द हुआ।
वो एकदम से कलप गई.. पर उसकी चीख को मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बन्द करके रोक लिया।
अब मैं कुछ देर के लिए रुक गया और उसके झूलते मम्मों को दोनों हाथों से पकड़कर धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया। कुछ पलों बाद.. जब वो सैट सी हो गई.. तब मैंने फिर से धीरे-धीरे से उसकी चूत में अपना लंड पेलना शुरू किया।
कुछ ही देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो भी अपनी मस्त गाण्ड को खुद ही आगे-पीछे करके मेरे लंड का पूरा मज़ा लेने लगी।
अब मैं भी अपना पूरा ज़ोर लगाकर उसकी चूत को चोद रहा था। कुछ देर की चुदाई के बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया.. जिससे मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था।
अब लौड़े की ठापों से पूरे कमरे में ‘फ़च.. फ़च..’ की आवाजें गूँज रही थीं।
करीब 20 से 25 मिनट की चुदाई के बाद वो दोबारा अकड़ गई और इस बार उसके झड़ने के साथ ही मैंने भी अपना गरम-गरम पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
झड़ने के बाद मैं वैसे ही उसको उल्टा लिटाकर उसके ऊपर ही लेट गया। फिर हम दोनों सीधे हुए और अगल-बगल में लेट गए।
हम दोनों की साँसें बहुत ही तेज़ी से चल रही थीं और वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर उन्हें चूसे जा रही थी।
अब दोनों थक चुके थे.. तो हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे और एक-दूसरे के अंगों को छेड़ने लगे।
फिर मैंने उससे पानी लाने के लिए कहा.. तो वो वैसे ही अपनी मैक्सी पहन कर चुपके से बाहर गई और मेरे लिए पानी के साथ-साथ गरम दूध भी लेकर आई।
सबसे पहले मैंने पानी पिया और फिर मैं बाथरूम में जाकर मूत कर आया..
उसने मुझे बड़ा गिलास भर कर दूध दिया। मैंने दूध पीना शुरू किया और उसने फिर से मेरे लण्ड के साथ खेलना शुरू कर दिया।
वो मेरे लंड को मुँह मे लेकर कुतिया की तरह चूसने लगी। मुझे फिर से मज़ा आने लगा और मेरा लंड फिर से चुदाई के लिए तैयार हो गया और मैंने उसको फिर से कुतिया बनाकर उसकी गाण्ड के छेद पर थूक लगाकर अपना लंड उसकी गाण्ड के छेद पर रखकर एक धक्का मारा और मेरा टोपा गाण्ड में अन्दर जाते ही उसकी ज़ोर से चीख निकल गई।
मैंने अपने हाथ से उसके मुँह को बंद कर दिया… वो दर्द के मारे रोने लगी पर मैंने रहम ना खाते हुए एक और जोरदार धक्का मारा.. जिससे मेरा पूरा लंड उसकी गाण्ड में अन्दर तक चला गया।
वो मुझे अलग हटाने की कोशिश करने लगी.. पर मैंने अपना पूरा ज़ोर उसकी शरीर पर डाला हुआ था तो वो हिलने में नाकाम रही।
फिर मैंने धक्के लगाने शुरू किए.. कुछ देर लण्ड जब अन्दर-बाहर होता रहा.. तो लंड ने उसकी गाण्ड में अपनी जगह बना ली और फिर उसे भी मज़ा आने लगा।
अब वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत में उंगली कर रहा था और धबाधब उसकी गाण्ड को पेल रहा था।
करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद अब मैं अपने पूरे जोश में आ चुका था.. तो मैंने रफ़्तार काफ़ी तेज कर दी और वो भी अपनी गाण्ड को हिला हिला कर मुझे चुदवा रही थी.. मगर मैं झड़ने का नाम ही नही ले रहा था।
कुछ देर उसकी चुदाई के बाद मैं पलंग पर सीधा लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गई। उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर अपनी गाण्ड के छेद पर सैट किया और मेरा लंड एक धक्के में ही सीधा अन्दर चला गया।
वो मेरे खड़े लण्ड पर बैठ कर ज़ोर-ज़ोर से उछल-उछल कर कूदने लगी।
मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैं उसके दोनों चूतड़ों को हाथों में लेकर ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था।
कुछ देर बाद अब मैं अपनी चरम सीमा पर आ चुका था.. तो मैंने उसकी गाण्ड को अपने दोनों हाथों से ऊपर किया ओर ज़ोर से पेलना शुरू कर दिया।
फिर 3-4 धक्के के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी गाण्ड में छोड़ दिया।
कुछ देर वो मेरे लंड पर ऐसे ही बैठी रही और फिर मेरा लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर आ गया।
अब हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेट गए और एक-दूसरे को चूमते और चाटते रहे।
फिर मैंने अपने आप को साफ़ किया और उसे एक लंबा चुम्बन करके अपने कमरे में चला गया।
उस रात मैंने उसको 3 से 4 बार पेला था। वो भी पूरी चुदक्कड़ थी उसने भी मुझे खूब चूस लिया था।

प्यास बुझती नहीं

हाँ तो दोस्तो, अब मैं अपनी कहानी शुरु करती हूँ जिसमें एक बार फ़िर से अब्बु और भैया ने मुझे चोदा।
उस दिन हुआ यह था कि मैं बहुत चुदासी थी और अम्मी नानी के घर गई हुई थी। यह तो आप लोग जानते ही है कि मेरी पहली चुदाई भी अब्बु ने ही की थी और फ़िर अम्मी ने भैया से भी चुदवाया था और अब वो लोग अकसर मुझे चोदा करते थे।
मगर इधर बहुत दिन से अब्बु अम्मी की फ़ैली हुई चूत में मस्त थे और भैया ने कोई दूसरी गर्ल फ़्रेन्ड फ़ंसा ली थी और मुझ पर ध्यान देना छोड़ ही दिया था।तब आखिर अम्मी के बाहर जाते ही मैंने सबसे पहले अपनी झांटे बनाई और रात को अब्बु के कमरे में गई।
अब्बु कोई मूवी देख रहे थे और मुझे देख कर बोले- बेटी, क्या हुआ आज बहुत दिन बाद अब्बा की याद आई?
तब मैंने कहा- आप तो अम्मी जान की चूत में ही फ़ंसे रहते हैं अब आपको मेरा ज़रा भी खयाल नहीं ! आपने मुझे कितने दिनों से नहीं चोदा है।
तब अब्बु ने दुलार जताते हुए कहा- ऊऊओह्ह ह्ह मेरी प्यारी रानी बेटी आजा, आज तुझे फिर से चोदता हूँ !
और यह कह कर उन्होंने डीवीडी बदल दी।
अब उसमें एक ब्ल्यू फ़िल्म चलने लगी। जिसमें एक छोटी सी लड़की को पाँच आदमी चोद रहे थे। जिसे देख कर मेरी आँखें बाहर आ गई और मैंने अब्बु से कहा- अब्बा यह बच्ची इन पांचों को एक साथ झेल रही है और उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकी उम्र भी अभी ज्यादा नहीं होगी।
तब अब्बु बोले- मेरी बच्ची, ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही होते हैं। साली इतनी सी है और तुम खुद ही देखो कि कैसे मज़े ले लेकर पांच पांच लण्डों का मज़ा एक साथ ले रही है। जबकि इसमें एक इसका बाप और एक भैया के अलावा तीन बाहर वाले हैं।
अब ये सब देख कर भला मेरी चूत में खाज़ क्यूं नहीं उठेगी।
तब मैंने अब्बु से कहा- अब्बु, मैं तो आप और भैया से ही चुदवाकर पनाह मांग लेती हूँ।
अब्बु ने कहा- जा बगल के कमरे से अफ़ाक को बुला ला। साला लण्ड हाथ में पकड़े सो रहा होगा।
तब मैं भैया के कमरे की तरफ़ बढी और देखा तो सच में वो अपने लण्ड को हाथ में लेकर सड़का मार रहा था।
मैं जल्दी से बढ़ते हुए बोली- हाय भैया, क्या गज़ब कर रहे हो। भला घर में इतनी खूबसूरत बहन होते हुए तुम्हें यह सब करना पड़े तो लानत है मेरी जवानी पर !
और मैंने झट से उनका लण्ड अपने कोमल हाथ में ले लिया, बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी जल्दी हाथ आगे पीछे करने लगी और फ़िर झट से मुँह में लेकर चूसने लगी और तब भैया का लण्ड पूरी औकात में आ गया और वो मेरे बालों को पकड़ते हुए जोर जोर से धक्का मारने लगे और फ़िर जल्दी ही उनका पानी मेरे मुँह में गिरा जिसे मैं चपर चपर करते हुए चाट गई और भैया से बोली- चलो अब्बु बुला रहे हैं, आज फ़िर से तुम दोनों मुझे चोदकर मज़ा दो।
और भैया का लण्ड पकड़ कर अब्बु के कमरे में ले आई और भैया को देखते ही अब्बु बोले- मैंने कहा था साला मुठ मार रहा होगा।
तब मैंने कहा- अब्बु, आप बहुत तजुरबेदार हैं, सच में भैया सड़का मार रहे थे।
और फ़िर मैंने अब्बु का लण्ड अपने मुँह में ले लिया और भैया पीछे से मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ते हुए अन्दर डालने की कोशिश करने लगे।
तब मैंने कहा- अब्बु जी, मैं भी ब्ल्यू फ़िल्म वाली लड़की की तरह पांच जनों से एक साथ ही चुदाना चाहती हूँ।
अब्बा ने कहा- बेटी, तू नहीं झेल पायेगी एक साथ पांच पांच को।
मगर मैं तो पूरी तरह से चुदासी हो ही चुकी थी, मैंने कहा- कान खोल के सुन लो आप दोनो को मुझे पांच जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है। अगर कल आप लोग ने मुझे पांच जन से नहीं चुदवाया तो बहुत बुरा होगा।
तब अब्बु ने कहा- अच्छा अच्छा मेरी रानी बेटी, मैं तो तेरे भले के लिये ही कह रहा था। अगर तेरी चूत फ़ट गई तो परेशानी तो हमीं लोगो को होगी। मगर जब तू नहीं मान रही तो मेरे बला से। अब चल आज तो हम दोनों से चुदवा ले !
यह कह कर उन्होंने फ़िर से अपना मूसल जैसा लण्ड मेरे मुँह में जोरदार धक्के के साथ अन्दर धकेल दिया और तभी भैया ने पीछे से मेरी गाण्ड फ़ैलाकर इतनी जोर से धक्का मारा कि मुझे नानी याद आ गई ऊऊउईई माआआ मर गई आआह्हहह भैया जरा धीरे से धक्का मारो तू तो नानी याद दिला रहा है।
तब अब्बु ने कहा- बेटी, चाहे जिसका नाम ले पर नानी का नाम ना ले।
तब मैंने कहा- क्यूं?
तब अब्बु बोले- तेरी नानी की चूत मैंने मारी थी और कई साल तक मैं उसकी चूत चोदता रहा था।
तब मेरे साथ साथ भैया का मुँह भी खुला रह गया, तब भैया ने कहा- अब्बु, क्या आपने नानी को चोदा है?
अब्बु ने कहा- हां यार, साली मेरी सास बहुत मस्तानी थी। तुझे तो पता ही है कि तेरी अम्मी की कम उमर में शादी हुई थी। जब मेरी शादी हुई थी मैं 19 साल का था और तेरी अम्मी 16 साल की थी और मेरी सास सिर्फ़ 30 साल की थी। मगर मेरे ससुर की उमर करीब 40 साल थी, वो तुम्हारी नानी को खुश भी नहीं कर पाता था। जाने भी दो इन बातों को, अभी तो फ़िलहाल चुदाई का मज़ा लो। उसकी चुदाई के बारे में फ़िर कभी बताऊँगा।
और तब भैया पीछे से मेरी गाण्ड मार रहे थे और अब्बु आगे से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धक्के लगा रहे थे।
अब मुझे भी मस्ती आने लगी और मैं अपने मुँह और गाण्ड को आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी थी और तब भैया झड़ गये थे। मगर अब्बु जी अभी भी नहीं झड़े थे और उन्होंने मुझे बेड पर खड़ा होने को कहा।
मैं खड़ी हो गई और तब अब्बु ने मेरे दोनों पैर अपने कन्धे के दायें बायें किए और मेरी चूत को मुँह में भर कर चूसने लगे। मैं बुरी तरह तप रही थी और अपने अब्बु का मुँह जोर जोर से अपनी चूत पर दबाने लगी। तब ही अब्बु खड़े होने की कोशिश करने लगे और मेरा बैलेन्स बिगड़ने लग।
तब मैंने घबरा कर कहा- आआअह्हह अब्बु क्या कर रहे है मैं गिर जाऊँगी !
मगर अब्बु नहीं माने और वो मुझे अपने कंधे पर बैठा कर खड़े हो गये। अब मैं अपनी दोनों टांगें उनकी गरदन में कस कर लपेटे हुए थी और अपनी चूत को उनके मुँह से दबाते हुए उनके सिर को भी जोर जोर से दबा रही थी और भैया आंख फ़ाड़े हुए अब्बु के इस पोज़ को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमें भी बहुत आ रहा था।
इस तरह से कोई पहली बार मेरी चूत चाट रहा था और थोड़ी देर बाद ही मैं ऊऊओहह्ह ऊओह्ह आह्हह आआअह्ह करते हुए झड़ गई और अब्बु का रस भी नीचे से पिचकारी की तरह बहने लगा और तब अब्बु मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लेटकर तुरंत अपने झड़े हुए लण्ड को मेरी दोनों चूचियों के बीच में रगड़ने लगे और मैं उनके नोक की तरह लण्ड की टोपी को मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी। पर अब्बु जल्दी जल्दी आगे पीछे कर रहे थे।
तब मैंने कहा- अब्बु, अपना लण्ड मेरे मुँह में दीजिये। आपका सारा माल बेकार ही जाया हो रहा है।
तब अब्बु ने अपने लण्ड को दोनों चूची के बीच से हटा कर मेरे मुँह में डाल दिया और मेरी चूची दबाने लगे और इस तरह से उनके लण्ड से थोड़ा सा रस और निकला, जिसे मैं चाट गई और फ़िर अब्बु ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में ठूंस दिया और उस दिन अब्बु और भैया दोनो ने मेरी गाण्ड ही मारी थी। मेरी बुर के साथ कोई हरकत नहीं की थी और फ़िर रात को दुबारा भी उन लोगों ने मेरी गाण्ड एक एक बार और मारी अब मेरी गाण्ड फ़ड़फ़ड़ा रही थी।
सुबह अब्बु ने कहा- क्यों रानी बेटी, क्या खयाल है? क्या अब भी पांच जन से चुदवाओगी?
मैंने गुस्से से कहा- साला बेटीचोद भोसड़ी वाले, कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना है।
तब अब्बु मुस्कुरा कर बोले- कोई बात नहीं, आज रात तैयार रहना, आज पांच लोगों को लेकर आऊँगा !
और फ़िर मुझे अब्बु से नानी की चुदाई की बात भी जाननी थी। आज रात मुझे पांच जन से एक साथ चुदाई का मज़ा आने वाला है मगर मुझे अफ़सोस है कि अन्तर्वासना बहुत सी पाठिकाओं को शायद आज भी कोई लण्ड नसीब नहीं हुआ होगा और उन्हें मोमबत्ती से काम चलाना पड़ता होगा क्योंकि हर लड़की मेरी तरह बाप और भैया से नहीं चुदवा सकती।

अब्बु और भाई

हेल्लो अन्तर्वासना के पाठकगण !
कैसे है आप सब। इस बार रमज़ान की वजह से मैं नेट पर रेगुलर नहीं आ पा रही हूं।
खैर ! अब वक्त मिला है तो आप सबकी खिदमत में एक नई कहानी अर्ज है और आप सबके बहुत सारे मेल मिले।
शुक्रिया मेरी कहानिया पसन्द करने का।
हां तो आज मैं आप सबको बता रही हूं कि अम्मी कहीं बाहर गई हुई थी और जैसा कि आप सबको पता ही है मेरे अब्बु और भैया मुझे कई बार चोद चुके है और दो चार बार तो साथ में भी चोदा है उन दोनों ने।
खैर करीब 15 दिन हो गये थे और मैंने उन दोनो से चुदाया नहीं था क्यूंकि मैं अपने बॉय फ़्रेंड से चुदवा कर बहुत थक जाती थी साला हरामी पता नहीं क्या खा कर चोदता था सारे कस बल ढीले कर देता था पर वो किसी काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था और मेरी आदत लगभग रोज़ ही चुदाने की हो गई थी जब तक बुर में लण्ड ना डलवा लूं चैन ही नहीं आता था।
पर इधर करीब 15 दिन से मैंने नहीं चुदवाया था और उस दिन रात को मैं अपने रूम में एक ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी जिसमे एक लड़की को चार चार साले मुस्टण्डे चोद रहे थे और वो भी साले काले काले हबशी, जिनके मोटे मोटे लण्ड देख कर मेरी आंखे भी फ़ट गई और उस लड़की के तो कहने ही क्या साली इस तरह अपनी गाण्ड और बुर चारों से मरवा रही थी जैसे पता नहीं कबसे चुदवाति आ रही हो।
खैर जब मूवी देखने के बाद मुझपे भी मस्ती चढी तब मैं अपने अब्बू के रूम की तरफ़ गई और धीरे से अन्दर चली गई अब्बु सो रहे थे।
मैंने धीरे से उनकी लुंगी हटा दी और उनका मुरझाया हुआ लण्ड हाथ में लेकर सहलाने लगी।
अब्बु थोड़ा सा कुनमुनाये और करवट लेकर सीधे हो गये अब मैंने अपनी निकर उतारी और पूरी तरह से नंगी हो गई और अपने जलते हुए होंठ लेकर उनके लण्ड को इतनी जोर से काटा कि वो आआह्हहह्हह कर के उठ बैठे और मुझे देखते ही बोले- मेरी रानी बेटी को आज मेरी याद कैसे आ गई?
और मेरे बाल पकड़ कर फ़िर से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धकेल दिया जिसे मैं मज़े से चूस रही थी तब अब्बु ने कहा आज मेरा खयाल कैसे आ गया? तब मैंने कहा अब्बु मैं आज अपने रूम में ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी उसमे एक बहुत ही कम उमर कि लड़की चार चार लोगों से एक साथ चुदवा रही थी।
तब अब्बु ने कहा- साले फ़िरंगी (अमेरिकन) होगी। वहां के लोग ऐसे ही होते है।
तब मैंने कहा अब्बु मैं भी ऐसे ही चुदवाउंगी।
तब अब्बु ने कहा नहीं मेरी बच्ची, उस तरह तो यहां कि अच्छी अच्छी चुद्दकड़ औरतें भी नहीं चुदा पाती, तो तू तो अभी बहुत कमसिन है मगर मैं ज़िद पे उतर आई और कहने लगी, नहीं अब्बु आपको मुझे चार लोगों से एक साथ चुदवाना ही होगा।
तब अब्बु ने कहा- अच्छा अभी चार लोग कहां से लाऊं। अभी तो सिर्फ़ मैं ही हूं और ज्यादा चुदासी हो तो जा बगल के रूम में तेरा भैया साला हाथ कि लगा रहा होगा उसको बुला ला!
और मैं नंगी ही भैया के कमरे की तरफ़ गई तो देखा कि भैया हकीकत में पूरी तरह से नंगा होकर अपने लण्ड को सहला रहा था। मैं दरवाज़े की आड़ से छुपकर देखने लगी और अब भैया जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था और उसके मुँह से ऊऊह ऊऊह्ह्ह आआअह्ह आआ आआह्हहह्ह की आवाज़ निकल रही थी।
तभी मैं दौड़ कर भैया के पास पहुची और जल्दी से उसके लण्ड को अपनी चूचियों पर पटकने लगी उसका लण्ड लम्बा होकर बस अपना रस उण्डेलने ही वाला था।
जैसे ही मैंने उसके लण्ड को हाथ में लेकर अपनि चूंची पे रगड़ा तो उसके लण्ड से ढेर सारा माल निकल पड़ा और मैं उसके गाढे रस को जल्दी जल्दी अपनी चूंची पे रगड़ते हुए बोली- अब्बु ठीक ही कह रहे थे तुम तो सही में हाथ की लगा रहे हो। अरे मेरे प्यारे चोदू भैया जब तेरे पास इतनी खूबसूरत चूत है चोदने के लिये तो किसलिये हाथ की मार रहे हो?
तब भैया मेरी चूची को जोर से दबाते हुए बोला- अरे मेरी चुद्दकड़ बहन, हाथ की मारने में भी बहुत मज़ा आता है।
तब मैंने कहा- अच्छा, अब चलो, अब्बु अपने रूम में बुला रहे हैं और मैं उसके झड़े हुए लण्ड को हाथ से पकड़ कर खीचते हुए अब्बु के रूम में ले आई।
तब अब्बु ने कहा- क्या हुअ बेटी, बहुत देर लगा दी।
तब मैंने कहा अब्बु आपने सही कहा था भैया हाथ की लगा रहे थे, वो तो मैं सही वक्त पर पहुच गई वरना तो इन्होने अपना कीमती माल बरबाद कर ही दिया होता!
तब अब्बु हसते हुए बोले- बेटी तजुरबा भी कुछ होता है मैंने तो पहले ही कहा था ये साला हाथ की मार रहा होगा। अच्छा, अब जल्दी से बेड पर आओ और मज़ा करो !
फ़िर जैसे ही मैं बेड पर चढी अब्बु मुझसे बोले कि अपने दोनों पैर उनके कन्धो पर रखूं और एक दूसरे से लपेट लूं।
मैंने ऐसा ही किया अब मेरी चूत अब्बु के बिल्कुल मुँह के पास थी और मैंने अपने दोनों पैर अब्बु कि गरदन के पीछे लपेटे हुए थे। अब अब्बु धीरे धीरे खड़े होने लगे जिससे मुझे डर लगने लगा। मैंने कहा अब्बु क्या कर रहे है मैं गिर जाउंगी।
तब अब्बु ने कहा- नहीं गिरोगी, आज नया स्टाईल देखो चूत, चुसाने का इस तरह तुमने ब्ल्यू फ़िल्म में भी नहीं देखा होगा और अबू खड़े हो गये। अब वो बिल्कुल सीधे खड़े थे और मेरी चूत को चूस रहे थे।
मुझे इस तरह डर भी बहुत लग रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था ।
तब ही अब्बु ने कहा- बेटी, अब तुम अपना सर नीचे कि तरफ़ झुकाओ।
पर मैंने मना कर दिया इस पर वो एक चपत लगाते हुए बोले, साली जैसा कहता हूं कर वरना आज दोनो जने एक साथ तेरी गाण्ड में लण्ड डाल कर फ़ाड़ देगें।
तब मै अपने सर को धीरे धीरे नीचे कि तरफ़ ले आई और अब मेरा मुँह उनके मुरझाये हुए लण्ड के पास था जिसे वो आगे बढाने लगे मैं उनका मतलब समझ गई थी और मैंने उनका लण्ड हाथ से पकड़ कर गप्प से मुँह में डाल लिया और चूसने लगी ।
वाआआह्हहह्ह बिल्कुल नया तरीका, बुर और लण्ड कि चुसाई का इस तरह से अब मेरा डर जाता रहा और थोड़ी देर बाद ही मैं जोर जोर से अपना मुँह अब्बु के लण्ड पे चलाने लगी ।
तो अब मैं अब्बु के कन्धे पर अपने दोनो पैर लपेटे उनका लण्ड चूस रही थी और अब्बु मेरी चूत को चूस रहे थे और वही किनारे मेरा भैया अपने लण्ड को हाथ में लेकर खड़ा था तब अब्बु ने मुझे नीचे लेटा दीया और भैया से कहा आओ बेटे आज साली कि चूत कि दोनों मिलकर धज्जीयाँ उड़ा देते है साली ब्ल्यू फ़िल्म देख कर चार लोगों से एक साथ चुदाने कि ज़िद्द कर रही है तो आज तो हम दोनों ही चार के बराबर चुदाई कर देते है बाकि कल बुरमरानी को चुदाता हूं चार मुस्टण्डों से!
और फ़िर अब्बु मेरी चूत के मु्ंह पर अपने लण्ड को रगड़ने लगे और भैया मेरे सर के पास मेरे मुँह पर आया और अपने लण्ड को मेरे हाथ में देकर चूसने को बोला।
तब मैं भैया के तगड़े लण्ड को हाथ से सहलाने लगी और अब्बु जी ने अचानक बुर पर चिकोटी काट ली और मेरी बुर के दाने के साथ छेड़खानी करने लगे आज वाकई अब्बु के साथ अलग ही तरह का मज़ा मिल रहा था जो पहले कभी नहीं मिला था।
उधर भैया ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दीया और मैं मज़े से चूसने लगी अब्बु जी भी अब मेरी बुर पे अपनी जबान रख कर चाटने लगे और फ़िर मैं भी अपने चूतड़ नीचे से उचकाने लगी अब मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- आआह्हह्ह आआअह्हह अब्बु जी बहुत मज़ा आ रहा है चूस डालो मेरी बुर को… पी जाओ साली को बहुत खाज मचती है इसमे आआह्हह्ह आज सारी खाज मिटा दो!
अब अब्बु ने अपनी जबान किसी लण्ड कि तरह अन्डर धकेल दी और मथनी कि तरह मथने लगे मेरी बुर को।
अब मुझे दो तरफ़ा मज़ा मिल रहा था एक तरफ़ भैया लण्ड मुँह में डाले था और अब्बु मेरी चूत को चूस रहे थे तब ही मैं आआह्हह आआअह्हह करते हुए झड़ गई और अब्बु मेरे सारे रस को बड़े मज़े से चाट गये और फ़िर भैया भी जोरदार धक्के मेरे मुँह में लगाते हुए झड़ गया उसके बाद थोड़ी देर तक हम लोग सुस्त से पढ़े रहे।
करीब 20 मिनट बाद अब्बु ने कहा अब बेटा, इसकी चुदाई करनी है वो भी इस तराह कि साली ब्ल्यू फ़िल्म कि चुदाई भूल जाय और ये कहकर मेरी चूंची को कसकर दाब दिया और भैया मेरी पीठ के पीछे से चिपक गया अब मैं अब्बु और भैया के बीच में पिसी जा रही थी।
आगे से अब्बु अपने सीने से कसकर मेरी दोनों चूची दाबे हुए मेरे लबों को चूस रहे थे और पीछे से मेरा भैया अपने दोनों हाथ से मेरी बुर कि दरारों को कुरेद रहा था और उसका 9′ का कड़ा लण्ड मैं अपनी गाण्ड पर साफ़ महसूस कर रही थी।
तब ही भैया ने गप्प से अपनी एक अंगुली मेरी चूत में डाल दी और अब्बु तो अब बकायदा मेरी एक चूंची के निप्पल को मुँह में दाब कर अपने होंठ से मसल रहे थे और दूसरी चूंची को हाथ से बहुत बेदरदी से दबा रहे थे।
मैं सिसक रही थी- आआह्हह अब्बु ज़रा धीरे धीरे दबाइये बहुत दर्द हो रहा है
और फ़िर अब्बु ने कहा- बेटा अब ज़रा आसन लगाने दे आज एक साथ दो लण्ड तेरी बुर में डलाउंगा तब मैंने कहा अब्बु जी आपके पास तो एक ही है।
तब अब्बु ने कहा- अरी छिनाल! ज़रा सबर तो कर और पीछे देख, तेरे भैया का लण्ड भी तो है और ये कहकर वो बेड पर लेट गये उनका लण्ड किसी साप कि तरह फ़ुफ़कार रहा था।
इस उम्र में भी अब्बु का लण्ड बहुत मोटा और लम्बा था मेरा दिल अन्डर से डर रहा था कि आज मेरी नन्हीं सी चूत का क्या होगा ?
तब अब्बु ने कहा मेरी प्यारी बेटी तू अपनी चूत को मेरे लण्ड पे रख कर बैठ जा और मैं अपने दोनो पैर छितरा कर उनके लण्ड पर बैठ गई और फ़िर उनका लण्ड थोड़ा सा मेरी चूत में घुस गया।
तब अब्बु ने कहा- अब तू मेरी तरफ़ झुक जा !
और जैसे ही उनका पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया और मैं जब झुकी तो अब्बु ने अपने दोनों हाथ से मुझे अपनी तरफ़ और खीच लिया और मेरे होंठ को चूसने लगे अब पीछे से भैया को इशारा किया कि तू भी अपना लण्ड इसकी चूत में घुसेड़ दे पर भैया इतना समझदार नहीं था वो अपने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद में घुसेड़ने लगा।
तब मैंने कहा अब्बु भैया तो गाण्ड में मारने जा रहा है.
तब भैया ने कहा- साले बहनचोद मैं कह रहा हूं कि बहन कि चूत में डाल और तू है कि गाण्ड के पीछे पड़ा है तब भैया ने कहा कि इसमे तो आप डाले हुए है मैं कहां से डालूं?
तब अब्बु ने कहा- साले आजकल के लड़के तो बस चूत मारना और गाण्ड मारना जानते है साले बस लड़की कि टांग उठाई और लगे चोदने, अरे साले हरामी जिसमे मैं डाले हूं उसी में तू भी अपना लण्ड डाल।
तब अब्बु ने मुझसे कहा- बेटी तू ज़रा अपनी बुर और उपर कर दे ताकि इस बहनचोद को साफ़ साफ़ नज़र आये तेरी चूत और फ़िर मैंने अपनी चूत और उपर उठा दी।
अब भैया अपने लण्ड को मेरी चूत पे रख कर घिसने लगा पर मेरी समझ में खुद भी नहीं आ रहा था जब अब्बु का लण्ड मेरी चूत में घुसा है।
तब भैया का लण्ड कैसे जायेगा हां अगर अंगुली पेलनी होती तो वो जा सकती थी पर मैं खमोश थी आखिर भैया ने बहुत ज़ोर देकर अपने लण्ड कि टोपी मेरी चूत में डाल ही दी और तब मुझे बहुत दर्द हुआ।
आआअह्हह ऊऊओह्हह अम्मीईई अब्बु बहुत दर्द हो रहा है ।
तब अब्बु ने कहा कि क्या भैया का पूरा लण्ड चला गया अन्दर। तब मैंने कहा नहीं अभी तो सिरफ़ टोपी ही गई है तब भैया ने एक धक्का और मारा और अब भैया का करीब चार इन्च लण्ड अन्डर घुस गया था।
मैं चीख रही थी- आआअह्हह अब्बूऊऊ जीईई पलज़्ज़ रहम कीजिये, मैं मर जाउगींईई आआह्ह्ह!
तब अबु मेरी चूंची को दबाते हुए बोले- बेटी अभी तुझे बहुत मज़ा आयेगा, जब दो लोगों का लण्ड एक साथ बुर में जाता है तब बहुत मज़ा आता है क्यूंकि मैंने तेरी अम्मी को भी इस तरह से तेरे चचा के साथ चोद चुका हूं!
और तब ही मेरे भैया ने एक और धक्का मारा और मेरा बेलेन्स बिगड़ गया और मैं अब्बु के सीने पर गिर गई और मेरी आंख से आंसू निकलने लगे और मेरी सिसकियाँ बंध गई।
अब भैया और अब्बु का पूरा पूरा लण्ड मेरी चूत में था और एक दूसरे के लण्ड से रगड़ खा रहा था और मेरी चूत कि दरार फ़ैलती जा रही थी.
अब मुझे भी दर्द कि जगह मज़ा आने लगा था और मैं धीरे धीरे उन दोनों का साथ देने लगी थी आआह्हह आआअह्हह्हह अब्बु बहुत अच्छा लग रहा है और अन्दर कीजिये आअह्ह ह्हह ऊऊफ़्फ़ कसम से बहुत मज़ा आ रहा है!
और अब दोनो बहुत ही जोरदार धक्के लगा रहे थे साथ साथ मेरी दोनो चूंची को भी मसल रहे थे तब ही कि तब का लण्ड मेरी चूत में झड़ा पर मैं समझ नहीं पाई कि किसका पानी मेरी चूत में गिरा है!
फ़िर कुछ देर बाद मैंने अपनी चूत में एक बार फ़िर से पानी कि फ़ुहार महसूस कि और फ़िर दोनो के लण्ड ढीले हो गये पर मैं अभी झड़ी नहीं थी तब मैंने अब्बु से कहा साला बेटी चोद कर अपना पानी तो आप लोगों ने निकाल लिया पर मेरा तो अभी पानी भी नहीं निकला साले अगर जलदी ही मेरी प्यास नहीं बुझाई तो तुम दोनों का लण्ड काट लूंगी।
तब अब्बु ने मुझे झट से अपने लण्ड पर बैठा लिया और मेरी चूंची को चूसते हुए बोले मेरी रानी ऐसे बात ना करो आज देखो मैंने तुमको कितना मज़ा दिया है और अभी तुम्हारा पानी भी निकाल देता हूं और फ़िर मुझसे कहा तुम ऐसा करो कि भैया से एक बार गाण्ड मरवा लो तुम्हारा पानी भी निकल जायेगा।
तब मैंने कहा- अबे जहील कहीं गाण्ड मरवाने से भी पानी निकलता है बेटीचोद, मेरी बुर में खाज है और तू गाण्ड मरवाने कि बात कर रहा है।
तब अब्बु ने कहा बेटी मैं बुर मारुंगा भैया गाण्ड मारेगा और उसके बाद भैया ने मेरी जम कर गाण्ड मारी और आगे से अब्बु मेरी चूत में अपना लण्ड पेले जा रहे थे अब मुझे दो तरफ़ से मज़ा मिल रहा था।
एक साथ बुर और गाण्ड मरवाने का थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गई और मेरी चूत से फ़स फ़स की अवाज़ आने लगी।

भाई से चुदाई

मेरा फिगर ३२-२८-३४ है और किसी वजह से छोटी उम्र में ही सैक्स की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगी। वैसे तो मेरा स्थाई घर जयपुर में है लेकिन मैं जोधपुर में मेरे भाई के साथ रहती हूँ। मै और मेरा भाई लगभग रोज चुदाई करते है। अब तो ये हाल है कि मैं दिन में एक बार जब तक भाई से चुद नहीं लेती मुझे नींद नहीं आती है। मैंने अपने भाई के अलावा किसी और से चुदाई नहीं की है।

मेरे भाई का नाम अंकित है। जब उसने मुझे पहली बार चोदा तो मेरी उम्र १८ साल थी। लेकिन उस उम्र में भी मैं जवान औरतों को मात दे रही थी। मेरे स्तनों का आकार तो सामान्य ही था लेकिन थे बहुत ही टाईट व तीखे। मेरा फिगर देखकर बड़े लोगों व बूढ़े लोगों का भी लण्ड खड़ा हो जाता था।

जब मैं कक्षा १० में थी तो तभी मैं और भईया अलग जोधपुर में रहने लग गये थे। भईया ने मुझे बड़े प्यार से पाला था।

एक दिन स्कूल से आकर मैने भईया से कहा- भईया स्कूल के वार्षिक फंक्शन में मैंने डांस करना है और ड्रेस कोड साड़ी है इसलिये मुझे साड़ी पहन कर जाना होगा, लेकिन मुझे साड़ी पहनना नहीं आता है और मेरे पास कोई अच्छी साड़ी भी नहीं है।

तो भईया कहा- अपनी नई साड़ी पहन लो !

मैंने कहा- हाँ ! लेकिन ब्लाउज और पेटीकोट तो मुझे नहीं आयेगे !

भईया ने कहा- ठीक है तेरे लिये बाजार से नया ब्लाउज और पेटीकोट ले आउँगा।

मैने कहा- ठीक है भईया ! पर पहले आप मुझे साड़ी पहनना सिखा दीजिये। जिस पर भईया ने मुझको साड़ी लाने को कहा। तो मै भाग कर कमरे में गई और साड़ी लेकर आई। मैंने उस समय टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी। मैने अपना टी-शर्ट उपर कर दिया तो मेरा गोरा पेट भईया की आंखो के सामने था। मेरा गोरा पेट देखकर भईया की आंखो में वासना चमकने लगी, उसके मन में बुरे बुरे ख्याल आने लगे। उसने धीरे से मेरे पेट पर हाथ फिराया तो मैं हंसने लगी।

भईया ने कहा- हंस क्यो रही हो?

मैं बोली- कुछ नहीं ! ऐसे ही ! गुदगुदी हो रही है।

भईया ने मेरे कमर पर साड़ी लपेटी लेकिन कपड़े पहने होने के कारण साड़ी मेरे बदन पर ठीक नहीं हो पा रही थी।

भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! तुम अपने कपड़े, अपनी पैन्ट उतारो !

मैने कहा- क्यों?

तो भईया ने कहा- इसलिये, क्योंकि साड़ी ठीक से नहीं आ पा रही है।

तो मैंने अपनी पैन्ट उतार दी। उस समय मैने गुलाबी रंग की पेन्टी पहनी थी। मै अपने भाई के सामने पेन्टी में थी।

मैंने कहा- जल्दी करो ना ! मेरे हाथ दुख रहे हैं क्योंकि मैं अपने हाथो से अपना टी-शर्ट उपर किये हुए खड़ी थी।

भईया ने मुझे कहा- तुम अपना टी-शर्ट उतार दो तो मै तुम्हें साड़ी पहना सिखाउंगा।

तो मैने अपने बटन को खोल कर टीशर्ट उतार दिया। अब मैं केवल ब्रा और पेन्टी में ही थी। भईया खड़ा रह कर मेरे बदन के आस पास साड़ी लपेटने लगा। भईया का हाथ मेरे बदन पर बार बार छू रहा था। जैसे तैसे भईया मुझे साड़ी पहनाई। फिर भईया ने कहा- देखो अंकिता जाकर आईने में ! साड़ी ठीक से बन्धी है या नहीं।

मै अपने कमरे में गई तथा आईने में अपने आप को देखने लगी। जब भईया बेडरूम में आया तो मै केवल ब्रा और पेन्टी में थी तथा केवल एक साड़ी लपेटे हुए थी।

तभी भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात कहूं? तुम्हारा एक स्तन छोटा और एक बड़ा है।

तो मैं गौर से देखने लगी, फिर बोली- नहीं दोनों बराबर हैं ! मैने अपना साड़ी का पल्लू हटा कर दिखाया।

तो भईया ने कहा- नहीं तुम्हें साड़ी पहनकर दिखाई नहीं दे रहा है।

मैने कहा- इससे क्या होगा?

तो भईया ने मुझे कहा- ये परेशानी तुमको तुम्हारी शादी के बाद आयेगी, जब तुम्हारा पति तुम्हारे दोनों स्तन बराबर नहीं पायेगा तो बड़ा नाराज होगा, और हाँ इससे तुम्हारी खूबसूरती भी कम हो जायेगी।

तो मैने कहा- भईया !अब मैं क्या करूँ? ये ठीक नहीं हो पायेंगे क्या?

भईया ने कहा- ठीक तो हो जायेगे लेकिन तुम्हें कहे अनुसार इलाज करना पड़ेगा और इसका इलाज केवल मालिश के द्वारा ही होगा।

तो मैने भईया से कहा- भईया ! आप प्लीज इसे ठीक कर दीजिये ना !

तो भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! तुम एक काम करो तुम साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट जाओ, मैं तुम्हारी अभी मालिश कर देता हूँ।

फिर मैं अपनी साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट गई। भईया ने अलमारी में से तेल की शीशी निकाली और बिस्तर पर मेरे पास आकर बैठ गया और कहा- तुम अपनी ब्रा उतार दो, नहीं तो तेल से खराब हो जायेगी।

मैने जल्दी से अपनी ब्रा को उतार दिया और अब मै मेरे भईया के सामने केवल पेन्टी में ही थी। भईया ने अपने हाथ में तेल ले कर फिर मेरे स्तनों पर लगाया और मेरे स्तनों की मालिश करने लगा। मैं अपनी आंखों को बंद किये हुए लेटी थी। भईया मेरे कच्चे और हल्के गुलाबी रंग के स्तन व उनके चूचुकों को मसल रहा था। पहली बार किसी लड़के ने मेरे स्तनों को हाथ लगाया था और वह मालिश कर रहा था। इस कारण से मुझे अजीब सा नशा छाने लगा।

तभी भईया ने मेरे गुलाबी चूचुक को अपने अंगूठे व उंगली के बीच में लेकर जोर से दबा दिया तो मै जोर से बुरी तरह चिल्ला उठी और बोली- आ आआ हहहहहहहह भईया इतनी जोर से नहीं ! आराम से !

इसके बाद तो मै अपने होश खोती जा रही थी तथा आसमान में उड़ने लगी थी लेकिन मेरा कोई गलत काम का मन नहीं था। लेकिन भईया मुझको पूरी तरह तैयार करके चोदने में मूड में था। करीब २० मिनट मालिश करने के बाद भईया ने मुझे कहा- अंकिता तुम्हारे स्तन अभी थोड़े ठीक हुए हैं लेकिन अगर तुम बुरा न मानो तो मैं तुम्हारी पूसी भी देख लूँ ताकि उसमें भी कोई परेशानी तो नहीं है।

तो मैने कहा- इसमें पूछने की कोई बात नहीं ! आप मेरे भईया है आप मेरा बुरा थोड़े ही करेंगे।

भईया उस समय भी कपड़े पहने हुए थे। मैने देखा कि भईया के कपडो पर भी तेल लग गया है। भइया उठे और अपने कपड़े निकाल दिये। मैने पूछा तो कहा कि मेरे कपड़ों पर तेल लग गया है, बदलने है। अब भईया मेरे सामने सिर्फ अन्डरवीयर में थे।

मैने भईया से कहा- भईया ! आप अपना अण्डरवीयर निकाल दो, नहीं तो ये भी गन्दा हो जायेगा।

तो भईया ने जल्दी से अपनी अण्डरवीयर उतार दी। भईया का लण्ड में लहराने लगा तो मैने भईया से पूछा- ये क्या है?

तो उसने कहा- यह लन्ड है और अंग्रेजी में इसको पेनिस कहते है और हम दोनो इसी पेनिस की वजह से इस दुनिया में आये हैं।

मैने पूछा- इससे क्या होता है?

भईया ने कहा- इससे चूत की शेप और साईज ठीक किया जाता है।

तो मैने मासूमियत से कहा- भईया ! क्या आप मेरी चूत की शेप भी ठीक करेंगे?

वह बोला- हाँ ! लेकिन पहले मैं यह देख तो लूँ कि तुम्हारी चूत ठीक है भी या नहीं ?

यह बोलकर उसने मुझे मेरी पेन्टी उतारने को कहा तो मैंने अपनी पेन्टी उतार दी। फिर भईया ने मेरे दोनों पैर फैला दिये और मेरी कुँवारी चूत को गौर से देखने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि आज अपनी इस कुँवारी और नादान और भोली भाली लड़की की सील तोडने को मौका मुझे मिला हैं। ये बात मुझे भईया ने बाद में बताई जो लिखी।

मैने पूछा- भईया आप क्या देख रहे है?

तो वो बोला- अंकिता ! तुम्हारी चूत का साईज बहुत छोटा है इसे बड़ा करना पडेगा !

मैने कहा- जल्दी से इसको बड़ा कर दो।

तो भईया ने कहा कि पहले मैं इस चूसूंगा, उसके बाद भईया ने अपनी जीभ मेरे नीचे डाल दी और चूसने लगा।

मेरी तो हालत ही खराब हो गई और मैं मस्ती के मारे आहह आहहहहहह आअ अ आ आ आ आहहहहह ओइइइइइइइ सीईइइइ आहहहहह करने लगी।

भईया ने कहा- मजा आया?

तो मैने कहा- बहुत ! और करो भईया !

काफी देर चूसने के बाद भईया ने कहा- अंकिता ! अब मुझे तुम्हारी चूत में अपना लण्ड घुसाना पड़ेगा पर मेरा लण्ड अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है तुम इसे खड़ा करने में मेरी मदद कर दो।

उसके बाद जैसे भईया ने कहा, मैं वेसा करने लगी। उसके लण्ड को चूमने लगी, मुँह में लेकर आगे पीछे करने लगी, चूसने लगी तो भईया भी मेरी तरह करने लगे और वो बोलने लगे ओ मेरी प्यारी बहन अंकिता ! आहहहहहहहह क्या जादू है तेरे गुलाबी होठो में ! जोर से चूस मेरी रानी ! और चूस ! मेरा मुँह में ले ले मेरा आज तू ! आहहहहह !

जब भईया का लण्ड पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया तो उसने मेरी दोनो टांगो के बीच में अपना मोटा लण्ड रखकर थोड़ी क्रीम लगाई मेरी चूत के अन्दर तक ! भईया ने १०० ग्राम क्रीम की शीशी को पूरी की पूरी मेरी चूत के ऊपर और अन्दर तथा अपने लण्ड पर लगा दिया और बोला- मैं तेरी चूत में अपना लण्ड डाल रहा हूँ !

और उसके बाद भईया ने एक जोरदार धक्का मारा, लण्ड पूरा मेरी चूत में एक बार में ही घुस गया, मेरी तो सांस ही अटक गई, मेरे मुँह से एक जोरदार तेज चीख निकली, मै रोने लगी और रोते हुए बोली- मार डाला ! मर गई रे ! मेरी चूत फट गई भईया ! उफफ नहीं, अपना लण्ड बाहर निकालो भईया ! मुझे अपनी चूत सही नहीं करवानी है, इसे बाहर निकालो !

लेकिन भईया ने मेरी एक नहीं सुनी और मेरे मुँह पर हाथ रखकर दूसरे हाथ से मेरे स्तन पकड़ कर मसलते हुए अपना लण्ड आगे पीछे करने लगे।

कुछ देर बाद मुझे थोड़ा आराम मिला तो भईया ने पूछा- अंकिता अब अच्छा लग रहा है ना !

तो मैने कहा- भईया ! बहुत मजा आ रहा है, जरा जोर से धक्के मारो मेरी चूत में !

और भईया जोर से मेरी चूत में झटके मारने लगे। अब भईया को और मुझको दोनों को मजा आ रहा था और हम दोनों सिसकियां ले रहे थे।

मैं भईया को कहने लगी- भईया ! आज तक तुमने मेरा इलाज क्यों नहीं किया? अब डालो ! जोर से डालो ! मारो जोर से झटके मारो भईया। भईया अब जोर जोर से झटके मारने लगे मै सातवें आसमान पर थी तथा मुझे मेरी चूत की चुदाई से त्रिलोक नजर आने लगा था और मैने भईया को कहा कि भईया मेरे चूत से कुछ निकलने वाला है !

भईया बोला- अंकिता ! ये तुम्हारी जवानी और चूत का रस है जो आने वाला है, अब मै भी तुम्हारे साथ आने वाला हूँ।

तभी मेरी चूत ने जोर की पिचकारी छोड़ी और मुझे बहुत मजा आने लगा। पहली बार मेरी चूत ने किसी लड़के के लन्ड से अपना रस छोड़ा था, अति आनन्द और मजे से मैं सीसीयाने लगी और एक तेजी खुशी की चीख निकली। और इसी के साथ में धडाम हो गई, मैं असमान की बुलन्दियों से कटी पंतग की भांति जमीन पर गिरने लगी।

तभी भईया का लण्ड मेरी चूत में फ़ूल कर झटके मारने लगा। मुझे फिर मेरी चूत में कुछ गरम गरम सा गिरता प्रतीत हुआ, ऐसा लगा किसी ने कोई गरम गरम चीज मेरी चूत में डाल दी हो। भईया ने मेरी चूत में अपना वीर्य निकाल दिया। जब मैं खड़ी हुई तो मुझे भईया का सहारा लेकर खड़ा होना पड़ा।

खड़ी होने पर भईया का वीर्य मेरी चूत से निकल कर मेरी जांघों पर बहने लगा तो मैने भईया से पूछा- यह क्या है?

तो वह बोला- यह पीने से ताकत आती है, तुम्हारी बॉडी सही हो जायेगी।

मैने अपने हाथ से अपनी जांघों तक आये हुए भईया के वीर्य को अंगुलियो पर लिया और चाट गई। मुझे पहले अजीब पर बाद में बहुत अच्छा लगा।

बाद में भईया ने पूछा- अंकिता मजा आया?

मैंने कहा- हाँ भईया ! आया ! लेकिन एक वादा करो कि आप ऐसे ही रोज मेरा इलाज करोगे।

भईया ने कहा- हाँ करूंगा, पर उसके लिए तुम्हें मेरी पत्नी बनना पड़ेगा, फिर मैं तुम्हारा हर समय इलाज करता रहूंगा।

मै मुस्कुरा दी और कहा- हाँ जी बनूंगी।

भईया कहा- अरे 'हाँ जी' क्यों कहा?

मैने कहा- अब आप मेरे पति हैं और लडकियाँ अपने पति का नाम नहीं लेती है न !

जंगल में मंगल

इलाहबाद के होटल में एक ही रात में तीन बार मेरी गाण्ड मारने के बाद बड़े जीजाजी को एक सप्ताह तक फ़िर मेरी गाण्ड मारने का मौका ना मिल सका। उन्होंने कई बार मौका निकाला पर वह सफ़ल नहीं हो सके।

हालांकि मुझे गाण्ड मराने में आनन्द तो आया था परन्तु मुझे यह सब अच्छा नहीं लगा था। मन में डर भी था। सेक्स के बारे में मुझे उस समय कोई जानकारी भी नही थी । पहली बार मैंने मुत्तु (लण्ड) और गांड का ऐसा उपयोग होते देखा था। गाण्ड के छेद में लण्ड घुसने पर मुझे बड़े जोर का दर्द होता था तथा टायलेट में भी तकलीफ होती थी इसलिए गांड मराने में मजा आने के बाद भी मैं बड़े जीजाजी से बच के रहता था पर वह कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने मौका निकाल ही लिया।

जंगल की सैर कराने के बहाने वह मुझे अपने साथ जंगल ले आए। सुबह सुबह वह और मैं जीप से जंगल के लिए निकले। करीब चार घंटे के सफर के बाद हम जंगल में उनकी ड्यूटी-पॉइंट पर पहुँचे। यह बड़ी ही खूबसूरत जगह थी। बीच जंगल में उनके रहने के लिए दो वृक्षो पर जमीन से करीब दस फीट ऊपर लकड़ी का दो कमरों वाला मकान बना था, जिसमें उपयोग के लिए सभी सामान था। बड़े जीजाजी जब भी जंगल में रहते वह इसी काष्ठ-घर में रुकते थे।

उन्होंने अपनी सेवा के लिए दो छोकरे रख रखे थे उनमें से एक नेपाली था तथा एक आदिवासी, लेकिन दोनों ही चिकने और आकर्षक थे। नेपाली का नाम शिव था तथा आदिवासी लड़के का नम शायद मथारू था। उनकी चाल ढाल देख कर ही मुझे लगा कि जीजाजी ने गांड मारने के लिए ही इन्हें रख रखा है।

जंगल में पहुँच कर जीजाजी ने दोनों से खाने की व्यवस्था करने को कहा तथा मुझे लेकर वह ऊपर कमरे में आ गए। आते ही वह बोले- योगेश तुम नहा कर तैयार हो जाओ।

मैं नहाने के लिए बाथरूम में चला गया पर वहां दरवाजा नहीं था, सिर्फ़ एक परदा लगा था। मैं नहाने लगा, तभी जीजाजी भी वहां आ गए। उन्होंने मुझे पकड़ कर मेरी चड्डी उतार दी तथा मेरी पीठ, जांघ और गाण्ड पर साबुन मलने लगे। बीच बीच में वह मेरी मुत्तु को भी सहला देते तथा मेरे गाण्ड के छेद में भी साबुन भर कर उंगली डाल देते।

मुंह पर साबुन लगा होने के कारण मेरी आँखें बंद थी। मैंने महसूस किया कि जीजाजी भी पूरी तरह नंगे हैं तथा मेरा हाथ पकड़ कर वह अपने लण्ड को सहला रहे हैं। मैंने पहली बार उनका लण्ड पकड़ा था। उसकी लम्बाई और मोटापन महसूस कर मैं डर सा गया कि इतना बड़ा और मोटा लण्ड कैसे मेरे छोटे से छेद में घुस जाता है।

जब उनका लण्ड पूरे जोश में आ गया तो उन्होंने थोड़ा और साबुन मेरे गाण्ड के छेद में लगा दिया तथा अपने लण्ड को मेरे छेद से टिका दिया।

उन्होंने एक जोर का धक्का दिया लण्ड का सुपारा अब मेरी गांड के अन्दर था। दर्द के मारे मेरी चीख निकल गई। बेरहम जीजाजी ने मेरी गाण्ड को थोड़ा सा दबाया और दोनों दोनों फांको को फैला कर छेद में अपना पूरा लण्ड घुसेड़ दिया तथा धीरे धीरे धक्के लगाने लगे।

थोड़े दर्द के बाद अब मुझे भी मजा आने लगा। जीजाजी पूरे जोश में थे। मुझे घोड़ा बनाकर लगातार लण्ड अन्दर बाहर कर रहे थे। बाथरूम फच फच की आवाज़ से गूँज रहा था। १५ मिनट बाद उन्होंने पिचकारी मेरे गाण्ड के छेद में ही छोड़ दी। उन्होंने ही मेरी गाण्ड साफ की तथा नहलाया। नहाने के बाद उन्होंने पूछा- योगी मजा आया। में शरमा गया, कोई जवाब नही दिया।

इसी बीच शिव और मथारू ने खाना तैयार कर लिया था। खाना खाने के बाद जीजाजी ने थोड़ी देर आराम किया। मुझे भी अपने पास लिटा कर मेरे लण्ड को सहलाया तथा उसे मसला भी। मेरे गाण्ड के छेद में उंगली डाली, मुझे मजा तो आ रहा था पर न जाने क्यूँ यह सब मुझे बहुत अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। वह पूरी तरह तन्नाया हुआ था।

उन्होंने मेरे मुत्तु को मसला तथा फिर मुझे तिरछा कर मेरी चड्डी नीच खिसका दी और मेरे गाण्ड के छेद में उंगली करने लगे। फिर उन्होंने कोई तेल मेरे छेद पर मला तथा अपने लण्ड पर भी लगाया। तिरछा लेटे होने के कारण वह मेरी गांड में अपना लण्ड नहीं घुसा पा रहे थे। उन्होंने मुझे पलट कर उल्टा कर दिया तथा वह मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गए। मेरे दोनों गाण्ड को मसला तथा उन्हें फैला कर मेरी गांड के छेद में एक जोर का धक्का मार कर एक ही बार में पूरा का पूरा लण्ड घुसेड़ दिया।

मैं दर्द से बिलबिला उठा। मेरी चीख निकल गई पर वह नहीं माने। वह लगातार धक्के पर धक्के मरे जा रहे थे। मुझे मजा तो आने लगा पर मेरे आंसू भी भी निकले। करीब १५ मिनट बाद वह झड़ गए और सारे का सारा रस मेरे गाण्ड के छेद में ही निकाल दिया।

जंगल में जीजाजी का चार दिन रुकने का प्रोग्राम था। दो घंटो में ही उन्होंने दो बार मेरी गांड मार ली। मैंने मन ही मन हिसाब लगाया कि यदि जीजाजी ने इसी रफ्तार से मेरी गांड मारी तो मैं तो मर ही जाऊंगा। उनका मोटा लण्ड घुसते समय बड़ा दर्द देता था तथा मेरी गांड से खून भी निकाल आता था। लेकिन मेरे पास कोई चारा नहीं था चुपचाप गांड मराते रहने के।

पहले ही दिन संध्या समय तक जीजाजी ने एक बार मेरी गांड और मारी तब वह मुझे जंगल की सैर कराने ले गए। जंगल काफी खूबसूरत था। प्राकृतिक सुन्दरता, हिरण, बारहसिंगे, नीलगाय और मोर देख कर मन खुश हो गया। लौटते लौटते रात के आठ बज गए। खाना तैयार था। हमने खाना खाया और मैं सोने के लिए लेट गया। मैं बहुत थक भी गया था। पर जीजाजी तो मेरी गांड का भुरता बनाने पर तुले थे। उस रात उन्होंने चार बार और मेरी गांड मारी। मेरी गांड का छेद फूल कर कुप्पा हो गया। पर मैं कर भी क्या सकता था। जंगल में मेरी सुनने वाला भी कोई नहीं था। वैसे भी मैं यह सब किसी से कह भी नहीं सकता था।

घर की बात है

अब मैं आपको अपने बारे में बता दूँ। मेरा नाम अमित है और मैं 19 साल का हूँ। मेरे घर में 4 सदस्य हैं। मेरी मम्मी और पापा और मैं और मेरी बहन रेखा। यह कहानी मेरे और मेरी बहन के बीच हुए सेक्स की कहानी है।

अब मैं आपको अपनी बहन के बारे में थोड़ा बता दूँ। वो 20 साल की है और बहुत सेक्सी है। बिलकुल रान्ड लगती है। उसका फ़िगर 34-26-38 है। मैं जब भी उसे देखता हूँ तो मेरा लन्ड फ़ुदकने लगता है। मेरा लन्ड हमेशा उसको चोदने को तड़पता रहता। लेकिन वो मेरी बहन है इसलिये अपने हमेशा मुठ मार के रह जाता। लेकिन जब से मैंने अन्तर्वासना को पढ़ना शुरु किया तो मुझे लगा कि बहनों को चोदने में कोई बुरी बात नहीं है। आखिर वो भी तो लड़की है, उसे भी तो एक लन्ड की जरुरत है, फ़िर चाहे वो लन्ड़ उसके भाई का ही क्यों न हो।

फिर मैंने अपना मन बदला और अपनी बहन को चोदने का मौका खोजने लगा। इसी बीच मुझे जब मौका मिलता तो मैं रेखा की ब्रा और पैन्टी पहनकर घर में घूमता। ऐसा करने में मुझे बड़ा मजा आता है। (कभी आप भी करना)

एक दिन जब घर पर कोई नहीं था तो मैंने सोचा कि चलो रेखा की ब्रा और पैन्टी पहनते हैं। मैं ब्रा और पैन्टी पहनकर घर में घूम रहा था कि तभी अचानक रेखा आ गई। मैं दो मिनट के लिये स्तब्ध रह गया और मेरे होश उड़ गये थे। रेखा मुझे देखती जा रही थी और मुझे लगा कि अब मेरी पोल खुल गई। लेकिन जैसा मैंने सोचा वैसा हुआ नहीं, रेखा तो जोर जोर से हँस रही थी।

मुझे थोड़ा अटपटा लगा और मैं कमरे में भाग गया। थोड़ी देर के बाद मैं उसके कमरे में उसकी ब्रा और पैन्टी देने गया। वहा मैंने देखा कि वो अपने कपड़े बदल रही है। रेखा की पीठ बिल्कुल नंगी थी।

मुझे देखकर उसने कहा- अच्छा हुआ कि तुम आ गये, मुझे मेरी ब्रा और पैन्टी चाहिये थी !

फिर उसने मुझ रोका और पूछा- तुम मेरी ब्रा और पैन्टी क्यों पहनते हो?

मैंने कहा- बस यूँ ही ! मुझे अच्छा लगता है तुम्हारे कपडे पहनना, लेकिन तुम माँ से कुछ मत कहना !

रेखा ने कहा- नहीं कहूँगी, लेकिन मुझे एक बात बताओ- क्या तुम्हें सिर्फ़ मेरी ब्रा-पैंटी ही अच्छी लगती है, मैं नहीं?

मैंने कहा- नहीं ऐसी बात नहीं है, तुम तो मेरी बहन हो, और बहन तो सभी को अच्छी लगती है।

रेखा ने कहा- अच्छा, तो तुम मेरा एक काम करोगे?

मैंने कहा- कौन सा काम?

फिर रेखा काफ़ी देर तक खामोश रही और थोड़ी देर बाद बोली- यह काम तुम कर सकते हो, लेकिन शायद तुम नहीं करोगे !

मैंने कहा- तुम कहो तो जरा ! तुम मेरी बहन हो और तुम्हारा हर काम मैं करुंगा, मैं तुम्हारी राखी का फ़र्ज निभाउंगा।

यह कहकर मैंने माहौल को हल्का करने की कोशिश की। लेकिन मुझे विश्वास नहीं हुआ जो उसने कहा।

रेखा ने मुझ से कहा- क्या तुम मुझे चोद सकते हो? अभी !

यह सुनते ही अचानक मैं डर गया और मैं रेखा से थोड़ा दूर हो गया।

मैंने कहा- यह क्या कह रही हो तुम? तुम मेरी बहन हो और कोई भी भाई अपनी बहन को नहीं चोदता है !

रेखा हँसते हुए बोली- अपनी बहन की ब्रा और पैन्टी पहनते हुए तो तुम्हें यह ख्याल नहीं आया कि मैं तुम्हारी बहन हूँ?

मैंने थोड़ा ठण्डे दिमाग से सोचा कि रेखा सही कह रही है और ऐसा मोका मुझे फिर नहीं मिलेगा। फिर भी मैंने यूँ ही कहा कि यह गलत है।

उसने कहा- इसमें कोई बुराई नहीं है, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, घर में कोई नहीं है, तेरे पास लण्ड है और मेरे पास चूत है ! जल्दी कर मेरे भाई ! लूट ले आज अपनी बहन की इज्जत !

रेखा के इतना सब कहने पर भी मैंने उससे कहा- मैं यह नहीं कर सकता, तुम मेरी बहन हो।

और इतना कहने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और मैं अपने आप को कोसता रहा कि मैंने अपनी बहन को चोदने का सुनहरा मौका खो दिया। लेकिन कुछ देर बाद मेरे कमरे के दरवाजे के नीचे से एक कागज (चिठ्ठी) आया। उस पर कुछ लिखा था, जिसे पढ़कर मुझे बहुत गुस्सा आया।

उस पर लिखा था- मेरे प्यारे भैया अमित, आज आपने यह साबित कर दिया कि आप कभी किसी लड़की को नहीं चोद सकते, भले ही वो आपकी बहन ही क्यों ना हो ! क्योंकि आप नपुंसक हो। आप में वो ताकत ही नहीं है जिसकी एक लड़की को जरुरत होती है। मुझे यह कहने में ज़रा भी शर्म नहीं कि मेरा भाई नामर्द है।

यह पढ़कर मेरे अन्दर का भाई मर गया और एक जानवर जाग गया। मैं रेखा के कमरे में गया। रेखा अपने बेड पर लेट कर किताब पढ़ रही थी। मुझे देखकर वो खड़ी हो गई और मुझसे पूछा- तुम वापस क्यों आये? मैंने कहा- मैं तुम्हारी चिठ्ठी का जवाब देने आया हूँ!

और इतना कहकर मैं रेखा के पास गया और उसके बाल पकड़कर खींचे और जैसे ही वो चिल्लाई तो मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिये। हम दोनों के होंठ आपस में लगभग 10-15 मिनट तक चिपके रहे। हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं अपनी बहन को चूम रहा हूँ और उसके होंठ चूस रहा हूँ।

थोड़ी देर बाद हमारे हम एक दूसरे से अलग हुए। फिर मैंने उसके पीछे जाकर उसकी शर्ट फाड़ दी, अब उसकी काली ब्रा साफ नजर आ रही थी। इतने में रेखा ने अपना हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया, और मेरा लन्ड निकाल लिया। मेरा लन्ड के बाहर आते ही मैंने कहा- यह ले मेरी प्यारी बहन ! देख ले अपने नामर्द भाई का लन्ड !

इस पर रेखा बोली- ऐसा मत कहो भाई, मैंने तो सिर्फ़ तुझे उकसाने के लिये ही ऐसा कहा था, ताकि तू अपनी बहन को चोदे और मुझे मेरे भाई का लन्ड चूसने को मिले !

मैंने कहा- ठीक है, अब चूस ले जितना चूसना है अपने भाई का लन्ड।

और रेखा मेरे लन्ड को चूसने लग गई। रेखा मेरे लन्ड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई आइसक्रीम खा रही हो। कुछ देर तक वो मेरा लन्ड ही चूसती रही। थोड़ी देर बाद मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये और खुद भी नंगा हो गया। नंगे होने के बाद रेखा मुझसे बोली- भैया, मेरी चूत में खुजली हो रही है, मेरी चूत की खुजली मिटाओ ना !

मैंने कहा- अभी लो बहना !

फिर मैंने उसकी चूत चाटना शुरु किया, आह ! आह क्या मुलायम चूत थी रेखा की ! मजा आ गया अपनी बहन की चूत चाटकर तो। चूत चाटने के बाद मैंने उसके स्तन दबाने शुरु किये और उनको चूसने लगा। जब मैं उसकी चूत चाट रहा था और स्तन दबा रहा था तब वो सिसकियाँ ले रही थी कुछ इस तरह से- आहऽऽ ऊ...ऊ...ऊ......ऊ आह ... आउच... आह...... ऊ... ऊ............आउच !

उसकी सिसकियों से पूरा कमरा गूंज रहा था। कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा। लेकिन फिर रेखा बोली- भाई, अब बहुत हो गया चाटना-चटाना, अब असली काम शुरु करो !

फिर मैं वो काम करने के लिये तैयार हुआ जो दुनिया का कोई भी भाई करना नहीं चाहता, लेकिन जब आपकी बहन ही आपके सामने अपनी दोनों टांगें खोलकर बैठ जाये तो आप कर ही क्या सकते हैं, इसलिये मैं मजबूर था और मैंने अपना लन्ड डाल दिया अपनी बहन की चूत में !

और रेखा जोर चिल्लाई- आह......आउच.........आह...............ऊ...।

फिर मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु किये और वो सिसकियाँ लेने लगी।

मैंने रेखा से पूछा- मेरी प्यारी बहना, मेरी रन्डी बहना, मजा आ रहा है ना अपने भाई से चुदने में?

रेखा बोली- हाँ, मेरे बहनचोद भाई, मजा आ रहा है !

इसी बीच मेरे धक्कों की स्पीड बढ़ती जा रही थी और उसकी सिसकियों की भी।

मैंने रेखा से पूछा- रन्डी रेखा, लगता है तुम्हें चुदने का काफी अनुभव है। कितनों से चुदवा चुकी हो अब तक?

रेखा बोली- 10 या 15 जनो से चुद चुकी हूँ अब तक !

मैंने कहा- 10-15 ? तुम क्या रन्डी बनना चाहती हो?

रेखा बोली- हाँ भैया, लेकिन ये बातें बाद में करेगे, अभी तो तुम मुझे जोर-जोर चोदो और फाड़ दो मेरी चूत को ॰

फिर मैंने अपने धक्कों की गति दोगुनी कर दी और रेखा को जोर-जोर चोदने लगा। रेखा भी जोर-जोर चिल्ला रही थी- चोद, मादरचोद, बहनचोद चोद अपनी बहन को ! आज फाड़ दे अपनी बहन की चूत को, आह... ...आउच......... आह............... ऊ... मेरे प्यारे भैया ! चोद, चोद, चोद, फाड दे............

फिर लगभग 25-30 मिनट बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। काफी देर तक हम एक दूसरे से चिपके रहे। थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और हम दोनों ने एक दूसरे को देखा। तभी रेखा हँस पड़ी। रेखा के हँसने से मेरे दिल का बोझ कम हो गया। रेखा ने मेरे होठों पर चूमते हुये कहा- भगवान, मेरे जैसा भाई सभी को दे !

लेकिन फिर उसने मुझे उदास देखते हुये कहा- भैया, इस बारे में ज्यादा मत सोचो, ये तो "घर की बात है।"

फिर मैं भी हँस पडा और बाजार जाकर आई-पिल लेकर आया ताकि वो माँ ना बन जाये। इस तरह हम भाई-बहन की पहली सेक्स कहानी खत्म हुई।

Raja Ka Farman

इस स्वप्न में मैं एक ऐसे देश में पहुँच गई हूँ जहाँ का राजा बहुत ही क्रूर और कामोत्तेजित है, उसके देश में लड़कियाँ जैसे ही जवान होती हैं, उन्हें राजा के पास एक महीने के लिए भेज दिया जाता है और वो उनका कामार्य भंग करता है, उन्हें भोगता है और एक महीने बाद उन्हें अपने घर वापिस भेज देता है।

यदि कोई लड़की उसके बाद माँ बनती है, तो उसकी महल में वापसी राजा की रखैल के रूप में होती है वो वहाँ बच्चे को जन्म देने और चालीस साल पार करने के बाद दासी बन कर रहती है, जो कोई परिवार अपनी बेटी को राजा से भोग लगवाने नहीं भेजता, उसकी बेटी उठवा ली जाती और उसकी बाज़ार में बोली लगवाई जाती, जो उसे खरीदता वो सबके सामने उसे चोदता, खसोटता और उसे अपनी नोकरानी बना कर रखता अपने ख़ास आदमियों से उसे चुदाता और जब मन भर जाता तो फिर किसी को बेच देता!!

इस तरह जब मैंने वहाँ कदम रखा तो बहुत से मर्द मुझे बेचैन निगाहों से देखने लगे मेरे आसपास मंडराने लगे कोई मेरी गाण्ड छूकर चला जाता तो कोई फबतियाँ कसता यह कहते हुए कि आज तुझे रखैल नहीं, अपनी रानी बनाऊँगा।

एक ने तो हद ही कर दी, पीछे से आते हुए मेरी अन्तःचोली कपड़ों के भीतर से ही खोल दी !!! वहाँ कहीं जाकर चोली फिर से बंद करने की जगह नहीं थी तो मैं कुछ आगे बढ़ी, चलने से मेरी चूचियाँ हिलने लगी, तो एक आदमी सामने से आया और कहने लगा- तुम से नहीं संभल रही तो मैं थाम लूँ !!

उस पर मैंने उस आदमी पर हाथ उठा दिया, उसने हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी और खींच कर दूसरे हाथ से मेरी चूचियाँ मसल दी।

तभी वहाँ खड़े भूखे मर्द मेरी और बढ़ने लगे और बोले- आओ, इसे राजा के पास ले जाते हैं ! खूब बड़ा इनाम मिलेगा !

और सभी मुझे पकड़ कर राजा के दरबार में ले गए, दरबार बहुत बड़ा था, वहाँ बहुत सी दासियाँ थी, सभी दासियाँ अधनंगी थी, आते जाते मंत्री, तंत्री, रक्षक उन दासियों को छेड़ रहे थे, उनका बदन मसल रहे थे, बहुत कामुक माहौल था।

राजा ने सुनवाई शुरू की तो एक रखैल राजा की गोद में आ बैठी। राजा ने उसके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और सुनवाई करते करते अपना लण्ड चुसवाने लगा।

सभी मंत्री इतनी सारी नंगी औरतों को देख कर अपना लण्ड अपने हाथों से मसल रहे थे।

तभी मेरी सुनवाई की बारी आई, बाहर हुई घटना विस्तार में बताई गई।

सब कुछ सुनकर राजा ने पूछा- इतना गुरूर किस बात का तुझे लड़की...? आखिर ऐसा क्या है तेरे पास? ये चूचियाँ? यह गाण्ड? यह चूत? ये तो हर औरत के पास होती है और इस देश में औरतों की कमी नहीं ! मेरी एक आवाज़ पर यहाँ चूतों की कतार लग जाती है।

तभी वो अपनी रखैल को

चूमने लगा और उसने अपनी रखैल को कुछ इशारा किया और ताली बजाई।

रखैल उसके पैरों के पास लेट गई और हवा में टांगें करके उसने अपनी टांगें खोल के चूत उसके सामने पेश कर दी। देखते ही देखते बीस-पच्चीस रखैलें आई और अपनी टांगें खोल कर हर मंत्री के सामने चूत पेश करने लगी !!

मंत्रियों के मसलते लण्ड फुफकारने लगे, और सभी ने रखैलो की चूतों में अपने अपने लण्ड घुसा दिए और चुदाई करने लगे।

राजा ने पूछा- अब बोल लड़की !

मैं शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी, मैंने राजा से जबान लड़ाई- आप यह सब क्यों कर रहे हैं...?

राजा बोला- ताकि तुझे तेरी औकात पता लगे कि तुम औरतें सिर्फ मर्दों से चुदने और चूसने-चुसवाने के लिए पैदा होती हो ! हाथ उठाने के लिए नहीं, और अगर हाथ उठ भी जाता है तो भी लण्ड के लिए उठना चाहिए...!!!

कहते हुए राजा ने फैसला सुनाया- आज से लेकर कल इसी समय तक तेरी लगातार चुदाई होगी और वो भी भरे महल में..!!!

राजा: सिपाहियो ले जाओ इस लड़की को और तैयार करो हमारे लिए ! इसकी अक्ल तो हम ठिकाने लगायेंगे, आजकल बहुत पर निकल आए हैं इन रांडों के !!

मुझे महल में ले जाया गया और स्नानघर में ले जाकर एक तालाब में कपड़ों समेत धकेल दिया गया। फिर सिपाही भी नंगे हो अन्दर उतर आए और मेरे बदन को धोने के बहाने मसलने लगे।

एक ने मेरी चूत में ऊँगली डाल दी, एक ने गाण्ड में अंगूठा घुसा दिया और हाथों की उंगलियों और हथेलियों से मेरी गोल-गोल गाण्ड को मसल कर मज़े लेने लगा।

एक ने मेरे चूचे दबोच लिए और एक मेरा दाना हिला हिला के मुझे तड़पाने लगा।

मेरे मुँह से आनन्द भरी आहें निकलने लगी।

तभी एक ने मेरे मुँह में दो उंगलियाँ डाल दी, कोई भी अपने औजार का प्रयोग नहीं कर रहा था, क्यूंकि सबको पता था कि मैं राजा का माल हूँ, और मुझ में मुँह मारना यानि जान से हाथ धोना !

तभी राजा अन्दर आया और मुझे 5-6 सिपाहियों के बीच कसमसाता देख मजे लेने लगा। मैं आँखें बंद कर आहें भर रही थी, मेरी अन्तर्वासना जाग चुकी थी, आँखों में कामवासना भर चुकी थी।

तभी जाने अनजाने मेरे हाथ एक सिपाही के लण्ड तक जा पहुँचे, सिपाही झेंपते हुए पीछे हो गया यह सोच कर कि राजा को पता लगा तो लण्ड कटवा देंगे!

मैं चुदने को तड़पने लगी।

तभी राजा ने सिपाहियों को जाने का इशारा किया और मेरी कामतन्द्रा टूट गई।

राजा पानी में उतर आया और उसने मेरे कंधे पर जोर से काट खाया, मेरा खून निकलने लगा और मुझे अपनी ओर खींचा...

राजा : मैं जानता हूँ कि तू अब खुद के काबू में भी नहीं है...

मैं : जा जा ! तुझ में इतनी हिम्मत नहीं कि किसी औरत का सतीत्व बिना उसकी मर्जी के तोड़ सके ! इतनी हिम्मत होती तो क्या औरतों पर जुल्म करता? उन्हें मजबूर करके अपनी रखैल बनाता? अपने फरमान से प्रजा को दुखी करता?? नहीं, तू तो एक नपुंसक है, जब तेरी कोई भी पत्नी माँ नहीं बन सकी तो तूने बाहरी औरतों का शोषण किया, तेरे जैसा बुज़दिल और बेगैरत इन्सान मैंने आज तक नहीं देखा..!!

राजा : मैं बेगैरत..? मैं बुज़्दिल..? तो तू क्या है? रण्डियो की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व..!!!

मैं : वो तेरे आदेश का पालन कर रहे थे और अगर मैं साथ न देती तो तू उनका क़त्ल करवा देता ! मेरी वजह से किसी बेक़सूर की जान जाये, यह पाप मैं अपने सर नहीं ले सकती..!!

राजा : अच्छा !!!

यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा...

राजा : मैं बेगैरत..? मैं बुज़दिल..? तो तू क्या है? रण्डियो की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व..!!!

मैं : वो तेरे आदेश का पालन कर रहे थे और अगर मैं साथ न देती तो तू उनका क़त्ल करवा देता ! मेरी वजह से किसी बेक़सूर की जान जाये, यह पाप मैं अपने सर नहीं ले सकती..!!

राजा : अच्छा !!!

यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा...

उसने मेरी चूचियाँ थामने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिए, मैं दो कदम पीछे हो गई, राजा भी देखते ही देखते आगे आ गया।

मेरे मन में एक तरकीब सूझी, राजा जैसे ही और आगे बढ़ा, मैंने पानी के अन्दर ही उसके लण्ड पर दबाव बनाया, राजा मन ही मन खुश हो रहा था, तभी उसकी शरारत भरी मुस्कान, दर्द भरी कराह में बदल गयी, मैंने उसका लण्ड जो मरोड़ दिया था।

राजा लण्ड पकडे वहीं खड़ा रहा और मैं वहाँ से भाग निकली।

राजा ने मेरे पीछे सैनिक लगा दिए, मैं एक शयनकक्ष में जा घुसी, शयन कक्ष खाली था, मैंने परदे उतार कर जल्दी से अपना बदन ढका, और एक मूरत के पीछे छिप गई।

तभी दरवाजे पे दस्तक हुई...

सिपाही: महारानी जी, यहाँ कोई स्त्री आई है..??

मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था सो मैंने जवाब दिया.. अगर जवाब न देती तो वो सिपाही अन्दर चला आता .!!!

मैं कमरे के भीतर से : नहीं यहाँ कोई नहीं आया, तुम जाओ हम कुछ देर विश्राम करना चाहते हैं..!!

सिपाही: महारानी जी, क्षमा करें, महाराज का आदेश है...!!!

तब तक मैंने महारानी के वस्त्र पहन लिए थे और खिड़की की तरफ मुँह करके खड़ी हो गई और थोड़ा सा घूँघट भी निकाल लिया..

मैं : ठीक है, आ जाओ..

सिपाही कमरे में घुसा और कमरा तलाशने लगा, मेरे पास आया और सर झुका कर कहने लगा- क्षमा कीजिए महारानी जी ! यहाँ कोई नहीं है..!!

सिपाही के जाते ही मैं भी रानी के वेश में कमरे से बाहर निकली, ताज्जुब की बात तो यह थी कि कहीं पर भी कच्छी और ब्रा नाम की चीज़ नहीं थी, मैं महारानी के वस्त्रों में तो थी पर अन्दर से एकदम नंगी

! मेरे चूचे चलते-भागते हिल रहे थे, कि तभी मैं एक जगह जाकर छुपी..... और पकड़ ली गई।

जगह थी "वासना गृह"

वहाँ राजा नग्नावस्था में था, उसके आसपास उसकी बहुत सी रखैलें थी, एक की चूची एक हाथ में दूसरी की चूची दूसरे हाथ में, तीसरी छाती पर बैठी चूत चटवा रही थी, चौथी टट्टे चाट रही थी, पांचवी लण्ड

एक बार गाण्ड में लेती फिर उछल कर चूत में लेती।

परदे के पीछे से देख देख कर मैं अपना घाघरा उठा कर ऊँगली करने लगी, महारानी के कंगनों की आवाज़ से मैं पकड़ी गई।

राजा ने आपातकाल बैठक बुलाई, राज्य के सभी मर्दों को न्योता दिया गया, राजा नग्न अवस्था में ही बैठक में आया...

और राजा ने फरमान सुनाया- इस लड़की ने मुझसे चुदने से इनकार किया

है, इसलिए इसकी इसी दरबार में बोली लगेगी, ऐसी बोली जैसी आज तक किसी की नहीं हुई होगी। इस बोली के बाद इसका

इसी सभा में चीरहरण होगा, उसके बाद यह रखैल तो क्या किसी की दासी बनने के लायक भी नहीं रह

जाएगी, इसके चीर और यौवनहरण के बाद इसकी चूत और गांड सिल दी जाएगी, चूचे और जबान काट

लिए जायेंगे। और हाँ, बोली लड़की की नहीं उसकी जवानी की लगेगी, चूचे, गाण्ड, गदराया बदन, जांघें,

बाहें, होंठ, बगलें जिस्म के हर हिस्से की बोली लगेगी..!!!

राजा ने फरमान सुनाया- इस लड़की ने मुझसे चुदने से इनकार किया है, इसलिए इसकी इसी दरबार में बोली लगेगी, ऐसी बोली जैसी आज तक किसी की नहीं हुई होगी। इस बोली के बाद इसका इसी सभा में चीरहरण होगा, उसके बाद यह रखैल तो क्या किसी की दासी बनने के लायक भी नहीं रह जाएगी, इसके चीर और यौवनहरण के बाद इसकी चूत और गांड सिल दी जाएगी, चूचे और जबान काट लिए जायेंगे। और हाँ, बोली लड़की की नहीं उसकी जवानी की लगेगी, चूचे, गाण्ड, गदराया बदन, जांघें, बाहें, होंठ, बगलें जिस्म के हर हिस्से की बोली लगेगी..!!!

यह सुन कर तो मेरे होश उड़ गए..

अब और क्या होना बाकी है मेरे साथ...?

मुझे मन ही मन डर लग रहा था..!!!

यह सुन सभा में ख़ुशी से शोरगुल होने लगा, लोग ठहाके लगाने लगे, फबतियाँ कसने लगे, भीड़ में से आवाज़ आई- आज मज़ा आयेगा ! मैं अभी घर से अशर्फ़ियाँ उठा लाता हूँ !

मेरी तो हवा निकल रही थी कि अब जाने आगे मेरे साथ क्या होने वाला है, इससे पहले जो हुआ वो कम था क्या...!!!

कि अचानक आवाज़ आई..

राजा : बोली ठीक 15 मिनट बाद आरम्भ होगी ताकि आप सभी इस समय में इसके जिस्म का मुआयना कर लें और अपने हिसाब से बोली लगायें..!!!

मेरे जिस्म से कपड़े फाड़ कर फिंकवा दिए गए, लोगों की तो मौज हो गई।

तभी एक मंत्री ने राजा से अनुरोध किया- महाराज, क्या हम इसे छूकर देख सकते हैं? ताकि हमें भी भरोसा हो जाये कि जो माल हम खरीद रहे हैं उसमें किसी बात की कमी तो
नहीं..!!!

राजा : ठीक है छू लो !! आखिर ग्राहक को भी पता होना चाहिए कि जिस चीज की वो कीमत दे रहा है वो असल में क्या है और कैसा है..!!! हा ह़ा हा हा !!

मंत्री मेरी तरफ बढ़ चला, तो भीड़ से आवाज़ आई- मंत्री जी छुइएगा नहीं ! कहीं पानी न छोड़ दे राण्ड..!!!

एक और आवाज़ आई- और अगर छू भी रहे हैं जनाब, तो मसल डालियेगा ! और हाँ ! जिस्म का कोई अंग ना रहने पाए..!!!

यह सुन कर लोग ठहाके लगाने लगे..

मैं नंगी खड़ी पानी-पानी हो रही थी, मुझे अब तक केवल पाँच लोगो ने छुआ था, राजा और उसके सिपाहियों ने और अब छठे की बारी थी।

वो आया और आते ही उसने मेरे केशों में हाथ फेरा, फिर अचानक से बालों को खींच कर उसने मुझे धक्का दिया और भीड़ की तरफ मुँह करके बोला- क्यों कैसी रही?

सभी लोगों ने उसे वाह-वाही दी।

फिर वो मेरी तरफ बढ़ा, दोनों हाथों से मेरे चूचे थाम कर बोला- बहुत गरम माल है ! ऐसा लग रहा है कि हाथों में पिघल रहा है !

और मेरे चूचे बेदर्दी से मसलने लगा। चूचे पकड़ कर उसने यकायक मुझे अपनी ओर खींचा और मेरी गाण्ड पर ज़ोरदार तमाचे लगाने शुरू कर दिए, कहने लगा- नीचे से भी कड़क है !

फिर उसने मुझे ज़मीन पर धकेल दिया और दो सिपाही बुलवा कर मेरी टांगें हवा में खुलवा दी, मेरी चूत की फांकें खोल कर बोलने लगा- अरे कोई चोदो इस राण्ड को ! वरना पानी बहा बहा कर पूरा महल अपने काम रस से भर देगी...!!!

भीड़ से आवाज़ आई- हम भी तो उसमें डूबना चाहते हैं !

तभी

महामंत्री ने एलान किया- बोली शुरू की जाये !

पहली बोली महाराज की।

महाराज ने कहा- सबसे पहले होंठो की बोली, एक सौ सोने की अशर्फियाँ !

बोली बढ़ते-बढ़ते 2500 अशर्फियों तक पहुँची और फिर मेरे होंठ आखिरकार बिक गए, किसी साहूकार ने खरीदे थे।

साहूकार आगे आया और मेरे होंठो पर चूमने लगा, भरा दरबार मेरी लुट ती हुई इज्ज़त देख रहा था, मेरे होंठ चूसते हुए उसने अपनी जबान मेरे मुँह में डाल दी और मेरी गर्दन पकड़ ली।

सभी लोगों के मुँह में पानी आ रहा था, लार टपक रही थी।

फिर मेरी बगलों की बोली हुई, जिन्हें 1500 अशर्फियों में दो भाइयों ने खरीदा।

दोनों अपना लण्ड झुलाते, मेरे दोनों तरफ आ गए और दोनों ने अपने अपने लण्ड मेरी बगलों में घुसा दिए और घिसने लगे।

उधर साहूकार ने भी अपने फनफ़नाता लण्ड निकाला और सर की तरफ खड़े हो मेरा चेहरा अपनी ओर करते हुए अपना लण्ड मेरे मुंह में पेल दिया...

अब मेरे जिस्म पर तीन लण्ड थे।

फिर मेरे चूचों की बोली शुरू हुई।

महामंत्री ने मेरे चूचे 5000 अशर्फियों में खरीद लिए और आकर मेरी कमर पर बैठ मेरे चूचे चूसने लगे।

फिर मेरे हाथों की बोली लगी।

दो व्यपारियो ने मेरे हाथ खरीदे और अपने अपने लण्ड मेरे हाथों में मुठ मराने के लिए दे दिए।फिर बोली लगी मेरी गांड की !

दस हज़ार अशर्फियों में गाण्ड भी बिक गई।

गाण्ड का फूल कोमल था, उसे एक बलिष्ठ पहलवान ने खरीदा था।

वो आया और मुझे अपने
नीचे सीधा करके लेटा लिया। इस तरह कि मेरा चेहरा छत की तरफ हो।

अब मुझ पर सात लण्ड सवार थे, दो हाथों में, दो बगलों में, एक चूचों में, एक मुँह में और एक गाण्ड में !

और अब बारी राजकुमारी चूत की थी !

वो इतने लण्डों की वजह से रस चो चो कर बेहाल थी।

मैं जल्दी ही अपनी चूत में एक मोटा ताज़ा लौड़ा लेना चाहती थी।

मेरी इज्ज़त तो लुट ही चुकी थी, मैं सबके सामने नंगी हुई अलग अलग जगह से चुद रही थी, मैं खुद पर अपना नियंत्रण खो चुकी थी।

इतने मर्द मेरे जिस्म से लिपटे थे, मैं इसी सोच में थी कि मुझे सुनाई पड़ा- इसकी चूत आपकी हुई !

मैंने मुँह से साहूकार का लण्ड निकाला और चेहरा उठा कर इधर-उधर देखा तो क्या देखती हूँ,

चूत राजा ने खरीदी थी, वो भी दस-बीस हज़ार में नहीं, पूरे एक लाख अशर्फियों में !

राजा आया, जो कि पहले से नंगा था, आकर मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगा...

उधर मेरा मुँह लण्ड खा-खा कर थक चुका था...कि साहूकार ने अपना काम रस छोड़ दिया, मेरे मुँह में भर दिया और उठ कर पूरी कामलीला देखने लगा..

मेरी बगलों से लंड-रस बह रहा था, चूचो पर महामंत्री जी अपने हाथों से घुन्डियाँ घुमा कर मुझे मीठी सी टीस दे रहे थे, हाथ वाले लण्ड, मैं अभी भी जोर जोर से हिला रही थी, और पहलवान मेरी गाण्ड फाड़ रहा था।

उस पर चोट खाए राजा ने जोर से एक झटका मारा और मेरी चूत फाड़ डाली।

मेरी चूत से

खून नहीं निकला तो राजा बोला- तू तो खेली-खाई है, तो भी तेरे इतने नखरे हैं... ये ले ...!!!

कह कर उसने एक और ज़ोर से झटका मारा.... एक मीठी सी आह के साथ एक .. तैरती सी तरंग मेरे जिस्म में फ़ैल गई।

अब तो गाण्ड का दर्द भी जा चुका था... ऐसा लग रहा था जैसी दुनिया भर का समंदर मेरी दो टांगों के बीच समा गया है।

सभी मंत्रिगण मेरे हाल देख कर मुठ मार रहे थे...

महामंत्री मेरे चूचे और जोर से मसल मसल के दाँतों से काटने लगे...

मैं कराह रही थी.. आःह्ह्ह आआह्ह्ह्ह से दरबार गूँज रहा था...

मेरी आहें.. राजा और पहलवान को लुभा रही थी कि तभी राजा अपने हाथ से मेरी चूत का दाना छेड़ने लगा..

मैं तड़प उठी...

मैंने अपने हाथ से एक लण्ड छोड़ राजा के हाथ पर हाथ रख दिया और जोर-जोर से भींचने लगी.. राजा के हाथ को अपने दाने पर दबाने लगी..

तभी मंत्री जी ने अपना काम रस मेरे चूचों पर छोड़ दिया... और जिस्म से हट गए..

उन्होंने हटते ही मेरे होंठों पे ज़ोरदार चुम्मा दिया और बोले-. तू कमाल की है... अगर राजा का चूचे काटने का फरमान नहीं होता तो शायद में तेरे चूचे चूसने, दबाने के लिए तुझे हमेशा के लिए अपने पास रख लेता...

तभी साहूकार पिनियाते हुए आया और बोला- इसके होंठ मेरे हैं... तू क्यों चूम रहा है..?

महामंत्री बोला- अरे सबसे पहले तो तूने ही मुँह मारा है इस पर.. तू हट गया तो मैंने भी मार लिया अपना मुँह ! अब कुआँ चाहे किसी का भी हो, कुआँ पानी तो हर

किसी को पिलाता है ना...?

दोनों व्यापारियों की भी पिचकारी छूटने लगी थी, दोनों ने मेरे चेहरे पर पिचकारी दे मारी.. और बोले- चाट इसको... नहीं तो फिर से मुठ मारेगी तू हमारी...

मेरी हालत.. सचमुच की रांडों जैसी हो गई थी कि तभी पहलवान छूटने लगा और दोनों हाथों से मेरे चूचों पर जो माल गिरा था उसे मेरे चूचों पर मसलने लगा...

महामंत्री खड़े खड़े तमाशा देख रहा था.. कि कराहट से मेरा मुँह खुल गया है...

तभी राजा मेरे ऊपर आया और मेरे होंठो को उसने अपने मुँह में भर लिया, काटने-खसोटने लगा...

तभी पहलवान झड़ने लगा और उसने सारा रास मेरी गाण्ड में ही छोड़ दिया...

उसका लण्ड छोटा होकर मेरी गाण्ड से बाहर आ गया..

अब राजा को मौका मिल गया.. वो तो पहले से ही मुझ पर सवार था..

अब मेरे जिस्म पर वो हक़ ज़माने लगा, कभी मेरे चूचे मसलता, कभी मेरे मुँह में हाथ डाल देता..

वो मेरी जवानी लूट रहा था और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी..

इतने में उसने पहलवान को मेरे नीचे से हटने का मौका दिया..

अब मैं कालीन पर और राजा मेरी चूत में घुसा बैठा था...

वो अब मेरी गाण्ड में दो ऊँगलियाँ घुसाने लगा.. और मैं मदमस्त हुई अपनी जवानी का रस लुटा रही थी..

अब मैं भी मज़े लेने लगी थी.. मेरे अंदर की छिपी राण्ड अब बाहर आकर अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी... मेरी आहें दरबार में गूँज रही थी..

कि तभी अचानक राजा ने लण्ड निकाल कर मेरी गाण्ड में पेल दिया...

राजा अब झड़ने वाला था... राजा ने एक झटके से अपना लण्ड फिर मेरी चूत में पेला और झड़ने लगा...

आगे बढ़ कर मेरे होंठ चूसने लगा... उसने मेरी चूचक मसले ... और मेरे अन्दर ही झड़ गया... उसके बाद वो मुझ पर से हट गया ..

उसने सिपाहियो को मुझे खड़ा करने को बोला..

मैं कामरस में भीगी हुई थी, मेरे से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था..

जैसे तैसे मैं सिपाहियो के सहारे खड़ी हुई।

हवा में कामरस की खुशबू मुझे और चुदने को मजबूर कर रही थी...

मैं मदमस्त हुई अपनी जवानी का रस लुटा रही थी..

अब मैं भी मज़े लेने लगी थी.. मेरे अंदर की छिपी राण्ड अब बाहर आकर अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी... मेरी आहें दरबार में गूँज रही थी..

कि तभी अचानक राजा ने लण्ड निकाल कर मेरी गाण्ड में पेल दिया...

राजा अब झड़ने वाला था... राजा ने एक झटके से अपना लण्ड फिर मेरी चूत में पेला और झड़ने लगा...

आगे बढ़ कर मेरे होंठ चूसने लगा... उसने मेरी चूचक मसले ... और मेरे अन्दर ही झड़ गया... उसके बाद वो मुझ पर से हट गया ..

उसने सिपाहियो को मुझे खड़ा करने को बोला..

मैं कामरस में भीगी हुई थी, मेरे से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था..

जैसे तैसे मैं सिपाहियो के सहारे खड़ी हुई।

हवा में कामरस की खुशबू मुझे और चुदने को मजबूर कर रही थी...

सभी मर्द मुझ पर हंस रहे थे, मेरी बेबसी का मजाक बना रहे थे, राजा ठहाके लगा रहा था...

कि तभी मुझ पर जोर से पानी फेंका गया..

मेरी आधी बेहोशी चूर चूर हो गई, मेरे जिस्म से काम रस हट गया..

मेरा गोरा जिस्म सबकी निगाहों में चमकने लगा..

मेरे गीले बाल मेरी चूचियों को ढकने की नाकाम कोशिश कर रहे थे..

मेरे थरथराते होंठ पानी से भीग कर कई लण्डों को आमंत्रित कर रहे थे...

मेरी चमकती गाण्ड चुद कर और चौड़ी हो गई थी...

मेरी हालत देखने लायक थी...

सभी सभासद मेरा आँखों से बलात्कार कर रहे थे..

मैंने अपने हाथों से अपने लाल चूचों और बहती चूत को छिपाने की कोशिश की..

कि तभी दो सिपाही आए और मेरे जिस्म से मेरे हाथों को अलग कर अलग अलग दिशा में थाम लिया।

मैं नंगी खड़ी जमीन में गड़े जा रही थी..!!

सब मंत्री खड़े होकर मुझ पर थूकने लगे.. और ठहाके लगा कर हंसने लगे...

एक सिपाही दो लट्ठ लेकर आया, मोटे-मोटे लट्ठ, जो लंड से कई गुना बड़े और मोटे थे।

एक मेरी चूत में और दूसरा मेरी गाण्ड में घुसा दिया गया..

दर्द के मारे मैं चिल्लाने लगी...

तभी एक कसाई को बुलवाया गया.. ताकि वो मेरे चूचे और ज़बान काट सके..

कसाई अपने औज़ारों की धार तेज कर रहा था..

वो मेरे करीब आया और काटने के लिए उसने अपनी कटार उठाई..

कि तभी पीछे से आवाज़ आई..

राजा : रुको ...!!!

सभी सभासद बातें बनाने लगे..- यह क्या हो गया .. चिकने बदन पर राजा फिसल गया...!!!

राजा : इस लड़की ने जितना दर्द सहना था, सह चुकी... और ऐसा नहीं कि इसने सिर्फ दर्द सहा... इसने सिपाहियों के हाथों से मसले जाने पर आहें भी भरी.. और अपनी चूत की मादक सुगंध सूंघ कर यह भी चुदने को बेताब हुई.. इससे यह साबित होता है कि लड़की में जिस्म का गुरूर जरूर है.. पर यदि इसे ठीक ढंग से गर्म किया जाये तो यह 8-10 लड़कियों का मज़ा एक ही बार में दे सकती है... इसलिए मैं इसकी चूत, गाण्ड सिलने का आदेश वापिस लेता हूँ और लड़की पर छोड़ता हूँ कि वो मेरी सबसे प्यारी रखैल बनना चाहती है या गली मोहल्ले में नंगी घूमने वाली रंडी? या फिर किसी टुच्चे की रखैल बन कर अपनी जवानी बर्बाद करना चाहती

है और नौकरानी बने रहना चाहती है सारी ज़िन्दगी..!!!

मैं राजा के हाथ लुट चुकी थी और कई मर्द मुझे अब भोग चुके थे... राजा की बाकी दासियों की तरह मैं भी उसके लण्ड की दीवानी हो चुकी थी..

इसलिए मैंने उसकी रखैल बन कर रहना मंज़ूर किया।

अब राजा हर रात मेरे साथ गुज़ारता, मैं हर वक़्त नंगी रहती...मेरी अन्तर्वासना हर समय जागृत रहती...

राजा जब आता, तब मुझे चोदता...

मेरे जीवन में अब वासना.. काम .. चुदाई.. लंड के सिवा कुछ नहीं रह गया था...

समाप्त !!!!